देश
CSR के काम करने के तरीके में बड़ा बदलाव, अब छोटे शहरों में 55 प्रतिशत बढ़ा खर्च
नई दिल्ली,एजेंसी। पिछले कई वर्षों से भारत में कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) का खर्च एक तय पैटर्न पर चलता रहा है। ज़्यादातर फंड बड़े शहरों और उनके आसपास के इलाकों में खर्च होते थे। ऐसा इसलिए क्योंकि कंपनियों के ऑफिस वहीं होते हैं, काम करने की सुविधा वहां बेहतर होती है और प्रोजेक्ट्स के नतीजों को मापना भी आसान होता है। दूसरी तरफ, छोटे शहरों और औद्योगिक जिलों में काफी आर्थिक गतिविधि होने के बावजूद, उन्हें CSR का कम हिस्सा मिलता था।

सत्वा कंसल्टिंग की रिपोर्ट “CSR’s Next Act” बताती है कि अब यह स्थिति धीरे-धीरे बदल रही है। कंपनी के डेटा और जिला स्तर के आंकड़ों के आधार पर यह रिपोर्ट दिखाती है कि सीएसआर का पैसा अब छोटे शहरों, औद्योगिक क्षेत्रों और कुछ ज़रूरतमंद इलाकों की ओर बढ़ रहा है। हालांकि, बड़े शहरों का असर अभी भी बना हुआ है।
भारत में सीएसआर का नियम कंपनी अधिनियम 2013 के तहत लागू हुआ था, जिसके अनुसार योग्य कंपनियों को अपने औसत शुद्ध लाभ का कम से कम 2 प्रतिशत सामाजिक कामों पर खर्च करना होता है। समय के साथ यह एक बड़ा फंड बन गया है। आज 4,000 से ज़्यादा कंपनियां मिलकर हर साल करीब रू.30,000 करोड़ सीएसआर पर खर्च करती हैं, जो विकास के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत है।
बड़े शहरों को मिला सीएसआर का लाभ
कई सालों तक बड़े शहरों को लगभग एक-तिहाई सीएसआर फंड मिलता रहा। कंपनियां आमतौर पर उन जगहों पर पैसा लगाती थीं जहां उनका ऑफिस होता है या जहां पहले से भरोसेमंद पार्टनर मौजूद होते हैं। साथ ही, रिपोर्टिंग और परिणाम दिखाने की ज़रूरत ने भी बड़े शहरों में सीएसआर को सीमित रखा। लेकिन अब इसमें बदलाव दिख रहा है। पिछले 3 सालों में छोटे शहरों में सीएसआर खर्च 55 प्रतिशत बढ़ा है। वहीं, औद्योगिक जिलों में भी तेज़ी से वृद्धि हुई है। मदुरै, वाराणसी, मैसूर और वडोदरा जैसे शहरों में सीएसआर फंड में अच्छा खासा इजाफा हुआ है, जिससे पता चलता है कि अब सीएसआर का फैलाव बढ़ रहा है।
औद्योगिक जिलों का हिस्सा अब काफी बढ़ गया है। FY22 से FY24 के बीच इन इलाकों में सीएसआर फंड 120 प्रतिशत बढ़ा, जबकि कुल सीएसआर खर्च में 30 प्रतिशत की ही वृद्धि हुई। इन जिलों का कुल सीएसआर में हिस्सा 4.4 प्रतिशत से बढ़कर 7.4 प्रतिशत हो गया है। ओडिशा के झारसुगुड़ा जिले को लगभग रू.549 करोड़ मिले, जबकि रायगढ़, जामनगर और बल्लारी को रू.295 से रू.402 करोड़ के बीच फंड मिला। यह ज़्यादातर मेटल, माइनिंग और एनर्जी कंपनियों के कारण हुआ है, जो अपने काम के आसपास सीएसआरकरती हैं।
सीएसआर प्रोजेक्ट्स अब ज़्यादा स्थानीय स्तर पर भी केंद्रित हो रहे हैं। FY22 से FY24 के बीच करीब 85 प्रतिशत प्रोजेक्ट्स सिर्फ एक जिले पर केंद्रित थे और कुल खर्च का दो-तिहाई हिस्सा इन्हीं पर हुआ। इसका मतलब है कि कंपनियां अब एक जगह पर लगातार काम करने पर ज़ोर दे रही हैं।
सूत्रों के अनुसार, फिर भी, लगभग 75 प्रतिशत सीएसआर खर्च 200 से कम जिलों में ही हो रहा है, और इनमें से कई जगहों पर गरीबी कम है। जबकि ज़्यादा गरीब जिलों को अभी भी कम फंड मिल रहा है। सीएसआर फैल तो रहा है, लेकिन ज़रूरत के हिसाब से अभी सही तरीके से नहीं पहुंच रहा।
भारत के जिलों तक गहराई से पहुंच
आकांक्षी जिलों में सीएसआर निवेश धीरे-धीरे बढ़ रहा है। FY15 में जहां इनका हिस्सा 1.3 प्रतिशत था, वहीं FY24 में यह बढ़कर 4.5 प्रतिशत हो गया है। इस बदलाव में सरकारी कंपनियों की बड़ी भूमिका रही है, जिन्होंने अपने सीएसआर का लगभग 11 प्रतिशत इन जिलों में खर्च किया है, जो निजी कंपनियों से काफी ज़्यादा है।
₹10 करोड़ से ज़्यादा सीएसआर बजट वाली बड़ी कंपनियां भी अब इन इलाकों में निवेश बढ़ा रही हैं। FY24 में उनके कुल सीएसआर का करीब 5 प्रतिशत हिस्सा आकांक्षी जिलों में गया। सेक्टर के हिसाब से BFSI, एनर्जी और माइनिंग कंपनियों ने इसमें सबसे ज़्यादा योगदान दिया है।
कंपनी का आकार भी सीएसआर खर्च को प्रभावित करता है। छोटी कंपनियां ज़्यादातर अपने राज्य या मुख्यालय के आसपास ही खर्च करती हैं, जबकि बड़ी कंपनियां कई राज्यों और जिलों में काम करती हैं।
सीएसआर के काम करने के तरीके में भी बदलाव आया है। पहले NGOs मुख्य भूमिका निभाते थे, लेकिन अब विश्वविद्यालय, अस्पताल, इनक्यूबेटर और कॉर्पोरेट फाउंडेशन जैसी संस्थाओं को भी ज़्यादा फंड मिल रहा है। FY24 में लगभग 20 प्रतिशत सीएसआर फंड ऐसे संस्थानों के जरिए खर्च हुआ। कुल मिलाकर, सीएसआर का स्वरूप बदल रहा है। अब यह सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे शहरों और औद्योगिक इलाकों तक पहुंच रहा है।

खेल
विनेश फोगाट एशियन गेम्स ट्रायल में हारीं:बोलीं- पूरे सिस्टम से लड़ी, वापसी करूंगी, बैन के बाद सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल की मंजूरी दी थी
पानीपत, एजेंसी। ओलिंपियन रेसलर विनेश फोगाट शनिवार को एशियन गेम्स ट्रायल का सेमीफाइनल मैच हार गईं। 53 किलो कैटेगरी में लगातार दो बाउट जीतने के बाद उन्हें जींद की मीनाक्षी गोयत ने हराया। विनेश अब एशियन गेम्स में हिस्सा नहीं ले पाएंगी।
हार के बाद विनेश ने कहा- मैं पूरे सिस्टम के खिलाफ लड़ रही थी। एक तरफ मैं थी और दूसरी तरफ सभी लोग थे। मैं फिर वापसी करूंगी।

रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (WFI) ने एंटी-डोपिंग नियमों का हवाला देते हुए फोगाट को 26 जून 2026 तक घरेलू प्रतियोगिताओं में भाग लेने पर बैन लगा दिया था।
विनेश ने इसके खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी, डिवीजन बेंच ने विनेश के पक्ष में फैसला सुनाया था। WFI ने फोगाट का ट्रायल रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाई थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- विनेश शानदार रेसलर हैं, उन्होंने देश को गर्व महसूस कराया। विनेश को एशियन गेम्स 2026 के चयन ट्रायल में भाग लेने की अनुमति दी जाती है।
विनेश के मैच की PHOTOS…

मिनाक्षी से मैच हारने के बाद मैट छोड़ने से पहले विनेश बोलीं- मैं इस मैट पर वापस आऊंगी। हालांकि, बाद में वो दुखीं भी दिखीं।

विनेश फोगाट को पटखनी देतीं नीशू। हालांकि, विनेश ने वापसी करते हुए मुकाबला 7-6 से जीत लिया।

ज्योति सिहाग से हुए पहले मुकाबले की शुरुआत से ही विनेश आक्रामक नजर आईं।

53 किलो वेट कैटेगरी में विनेश फोगाट को विनर घोषित करते रेफरी।
विनेश बोलीं- मै फेल नहीं हुई
विनेश हार के बाद भावुक नजर आईं। उन्होंने कहा- हार को अपनी असफलता नहीं मानती। मैं फेल नहीं हुई हूं। मैं फिर वापसी करूंगी। मेरा संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है और भविष्य में फिर से खुद को साबित करने के लिए मैट पर लौटूंगी।
विनेश फोगाट को पहले केवल 50 किलोग्राम वर्ग में खेलने को कहा गया, जिस पर उन्होंने विरोध जताया। विवाद के बाद WFI अध्यक्ष संजय सिंह के हस्तक्षेप से उन्हें 53 किलोग्राम वर्ग के ट्रायल में भी उतरने की अनुमति मिली। ट्रायल से पहले विनेश फोगाट ने कहा कि वजन-माप के लिए उन्हें करीब एक घंटे इंतजार कराया गया। उन्होंने कहा कि यहां किसी पर अब भरोसा नहीं है।
विनेश का मैच 2 बार रुका
मीनाक्षी से पहले विनेश का मुकाबला नीशू से हुआ। शुरूआत में नीशू ने विनेश को पटखनी देकर पांच पॉइंट हासिल किए। इसके बाद विनेश ने चार पॉइंट बटोरे। इस दौरान रेफरी से विनेश और उनके पति सोमबीर राठी की कहासुनी हो गई। आपत्ति के बाद मैच थोड़ी देर के लिए रोका गया। WFI के अध्यक्ष संजय सिंह भी मैट पर पहुंच गए। रेफरी ने विनेश को 7-6 से विजेता घोषित किया। नीशू ने विनेश से हाथ तक नहीं मिलाया।

वार्मअप करतीं विनेश फोगाट।
विनेश के ट्रायल का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा
विनेश फोगाट को एशियन गेम्स 2026 के ट्रायल में शामिल करने को लेकर विवाद हुआ था। कुश्ती से दूरी बनाए रखने के कारण WFI ने अपनी चयन नीति का हवाला देते हुए विनेश को ट्रायल में खेलने की अनुमति नहीं दी, जिसके बाद विनेश ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
हाईकोर्ट ने कहा कि मां बनने के कारण किसी खिलाड़ी को अवसर देने से इनकार नहीं किया जा सकता और उन्हें ट्रायल में भाग लेने की अनुमति दे दी। WFI इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। 29 मई को सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। इसके बाद, विनेश को एशियन गेम्स के चयन ट्रायल में हिस्सा लेने की अनुमति मिल गई।
पूर्व WFI अध्यक्ष बृजभूषण पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे
विनेश ने अगस्त 2024 में पेरिस ओलिंपिक में डिस्क्वालिफाई होने के बाद कुश्ती से संन्यास की घोषणा की थी। हालांकि, उन्होंने 16 महीने बाद दिसंबर 2025 में संन्यास वापसी की घोषणा की।
18 जनवरी 2023 को रेसलर विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना देकर बृजभूषण पर महिला रेसलर्स के साथ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे।
आरोपों पर कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण ने कहा था- किसी भी तरह का उत्पीड़न नहीं हुआ है। अगर हुआ है तो मैं फांसी पर लटक जाऊंगा। उन्होंने कहा था कि अब ये खिलाड़ी नेशनल लेवल पर भी खेलने योग्य नहीं रहे।
देश
डीके शिवकुमार कर्नाटक के 24वें CM होंगे:सिद्धारमैया ने नाम बढ़ाया, उनका बेटा भी मंत्री बनेगा, राज्य को 4 डिप्टी सीएम भी मिलेंगे
बेंगलुरु, एजेंसी। कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार अब राज्य के 24वें मुख्यमंत्री बनेंगे। बेंगलुरु में शनिवार को कांग्रेस विधायक दल की बैठक में उन्हें विधायक दल का नेता चुना गया। 28 मई को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने वाले सिद्धारमैया ने उनके नाम प्रस्ताव रखा। इसे सर्वसम्मति से पारित किया गया।
कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बताया कि 3 जून की शाम डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। बैठक में बाद शिवुकमार ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मुलाकात की।
सूत्रों के मुताबिक CM के साथ-साथ कैबिनेट भी बदलेगी। मौजूदा कैबिनेट से 10 मंत्री हटाए जा सकते हैं। नई कैबिनेट में सिद्धारमैया और मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे भी शामिल होंगे। 4 डिप्टी CM भी बनाए जा सकते हैं।
शिवकुमार ‘सीएम रोटेशनल फॉर्मूला’ के तहत मुख्यमंत्री बनाए गए हैं। सिद्धारमैया 20 मई 2023 से 28 मई 2026 तक मुख्यमंत्री रहे हैं। आज की बैठक में कर्नाटक कांग्रेस इंचार्ज रणदीप सुरजेवाला, पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल भी मौजूद थे। दोनों को पर्यवेक्षक बनाया गया है।

बैठक में शिवकुमार के प्रस्ताव का समर्थन परमेश्वर ने किया
- सभी विधायकों ने मिलकर प्रस्ताव पास किया, इसमें यह तय किया गया कि नए नेता का फैसला कांग्रेस की केंद्रीय लीडरशिप करेगी।
- इसके बाद सिद्धारमैया ने खुद डीके शिवकुमार का नाम नए CLP नेता के तौर पर पेश किया। गृह मंत्री डॉ. जी परमेश्वर ने प्रस्ताव का समर्थन किया, सभी विधायकों ने एकमत से इसका समर्थन किया।
- शिवकुमार ने एक प्रस्ताव रखकर सिद्धारमैया का शुक्रिया अदा किया।
- बैठक के दौरान सिद्धारमैया, वेणुगोपाल और सुरजेवाला अलग कमरे में चले गए और आपस में बात की। इसके बाद बैठक फिर शुरू हुई और शिवकुमार को नेता चुना गया।

कांग्रेस विधायक दल की बैठक के बाद बाहर आते सुरजेवाला, सिद्धारमैया, वेणगोपाल और डीके शिवकुमार।
कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री बनने जा रहे डीके शिवकुमार देश के सबसे अमीर नेताओं में हैं। उनके पास ₹1413 करोड़ से अधिक की संपत्ति है। वह रियल एस्टेट, खनन, होटल कारोबारी भी हैं। दिलचस्प ये है कि इतनी संपत्ति के बावजूद उनके चुनावी हलफनामे में एक टोयोटा क्वालिस कार दर्ज है। 263 करोड़ का कर्ज भी है।
1962 में बेंगलुरु के पास कनकपुरा में जन्मे डीके वोक्कालिगा समुदाय से हैं। वह कनकपुरा से ही विधायक हैं। कांग्रेस में उनकी पहचान ऐसे नेता की है जो पार्टी विधायकों को टूटने से बचाते हैं। किसी भी बड़े ऑपरेशन, चुनाव मैनेजमेंट, प्रचार या गुप्त रणनीतियों के लिए जिस वित्तीय और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट की जरूरत होती है, उसे वे बखूबी मैनेज कर लेते हैं।
डीके पर 19 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। ईडी उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के दो केस में जांच कर रही है। 2017 में आयकर विभाग के छापे में इनके घर 8.5 करोड़ रु. मिले थे। इसी केस में वह 2019 में गिरफ्तार हुए। उन्हें 50 दिन तिहाड़ में बिताने पड़े थे। सीबीआई आय से अधिक संपत्ति के एक मामले में जांच कर रही है।
ज्योतिषी का दावा- शिवकुमार लंबे समय तक सीएम रहेंगे
डिप्टी सीएम शिवकुमार के ज्योतिषी द्वारकानाथ गुरुजी ने भविष्यवाणी की है कि शिवकुमार लंबे समय तक सीएम रहेंगे।
न्यूज एजेंसी पीटीआई से बातचीत में उन्होंने कहा- मैंने शिवकुमार को शपथ के लिए 31 मई, 5 जून और 6 जून की तारीखें दी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि शिवकुमार 2028 के विधानसभा चुनावों के बाद सत्ता में वापसी करेंगे।
ज्योतिषी ने कहा, वह कोई एक दिन के मुख्यमंत्री या एक बार के CM नहीं हैं। वह एक लंबे समय तक इस पद पर बने रहेंगे। उनकी कुंडली बहुत अच्छी है। वह कर्नाटक के लिए लंबे समय तक काम करेंगे।

नई दिल्ली में शुक्रवार को मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर सिद्धारमैया ने अपने बेटे यतींद्र और डीके शिवकुमार के साथ लंच किया।
देश
मानसून अब 7 दिन बाद केरलम पहुंचेगा:तूफानी हवाओं ने श्रीलंका में रोका, 10% कम बारिश का अनुमान, जून-जुलाई में भी हीटवेव चलेगी
नई दिल्ली, एजेंसी। देश में मानसून की एंट्री लेट हो गई है। मौसम विभाग ने शुक्रवार को बताया कि श्रीलंका के ऊपर कम दबाव वाली तूफानी हवाओं के चलते मानसून केरलम तट से 30-35 किमी दूर 5 दिन से अटका है और अगले 2-3 दिन इसके आगे बढ़ने के आसार नहीं हैं।
केरलम के तट पर मानसून पहुंचने की सामान्य तारीख 1 जून मानी जाती है। इससे पहले मौसम विभाग ने 26 मई तक ही मानसून आने का अनुमान जताया था। ताजा अनुमान के मुताबिक अब यह 7 दिन बाद केरल तट पर पहुंचेगा। यानी, पिछले अनुमान से मानसून करीब 10 दिन बाद देश में एंट्री करेगा।
IMD के मुताबिक जून-जुलाई में भी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, बिहार, ओडिशा, छत्तीसगढ़, गुजरात और आंध्र प्रदेश में हीटवेव चलने की संभावना है। आमतौर पर उस वक्त तापमान 30-35 डिग्री तक रहता है। इस बार 3 डिग्री ज्यादा टेंपरेचर रहेगा।
इस साल बारिश भी 10% तक कम होगी
मौसम विभाग ने बताया कि इस साल देश में औसतन 78 सेंटीमीटर बारिश का अनुमान है। जो सामान्य से करीब 10% कम है। 13 अप्रैल को 80 सेंटीमीटर बारिश का अनुमान लगाया गया था। 1971-2020 के आंकड़ों के आधार पर देश में औसत बारिश 87 सेंटीमीटर मानी जाती है।

जून में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार में कम बारिश
मौसम विभाग ने बताया कि जून में मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड में सामान्य से भी कम बारिश होगी। वहीं महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात के कुछ हिस्सों में सामान्य बारिश का अनुमान है।
देश के कोर जोन में कम बारिश से खेती पर सीधा असर
मौसम विभाग ने बताया कि इस साल मानसून के कोर जोन में कम बारिश होगी। इस इलाके में खेती सबसे ज्यादा मानसूनी बारिश पर निर्भर करती है। यानी बारिश का सीधा असर फसलों और खाद्य उत्पादन पर पड़ता है।
मानसून कोर जोन में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र का विदर्भ, झारखंड, ओडिशा, तेलंगाना, कुछ हिस्से उत्तर प्रदेश और बिहार के इलाके आते हैं। यहां खेती पर असर पड़ने से किसानों को सीधा नुकसान होगा।
कमजोर मानसून, कम बारिश का आम आदमी पर असर…
देश में कुल बारिश का करीब 75% हिस्सा मानसून के दौरान होता है, जो सिंचाई, पीने के पानी और बिजली उत्पादन के लिए बेहद जरूरी है।
करीब 64% आबादी कृषि पर निर्भर है। सिर्फ 55% खेती योग्य जमीन ही सिंचाई से कवर है।
कम बारिश का असर खरीफ सीजन की बुवाई, फसल उत्पादन और कुल कृषि गतिविधियों पर पड़ेगा, जिससे किसानों की लागत और जोखिम दोनों बढ़ सकते हैं।
बारिश कम होने से उत्पादन घट सकता है, जिसका असर सप्लाई पर पड़ेगा और इससे सब्जियों, दालों सहित खाने-पीने की चीजों की कीमतें बढ़ सकती हैं।
खेती कमजोर रहने पर गांवों में आय कम हो सकती है, जिससे ग्रामीण बाजार में खर्च और मांग दोनों प्रभावित होंगे।
ग्रामीण मांग में कमी आने पर ट्रैक्टर और टू-व्हीलर जैसे वाहनों की बिक्री पर भी असर पड़ने की संभावना है।
अगर बारिश कम रहती है तो डैम और जलाशयों का जलस्तर सामान्य से नीचे रह सकता है, जिससे आगे चलकर पानी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
कम बारिश और ज्यादा गर्मी की स्थिति में बिजली की खपत बढ़ेगी, खासकर उन क्षेत्रों में जहां तापमान ज्यादा रहता है।
पिछले साल 8 दिन पहले आया था मानसून
पिछले साल मानसून तय समय से 8 दिन पहले यानी 24 मई को ही केरलम पहुंच गया था। मानसून केरलम से आगे बढ़ते हुए महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में आमतौर पर मध्य जून तक पहुंचता है। 11 जून तक मुंबई और 8 जुलाई तक पूरे देश में फैल जाता है।
इसकी वापसी उत्तर-पश्चिम भारत से 17 सितंबर को शुरू होती है और यह पूरी तरह 15 अक्टूबर तक लौट जाता है। अल नीनो इफेक्ट की वजह से मानसून में देरी हो सकती है। हालांकि सीजन के आखिर में थोड़ी राहत मिल सकती है।
IMD के आंकड़ों के मुताबिक, बीते 150 साल में मानसून के केरलम पहुंचने की तारीखें अलग-अलग रही हैं। 1918 में मानसून सबसे पहले 11 मई को केरलम पहुंच गया था, जबकि 1972 में सबसे देरी से 18 जून को केरलम पहुंचा था।
मौसम विभाग ने कहा कि कमजोर मानसून के पीछे की वजह अल-नीनो है। जून में अल नीनो का असर दिख सकता है। जुलाई और अगस्त में भी कमजोर से मध्यम स्तर का अल नीनो बने रहने की संभावना है।
अल नीनो के कारण समुद्र का पानी असमान्य रूप से गर्म हो जाता है, जिसके साथ हवा के पैटर्न में भी बदलाव आता है। इसके असर से दुनियाभर में बारिश का चक्र बिगड़ जाता है। कहीं भयंकर सूखा तो कहीं मूसलाधार बारिश और बाढ़ आती है।
सीधे शब्दों में कहें तो जब अल-नीनो एक्टिव होगा, तब प्रशांत महासागर से भारत की तरफ आने वाली मानसूनी हवाओं को रोक देगा। इससे बारिश पर असर पड़ेगा।
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