छत्तीसगढ़
जांजगीर-चांपा में सड़क हादसा, महिला की मौके पर मौत:बाइक सवार युवक घायल, मिला मुआवजा, DSP की समझाइश पर बंद किया चक्का जाम
जांजगीर-चांपा। जांजगीर-चांपा जिले के बनाहिल चौक पर बाइक के फिसलने से मैहला सड़क पर गिर गई और पीछे से आ रहे पिकअप के निचे आ गई। दुर्घटना दोपहर लगभग ढाई बजे की है। परिजन और ग्रामीणों ने विरोध में चक्का जाम कर दिया था। जिसे 2 घंटों में समाप्त किया गया।
इस हादसे में महिला सलमा लहरे (40) की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। प्राथमिक उपचार के बाद उसे बिलासपुर रेफर किया गया।

महिला की मौके पर ही मौत
पिकअप की चपेट में आई महिला
हादसे में, नरियरा वार्ड नंबर 14 निवासी सलमा लहरे युवक गोलू टंडन के साथ किसी काम से जा रही थीं। बनाहिल चौक के पास बाइक फिसल गई। ऐसे में महिला पीछे से आ रही पिकअप की चपेट में आ गई।

महिला सलमा लहरे के सिर पर गंभीर चोट लगने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई वहीं युवक का हाथ टूट गया और उन्हें सीएचसी अस्पताल अकलतरा में भर्ती कराया गया। उनकी गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें बिलासपुर रेफर कर दिया गया है।

युवक गंभीर रूप से घायल
पीड़ितों को मिला मुआवजा
DSP प्रदीप सोरी ने बताया कि बनाहिल चौक के पास ग्रामीणों के द्वारा चक्का जाम किया गया था। जिसे 2 घंटों में समाप्त किया गया है। वही पिकअप वाहन चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की कार्यवाही की जा रही है।
मृतिका के परिजनों को वाहन मालिक से 50 हजार रुपए और शासन की ओर से 25 हजार रुपए की सहायता राशि दी गई है।

छत्तीसगढ़
1.28 करोड़ ठगने वाला आरोपी हरियाणा से अरेस्ट:रिटायर्ड वेटनरी डॉक्टर को बताया था क्राइम ब्रांच अधिकारी, 24 घंटे तक वीडियो कॉल पर बंधक बनाकर रखा
रायपुर,एजेंसी। राजधानी रायपुर में रिटायर्ड वेटनरी डॉक्टर को ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर 1.28 करोड़ रुपए से अधिक की ठगी की गई है। मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी दी गई और करीब 24 घंटे तक वीडियो कॉल पर बंधक बनाकर रखा।
इस मामले में सोमवार को पुलिस ने आरोपी को हरियाणा से गिरफ्तार किया है, जिसका नाम सोमनाथ महतो है। आरोपी ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच अधिकारी बताया था और क्रेटिड कार्ड से मनी लॉन्ड्रिंग की बात कही थी।

गिरफ्तारी का डर दिखाते हुए ठग ने पैसों की डिमांड की, जिसके बाद रिटायर्ड डॉक्टर अलग-अलग दिनों में 1.28 करोड़ रुपए भेजे गए अकाउंट्स में ट्रांसफर कर दिए। उन्होंने ठग को पैसे देने के लिए अपनी एफडी तुड़वा दी थी। मामला विधानसभा थाना क्षेत्र का है।

क्या है पूरा मामला ?
दरअसल, सपन कुमार पशु पालक विभाग से रिटायर्ड डॉक्टर हैं। 31 दिसंबर 2025 को दोपहर करीब 12:15 बजे उनके मोबाइल पर एक अनजान नंबर से वॉट्सऐप कॉल आया और उसने खुद मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया। फिर वॉट्सऐप एक एफआईआर की कॉपी भेजी।
कॉल करने वाले कहा कि सपन कुमार के क्रेडिट कार्ड से कई लोगों से धोखाधड़ी की गई है। गिरफ्तारी का डर दिखाकर ठग ने बैंक खाते और एफडी की जानकारी मांगी। डरकर सपन कुमार ने सारी डिटेल ठग को वॉट्सऐप कर दिया।
3 जनवरी 2026 को ठगों ने रिटायर्ड डॉक्टर को एक खाते में 34 लाख रुपए RTGS के जरिए भेजने को कहा। डर और दबाव में आकर उन्होंने पैसे ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद 13 जनवरी को दूसरे खाते में 39 लाख रुपए भिजवाए।

55 लाख रुपए के लिए FD तुड़वाई
16 जनवरी को तीसरे खाते में 55 लाख रुपए जमा करवाने को कहा, जिसके लिए रिटायर्ड डॉक्टर ने अपनी एफडी तुड़वा दी। इस तरह ठग ने डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर 1 करोड़ 28 लाख रुपए अलग-अलग बैंक अकाउंट ट्रांसफर करवा लिए।
पैसे होल्ड कराने में जुटी पुलिस
जब रिटायर्ड डॉक्टर ने 55 लाख रुपए ठग के खाते में ट्रांसफर किए तो उन्हें ठगी का एहसास हुआ। जिसके बाद वो फौरन विधानसभा थाने पहुंचे और रिपोर्ट दर्ज कराई। आईजी अमरेश मिश्रा के निर्देश पर रेंज साइबर थाना रायपुर ने ‘ऑपरेशन साइबर शील्ड’ चलाया।
तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया गया। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर की गई। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई कर कई खातों को फ्रीज कराया। पीड़ित को 58 लाख रुपए वापस मिल चुके हैं। शेष रकम भी आरोपी के अन्य खातों में होल्ड करा दी गई है।
गुड़गांव के सोहना रोड से मास्टरमाइंड गिरफ्तार
जांच में आरोपी की लोकेशन दिल्ली-हरियाणा में मिली। पुलिस टीम रवाना हुई, लेकिन आरोपी लगातार ठिकाना बदलता रहा। आखिरकार सोमनाथ महतो (27) को गुड़गांव के सोहना रोड से गिरफ्तार किया गया।
आरोपी आर मंगलम यूनिवर्सिटी के पास छिपा हुआ था। उसे रायपुर लाकर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।

छत्तीसगढ़
फर्जी जाति प्रमाणपत्र से आबकारी विभाग में 35 साल नौकरी:ग्वालियर के राजेश पर बिलासपुर में फेक-डॉक्यूमेंट बनवाने का आरोप, SC-ST आयोग ने मांगा जवाब
बिलासपुर,एजेंसी। मध्यप्रदेश के ग्वालियर के आबकारी अफसर राजेश हेनरी पर आपराधिक षड्यंत्र करके फर्जी जाति प्रमाणपत्र बनवाने का आरोप है। आरोप है कि इस फर्जी प्रमाणपत्र का इस्तेमाल कर वह पिछले 35 साल से आबकारी विभाग में नौकरी कर रहे हैं।
RTI के तहत पता चला कि राजेश के प्रमाणपत्र में छत्तीसगढ़ के बिलासपुर तहसील के सील और साइन मिले। लेकिन, जब बिलासपुर तहसील कोर्ट के दायरा पंजी में साल 1990-91 के प्रकरण की जानकारी ली गई, तब पता चला कि तहसील कार्यालय में उनके जाति प्रमाण पत्र का प्रकरण ही दर्ज नहीं है।
छत्तीसगढ़ की उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति ने उनके अनुसूचित जनजाति (एसटी) प्रमाणपत्र को जांच के लिए जिला स्तरीय समिति को भेजा था, लेकिन यह जांच दो साल से लंबित पड़ी थी।
अब राष्ट्रीय अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग ने इस मामले में बिलासपुर कलेक्टर और मध्यप्रदेश के आबकारी विभाग के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है और 15 दिन में जवाब मांगा है। वहीं विभाग के अफसरों पर मामले को दबाने का आरोप लगा है।

इंदौर के वकील ने की शिकायत
दरअसल, इंदौर के रहने वाले वकील और आरटीआई एक्टिविस्ट राजेंद्र गुप्ता ने ग्वालियर के आबकारी विभाग में पदस्थ अपर आयुक्त राजेश हेनरी के खिलाफ शिकायत की है।

उन्होंने बताया है कि राजेश हेनरी ने साल 1990-91 में फर्जी जाति प्रमाणपत्र बनवाकर आपराधिक षडयंत्र किया, जिसके आधार पर अपने आप को आदिवासी समुदाय का होना बताकर आबकारी विभाग में नौकरी हासिल की।
इसके बाद मध्यप्रदेश के कई जगहों पर पदस्थ रहे और फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर 35 साल से जॉब करते रहे।
सालों से बचाते रहे विभाग के अफसर, नहीं कराई जांच
राजेंद्र गुप्ता का आरोप है कि आबकारी विभाग के अफसरों को सालों से पता है कि राजेंद्र हेनरी ने फर्जी जाति प्रमाणपत्र के सहारे नौकरी पर कब्जा जमाया है। लेकिन, उनके इस आपराधिक षडयंत्र को विभाग के अफसर परदा डालते रहे और उन्हें बचाने की कोशिश करते रहे।
बिलासपुर तहसील के फर्जी प्रमाण पत्र का किया इस्तेमाल
राजेंद्र गुप्ता ने सूचना के अधिकार कानून के तहत आबकारी अफसर राजेश हेनरी की जाति प्रमाणपत्र को लेकर विभागीय दफ्तर से जानकारी जुटाई, जिसके आधार पर पता चला कि राजेश हेनरी ने बिलासपुर तहसील के सील और साइन लगे जाति प्रमाण पत्र का उपयोग किया है।
लेकिन, जब बिलासपुर तहसील कोर्ट के दायरा पंजी में साल 1990-91 के प्रकरण की जानकारी ली, तब पता चला कि तहसील कार्यालय में उनके जाति प्रमाण पत्र का प्रकरण ही दर्ज नहीं है।

राज्य स्तरीय छानबिन समिति को नहीं दी जानकारी
इस पूरे मामले में छत्तीसगढ़ की उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति ने उनके अनुसूचित जनजाति (एसटी) प्रमाणपत्र की जांच के लिए राजेश हेनरी को नोटिस जारी किया। इसके साथ ही प्रमाणपत्र की जांच के लिए जिला स्तरीय जाति छानबिन समिति को भेजा है। लेकिन, दो साल से इस मामले की जांच लंबित है।
आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त संजय चंदेल ने बताया कि राजेश हेनरी को अपनी जाति संबंधी सभी दस्तावेजों के साथ बुलाया गया है। लेकिन, वो उपस्थित नहीं हो रहे हैं।
अब राष्ट्रीय SC-ST आयोग ने 15 दिन में मांगी जानकारी
इस मामले की शिकायत अब राष्ट्रीय अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग तक पहुंच गई है। आयोग ने बिलासपुर कलेक्टर के साथ ही मध्यप्रदेश के आबकारी विभाग के प्रमुख सचिव को नोटिस जारी कर 15 दिन के भीतर जवाब मांगा है।

छत्तीसगढ़
नदियों के संरक्षण वाली कमेटी से हटाए जाएंगे सेक्रेटरी:हाईकोर्ट बोला-विशेषज्ञों को शामिल करें, शासन का जवाब-15 दिन में चिह्नित होंगे उद्गम-स्थल, डिस्प्ले-बोर्ड भी लगेंगे
बिलासपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ की अरपा समेत 11 प्रमुख नदियों के संरक्षण-संवर्धन के लिए राज्य सरकार की उच्च स्तरीय कमेटी में अब सचिवों को जगह नहीं मिलेगी। उनकी जगह कमेटी में विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल ने कमेटी पर सवाल उठाते हुए सचिवों को हटाकर विशेषज्ञों को शामिल करने के आदेश दिए हैं।
दूसरी तरफ कमेटी गठित होने के बाद शासन ने सोमवार को शपथ पत्र देकर बताया कि, मुख्य सचिव विकास शील खुद इसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं। सभी जिलों के कलेक्टर्स से कहा गया है कि, 15 दिनों के भीतर नदियों के उद्गम स्थलों का सीमांकन कर वहां डिस्प्ले बोर्ड लगाए जाएं। सभी कलेक्टरों को उद्गम स्थलों के भू-अभिलेख और जियो-टैग्ड तस्वीरें शासन को भेजनी होंगी।
दरअसल, अरपा के उद्गम स्थल के साथ नदी के संरक्षण और संवर्धन को लेकर हाईकोर्ट में अलग-अलग जनहित याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है। इसमें नदियों के प्राकृतिक प्रवाह क्षेत्र के संरक्षण और संवर्धन को लेकर हाईकोर्ट ने भी समय-समय पर दिशानिर्देश जारी किए। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने जनहित याचिकाओं में प्रदेश की अन्य नदियों को शामिल कर शासन से जानकारी मांगी।

20 जनवरी को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने नदियों के उद्गम स्थल और संरक्षण को लेकर कमेटी बनाने के आदेश दिए थे, जिसके पालन में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक हाई-पावर कमेटी का गठन किया गया है, जिसमें वित्त, जल संसाधन और वन विभाग समेत 7 विभागों के सचिवों को शामिल किया गया है।
हाईकोर्ट ने कमेटी में सचिवों को शामिल करने पर उठाए सवाल
इस मामले की सुनवाई के दौरान शासन ने शपथ पत्र में बताया कि, कमेटी का गठन कर दिया गया है, जिसमें सचिव स्तर के अफसरों को शामिल किया गया है। इस पर हाईकोर्ट ने समिति में विशेषज्ञ शामिल नहीं करने पर सवाल उठाते हुए कहा कि, इतने विभाग के सचिवों की जगह विशेषज्ञों को शामिल करने पर पुनर्विचार किया जाए।
किन 11 नदियों की बदलेगी सूरत
राज्य सरकार ने बताया कि अरपा, महानदी, शिवनाथ, हसदेव, तांदुला, पैरी, मांड, केलो, सोन, तिपान और लीलगर नदी के उद्गम को संवारा- सहेजा जाएगा। नदियों पुनरुद्धार के लिए विभाग स्तर पर विशेषज्ञों का एक समर्पित सेल बनाया जाएगा। नदियों के उद्गम स्थलों के संरक्षण के लिए साइंटिफिक सर्वे कराकर डीपीआर तैयार किया जाएगा।
ट्रीटमेंट के बाद ही गिरेगा नाले-नालियों का पानी
इसके साथ ही कहा गया कि, शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों का गंदा पानी बिना ट्रीटमेंट के नदियों में नहीं गिरेगा। उद्गम स्थलों को न केवल संरक्षित किया जाएगा, बल्कि उन्हें आस्था और पर्यटन के केंद्र के रूप में भी विकसित किया जाएगा। इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए विभाग अपने बजट के अलावा डीएमएफ, मनरेगा और 15वें वित्त आयोग की राशि का उपयोग कर सकेंगे।
8 सदस्यीय समिति में सीएस समेत 7 सचिव
समिति के अध्यक्ष मुख्य सचिव होंगे, इसके साथ ही वित्त, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जल संसाधन, वन एवं जलवायु परिवर्तन, नगरीय प्रशासन एवं विकास और खनिज संसाधन विभाग के सचिव सदस्य होंगे। वहीं, छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय, दुर्ग के पूर्व कुलपति प्रो. एमके. वर्मा को विशेषज्ञ सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया है।

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