विदेश
ब्रिटेन में सियासी भूचाल! सरकार से पहली मंत्री ने दिया इस्तीफा, PM स्टार्मर पर कुर्सी छोड़ने का दबाव बढ़ा
लंदन, एजेंसी। ब्रिटेन की राजनीति में बड़ा संकट खड़ा होता दिखाई दे रहा है। प्रधानमंत्री कीर स्टॉर्मर (Keir Starmer) पर इस्तीफे का दबाव लगातार बढ़ रहा है, लेकिन उन्होंने साफ कर दिया है कि वह पद नहीं छोड़ेंगे और सरकार चलाते रहेंगे। डाउनिंग स्ट्रीट की ओर से जारी बयान में स्टारमर ने कैबिनेट बैठक के दौरान कहा कि पार्टी के भीतर नेतृत्व चुनौती की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है और देश सरकार से काम जारी रखने की उम्मीद करता है। उन्होंने कहा, “पिछले 48 घंटे सरकार के लिए अस्थिर रहे हैं और इसका आर्थिक असर देश तथा परिवारों पर पड़ रहा है। लेकिन लेबर पार्टी में नेता को चुनौती देने की एक प्रक्रिया होती है और वह शुरू नहीं हुई है।” ब्रिटिश अखबार The Telegraph की रिपोर्ट के मुताबिक कैबिनेट के छह वरिष्ठ मंत्री चाहते हैं कि स्टारमर पद छोड़ दें। रिपोर्ट में जिन मंत्रियों का नाम सामने आया उनमें शामिल हैं:

- शबाना महमूद
- जॉन हीली
- एड मिलिबैंड
- लिसा नैंडी
- इवेट कूपर
- वेस स्ट्रीटिंग
बताया जा रहा है कि इन नेताओं ने स्टारमर से नेतृत्व परिवर्तन पर विचार करने को कहा है।
सरकार से पहला इस्तीफा
इसी बीच सरकार को बड़ा झटका तब लगा जब हाउसिंग, कम्युनिटीज और लोकल गवर्नमेंट मंत्री मियाटा फानबुले (Miatta Fahnbulleh) ने इस्तीफा दे दिया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी बयान में कहा कि सरकार ने बदलाव की रफ्तार, विजन और साहस नहीं दिखाया जिसकी जनता को उम्मीद थी।
फाहनबुलेह ने स्टारमर से “देश और पार्टी के हित में व्यवस्थित नेतृत्व परिवर्तन की समयसीमा तय करने” की अपील की। उन्होंने लिखा, “जनता अब विश्वास नहीं करती कि आप वह बदलाव ला सकते हैं जिसकी हमने उनसे वादा किया था।”
डाउनिंग स्ट्रीट में बढ़ी हलचल
मंगलवार सुबह डाउनिंग स्ट्रीट में लगातार मंत्रियों की आवाजाही देखी गई। ट्रांसपोर्ट सेक्रेटरी Heidi Alexander और ट्रेजरी मंत्री James Murray भी नंबर 10 पहुंचे, लेकिन उन्होंने मीडिया के सवालों का जवाब नहीं दिया। इसी दौरान कई लेबर सांसदों ने भी सार्वजनिक रूप से स्टारमर से पद छोड़ने की मांग शुरू कर दी है।
चुनावी नतीजों के बाद संकट
हालिया चुनावी नतीजों के बाद लेबर पार्टी के अंदर असंतोष बढ़ा है। कई नेताओं का मानना है कि पार्टी जनता की उम्मीदों के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाई और इससे सरकार की विश्वसनीयता कमजोर हुई है। अब नजर इस बात पर है कि क्या लेबर पार्टी के भीतर औपचारिक नेतृत्व चुनौती शुरू होती है या स्टारमर किसी समझौते के जरिए अपनी कुर्सी बचाने में सफल रहते हैं।
देश
‘जो कोर्ट-कचहरी का खर्च नहीं उठा सकते, उन्हें भी मिले न्याय’, CJI सूर्यकांत ने लंदन के मंच से कह दी बड़ी बात, बोले- न्याय केवल अमीरों का हक नहीं
नई दिल्ली/लंदन, एजेंसी। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कहा है कि न्याय व्यवस्था का उद्देश्य केवल उन लोगों के अधिकारों की रक्षा करना नहीं है जो मुकदमेबाजी का खर्च उठा सकते हैं, बल्कि हर नागरिक को न्याय सुलभ कराना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि न्यायपालिका को ऐसा संस्थान होना चाहिए, जिसका संरक्षण समाज के अंतिम व्यक्ति तक महसूस हो।

लंदन के कार्यक्रम में सूर्यकांत ने रखे अपने विचार
लंदन स्थित क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान छात्रों से संवाद करते हुए CJI सूर्यकांत ने न्यायपालिका में जनता के विश्वास, न्याय तक पहुंच और कानूनी व्यवस्था के भविष्य जैसे विषयों पर अपने विचार साझा किए।
‘जनता का भरोसा पारदर्शिता से मिलता है, पद से नहीं’
उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतंत्र में जनता का भरोसा अपने आप नहीं मिलता, बल्कि पारदर्शिता, निरंतरता और आत्म-सुधार के माध्यम से अर्जित करना पड़ता है। न्यायपालिका संविधान की अंतिम संरक्षक है, लेकिन उसे संविधान और नागरिकों दोनों के प्रति जवाबदेह रहना चाहिए।
‘अदालतों में एकरूपता से बढ़ेगा न्याय व्यवस्था पर विश्वास’
सीजेआई ने एक समान राष्ट्रीय न्यायिक नीति की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि अदालतों के फैसलों में एकरूपता आने से लोगों का न्याय व्यवस्था पर विश्वास मजबूत होता है और कानून के शासन को मजबूती मिलती है।
प्रौद्योगिकी की भूमिका पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि तकनीक ने न्याय तक पहुंच को आसान बनाया है। हालांकि न्यायपालिका की जिम्मेदारी है कि नवाचार को अपनाते समय निष्पक्षता, सुलभता और समान न्याय के संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखा जाए। उन्होंने कहा कि एक न्यायाधीश के लिए सबसे संतोषजनक क्षण वह होता है जब किसी व्यक्ति को यह महसूस हो कि उसकी बात सुनी गई और उसे न्याय मिला।
देश
PoK के गिलगित-बाल्टिस्तान में मतदान पर भड़का भारत; कहा-अवैध कब्जे को वैध नहीं बना सकता पाकिस्तान
नई दिल्ली, एजेंसी। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र में तथाकथित विधानसभा के चुनाव के लिए रविवार को मतदान जारी है। भारत ने तथाकथित गिलगित-बाल्टिस्तान विधानसभा चुनाव को लेकर पाकिस्तान के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया है और दोहराया है कि यह क्षेत्र भारत का अभिन्न हिस्सा है, जिस पर पाकिस्तान ने ”अवैध और बलपूर्वक” कब्जा कर रखा है। नयी दिल्ली ने अपने पुराने और स्पष्ट रुख को दोहराते हुए कहा कि जम्मू कश्मीर तथा लद्दाख के संपूर्ण केंद्रशासित प्रदेश, जिनमें तथाकथित गिलगित-बाल्टिस्तान भी शामिल है, 1947 में जम्मू कश्मीर के भारत में ”पूर्ण, वैध और अपरिवर्तनीय विलय” के परिणामस्वरूप भारत के अभिन्न अंग हैं।

मतदान सुबह आठ बजे शुरू हुआ और शाम पांच बजे तक जारी रहेगा। अधिकारियों द्वारा जारी सूची के अनुसार, पूरे क्षेत्र में कुल 1,391 मतदान केंद्र स्थापित किए गए हैं। इनमें 488 को सामान्य, 349 को संवेदनशील और 551 को अतिसंवेदनशील श्रेणी में रखा गया है। तथाकथित विधानसभा में कुल 33 सीट हैं। इनमें से 24 सीट पर प्रत्यक्ष चुनाव के जरिए प्रतिनिधि चुने जाते हैं, जबकि आठ सीट महिलाओं, तकनीकी विशेषज्ञों और पेशेवरों के लिए आरक्षित हैं। अतीत में इस क्षेत्र में आमतौर पर इस्लामाबाद में सत्तारूढ़ दल ही इन तथाकथित चुनावों में जीत हासिल करता रहा है।
खेल
20 साल के प्रज्ञानानंदा ने रचा इतिहास, प्रतिष्ठित ‘नार्वे शतरंज’ का खिताब जीतने वाले बने पहले भारतीय
ओस्लो/नई दिल्ली/चेन्नई, एजेंसी। भारतीय ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञानानंदा (R Praggnanandhaa) ने वैश्विक शतरंज की दुनिया में एक नया इतिहास रच दिया है। उन्होंने सबसे कड़े और प्रतिष्ठित टूर्नामेंटों में से एक ‘नार्वे शतरंज’ (Norway Chess) का खिताब अपने नाम कर लिया है। वह इस महामुकाबले को जीतने वाले देश के पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। अंतिम दौर (लास्ट राउंड) के करो या मरो के मुकाबले में चेन्नई के इस 20 वर्षीय युवा खिलाड़ी ने जर्मनी के दिग्गज विन्सेंट कीमर को क्लासिकल बाजी में मात देकर पूरे 3 अंक बटोरे और एलीट शतरंज की सबसे चमचमाती ट्रॉफी अपने नाम कर ली। प्रज्ञानानंदा ने आखिरी दिन की शुरुआत 15 अंक के साथ तीसरे स्थान से की।

उन्होंने सबसे अहम मौके पर बेहतरीन खेल दिखाया और क्लासिकल बाजी में जीत हासिल करके पूरे तीन अंक बटोरे। इस तरह वे 18 अंक पर पहुंचे और एलीट शतरंज की सबसे प्रतिष्ठित ट्रॉफियों में से एक अपने नाम की। चेन्नई के इस 20 वर्षीय खिलाड़ी ने वह उपलब्धि हासिल की जो 2013 में टूर्नामेंट की शुरुआत के बाद से भारतीय शतरंज के दिग्गज विश्वनाथन आनंद और मौजूदा विश्व चैंपियन डी गुकेश जैसे खिलाड़ी भी हासिल नहीं कर पाए थे।

नार्वे शतरंज में दूसरी बार हिस्सा ले रहे प्रज्ञानानंदा की शुरुआत धीमी रही थी लेकिन टूर्नामेंट के दूसरे हाफ में उन्होंने रफ्तार पकड़ी और लगातार चार जीत हासिल की। प्रज्ञानानंदा के अभियान की सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने नार्वे शतरंज के सात बार के चैंपियन और दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन को क्लासिकल बाजी में दो बार हराया। मौजूदा विश्व चैंपियन गुकेश के अंतिम चरण में खिताब की दौड़ से बाहर होने के बाद प्रज्ञानानंदा ने भारत की उम्मीदों को जीवंत रखा और आखिरकार खिताब अपने नाम किया।
अमेरिकी ग्रैंडमास्टर वेस्ली सो आखिरी दौर से पहले 15.5 अंक के साथ सबसे आगे थे लेकिन अलीरेजा फिरोजा के खिलाफ उनकी क्लासिकल बाजी ड्रॉ रही जिससे मुकाबला आर्मागेडन टाईब्रेक में चला गया। इस नतीजे ने प्रज्ञानानंदा के लिए रास्ता खोल दिया। उन्हें पता था कि कीमर के खिलाफ क्लासिकल बाजी में जीत उन्हें अंक तालिका में सबसे ऊपर पहुंचा देगी और यादगार खिताब दिला देगी।

हालांकि वेस्ली सो ने टाईब्रेक जीत लिया लेकिन उस जीत से उन्हें सिर्फ डेढ़ अंक मिला जिससे उनके कुल अंक 17 रहे जबकि प्रज्ञानानंदा ने 18 अंक के साथ खिताब जीता। खिताब जीतने की उम्मीद के साथ आखिरी दौर में उतरे अलीरेजा 15.5 अंक के साथ तीसरे स्थान पर रहे। मैच के बाद प्रज्ञानानंदा ने बताया कि चेन्नई में अपनी मां से हुई बातचीत ने उनका हौसला बढ़ाया था।
उन्होंने कहा, उन्होंने मेरे से कहा था कि जून का महीना मेरे लिए अच्छा रहेगा और उनकी यह भविष्यवाणी सच साबित हुई। प्रज्ञानंदा ने कहा, मैं एक जून को अलीरेजा के खिलाफ मुकाबले से पहले अपनी मां से बात कर रहा था और वह मुझे कह रही थी, ‘यह नया महीना है, तुम अच्छा खेलोगे।’ यह वैसी ही बात है जो मां हमेशा कहती हैं और फिर मैंने ये चार बाजी जीतीं। मुझे लगता है कि उन्हें कुछ पता था।
इसके बाद प्रज्ञानानंदा ने लगातार चार जीत हासिल कीं। यहां तक कि कार्लसन ने भी प्रज्ञानानंदा की जमकर तारीफ की और पूरे टूर्नामेंट में इस युवा भारतीय खिलाड़ी के प्रदर्शन को ‘शानदार’ बताया। कार्लसन ने प्रसारणकर्ता से कहा, ”यह वाकई कमाल की बात है। यह बहुत ही निर्णायक और जबरदस्त प्रदर्शन था और इससे पता चलता है कि अगर मैं भी इसी तरह का नतीजा हासिल करता तो मेरे लिए भी यह मुमकिन हो सकता था लेकिन हां यह अविश्वसनीय है।

वह एक जबरदस्त फाइटर है और उसे इसका इनाम मिलते देखना अच्छा लगता है। इस बीच गुकेश का निराशाजनक सफर जारी रहा। टूर्नामेंट में उनकी तीसरी मौजूदगी भी उस कामयाबी के बिना खत्म हुई जिसकी उन्हें उम्मीद थी विशेषकर ऐसे साल में जब उन्हें चैलेंजर जावोखिर सिंदारोव के खिलाफ अपने विश्व खिताब का बचाव करना है।
आखिरी दौर में सफेद मोहरों से खेलते हुए कार्लसन ने क्लासिकल बाजी में 20 साल के गुकेश को हराकर तीन अंक हासिल किए। नार्वे का यह दिग्गज हालांकि इस जीत के बावजूद 13 अंक के साथ पांचवें स्थान पर रहा।
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