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रुपया होगा मजबूत, UPI बनेगा ग्लोबल, RBI का 2029 तक का बड़ा रोडमैप तैयार

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नई दिल्ली,एजेंसी। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी मध्यम अवधि की रणनीति ‘Utkarsh 2029’ का रोडमैप पेश किया है, जिसके तहत आने वाले वर्षों में देश की वित्तीय प्रणाली को अधिक मजबूत, डिजिटल और वैश्विक बनाने की दिशा में बड़े कदम उठाए जाएंगे। गवर्नर संजय मल्होत्रा द्वारा घोषित इस योजना का मुख्य उद्देश्य भारतीय रुपए को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करना, eRupee को बढ़ावा देना और UPI का वैश्विक विस्तार करना है।

2026-2029 के लिए 49 लक्ष्यों पर फोकस

RBI ने 2026 से 2029 के बीच 49 विशिष्ट लक्ष्यों को पूरा करने की योजना बनाई है, जिन्हें छह रणनीतिक स्तंभों में विभाजित किया गया है। इसके तहत पुराने नियमों और सर्कुलर की समीक्षा कर उन्हें वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप सरल बनाया जाएगा। साथ ही, विनियमित संस्थाओं के लिए प्रक्रियाओं को आसान कर लचीलापन बढ़ाया जाएगा।

ग्राहक शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करने के साथ बैंकों की सेवा गुणवत्ता का कड़ाई से मूल्यांकन किया जाएगा। इसके अलावा, पूरे सिस्टम में बेहतर जोखिम आकलन फ्रेमवर्क विकसित किया जाएगा और वित्तीय बाजार इंफ्रास्ट्रक्चर में ऑटोमेशन तथा सेंट्रल क्लियरिंग का विस्तार किया जाएगा।

लोन होगा सस्ता और आसान

इस रणनीति का एक प्रमुख लक्ष्य कर्ज को अधिक सुलभ और किफायती बनाना है। इसके लिए RBI Unified Lending Interface (ULI) का विस्तार करेगा, जिससे छोटे व्यापारियों और किसानों को कम कागजी प्रक्रिया के साथ तेजी से लोन उपलब्ध हो सकेगा। इससे लोन की लागत भी घटने की उम्मीद है।

UPI और रुपया को मिलेगी वैश्विक पहचान

RBI की योजना UPI को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने और वैश्विक व्यापार में रुपए के उपयोग को बढ़ावा देने की है। इससे विदेशी लेनदेन में डॉलर पर निर्भरता कम होगी और कन्वर्जन लागत में कमी आएगी।

eRupee के जरिए तेज और सस्ता भुगतान

eRupee को लेकर RBI का फोकस और तेज होगा। इस डिजिटल करेंसी के माध्यम से देशों के केंद्रीय बैंक सीधे लेनदेन कर सकेंगे, जिससे भुगतान प्रक्रिया रियल-टाइम और कम लागत वाली होगी।

eRupee का उपयोग सरकारी सब्सिडी और अन्य लक्षित योजनाओं में भी किया जा सकेगा, जिससे धन का सही उपयोग सुनिश्चित होगा। खास बात यह है कि RBI ऐसी तकनीक विकसित कर रहा है, जिससे बिना इंटरनेट के भी eRupee से भुगतान संभव होगा, जो ग्रामीण क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

आम लोगों और अर्थव्यवस्था पर असर

इस पहल के लागू होने से आम लोगों को सस्ता और आसान लोन मिलने के साथ-साथ तेज और कम लागत वाले डिजिटल भुगतान का लाभ मिलेगा। छोटे कारोबारियों और किसानों को विशेष रूप से फायदा होगा।

वहीं, अंतरराष्ट्रीय व्यापार में रुपए के बढ़ते उपयोग से भारतीय मुद्रा की स्थिति मजबूत होगी और वैश्विक बाजार में इसकी स्थिरता बढ़ेगी।

गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार, “RBI का लक्ष्य पेमेंट सिस्टम को वैश्विक स्तर तक पहुंचाना, वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना और सेवाओं के लिए उच्च मानक स्थापित करना है।”

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बंगाल में मोदी की हुंकार – राज्य में लागू करेंगे UCC, खत्म होगी तुष्टीकरण की राजनीति

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मुर्शिदाबाद,एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता लागू (यूसीसी) करने का शनिवार को वादा किया, ताकि ”तुष्टीकरण की राजनीति” को समाप्त किया जा सके। उन्होंने साथ ही कहा कि भाजपा बंगालियों को राज्य में अल्पसंख्यक नहीं बनने देगी। मोदी ने मुस्लिम बहुल मुर्शिदाबाद जिले के जंगीपुर में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा शुक्रवार को जारी किया गया भाजपा का चुनावी घोषणापत्र पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के ‘महाजंगलराज’ को समाप्त करने का एक खाका है।

प्रधानमंत्री ने कहा, ”देश की सुरक्षा हमारे लिए सर्वोपरि है। भाजपा पश्चिम बंगाल में तुष्टीकरण की राजनीति को हमेशा के लिए समाप्त करने के लिए यूसीसी लागू करने का संकल्प लेती है।” उन्होंने यह टिप्पणी राज्य भाजपा द्वारा अपने चुनावी घोषणापत्र में सत्ता में आने पर छह महीने के भीतर यूसीसी को लागू करने का वादा करने के एक दिन बाद की है। तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि राज्य के लोग यह नहीं भूले हैं कि कैसे ”राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी आरजी कर बलात्कार और हत्याकांड के दोषियों के साथ खड़ी रही”।

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मोदी ने तृणमूल कांग्रेस पर ‘मां-माटी-मानुष’ के अपने पुराने नारे को त्यागने और इसके बजाय ”घुसपैठियों के समर्थन” पर निर्भर रहने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ”पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस ‘मां-माटी-मानुष’ के नारे के साथ सत्ता में आई थी। लेकिन अब यह घुसपैठियों के मतों से सरकार बनाना चाहती है।” प्रधानमंत्री ने कहा, ”पश्चिम बंगाल अब तुष्टीकरण और वोट बैंक की राजनीति के इस खेल को बर्दाश्त नहीं करेगा। हम बंगालियों को राज्य में अल्पसंख्यक नहीं बनने देंगे।” चुनाव को पश्चिम बंगाल की पहचान को संरक्षित करने की लड़ाई बताते हुए मोदी ने आरोप लगाया कि राज्य के कुछ हिस्सों में तेजी से जनसांख्यिकीय बदलाव हो रहा है। उन्होंने कहा, ”यह चुनाव पश्चिम बंगाल की पहचान को बचाने का है। राज्य में जनसांख्यिकीय परिवर्तन बहुत तेजी से हो रहा है।”

भ्रष्टाचार के मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, ”पश्चिम बंगाल में भाजपा के सत्ता में आने के बाद भ्रष्टों को संरक्षण देने और जनता को लूटने वाले लोग जेल में जायेंगे।” उन्होंने आरोप लगाया कि ”वामदलों के गुंडे” अब तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए हैं और राज्य में सत्तारूढ़ पार्टी पर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेतृत्व वाली पिछली सरकार की ‘कट-कमीशन’ की राजनीति का अनुकरण करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ”बंगाल का इतिहास गवाह है कि जब वह बदलाव का संकल्प लेता है, तो दुनिया की कोई भी ताकत उसे रोक नहीं सकती। जिसने भी बंगाल को चुनौती दी, उसका अहंकार चकनाचूर हो गया, अंग्रेजों से लेकर कांग्रेस और वामपंथियों तक… अब तृणमूल कांग्रेस की बारी है।”

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मोदी ने इस वर्ष पश्चिम बंगाल में राम नवमी के मौके पर आयोजित शोभा यात्राओं के दौरान हुई हिंसा का भी जिक्र किया और इसकी तुलना देश के बाकी हिस्सों में मनाए गए उत्सव से की। उन्होंने कहा, ”पूरे भारत में राम नवमी का पर्व शांतिपूर्ण ढंग से मनाया गया, लेकिन पश्चिम बंगाल में राम नवमी की शोभा यात्राओं पर हमले हुए और तृणमूल कांग्रेस के संरक्षण में हिंसा हुई।” प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि चुनाव में हार को भांपते हुए तृणमूल कांग्रेस साजिश रच रही है और एआई से तैयार वीडियो फैला रही है। उन्होंने लोगों से इस जाल में न फंसने का आग्रह किया। उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस सरकार की अनदेखी के कारण मुर्शिदाबाद के रेशम किसानों का भविष्य बर्बाद हो गया है।

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ईरान संकट के बीच 312 भारतीय मछुआरों की वतन वापसी, आर्मेनिया बना ‘सेफ कॉरिडोर’

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नई दिल्ली,एजेंसी। नई दिल्ली से बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। एस. जयशंकर ने बताया कि ईरान में फंसे 312 भारतीय मछुआरों को सुरक्षित भारत वापस लाया गया है। इन मछुआरों को आर्मेनिया के रास्ते निकाला गया। जयशंकर ने इस मदद के लिए आर्मेनिया सरकार और अपने समकक्ष अरारात मिर्ज़ोयान का धन्यवाद किया। इससे पहले भी भारत सरकार ने लगातार प्रयास करके ईरान से अपने नागरिकों को निकालने का काम जारी रखा है। जानकारी के मुताबिक, अब तक 1200 से ज्यादा भारतीयों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इनमें से 996 लोगों को आर्मेनिया और 204 लोगों को अज़रबैजान के जरिए बाहर निकाला गया। इनमें बड़ी संख्या छात्रों की भी है। पीयूष गोयल ने इस वापसी को “खुशी का दिन” बताया। उन्होंने कहा कि यह मछुआरे लंबे और मुश्किल सफर के बाद अपने घर लौटे हैं, जिसमें उन्हें करीब 20 घंटे की यात्रा करनी पड़ी। विदेश मंत्रालय (MEA) के अधिकारियों ने इस पूरे ऑपरेशन में दिन-रात काम किया और जमीनी स्तर पर समन्वय बनाकर यह मिशन सफल बनाया।

क्यों जरूरी था यह रेस्क्यू?
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और संघर्ष के कारण भारतीय नागरिकों की सुरक्षा खतरे में थी। ऐसे में भारत सरकार ने तुरंत कदम उठाते हुए अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने की योजना बनाई। यह ऑपरेशन भारत की मजबूत कूटनीति और त्वरित कार्रवाई का उदाहरण है। इससे यह साबित हुआ कि संकट के समय भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है।

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Shocking Report on Gold! भारतीय परिवारों के पास कितना सोना? रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा, आंकड़े चौंकाने वाले

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मुंबई, एजेंसी। देश में सोने को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। ASSOCHAM की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय परिवारों के पास करीब 5 ट्रिलियन डॉलर मूल्य का सोना मौजूद है। यह मात्रा दुनिया के टॉप 10 केंद्रीय बैंकों के कुल गोल्ड रिजर्व से भी ज्यादा बताई जा रही है।

सरकारी भंडार से कई गुना ज्यादा सोना

रिपोर्ट के अनुसार, भारत के आधिकारिक गोल्ड रिजर्व, जो World Gold Council के आंकड़ों के मुताबिक करीब 880 टन है, उसके मुकाबले घरेलू सोने का भंडार कहीं अधिक है। इससे साफ होता है कि भारत में सोना सिर्फ निवेश नहीं बल्कि एक बड़ी निजी संपत्ति के रूप में जमा है।

सोना बन सकता है आर्थिक ग्रोथ का इंजन

रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर इस भौतिक सोने को धीरे-धीरे वित्तीय सिस्टम में शामिल किया जाए, तो यह अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार दे सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर हर साल घरेलू सोने का केवल 2 प्रतिशत हिस्सा इस्तेमाल में लाया जाए, तो 2047 तक कुल सोने का लगभग 40 प्रतिशत वित्तीय प्रणाली में लाया जा सकता है।

GDP में 7.5 ट्रिलियन डॉलर का संभावित उछाल

इस बदलाव का बड़ा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर दिख सकता है। अनुमान है कि इससे GDP में करीब 7.5 ट्रिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हो सकती है और जिससे 2047 तक अर्थव्यवस्था का आकार लगभग 34 ट्रिलियन डॉलर से बढ़कर 41.5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारतीय घरों में रखे सोने का कुल मूल्य दुनिया की लगभग सभी अर्थव्यवस्थाओं के वार्षिक GDP से अधिक है, सिर्फ अमेरिका और चीन को छोड़कर।

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