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कोरबा

जल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए एसईसीएल को मिला राष्ट्रीय सम्मान

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नई दिल्ली में वाटर डाइजेस्ट अवार्ड 2026 के अंतर्गत माननीय जलशक्ति राज्यमंत्री, भारत सरकार ने किया पुरस्कृत

बिलासपुर/कोरबा। जल संरक्षण एवं औद्योगिक जल प्रबंधन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए साऊथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) को वाटर डाइजेस्ट अवार्ड 2026 के अंतर्गत “इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल वाटर मैनेजमेंट एंड स्ट्यूअर्डशिप अवार्ड” से सम्मानित किया गया है।

दिनांक 23 मार्च 2026 को नई दिल्ली में आयोजित समारोह में यह सम्मान जल शक्ति राज्य मंत्री, भारत सरकार राज भूषण चौधरी के करकमलों से प्रदान किया गया। एसईसीएल की ओर से यह पुरस्कार कंपनी के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक हरीश दुहन एवं निदेशक (तकनीकी/योजना एवं परियोजना) रमेश चंद्र महापात्र द्वारा ग्रहण किया गया।

यह सम्मान एसईसीएल द्वारा संचालित खान जल के सदुपयोग के अंतर्गत किए जा रहे नवाचारपूर्ण प्रयासों के लिए प्रदान किया गया है। इस योजना के माध्यम से खदानों से निकलने वाले जल को आसपास के क्षेत्रों में जल संकट को कम करने के साथ-साथ स्थानीय किसानों को सिंचाई हेतु जल उपलब्ध कराया जा रहा है।

इस अवसर पर एसईसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक हरीश दुहन ने कहा,“जल संरक्षण हमारे लिए प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक है। एसईसीएल सतत एवं जिम्मेदार खनन के प्रति प्रतिबद्ध है, और खान जल का सदुपयोग इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके माध्यम से हम न केवल संसाधनों के बेहतर उपयोग को सुनिश्चित कर रहे हैं, बल्कि आसपास के समुदायों, विशेषकर किसानों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए भी कार्य कर रहे हैं।”

एसईसीएल की इस पहल से जहां एक ओर आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हो रही है, वहीं किसानों को सिंचाई के लिए विश्वसनीय जल स्रोत मिलने से अब वे वर्ष में दो फसलें लेने में सक्षम हो रहे हैं। इससे उनकी आय में वृद्धि के साथ-साथ क्षेत्र में सतत जल प्रबंधन को भी मजबूती मिली है, जो समावेशी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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कोरबा

आंदोलन की चेतावनी से जागा विभाग, 85 करोड़ रुपए से बनने वाली सड़क की मरम्मत शुरू, चक्काजाम खत्म

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कोरबा। कसनिया कटघोरा-पसान स्टेट हाईवे खराब होने से लोग परेशान हैं। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने विधायक तुलेश्वर मरकाम के नेतृत्व में आंदोलन की चेतावनी दी थी। इसके बाद ही पीडब्ल्यूडी के अफसर जागे और मरम्मत का काम शुरू कराया। इसकी वजह से गुरुवार को आयोजित चक्का जाम आंदोलन को स्थगित कर दिया गया। विधायक मरकाम जटगा में बैठक लेकर वापस लौट गए।

स्टेट हाईवे की लंबाई 50.60 किलोमीटर है। इस सड़क को टू-लेन बनाने के लिए 85 करोड़ रुपए की मंजूरी मिल चुकी है। इसका टेंडर भी हो चुका है। सड़क का काम सुभाष अग्रवाल खरसिया को मिला है। बारिश की वजह से काम शुरू नहीं हो सका। मरम्मत नहीं होने से करीब 20 किलोमीटर सड़क चलने लायक नहीं है। अमलीकुंडा और लैंगा में रोज वाहन फंस रहे हैं। इसके कारण जाम की स्थिति निर्मित होती है। सड़क पर पहले से गड्ढे थे।बारिश के बाद भारी वाहनों के चलने से कई स्थानों पर सड़क दलदल बन चुकी है। इसके बाद भी ध्यान नहीं दिया जा रहा था। जिला पंचायत सदस्य और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के जिलाध्यक्ष विद्वान सिंह मरकाम ने सड़क और क्षेत्र की समस्याओं को लेकर 10 सितंबर को चक्का जाम की चेतावनी दी थी। जिसका विधायक मरकाम नेतृत्व करने वाले थे। इसके बाद ही विभाग के अधिकारी सक्रिय हुए। उन्होंने आंदोलन के पहले ही सड़क के गड्ढों को मलबे से भरकर समतल करा दिया। इसके बाद भी कई स्थानों पर पानी भरने की समस्या सामने आ रही है। मरम्मत शुरू होने पर गोंगपा ने आंदोलन स्थगित कर दिया और कार्यकर्ताओं की बैठक बुलाई थी। आंदोलन की संभावना को देखते हुए प्रशासन भी सक्रिय रहा। पीडब्ल्यूडी कटघोरा के एसडीओ प्रदीप मरकाम सक्रिय रहे। विधायक का कहना था कि क्षेत्र की सड़कों का समय पर सुधार होना चाहिए। कसनिया कटघोरा-पसान स्टेट हाईवे दो जिलों को जोड़ती है। इस मार्ग से मरवाही पेंड्रा और पसान पिपरिया होकर कोरिया जिला भी आवाजाही करते हैं। पोड़ी उपरोड़ा ब्लॉक के आधे से अधिक पंचायत के लोग इसी सड़क पर निर्भर हैं। स्टेट हाईवे की लंबाई 50.60 किलोमीटर है। लेकिन इसमें से 29 किलोमीटर हिस्से का ही 17.67 करोड़ रुपए से नवीनीकरण कराया गया था। जटगा के आगे के हिस्से को छोड़ दिया गया था। इसकी सिर्फ मरम्मत कराई जा रही थी। अब पूरे मार्ग को अपग्रेड किया जाएगा। ^कसनिया कटघोरा-पसान मार्ग की मरम्मत का काम कराया जा रहा है। बारिश के बाद अक्टूबर से नवीनीकरण का काम शुरू हो जाएगा। ठेका कंपनी को मार्च 2027 तक का समय दिया गया है। बाकी सड़कों को भी ठीक करा रहे हैं। जीआर जांगड़े, ईई, पीडब्ल्यूडी पाली तानाखार विधायक तुलेश्वर हीरा सिंह मरकाम ने कहा कि सड़कों की मरम्मत समय पर होनी चाहिए। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क की 47 और पीडब्ल्यूडी की 8 सड़कों के निर्माण की मंजूरी मिल चुकी है। क्षेत्र की जनता की समस्याओं को लेकर चुप नहीं बैठेंगे। जरूरत पड़ने पर सड़क की लड़ाई लड़ी जाएगी।

मरवाही-कोरिया को जोड़ती है सड़क।

मार्च 2027 तक बनेगी सड़क।

5 साल पहले 29 किमी का नवीनीकरण।

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कोरबा

फर्जी कॉल व डराने वाले मैसेज की सत्यता जांच लें

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कोरबा। कोरबी चौकी पुलिस ने प्रभारी सुरेश कुमार जोगी के नेतृत्व में कोरबी हाट बाजार में साइबर जागृति अभियान चलाया। इसके तहत पुलिस की टीम ने ग्रामीणों को डिजिटल अरेस्ट व ऑनलाइन फ्रॉड से बचाव के लिए फर्जी कॉल और डराने वाले मैसेज की सत्यता जांचने की अपील की। पोस्टर के माध्यम से बाजार पहुंचे ग्रामीणों ने मोबाइल फोन समेत दूसरे डिजिटल उपकरणों के इस्तेमाल के दौरान बरती जाने वाली सावधानी की जानकारी पाई।

एंड्राइड मोबाइल फोन के इस्तेमाल से अब बैंकिंग सेवाओं की सुविधाएं मिलने से लोग आसानी से लेन-देन कर पाते हैं। ठगबाज गिरोह लालच दिखाकर या फिर अन्य तरीके से झांसे में लेकर ऑनलाइन ठगी का शिकार लोगों को बनाते हैं। इससे बचने कोरबा चौकी पुलिस ने ग्राम पंचायतों के साप्ताहिक हाट बाजार में पहुंचे ग्रामीणों को जागरूक रही है। ठगबाजों के पैंतरे को बताकर सावधानी बरतने की अपील की है। पुलिस ने बताया कि ठग कई बार खुद को पुलिस अधिकारी, बैंक कर्मचारी, सरकारी अधिकारी बताकर डराते हैं। सोशल मीडिया पर फर्जी संदेश भेजते हैं। फर्जी APK लिंक, संदिग्ध वेबसाइट, अज्ञात लिंक को डाउनलोड व क्लिक नहीं करने और फॉरवर्ड नहीं करने जागरूक किया। ओटीपी, यूपीआई पिन, पासवर्ड व बैंक की गोपनीय जानकारी अंजान नंबरों से कॉल आने पर साझा नहीं करने और किसी तरह की ठगी की शिकायत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराने, cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन रिपोर्ट कराने की सलाह दी है। अभियान में आरक्षक संजय साहू, परमानंद दिवाकर का भी योगदान रहा।

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कोरबा

किसान संस्कृति से जुड़े पोला पर्व पर बैलों की हुई पूजा, मिट्टी के बैल और खिलौनों की बिक्री घटी

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कोरबा/छुरीकला। भादो कृष्ण पक्ष अमावस्या तिथि पर गुरुवार को नगर समेत आसपास के ग्रामीण इलाकों में पोला का तिहार मनाया गया। किसान संस्कृति से जुड़े पर्व पर लोगों ने बैलों की पूजा की। छत्तीसगढ़ी व्यंजन-पकवान बैलों को खिलाए। बाजार में मिट्टी से बने बैल और खिलौना चुकिया की दुकानें भी सजीं। यहां खरीददारों की भीड़ दिखी।

खेती-किसानी कार्य में सहयोग के प्रति बैलों की पूजा कर आभार जताया गया। यह पर्व पशुओं की सुरक्षा व संरक्षण का संदेश भी देती है। मिट्टी के बर्तन और खिलौने बनाने वाले ओम लाल कुम्हार ने बताया पहले मिट्टी के बैल और खिलौनों की भारी बिक्री होती थी। बदलते दौर में लोग लकड़ी के बने बैल की पूजा करने लगे हैं। इससे मिट्टी के बैल और खिलौनों की मांग घटी है। नगर से सटे गांवों में पहले बैल दौड़, कबड्डी और कुश्ती प्रतियोगिता होती थी। मगर अब यह देखने को नहीं मिलता है।

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