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RBI के उपायों से 2026-27 में 55 से 65 अरब डॉलर का प्रवाह हो सकता आकर्षित

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नई दिल्ली, एजेंसी। भारतीय रिजर्व बैंक के हाल के कदमों से भारत को चालू वित्त वर्ष में 55 से 65 अरब डॉलर का पूंजी प्रवाह आकर्षित करने, रुपए को स्थिर करने और देश के भुगतान संतुलन को अधिशेष में लाने में मदद मिलने की उम्मीद है। भारतीय स्टेट बैंक के आर्थिक शोध विभाग की एक रिपोर्ट में यह कहा गया है। रिपोर्ट ‘इकोरैप’ में कहा गया है कि केंद्रीय बैंक के फरवरी और जून, 2026 के कदमों को रुपए को स्थिर करने, घरेलू बॉन्ड बाजार को मजबूत करने, अधिक स्थिर विदेशी पूंजी को आकर्षित करने और बाह्य वित्त पोषण में आने वाली बाधाओं को कम करने के एक समन्वित प्रयास के रूप में देखा जाना चाहिए। 

केंद्रीय बैंक ने विदेशी पूंजी को आकर्षित करने और देश के भुगतान संतुलन को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। इन कदमों में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा बाह्य वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) को बढ़ावा देने के लिए रियायती विदेशी मुद्रा विनिमय दर अदला-बदली की सुविधा शामिल है। आरबीआई ने बैंकों को नए तीन से पांच साल के विदेशी मुद्रा प्रवासी (बैंक) खाता (एफसीएनआर) जमा जुटाने के लिए भी ऐसी ही सुविधा दी है। एसबीआई रिपोर्ट के अनुसार, बाह्य वाणिज्यिक उधारी पर फरवरी के कदम संरचनात्मक और बाजार विकास को ध्यान में रखकर उठाए गए थे, जबकि जून में किए गए उपायों का मकसद विदेशी मुद्रा प्रवाह को आकर्षित करना और घरेलू ब्याज दरों को बढ़ाए बिना रुपए को सहारा देना है। 

रिपोर्ट में कहा गया, ”करीब 55-65 अरब डॉलर का प्रवाह यह सुनिश्चित करेगा कि अनुमानित 16 प्रतिशत कर्ज वृद्धि के मुकाबले बैंक प्रणाली में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जमा वृद्धि बढ़कर लगभग 14.5-15 प्रतिशत हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, इसका मतलब यह होगा कि नियामकीय छूट को समायोजित करने के बाद कर्ज- जमा अंतर लगभग एक लाख करोड़ रुपए कम हो जाएगा और ब्याज दरों का ढांचा और नीचे आएगा। आरबीआई ने डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर में गिरावट को थामने के लिए नए एफसीएनआर (बी) जमा के लिए अमेरिका डॉलर-रुपया विदेशी विनिमय अदला-बदली सुविधा शुरू की है। ये जमा कम से कम तीन साल और अधिक से अधिक पांच साल की अवधि के लिए होंगे। यह सुविधा सोमवार से लागू हुई और 16 अक्टूबर, 2026 तक खुली रहेगी। 

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नेपाल में भारतीय करंसी पर नए नियम लागू, जानिए कौन-से नोट होंगे मान्य और कितना ले सकेंगे कैश

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नेपाल में भारतीय करंसी पर नए नियम लागू, जानिए कौन-से नोट होंगे मान्य और कितना ले सकेंगे कैश

काठमांडू,

भारत और नेपाल के बीच यात्रा और व्यापार करने वालों के लिए अच्छी खबर है। नेपाल सरकार ने भारतीय और नेपाली नागरिकों को 9 नवंबर 2016 के बाद जारी रू.200 और रू.500 के भारतीय नोट अधिकतम रू.25,000 तक नेपाल लाने और ले जाने की अनुमति दे दी है। नेपाल राष्ट्र बैंक (NRB) ने नई अधिसूचना जारी कर इस संबंध में नियम स्पष्ट किए हैं। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि 8 नवंबर 2016 से पहले जारी रू.500 और रू.1,000 के भारतीय नोट पहले की तरह प्रतिबंधित रहेंगे। इन पुराने नोटों को नेपाल में लाने या ले जाने की अनुमति नहीं होगी।

नेपाली नागरिकों के लिए विशेष नियम
नई अधिसूचना के अनुसार, नेपाली नागरिक भारतीय मुद्रा केवल भारत से नेपाल ला सकेंगे। उन्हें भारतीय करेंसी नेपाल से किसी तीसरे देश में ले जाने की अनुमति नहीं होगी। नेपाल राष्ट्र बैंक के प्रवक्ता गुरु प्रसाद पौडेल ने कहा कि नए नियम से नेपाल आने वाले भारतीय पर्यटकों और भारत के साथ व्यापार करने वाले नेपाली नागरिकों को काफी सुविधा मिलेगी। इससे सीमा पार नकदी लेन-देन की प्रक्रिया भी सरल होगी। नई अधिसूचना के अनुसार, नेपाली नागरिक और विदेशी यात्री 5,000 अमेरिकी डॉलर या उसके बराबर विदेशी मुद्रा बिना कस्टम घोषणा के नेपाल ला सकते हैं। यदि इससे अधिक राशि लाई जाती है तो कस्टम अधिकारियों के समक्ष इसकी घोषणा करना अनिवार्य होगा। एजेंसी।

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दिल्ली-एनसीआर में खुदरा स्थलों का पट्टा जनवरी-जून में 78% बढ़ा: रिपोर्ट

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दिल्ली-एनसीआर में खुदरा स्थलों का पट्टा जनवरी-जून में 78% बढ़ा: रिपोर्ट

नई दिल्ली,

दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में इस वर्ष जनवरी-जून के दौरान शॉपिंग मॉल और खुदरा बाजारों में खुदरा दुकानों की पट्टा गतिविधि 78 प्रतिशत बढ़कर 13 लाख वर्ग फुट हो गई। एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। कुशमैन एंड वेकफील्ड की रिपोर्ट कहती है कि यह वृद्धि मुख्य रूप से फैशन दुकानों, खाद्य एवं पेय (एफएंडबी) कंपनियों और डिपार्टमेंटल स्टोर के विस्तार से हुई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 की पहली छमाही में शॉपिंग मॉल में पट्टा गतिविधि मजबूत रही और इसमें सालाना आधार पर दोगुनी वृद्धि दर्ज की गई, जबकि मुख्य सड़कों पर पट्टे में चार प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। कुल पट्टा गतिविधियों में फैशन खंड की हिस्सेदारी 28 प्रतिशत रही, जबकि एफएंडबी का 16 प्रतिशत और डिपार्टमेंटल स्टोर का 12 प्रतिशत योगदान रहा।

कंपनी के अनुसार, बेहतर लोकेशन वाले मॉल और बाजार परिसरों के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ने से रिक्तता घटी है और किराया बढ़ा है। रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर बुनियादी ढांचे, आवासीय विस्तार और उपभोक्ता मांग में वृद्धि के कारण एनसीआर देश के प्रमुख संगठित खुदरा बाजारों में तेजी से उभर रहा है। एजेंसी।

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विदेशी निवेशकों का बदला मूड, ताइवान-कोरिया से पैसा निकाल भारत-चीन में कर रहे निवेश

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विदेशी निवेशकों का बदला मूड, ताइवान-कोरिया से पैसा निकाल भारत-चीन में कर रहे निवेश

मुंबई,

वैश्विक निवेशकों की रणनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर शेयरों से पैसा निकालकर विदेशी फंड अब भारत, चीन और दक्षिण-पूर्व एशियाई बाजारों के बैंकिंग, आईटी और अन्य अपेक्षाकृत स्थिर सेक्टरों में निवेश बढ़ा रहे हैं। AI निवेश से मिलने वाले रिटर्न को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच यह बदलाव एशियाई बाजारों का निवेश परिदृश्य बदलता दिख रहा है।

ब्‍लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, फिडेलिटी इंटरनेशनल, BNP Paribas और M&G Investments जैसे निवेशकों ने दक्षिण कोरिया और ताइवान के AI एवं सेमीकंडक्टर शेयरों में अपनी हिस्सेदारी कम करना शुरू किया है। विश्लेषकों का कहना है कि AI पर हो रहे भारी निवेश से मिलने वाले वास्तविक रिटर्न को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है। ऐसे में फंड मैनेजर बैंकिंग, आईटी, ई-कॉमर्स और अन्य अपेक्षाकृत कम जोखिम वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता दे रहे हैं। विदेशी बिकवाली का असर दक्षिण कोरिया और ताइवान के शेयर बाजारों पर भी दिखा है। निवेशकों की निकासी से दोनों बाजारों में दबाव बना हुआ है और अस्थिरता बढ़ी है।

भारत और चीन विदेशी निवेशकों का केंद्र

दूसरी ओर, भारत और चीन विदेशी निवेशकों के लिए फिर आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं। जुलाई के दौरान भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेश बढ़ा है, जिससे आईटी सहित कई प्रमुख सेक्टरों को समर्थन मिला। वहीं, चीन में इंटरनेट कंपनियों और बैंकिंग शेयरों में भी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है। इसके अलावा इंडोनेशिया और थाईलैंड के बाजारों में भी मजबूत तेजी देखने को मिल रही है।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक निवेशक फिलहाल तेज जोखिम वाले AI शेयरों की तुलना में बेहतर मूल्यांकन और स्थिर रिटर्न वाले बाजारों में निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं।

एजेंसी।

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