नई दिल्ली, एजेंसी। पीएम मोदी ने रविवार को ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान’ लॉन्च किया। उन्होंने कहा कि भारत में ड्रग्स की सप्लाई दुश्मन देशों की आतंकी साजिश का हिस्सा है।
पीएम ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपने संबोधन में कहा- दुश्मन देश भारतीय युवाओं को नशे के जाल में धकेलना चाहते हैं। इस साजिश को मिलकर नाकाम करना होगा। विकसित भारत का लक्ष्य तभी पूरा होगा, जब देश का युवा शारीरिक और मानसिक रूप से फिट होने के साथ नशे से भी दूर रहेगा।
उन्होंने बताया कि अगले 100 सप्ताह तक हर रविवार कला, संस्कृति, खेल और अन्य गतिविधियों के जरिए नशा मुक्ति का संदेश देशभर में पहुंचाया जाएगा। पीएम ने युवाओं से इस अभियान का नेतृत्व करने और 2047 तक विकसित भारत बनाने में अपनी भूमिका निभाने का आह्वान किया।
पीएम की स्पीच की बड़ी बातें…
नशा सपनों और परिवार दोनों को तोड़ देता है
PM मोदी ने कहा कि नशा युवाओं का फोकस भटकाकर उन्हें धीरे-धीरे उनके सपनों से दूर ले जाता है। आज भारत के युवा स्टार्टअप, AI और स्पेस जैसे क्षेत्रों में दुनिया का नेतृत्व कर रहे हैं, लेकिन अगर कोई युवा ड्रग्स की गिरफ्त में आ जाए तो सिर्फ उसका सपना ही नहीं, पूरा परिवार हार जाता है। नशा एक पिता के सपनों और बहन की उम्मीदों को भी तोड़ देता है।
दुश्मन देश ड्रग्स के जरिए युवाओं को निशाना बना रहे
नशा केवल व्यक्ति को नहीं, बल्कि राष्ट्र की ताकत को भी कमजोर करता है। दुश्मन देश भारतीय युवाओं को ड्रग्स के जाल में फंसाने की साजिश रचते हैं। सरकार नशे के कारोबारियों और तस्करों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई कर रही है।
ड्रग्स थोड़ी देर का हाई, लेकिन जिंदगीभर का नुकसान
ड्रग्स कुछ समय के लिए हाई देता है, लेकिन करियर और फैमिली लाइफ को बर्बाद कर देता है। हमारे संतों और गुरुओं ने भी नशे से दूर रहने की सीख दी है। श्री गुरु ग्रंथ साहिब का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जो नशा इंसान की बुद्धि और विवेक छीन ले, वह उसे पतन की ओर ले जाता है।
नशे से बाहर निकले युवाओं को दूसरा मौका मिलना चाहिए
नशे की लत से लड़कर बाहर निकलने वाले असली योद्धा हैं। किसी व्यक्ति का अतीत उसकी पहचान नहीं होता, बल्कि मुश्किलों से बाहर निकलने का उसका साहस उसकी असली पहचान होता है।
ड्रग्स माफिया पर कार्रवाई कई गुना बढ़ी
देश में नशे के कारोबारियों और तस्करों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। बड़ी मात्रा में ड्रग्स जब्त की जा रही है और कार्रवाई पहले के मुकाबले कई गुना बढ़ी है। उन्होंने कहा कि यह सरकार की नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का प्रमाण है।
नशा मुक्त युवा कार्यक्रम में 1 करोड़ से ज्यादा युवा शामिल हुए
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान’ सुबह 11 बजे से शुरू हुआ। प्रधानमंत्री के संबोधन से पहले देशभर के युवाओं ने एक साथ ‘नशा मुक्त भारत’ की शपथ ली।
यह कार्यक्रम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए देशभर के 28 हजार से ज्यादा स्थानों पर एक साथ आयोजित किया गया। अभियान में 1 करोड़ से ज्यादा युवा शामिल हुए।
कार्यक्रम में 5 प्रमुख आध्यात्मिक गुरु—अम्मा, श्री श्री रविशंकर, दाजी, डॉ. चिन्मय पंड्या और स्वामी ब्रह्मविहारीजी भी वर्चुअली जुड़े। इसके अलावा कई मुख्यमंत्री और राज्यपाल भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए।
100 हफ्तों तक हर रविवार कार्यक्रम होगा
इस कार्यक्रम का मकसद युवाओं को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करना और उन्हें अपने समाज में बदलाव लाने के लिए आगे बढ़ाना है। यह अभियान अगले 100 हफ्तों तक चलेगा।
इसके तहत हर रविवार देशभर में अलग-अलग कार्यक्रम होंगे, जिनके जरिए लोगों को नशे के नुकसान बताए जाएंगे और नशा मुक्त भारत का संदेश दिया जाएगा।
नशे के खिलाफ जन आंदोलन बनाने की कोशिश
यह अभियान 125 से ज्यादा आध्यात्मिक संगठनों के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। इसके अलावा स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी, सामाजिक संस्थाएं और उद्योग संगठन भी इस अभियान से जुड़े हैं।
सरकार चाहती है कि इस अभियान में स्कूल, कॉलेज, युवा संगठन, सामाजिक संस्थाएं, उद्योग संगठन और आध्यात्मिक संस्थाएं मिलकर काम करें। उद्देश्य है कि ज्यादा से ज्यादा लोग इस मुहिम से जुड़ें और नशे के खिलाफ इसे जन आंदोलन बनाया जाए।
नई दिल्ली, एजेंसी। देश के कई राज्यों में लगातार हो रही बारिश से जनजीवन प्रभावित है। केरलम में भारी बारिश के कारण लैंडस्लाइड और बाढ़ से 8 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 8 लोग लापता हैं। सरकार ने 209 राहत शिविर बनाए हैं, जहां 5,792 लोगों को सुरक्षित पहुंचाया गया है।
कर्नाटक के शिवमोग्गा जिले में रविवार सुबह लैंडस्लाइड में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई। मृतकों में मल्लिकार्जुन (35), उनकी पत्नी नागवेणी (28) और 3 साल का बेटा संतोष शामिल हैं। हादसे के समय तीनों पहाड़ी के पास बने घर में सो रहे थे।
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग और केदार घाटी में लगातार भारी बारिश के कारण लैंडस्लाइड और चट्टानें गिरने से केदारनाथ मार्ग और हाईवे बाधित हो रहे हैं। जिससे जारी कांवड़ यात्रा के दौरान यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
वहीं, राजस्थान के 24 जिलों में बारिश हो रही है। इसकी वजह से अजमेर की सड़कों पर पानी भर गया।
केरलम के अलाप्पुझा में सड़कों पर पानी भर गया है।
केरलम के कन्नूर जिले की श्रीकंदापुरम नगर पालिका में भारी बारिश के बाद कई इलाकों में जलभराव हो गया।
जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में बादल फटने से अचानक बाढ़ आ गई। कई मकानों और दुकानों को नुकसान पहुंचा। सड़कों पर मलबा भर गया।
गुजरात के मोरबी में भारी बारिश के बाद सड़कों पर पानी भर गया।
सूरत के कई इलाकों में शनिवार को सड़कों और घरों में दो से तीन फीट पानी भर गया।
गुजरात के मोरबी में बाढ़ जैसे स्थिति हो गई। लोग गले तक पानी में तैरकर एक जगह से दूसरी जगह जा रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में फ्लैश फ्लड (अचानक आई बाढ़) के बाद कई घरों में पानी घुस गया।
तमिलनाडु: 2000 लोगों ने बारिश के लिए प्रार्थना की
तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में सूखे मौसम की वजह से तिरुचिरापल्ली के थेन्नूर में मुस्लिम समाज के 2,000 लोगों ने बारिश की विशेष प्रार्थना (सलात अल-इस्तिस्का) की। कई जिलों में तापमान 37.5°C से ऊपर बना हुआ है और राज्य भीषण जल संकट का सामना कर रहा है।
काठमांडु, एजेंसी। मशहूर पर्वतारोही निर्मल पुर्जा की पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में हिमस्खलन की चपेट में आने से मौत हो गई। उनकी ही पर्वतारोहण कंपनी एलीट एक्सपेडिशन ने इसकी पुष्टि की है।
निर्मल 30 जुलाई को काराकोरम इलाके में 8,051 मीटर ऊंची ब्रॉड पीक पर चढ़ाई कर रहे थे। इस दौरान करीब 7,000 मीटर की ऊंचाई पर यह हादसा हुआ। इसमें निर्मल समेत 10 पर्वतारोही लापता हो गए थे। इनमें छह नेपाली थे।
पुर्जा ने 2012 में ब्रिटिश नागरिकता ले ली थी, जिसके बाद उनकी नेपाली नागरिकता खत्म हो गई थी।
निर्मल पुर्जा का शव हेलिकॉप्टर से लाया गया।
30 जुलाई को ब्रॉड पीक पर चढ़ाई के दौरान हुए हिमस्खलन में 10 पर्वतारोहियों की मौत हो गई। इससे पहले 2013 में ब्रॉड पीक पर चढ़ाई के दौरान छह पर्वतारोहियों की जान गई थी।
6 महीने में 14 सबसे ऊंची चोटियां फतह कीं
नेपाल और दुनियाभर के पर्वतारोहियों के बीच ‘निम्स दाइ’ के नाम से मशहूर निर्मल पुर्जा ने 2019 में ‘प्रोजेक्ट पॉसिबल’ की शुरुआत की थी।
उनका मकसद था दुनिया की 8,000 मीटर से ऊंची सभी 14 चोटियों को सिर्फ सात महीने में फतह करना। उस समय इसे लगभग असंभव माना जा रहा था।
निर्मल पुर्जा ने यह कारनामा महज छह महीने और छह दिन में पूरा कर दिया। इसके साथ ही उन्होंने दक्षिण कोरिया के पर्वतारोही किम चांग-हो का करीब 8 साल पुराना विश्व रिकॉर्ड तोड़ दिया।
तीसरी बार ब्रॉड पीक की चढ़ाई में जान गई
निर्मल पुर्जा ने पहली बार ब्रॉड पीक को 2019 में प्रोजेक्ट पॉसिबल के दौरान फतह किया था। ब्रॉड पीक को दुनिया के सबसे मुश्किल पर्वतों में गिना जाता है।
दूसरी बार इस चोटी को उन्होंने 2023 में फतह किया। तब उन्होंने बिना सप्लीमेंट ऑक्सीजन के चढ़ाई की थी।
इस चढ़ाई की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि उन्होंने पाकिस्तान की पांचों 8,000 मीटर से ऊंची चोटियां (नंगा पर्वत, गाशरब्रुम-2, गाशरब्रुम-1, ब्रॉड पीक और के2) सिर्फ 26 दिनों में फतह कर नया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया।
तीसरी बार ब्रॉड पीक पर चढ़ाई के दौरान शिखर के पास हिमस्खलन की चपेट में आने से उनका निधन हो गया।
सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि इसी हिमस्खलन में निर्मल पुर्जा और उनके सहयोगियों की जान गई।
ब्रिटिश स्पेशल फोर्स जॉइन करने वाले पहले नेपाली
निर्मल पुर्जा का जन्म 25 जुलाई 1983 को नेपाल के म्याग्दी जिले के दाना गांव में हुआ था। उनके परिवार का सेना से गहरा नाता रहा है। कई पीढ़ियों से परिवार के लोग गोरखा रेजिमेंट में सेवा करते रहे।
उनके पिता और तीन बड़े भाई भी गोरखा सैनिक थे। ऐसे माहौल में पले-बढ़े निर्मल ने भी बचपन से ही सैनिक बनने का सपना देखा। बाद में उन्होंने इसी परंपरा को आगे बढ़ाया और ब्रिटिश सेना की गोरखा रेजिमेंट में भर्ती हो गए।
करीब छह साल तक गोरखा सैनिक के रूप में सेवा देने के बाद उन्होंने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की। वे ब्रिटिश रॉयल नेवी की स्पेशल बोट सर्विस (SBS) में शामिल होने वाले पहले नेपाली बने।
SBS ब्रिटेन की नौसेना की सबसे खतरनाक और प्रतिष्ठित स्पेशल फोर्स है। इसके सैनिक समुद्र, पहाड़, जंगल और दुश्मन के इलाके में सीक्रेट ऑपरेशन चलाने के लिए ट्रेंड होते हैं। इसमें चयन इतना मुश्किल है कि बहुत कम सैनिक इसे पूरा कर पाते हैं।
निर्मल पूर्जा ब्रिटेन की एलीट स्पेशल फोर्स SBS में टियर-1 ऑपरेटर रहे।
सपने को पूरा करने के लिए नौकरी छोड़ दी
सेना में रहते हुए निर्मल पुर्जा ने अत्यधिक ठंडे और मुश्किल इलाकों में कई स्पेशल ऑपरेशन में हिस्सा लिया। इसी दौरान उनके मन में दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों को फतह करने का ख्याल आया
साल 2012 में निर्मल पुर्जा पहली बार एवरेस्ट बेस कैंप ट्रेक पर गए थे। उस समय वे सेना में थे तभी उनके मन में एवरेस्ट की चोटी पर चढ़ने का ख्याल आया। इसके लिए उन्होंने ट्रेनिंग शुरू की।
करीब दो साल की मेहनत के बाद 2014 में उन्होंने पहली बार माउंट एवरेस्ट फतह किया। इसके बाद उन्होंने दुनिया की 8,000 मीटर से ऊंची सभी चोटियों पर चढ़ने का लक्ष्य बना लिया।
अपने इस सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने 2018 में नौकरी छोड़ दी और पूरी तरह पर्वतारोहण पर फोकस किया।
इसमें सबसे बड़ी चुनौती पैसों की थी। खर्च जुटाने के लिए उन्होंने अपना घर तक बेच दिया, ताकि दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों पर चढ़ने का सपना पूरा कर सकें।
निर्मल पुर्जा ने मई 2019 को माउंट एवरेस्ट की चोटी पर चढ़े थे।
नेटफ्लिक्स की डॉक्यूमेंट्री से दुनियाभर में मिली पहचान
2019 में छह महीने और छह दिन में दुनिया की 14 सबसे ऊंची चोटियां फतह करने के बाद निर्मल पुर्जा की कहानी पूरी दुनिया तक पहुंची। उनके इस रिकॉर्ड अभियान पर नेटफ्लिक्स ने ’14 पीक्स: नथिंग इज इम्पॉसिबल’ नाम से डॉक्यूमेंट्री बनाई।
इस डॉक्यूमेंट्री में दिखाया गया कि कैसे निर्मल पुर्जा और उनकी नेपाली टीम ने बेहद कम समय में दुनिया की सबसे कठिन चोटियों को फतह किया। इसमें उनके सामने आई खराब मौसम की चुनौतियां, मौत का खतरा, ऑक्सीजन की कमी और कई जानलेवा हालात भी दिखाए गए हैं।
डॉक्यूमेंट्री रिलीज होने के बाद इसे 191 देशों में देखा गया। इसके जरिए नेपाली पर्वतारोहियों के योगदान पर पूरी दुनिया का ध्यान गया। इससे पहले पर्वतारोहण की बड़ी उपलब्धियों में अक्सर विदेशी पर्वतारोहियों की चर्चा होती थी, जबकि नेपाली शेरपाओं और पर्वतारोहियों की भूमिका उतनी सामने नहीं आ पाती थी।
इसके बाद 2020 में निर्मल पुर्जा ने ‘बियॉन्ड पॉसिबल’ नाम से अपनी आत्मकथा भी प्रकाशित की। इस किताब में उन्होंने अपने बचपन, सैन्य जीवन, पर्वतारोहण की शुरुआत, ‘प्रोजेक्ट पॉसिबल’ और विश्व रिकॉर्ड बनाने तक के पूरे सफर को विस्तार से बताया है।
रिकॉर्ड की परवाह किए बिना पर्वतारोही का रेस्क्यू किया
निर्मल पुर्जा ने प्रोजेक्ट पॉसिबल के तहत अन्नपूर्णा-1 पर सफल चढ़ाई की। लौटे तो पता चला कि मलेशिया के डॉ. वुई किन चिन अन्नपूर्णा पर करीब 7500 फीट की ऊंचाई पर फंसे हुए हैं।
पुर्जा रिकॉर्ड की परवाह किए बगैर हेलिकॉप्टर से ऊंचाई वाले कैंप तक पहुंचे। रेस्क्यू शुरू किया। उनकी टीम करीब 4 घंटे में डॉ. चिन तक पहुंच गई। सामान्य रूप से यह दूरी करीब 16 घंटे में पूरी होती है। डॉ. चिन को नीचे लाया गया, हालांकि बाद में सिंगापुर के अस्पताल में उनकी मौत हो गई।
श्रीनगर/रायपुर। दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में 2 हिंदू मजदूरों की हत्या आतंकी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट के आतंकियों ने की है। यह जानकारी खुफिया सूत्रों ने दी है। ये फ्रंट लश्कर ए तैयबा से जुड़ा है।
सूत्रों ने बताया कि इस वारदात को अंजाम आतंकी मोहम्मद लतीफ ने दिया है। इसी ने 22 जुलाई को अनंतनाग में हेड कॉन्स्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी की लाल चौक इलाके में दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी थी।
शुक्रवार रात करीब 8:30 बजे कुलगाम के केलाम में आतंकियों ने ईंट-भट्ठे पर काम कर रहे 2 हिंदू मजदूरों को नाम पूछकर गोली मार दी। पुलिस को यह जानकारी मौके पर मौजूद दूसरे मजदूरों ने दी। दोनों मृतक छत्तीसगढ़ के रहने वाले थे।
ये हत्याएं पहलगाम जैसे पैटर्न पर की गई। 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में आतंकी हमला हुआ था। इसमें आतंकियों ने 26 पर्यटकों को उनका धर्म पूछकर मार दिया था।
लतीफ मोटरसाइकिल पर पहुंचा था
रिपोर्ट्स के मुताबिक, लतीफ और उसका साथी मोटरसाइकिल पर प्रवासी मजदूरों के पास पहुंचा था। इन्होंने पहचान पत्र चेक किए और बहुत करीब से गोलीबारी की। स्थानीय लोगों के मुताबिक, उन्होंने 10-12 राउंड फायर की आवाज सुनी।
एजेंसियों के अनुसार, लतीफ ने यह हमला इसलिए किया, ताकि वह यह संदेश दे सके कि उसका मॉड्यूल अब भी एक्टिव है और आतंकी हमले करने में सक्षम है।
खुफिया सूत्रों का मानना है कि इस गोलीबारी की साजिश सीमा पार बैठे लश्कर के हैंडलर्स ने रची। शक मुख्य रूप से सज्जाद जट्ट / सैफुल्ला पर है, जो पाकिस्तान में रहने वाला जैश का सीनियर हैंडलर है।
बीते दो-तीन साल में कश्मीर के ईंट-भट्ठों पर ऐसे ही आतंकी हमले हुए थे, जिसके बाद पुलिस ने यहां CCTV कैमरे लगाने का निर्देश दिया था। इस ईंट भट्ठे पर भी CCTV कैमरे लगे थे, जिसके फुटेज की पड़ताल की जा रही है। इस पूरे इलाके में 20 से ज्यादा ईंट भट्ठे हैं।
यह फोटो आतंकी मोहम्मद लतीफ की है।
आतंकी हमले के बाद के हालात, 3 तस्वीरें…
घायल मजदूर को पहले अनंतनाग के सरकारी मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल ले जाया गया। वहां से उसे श्रीनगर रैफर किया गया, जहां उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई।
शनिवार सुबह कुलगाम में सुरक्षा बढ़ा दी गई। लोगों से पूछताछ की जा रही है।
पुलिस और सेना के जवानों की गाड़ियां पूरे इलाके की छानबीन कर रही हैं।
यूपी-बिहार समेत 6 राज्यों से आते हैं सबसे ज्यादा मजदूर
करीब 3–5 लाख प्रवासी मजदूर हर साल मौसमी या अस्थायी काम के लिए जम्मू-कश्मीर पहुंचते हैं। इनमें सबसे ज्यादा मजदूर बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और छत्तीसगढ़ से आते हैं। ये कंस्ट्रक्शन, ईंट-भट्ठों, सड़क परियोजनाओं, बागवानी, कृषि, होटल-पर्यटन और छोटे उद्योगों में काम करते हैं।