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छत्तीसगढ़

रायपुर : पैरों से चित्र उकेरने वाली पूनम बिटिया के जीवन में मुख्यमंत्री ने भरी नई उम्मीद- अब विशेष विद्यालय में मिलेगा शिक्षण और छात्रवृत्ति

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज जनदर्शन में दूर-दूर से मुख्यमंत्री निवास पहुँच रहे लोगों से मुलाकात कर रहे हैं और उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान भी कर रहे हैं। 
आज जनदर्शन की शुरुआत में ही मुख्यमंत्री ने रायपुर के तेलीबांधा की रहने वाली 11 वर्षीय बिटिया पूनम से भेंट की।बिटिया पूनम की माता ने मुख्यमंत्री श्री साय को बताया कि वह सेरेब्रल पाल्सी से जूझ रही है और बातचीत करने में भी असमर्थ है। उन्होंने बताया कि इस चुनौती के बावजूद पूनम अपने पैरों से बहुत सुंदर चित्र बनाती है। मुख्यमंत्री श्री साय ने अत्यंत आत्मीयता से बिटिया पूनम से बात की और उसे स्नेहपूर्वक दुलार किया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने पूनम की माता को आश्वस्त करते हुए कहा कि “हम आपके साथ हैं, आपको बिटिया के लिए किसी भी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।”
मुख्यमंत्री ने पूनम बिटिया की पढ़ाई की उचित व्यवस्था के लिए उसे विशेष विद्यालय में भर्ती कराने और छात्रवृत्ति प्रदान करने के निर्देश दिए।

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छत्तीसगढ़

वीबी-जी राम जी योजना से करमरी में आत्मनिर्भरता को मिली नई दिशा

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डबरियों से मछली पालन, सिंचाई सुविधा, दलहन-तिलहन की खेती तथा उद्यानिकी गतिविधियों को मिल रहा बढ़ावा

मोहला-मानपुर-अम्बागढ़। आदिवासी बहुल एवं कृषि आधारित आजीविका वाले मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी जिले की ग्राम पंचायत करमरी में वीबी-जी राम जी (विकसित भारत ग्राम गारंटी) योजना के अंतर्गत आज जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया और विकासोन्मुख नारों के साथ योजना का स्वागत किया। ग्रामीणों द्वारा मानव श्रृंखला बनाकर “आत्मनिर्भर गांव-विकसित भारत” का संदेश भी दिया गया। 

कार्यक्रम के अंतर्गत कन्वर्जेंस आधारित आजीविका डबरी जैसे कृषि, मछली तालाब निर्माण कार्यों का अवलोकन किया गया। ये कार्य कृषि विभाग, उद्यानिकी विभाग, सीआरईडीए एवं वन विभाग के आपसी समन्वय से तैयार कार्य योजना के अनुसार संचालित किए जा रहे हैं। इन आजीविका डबरियों से मछली पालन, सिंचाई सुविधा, दलहन-तिलहन की खेती तथा उद्यानिकी गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इससे आदिवासी एवं सीमांत किसानों को स्थायी आजीविका, खाद्य सुरक्षा और अतिरिक्त आय के अवसर उपलब्ध होंगे।

इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती नम्रता सिंह ने ग्रामीणों को संबोधित किया। उन्होंने वीबी-जी राम जी योजना के उद्देश्यों, स्थानीय रोजगार सृजन और कन्वर्जेंस मॉडल की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ग्राम स्तर पर सक्रिय सहभागिता, पारदर्शिता और सामुदायिक स्वामित्व के बिना किसी भी योजना की सफलता संभव नहीं है, और  वीबी-जीराम जी इन मूल सिद्धांतों पर आधारित है।

कार्यक्रम के दौरान हितग्राही विनोद कुमार एवं दलपत साई मेहरू राम को मछली जाल का वितरण किया गया। इससे मछली पालन गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा और ग्रामीणों में स्वरोजगार के प्रति उत्साह बढ़ेगा। हितग्राहियों ने बताया कि योजना से प्राप्त सहयोग के माध्यम से वे मछली पालन के साथ-साथ दलहन-तिलहन की खेती भी करेंगे, जिससे उनकी आय में निरंतर वृद्धि होगी और परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ बनेगी।ग्रामीणों ने वीबी-जीराम जी योजना को आदिवासी बहुल, कृषि-आधारित जिले के लिए सर्वांगीण विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। गांव आत्मनिर्भर होंगे, तभी भारत विकसित बनेगा के संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।

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खेल

केंद्रीय खेल मंत्री से मिले ओलिंपिक संघ के सचिव सिसोदिया:40वें राष्ट्रीय खेलों का आयोजन छत्तीसगढ़ में किए जाने का किया आग्रह

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रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ ओलिंपिक एसोसिएशन के महासचिव डॉ. विक्रम सिंह सिसोदिया ने नई दिल्ली में केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने छत्तीसगढ़ में खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के आयोजन के लिए केंद्र सरकार का आभार जताया।

बैठक में डॉ. सिसोदिया ने छत्तीसगढ़ में चल रही खेल गतिविधियों की विस्तृत जानकारी साझा की। सिसोदिया ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, जो छत्तीसगढ़ ओलिंपिक एसोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं, लगातार खेल अधोसंरचना और खिलाड़ियों के विकास के लिए प्रयासरत हैं।

महासचिव ने केंद्रीय खेल मंत्री से आग्रह किया कि मेघालय में प्रस्तावित 39वें राष्ट्रीय खेलों के बाद 40वें राष्ट्रीय खेलों का आयोजन फरवरी 2028 में छत्तीसगढ़ को सौंपा जाए। इससे राज्य के खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती मिलने के साथ-साथ खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर मंच मिलेगा।

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छत्तीसगढ़

सिम्स में बच्चे के घुटने का सफल ऑपरेशन:जन्मजात दुर्लभ ‘पटेला डिस्लोकेशन’ का हुआ इलाज, 1 लाख में से 5-6 में पाई जाती है

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बिलासपुर,एजेंसी। बिलासपुर स्थित सिम्स अस्पताल के आर्थोपेडिक विभाग ने 5 साल के बच्चे के जन्मजात घुटने की कटोरी (हैबिचुअल पटेला डिस्लोकेशन) का सफल ऑपरेशन किया। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, यह बीमारी अत्यंत दुर्लभ है, जो लगभग एक लाख बच्चों में से केवल 5 से 6 बच्चों में पाई जाती है।

लोरमी निवासी गुलशन साहू को चलने-फिरने में गंभीर दिक्कत के चलते सिम्स के आर्थोपेडिक ओपीडी में लाया गया था। बच्चे के घुटने की कटोरी चलते समय बार-बार अपनी जगह से खिसक जाती थी, जिससे उसे सामान्य गतिविधियों में परेशानी होती थी।

जांच में हुई दुर्लभ बीमारी की पुष्टि

आर्थोपेडिक विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. संजय घिल्ले ने बच्चे की जांच की। एक्स-रे और एमआरआई जांच के बाद ‘हैबिचुअल पटेला डिस्लोकेशन’ की पुष्टि हुई। डॉ. के अनुसार, यह एक जन्मजात विकृति है, जिसमें घुटने की कटोरी को नियंत्रित करने वाली मांसपेशियां एक ओर से अधिक कसी हुई और दूसरी ओर से ढीली होती हैं, जिससे पटेला स्थिर नहीं रह पाती।

आयुष्मान भारत योजना के तहत निशुल्क इलाज

अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि यह जटिल सर्जरी आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत पूरी तरह निशुल्क की गई, जिससे परिजनों को आर्थिक राहत मिली। गंभीरता को देखते हुए आर्थोपेडिक विभागाध्यक्ष डॉ. ए. आर. बेन को प्रकरण की जानकारी दी गई।

29 दिसंबर को बच्चे का ऑपरेशन किया गया। सर्जरी के दौरान घुटने की कटोरी के एक ओर की मांसपेशी को टाइट किया गया और दूसरी ओर की मांसपेशी को ढीला किया गया। मेडिकल पब्लिकेशन के अनुसार इसमें VMO प्लास्टी और क्वाड्रिसेप्स Z-लेंथनिंग तकनीक का उपयोग किया गया।

ऑपरेशन के बाद बच्चा पूरी तरह स्वस्थ

ऑपरेशन के बाद बच्चे की घुटने की कटोरी पूरी तरह स्थिर हो गई है और अब वह सामान्य रूप से चलने-फिरने में सक्षम है। ऑपरेशन टीम में आर्थोपेडिक विभागाध्यक्ष डॉ. ए. आर. बेन, डॉ. संजय घिल्ले (असिस्टेंट प्रोफेसर), डॉ. अविनाश अग्रवाल और डॉ. प्रवीन द्विवेदी शामिल रहे। निश्चेतना विभाग से विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति, डॉ. मिल्टन और डॉ. श्वेता कुजूर ने सेवाएं दीं।

आधुनिक संसाधनों का सही उपयोग- सिम्स प्रबंधन

सिम्स प्रबंधन के अनुसार स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के निर्देशन में शासकीय चिकित्सा संस्थानों को लगातार आधुनिक संसाधन, उन्नत उपकरण और मानव संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। सिम्स में इस तरह की जटिल सर्जरी का सफल होना इसी का प्रमाण है।

पहली बार हुआ ऐसा ऑपरेशन

सिम्स के डीन डॉ. रमणेश मूर्ति ने बताया कि यह ऑपरेशन सिम्स में पहली बार किया गया है, जो संस्थान की बढ़ती तकनीकी क्षमता और चिकित्सकों की दक्षता को दर्शाता है। वहीं चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के तहत निशुल्क इलाज प्रदान कर जरूरतमंद मरीजों को राहत देना सिम्स की प्राथमिकता है।

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