अजमेर , एजेंसी। अजमेर की ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में संकट मोचन महादेव मंदिर होने का दावा किया गया है। अजमेर सिविल कोर्ट में लगाई गई याचिका को कोर्ट ने सुनने योग्य मानते हुए सुनवाई की अगली तारीख 20 दिसंबर तय की है। याचिका दायर करने वाले हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने मुख्य रूप से 3 आधार बताए हैं।
याचिकाकर्ता बोला- तथ्य साबित करते हैं कि दरगाह की जगह पहले मंदिर था उन्होंने कहा कि 2 साल की रिसर्च और रिटायर्ड जज हरबिलास शारदा की किताब में दिए गए तथ्यों के आधार पर याचिका दायर की है। किताब में इसका जिक्र है कि यहां ब्राह्मण दंपती रहते थे और दरगाह स्थल पर बने महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना करते थे। इसके अलावा कई अन्य तथ्य हैं, जो साबित करते हैं कि दरगाह से पहले यहां शिव मंदिर रहा था।
याचिकाकर्ता ने कहा- रिटायर्ड जज हरबिलास शारदा की किताब में दिए गए तथ्यों को आधार बनाकर याचिका लगाई है।
20 दिसंबर तक पक्ष रखने के लिए उपस्थित होना है कोर्ट ने अल्पसंख्यक मंत्रालय, दरगाह कमेटी और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) को नोटिस जारी किया है। 20 दिसंबर को उन्हें अपना पक्ष लेकर उपस्थित होना है।
दरगाह दीवान जैनुअल आबेदीन की ओर से उपलब्ध कराई गई तस्वीर। यह तस्वीर किसी पेंटर ने हाथ से बनाई थी।
इस मामले को लेकर अजमेर दरगाह प्रमुख उत्तराधिकारी और ख्वाजा साहब के वंशज नसरुद्दीन चिश्ती ने अपना पक्ष रखा है। उन्होंने कहा- ऐसी हरकतें देश की एकता के लिए खतरा हैं। यहां तो हिंदू राजाओं ने भी अकीदत की है। दरगाह में मौजूद कटहरा जयपुर के महाराजा ने भेंट किया है। 1950 के सर्वे में स्पष्ट हो चुका है कि दरगाह में कोई हिंदू मंदिर नहीं था।
दैनिक भास्कर में पढ़िए अजमेर की ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह को लेकर पहली बार पेश किए गए दावे की पूरी कहानी-
2 साल की रिसर्च के बाद किया दावा हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने बताया- मैंने अजमेर के लोगों को कहते सुना था और आसपास कई बार ये दावे किए गए थे कि दरगाह में पहले संकट मोचक महादेव का मंदिर था। इसकी बनावट को भी लोग संदेह की दृष्टि से देखते थे।
इसे लेकर मैंने 2 साल पहले रिसर्च शुरू की। गूगल पर देखा और कई किताबों को पढ़ने की कोशिश की। इसी दौरान मुझे अजमेर के प्रतिष्ठित जज हरबिलास शारदा की किताब अजमेर : हिस्टोरिकल एंड डिस्क्रिप्टिव के बारे में जानकारी मिली। इसमें दावा किया गया था कि यहां कभी संकट मोचन महादेव का मंदिर हुआ करता था।
दरगाह दीवान जैनुअल आबेदीन के पास इस तरह की कई तस्वीरें हैं।
अजमेर के लोग ही कहते थे यहां हिंदू मंदिर है गुप्ता ने बताया- अजमेर आता तो लोग दबी जुबान में कहते थे कि यहां हिंदू मंदिर रहा है। दरगाह के दरवाजों और इसकी बिल्डिंग पर बनी नक्काशी हिंदू मंदिरों की याद दिलाती है।
गुप्ता कहते हैं- जब मैंने हरबिलास शारदा की किताब को पढ़ा तो उसमें साफ-साफ लिखा था कि यहां पहले ब्राह्मण दंपती रहते थे। यह दंपती सुबह चंदन से महादेव का तिलक करते थे और जलाभिषेक करते थे।
हरबिलास शारदा कोई आम व्यक्ति नहीं थे। वे जोधपुर हाईकोर्ट में सीनियर जज के रूप में रहे। वह अजमेर मेरवाड़ा (1892) के न्यायिक विभाग में भी रहे। यहां अजमेर में तो उनके नाम से हरबिलास शारदा मार्ग भी है। उन्होंने 1911 में यह किताब लिखी थी। गुप्ता ने दावा किया कि यह किताब गलत साबित नहीं हो सकती है।
हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता के दावे के तीन आधार…
दरवाजों की बनावट व नक्काशी : दरगाह में मौजूद बुलंद दरवाजे की बनावट हिंदू मंदिरों के दरवाजे की तरह है। नक्काशी को देखकर भी अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां पहले हिंदू मंदिर रहा होगा।
ऊपरी स्ट्रक्चर : दरगाह के ऊपरी स्ट्रक्चर देखेंगे तो यहां भी हिंदू मंदिरों के अवशेष जैसी चीजें दिखती हैं। गुम्बदों को देखकर आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि किसी हिंदू मंदिर को तोड़कर यहां दरगाह का निर्माण करवाया गया है।
पानी और झरने : जहां-जहां शिव मंदिर हैं, वहां पानी और झरने जरूर होते हैं। यहां (अजमेर दरगाह) भी ऐसा ही है।
गुप्ता कहते हैं- मुस्लिम आक्रांता जब एक विद्यालय को तोड़कर ढाई दिन का झोपड़ा बना सकते हैं तो फिर शिव मंदिर तो जरूर तोड़ा होगा। उन्होंने कहा- यहां तहखाने में शिव मंदिर का दावा है, क्योंकि शिव मंदिर के ऊपर ही दरगाह का निर्माण किया गया है।
भगवान श्री संकट मोचन महादेव विराजमान बनाम दरगाह कमेटी हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता के वकील रामस्वरूप बिश्नोई ने बताया- सिविल जज मनमोहन चंदेल की बेंच ने मामले की सुनवाई को लेकर आगे की तारीख दी है। मामला भगवान श्री संकट मोचन महादेव विराजमान बनाम दरगाह कमेटी के बीच है। इसमें पहले 750 पेजों का वाद पेश किया गया था। बुधवार को संशोधित करके 38 पेजों का किया गया। इसके बाद इसे सिविल कोर्ट में लगाया गया था।
वंशज बोले- सस्ती मानसिकता के चलते ऐसी बातें कर रहे अजमेर दरगाह प्रमुख उत्तराधिकारी और ख्वाजा साहब के वंशज नसरुद्दीन चिश्ती ने कहा- कुछ लोग सस्ती मानसिकता के चलते ऐसी बातें कर रहे हैं। कब तक ऐसा चलता रहेगा। आए दिन हर मस्जिद-दरगाह में मंदिर होने का दावा किया जा रहा है। ऐसा कानून आना चाहिए कि इस तरह की बातें ना की जाएं। ये सारे दावे झूठे और निराधार हैं।
हरबिलास शारदा की किताब की बात छोड़ दें तो क्या 800 साल पुराने इतिहास को नहीं नकारा जा सकता है। यहां हिंदू राजाओं ने अकीदत की है। अंदर जो चांदी (42,961 तोला) का कटहरा है वो जयपुर महाराज का चढ़ाया हुआ है। ये सब झूठी बातें हैं। भारत सरकार में पहले ही 1950 में जस्टिस गुलाम हसन की कमेटी क्लीन चिट दे चुकी है। इसके तहत दरगाह की एक-एक इमारत की जांच की जा चुकी है।
Ajmer Dargah Shiv Mandir Controversy; Hindu Muslim | ASI Survey
अजमेर दरगाह में मंदिर होने के 3 आधार पेश किए:हाईकोर्ट के जज की किताब का हवाला; वंशज बोले- ऐसी हरकतें देश के लिए खतरा
अजमेर5 घंटे पहलेलेखक: भरत मूलचंदानी
अजमेर की ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में संकट मोचन महादेव मंदिर होने का दावा किया गया है। अजमेर सिविल कोर्ट में लगाई गई याचिका को कोर्ट ने सुनने योग्य मानते हुए सुनवाई की अगली तारीख 20 दिसंबर तय की है। याचिका दायर करने वाले हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने मुख्य रूप से 3 आधार बताए हैं।
याचिकाकर्ता बोला- तथ्य साबित करते हैं कि दरगाह की जगह पहले मंदिर था उन्होंने कहा कि 2 साल की रिसर्च और रिटायर्ड जज हरबिलास शारदा की किताब में दिए गए तथ्यों के आधार पर याचिका दायर की है। किताब में इसका जिक्र है कि यहां ब्राह्मण दंपती रहते थे और दरगाह स्थल पर बने महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना करते थे। इसके अलावा कई अन्य तथ्य हैं, जो साबित करते हैं कि दरगाह से पहले यहां शिव मंदिर रहा था।
याचिकाकर्ता ने कहा- रिटायर्ड जज हरबिलास शारदा की किताब में दिए गए तथ्यों को आधार बनाकर याचिका लगाई है।
20 दिसंबर तक पक्ष रखने के लिए उपस्थित होना है कोर्ट ने अल्पसंख्यक मंत्रालय, दरगाह कमेटी और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) को नोटिस जारी किया है। 20 दिसंबर को उन्हें अपना पक्ष लेकर उपस्थित होना है।
दरगाह दीवान जैनुअल आबेदीन की ओर से उपलब्ध कराई गई तस्वीर। यह तस्वीर किसी पेंटर ने हाथ से बनाई थी।
इस मामले को लेकर अजमेर दरगाह प्रमुख उत्तराधिकारी और ख्वाजा साहब के वंशज नसरुद्दीन चिश्ती ने अपना पक्ष रखा है। उन्होंने कहा- ऐसी हरकतें देश की एकता के लिए खतरा हैं। यहां तो हिंदू राजाओं ने भी अकीदत की है। दरगाह में मौजूद कटहरा जयपुर के महाराजा ने भेंट किया है। 1950 के सर्वे में स्पष्ट हो चुका है कि दरगाह में कोई हिंदू मंदिर नहीं था।
दैनिक भास्कर में पढ़िए अजमेर की ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह को लेकर पहली बार पेश किए गए दावे की पूरी कहानी-
2 साल की रिसर्च के बाद किया दावा हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने बताया- मैंने अजमेर के लोगों को कहते सुना था और आसपास कई बार ये दावे किए गए थे कि दरगाह में पहले संकट मोचक महादेव का मंदिर था। इसकी बनावट को भी लोग संदेह की दृष्टि से देखते थे।
इसे लेकर मैंने 2 साल पहले रिसर्च शुरू की। गूगल पर देखा और कई किताबों को पढ़ने की कोशिश की। इसी दौरान मुझे अजमेर के प्रतिष्ठित जज हरबिलास शारदा की किताब अजमेर : हिस्टोरिकल एंड डिस्क्रिप्टिव के बारे में जानकारी मिली। इसमें दावा किया गया था कि यहां कभी संकट मोचन महादेव का मंदिर हुआ करता था।
दरगाह दीवान जैनुअल आबेदीन के पास इस तरह की कई तस्वीरें हैं।
अजमेर के लोग ही कहते थे यहां हिंदू मंदिर है गुप्ता ने बताया- अजमेर आता तो लोग दबी जुबान में कहते थे कि यहां हिंदू मंदिर रहा है। दरगाह के दरवाजों और इसकी बिल्डिंग पर बनी नक्काशी हिंदू मंदिरों की याद दिलाती है।
गुप्ता कहते हैं- जब मैंने हरबिलास शारदा की किताब को पढ़ा तो उसमें साफ-साफ लिखा था कि यहां पहले ब्राह्मण दंपती रहते थे। यह दंपती सुबह चंदन से महादेव का तिलक करते थे और जलाभिषेक करते थे।
हरबिलास शारदा कोई आम व्यक्ति नहीं थे। वे जोधपुर हाईकोर्ट में सीनियर जज के रूप में रहे। वह अजमेर मेरवाड़ा (1892) के न्यायिक विभाग में भी रहे। यहां अजमेर में तो उनके नाम से हरबिलास शारदा मार्ग भी है। उन्होंने 1911 में यह किताब लिखी थी। गुप्ता ने दावा किया कि यह किताब गलत साबित नहीं हो सकती है।
हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता के दावे के तीन आधार…
दरवाजों की बनावट व नक्काशी : दरगाह में मौजूद बुलंद दरवाजे की बनावट हिंदू मंदिरों के दरवाजे की तरह है। नक्काशी को देखकर भी अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां पहले हिंदू मंदिर रहा होगा।
ऊपरी स्ट्रक्चर : दरगाह के ऊपरी स्ट्रक्चर देखेंगे तो यहां भी हिंदू मंदिरों के अवशेष जैसी चीजें दिखती हैं। गुम्बदों को देखकर आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि किसी हिंदू मंदिर को तोड़कर यहां दरगाह का निर्माण करवाया गया है।
पानी और झरने : जहां-जहां शिव मंदिर हैं, वहां पानी और झरने जरूर होते हैं। यहां (अजमेर दरगाह) भी ऐसा ही है।
गुप्ता कहते हैं- मुस्लिम आक्रांता जब एक विद्यालय को तोड़कर ढाई दिन का झोपड़ा बना सकते हैं तो फिर शिव मंदिर तो जरूर तोड़ा होगा। उन्होंने कहा- यहां तहखाने में शिव मंदिर का दावा है, क्योंकि शिव मंदिर के ऊपर ही दरगाह का निर्माण किया गया है।
भगवान श्री संकट मोचन महादेव विराजमान बनाम दरगाह कमेटी हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता के वकील रामस्वरूप बिश्नोई ने बताया- सिविल जज मनमोहन चंदेल की बेंच ने मामले की सुनवाई को लेकर आगे की तारीख दी है। मामला भगवान श्री संकट मोचन महादेव विराजमान बनाम दरगाह कमेटी के बीच है। इसमें पहले 750 पेजों का वाद पेश किया गया था। बुधवार को संशोधित करके 38 पेजों का किया गया। इसके बाद इसे सिविल कोर्ट में लगाया गया था।
वंशज बोले- सस्ती मानसिकता के चलते ऐसी बातें कर रहे अजमेर दरगाह प्रमुख उत्तराधिकारी और ख्वाजा साहब के वंशज नसरुद्दीन चिश्ती ने कहा- कुछ लोग सस्ती मानसिकता के चलते ऐसी बातें कर रहे हैं। कब तक ऐसा चलता रहेगा। आए दिन हर मस्जिद-दरगाह में मंदिर होने का दावा किया जा रहा है। ऐसा कानून आना चाहिए कि इस तरह की बातें ना की जाएं। ये सारे दावे झूठे और निराधार हैं।
हरबिलास शारदा की किताब की बात छोड़ दें तो क्या 800 साल पुराने इतिहास को नहीं नकारा जा सकता है। यहां हिंदू राजाओं ने अकीदत की है। अंदर जो चांदी (42,961 तोला) का कटहरा है वो जयपुर महाराज का चढ़ाया हुआ है। ये सब झूठी बातें हैं। भारत सरकार में पहले ही 1950 में जस्टिस गुलाम हसन की कमेटी क्लीन चिट दे चुकी है। इसके तहत दरगाह की एक-एक इमारत की जांच की जा चुकी है।
चिश्ती बोले- ऐसा करना देश की एकता को खतरा 27 नवंबर की देर शाम अंजुमन कमेटी के सचिव सरवर चिश्ती ने कहा- पहले से इस तरह की बयानबाजी चलती आ रही है। अजमेर की दरगाह के देश में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में लाखों करोड़ों अनुयायी हैं।
उन्होंने कहा- इसी साल 22 जून को मोहन भागवत ने कहा था कि हर मस्जिद में शिवलिंग की तलाश न करें। चिश्ती ने द प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 का हवाला देते हुए कहा कि बाबरी मस्जिद के अलावा किसी भी धार्मिक स्थल में कोई बदलाव या छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि ऐसा करना देश की एकता और सहिष्णुता पर खतरा पैदा करेगा।
ओवैसी ने कहा- कानून की धज्जियां उड़ाई जा रहीं
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया X पर प्रतिक्रिया दी है।
रायबरेली, एजेंसी। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने रायबरेली में बुधवार को बैठक में कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय को अपने मोबाइल पर टूटी सड़कें दिखाईं। राहुल ने डिस्ट्रिक्ट डेवलपमेंट कोऑर्डिनेटिंग कमेटी (दिशा) की मीटिंग में जर्जर सड़कों और गड्ढों की तस्वीरें दिखाकर PWD अधिकारियों और डीएम से पूछा कि सड़कों की हालत ऐसी क्यों है?
राहुल ने कहा कि जब सरकार फंड दे रही है तो काम क्यों नहीं हो रहा है? आप लोग क्या कर रहे हैं? इस मीटिंग में ऊंचाहार से BJP विधायक मनोज पांडेय, एमएलसी और राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह भी मौजूद थे।
कलेक्ट्रेट में करीब ढाई घंटे बैठक से पहले राहुल ने सुबह जनता दरबार लगाया, जहां महिला कांग्रेस नेता ने उन्हें राखी बांधी। राहुल ने यहां सपा नेताओं ने भी मुलाकात की।
कार्यक्रमों के बाद राहुल लखनऊ रवाना हो गए, जहां से वे दिल्ली जाएंगे। 2024 में सांसद बनने के बाद राहुल का यह 8वां रायबरेली दौरा था। इससे पहले वे 19-20 मई को दो दिवसीय दौरे पर आए थे।
राहुल मंगलवार दोपहर दिल्ली से एयर इंडिया की फ्लाइट से लखनऊ पहुंचे थे। पहली बार में विमान लैंड नहीं कर पाया था। 25 मिनट हवा में चक्कर लगाने के बाद दूसरे प्रयास में विमान ने लैंडिंग की थी।
रायबरेली में सर्राफा कारोबारी के घर बैठक के दौरान राहुल ने बच्ची से हाथ मिलाया। महिलाओं ने उन्हें बुके दिया।
रायबरेली में राहुल गांधी के जनता दरबार के दौरान भुएमऊ गेस्ट हाउस पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ी।
रायबरेली में राहुल गांधी ने 3 करोड़ की योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इनमें बारात घर, ट्रांसफॉर्मर और सड़कें शामिल हैं।
सपा विधायकों ने प्रदर्शन किया, पोस्टर लहराए
रायबरेली में सपा विधायक राहुल लोधी, श्याम सुंदर भारती ने दिशा की मीटिंग के दौरान हॉल के बाहर प्रदर्शन किया। हालांकि, राहुल के पहुंचने से पहले पुलिस ने उनसे पोस्टर और बैनर छीन लिए।
पोस्टर पर लिखा था- स्कूल बंद, फर्जी मुकदमे लिखे जा रहे, जमीनों पर कब्जे हो रहे हैं। जिले में आम लोगों की समस्याएं जस की तस हैं, तो ऐसे में दिशा की बैठक का क्या औचित्य है?
रायबरेली में हरचंदपुर से सपा विधायक राहुल लोधी और बछरावां से सपा विधायक श्याम सुंदर भारती ने पोस्टर-बैनर लेकर दिशा बैठक हॉल के बाहर प्रदर्शन किया।
सांसद-जनप्रतिनिधि अफसरों से सरकारी योजनाओं को लेकर सवाल करते हैं। जनता को योजनाओं का फायदा मिल रहा है या नहीं, काम में देरी को लेकर जवाब मांगते हैं।
‘दिशा’ (DISHA) बैठक की अध्यक्षता क्षेत्र के सांसद करते हैं। इसमें जिले के सभी विधायक, डीएम, एसपी और सभी सरकारी विभागों के बड़े अफसर एक साथ बैठते हैं।
राहुल ने मंत्री के सामने दिखाए खराब सड़कों के वीडियो
दिशा बैठक के दौरान अपने मोबाइल में राहुल गांधी ने रायबरेली की सड़कों के गड्ढे दिखाए। इस दौरान कैबिनेट मंत्री मनोज पांडे भी वीडियो देखते रहे। राहुल गांधी ने PWD विभाग के अधिकारियों और डीएम से इन सड़कों की बदहाली को लेकर सवाल पूछा। राहुल ने पूछा कि जिले की सड़कें इतनी खराब क्यों हैं? जब सरकार फंड दे रही है तो सड़कों पर काम क्यों नहीं हो रहा है। पूरे जिले के मुख्स मार्ग और ग्रामीण लिंक रोड बहुत खराब हैं। इसे लेकर क्या कर रहे हैं?
नागोया/नई दिल्ली, एजेंसी। एशियन गेम्स की शुरुआत से 10 दिन पहले जापान के नागोया में बाढ़ आ गई। स्थिति यह बनी की एशियन गेम्स में भाग लेने आए 400 खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ को सुरक्षित जगहों पर ले जाया गया।
बाढ़ में नागोया शहर की सड़कें और घर डूब गए। मेयर इचिरो हिरोसावा ने दावा किया कि एशियन गेम्स के लिए कोई चिंता की बात नहीं है। टूर्नामेंट का आयोजन तय समय पर होगा।
नागोया में 19 सितंबर को एशियन गेम्स की ओपनिंग सेरेमनी होनी है।
नागोया बाढ़ की तस्वीरें…
बाढ़ के पानी में सड़कें डूब गई हैं।
बाढ़ में फंसी गाड़ी को धक्का मारते लोग।
नागोया में बाढ़ के पानी में गाडियों के टायर डूब गए।
3500 लोगों ने इमरजेंसी शेल्टर में शरण ली
बस और मेट्रो सेवाएं कुछ समय के लिए प्रभावित रहीं। करीब 3,500 लोगों ने इमरजेंसी शेल्टर में शरण ली। नागोया और इची में एशियन गेम्स 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक होने हैं।
रिपोर्ट- वेन्यू में कुछ जगह छतों से पानी टपक रहा
जापानी मीडिया में शहर की सड़कों और मेट्रो स्टेशनों में भरे पानी की तस्वीरें दिखाई गईं। न्यूज एजेंसी AP की रिपोर्ट के मुताबिक, वेन्यू की कुछ जगहों पर छतों से पानी टपकने की घटनाएं भी हुईं। हालांकि मेयर हिरोसावा ने कहा कि एशियन गेम्स के दर्जनों वेन्यू को गंभीर नुकसान नहीं हुआ है।
भारत गेम्स में 768 सदस्यीय दल भेज रहा
खेल मंत्रालय ने जापान के आइची और नागोया में होने वाले 20वें एशियन गेम्स के लिए 503 खिलाड़ी और 255 सपोर्ट स्टाफ भेजने की जानकारी दी है। सपोर्ट स्टाफ में कोच, मैनेजर, फिजियो और मेडिकल टीम आदि शामिल है।
36 खेलों में उतरेगा भारत: पहले 35 खेलों के 492 एथलीटों को मंजूरी दी गई थी, लेकिन 4 सर्फर्स सहित नए नाम जुड़ने से अब भारत 36 खेलों में हिस्सा लेगा।
एथलेटिक्स दल में सबसे बड़ी बढ़ोतरी: एथलेटिक्स टीम के खिलाड़ियों की संख्या 73 से बढ़ाकर 79 कर दी गई है। एथलेटिक्स और क्रिकेट को सबसे ज्यादा सपोर्ट स्टाफ दिया गया है।
दल के प्रमुख अधिकारी: दल प्रमुख के रूप में सहदेव यादव और मुख्य मेडिकल अधिकारी के रूप में डॉ. दिनशॉ पार्डीवाला भारतीय दल का नेतृत्व करेंगे।
भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम 19 सितंबर को रवाना होगी
डिफेंडिंग चैंपियन भारत एशियन गेम्स के लिए टीम घोषित कर चुका है। श्रेयस अय्यर की कप्तानी वाली टीम में युवा क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी भी शामिल हैं। भारतीय टीम 19 सितंबर को सानो के लिए रवाना होगी। इसगे अगले दिन टीम प्रैक्टिस सेशन में हिस्सा लेगी।
महिला क्रिकेट टीम पहले पहुंचेगी
हरमनप्रीत कौर की कप्तानी वाली भारतीय महिला क्रिकेट टीम दुबई में एशिया कप खेलने के बाद 13 सितंबर को भारत लौटेगी और 14 सितंबर को नागोया के लिए रवाना होगी।
महिला टीम एशियन गेम्स में सीधे क्वार्टर फाइनल से अभियान शुरू करेगी। उसका पहला मुकाबला 18 सितंबर को होगा। महिलाओं का यह टूर्नामेंट 22 सितंबर तक चलेगा।
गेम्स में ठहरने की व्यवस्थाओं पर भी विवाद था
इससे पहले खबर आई थी कि BCCI और PCB गेम्स के आयोजकों से नाराज है। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि खिलाड़ियों को स्टेडियम से 20 किमी दूर छोटे होटल कमरों में ठहराया गया है, जहां बैग खोलने तक की जगह नहीं है। वहीं ड्रेसिंग रूम पक्के मकान की जगह टेंट में बने हैं और वॉशरूम 500 मीटर दूर है।
इसपर JCA के CEO नाओकी एलेक्स मियाजी ने कहा था- ‘हमने क्रिकेट टीम को होटल का विकल्प दिया है। जबकि कई अन्य खेलों के खिलाड़ियों के लिए क्रूज शिप या कंटेनर होटल जैसी सीमित सुविधाएं हैं।’
प्लेयर एरिया में टॉयलेट की सुविधा उपलब्ध रहेगी। मैदान पर बने ड्रेसिंग रूम भले ही अस्थाई हों, लेकिन इन्हें इस तरह तैयार किया गया है कि खिलाड़ियों और अधिकारियों को पूरा आराम मिले।
पिच और आउटफील्ड कम समय में सीमित संसाधनों के बीच तैयार की गई है। यह एशियन गेम्स के इतिहास में क्रिकेट की सबसे बेहतरीन प्लेइंग सरफेस होगी। श्रीलंकाई क्यूरेटर्स की मदद से यहां टर्फ और हाइब्रिड पिच तैयार की जा रही है।
नई दिल्ली, एजेंसी। बिहार में गंगा समेत 8 नदियां उफान पर हैं। राज्य के 14 जिलों में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। इससे करीब 35.89 लाख लोग प्रभावित हैं। कोसी, गंडक और घाघरा नदियां लाल निशान से ऊपर बह रही हैं। सारण में माही नदी पर बना जमींदारी बांध टूटने से स्थिति गंभीर हो गई है।
उत्तर प्रदेश में बारिश के चलते लखीमपुर और बरेली में कक्षा 8 तक के सभी स्कूलों में छुट्टी कर दी गई है। वाराणसी में प्री-प्राइमरी से कक्षा 5 तक के सभी स्कूल बंद रहेंगे, जबकि कक्षा 6 से 12 तक के स्कूल सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक चलेंगे। आज वाराणसी और प्रयागराज समेत 23 जिलों में बारिश का अलर्ट है।
उत्तराखंड के पौड़ी में लैंडस्लाइड के कारण घरों और दुकानों में दरारें आ गई हैं। पहाड़ी जिलों में भारी बारिश की संभावना को देखते हुए यलो अलर्ट जारी किया गया है।
इधर, मध्य प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर 3 दिन का ब्रेक लिया है। मौसम विभाग, भोपाल ने 11 सितंबर तक प्रदेश में कहीं भी भारी बारिश का अनुमान नहीं जताया है।
सैटेलाइट मैप में देखें मानसूनी बादलों की स्थिति
देशभर से मौसम की तस्वीरें
बिहार के भागलपुर के राघोपुर में 10 लोगों से भरी नाव गंगा नदी में समा गई। SDRF की टीम ने सभी को बचा लिया।
झारखंड में धनबाद के सिजुआ में मंगलवार को जमीन धंस गई। इस घटना में दो बच्चों समेत करीब छह महिलाएं घायल हो गईं।
बिहार के खगड़िया में बाढ़ के बीच खाने का इंतजाम करते लोग।
उत्तराखंड के पौड़ी में लैंडस्लाइड से घरों और दुकानों में दरारें आ गई।
उत्तराखंड में चंपावत के घाट-पनार मार्ग पर पहाड़ी से बोल्डर गिरने से कार क्षतिग्रस्त हुई।
बिहार में बाढ़ से 40 लाख लोग प्रभावित
बिहार में पिछले 5 दिनों से हो रही तेज बारिश के बाद 14 जिलों में 40.21 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक, 14 जिलों के 84 प्रखंडों की 514 ग्राम पंचायतों में बाढ़ का असर है।
छत्तीसगढ़: दो-तीन दिन में बदल सकता है मौसम
छत्तीसगढ़ में अभी बारिश की एक्टिविटी कम है, लेकिन अगले 2-3 दिनों में मौसम का मिजाज बदल सकता है। मौसम विभाग के मुताबिक, कल यानी 10 सितंबर से पूरे प्रदेश में बारिश की एक्टिविटी बढ़ने के आसार हैं।
पंजाब: 3 जिलों में बारिश के आसार
पंजाब और चंडीगढ़ में मानसून कमजोर पड़ गया है। आज पठानकोट, रूपनगर और होशियारपुर को छोड़कर ज्यादातर हिस्सों में बारिश की संभावना नहीं है। इन तीन जिलों में भी कुछ स्थानों पर ही हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। राज्य के अधिकतर हिस्सों में मौसम शुष्क रहेगा।
हरियाणा: 10 से ज्यादा शहरों में पारा 35°C पार
हरियाणा में मानसून की रफ्तार सुस्त पड़ते ही पश्चिमी हवाओं ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। मौसम विभाग के मुताबिक, राज्य में औसतन अधिकतम तापमान सामान्य से करीब 1.9 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया है। प्रदेश के 10 से अधिक प्रमुख शहरों व केंद्रों में अधिकतम पारा 35 डिग्री सेल्सियस के आंकड़े को पार कर गया है।
बिहार: 14 जिलों के 36 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित
बिहार में गंगा समेत 8 नदियां अभी भी उफान पर हैं। राज्य के 14 जिलों के 62 प्रखंडों की 491 पंचायतों में बाढ़ की गंभीर स्थिति बनी हुई है। इससे करीब 35.89 लाख लोग प्रभावित हैं। गंगा के अलावा कोसी, गंडक और घाघरा नदियां भी लाल निशान से ऊपर बह रही हैं। सारण में माही नदी पर बना जमींदारी बांध टूटने से स्थिति गंभीर हो गई है।
मध्य प्रदेश: मानसून का ब्रेक…3 दिन भारी बारिश नहीं
मध्य प्रदेश में मानसून ने एक फिर 3 दिन का ब्रेक लिया है। मौसम केंद्र (IMD ) भोपाल ने 11 सितंबर तक प्रदेश में कहीं भी अति भारी या भारी बारिश का अनुमान नहीं जताया है। इसी दिन पश्चिम-मध्य और उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में एक लो प्रेशर एरिया (कम दवाब का क्षेत्र) एक्टिव होगा। जिसका अगले दिन यानी, 12 सितंबर से असर दिखना शुरू होगा।
राजस्थान: 3 दिन बाद बारिश की संभावना
राजस्थान में मानसून के कमजोर होने के कारण तीन दिन बारिश की संभावना नहीं है। मौसम विभाग के अनुसार 11 सितंबर से एक नया लो-प्रेशर सिस्टम बंगाल की खाड़ी में बनेगा, जिसके असर से 12 सितंबर से पूर्वी जिलों में हल्की बारिश का दौर शुरू हो सकता है