निजी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की बैठक में नैक ग्रेडिंग, पीएचडी की गुणवत्ता, पाठ्यक्रमों और सामाजिक दायित्वों की समीक्षा
रायपुर, 3 सितंबर 2026। राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि विद्यार्थियों का कल्याण विश्वविद्यालयों की सर्वाेच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। विश्वविद्यालय शिक्षा के पवित्र मंदिर हैं, इसलिए उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और सामाजिक दायित्वों के निर्वहन पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए।
राज्यपाल रमेन डेका ने आज निजी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की बैठक लेकर विश्वविद्यालयों में शिक्षा एवं शोध की गुणवत्ता सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों की समीक्षा की। राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों को नैक (NAAC) में बेहतर ग्रेडिंग प्राप्त करने के लिए आवश्यक तैयारियां करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों और शिक्षकों का अनुपात संतुलित होना चाहिए तथा विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के प्रयास किए जाएं। प्रत्येक विश्वविद्यालय में कम से कम 1000 विद्यार्थियों की संख्या सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य करने को कहा।
विश्वविद्यालय द्वारा शोधार्थियों को प्रोत्साहित करना चाहिए श्री डेका ने कहा कि पीएच.डी. उपाधि प्रदान करने की प्रक्रिया पूरी तरह गुणवत्तापूर्ण और पारदर्शी होनी चाहिए। पीएच.डी. के लिए होने वाले पंजीयनों की विशेषज्ञों के माध्यम से रैंडम चेकिंग कराई जाएगी, ताकि शोध कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को केवल उपाधि प्रदान करने तक सीमित न रहकर ऐसे शोध को प्रोत्साहित करना चाहिए, जिसका समाज और देश के विकास में वास्तविक योगदान हो।
रोजगार एवं भविष्य की संभावनाओं वाले विषयों को प्राथमिकता दें राज्यपाल ने कहा कि कोई भी नया पाठ्यक्रम प्रारंभ करने से पहले विश्वविद्यालय संबंधित क्षेत्र में सर्वेक्षण कर आवश्यकता और विद्यार्थियों की रुचि का आकलन करें। जिन पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों की संख्या नहीं है, उन्हें बंद करने पर विचार किया जाए। अनावश्यक रूप से पाठ्यक्रमों की संख्या बढ़ाने के बजाय रोजगार एवं भविष्य की संभावनाओं वाले विषयों को प्राथमिकता दी जाए।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप इंटीग्रेटेड कोर्स को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल श्री डेका ने एनवायरनमेंटल साइंस और साइबर सिक्योरिटी जैसे उभरते क्षेत्रों में नए पाठ्यक्रम शुरू करने की संभावनाओं पर भी विचार करने को कहा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप इंटीग्रेटेड कोर्स को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी उन्होंने जोर दिया।
विश्वविद्यालय गोद लिए गए गांवों में स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका हो श्री डेका ने सभी निजी विश्वविद्यालयों को अपने आसपास के गांवों को गोद लेकर वहां शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में नियमित कार्यक्रम संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को अपने सामाजिक दायित्वों को प्रभावी ढंग से निभाना चाहिए। गोद लिए गए गांवों में स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों के साथ ब्रेस्ट कैंसर सर्वे जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में भी विश्वविद्यालय सक्रिय भूमिका निभाएं।
स्वास्थ्य के लिए योग और ध्यान महत्वपूर्ण राज्यपाल ने विद्यार्थियों के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग और ध्यान को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों को प्रत्येक विद्यार्थी तक योग पहुंचाने का प्रयास करना चाहिए। विद्यार्थियों को योग के लिए इस प्रकार प्रेरित किया जाए कि यह उनकी दैनिक जीवनशैली और आदत का हिस्सा बन जाए।
छत्तीसगढ़ी भाषा से जुड़े विषयों पर शोध एवं अकादमिक गतिविधियों को बढ़ावा दें डेका ने छत्तीसगढ़ी भाषा के संरक्षण, संवर्धन और विकास के लिए विश्वविद्यालयों को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़ी भाषा से जुड़े विषयों पर शोध एवं अकादमिक गतिविधियों को बढ़ावा देकर भाषा के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
फार्मेसी पाठ्यक्रम की गुणवत्ता के लिए नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करें राज्यपाल ने कहा कि फार्मेसी सीधे मानव स्वास्थ्य से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। इसलिए जिन विश्वविद्यालयों में फार्मेसी पाठ्यक्रम संचालित हैं, वहां विद्यार्थियों के बेहतर व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए प्रतिष्ठित कंपनियों के साथ टाई-अप किया जाए। उन्होंने फार्मेसी पाठ्यक्रम की गुणवत्ता के लिए नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
युवाओं को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करें श्री डेका ने विश्वविद्यालयों से नशा मुक्ति अभियान में विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने तथा उन्हें नशे से दूर रखने में विश्वविद्यालय महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
शिक्षा की गुणवत्ता, शोध, रोजगारपरक शिक्षा और सामाजिक सरोकारों के बीच बेहतर समन्वय करें
राज्यपाल ने निजी विश्वविद्यालयों को शिक्षा की गुणवत्ता, शोध, रोजगारपरक शिक्षा और सामाजिक सरोकारों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए कार्य करने का आह्वान किया। बैठक में राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, उच्च शिक्षा सचिव अविनाश चंपावत, निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष वी. के. गोयल सहित विभिन्न निजी विश्वविद्यालयों के कुलपति उपस्थित थे।
कोरबा/गेवरा l एसईसीएल गेवरा क्षेत्र अंतर्गत प्रभावित ग्राम नराईबोध के ग्रामीणों द्वारा लंबे समय से अपनी जायज मांगों बसाहट रोजगार मुआवजा और पुनर्वास को लेकर किए जा रहे संघर्ष के बाद गत 23 अक्टूबर 2026 को एसईसीएल गेवरा क्षेत्र के सभागार में एक महत्वपूर्ण त्रिपक्षीय बैठक आयोजित की गई l बैठक में सकारात्मक और सौहार्दपूर्ण वातावरण में ग्रामीणों की समस्याओं पर विस्तृत चर्चा हुई और कई अहम निर्णय लिए गए l
प्रमुख उपस्थिति
इस त्रिपक्षीय वार्ता में कटघोरा क्षेत्र के लोकप्रिय विधायक प्रेमचंद पटेल, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कटघोरा विपिन दुबे, तहसीलदार दीपका राजभानु, एसईसीएल गेवरा क्षेत्र के महाप्रबंधक (CGM) अशोक कुमार, स्टाफ ऑफिसर (भू-राजस्व), कार्मिक प्रबंधक सुधा शिंडे, ऊर्जाधानी भूविस्थापित किसान कल्याण समिति के अध्यक्ष सपुरन कुलदीप, ग्राम नराईबोध की पार्षद अमिला पटेल, पार्षद पति राकेश पटेल, रुद्र दास महंत, जगदीश पटेल, शशि साहू, ललित महिलांगे, रामायण लाल यादव, सहसराम, सुंदर साय, मकसुदन यादव, समारु दास, नवीन दास, संजय पाल, कृष्णा कुमार तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण व अन्य जनप्रतिनिधि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे ।
बैठक में लिए गए प्रमुख निर्णय एवं चर्चा के बिंदु
बसाहट स्थल का रकबा और आवंटन:- ग्रामीणों द्वारा मांग की गई थी कि इश्तहार प्रकाशन के अनुसार बसाहट के लिए 74.00 एकड़ भूमि उपलब्ध कराई जाए l इस पर प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा की दृष्टि से समतलीकरण के उपरांत लगभग 300 से 330 प्लॉट इस स्थल पर केवल नराईबोध के ग्रामवासियों के लिए ही आबंटित किए जा सकेंगे ।
एकमुश्त राशि और पुनर्वास प्रक्रिया:- प्रबंधन ने जानकारी दी कि लगभग 450 लोगों ने बसाहट के एवज में एकमुश्त राशि के लिए सहमति दी है l पुनर्वास हेतु पात्र व अपात्र लोगों की सूची तैयार की जा रही है, जिसे बिलासपुर मुख्यालय से स्वीकृति मिलते ही, दिसंबर 2026 से प्लॉट आबंटन और मकान ध्वस्तीकरण व भुगतान की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी ।
परिसम्पत्तियों का मुआवजा व अन्य तकनीकी विषय:-
भू-स्वामियों और मकान स्वामियों के बीच सहमति न बनने की स्थिति में एसओपी मानक संचालन प्रक्रिया के नियमों के तहत ही भुगतान की कार्यवाही की जाएगी ।
कटघोरा एसडीएम और गेवरा महाप्रबंधक द्वारा अवगत कराया गया कि बिना भू-स्वामी या उनके विधिक वारिसों की सहमति के भुगतान करने पर यदि आपत्ति आती है, तो मुख्यालय से समय-सीमा के भीतर निर्देश प्राप्त कर उचित कदम उठाए जाएंगे ।
ग्राम नराईबोध के घटते क्रम की सूची में निर्धारित कट-ऑफ पॉइंट 0.51 एकड़ तक के संशोधन से संबंधित कार्यवाही प्रक्रियाधीन है, जिसे सक्षम अधिकारी के अनुमोदन उपरांत जल्द पूरा किया जाएगा।
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि वे खदान विस्तार के विरोधी नहीं हैं, बल्कि वे चाहते हैं कि कंपनी द्वारा उनकी मूलभूत हक बुनियादी व्यवस्था पानी, सुरक्षा और विस्थापन से जुड़ी समस्याओं का त्वरित और स्थायी समाधान किया जाए l इसके साथ ही ग्रामीणों ने बैठक में कहां कि समय-सीमा अनुरूप समस्याओं का निराकृति होना चाहिए आंदोलन करने के लिए बाध्य न होना पड़े l
बैठक के अंत में एसईसीएल के अधिकारी ने सौहार्दपूर्ण वातावरण में बैठक की समाप्ति की घोषणा की गई ।
कोरबा। थाना दर्री में प्रार्थिया, निवासी दर्री ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि फेसबुक पर बैंकॉक में ऑफिस असिस्टेंट की नौकरी (लगभग 30,000 थाई भाट प्रतिमाह) का विज्ञापन देखकर उसने संपर्क किया था। आरोपी महिला लीजा एवं उसके साथियों ने उसे बेंगलुरु बुलाया और फिर फ्लाइट से थाईलैंड गए और बोर्डर पार कराकर म्यांमार के ‘KK Park’ पहुँचा दिया। वहाँ उसका पासपोर्ट जब्त कर उसे बंधक बनाया गया, प्रताड़ित किया गया और फर्जी सोशल मीडिया आईडी के जरिए ऑनलाइन ट्रेडिंग व निवेश के नाम पर लोगों से ठगी करने के लिए मजबूर किया गया।
पीड़िता को वापस म्यांमार से कोरबा लाना और अपराध विवरण
भारतीय दूतावास एवं स्थानीय प्रशासन की मदद से प्रार्थिया को सुरक्षित भारत लाया गया। तत्पश्चात प्रार्थिया की रिपोर्ट पर थाना दर्री, जिला कोरबा में अपराध क्रमांक 331/2026, धारा 143(2), 146 BNS के तहत प्रकरण दर्ज किया गया। विवेचना में संलिप्तता पाए जाने पर आरोपिया स्नेहा भथलाल बडोले (35 वर्ष), निवासी जिला गोंदिया (महाराष्ट्र) को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया और रिमांड प्राप्त की गई। अन्य आरोपियों तथा गिरोह के डिजिटल व वित्तीय नेटवर्क की जाँच जारी है।
साइबर जागरूकता अभियान कोरबा पुलिस द्वारा “साइबर जागरूकता अभियान” के अंतर्गत जागरूकता बढ़ाने के साथ साथ ऑनलाइन ठगी, फर्जी नौकरी के प्रस्तावों और सोशल मीडिया फ्रॉड से सम्बन्धी साइबर अपराध के खिलाफ सख्त कार्रवाई सतत जारी रहेगी।
चित्रकला, भाषण और नारा लेखन प्रतियोगिताओं के जरिए विद्यार्थियों ने दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
प्राचार्य सुषमा बारस्कर ने जिम्मेदारीपूर्वक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के उपयोग और ई-कचरे के उचित निपटान के लिए किया प्रेरित
कोरबा। सरस्वती शिशु मंदिर एचटीपीपी दर्री, कोरबा में ई-कचरा प्रबंधन दिवस के अवसर पर विद्यार्थियों को इलेक्ट्रॉनिक कचरे के उचित प्रबंधन, पुनर्चक्रण और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए भाषण, नारा लेखन और चित्रकला प्रतियोगिताओं के माध्यम से अपनी प्रतिभा, रचनात्मकता और पर्यावरण के प्रति जागरूकता का प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय की प्राचार्य श्रीमती सुषमा बारस्कर ने की। कार्यक्रम का निर्देशन सुश्री पूजा ठाकुर एवं श्रवण कुमार गुप्ता द्वारा किया गया। आयोजन के दौरान विद्यार्थियों को ई-कचरे के दुष्प्रभावों, उसके सुरक्षित निपटान और पुनर्चक्रण के महत्व से अवगत कराने पर विशेष जोर दिया गया।
प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों ने यह संदेश दिया कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के उपयोग के बाद निकलने वाले कचरे का लापरवाही से निपटान पर्यावरण के लिए नुकसानदायक हो सकता है। ऐसे कचरे का उचित प्रबंधन और पुनर्चक्रण पर्यावरण को स्वच्छ एवं सुरक्षित बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को पर्यावरण से जुड़ी जिम्मेदारियों को समझने और दैनिक जीवन में उनका पालन करने के लिए प्रेरित किया।
चित्रकला प्रतियोगिता में स्वाति पटेल और यामिनी बरेठ ने हासिल किया प्रथम स्थान चित्रकला प्रतियोगिता में प्राथमिक विभाग की स्वाति पटेल ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि श्रिया यादव द्वितीय स्थान पर रहीं। वहीं, हाईस्कूल विभाग में यामिनी बरेठ ने प्रथम और साधना ने द्वितीय स्थान हासिल किया। विद्यार्थियों ने अपनी कलाकृतियों के माध्यम से ई-कचरे के उचित प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता के महत्व को रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया।
भाषण प्रतियोगिता में सृष्टि राठौर प्रथम, दिव्या जाल द्वितीय भाषण प्रतियोगिता में सृष्टि राठौर ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि दिव्या जाल ने द्वितीय स्थान हासिल किया। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने ई-कचरे के बढ़ते उपयोग, उसके उचित निपटान और पर्यावरण को सुरक्षित रखने की आवश्यकता जैसे विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। इस गतिविधि के माध्यम से विद्यार्थियों को अपने विचार स्पष्ट रूप से व्यक्त करने और पर्यावरण संबंधी विषयों पर जागरूकता फैलाने का अवसर मिला।
नारा लेखन में पूनम साहू और आँचल साहू ने मारी बाजी नारा लेखन प्रतियोगिता में पूनम साहू ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि आँचल साहू द्वितीय स्थान पर रहीं। विद्यार्थियों ने आकर्षक और संदेशपरक नारों के माध्यम से ई-कचरे के जिम्मेदार प्रबंधन तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया। प्रतियोगिता में उनकी रचनात्मकता और विषय के प्रति समझ देखने को मिली।
प्राचार्य ने विद्यार्थियों को दिलाया पर्यावरण संरक्षण का संदेश कार्यक्रम के दौरान सभी प्रतिभागियों के प्रयासों की सराहना की गई। विद्यार्थियों के उत्साह, रचनात्मकता और पर्यावरण के प्रति जागरूकता को प्रोत्साहित किया गया। विद्यालय की प्राचार्य श्रीमती सुषमा बारस्कर ने विद्यार्थियों को इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग करने, ई-कचरे का उचित निपटान सुनिश्चित करने और पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने विद्यार्थियों को पर्यावरण के प्रति सजग रहने और अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखने की भावना विकसित करने के महत्व से अवगत कराया। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि पर्यावरण संरक्षण केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें प्रत्येक नागरिक की भागीदारी आवश्यक है।
विद्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और जिम्मेदार नागरिकता की भावना विकसित करना रहा। भाषण, चित्रकला और नारा लेखन जैसी गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को ई-कचरे के उचित प्रबंधन के प्रति जागरूक किया गया। इस आयोजन ने पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी समझने और उसे सुरक्षित रखने की दिशा में सकारात्मक संदेश दिया।