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दीपका

प्रगति नगर दीपका हुआ जल मग्न, secl प्रबंधन ने फोरमैन को किया गया निलंबित.।

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दीपका :– जिला कोरबा का दीपका क्षेत्र के प्रगति नगर की ये स्थिति कोई नई नहीं है, यहां हर साल बरसात के मौसम में बारिश के वजह से जलभराव हो जाता है। इस बार भी लगातार बारिश होने के वजह से पूरे क्षेत्र में भारी जलभराव देखा गया, जिसके बाद SECL दीपका प्रबंधन ने विद्युत एवं यांत्रिकी विभाग में पदस्थ फोरमैन योगेश सिंह को समय से पंप न चलाने का बात कहते हुए निलंबित कर दिया है।

जानकारों और विभागीय सूत्रों की मानें तो बताया जा रहा है कि तेज बारिश के बाद बिजली कनेक्शन ही काट दिया गया था, तो पंप चालू कैसे होगा और डीजल पंप भी मेंटेनेंस के अभाव में पूरी तरह से तैयार नहीं था, बैटरी डाउन होने के कारण वह स्टार्ट नहीं हो पाया जिस वजह से जल भराव हुआ। क्षेत्रीय कर्मचारी और स्थानीय लोगो ने आरोप लगाते हुए कहा कि फोरमैन पर कार्रवाई कर प्रबंधन ने खुद को बचाने की कोशिश कर रही है। जलभराव की समस्या कोई नई नहीं, यह हर साल होती है। इसके बावजूद प्रबंधन द्वारा समय रहते व्यवस्था न करना, उपकरणों का ठीक से रखरखाव न कराना ये प्रबंधन की लापरवाही है,, और अपने बचाव के लिए जिम्मेदार कर्मचारी को निलंबित कर एकतरफा कार्रवाई करना सही नहीं है।इस कार्रवाई के बाद विभाग में भी नाराजगी का माहौल है।

कर्मचारियों का कहना है कि जब व्यवस्थाएं ही दुरुस्त नहीं होंगी, और ऐसे ही अपने बचाव के लिए निलंबित किया जाएगा, तो जिम्मेदारी कैसे निभाई जाएगी।

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कोरबा

SECL दीपका प्रबंधन और भूविस्थापित किसान कल्याण समिति के बीच सार्थक वार्ता, मांगों पर त्वरित कार्रवाई का मिला ठोस आश्वासन

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जीपीएस बाध्यता समाप्त कर लंबित मुआवजा, Rs.5 लाख अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि और पुनर्वास ग्रामों में बुनियादी सुविधाओं का मुद्दा प्रमुखता से उठा

1986 से रोजगार से वंचित परिवारों की पुनः समीक्षा, स्वरोजगार के लिए Rs.20 लाख तक की निविदा सीमा और समान अवसर देने की मांग

आंदोलन नहीं, संवाद और समाधान प्राथमिकता—सपुरन कुलदीप (अध्यक्ष)

कोरबा/दीपका। एसईसीएल दीपका क्षेत्र के सभागार में महाप्रबंधक (CGM) शरद तिवारी खनन परीयोजना अधिकारी (GM) नागेन्द्र साहू भू-राजस्व अधिकारी सुशील साहू एवं लैंड एंड रिहैबिलिटेशन (L&R) विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ऊर्जाधानी भूविस्थापित किसान कल्याण समिति के अध्यक्ष सपुरन कुलदीप के नेतृत्व में भूविस्थापितों एवं प्रभावित ग्रामों के प्रतिनिधियों की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और निर्णयकारी बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में मुआवजा पुनर्वास रोजगार आजीविका और विस्थापित गांवों में बुनियादी सुविधाओं से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर बिंदुवार विस्तार से चर्चा की गई ।

बैठक में समिति के वरिष्ठ पदाधिकारी बसंत कुमार कंवर, विजय पाल सिंह तंवर, अनुसुईया राठौर, रविन्द्र जगत, दीपक कुमार यादव, ललित महिलांगे, ईश्वर आमरेक्सन, रामप्यारी चैनपुर, सरपंच विनोद टेकाम, राजेश जगत, ग्रामीणों में चंदलाल, जगदीश, परवेश, सुरेश, परदेशी, समय, हीरा सिंह, मंगली बाई, संजू, अमित कुमार, सनीज कुमार, मिलौतिन बाई, राय सिंह, दुर्गेश, सरिता धीवर, हरनारायण सहित ग्राम सुवाभोड़ी मलगांव झाबर सिरकी खुर्द बेलटिकरी एवं चैनपुर सहित अन्य अर्जित ग्रामों के प्रतिनिधि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे ।

बैठक में उठे मुख्य मुद्दे एवं माँगें

  1. सुवाभोड़ी के 64 परिवारों का लंबित मुआवजा:- सुवाभोड़ी के स्वीकृत 64 परिवारों के मकान व परिसंपत्तियों का भुगतान जीपीएस (GPS) की बाध्यता के कारण अटका हुआ है समिति ने इस बाध्यता को तत्काल समाप्त कर पात्र परिवारों को शीघ्र भुगतान की मांग की ।
  2. पुनर्वास राशि एवं अतिरिक्त प्रोत्साहन:-
  3. Rs.10 लाख की निर्धारित बसाहट राशि के अतिरिक्त देय Rs.5 लाख की प्रोत्साहन राशि का अविलंब भुगतान किया जाए ।
  4. मकान ध्वस्तीकरण के समय बालिग हो चुके युवक-युवतियों को नियमानुसार पृथक बसाहट का लाभ मिले ।
  5. पेड़-पौधे शौचालय बाउंड्रीवाल पटाव जैसी छूटी हुई परिसंपत्तियों का अविलंब मुआवजा दिया जाए ।
  6. मृत व्यक्तियों के नाम स्वीकृत राशि का भुगतान उनके वैध वारिसों को पारदर्शी तरीके से किया जाए ।
  7. 1986 के लंबित रोजगार मामलों की समीक्षा:- 1986 में अर्जित भूमि के बदले कई परिवार अलग-अलग खातों को जोड़ने के कारण रोजगार से वंचित रह गए समिति ने मांग की कि तत्कालीन प्रावधानों के तहत इन मामलों का पुनर्मूल्यांकन कर पात्र भूविस्थापितों को तत्काल रोजगार दिया जाए।
  8. स्थानिक व्यवसाय व निविदा सीमा में वृद्धि:- भूविस्थापितों को स्वरोजगार और आजीविका से जोड़ने के लिए निविदाओं (Tenders) की सीमा Rs.5 लाख से बढ़ाकर Rs.20 लाख की जाए तथा स्थानीय ठेकेदारों से विभागीय स्तर पर हो रहे भेदभाव को समाप्त कर समान अवसर दिए जाएं ।
  9. पुनर्वास ग्रामों में बुनियादी सुविधाएं व पर्यावरण सुरक्षा:- विस्थापित गांवों में पक्की सड़क स्वच्छ पेयजल सुदृढ़ नाली स्ट्रीट लाइट और स्वास्थ्य-शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं प्राथमिकता पर उपलब्ध कराई जाएं साथ ही खनन से उत्पन्न पर्यावरणीय दुष्प्रभावों पर नियंत्रण के उपाय किए जाएं ।

प्रबंधन का सकारात्मक रुख और आश्वासन

एसईसीएल दीपका के महाप्रबंधक शरद तिवारी ने समिति द्वारा प्रस्तुत सभी मांगों को गंभीरता से सुना और सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया उन्होंने कहा भूविस्थापित परिवार अपनी समस्याओं के समाधान के लिए किसी आंदोलन का इंतजार न करें वे सीधे मुझसे मिलकर अपनी बात रख सकते हैं प्रबंधन स्वयं पुनर्वास ग्रामों का दौरा कर जमीनी स्थिति का जायजा लेगा और निर्धारित समय-सीमा के भीतर समस्याओं का निराकरण सुनिश्चित करेगा ।

संवाद से समाधान का पक्षधर है संगठन—सपुरन कुलदीप

ऊर्जाधानी भूविस्थापित किसान कल्याण समिति के अध्यक्ष सपुरन कुलदीप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि समिति अकारण विरोध या आंदोलन के पक्ष में नहीं है बल्कि निरंतर संवाद और समयबद्ध समाधान चाहती है ।

उन्होंने आगे कहा देश की ऊर्जा जरूरतों और औद्योगिक प्रगति के लिए भूविस्थापितों ने अपनी जमीन घर और आजीविका की बलि दी है ऐसे में उनकी जायज मांगों और बुनियादी अधिकारों की पूर्ति करना प्रबंधन का प्राथमिक नैतिक व कानूनी दायित्व है हमें उम्मीद है कि प्रबंधन केवल आश्वासनों तक सीमित न रहकर इन प्रस्तावों पर त्वरित और ठोस निर्णय लेगा।

यह बैठक पूर्व में समिति द्वारा आयोजित ग्रामीण बैठकों से प्राप्त समस्याओं के आधार पर एसईसीएल प्रबंधन द्वारा बुलाई गई थी जिसमें प्रभावित ग्रामीणों को अपनी बात रखने का पारदर्शी मंच मिला ।

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कोरबा

SECL और प्रशासन की तानाशाही के खिलाफ भू-विस्थापितों ने आज अंडीकछार में महासम्मेलन कर कई अहम निर्णय व प्रस्ताव पारित किये

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40 वर्षों बाद भी रोजगार और मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे सुवाभोड़ी सिरकी खुर्द चैनपुर झाबर और बेलटिकरी के ग्रामीण

ऊर्जाधानी भूविस्थापित किसान कल्याण समिति के बैनर तले संपन्न हुआ महासम्मेलन

कोरबा/दीपका। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड SECL और स्थानीय प्रशासन की तानाशाहीपूर्ण नीतियों के कारण दीपका क्षेत्र के भू-विस्थापित परिवारों का जीवन संकट में आ पड़ा है भूमि अर्जन और विस्थापन के 40 वर्ष बीत जाने के बाद भी विस्थापितों की समस्याओं का अंत नहीं हो सका है और रोजगार व पुनर्वास की मांगें आज भी अधर में लटकी हुई हैं एसईसीएल प्रबंधन की इस वादाखिलाफी और उपेक्षा के विरोध में ऊर्जाधानी भूविस्थापित किसान कल्याण समिति के तत्वाधान में आज 22 अक्टूबर 2026 गुरुवार को प्रातः 11:00 बजे ग्राम पंचायत अंडीकछार स्थित टिनठिकिया स्थान पर एक विशाल भू-विस्थापित महासम्मेलन का आयोजन किया गया ।

इस महासम्मेलन में दीपका क्षेत्र के अर्जित एवं पुनर्वासित गांवों सुवाभोड़ी सिरकी खुर्द चैनपुर झाबर और बेलटिकरी के प्रभावित ग्रामीण युवा बुजुर्ग और महिलाएं एकजुट होकर एसईसीएल प्रशासन के खिलाफ हुंकार भरें ।

महासम्मेलन के मुख्य मुद्दे

ग्राम सुवाभोड़ी की प्रमुख मांगें पर लंबित मुआवजा एवं परिसंपत्तियों का अविलंब भुगतान 5 लाख की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि बसाहट पात्रता दस्तावेजों में व्याप्त नाम व जाति संबंधी त्रुटियों का तत्काल सुधार स्थानीय युवाओं एवं महिलाओं को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार का अधिकार के विषयों पर विशेष चर्चा पर प्रस्ताव पारित किया गया !

इसके साथ ही पुनर्वासित क्षेत्रों की मूलभूत सुविधाएं सिरकी खुर्द चैनपुर झाबर बेलटिकरी ग्रामीणों को भूमि पट्टे का आवंटन पक्की सड़कें नाली पुल-पुलिया गार्डन सामुदायिक भवन मुक्तिधाम तालाब और स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी सुविधाएं लंबित मुआवजा व पुनर्वास नीति के तहत सभी पात्रताओं का पारदर्शी निपटारा भू-विस्थापित कोटा टेंडर व स्वरोजगार अधिकार वैकल्पिक स्वरोजगार हेतु निर्धारित 5 लाख की टेंडर सीमा को बढ़ाकर 20 लाख स्थानीय भू-विस्थापित ठेकेदारों के साथ किए जा रहे भेदभाव को तुरंत समाप्त के संबंध में भी निर्णय व प्रस्ताव पारित किये गये !

संगठन का आह्वान

ऊर्जाधानी भूविस्थापित किसान कल्याण समिति के अध्यक्ष सपुरन कुलदीप ने दीपका क्षेत्र के समस्त प्रभावित ग्रामों के निवासियों माताओं-बहनों बुजुर्गों और विशेष रूप से युवाओं से अपील की है कि वे अपने हक और अधिकार की इस निर्णायक लड़ाई में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें।

अध्यक्ष सपुरन कुलदीप ने कहा वर्षों से अपनी जमीन देकर देश को रोशन करने वाले किसान आज अपने ही हक के लिए तरस रहे हैं एसईसीएल की इस तानाशाही रवैये को अब बर्दाश्त नहीं की जायेगा और महासम्मेलन में अन्य समस्याओं का भी ऐतिहासिक निर्णय व प्रस्ताव लिया गया तथा इसी मंच से एसईसीएल प्रबंधन के खिलाफ आगामी लड़ाई व संघर्ष की तैयारी की जाएगी !

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कोरबा

इरकॉन व राइट कंपनी और रेलवे प्रबंधन की वादाखिलाफी से कृष्णा नगर के वार्डवासियों में आक्रोश, आंदोलन की दी चेतावनी

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कोरबा/दीपका। दीपका, गेवरा-पेंड्रा रेल लाइन से जोड़ने वाली कृष्णा नगर में एसईसीएल के कोयला लदान (कोल लोडिंग) हेतु बिछाई जा रही रेल लाइन के निर्माण कार्य में इरकॉन व राइट कंपनी और रेलवे प्रबंधन द्वारा की जा रही वादाखिलाफी को लेकर वार्डवासियों में भारी नाराजगी और आक्रोश व्याप्त है ।

पूर्व में कृष्णा नगर के निवासियों और राजस्व विभाग के समक्ष अधिकारी की उपस्थिति में मौखिक रूप से रेलवे प्रबंधन के बीच यह स्पष्ट समझौता व भरोसा दिलाया गया था कि वार्ड की मूलभूत सुविधाओं जैसे पक्की सड़क, नाली, मंदिर एवं सांस्कृतिक स्टेज भवन का निर्माण कार्य पहले पूरा किया जाएगा, उसके बाद ही रेल लाइन बिछाने के काम को प्राथमिकता दी जाएगी, परंतु इरकॉन व राइट कंपनी द्वारा समझौते और वार्डवासियों के मौलिक अधिकारों की खुलेआम अनदेखी कर निर्माण कार्य तेजी से कराया जा रहा है ।

इसी संदर्भ में कृष्णा नगर वार्ड क्रमांक 07 के निवासियों की एक विशेष एवं आवश्यक बैठक आहुत की गई। बैठक में वार्ड की लंबित समस्याओं और अधूरे पड़े विकास कार्यों पर गहन चर्चा-परिचर्चा की गई ।

बैठक में उठाई गईं प्रमुख समस्याएँ

  1. अधूरा सड़क व ब्रिज निर्माण:- शासकीय माध्यमिक शाला से दीपका की ओर जाने वाली रेल लाइन के बीच आवागमन हेतु अंडरग्राउंड ब्रिज का निर्माण तो किया गया है, परंतु स्कूल से लेकर ब्रिज तक की सड़क का निर्माण कार्य इरकॉन व राइट कंपनी द्वारा आधा-अधूरा छोड़ दिया गया है ।
  2. नालियों का निर्माण शून्य:- वार्ड में जल निकासी हेतु नालियों का निर्माण कार्य अब तक शुरू ही नहीं किया गया है, जिससे वार्ड में गंदगी और जलजमाव की समस्या बनी हुई है ।
  3. दीपका बस्ती मार्ग पर उपेक्षा:- कृष्णा नगर को दीपका बस्ती से जोड़ने वाले रास्ते (ट्रांसफार्मर के समीप) स्थित दूसरे अंडर ब्रिज का कार्य भी पूरा हो गया है, लेकिन इरकॉन व राइट कंपनी के द्वारा सड़क का काम अधूरा छोड़ दिया गया है, जिससे स्थानीय लोगों का आवागमन बेहद जोखिमभरा हो गया है ।

ज्ञापन सौंपने एवं आंदोलन का निर्णय

बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि इन सभी जनसमस्याओं व मौलिक अधिकारों की पुर्नबहाली हेतु रेलवे प्रबंधन एवं संबंधित जिम्मेदार विभागों को जल्द ही एक ज्ञापन सौंपा जाएगा ।

वार्डवासियों ने शासन-प्रशासन और रेलवे प्रबंधन को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि इरकॉन व राइट कंपनी द्वारा कृष्णा नगर की मूलभूत व्यवस्थाओं को शीघ्र सुनिश्चित नहीं किया गया तो वे आंदोलन के लिए मजबूरन विवश होना पड़ेगा। आंदोलन के दौरान होने वाली किसी भी अप्रिय स्थिति विधि-व्यवस्था व व्यवधान की संपूर्ण जिम्मेदारी रेलवे प्रबंधन एवं इरकॉन व राइट कंपनी की होगी ।

इस महत्वपूर्ण बैठक में प्रमुख रूप से मूलचंद, मो. मंसूर, ललित महिलांगे , लक्ष्मण गुप्ता, मो. सरताज कुरैशी, कन्हैया, पवन गुप्ता, प्रभाष तांती, सोहन पंडित, मो. शमीम अंसारी, राधे बरेठ, सुनील शर्मा, शंभू लोहार, मो. अशरफ दुलार बेक, छोटेलाल, मीना थापा, गीता महंत, जगत बाई चौहान, उमा महंत, सोना गोस्वामी, सती देवी महंत, सीमा देवी शर्मा, बालमती बारिया, इफाना कुरैशी सहित बड़ी संख्या में कृष्णा नगर के वार्डवासी उपस्थित थे l

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