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राधिका मर्डर केस, एक्सपर्ट्स ने जांच पर सवाल उठाए:बोले- पुलिस आरोपी के बयान में ही उलझी, कोर्ट में मुकर गया तो क्या करेंगे

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गुरुग्राम,एजेंसी। हरियाणा में गुरुग्राम के हाई प्रोफाइल टेनिस प्लेयर राधिका यादव मर्डर केस में आरोपी पिता के स्टेटमेंट पर टिकी पुलिस की थ्योरी पर सवाल खड़े हाे रहे हैं। क्रिमिनल लॉयर, रिटायर्ड पुलिस अधिकारियों और कानून के जानकारों का मानना है कि पुलिस को बाकी एंगल पर भी काम करना चाहिए।

इस केस के बारे में अधिकतर एक्सपर्ट ने सीधे तौर पर पुलिस की इन्वेस्टिगेशन को एकतरफा बताया और कहा कि पुलिस को दिए आरोपी के बयान कोर्ट में ज्यादा मायने नहीं रखते। वह कोर्ट में मुकर गया तो पुलिस क्या करेगी? कोर्ट सबूत और गवाहों के आधार पर डिसीजन लेता है।

इस तरह के फैमिली मर्डर केस में अगर एक ही थ्योरी पर पुलिस चैप्टर बंद कर देती है तो क्रिमिनल को फायदा मिलने की संभावना बढ़ जाती है। राधिका की हत्या ने न केवल सामाजिक और पारिवारिक स्तर पर हलचल मचाई है, बल्कि कानूनी दृष्टिकोण से भी यह मामला जटिल और विवादास्पद बन सकता है।

बता दें कि 10 जुलाई को गुरुग्राम में टेनिस प्लेयर राधिका यादव की उसके पिता दीपक यादव ने 4 गोलियां मारकर हत्या कर दी थी। पिता ने पुलिस को बताया कि वह बेटी की कमाई खाने के लोगों के तानों से परेशान था। बेटी ने उसकी एकेडमी बंद करने की बात नहीं मानी, इसलिए उसकी हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपी के इसी बयान के बाद अपनी कार्रवाई को सीमित कर रखा है।

आरोपी दीपक यादव इस समय 14 दिन की न्यायिक हिरासत में है। -फाइल फोटो

आरोपी दीपक यादव इस समय 14 दिन की न्यायिक हिरासत में है। -फाइल फोटो

गुरुग्राम की टेनिस प्लेयर राधिका यादव, जिसका 10 जुलाई को पिता ने गोलियां मारकर कत्ल किया।- फाइल फोटो

गुरुग्राम की टेनिस प्लेयर राधिका यादव, जिसका 10 जुलाई को पिता ने गोलियां मारकर कत्ल किया।- फाइल फोटो

पुलिस की जांच पर कानून के जानकारों ने क्या-क्या सवाल उठाए…

सीनियर एडवोकेट बोले- आरोपी के बयान को आधार बनाना खतरनाक

इस मामले पर पुलिस की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट अजय पाल का कहना है कि किसी भी मर्डर केस की जांच में आरोपी के बयान को प्राथमिक आधार बनाना खतरनाक है।

इस मामले में गहन और वैज्ञानिक जांच की जरूरत है, जिसमें फोरेंसिक सबूत, गवाहों के बयान और डिजिटल सबूतों का विश्लेषण शामिल हो। केवल आरोपी के बयान पर निर्भर रहना कानूनी प्रक्रिया की गंभीर चूक है।

उन्होंने कहा कि गुरुग्राम के एक स्कूल के स्टूडेंट्स मर्डर केस में ऐसा हो चुका है, जब पुलिस ने एक ही थ्योरी पर काम करते हुए गलत व्यक्ति को पकड़ लिया था। अगर पुलिस की जांच में खामियां रहती हैं, तो यह बचाव पक्ष के लिए मजबूत आधार हो सकता है।

उदाहरण के लिए, अगर क्राइम सीन से सबूत ठीक से एकत्र नहीं किए गए या चेन ऑफ कस्टडी में गड़बड़ी हुई, तो यह कोर्ट में साक्ष्यों की स्वीकार्यता को प्रभावित कर सकता है।

अजय पाल ने कहा कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 24 इस मामले के बीच में आएगी। अगर अभियुक्त कहता है कि उसने हत्या नहीं की और ऐसा कोई बयान नहीं दिया, तो उसे फायदा पहुंच सकता है।

यानी यह घोड़े के आगे गाड़ी जोड़ने जैसा है, न कि घोड़े के पीछे गाड़ी जोड़ने जैसा। यह बेहद मुश्किल है कि एक प्रगतिशील और आर्थिक रूप से संपन्न व्यक्ति ने लोगों के ताने सुनकर अपनी बेटी को मार दिया हो।

हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट ने कहा- मुझे जांच की निष्पक्षता पर संदेह

वहीं, हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट अजय चौधरी कहते हैं- राधिका मर्डर केस में पुलिस की प्रक्रिया और जांच की निष्पक्षता पर मुझे संदेह है। पुलिस अपनी प्रारंभिक जांच को ही अंतिम मान रही है। आरोपी दीपक यादव ने जो दावा किया कि वह गांववालों के तानों से तंग आ चुके थे। यह बात किसी के भी गले नहीं उतर रही।

एडवोकेट अजय चौधरी ने कहा- पुलिस ने काफी लोगों से पूछताछ की है, लेकिन जांच का दायरा मुख्य रूप से दीपक के बयान तक सीमित रहा है। क्या यह हत्या पारिवारिक विवाद, आर्थिक लेन-देन या किसी अन्य गहरे कारण से हुई? पुलिस को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी संभावना छूटे नहीं।

रिटायर इंस्पेक्टर ने मृतक के दोस्तों और करीबियों से बात करने पर जोर दिया

राष्ट्रपति से अवॉर्ड पा चुके एक रिटायर्ड इंस्पेक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि राधिका मर्डर केस में जब पुलिस के पास आरोपी, हथियार और वजह आ जाती है और केस फैमिली के अंदर का है तो अमूमन पुलिस अपनी जांच का दायरा सीमित कर देती है।

हालांकि, पुलिस के पास राधिका के मोबाइल, सोशल मीडिया अकाउंट्स और उनके निजी संबंधों की जांच का ऑप्शन है। क्योंकि यह संभव है कि कुछ डिजिटल सबूत मिटाए गए हों।

उन्होंने कहा- क्या पुलिस ने क्राइम सीन को ठीक से सुरक्षित किया? क्या फोरेंसिक साक्ष्यों का सही विश्लेषण किया गया? इन सवालों के जवाब जरूरी हैं। अगर क्राइम सीन को तुरंत सुरक्षित नहीं किया गया, तो महत्वपूर्ण सबूत नष्ट हो सकते हैं।

मां के बयान, राधिका की बेस्ट फ्रेंड का दावा करने वाली लड़की, राधिका और दीपक के संपर्क में रहने वाले व्यक्ति, आदि से पुलिस को बात करनी चाहिए।

टेनिस प्लेयर राधिका यादव की फाइल फोट

टेनिस प्लेयर राधिका यादव की फाइल फोट

क्रिमिनल लॉयर बोले- इकबालिया बयान आरोप साबित नहीं करता

केस को शुरू से फॉलो कर रहे गुरुग्राम के सीनियर क्रिमिनल लॉयर मनीष शांडिल्य का कहना है- मैं पहले दिन से इस मामले को देख रहा हूं। चार्जशीट दाखिल होने तक पुलिस हर एंगल से जांच कर सकती है और करनी भी चाहिए। क्योंकि यह पुलिस का अधिकार क्षेत्र है।

इकबालिया बयान किसी भी आरोप को साबित नहीं करता। जांच एजेंसी हर दृष्टिकोण से जांच कर सकती है, ताकि अदालत में जुर्म साबित करने में कोई संदेह न रह जाए।

उन्होंने कहा कि इस मामले में कोई चश्मदीद गवाह सामने नहीं आया है, जिसने आरोपी को गोली चलाते हुए देखा हो। जांच एजेंसी को इस केस को कड़ी से कड़ी जोड़कर अदालत में साबित करना होगा, जिसमें गन और बुलेट की रिकवरी, फिंगर प्रिंट्स, एफएसएल रिपोर्ट, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट अहम पहलू होंगे।

इनके अलावा सीसीटीवी फुटेज और मृतक के मोबाइल भी खंगाले जाने चाहिए। कड़ी जोड़ना इसलिए भी जरूरी है कि कहीं इसमें किसी और की कोई भूमिका तो नहीं है।

मनीष शांडिल्य ने कहा कि राधिका की मां मंजू यादव की चुप्पी को कोर्ट में उनके खिलाफ नहीं माना जा सकता, क्योंकि यह उनका संवैधानिक अधिकार है। लेकिन, यह जांच को और जटिल बनाता है, क्योंकि वह एक महत्वपूर्ण गवाह हो सकती हैं।

दीपक यादव के दोस्त ने कहा- ताने सुनकर कोई गोली नहीं मार सकता

सेक्टर 57 रेजिडेंस वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) के प्रेजिडेंट और दीपक यादव के दोस्त पवन यादव का कहना है कि वह दीपक को काफी समय से जानते हैं, लेकिन उन्हें नहीं लगता कि हत्या की जो वजह दीपक ने पुलिस को बताई है, वह सच है।

उन्होंने कहा- जो व्यक्ति अपनी बेटी से इतना प्यार करता हो और अपना सारा जीवन उसी के करियर के लिए लगा दे, वह केवल ताने सुनकर बेटी को 4 गोलियां नहीं मार सकता।

अब जानिए, मामले में पुलिस ने क्या किया…

आरोपी पिता ताने वाले बयान पर कायम

पुलिस के मुताबिक, राधिका की हत्या को लेकर इंस्टाग्राम रील से लेकर उसके वीडियो सॉन्ग जैसी कई थ्योरी भले ही चल रही हों, लेकिन पुलिस आरोपी पिता दीपक बेटी की कमाई खाने के ताने और टेनिस की ट्रेनिंग बंद न किए जाने से नाराजगी के बयान पर कायम है।

पिता ने पुलिस से कहा कि वह पिछले 15 दिन से काफी परेशान था। कहीं भी जाते हुए उसे लगता था कि अगर 2 आदमी भी बात करते दिखते हैं, तो वे उसके बारे में ही बात कर रहे हैं। इसी वजह से परेशान होकर उसने यह कदम उठाया। राधिका ने गांव वालों की बातों को नजरअंदाज करने के लिए कहा था, लेकिन यह बात वह समझ नहीं पाया।

पुलिस प्रवक्ता का दावा- जांच सही दिशा में हुई

इस मामले में पुलिस प्रवक्ता संदीप कुमार का कहना है कि पुलिस अपनी जांच को लेकर संतुष्ट है। रिमांड के दौरान एसएचओ और जांच से जुड़े अधिकारियों ने हर तरीके से पूछताछ कर ली।

उन्होंने कहा- आरोपी अपने बयान पर है। इसलिए दूसरे एंगल पर जांच करने का मतलब नहीं बनता। हां, अगर कोई शिकायत आती है या फिर कुछ नया तथ्य सामने आता है तो पुलिस जांच करेगी। फिलहाल, राधिका और आरोपी दीपक का मोबाइल जांच के लिए भेजा गया है।

पुलिस ने लोगों से पूछा- किसने ताने मारे

इस मामले में छानबीन के दौरान पुलिस ने प्रमुख लोगों को थाने में बुलाया। उनसे तानों के बारे में पूछा गया तो सभी ने कहा कि दीपक को किसी ने ताना नहीं मारा। वह आर्थिक रूप से संपन्न है, जिसकी मासिक आय 15-17 लाख रुपए थी। पुलिस निष्पक्ष जांच करे, क्योंकि उन्हें लगता है कि दीपक कुछ छिपा रहा है।

इस पर थाना प्रभारी विनोद ने कहा कि गांव वाले चाहें तो ताना मारने वाले व्यक्ति का नाम बता सकते हैं, या फिर किसी तरह की कोई कंप्लेंट दे सकते हैं। जब राधिका के पिता प्रारंभिक जांच में ही अपना जुर्म कबूल कर चुके हैं, तो किसी और एंगल पर जांच भटकाना सही नहीं है।

मां बोली- मुझे हत्या की वजह नहीं पता

पिता के ताने के दावे के बावजूद मां मंजू यादव ने पुलिस को कहा कि उसे नहीं पता कि पति ने बेटी की गोलियां मारकर हत्या क्यों की। मां ने यह भी कहा कि उनकी बेटी का चरित्र बिल्कुल ठीक था।

पति को बेटी से क्या नाराजगी थी, इसके बारे में भी उन्हें कुछ नहीं पता। जिस वक्त गोलियां मारी गईं, वह तबीयत खराब होने की वजह से अलग कमरे में लेटी हुई थीं। पुलिस भी मौके के हालात और अब तक की जांच के बाद मां को आरोपों के दायरे से बाहर रख रही है।

क्या बेस्ट फ्रेंड हिमांशिका से पूछताछ करेगी पुलिस?

इस सवाल के जवाब में सेक्टर 56 थाने के एसएचओ और जांच अधिकारी विनोद का कहना है कि अभी हिमांशिका को जांच में शामिल नहीं किया गया है, लेकिन अगर हिमांशिका के पास इस मामले से संबंधित कोई साक्ष्य या सबूत हैं तो वह खुद पुलिस के सामने पेश करें। अगर उसके पास कोई सबूत है तो जल्द ही उसको जांच में शामिल करके पूछताछ की जाएगी।

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क्रिकेटर रिंकू सिंह ने पिता की अर्थी को कंधा दिया:टी-20 वर्ल्ड कप छोड़कर आए, बड़े भाई ने दी मुखाग्नि

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अलीगढ़,एजेंसी। क्रिकेटर रिंकू सिंह के पिता खानचंद सिंह का शुक्रवार सुबह करीब 4.36 बजे निधन हो गया। वे 60 साल के थे। उन्हें फोर्थ स्टेज लिवर कैंसर था। कुछ दिन पहले उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें अलीगढ़ से ग्रेटर नोएडा के प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था।

वहां उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। पार्थिव शरीर को अलीगढ़ ले आया गया। रिंकू टी-20 वर्ल्ड कप छोड़कर चेन्नई से अलीगढ़ अपने घर पहुंचे। पिता की अर्थी को कंधा दिया। अंतिम यात्रा के बाद शंकर विहार स्थित श्मशान घाट में अंतिम संस्कार किया गया। बड़े बेटे सोनू ने पिता को मुखाग्नि दी।

इससे पहले, पिता की तबीयत बिगड़ने की सूचना मिलते ही रिंकू सिंह मंगलवार को टीम इंडिया का साथ छोड़कर नोएडा पहुंचे थे। उन्हें टी-20 विश्वकप का प्रैक्टिस सेशन छोड़ना पड़ा था। 25 फरवरी को रिंकू चेन्नई लौट गए थे और टीम के साथ जुड़ गए थे।

हालांकि, 26 फरवरी को चेन्नई में जिम्बाब्वे के खिलाफ खेले गए सुपर-8 के मैच में वे प्लेइंग इलेवन का हिस्सा नहीं थे। वे सब्स्टीट्यूट के तौर पर मैदान पर फील्डिंग कर रहे थे। क्रिकेटर विराट कोहली समेत तमाम क्रिकेटर्स और IPL टीमों ने रिंकू के पिता के निधन पर दुख जताया।

रिंकू की मंगेतर और मछलीशहर सांसद प्रिया सरोज के पिता तूफानी सरोज ने फोन पर दैनिक भास्कर से बात की। बताया- प्रिया कई दिनों से रिंकू के परिवार के साथ हैं। हम भी रात में गए थे। वापस आते वक्त रास्ते में निधन की सूचना मिली।

रिंकू सिंह ने पिता की अर्थी को कंधा दिया।

रिंकू सिंह ने पिता की अर्थी को कंधा दिया।

अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।

अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।

रिंकू के बड़े भाई सोनू ने पिता की चिता को मुखाग्नि दी।

रिंकू के बड़े भाई सोनू ने पिता की चिता को मुखाग्नि दी।

रिंकू के पिता गैस सिलेंडर डिलीवरी का काम करते थे

क्रिकेटर रिंकू का बचपन काफी कठिनाई भरा रहा है। मां वीना देवी घर संभालती हैं। रिंकू 5 भाई और एक बहन में चौथे नंबर हैं। बड़े भाई सोनू, मुकुल और शीलू हैं। बहन नेहा और भाई जीतू, रिंकू से छोटे हैं। मूल रूप से बुलंदशहर के दान गढ़ के रहने वाले हैं।

KKR को दिए एक इंटरव्यू में रिंकू ने अपनी जिंदगी के बारे में बात की थी। उन्होंने बताया था-

परिवार में 5 भाई हैं। पापा सिलेंडर डिलीवरी का काम करते थे। हम पांचों भाइयों से भी काम करवाते। हम बाइक पर 2-2 सिलेंडर रखकर होटलों और घरों में डिलीवर करने जाते थे। मैच खेलने के लिए पैसे लगते थे। घरवालों से मांगो तो कहते कि पढ़ाई करो। पापा खेलने के लिए मना करते थे, मम्मी सपोर्ट करती थीं।

KKR और RCB ने दुख जताया, लिखा- कठिन समय में हम रिंकू के साथ

IPL की टीमें कोलकाता नाइट राइडर्स और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने रिंकू के पिता के निधन पर दुख जताया। ‘X’ पर पोस्ट किया- रिंकू सिंह और उनके परिवार के प्रति हमारी गहरी संवेदनाएं। इस कठिन समय में हम उनके साथ हैं।

राजीव शुक्ला बोले- कठिन घड़ी में मेरी संवेदनाएं रिंकू के साथ

BCCI के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने X पर लिखा- क्रिकेटर रिंकू सिंह के पिता खानचंद सिंह के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है। इस कठिन घड़ी में मेरी गहरी संवेदनाएं रिंकू और परिवार के साथ हैं। ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें। शोकाकुल परिजनों को यह अपार दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें।

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कोरबा

स्व.मेहता की पत्रकारिता आज भी समाज के लिए उदाहरण: सांसद महंत

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बालको, कलेक्टर11, अधिवक्ता11 और शिक्षा विभाग की टीम ने सेमीफाइनल में बनाई जगह

कोरबा। कोरबा प्रेस क्लब द्वारा घंटाघर मैदान में आयोजित स्व. केशवलाल मेहता क्रिकेट स्मृति क्रिकेट प्रतियोगिता 2026 में बतौर मुख्य अतिथि सांसद श्रीमती ज्योत्सना चरणदास महंत ने उपस्थित होकर खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाया।

सांसद श्रीमती महंत ने कहा कि प्रेस क्लब कोरबा द्वारा स्व. केशवलाल मेहता की स्मृति में 22वें वर्ष क्रिकेट प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। इतने लंबे वर्षों तक कोई किसी को याद करे यह बहुत बड़ी बात है। वरिष्ठ पत्रकार स्वर्गीय मेहता की तरह बाबूजी स्वर्गीय बिसाहू दास महंत आज भी सबके दिलों में है। स्वर्गीय मेहता स्वतंत्र लेखनी के धनी थे। उनकी पत्रकारिता आज भी समाज के लिए उदाहरण है। उन्होंने समाज के लिए अच्छा किया है, इसलिए उन्हें आज भी याद किया जा रहा है। श्रीमती महंत ने कहा कि खेल में हारना जीतना तो लगा रहता है। खेल हमें एकता और प्रेम सिखाती है। खिलाड़ी सोचे कि अभी नहीं जीते तो अगली बार जीत जाएंगे। कभी खुद को कमजोर नहीं समझना चाहिए। जीवन में हर तरह की लड़ाई पूरी मजबूती से लड़नी चाहिए।

श्रीमती महंत ने कहा कि स्व. केशवलाल मेहता क्रिकेट प्रतियोगिता में रनरअप की ट्रॉफी बाबूजी स्व. बिसाहू दास महंत की स्मृति में प्रदान करने की घोषणा डॉ. महंत ने की है। उन्होंने कहा कि अपने लिए तो सभी जीते हैं, जो दूसरों के लिए जीता है वह अमर हो जाता है। ठीक इसी तरह की जिंदगी वरिष्ठ पत्रकार स्वर्गीय मेहता और हमारे बाबूजी ने जी है। प्रतियोगिता में पहला मुकाबला एनटीपीसी और बालको के बीच खेला गया। एनटीपीसी ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 6 विकेट होकर 85 रन बनाए। बालको ने लक्ष्य का पीछा 7.1ओवर चार विकेट खोकर हासिल कर लिया। बालको की टीम ने 6 विकेट से मुकाबला जीतकर से फाइनल में जगह बना ली। बालको के मंजय सिंह प्लेयर ऑफ द मैच रहे। दूसरा मुकाबला अधिवक्ता 11 और कमिश्नर 11 के बीच खेला गया। अधिवक्ता 11 ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 5 विकेट खोकर 134 रन बनाए। लक्ष्य का पीछा करने उतरी कमिश्नर 11 की टीम 4 विकेट खोकर 121 रन ही बना सकी। इस तरह अधिवक्ता 11 ने 13 रन से मुकाबला जीत कर सेमीफाइनल में अपना स्थान पक्का किया।अधिवक्ता 11 के भोला सोनी मैन ऑफ द मैच रहे। विशिष्ट अतिथि के तौर पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश परसाई, कांग्रेस नेत्री उषा तिवारी, ग्रामीण जिला अध्यक्ष मनोज चौहान सहित वरिष्ठ पत्रकार गेंद लाल शुक्ला, कमलेश यादव, विजय क्षेत्रपाल, नरेंद्र मेहता, सुरेंद्र गुप्ता मंचस्थ रहे। कार्यक्रम में विशिष्ट रूप से स्वर्गीय मेहता की पुत्री मुंबई निवासी इंदु सिंघवी, दामाद पंकज विशिष्ट भी शामिल हुए। इस अवसर पर प्रेस क्लब पदाधिकारी, कार्यकारिणी सदस्य, सहित पत्रकार बंधु बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
सोमवार को होगी खिताबी भिड़ंत

स्वर्गीय केशवालाल मेहता क्रिकेट प्रतियोगिता के सेमीफाइनल में पहुंचने वाली टीमों का निर्णय हो चुका है। जिनके बीच आज शाम फाइनल में पहुंचने भिड़ंत होगी। पहले सेमीफाइनल मैच कलेक्टर 11 बनाम बालको 11 और दूसरा सेमीफाइनल शिक्षा विभाग बनाम अधिवक्ता 11 की टीम के बीच खेला जाएगा। सोमवार को प्रतियोगिता का फाइनल मुकाबला खेला जाएगा।

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भारत ने विमेंस एशिया कप राइजिंग स्टार्स का खिताब जीता:फाइनल में बांग्लादेश को 46 रन से हराया, तेजल हसबनिस का नाबाद अर्धशतक

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बैंकॉक,एजेंसी। इंडिया-ए ने विमेंस एशिया कप राइजिंग स्टार्स 2026 का खिताब जीत लिया है। टीम ने रविवार को बैंकॉक में खेले गए फाइनल मुकाबले में बांग्लादेश को 46 रन से हराया।

भारतीय टीम ने टॉस जीतकर पहले बैटिंग का फैसला किया था। टीम ने 20 ओवर में 7 विकेट खोकर 134 रन बनाए। जवाब में बांग्लादेश की टीम 19.1 ओवर में 88 रन पर ऑलआउट हो गई।

भारत के लिए तेजल हसबनीस ने नाबाद अर्धशतकीय पारी खेली। उन्होंने 34 बॉल पर नाबाद 51 रन बनाए। इसके लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।

तेजल हसबनीस ने 34 बॉल पर नाबाद 51 रन बनाए।

तेजल हसबनीस ने 34 बॉल पर नाबाद 51 रन बनाए।

भारत लगातार दूसरी बार चैंपियन बना

भारत लगातार दूसरी बार विमेंस एशिया कप राइजिंग स्टार्स टूर्नामेंट जीता है। इससे पहले टीम इंडिया ने 2023 में बांग्लादेश को हराकर खिताब अपने नाम किया था।

इस टूर्नामेंट का पहला एडिशन हॉन्गकॉन्ग में खेला गया था। फाइनल में भारत ने 20 ओवर में सात विकेट पर 127 रन बनाए थे। जवाब में बांग्लादेश की टीम 19.2 ओवर में सिर्फ 96 रन ही बना सकी।

राधा-हेजल के बीच 5वें विकेट के लिए 69 रन की पार्टनरशिप

भारतीय टीम ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया था। भारतीय टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही थी। टीम ने 44 के स्कोर पर 4 विकेट गंवा दिए थे। वृंदा दिनेश 19, नंदीनी कश्यप और अनुष्का शर्मा 8-8, और मिनू मणी 0 पर आउट हो गईं।

4 विकेट गंवाकर संकट में फंसी भारतीय टीम को तेजल हसबनीस और कप्तान राधा यादव ने संभाला। दोनों ने पांचवें विकेट के लिए 69 रन की साझेदारी की।

टीम का स्कोर जब 113 रन था, उस समय राधा यादव के रूप में पांचवां विकेट गिरा। राधा ने 30 गेंदों पर 1 छक्का और 3 चौकों की मदद से 36 रन बनाए।

तेजल हसबनीस ने 34 गेंद पर 2 छक्कों और 3 चौकों की मदद से नाबाद 51 रन बनाकर आउट हुईं। इन दोनों की बदौलत भारतीय टीम ने 7 विकेट के नुकसान पर 134 रन बनाए थे।

बांग्लादेश की तरफ से कप्तान फाहिमा खातून ने 4 विकेट लिए। फरजाना एसमिन और फातिमा जहान सोनिया को 1-1 विकेट मिला।

प्रेमा रावत ने 3 विकेट लिए

135 रन के टारगेट का पीछा करने उतरी बांग्लादेश की टीम 19.1 ओवर में 88 रन पर ऑलआउट हो गई। बांग्लादेश की तरफ से विकेटकीपर शमिमा सुल्ताना ने 20, सरमिन सुल्ताना ने 18, और कप्तान फहिमा खातुन ने 14 रन बनाए।

टीम की 7 बल्लेबाज दहाई का भी आंकडा नहीं छू सकीं। भारत की तरफ से प्रेमा रावत ने 3, सोनिया मेंधिया और तनुजा कंवर ने 2-2, जबकि सायमा ठाकोर और मिनू मणी ने 1-1 विकेट लिए।

दोनों टीमों की प्लेइंग-11

इंडिया-ए विमेंस: नंदिनी कश्यप, वृंदा दिनेश, तेजल हसबनिस, अनुश्का शर्मा, राधा यादव (कप्तान), ममता माडिवाला (विकेटकीपर), मिन्नू मणि, तनुजा कंवर, सोनिया मेंधिया, प्रेमा रावत, साइमा ठाकोर।

बांग्लादेश-ए विमेंस: इशमा तंजीम, शमीमा सुल्ताना (विकेटकीपर), सरमिन सुल्ताना, फहीमा खातून (कप्तान), लता मंडल, फरजाना इस्मिन, शोरीफा खातून, सादिया अख्तर, फातिमा जहां सोनिया, संजिदा अख्तर मेघला, फरिहा त्रिसना।

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