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छत्तीसगढ़

रायपुर : AI के युग में शिक्षक बनें विद्यार्थियों के मार्गदर्शक, तकनीक के विवेकपूर्ण उपयोग की दें सीख : राज्यपाल डेका

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शिक्षक नई पीढ़ी के निर्माता, विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में शिक्षा की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण : मुख्यमंत्री साय

लोकभवन में राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह का गरिमामय आयोजन

प्रदेश के 63 उत्कृष्ट शिक्षक राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित, चार शिक्षकों को मिला राज्य शिक्षक सम्मान स्मृति पुरस्कार

युक्तियुक्तकरण के बाद प्रदेश में अब एक भी स्कूल शिक्षकविहीन नहीं, शिक्षा में गुणवत्ता और नवाचार पर सरकार का विशेष जोर – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

कोरबा जिले के कामता प्रसाद जायसवाल को डॉ. बलदेव प्रसाद मिश्र स्मृति पुरस्कार

 AI के युग में शिक्षक बनें विद्यार्थियों के मार्गदर्शक, तकनीक के विवेकपूर्ण उपयोग की दें सीख : राज्यपाल श्री डेका
 AI के युग में शिक्षक बनें विद्यार्थियों के मार्गदर्शक, तकनीक के विवेकपूर्ण उपयोग की दें सीख : राज्यपाल श्री डेका
 AI के युग में शिक्षक बनें विद्यार्थियों के मार्गदर्शक, तकनीक के विवेकपूर्ण उपयोग की दें सीख : राज्यपाल श्री डेका
 AI के युग में शिक्षक बनें विद्यार्थियों के मार्गदर्शक, तकनीक के विवेकपूर्ण उपयोग की दें सीख : राज्यपाल श्री डेका
 AI के युग में शिक्षक बनें विद्यार्थियों के मार्गदर्शक, तकनीक के विवेकपूर्ण उपयोग की दें सीख : राज्यपाल श्री डेका

रायपुर 5 सितंबर 2026। राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शिक्षक दिवस के अवसर पर आज लोकभवन के छत्तीसगढ़ मण्डपम् में आयोजित राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षक-शिक्षिकाओं को सम्मानित कर उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। समारोह में वर्ष 2025-26 के लिए प्रदेश के 63 उत्कृष्ट शिक्षकों को राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। चार उत्कृष्ट शिक्षकों को राज्य शिक्षक सम्मान स्मृति पुरस्कार प्रदान किए गए। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने वर्ष 2026-27 के राज्य शिक्षक सम्मान के लिए चयनित 64 शिक्षकों के नामों की घोषणा भी की।

समारोह के मुख्य अतिथि राज्यपाल रमेन डेका ने शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में शिक्षा और शिक्षक की भूमिका भी व्यापक हो रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस दौर में शिक्षकों और विद्यार्थियों का नई तकनीकों से परिचित होना आवश्यक है, लेकिन उससे भी अधिक जरूरी तकनीक का विवेकपूर्ण, जिम्मेदार और मानवीय मूल्यों के अनुरूप उपयोग है। उन्होंने कहा कि AI हमारा सहायक बने, हमारा नियंत्रक नहीं। शिक्षक विद्यार्थियों को तकनीक का उपयोग ज्ञान अर्जित करने, नवाचार करने और अपने व्यक्तित्व को निखारने के लिए प्रेरित करें।

राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि आज गूगल और डिजिटल तकनीक के माध्यम से हमारे पास सूचनाओं का विशाल संसार उपलब्ध है। इसके बावजूद हमें यह ध्यान रखना होगा कि तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता स्वतंत्र चिंतन और बौद्धिक विकास को प्रभावित न करे। दुनिया के अनेक देशों में विद्यार्थियों द्वारा स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के उपयोग को लेकर गंभीर विचार-विमर्श हो रहा है। तकनीक हमें जानकारी उपलब्ध करा सकती है, लेकिन संस्कार, संवेदना, अनुशासन, प्रेरणा और जीवन की सही दिशा गुरु से ही मिलती है। इसलिए बदलते समय में शिक्षक की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने देश की शिक्षा व्यवस्था को अधिक व्यावहारिक, कौशल आधारित, बहुभाषी और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार तैयार किया है। आने वाले समय में शिक्षा के स्वरूप में व्यापक बदलाव देखने को मिलेंगे। ऐसे में शिक्षकों को निरंतर अपने ज्ञान और कौशल को अद्यतन करना होगा। साथ ही विद्यार्थियों की रुचि और प्रतिभा को पहचानकर उन्हें सही विषय और करियर चुनने में मार्गदर्शन देना होगा। विद्यार्थियों की काउंसलिंग भी शिक्षक की महत्वपूर्ण भूमिका का हिस्सा है।

राज्यपाल ने कहा कि शिक्षण केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि एक महान और गरिमामय दायित्व है। शिक्षक अपने ज्ञान के साथ-साथ अपने आचरण से भी विद्यार्थियों को शिक्षित करते हैं। बच्चे अपने शिक्षकों को आदर्श के रूप में देखते हैं, इसलिए शिक्षकों को अपने दायित्वों का पूरी निष्ठा, संवेदनशीलता और समर्पण के साथ निर्वहन करना चाहिए। प्रत्येक विद्यार्थी कैसे आगे बढ़े, उसकी प्रतिभा कैसे निखरे और उसका भविष्य कैसे बेहतर बने, यह शिक्षक की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

अपने विद्यार्थी जीवन की स्मृतियां साझा करते हुए राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि शिक्षक दिवस उन्हें प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक की अपनी यात्रा की याद दिलाता है। पहले शिक्षक और विद्यार्थी के बीच आदर, आत्मीयता और विश्वास का अत्यंत गहरा संबंध होता था। सीमित संसाधनों के बावजूद शिक्षक पूरी सेवा भावना और समर्पण के साथ विद्यार्थियों का भविष्य संवारते थे। यही समर्पण और आत्मीयता शिक्षक-विद्यार्थी संबंध की वास्तविक शक्ति है।

उन्होंने कहा कि शिक्षक और विद्यार्थी का संबंध केवल कक्षा तक सीमित नहीं होता। शिक्षक विद्यार्थी के व्यक्तित्व, सोच और भविष्य निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शिक्षक अपने विद्यार्थियों की रुचि, क्षमता और विशेष प्रतिभा को पहचानें तथा उन्हें जीवन में सही दिशा चुनने के लिए प्रेरित करें।

राज्यपाल श्री डेका ने शासकीय सेवा में स्थानांतरण को सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बताते हुए कहा कि जहां भी दायित्व मिले, उसे सहजता से स्वीकार कर पूरी जिम्मेदारी और समर्पण के साथ कार्य करना चाहिए। उन्होंने सम्मानित सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं को बधाई देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश के शिक्षक अपने ज्ञान, अनुभव और समर्पण से छत्तीसगढ़ की नई पीढ़ी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे।

शिक्षा का उद्देश्य सक्षम नागरिक और श्रेष्ठ समाज का निर्माण : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

समारोह की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शिक्षक दिवस पर सभी गुरुजनों को शुभकामनाएं दीं और राज्य स्तरीय सम्मान प्राप्त करने वाले शिक्षक-शिक्षिकाओं को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सम्मान शिक्षकों के समर्पण, कठिन परिश्रम, नवाचार और विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण के लिए किए गए उत्कृष्ट कार्यों का सम्मान है। शिक्षक वास्तव में राष्ट्र और नई पीढ़ी के निर्माता हैं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने महान शिक्षाविद् एवं पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का पुण्य स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि भारत की शिक्षा परंपरा अत्यंत समृद्ध और गौरवशाली रही है। हमारे यहां शिक्षा का उद्देश्य कभी केवल डिग्री या नौकरी प्राप्त करना नहीं रहा, बल्कि व्यक्ति को ज्ञानवान, संस्कारवान, सक्षम और जिम्मेदार नागरिक बनाना रहा है। ऐसी शिक्षा ही व्यक्ति को समाज और राष्ट्र के विकास में सार्थक योगदान देने के लिए तैयार करती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और प्रत्येक बच्चे तक बेहतर शैक्षणिक अवसर पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। पिछले ढाई वर्षों में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। युक्तियुक्तकरण के बाद प्रदेश में अब एक भी स्कूल शिक्षकविहीन नहीं है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को लागू करते हुए शिक्षा को संस्कार, कौशल और रोजगार से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की भौगोलिक, सामाजिक और भाषायी विविधता को ध्यान में रखते हुए शिक्षा व्यवस्था में स्थानीय आवश्यकताओं को भी महत्व दिया जा रहा है। बस्तर अंचल में बच्चों को उनकी स्थानीय बोली के माध्यम से प्रारंभिक शिक्षा देने की पहल की गई है। इससे बच्चों के लिए सीखने की प्रक्रिया अधिक सहज और प्रभावी बन रही है। शासकीय विद्यालयों में पैरेंट्स-टीचर मीट को बढ़ावा देकर अभिभावकों को भी बच्चों की शिक्षा और विद्यालय की गतिविधियों से सक्रिय रूप से जोड़ा जा रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश के 341 विद्यालयों का चयन पीएम श्री योजना के अंतर्गत किया गया है। इन विद्यालयों को आधुनिक सुविधाओं, बेहतर शैक्षणिक वातावरण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके साथ ही स्वामी विवेकानंद के नाम पर 150 विद्यालय प्रारंभ किए जा रहे हैं। शिक्षकों की लंबे समय से लंबित पदोन्नतियों को भी सरकार ने प्राथमिकता के साथ पूरा किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर जैसे दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के समान अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से ओरछा और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही हैं। इन प्रयासों से दूरस्थ अंचलों के बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण और आगे बढ़ने के नए अवसर मिलेंगे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के साथ विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का हमारा लक्ष्य है और इस लक्ष्य को प्राप्त करने में शिक्षा विभाग तथा हमारे शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। आज जिन बच्चों को शिक्षक ज्ञान, संस्कार और कौशल दे रहे हैं, वही आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ और देश के विकास का नेतृत्व करेंगे। इसलिए एक शिक्षक का योगदान केवल एक विद्यार्थी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसका प्रभाव आने वाली पीढ़ियों और पूरे समाज पर पड़ता है।

AI आधारित स्मार्ट स्कूलों के माध्यम से नवाचार को बढ़ावा : स्कूल शिक्षा मंत्री

समारोह के विशिष्ट अतिथि स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राज्य सरकार शिक्षा में आधुनिक तकनीक और नवाचार के उपयोग को निरंतर बढ़ावा दे रही है। प्रदेश में AI आधारित स्मार्ट स्कूल विकसित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही विद्यार्थियों में अच्छे संस्कार, रचनात्मकता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के लिए विविध गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा में नवाचार के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को अग्रणी राज्यों में शामिल करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

स्कूल शिक्षा मंत्री श्री यादव ने इस अवसर पर आगामी वर्ष 2026-27 के राज्य शिक्षक सम्मान के लिए चयनित 64 शिक्षक-शिक्षिकाओं के नामों की घोषणा की और उन्हें शुभकामनाएं दीं।

चार शिक्षकों को राज्य शिक्षक सम्मान स्मृति पुरस्कार

राज्य स्तरीय समारोह में चार उत्कृष्ट शिक्षकों को विशिष्ट राज्य शिक्षक सम्मान स्मृति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के राजेश कुमार प्रजापति को डॉ. पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी स्मृति पुरस्कार, कोरबा जिले के कामता प्रसाद जायसवाल को डॉ. बलदेव प्रसाद मिश्र स्मृति पुरस्कार, दुर्ग जिले की श्रीमती प्रज्ञा सिंह को डॉ. मुकुटधर पाण्डेय स्मृति पुरस्कार तथा सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की श्रीमती प्रियंका गोस्वामी को श्री गजानन माधव मुक्तिबोध स्मृति पुरस्कार प्रदान किया गया।

इसके साथ ही प्रधान पाठक, व्याख्याता, व्याख्याता एल.बी., शिक्षक एल.बी., सहायक शिक्षक तथा सहायक शिक्षक एल.बी. संवर्ग के कुल 63 उत्कृष्ट शिक्षकों को राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। सम्मानित शिक्षकों के योगदान और नवाचारी प्रयासों की सराहना करते हुए अतिथियों ने उनसे प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने में निरंतर योगदान देने का आह्वान किया।

समारोह में स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने स्वागत उद्बोधन दिया। संचालक लोक शिक्षण श्री ऋतुराज रघुवंशी ने आभार प्रदर्शन किया।

इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना, स्कूल शिक्षा विभाग के विशेष सचिव संतोष देवांगन सहित विभागीय अधिकारी, प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।

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कोरबा

तेज रफ्तार बाइक पेड़ से टकराई, 2 नाबालिगों की मौत:कोरबा में मोड़ पर बेकाबू हुई, अगला हिस्सा टूटा, बिना हेलमेट चला रहे थे बाइक

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कोरबा। कोरबा जिले के दीपका थाना क्षेत्र के लिटियाखार गांव में शुक्रवार शाम तेज रफ्तार बाइक बेकाबू होकर पेड़ से टकरा गई। हादसे में बाइक सवार 2 नाबालिग लड़कों की मौके पर ही मौत हो गई। दोनों के सिर में गंभीर चोटें आई थीं। हादसे के बाद गांव में शोक का माहौल है।

जानकारी के मुताबिक करण चौहान (16) बाइक चला रहा था और राजा नेटी (14) पीछे बैठा था। दोनों तिवरता से लिटियाखार की ओर लौट रहे थे। शाम के समय एक मोड़ पर तेज रफ्तार बाइक अचानक अनियंत्रित हो गई और सड़क किनारे लगे पेड़ से जा टकराई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि दोनों को सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आईं। उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

हादसे के बाद जुटी भीड़

घटना की जानकारी मिलते ही राहगीरों और स्थानीय लोगों की भीड़ मौके पर जुट गई। लोगों ने दीपका पुलिस को सूचना दी। पुलिस टीम मौके पर पहुंची और दोनों के परिवारों को हादसे की जानकारी दी। पुलिस ने हीरो डीलक्स बाइक क्रमांक CG 12 BQ 4982 को कब्जे में ले लिया है।

बिना हेलमेट तेज रफ्तार में चला रहे थे बाइक

स्थानीय लोगों के मुताबिक दोनों नाबालिग बिना हेलमेट बाइक चला रहे थे। तेज रफ्तार के कारण मोड़ पर बाइक बेकाबू हुई और सीधे पेड़ से जा टकराई। टक्कर में बाइक का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।

शनिवार सुबह हुआ पोस्टमॉर्टम

देर रात होने के कारण दोनों शवों को अस्पताल के शवगृह में रखवाया गया। शनिवार सुबह पंचनामा कार्रवाई के बाद पोस्टमार्टम कराया गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर हादसे की जांच शुरू कर दी है।

घटना के बाद दोनों परिवारों में मातम है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि नाबालिगों को वाहन न दें और हमेशा हेलमेट समेत यातायात नियमों का पालन करें।

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कोरबा

चलते ट्रक में कोरबा पहुंचा दुर्लभ फ्लाइंग स्नेक:हवा में ग्लाइड करता है स्नेक, RCRS टीम ने किया सुरक्षित रेस्क्यू, देखने जुटी भीड़

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कोरबा। कोरबा में एक दुर्लभ फ्लाइंग स्नेक का सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। यह सांप धरमजयगढ़ इलाके से एक चलते ट्रक पर चढ़कर कोरबा पहुंच गया था। समय रहते लोगों की नजर उस पर पड़ गई, जिससे उसकी जान बच गई।

दरअसल, टीपी नगर के ट्रक स्टैंड में एक ट्रक के पीछे लोगों ने खूबसूरत और रंग-बिरंगा सांप देखा। ट्रक ड्राइवर अनिल निषाद ने बताया कि सांप का रंग और रूप आम सांपों से अलग था। पहचान नहीं होने पर उन्होंने तुरंत वन विभाग को सूचना दी।

वन विभाग ने RCRS (रेप्टाइल केयर एंड रेस्क्यूअर सोसाइटी) की हेल्पलाइन पर जानकारी दी। सूचना मिलते ही RCRS अध्यक्ष अविनाश यादव के साथ मनस, उमेश, सौम्य और अतुल की टीम मौके पर पहुंची। टीम ने सांप की पहचान फ्लाइंग स्नेक के रूप में की। दुर्लभ प्रजाति होने के कारण उसे देखने के लिए लोगों की भीड़ जुट गई।

RCRS टीम ने कोरबा वनमंडलाधिकारी जितेंद्र उपाध्याय को इसकी जानकारी दी। उनके निर्देश और उपवनमंडलाधिकारी सूर्यकांत सोनी के मार्गदर्शन में वन्यजीव रेस्क्यू के नियमों का पालन करते हुए सांप को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

हाइड्रोलिक मशीन के पास छिपा था सांप

सांप ट्रक के पीछे लगी हाइड्रोलिक मशीन के पास बैठा था। वहां से उसे निकालना काफी मुश्किल था, क्योंकि वह मशीन के अंदर जा सकता था। अगर ऐसा होता तो उसे ढूंढना मुश्किल हो जाता। मशीन चालू होने पर सांप के दबने या घायल होने का भी खतरा था। टीम ने सावधानी से रेस्क्यू कर उसे बाहर निकाला।

ट्रक ड्राइवर अनिल निषाद ने बताया कि ट्रक धरमजयगढ़, छाल और घरघोड़ा होते हुए सामान लेकर कोरबा आया था। आशंका है कि रास्ते में किसी पेड़ से सांप ट्रक पर चढ़ गया होगा और चलते ट्रक के साथ ही कोरबा पहुंच गया।

उड़ता नहीं, हवा में ग्लाइड करता है फ्लाइंग स्नेक

फ्लाइंग स्नेक वास्तव में उड़ता नहीं है, बल्कि पेड़ों के बीच हवा में ग्लाइड करता है। यह ज्यादातर पेड़ों पर रहता है। एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर जाने के लिए यह ऊंचाई से छलांग लगाता है और अपने शरीर को चपटा व चौड़ा कर लेता है। इसके बाद शरीर को लहराते हुए हवा में अपनी दिशा तय करता है।

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कोरबा

NTPC कोरबा की 7 यूनिट 36 घंटे से बंद:बे-ब्रेकर टेस्टिंग के दौरान खराबी, छत्तीसगढ़ समेत सात राज्यों में संकट, ब्लैकआउट की जांच जारी

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कोरबा। छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े बिजली उत्पादक एनटीपीसी कोरबा संयंत्र में एक ब्रेकडाउन हो गया है। पावर ग्रिड कार्पोरेशन ऑफ इंडिया (PGCIL) द्वारा बे-ब्रेकर की टेस्टिंग के दौरान आई इलेक्ट्रिकल खराबी के कारण एनटीपीसी कोरबा की सभी सातों इकाइयां एक साथ बंद हो गईं थीं।

हालांकि, शनिवार को एनटीपीसी कोरबा की जनसंपर्क अधिकारी उषा घोष ने बताया कि तीन इकाइयों को दोबारा चालू कर दिया गया है। इनमें 500-500 मेगावाट की दो और 200 मेगावाट की एक इकाई शामिल है। बाकी चार इकाइयों को भी सुरक्षा और तय प्रक्रिया के तहत क्रमवार चालू करने का काम जारी है।

इस ब्रेकडाउन के कारण एनटीपीसी कोरबा का 2600 मेगावाट बिजली उत्पादन पूरी तरह ठप हो गया है। एनटीपीसी कोरबा की कुल क्षमता 2600 मेगावाट है, जिसमें 200 मेगावाट की तीन और 500 मेगावाट की चार इकाइयां शामिल हैं। सभी सातों इकाइयों के एक साथ बंद होने से संयंत्र में ब्लैकआउट जैसी स्थिति बन गई।

ब्रेकर टेस्टिंग के दौरान इलेक्ट्रिकल फॉल्ट

जानकारी के मुताबिक, PGCIL की टीम PGCIL बे में ब्रेकर की जांच और टेस्टिंग कर रही थी। इसी दौरान अचानक इलेक्ट्रिकल फाल्ट हुआ, जिसका असर सीधे एनटीपीसी की सभी यूनिटों पर पड़ा। फाल्ट इतना बड़ा था कि सभी यूनिटें एक के बाद एक बंद होती चली गईं। बताया गया कि फाल्ट के बाद पूरे प्लांट में अंधेरा छा गया और सहायक व्यवस्थाएं भी प्रभावित हुईं।

छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में असर

इस घटना का असर छत्तीसगढ़ के साथ-साथ दूसरे राज्यों की बिजली सप्लाई पर भी पड़ा है। एनटीपीसी कोरबा से छत्तीसगढ़ के अलावा मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा सहित कई राज्यों को बिजली सप्लाई की जाती है। उत्पादन ठप होने से ग्रिड पर भी दबाव बढ़ गया है।

जमनीपाली टाउनशिप में बिजली गुल

जमनीपाली स्थित एनटीपीसी टाउनशिप में भी डेढ़ घंटे तक बिजली गुल रही। बाद में डीजी सेट और वैकल्पिक व्यवस्था से टाउनशिप की सप्लाई बहाल की गई। देर रात तक स्ट्रीट लाइटें बंद रहने से टाउनशिप में अंधेरा पसरा रहा। शनिवार सुबह तक भी यूनिटें शुरू नहीं हो सकी थीं।

ब्लैकआउट के बाद NTPC कोरबा की तीन यूनिटें फिर शुरू

इस संबंध में शनिवार को एनटीपीसी कोरबा की जनसंपर्क अधिकारी उषा घोष से बात की गई। उन्होंने बताया कि कल हुए ब्लैकआउट के बाद एनटीपीसी कोरबा की तीन बिजली उत्पादन इकाइयों को दोबारा चालू कर दिया गया है। इनमें 500 मेगावाट की दो और 200 मेगावाट की एक इकाई शामिल है।

वहीं, बाकी चार इकाइयों को चालू करने का काम भी जारी है। इन्हें सुरक्षा और तय प्रक्रिया के अनुसार एक-एक करके शुरू किया जा रहा है। ब्लैकआउट की वजह क्या रही, इसकी भी जांच की जा रही है।

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