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छत्तीसगढ़

रायपुर : भारतीय संस्कृति में धरती को मां का दर्जा, प्रकृति संरक्षण हमारी परंपरा : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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छत्तीसगढ़ हरित शिखर सम्मेलन

ग्रीन इकोनॉमी के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री

छत्तीसगढ़ हरित शिखर सम्मेलन
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

रायपुर। छत्तीसगढ़ देश की अर्थव्यवस्था का पावर इंजन है और अब हमारा राज्य ग्रीन इकोनॉमी के क्षेत्र में भी अपनी भूमिका लगातार मजबूत कर रहा है।मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय स्थित ऑडिटोरियम में आयोजित दूसरे छत्तीसगढ़ हरित शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ हरित सम्मेलन की उपयोगिता इसलिए और बढ़ जाती है क्योंकि इसके माध्यम से पॉलिसी मेकिंग से जुड़े लोग, उद्योग जगत, शैक्षणिक संस्थान, शोधकर्ता और पर्यावरणविद एक मंच पर आकर महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जलवायु संकट लगातार बढ़ रहा है, ऐसे में यह आवश्यक है कि हम पर्यावरण संरक्षण के उपायों पर केवल चिंतन ही न करें, बल्कि उन्हें व्यवहार में भी उतारें।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार हमेशा से विरासत के साथ विकास की पक्षधर रही है। पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली हमारी हजारों वर्षों पुरानी परंपरा रही है और उसकी रक्षा के लिए सरकार नीतिगत स्तर पर लगातार ठोस कदम उठा रही है।
  
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश में स्टील उत्पादन का एक बड़ा केंद्र है और इस क्षेत्र में कार्बन फुटप्रिंट कम करने के लिए ग्रीन स्टील जैसे नवाचारों को अपनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि भारतीय वन सर्वेक्षण रिपोर्ट 2023 के अनुसार संयुक्त वन एवं वृक्ष आवरण वृद्धि के मामले में छत्तीसगढ़ ने देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि राज्य सरकार की नीतियों के साथ-साथ प्रदेशवासियों की जागरूकता और पर्यावरण के प्रति उनकी जिम्मेदारी का परिणाम है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य में सोलर रूफटॉप योजना के माध्यम से उपभोक्ताओं को ऊर्जादाता बनाया जा रहा है और बायो-एथेनॉल जैसे क्षेत्रों में भी निवेश की व्यापक संभावनाएं उभर रही हैं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा “एक पेड़ मां के नाम” जैसे अभियान चलाकर लोगों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की संस्कृति में धरती को मां का दर्जा दिया गया है, इसलिए संसाधनों का उपयोग करते समय पर्यावरण और धरती के स्वास्थ्य का ध्यान रखना हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य सरकार ने सभी विभागों में ई-ऑफिस व्यवस्था लागू की है, जिससे समय और संसाधनों की बचत होने के साथ-साथ कागज के उपयोग में भी कमी आई है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ जनजातीय बहुल राज्य है और लगभग 44 प्रतिशत क्षेत्र वनों से आच्छादित है। श्री साय ने बताया कि वनांचल में वृक्षों को सरना (देवता) के रूप में पूजा जाता है और सरना को राजस्व रिकॉर्ड में भी देवस्थल के रूप में दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रकृति से जुड़ाव और उसके संरक्षण का भाव जनजातीय समाज से सहज ही सीखा जा सकता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने बताया कि राज्य की नई औद्योगिक नीति में हरित पहल पर विशेष जोर दिया गया है और इस दिशा में कार्य करने वाले उद्योगों को विशेष रियायतें भी दी जा रही हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ ग्रीन समिट के मंच से प्रदेशवासियों से पर्यावरण संरक्षण के लिए आगे आने तथा इसकी शुरुआत स्वयं से करने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर सम्मेलन में प्रस्तुत शोधों के संकलन पर आधारित पुस्तक “एब्स्ट्रेक्ट”, सम्मेलन की प्रमुख चर्चाओं पर आधारित “हाइलाइट्स ऑफ द समिट” तथा जनजातीय कहानियों और परम्पराओं पर आधारित पुस्तक “कथा कंथली” का विमोचन किया।

इस अवसर पर मेघालय के लोकायुक्त सी पी मारक, पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सच्चिदानंद शुक्ल, पीसीसीएफ व्ही श्रीनिवास राव, विबग्योर फाउंडेशन के अध्यक्ष शंखदीप चौधरी, विषय विशेषज्ञ, प्रोफेसर, प्रबुद्धजन, स्कॉलर और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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कोरबा

कोरबा प्रेस क्लब द्वारा वरिष्ठ पत्रकारों की स्मृति रक्तदान एवं स्वास्थ्य शिविर संपन्न: शहरवासियों ने निभाई सहभागिता

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कोरबा। सेवा ही परमो धर्म के ध्येय वाक्य को चरितार्थ करते हुए कोरबा प्रेस क्लब द्वारा तिलक भवन, टी.पी. नगर में भव्य रक्तदान एवं निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण शिविर का सफल आयोजन किया गया। यह आयोजन दिवंगत वरिष्ठ पत्रकार स्वर्गीय विजय सिंह और स्वर्गीय रमेश पासवान की पावन स्मृति में किया गया, जिसमें शहर के गणमान्य नागरिकों, पत्रकारों और उनके परिजनों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

कार्यक्रम में प्रमुख अतिथियों के रूप में सीएमएचओ डॉ. एस. एन. केसरी, रेडक्रॉस सोसाइटी के चेयरमैन रामसिंह अग्रवाल, वाइस चेयरमैन राजेन्द्र तिवारी, चैंबर ऑफ कामर्स के अध्यक्ष योगेश जैन, महिला नेत्री अंजना सिंह, दीपक सिंह, एमजेएम हॉस्पिटल के संचालक डॉ. प्रिंस जैन, स्व. विजय सिंह की धर्मपत्नी श्रीमती मीना सिंह, उनके पुत्र सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी अनिल सिंह, सुनील सिंह, स्व. रमेश पासवान के छोटे भाई रामप्रसाद पासवान व उनके पुत्र अनुप पासवान शामिल हुए। सभी अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रामसिंह अग्रवाल ने कोरबा प्रेस क्लब के इस कार्यक्रम की सराहना की, उन्होंने कहा कि पत्रकारों की स्मृति में इस तरह का सेवा कार्य समाज के लिए एक उत्कृष्ट उदाहरण है। साथ ही स्व. विजय सिंह व स्व. रमेश पासवान के पुराने दिनों के कार्यो को याद किया। इसी तरह सीएमएचओ डॉ. केसरी ने कहा कि कोरबा प्रेस क्लब कई वर्षो से जन सरोकार के तहत रक्तदान शिविर व स्वास्थ्य परीक्षण शिविर का आयोजन करता आ रहा है। ऐसे आयोजन होना चाहिए इससे सीधे जनता को लाभ मिलता है। निश्चित तौर पर कोरबा प्रेस क्लब बधाई का पात्र है।

शिविर में स्व. बिसाहू दास महंत स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध चिकित्सालय के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने अपनी सेवाएँ दीं। जिसमें मुख्य रूप से डॉ. नितिन तोषनीवाल, डॉ. प्रितेश मसीह, डॉ. लिजो टी. जॉन और डॉ. ईशान शामिल थे। इन चिकित्सकों द्वारा बड़ी संख्या में आए लोगों का निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें उचित परामर्श व दवाइयां उपलब्ध कराई गईं। इसी तरह स्व. बिसाहू दास महंत स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध चिकित्सालय के ब्लड बैंक से प्रदर्शक डॉ. राजेश कुमार, सीनियर लैब टेक्नीशियन संतोष सिंह, सीनियर लैब टेक्नीशियन कुमारी उमा कर्ष, कंप्यूटर ऑपरेटर रोहित कश्यप, स्वच्छक सूरज सिदार ने ड्यूटी पर उपस्थित रहकर ब्लड डोनेशन की प्रक्रिया को सुचारू रूप से संपादित किया। इस वृहद आयोजन को सफल बनाने में कोरबा प्रेस क्लब के पदाधिकारियों और सदस्यों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। प्रेस क्लब के समस्त सदस्यों और उनके परिजनों ने भी इस पुनीत कार्य में अपनी सहभागिता दर्ज कराई, जिससे आयोजन एक पारिवारिक और सामाजिक उत्सव के रूप में नजर आया। सुबह 10:00 बजे से शुरू हुए इस शिविर में लोगों का उत्साह देखते ही बनता था। कोरबा प्रेस क्लब के संरक्षक मनोज शर्मा, अध्यक्ष राजेंद्र जायसवाल और सचिव नागेंद्र श्रीवास, कोषाध्यक्ष ई. जयंत, कार्यकारिणी सदस्य राजकुमार शाह समेत अन्य पदाधिकारियों ने इस सफल आयोजन के लिए जिले के सभी डॉक्टरों, रेडक्रॉस सोसायटी की टीम, प्रेस क्लब के साथियों और समस्त नगरवासियों का आभार व्यक्त किया है।

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कोरबा

एसईसीएल मुख्यालय में “विश्व कार्यस्थल सुरक्षा एवं स्वास्थ्य दिवस – 2026” का आयोजन संपन्न

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बिलासपुर/कोरबा। 28.04.2026 को एसईसीएल मुख्यालय प्रांगण में “विश्व कार्यस्थल सुरक्षा एवं स्वास्थ्य दिवस – 2026” के अवसर पर गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस वर्ष विश्व कार्यस्थल सुरक्षा एवं स्वास्थ्य दिवस – 2026” की थीम – “आइए एक स्वस्थ मनो सामाजिक कार्य वातावरण सुनिश्चित करें” है।
कार्यक्रम की शुरुआत अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक हरीश दुहन दवारा निदेशक (तकनीकी संचालन) एन फ्रेंकलिन जयकुमार, निदेशक (मानव संसाधन) बिरंची दास, निदेशक (वित्त) डी. सुनील कुमार, मुख्य सतर्कता अधिकारी हिमांशु जैन, निदेशक तकनीकी (योजना-परियोजना) रमेश चन्द्र महापात्र, विभीन्न विभागाध्यक्षों, श्रम संघ प्रतिनिधियों, अधिकारियों-कर्मचारियों की उपस्थिति में सुरक्षा ध्वज फहराकर की गई।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों, विभीन्न विभागाध्यक्षों, श्रम संघ प्रतिनिधियों ने ने मुख्यालय परिसर स्थित श्रमिक प्रतिमा पर माल्यार्पण किया ।
इस अवसर पर अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक हरीश दुहन ने अपने सम्बोधन में कहा कि हमें अपने माईन व मशीन के साथ -साथ अपने मेनपावर की सुरक्षा व स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना चाहिए, हमें अपने कार्यस्थल पर स्वस्थ्य वातावरण निर्मित कर रखना चाहिए ताकि उसका सकारात्मक परिणाम हमें मिले । उन्होंने आगे कहा सुरक्षा केवल एक प्रक्रिया नहीं बल्कि हमारी कार्य संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है, हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रत्येक कर्मचारी शारिरीक ही नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी सुरक्षित और समर्थ महसूस करे । उन्होंने जोर देते हुए कहा कि हमें अपने दैनिक जीवन में शारीरिक व्यायाम को सदैव अपनाए रखना चाहिए इससे शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य ठीक रहता है । मनो सामाजिक कार्य वातावरण ही सतत उत्पादन और संगठात्मक उत्कृष्ठता की आधारशीला है ।
इस अवसर पर अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक हरीश दुहन दवारा ने उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सुरक्षा शपथ दिलाई। कार्यक्रम के दौरान अध्यक्ष कोल इंडिया लिमिटेड के संदेश का पठन महाप्रबंधक (सुरक्षा/बचाव) प्रकाश राय दवारा किया गया, जिसमें सुरक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में निरंतर अमल व सुधार की आवश्यकता पर बल दिया गया था।

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छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़- टाइगर रिजर्व में 1 लाख पेड़ काटे:15 सालों में 265 एकड़ जमीन पर कब्जा, ISRO सैटेलाइट इमेज से खुलासा, 22 अरेस्ट

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रायपुर/गरियाबंद,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में 1 लाख पेड़ काटे गए। ISRO की सैटेलाइट इमेजरी और ड्रोन सर्वे में इसका खुलासा हुआ है। यहां पिछले करीब 15 सालों से बड़े पैमाने पर कटाई चल रही थी।

जिसके बाद वन विभाग ने कार्रवाई करते हुए 166 अतिक्रमणकारियों के खिलाफ केस दर्ज किया। इनमें 22 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

जांच में पता चला है कि, टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में करीब 265 एकड़ (106 हेक्टेयर) वन भूमि पर अवैध कब्जा किया गया है। जिसे हटाने की कार्रवाई विभाग कर रहा है।

ISRO की सैटेलाइट इमेज, साल 2012 और साल 2026 की तस्वीरें।

ISRO की सैटेलाइट इमेज, साल 2012 और साल 2026 की तस्वीरें।

कब्जे का खुलासा होने के बाद वन विभाग ने ड्रोन सर्वे कराया।

कब्जे का खुलासा होने के बाद वन विभाग ने ड्रोन सर्वे कराया।

सर्वे में कब्जा की गई जमीन, खेत, कटे हुए पेड़ और उनके ठूंठ साफ नजर आए।

सर्वे में कब्जा की गई जमीन, खेत, कटे हुए पेड़ और उनके ठूंठ साफ नजर आए।

सैटेलाइट और ड्रोन से मिला सबूत

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि, हाई-रेजोल्यूशन ड्रोन सर्वे में कब्जा की गई जमीन, खेत, कटे हुए पेड़ और उनके ठूंठ साफ नजर आए हैं। इसके अलावा ISRO की कार्टोसैट तस्वीरों (2006 से 2022 तक) से भी पता चला है कि वन क्षेत्र भी लगातार घटता गया है। पहले जहां एक हेक्टेयर में करीब 1000 पेड़ थे, अब वहां सिर्फ 25 से 50 पेड़ ही बचे हैं।

वन विभाग के अनुसार, अतिक्रमणकारियों ने गर्डलिंग (बागवानी) तकनीक अपनाकर पेड़ों को सुखाया और जमीन कब्जाने लायक बनाई। कई आरोपियों के पास पहले से राजस्व भूमि होने के बावजूद वन क्षेत्र पर अवैध कब्जा किया था।

22 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, इससे पहले इन्हें खाना खिलाया गया।

22 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, इससे पहले इन्हें खाना खिलाया गया।

अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई जारी

गरियाबंद उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर वरुण जैन ने कहा कि अतिक्रमणकारी ऐसा करके इंसानों और वन्यजीवों के बीच संघर्ष की स्थिति पैदा कर रहे हैं।

उन्होंने ​कहा, कब्जे हटाने के लिए विभाग डिजिटल सबूतों का इस्तेमाल कर रहा है। इसके लिए 2006-2008 और 2010-2012 की ISRO की सैटेलाइट तस्वीरें मंगाई गई हैं।

इसके साथ ही ड्रोन सर्वे में पता चला है कि कई जगहों पर बड़े पैमाने पर पेड़ काटे गए हैं और अतिक्रमण किया गया है। कुछ जगहों पर नुकसान भी पहुंचाया गया है। आरोपियों को नोटिस दे दिया गया है और अब उन्हें जमीन से हटाने की कार्रवाई की जा रही है।

वन विभाग अब अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कर रहा है।

वन विभाग अब अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कर रहा है।

22 लोग गिरफ्तार, कार्रवाई और तेज

इसी कड़ी में सीतानदी कोर रेंज के घुरवाड़ क्षेत्र में वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 22 लोगों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी जंगल भूमि पर कब्जा करने और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे थे।

वन विभाग ने मौके पर पहुंचकर अवैध गतिविधियों को रोका और आरोपियों को हिरासत में लिया। इससे पहले महासमुंद जिले में 94 हेक्टेयर वन भूमि अतिक्रमण मुक्त कर 52 लोगों को जेल भेजा गया था।

दोषियों पर सख्त कानूनी शिकंजा

वन विभाग ने साफ किया है कि आरोपियों पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत 7 साल तक की सजा का प्रावधान है। वही लोक संपत्ति क्षति अधिनियम के तहत 3 साल तक कारावास और अवैध कमाई से अर्जित संपत्तियों की जब्ती जैसी कठोर कार्रवाई की जाएगी।

850 हेक्टेयर भूमि अतिक्रमण मुक्त

वन विभाग ने पिछले तीन वर्षों में टाइगर रिजर्व प्रबंधन 850 हेक्टेयर भूमि अतिक्रमण मुक्त करा चुका है और 600 से ज्यादा शिकारी, तस्कर व अतिक्रमणकारियों को गिरफ्तार कर चुका है। अब खाली कराई गई जमीन पर भू-जल संरक्षण और बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया जाएगा।

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