सिक्किम के पत्रकारों को भाया छत्तीसगढ़, कहा – छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विविधता और लोगों का आत्मीय व्यवहार अत्यंत प्रभावित करने वाला
“छत्तीसगढ़ ने भारतीय होने का गर्व कराया” – पत्रकार सुश्री अर्चना प्रधान
सिक्किम से अध्ययन भ्रमण पर आए पत्रकारों ने मुख्यमंत्री से की मुलाकात
मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना, किसान हितैषी योजनाओं, उद्योग नीति तथा नक्सल पुनर्वास नीति को मिली सराहना
रायपुर। छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर प्रदेश है और धन-धान्य से पुष्पित-पल्लवित इस धरा को हमारी सरकार सुंदर, समृद्ध, सुरक्षित और विकसित बनाने के लिए संकल्पित होकर काम कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज अपने निवास कार्यालय में सिक्किम राज्य से अध्ययन भ्रमण पर पहुंचे पत्रकारों के दल से मुलाकात कर आत्मीय संवाद किया और उनसे छत्तीसगढ़ को लेकर ढेर सारी बातें साझा की। उन्होंने सभी अतिथियों को राजकीय गमछा भेंट कर छत्तीसगढ़ में स्वागत और अभिवादन किया। मुख्यमंत्री की सहृदयता और आतिथ्य पाकर सभी पत्रकार अभिभूत हुए और उन्हें सिक्किम आने का निमंत्रण भी दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ 44 प्रतिशत वन क्षेत्र से आच्छादित है तथा यहां 31 प्रतिशत आदिवासी समुदाय निवासरत है। वनोपज संग्रहण और मूल्य संवर्धन के माध्यम से जनजातीय समुदाय आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे हैं। जशपुर जिले में स्व-सहायता समूह की महिलाएं ‘जशप्योर’ ब्रांड के अंतर्गत उत्पाद तैयार कर आय अर्जित कर रही हैं। उन्होंने बताया कि तेंदूपत्ता संग्रहण के लिए सरकार द्वारा 5,500 रुपये प्रति मानक बोरा की दर से भुगतान किया जा रहा है तथा चरण पादुका योजना के तहत निःशुल्क चप्पल प्रदान की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह की चिंता को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2005 में इस योजना की शुरुआत की गई थी। हाल ही छह हजार से अधिक जोड़े इस योजना के अंतर्गत विवाह बंधन में बंधे, जिसे गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी स्थान प्राप्त हुआ है। उन्होंने बताया कि योजना के तहत नवदंपतियों को 35 हजार रुपये की आर्थिक सहायता एवं 15 हजार रुपये का सामग्री सहयोग प्रदान किया जाता है।
नक्सलवाद के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार के सफल नेतृत्व और दृढ़ इच्छाशक्ति के चलते प्रदेश में नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण में है। राज्य सरकार की आकर्षक पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को 50 हजार रुपये की सहायता तथा तीन वर्षों तक प्रति माह 10 हजार रुपये दिए जा रहे हैं। अब तक 2,500 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें रोजगार से जोड़ने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। श्री साय ने बताया कि जगदलपुर में आत्मसमर्पित नक्सलियों द्वारा ‘बस्तर पंडुम’ कैफे का सफल संचालन इसका सशक्त उदाहरण है।
मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि ‘नियद नेल्ला नार’ योजना के अंतर्गत 17 शासकीय योजनाओं को दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचाया गया है, जिससे सड़क, बिजली, पानी, राशन, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं की पहुंच सुदृढ़ हुई है। उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्र अब विकास की मुख्यधारा से तेजी से जुड़ रहे हैं। पर्यटन की संभावनाओं पर मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण है। चित्रकोट जलप्रपात, कुटुम्बसर गुफाएं, अबूझमाड़ के वन और धुड़मारास जैसे स्थल प्रदेश की पहचान हैं। ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु होम स्टे को उद्योग का दर्जा दिया गया है, जिसके तहत ग्रामीणों को पांच कमरों तक निर्माण के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य एवं औद्योगिक विकास के संदर्भ में जानकारी देते हुए बताया कि नवा रायपुर में 100 एकड़ क्षेत्र में मेडिसिटी का निर्माण किया जा रहा है, जहां निम्न आय वर्ग के लिए सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने प्रदेश की आकर्षक नवीन औद्योगिक नीति का ज़िक्र करते हुए कहा कि इसके तहत राज्य को लगभग 8 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। साथ ही चित्रोत्पला फिल्म सिटी की स्थापना से प्रदेश में फिल्म उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।
“छत्तीसगढ़ ने भारतीय होने का गर्व कराया” – सुश्री अर्चना प्रधान
सिक्किम की पत्रकार सुश्री अर्चना प्रधान ने कहा कि छत्तीसगढ़ में ‘मेक इन इंडिया’ का प्रभावी स्वरूप देखने को मिला। भिलाई स्टील प्लांट में रेल पटरियों सहित विभिन्न इस्पात उत्पादों का निर्माण प्रदेश के औद्योगिक सामर्थ्य को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के औद्योगिक इकाइयों को हमें करीब से देखने का मौका मिला और हम जान पाए है कि इस प्रदेश का देश के विकास में कितना महत्वपूर्ण योगदान है।
सिक्किम के पत्रकारों को भाया छत्तीसगढ़
मुख्यमंत्री से भ्रमण उपरांत मिलने पहुंचे पत्रकारों ने कहा कि छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विविधता और लोगों का आत्मीय व्यवहार अत्यंत प्रभावित करने वाला है। उन्होंने भ्रमण के दौरान प्राप्त अनुभवों को साझा करते हुए स्थानीय खान-पान और सांस्कृतिक विरासत की सराहना की। सिक्किम से आए पत्रकारों ने अपने पांच दिवसीय भ्रमण के दौरान भिलाई स्टील प्लांट, गेवरा ओपन माइंस, नवा रायपुर तथा जनजातीय संग्रहालय का अवलोकन किया। पत्रकारों ने बताया कि छत्तीसगढ़ भ्रमण की सुंदर स्मृतियों को अपने साथ लेकर जा रहे हैं, जो उन्हें आजीवन याद रहेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना, किसानों के हित में की गई घोषणाओं, स्वच्छ वातावरण तथा पुनर्वास नीति की सराहना की।
मुख्यमंत्री को भेंट किया सिक्किम का स्मृति चिन्ह ‘थांका’
पत्रकारों के दल ने मुख्यमंत्री को सिक्किम की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक ‘थांका’ पेंटिंग भेंट की। मुख्यमंत्री ने इस उपहार के लिए आभार व्यक्त करते हुए इसे स्नेह और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का प्रतीक बताया।
पत्रकारों ने बताया कि सिक्किम का थांका पेंटिंग एक पवित्र स्मृति चिन्ह है, जो सूती या रेशमी कपड़े पर बौद्ध देवताओं, मंडलों और बुद्ध के जीवन दृश्यों को दर्शाता है। यह हस्तनिर्मित कला सिक्किम की धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है, जिसे अक्सर घर की सजावट और सकारात्मक ऊर्जा के लिए लाया जाता है। इन्हें रोल करके आसानी से ले जाया जा सकता है, जो यात्रियों के लिए एक बेहतरीन सोवेनियर है। यह पारंपरिक कलाकृति सिक्किम के निवासियों के लिए धार्मिक विश्वास और आस्था का प्रतीक है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज झा, मुख्यमंत्री के सलाहकार आर. कृष्णा दास, मुख्यमंत्री के प्रेस अधिकारी आलोक सिंह, पीआईबी गंगटोक के सहायक निदेशक मानस प्रतिम शर्मा, पीआईबी रायपुर के सहायक निदेशक सुदीप्तो कर, पुरुषोत्तम झा और सरद बसनेत,पत्रकार बेनु प्रकाश तिवारी, विकास क्षेत्री, होमनाथ दाबरी, ईश्वर, सुश्री अर्चना प्रधान, सुश्री अनुशीला शर्मा, प्रकाश अधिकारी, ललित दहल, विनोद तमंग, मोहन कुमार कार्की, नार बहादुर क्षेत्री उपस्थित थे।
नमो सेवा गाथा पर विद्यार्थियों की प्रभावशाली प्रस्तुति, लगभग 495 लोग हुए शामिल कोरबा, 07 अक्टूबर 2026। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत सेजेस अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, पाली में ‘नमो सेवाकृअनकही कहानियां’ कार्यक्रम के तहत नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया। विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से महिला सशक्तिकरण और नमो सेवा गाथा पर प्रभावशाली प्रस्तुति दी। विद्यार्थियों की शानदार प्रस्तुति से ग्रामीणजन, जनप्रतिनिधि, पालक और छात्र-छात्राएं उत्साहित नजर आए। कार्यक्रम में स्कूली विद्यार्थियों, जनप्रतिनिधियों और पालकों सहित लगभग 495 लोग उपस्थित रहे।
कोरबा, 7 अक्टूबर 2026। समाज कल्याण विभाग द्वारा आज प्रतीक जैन मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत कोरबा, ओएसडी तरुण कुमार किरण की उपस्थिति में पात्र दिव्यांगजनों को मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल वितरित की गई। दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के उद्देश्य से दी गई इस सहायता से उनके आवागमन में सुविधा होगी और वे दैनिक कार्य अधिक सुगमता से कर सकेंगे। मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल प्राप्त करने वाले हितग्राहियों में रेल्वे कॉलोनी, कोरबा निवासी 55 वर्षीय सैय्यद याकूब, पिता सैय्यद अब्दुल कादर, सुभाष ब्लॉक, कोरबा निवासी 44 वर्षीय श्रीमती सुनीता दास, पिता बाबू राज, शांति नगर, कुसमुंडा निवासी 34 वर्षीय श्रीमती सीमा कुमारी, पिता अदरू, तथा गुरसिया, कटघोरा निवासी 20 वर्षीय प्रदीप कुमार उरांव, पिता हरिराम शामिल हैं। ट्राईसाइकिल मिलने पर हितग्राहियों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए शासन और समाज कल्याण विभाग के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि इस सहायता से उनकी गतिशीलता बढ़ेगी और वे अपने दैनिक कार्यों के लिए दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय अधिक आत्मनिर्भर बन सकेंगे।
सुरक्षित छत और रंगीन दीवारों ने बदला माहौल, बरपाली आंगनबाड़ी में बढ़ी नौनिहालों की उपस्थिति कोरबा, 07 अक्टूबर 2026। कभी जर्जर भवन की दीवारों और असुविधाओं के बीच संचालित होने वाला आंगनबाड़ी केंद्र अब बच्चों की खिलखिलाहट और रंग-बिरंगे चित्रों से गुलजार है। जहां पहले पालकों को अपने छोटे बच्चों को केंद्र भेजते समय उनकी सुरक्षा की चिंता रहती थी, वहीं अब ग्राम पंचायत बरपाली का नया आंगनबाड़ी भवन नौनिहालों के लिए सुरक्षित, सुंदर और सहज वातावरण बन गया है। जिला प्रशासन द्वारा डीएमएफ मद से 11.69 लाख की लागत से निर्मित नए भवन में पक्की छत, मजबूत दीवार, पक्का फर्श, रंगीन चित्र और बच्चों के लिए खिलौनों सहित आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसका असर बच्चों की उपस्थिति में भी दिखाई दे रहा है और 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चे नियमित रूप से आंगनबाड़ी पहुंच रहे हैं। पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के बरपाली स्थित इस आंगनबाड़ी केंद्र में वर्तमान में 30 बच्चे पंजीकृत हैं। इनमें 6 माह से 3 वर्ष आयु वर्ग के 17 तथा 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के 13 बच्चे शामिल हैं। इसके साथ ही 2 गर्भवती महिलाएं, 3 शिशुवती माताएं और 6 किशोरी बालिकाएं भी केंद्र की सेवाओं से लाभान्वित हो रही हैं। नए भवन के बाद बच्चों के लिए उपलब्ध स्थान और वातावरण में आए बदलाव ने केंद्र की गतिविधियों को भी अधिक व्यवस्थित किया है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती शिवकला बताती हैं कि पुराने भवन की स्थिति ऐसी थी कि बच्चों को केंद्र में रखते समय उनकी सुरक्षा को लेकर हमेशा चिंता बनी रहती थी। भवन जर्जर होने के कारण पालक भी बच्चों को आंगनबाड़ी भेजने में सहज महसूस नहीं करते थे। नए भवन के बनने से सबसे बड़ा बदलाव बच्चों की सुरक्षा और उनके सहज वातावरण में आया है। अब पक्की छत, मजबूत दीवार और पक्के फर्श वाले भवन में बच्चे आराम से बैठते हैं, खेलते हैं और विभिन्न गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं। श्रीमती शिवकला के अनुसार नए भवन की दीवारों पर बने रंग-बिरंगे चित्र बच्चों को खूब आकर्षित करते हैं। बच्चे चित्रों को देखकर उनके बारे में जानने की उत्सुकता दिखाते हैं और आसपास की वस्तुओं को पहचानने का प्रयास करते हैं। खिलौनों और आकर्षक वातावरण के कारण उनमें केंद्र आने की रुचि भी बढ़ी है। पहले की तुलना में अब बच्चे अधिक संख्या में आंगनबाड़ी पहुंचते हैं और 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों की नियमित उपस्थिति दिखाई देती है। बच्चों के लिए केंद्र अब केवल आने-जाने की जगह नहीं रहा, यहां वे खेलते हुए सीखते हैं और सहज माहौल में अपनी प्रारंभिक शिक्षा की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। आंगनबाड़ी सहायिका श्रीमती चमेली बाई बताती हैं कि नए भवन में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने और उन्हें भोजन कराने में भी काफी सुविधा हुई है। निर्धारित साप्ताहिक मेन्यू के अनुसार सुबह बच्चों को मीठा या नमकीन दलिया दिया जाता है। इसके बाद दाल, चावल और सब्जी सहित भोजन उपलब्ध कराया जाता है। सुरक्षित और सुविधाजनक भवन में बच्चों को भोजन कराने तथा उनकी देखभाल करने में आसानी होती है। बच्चों का नियमित रूप से केंद्र आना उनके लिए भी उत्साह का विषय है।
कार्यकर्ता श्रीमती शिवकला कहती हैं कि पहले भवन की स्थिति के कारण बच्चों और पालकों में जो संकोच था, वह अब दूर हुआ है। नए भवन ने बच्चों को सुरक्षित जगह दी है और आकर्षक वातावरण ने उनके मन में आंगनबाड़ी के प्रति अपनापन बढ़ाया है। बच्चे सुबह केंद्र आने के लिए उत्साहित रहते हैं और यहां होने वाली गतिविधियों में रुचि के साथ शामिल होते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों के लिए ऐसी बेहतर सुविधा उपलब्ध होने से उन्हें अपने कार्य में भी संतोष और उत्साह मिलता है। नौनिहालों के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराने की इस पहल के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद दिया।