पेरिस,एजेंसी।फ्रांस में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की पत्नी ब्रिगिट मैक्रों ने दो महिला यूट्यूबर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में केस दायर किया है। इन महिलाओं ने सनसनीखेज दावा करते हुए कहा था कि ब्रिगिट मैक्रों महिला नहीं, बल्कि पुरुष हैं।
इनका कहना था कि ब्रिगिट का असली नाम जीन-मिशेल ग्रोग्रेन्क्स था। हालांकि यह नाम ब्रिगिट के भाई का है। जीन-मिशेल और ब्रिगिट की शक्ल आपस में काफी हद तक मिलती है।
इसके बाद प्रथम महिला ने इनके खिलाफ पेरिस की एक अदालत में केस किया था। कोर्ट ने सितंबर 2023 में दोनों महिलाओं को दोषी ठहराया था और उन्हें ब्रिगिट मैक्रों को 7 लाख रुपए और उनके भाई को 5 लाख रुपए हर्जाना देने का आदेश दिया था।
हालांकि पेरिस की एक अपील अदालत ने 10 जुलाई को इस फैसले को पलट दिया था। इसके बाद ब्रिगिट मैक्रों और उनके भाई ने अब इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की है।
ब्रिगिट और उनके भाई जीन-मिशेल ट्रोगन्यू की ये तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी।
यह मामला दिसंबर 2021 का है, जब अमंडाइन रॉय नाम की महिला यूट्यूबर ने एक पत्रकार नताशा रे का इंटरव्यू किया। 4 घंटे के इस इंटरव्यू में नताशा ने दावा किया कि ब्रिगिट मैक्रों पुरुष हैं। नताश रे ने यह भी दावा किया कि उन्होंने इस जानकारी के लिए 3 साल तक रिसर्च की।
रे ने दावा कि जीन मिशेल ने लिंग परिवर्तन कराने के बाद इमैनुएल मैक्रों से शादी की थी। यह वीडियो वायरल हो गया और पूरी दुनिया में इसे लेकर कॉन्सपिरेसी थ्योरी फैलने लगी।
अमंडाइन रॉय यूट्यूब पर एक अध्यात्मिक चैनल चलाती हैं।
राष्ट्रपति मैक्रों ने अमेरिकी पत्रकार को नोटिस दिया
अमेरिका में भी यह मामला तेजी से फैला। दो ट्रम्प समर्थक पत्रकारों कैंडेस ओवेन्स और टकर कार्लसन ने इसे सबसे ज्यादा हवा दी। दोनों ने इससे जुड़े कई वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किए हैं। उन्होंने दावा करते हुए खहा कि यह मानव इतिहास का सबसे बड़ा राजनीतिक घोटाला है।
ओवेन्स ने दावा किया कि ब्रिगिट और उनके भाई जीन-मिशेल ट्रोग्नेक्स वास्तव में एक ही व्यक्ति हैं। यानी ब्रिगिट पहले जीन-मिशेल के नाम से एक पुरुष थीं और बाद में लिंग परिवर्तन कर महिला बनीं।
ओवेन्स ने यहां तक कहा कि वह अपनी पूरी पेशेवर प्रतिष्ठा इस बात पर दांव पर लगा देंगी कि ब्रिगिट मैक्रों वास्तव में पुरुष हैं।
इन दावों के खिलाफ ब्रिगिट मैक्रों की कानूनी टीम ने प्रतिक्रिया दी। जनवरी 2025 में ओवेन्स ने एक वीडियो में कहा कि उन्हें फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों के वकीलों की ओर से कानूनी नोटिस मिला है।
उस नोटिस में साफ कहा गया था कि ब्रिगिट मैक्रों को अपनी महिला होने का प्रमाण किसी को देने की जरूरत नहीं है और ओवेन्स का व्यवहार अपमानजनक है।
फिर भी, ओवेन्स इस पूरे अभियान से पीछे नहीं हटीं। उन्होंने यूट्यूब पर “Becoming Brigitte” नाम की एक वीडियो सीरीज चलाई, जिसमें उन्होंने बार-बार ब्रिगिट मैक्रों की लिंग पहचान पर सवाल उठाए हैं।
ओवेन्स का कहना है कि यह एक बहुत बड़ा राज है, जिसे सरकार और मीडिया मिलकर छुपा रहे हैं। ओवेन्स ने फरवरी 2025 में एक फ्रांसीसी पत्रकार जेवियर पौसार्ड के साथ इंटरव्यू किया, जिन्होंने “Becoming Brigitte” नाम की किताब भी लिखी है। अमेजन पर उनकी किताब बेस्टसेलर बन चुकी है।
नताचा रे ने रूस में शरण मांगी थी
फ्रांसीसी पत्राकर नताचा रे 2017 से ब्रिगिट मैक्रों के पुरुष होने का दावा कर रही हैं। इस साल की शुरुआत में उन्होंने रूस में राजनीतिक शरण मांगी थी।
रे और उनके वकील फ्रांस्वा डांगलहंट ने रूसी मीडिया को बताया कि उन्हें फ्रांस में सताया जा रहा है, और वे रूस को एक महान लोकतंत्र मानती हैं जहां पर अभिव्यक्ति की आजादी की रक्षा की जाती है।
रे ने फ्रांस सरकार पर अभिव्यक्ति की आजादी को कुचलने का आरोप लगाया। रे ने अपनी तुलना एडवर्ड स्नोडन से की थी, जिन्हें अमेरिका की खुफिया जानकारी लीक करने के बाद रूस में शरण मिली थी।
नताचा रे फ्रांस की एक पत्रकार हैं। उन्होंने सबसे पहले 2017 में दावा किया था कि मैक्रों की पत्नी एक पुरुष हैं।
मैक्रों से 24 साल बड़ी हैं ब्रिजिट
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की पत्नी के उम्र के अंतर को लेकर सोशल मीडिया पर काफी बातें होती रहती हैं। बता दें, ब्रिजिट मैक्रों से 24 साल बड़ी हैं।
साल 1992 में जब इमैनुएल मैक्रों 15 साल के थे, उनकी मुलाकात ब्रिगिट ट्रोन्यू से हुई थी। ब्रिगिट तब 39 साल की थीं और उत्तरी फ्रांस के अमिएंस में ला प्रोविडेंस हाई स्कूल में फ्रेंच और ड्रामा की टीचर थीं। इमैनुएल उस स्कूल में पढ़ते थे।
ब्रिगिट की बेटी मैक्रों की क्लासमेट थी। दोनों अच्छे दोस्त थे और अक्सर साथ दिखाई देते थे। ऐसे में कई लोग दोनों को गर्लफ्रेंड-बॉयफ्रेंड समझते थे। लेकिन मैक्रों को उनकी क्लासमेट नहीं बल्कि उसकी टीचर मां पसंद थीं।
इमैनुएल स्कूल के ड्रामा क्लब में शामिल हुए, जहां ब्रिगिट ड्रामा सिखाती थीं। दोनों ने एक साथ एक नाटक पर काम किया, जिसमें इमैनुएल ने स्क्रिप्ट लिखने में मदद की। यहीं से उनकी नजदीकी शुरू हुई।
ब्रिजिट मैक्रों से 24 साल बड़ी हैं। ब्रिगिट की बेटी मैक्रों की क्लासमेट थी।
पिता ने स्कूल छुड़वाया, फिर भी प्यार बरकरार रहा
इमैनुएल ने बाद में बताया कि उन्हें तब ही ब्रिगिट से प्यार हो गया था। इमैनुएल और ब्रिगिट के बीच बढ़ती नजदीकी की चर्चा स्कूल में हो गई। इमैनुएल के माता-पिता इस रिश्ते के खिलाफ थे। उन्होंने इमैनुएल को पेरिस भेज दिया ताकि वह ब्रिगिट से दूर रहें।
उन्होंने ब्रिगिट को धमकी भी दी कि जबतक उनका बेटा बालिग नहीं हो जाता, तब तक वह उनसे दूर रहे। मैक्रों ने एक इंटरव्यू में कहा था कि उसी समय मैंने ठान लिया था कि मुझे सफल होना है। मैं अपने माता-पिता को साबित करना चाहता था कि मैंने अपनी टीचर से प्यार करके कोई गलती नहीं की थी।
पेरिस में पढ़ाई के दौरान इमैनुएल ने ब्रिगिट से संपर्क बनाए रखा। उन्होंने पत्र लिखे और फोन पर बात की। इमैनुएल ने बाद में एक इंटरव्यू में कहा-
मैंने ब्रिगिट से कहा था कि मैं किसी भी हाल में उनसे शादी करूंगा।
यह तस्वीर 1993 की है। एक नाटक में अभिनय करने के बाद 15 वर्षीय मैक्रों को उनकी टीचर ब्रिगिट ने चूम लिया था।
मैक्रों से मुलाकात के 14 साल बाद पति को तलाक दिया
ब्रिगिट के पति एक बैंकर आंद्रे-लुई औजिए थे। ब्रिगिट ने 2006 में अपने पति से तलाक ले लिया। इसके एक साल बाद 2007 में दोनों ने फ्रांस के तटीय शहर ले टौके में शादी की। उस वक्त इमैनुएल की उम्र 29 साल और ब्रिगिट 54 की थीं।
इमैनुएल ने अपने शादी के भाषण में ब्रिगिट के बच्चों को धन्यवाद दिया कि उन्होंने उन्हें स्वीकार किया। इमैनुएल ने कभी अपने बच्चों की इच्छा नहीं जताई, और वह ब्रिगिट के बच्चों और उनके पोते-पोतियों के साथ पारिवारिक जीवन जीते हैं।
शादी के बाद, ब्रिगिट ने इमैनुएल के करियर में अहम भूमिका निभाई। वह उनकी सलाहकार रही हैं और उनके राजनीतिक अभियानों में सक्रिय रहीं। ब्रिगिट ने अपनी टीचिंग जॉब छोड़ दी और फ्रांस की प्रथम महिला के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभा रही हैं।
इमैनुएल और ब्रिजिट मैक्रॉन ने 20 अक्टूबर 2007 को शादी की थी।
नई दिल्ली, एजेंसी। अमेरिकी यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन के साथ पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी की कई तस्वीरें वायरल हैं। ये तस्वीरे इसलिए अहम मानी जा रही हैं, क्योंकि पुरी लगातार कहते रहे हैं वे एपस्टीन से केवल प्रतिनिधिमंडल के साथ मिले, अलग से कभी मुलाकात नहीं हुई।
तस्वीरें सामने आने के बाद कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा- जब पुरी ने कहा था कि वे एपस्टीन से कभी अकेले नहीं मिले, तो इन तस्वीरों के क्या मायने हैं?
TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा- पुरी कहते थे कि वे एपस्टीन से तीन-चार बार डेलिगेशन के साथ मिले थे, दोनों तस्वीरों में बाकी सदस्य कहां थे।
इन तस्वीरों को जस्टिस डिपार्टमेंट की तरफ जारी जारी दस्तावेजों के नौवें सेट में रखा गया था। इस सेट में कम से कम 11 तस्वीरें हैं। मंगलवार को यह तस्वीर सोशल मीडिया पर चर्चा में आई।
इन तस्वीरों में दोनों लगभग एक ही स्थिति में बैठे दिखाई देते हैं। तस्वीरों के कोण में मामूली अंतर है।
इस साल फरवरी में हरदीप सिंह पुरी ने लोकसभा में राहुल गांधी की ओर से एपस्टीन फाइलों को लेकर लगाए गए आरोपों को खारिज किया था।
पुरी ने बताया था कि वह संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत का पद छोड़ने के बाद और 2017 में केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने से पहले एपस्टीन से मिले थे। उन्होंने इन मुलाकातों को पूरी तरह पेशेवर बताया था और कहा था कि उनका एपस्टीन के खिलाफ लगे आपराधिक आरोपों से कोई संबंध नहीं था।
पुरी ने फरवरी में एक इंटरव्यू में कहा था कि वह इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूशन (IPI) से जुड़े एक डेलिगेशन के रूप में गए थे। उसी दौरान एपस्टीन से मिले। वे सार्वजनिक जीवन में कई तरह के लोगों से मिलते हैं, जिनमें से कुछ का आपराधिक रिकॉर्ड भी हो सकता है। पुरी के मुताबिक IPI में उनके बॉस टेर्जे रोड-लार्सन एपस्टीन को जानते थे।
पुरी ने कहा-
पहली बार मुलाकात के दौरान मुझे नहीं पता था कि एपस्टीन कौन हैं। हमने उनके बारे में गूगल पर सर्च किया। फिर हमने आपस में भी चर्चा की कि हमें उनसे मिलना चाहिए या नहीं?
नवंबर 2025 में पहली बार सामने आया नाम
निगरानी समिति की ईमेल में जिक्र: हरदीप सिंह पुरी और जेफ्री एपस्टीन के संपर्क का मामला पहली बार नवंबर 2025 में सार्वजनिक चर्चा में आया था। उस समय हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की निगरानी समिति की ओर से जारी एक ईमेल में एपस्टीन और पुरी के बीच की बातचीत का जिक्र हुआ था।
ईमेल कब के हैं: इसके बाद अमेरिकी न्याय विभाग (DoJ) ने 30 जनवरी को एपस्टीन से जुड़े लाखों पन्नों के दस्तावेज जारी किए थे। इनमें जून 2014 से जून 2017 के बीच के ईमेल शामिल हैं।
तीन मुलाकातों का जिक्र: ईमेल के मुताबिक पुरी 4 फरवरी 2015, 6 जनवरी 2016 और 19 मई 2017 को न्यूयॉर्क में एपस्टीन के घर गए थे।
एपस्टीन यौन अपराधी साबित हो चुका था: 2008 में एपस्टीन यौन अपराध के मामले में दोषी ठहराया जा चुका था। यानी पुरी की बताई गई मुलाकातें उस समय हुईं, जब एपस्टीन का आपराधिक रिकॉर्ड पहले से मौजूद था।
‘एक्जॉटिक आइलैंड’ का जिक्र: एक ईमेल में पुरी ने एपस्टीन के ‘एक्जॉटिक आइलैंड’ यानी अनोखे द्वीप का जिक्र किया और उसे ‘हैव फन’ कहा, जिसका मतलब है ‘मौज करो’। पुरी ने बाद में कहा कि ‘हैव फन’ उनके बोलने का आम तरीका है।
हरदीप सिंह पुरी और एपस्टीन से जुड़ा ईमेल
यह ईमेल हरदीप सिंह पुरी ने 24 दिसंबर 2014 को जेफ्री एपस्टीन को भेजा था।
इसमें लिखा है-प्रिय जेफ, त्योहारों की शुभकामनाएं। जब आप अपने द्वीप से वापस आएं, तो मुझे जरूर बताइएगा।मैं आपसे बातचीत करने के लिए मिलना चाहूंगा। साथ ही, भारत में रुचि जगाने के लिए आपको कुछ किताबें भी देना चाहूंगा।
करोड़पति फाइनेंसर था यौन अपराधी एपस्टीन
जेफ्री एपस्टीन न्यूयॉर्क का करोड़पति फाइनेंसर था। उसकी बड़े नेताओं और सेलिब्रिटीज से दोस्ती थी।
उस पर 2005 में नाबालिग लड़की के साथ यौन उत्पीड़न का आरोप लगा। 2008 में उसे नाबालिग से सेक्स की मांग करने का दोषी ठहराया गया।
उसे 13 महीने की जेल हुई। 2019 में जेफ्री को सेक्स ट्रैफिकिंग के आरोपों में गिरफ्तार किया गया। लेकिन मुकदमे से पहले ही उसने जेल में आत्महत्या कर ली।
उसकी पार्टनर घिसलीन मैक्सवेल को 2021 में उसकी मदद करने के आरोपों में दोषी करार दिया गया। वह 20 साल की सजा काट रही है।
पेशावर, एजेंसी। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की राजधानी पेशावर की दिर कॉलोनी में एक निजी स्कूल की छत गिरने से कई बच्चों की मौत हो गई और बड़ी संख्या में लोग घायल हो गए। हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई। बचाव दल मलबा हटाकर उसमें दबे बच्चों और स्कूल कर्मचारियों को निकालने में जुटे हैं। इस दर्दनाक हादसे में कम से कम 28 बच्चों और एक शिक्षिका की मौत हो गई। तीन दर्जन से अधिक लोग घायल हुए हैं।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, कुछ घायलों की हालत गंभीर है।आपातकालीन सेवाओं के प्रवक्ता बिलाल फैजी ने बताया कि हादसे के बाद कई बच्चे मलबे के नीचे फंसे हुए थे। बचावकर्मी मलबा हटाकर उन तक पहुंचने की कोशिश कर रहे थे। अस्पताल के प्रवक्ता मोहम्मद आसिम ने मृतकों और घायलों की जानकारी की पुष्टि की।
अस्पताल के प्रवक्ता के मुताबिक, हादसे में मारे गए और घायल हुए सभी बच्चे 13 वर्ष या उससे कम उम्र के थे। घायलों को उपचार के लिए सरकारी लेडी रीडिंग अस्पताल पहुंचाया गया, जहां घायलों की संख्या और उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए आपातकाल घोषित कर दिया गया। चिकित्साकर्मी घायलों के इलाज में जुटे रहे। हादसे में मृतकों की अंतिम संख्या अभी स्पष्ट नहीं है और बचाव अभियान के दौरान इसमें बदलाव हो सकता है।
बीजिंग/नई दिल्ली, एजेंसी। चीन ने लद्दाख की 28 जगहों पर अपना बताया है। चीन ने मंगलवार को इन जगहों के नाम तय करने के भारत के फैसले पर आपत्ति भी जताई। चीन ने कहा- ये इलाके हमारे हैं और भारत के नाम बदलने या नया नाम रखने से जमीन पर मालिकाना हक नहीं बदलेगा।
भारत ने 2 अक्टूबर को इन जगहों के नाम आधिकारिक तौर पर तय किए थे। इनमें गोगरा और हॉट स्प्रिंग जैसे इलाके भी शामिल हैं, जहां 2020 में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच तनाव हुआ था।
चीन बोला- लद्दाख को भारत का UT नहीं मानते
चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने मंगलवार को कहा कि चीन लद्दाख को भारत की ओर से बनाया गया केंद्र शासित प्रदेश नहीं मानता। चीन ने भारत के इस कदम को गैरकानूनी बताते हुए कहा कि सीमा के पश्चिमी हिस्से के ये इलाके उसके हैं।
माओ के मुताबिक, भारत के इस फैसले से सीमा के पश्चिमी हिस्से में उन इलाकों पर चीन का दावा नहीं बदल सकता, जिन्हें वह अपना क्षेत्र मानता है।
चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने मंगलवार को भारत के लद्दाख के इलाकों का नाम तय करने या बदलने का विरोध किया।
भारत बोला- लद्दाख हमारा हिस्सा, इनकार करने से हकीकत नहीं बदलेगी
चीन की आपत्ति पर भारत ने भी जवाब दिया है। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि लद्दाख भारत का हिस्सा है। चीन के इनकार करने से यह हकीकत नहीं बदलेगी।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि इन जगहों के नाम सर्वे ऑफ इंडिया के आधिकारिक नक्शे में दर्ज किए गए हैं। यह काम लद्दाख प्रशासन और स्थानीय लोगों से सलाह लेकर किया गया है।
जायसवाल ने कहा कि इन जगहों के नाम नक्शे में दर्ज करने का मकसद उनकी सही पहचान करना और लोगों को उनके बारे में जानकारी देना है।
भारत ने 28 जगहों के नाम क्यों तय किए?
भारत के गृह मंत्रालय ने 2 अक्टूबर को आधिकारिक तौर पर लद्दाख की 28 जगहों और क्षेत्रों के नाम तय किए थे।
भारत का फैसला 2023 में चीन की ओर से अरुणाचल प्रदेश के इलाकों के नाम बदलने के जवाब में उठाया गया था। चीन अरुणाचल प्रदेश को ‘जांगनान’ यानी दक्षिणी तिब्बत कहता रहा है।
गोगरा और हॉट स्प्रिंग पूर्वी लद्दाख के संवेदनशील इलाके
भारत ने जिन जगहों के नाम तय किए, इनमें गोगरा और हॉट स्प्रिंग भी शामिल हैं। ये पूर्वी लद्दाख के संवेदनशील इलाके हैं, जहां भारत और चीन के सैनिकों के बीच सीमा पर तनाव रहा है। इन जगहों पर भारतीय सैनिक गश्त भी करते हैं।
मई 2020 में पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच सीमा विवाद बढ़ गया था। 5 मई को पैंगोंग झील के पास दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी।
2020 के जून में गलवान घाटी में भी दोनों सेनाओं के बीच हिंसक संघर्ष हुआ था। इसके बाद दोनों देशों ने सीमा पर तनाव कम करने और सैनिकों को पीछे हटाने के लिए बातचीत शुरू की। सैनिकों को पीछे हटाने की प्रक्रिया 2022 में शुरू हुई।
लद्दाख में भारत-चीन सीमा पर पैंगोंग झील के इलाके में दोनों देशों के सैन्य अधिकारी मिले थे। तस्वीर 10 फरवरी 2022 की है।
28 जगहों में कौन-कौन से नाम शामिल हैं?
भारत की ओर से तय किए गए 28 नामों में पहाड़, दर्रे, ग्लेशियर, जमीन के हिस्से, घाटियां और जल स्रोत शामिल हैं।
दर्रे-ग्लेशियर: चापचिंगल दर्रा, शाचमिरिक दर्रा, पारपिक ग्लेशियर और स्कामरी ग्लेशियर।
जमीन के इलाके: ब्रांगसा, कुकसेल, देहरा कम्पास, गोगरा, कुमारायण पॉइंट, पंगलुंग और शमाल लुंगपा।
घाटी-जल स्रोत: श्कोर्गा घाटी, गुरु रिनपोछे झील, यांगपा नदी और हॉट स्प्रिंग।
इन जगहों के नाम तय करके सरकारी नक्शे में शामिल करने का मकसद उनकी सही पहचान बताना है।
गलवान में भारत और चीन के बीच हिंसक झड़प हुई थी
जून 2020 में लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच सीमा विवाद को लेकर हिंसक झड़प हुई थी। भारत के मुताबिक, 6 जून को दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच सैनिकों को पीछे हटाने पर सहमति बनी थी, लेकिन 15 जून की रात फिर टकराव हो गया।
इस दौरान सैनिकों के बीच पत्थरों और डंडों से लड़ाई हुई। झड़प में भारत के 20 सैनिकों की मौत हुई थी। चीन ने फरवरी 2021 में अपने 4 सैनिकों की मौत की बात स्वीकार की थी। इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया और सीमा पर सैनिकों की तैनाती बढ़ा दी गई।
जून 2020 में गलवान घाटी में भारत-चीन सीमा पर झड़प के दौरान आमने-सामने खड़े दोनों देशों के सैनिक।
अरुणाचल प्रदेश को लेकर भी दोनों देशों के बीच विवाद
भारत और चीन के बीच अरुणाचल प्रदेश को लेकर लंबे समय से सीमा विवाद है। चीन अरुणाचल प्रदेश के बड़े हिस्से पर अपना दावा करता है और इसे ‘जांगनान’ यानी दक्षिणी तिब्बत कहता है।
इसी दावे के तहत चीन 2017 से कई बार अरुणाचल प्रदेश की जगहों के चीनी नाम जारी कर चुका है। 2023 में चीन ने 11 और 2024 में करीब 30 जगहों के नाम जारी किए थे। भारत हर बार इसका विरोध करता रहा है।
भारत का कहना है कि अरुणाचल प्रदेश उसका अभिन्न हिस्सा है और चीन के नाम बदलने से जमीन पर स्थिति नहीं बदल सकती। भारत की नजर में यह सिर्फ नामों का मामला नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र पर चीन के दावे से जुड़ा विवाद है।