सना,एजेंसी। यमन में मौत की सजा पाने वाली केरल की नर्स निमिषा प्रिया की मौत की सजा फिलहाल टाल दी गई है। उसे 16 जुलाई को सजा-ए-मौत दी जानी थी। न्यूज एजेंसी ANI ने मंगलवार को सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एक्टिविस्ट ग्रुप और प्रभावशाली धार्मिक नेताओं ने इस मामले में दखल दिया, जिसके बाद निमिषा प्रिया की मौत की सजा स्थगित कर दी गई है।
इससे पहले निमिषा को मौत की सजा से बचाने के लिए डिप्लोमैटिक लेवल पर भी कई कोशिशें की गई थीं। खबर यह भी है कि पीड़ित का परिवार अभी तक क्षमादान या ब्लड मनी स्वीकार करने के लिए सहमत नहीं हुआ है।
ये तस्वीर निमिषा प्रिया और उनके पति टॉमी थॉमस की है।
भारत और यमन के धर्मगुरुओं की बातचीत जारी
रिपोर्ट के मुताबिक भारत में कंथापुरम के ग्रैंड मुफ्ती एपी अबूबकर मुसलियार और यमन के चर्चित सूफी विद्वान शेख हबीब उमर बिन हाफिज इस मसले पर बातचीत कर रहे हैं। इसमें यमन के सुप्रीम कोर्ट के एक जज और मृतक के भाई भी शामिल हैं।
यमन के शेख हबीब को बातचीत के लिए मुफ्ती मुसलियार ने मनाया। ऐसा भी पहली बार हुआ है जब पीड़ित परिवार का कोई करीबी सदस्य बातचीत को तैयार हुआ है।
यह बातचीत शरिया कानून के तहत हो रही है, जो पीड़ित परिवार को दोषी को बिना किसी शर्त के या फिर ब्लड मनी के बदले में माफ करने का कानूनी अधिकार देता है।
निमिषा पर यमन के नागरिक की हत्या का केस
भारतीय नर्स निमिषा 2017 से जेल में बंद हैं, उन पर यमन के नागरिक तलाल अब्दो महदी को ड्रग का ओवरडोज देकर हत्या करने का आरोप है।
निमिषा और महदी यमन में एक प्राइवेट क्लिनिक में पार्टनर थे। आरोप है कि महदी ने निमिषा का पासपोर्ट अपने कब्जे में ले रखा था और उसे प्रताड़ित करता था।
निमिषा को प्रताड़ित करने वाले तलाल अब्दो महदी की तस्वीर, जिसकी ड्रग के ओवरडोज से मौत हो गई।
यमन में भारतीय दूतावास नहीं, रियाद के जरिए बातचीत हुई
भारत के पास यमन में स्थायी राजनयिक मिशन (दूतावास) नहीं है। 2015 में राजनीतिक अस्थिरता के कारण राजधानी सना में भारतीय दूतावास बंद कर दिया गया था और इसे जिबूती में ट्रांसफर कर दिया गया था।
भारत सरकार यमन सरकार से मुख्य रूप से ‘नॉन-रेजिडेंट राजदूत’ के जरिए बात करती है। फिलहाल भारत सरकार रियाद में मौजूद राजदूत के जरिए बातचीत कर रही है।
निमिषा की सजा पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई थी
भारत सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि वो निमिषा के मामले में ज्यादा कुछ नहीं कर सकती है। अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणि ने कोर्ट को बताया था- हम एक हद तक ही जा सकते हैं और हम वहां तक पहुंच चुके हैं।
यमन में गृह युद्ध की वजह से निमिषा वहीं फंसी रह गई
यमन में गृह युद्ध की वजह से भारत ने अपने नागरिकों को वहां से निकालने के लिए ‘ऑपरेशन राहत’ शुरू किया। यह ऑपरेशन अप्रैल-मई 2015 तक चला, जिसमें 4,600 भारतीयों और करीब एक हजार विदेशी नागरिकों को यमन से निकाला, लेकिन इनमें सिर्फ निमिषा ही भारत नहीं लौट पाईं।
2016 में महदी ने निमिषा के साथ शारीरिक उत्पीड़न करना शुरू कर दिया। उसने निमिषा के क्लिनिक का प्रॉफिट भी हड़प लिया। जब निमिषा ने इस बारे में सवाल किया तो दोनों के रिश्ते खराब हो गए। महदी निमिषा को यमन से बाहर नहीं जाने देना चाहता था, इसलिए उसने निमिषा का पासपोर्ट अपने पास रख लिया।
निमिषा ने पुलिस में महदी की शिकायत भी दर्ज कराई, लेकिन पुलिस ने निमिषा को ही 6 दिनों की हिरासत में ले लिया, क्योंकि महदी ने एडिटेड फोटो दिखाकर निमिषा का पति होने का दावा किया।
तस्वीर में निमिषा के पति थॉमस शादी की एल्बम दिखाते हुए।
निमिषा ने ड्रग्स का ओवरडोज दिया, जिससे महदी की मौत हो गई
निमिषा काफी परेशान हो चुकीं थीं। जुलाई 2017 में महदी से पासपोर्ट लेने के लिए निमिषा ने उसे बेहोशी का इंजेक्शन दिया, लेकिन इसका असर नहीं हुआ। फिर निमिषा ने महदी को ओवरडोज दे दिया, जिससे उसकी मौत हो गई।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, निमिषा ने महदी के शरीर के टुकड़े कर वाटर टैंक में फेंक दिए। इसके बाद पुलिस ने निमिषा को गिरफ्तार कर लिया।
यमन की सुप्रीम ज्यूडिशियल काउंसिल ने निमिषा को महदी की हत्या के आरोप में मौत की सजा सुनाई। निमिषा ने यमन की सुप्रीम कोर्ट में माफी की अपील दायर की, जिसे 2023 में खारिज कर दिया गया। राष्ट्रपति रशद ने भी 30 दिसंबर 2024 को सजा को मंजूरी दे दी।
निमिषा को बचाने के लिए क्राउड फंडिंग से जुटाई गई ब्लड मनी
निमिषा को माफी दिलाने के लिए उनकी मां ने अपनी संपत्ति बेचकर और क्राउड फंडिंग के जरिए ‘ब्लड मनी जुटाने की भी कोशिश की।
2020 में निमिषा को सजा से बचाने और ब्लड मनी इकट्ठा करने के लिए ‘सेव निमिषा प्रिया इंटरनेशनल एक्शन काउंसिल’ बनाई गई। केरल के एक जाने-माने बिजनेसमैन ने निमिषा को बचाने के लिए 1 करोड़ रुपए देने का ऐलान किया था।
शरिया कानून के मुताबिक, पीड़ित पक्ष को अपराधियों की सजा तय करने का हक है। हत्या के मामले में मौत की सजा है, लेकिन पीड़ित का परिवार पैसे लेकर दोषी को माफ कर सकता है। इसे ‘दीया’ या ‘ब्लड मनी’ कहा जाता है, जिसका जिक्र कुरान में भी किया गया है।
यमन में दिल के पास गोली मारकर देते हैं सजा-ए-मौत
यमन में सिर्फ गोली मारकर ही मौत की सजा दी जाती है। हालांकि, यहां पत्थर मारना, फांसी देना और सिर कलम करने का भी प्रावधान है, लेकिन इनका इस्तेमाल नहीं किया जाता है।
गोली मारने से पहले दोषी को किसी गलीचे या कंबल पर चेहरा नीचे करके लेटा दिया जाता है।
इसके बाद डॉक्टर दोषी की पीठ के ऊपर दिल की जगह पर एक निशान लगाता है और फिर जल्लाद ऑटोमैटिक राइफल से उसकी पीठ में गोलियां मारता है। कुछ मामलों में मृत्युदंड से पहले कोड़े मारने की सजा भी दी जाती है।
किसास, हुदूद और ताजीर जैसे अपराध के लिए मौत की सजा
यमन के पीनल कोड के मुताबिक किसास, हुदूद और ताजीर के लिए मृत्युदंड का प्रावधान है।
किसास: आंख के बदले आंख का नियम, इसके तहत हत्या के मामलों में पीड़ित के परिवार को ब्लड मनी लेकर माफी लेने का अधिकार है।
हुदूद अपराध: व्यभिचार, समलैंगिकता, धर्मत्याग और डकैती जैसे अपराधों के लिए शरिया के तहत मृत्युदंड दिया जा सकता है।
ताजीर: गंभीर अपराधों जैसे आतंकवाद, जासूसी, या देशद्रोह के लिए मृत्युदंड दिया जा सकता है।
नई दिल्ली, एजेंसी। परीक्षाओं में पेपर लीक और धांधली की घटनाओं पर सख्त रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार मौजूदा कानूनी प्रावधानों को और मजबूत करने जा रही है। सरकार ने पब्लिक एग्जामिनेशंस एक्ट, 2024 में संशोधन के मसौदे को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी दे दी है। प्रस्तावित संशोधनों के तहत पेपर लीक के मामलों में 10 साल तक की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
संशोधित विधेयक को मिली मंजूरी
शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) और कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA) की बैठकों के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल की अहम बैठक हुई। इस बैठक में संशोधित पेपर लीक विधेयक के मसौदे पर चर्चा की गई और उसे मंजूरी दे दी गई। सरकार अब इस विधेयक को अगले सप्ताह शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र में पेश करने की तैयारी कर रही है।
पेपर लीक माफिया पर होगी कड़ी कार्रवाई
प्रस्तावित संशोधनों के तहत पेपर लीक से जुड़े संगठित गिरोहों और दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा मामलों के त्वरित निपटारे के लिए स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट को कानूनी आधार दिया जाएगा। इन अदालतों को तीन महीने के भीतर जांच पूरी कर फैसला सुनाने का अधिकार देने का प्रस्ताव है, ताकि छात्रों को जल्द न्याय मिल सके।
बता दें कि इस फैसले से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक की घटनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा था कि यह कोई सामान्य अपराध नहीं है, बल्कि लाखों छात्रों और उनके परिवारों के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने भरोसा दिलाया था कि दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए सरकार मजबूत कानूनी व्यवस्था लागू करेगी।
CJP और केंद्र सरकार के बीच हुई अहम बैठक
इधर, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों के बीच नई दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में बैठक हुई। इस वार्ता को आंदोलन के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बैठक से पहले CJP ने मंत्रियों के सरकारी आवास या कार्यालय में बातचीत से इनकार करते हुए किसी तटस्थ स्थान पर बैठक की मांग की थी, जिसके बाद कॉन्स्टिट्यूशन क्लब को वार्ता स्थल बनाया गया।
CJP ने रखीं ये प्रमुख मांगें
बैठक के दौरान CJP ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई। इसके अलावा प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जवाबदेही तय करने, पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच कराने और आंदोलन के दौरान छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग भी सरकार के सामने रखी गई।
नई दिल्ली, एजेंसी। कांग्रेस ने शुक्रवार को अपनी राज्य इकाइयों को निर्देश दिया कि वे 25 जुलाई (शनिवार) को ज़िला स्तर पर कैंडललाइट मार्च और सत्याग्रह आयोजित करें। यह आयोजन NEET और CBSE परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्रों के समर्थन में और विरोध कर रहे छात्रों पर कथित “बर्बर हमलों” की निंदा करने के लिए किया जाएगा। सभी प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) अध्यक्षों को लिखे एक पत्र में, AICC महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि ये कार्यक्रम कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के निर्देशन में आयोजित किए जाने चाहिए।
वेणुगोपाल ने पत्र में कहा, “माननीय कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के निर्देशानुसार, आपसे अनुरोध है कि आप अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली प्रत्येक ज़िला कांग्रेस कमेटी (DCC) को शनिवार शाम, 25 जुलाई, 2026 को एक विशाल कैंडललाइट मार्च और सत्याग्रह आयोजित करने का निर्देश दें।” पत्र में कहा गया है कि मार्च महात्मा गांधी या डॉ. बीआर अंबेडकर की प्रतिमा की ओर बढ़ना चाहिए और वहीं समाप्त होना चाहिए, साथ ही छात्रों और युवाओं के समर्थन में सत्याग्रह आयोजित किया जाना चाहिए।
कांग्रेस ने अपने कार्यकर्ताओं को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की मांग करने का भी निर्देश दिया। पार्टी ने परीक्षा की शुचिता के “पूरी तरह से ध्वस्त होने” और देश के युवाओं के भविष्य की रक्षा करने में विफलता का आरोप लगाया। पत्र में कहा गया, “हमें परीक्षा की शुचिता के पूरी तरह से ध्वस्त होने और देश के युवाओं के भविष्य की रक्षा करने में विफलता के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की भी स्पष्ट रूप से मांग करनी चाहिए।”
पार्टी ने PCC, DCC, ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों, फ्रंटल संगठनों, विभागों, सेल और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ-साथ छात्रों, युवाओं, अभिभावकों और नागरिक समाज के सदस्यों की भागीदारी का आह्वान किया। PCC अध्यक्षों से यह सुनिश्चित करने के लिए भी कहा गया कि मार्च और सत्याग्रह “शांतिपूर्ण, अनुशासित और प्रभावी ढंग से” आयोजित किए जाएं और उन्हें व्यापक मीडिया और सोशल मीडिया कवरेज मिले।
पत्र में कहा गया, “भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस भारत के छात्रों के साथ मजबूती से खड़ी है और डराने-धमकाने, दमन और सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग के माध्यम से लोकतांत्रिक आवाज़ों को दबाने के किसी भी प्रयास का पुरजोर विरोध करेगी। कांग्रेस की यह घोषणा NEET-UG 2026 परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच आई है। इस बीच, दिल्ली में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह तथा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास और राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका के बीच एक बैठक हुई।
CJP बातचीत के लिए तब सहमत हुई जब सरकार ने कथित तौर पर उसकी दो शर्तें मान लीं — कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी और हाल ही में परीक्षा में हुई गड़बड़ियों से प्रभावित छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाएगा। हालांकि, CJP प्रधान के इस्तीफे की अपनी मुख्य मांग पर अड़ी रही। CJP प्रतिनिधि अभिजीत दिपके ने कहा, “हमें (केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के) इस्तीफे से कम कुछ भी मंजूर नहीं है। विरोध प्रदर्शन वापस नहीं लिया जाएगा।” यह घटनाक्रम तब हुआ है जब सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने NEET परीक्षा के मुद्दे और प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रणालीगत सुधारों के संबंध में केंद्र सरकार से लिखित आश्वासन मिलने के बाद अपनी 26 दिन की भूख हड़ताल खत्म कर दी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह भी घोषणा की है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल एक ऐसे मसौदा विधेयक पर विचार करेगा जिसमें पेपर लीक में शामिल लोगों के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट और कड़ी सजा का प्रावधान होगा।
नई दिल्ली/भोपाल/जयपुर, एजेंसी। हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति में शुक्रवार को उदयपुर-किलाड़ सड़क पर कडू नाला के पास लैंडस्लाइड हो गई। इसकी चपेट में टाटा सूमो टैक्सी आ गई। गाड़ी में 15 लोग सवार थे, 13 की मौत हो गई।
उधर गुजरात में भारी बारिश से कई जिले बाढ़ की चपेट में हैं। वलसाड के उमरगाम तालुका में 16 घंटों में 43 इंच बारिश हुई, जिससे निचले इलाके डूब गए हैं।
नवसारी में बाढ़ में फंसे लोगों को हेलिकॉप्टर से एयरलिफ्ट किया गया। अहमदाबाद, सूरत में पानी भर गया। वाव-थराद जिले में बाजार डूब गए।
यूपी में पिछले 10 दिनों से हो रही बारिश के चलते गंगा, यमुना समेत 10 नदियां उफान पर हैं। सीतापुर में पानी सड़क पर भर गया। ग्रामीण नाव से आ-जा रहे हैं।
वहीं, राजस्थान के बांसवाड़ा और डूंगरपुर समेत 11 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी है।