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छत्तीसगढ़

दर्रीपारा खोखरा स्कूल में हुआ शाला प्रवेशोत्सव का आयोजन

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दर्रीपारा। शासकीय प्राथमिक शाला दर्रीपारा खोखरा में नवप्रवेशी बच्चों के स्वागत के लिए पारंपरिक हर्षोल्लास और उत्साह के साथ शाला प्रवेश उत्सव का आयोजन किया गया। यह आयोजन बच्चों के शिक्षा जीवन की नई शुरुआत को स्मरणीय और प्रेरणादायक बनाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया। कार्यक्रम में गांव के जनप्रतिनिधि ग्राम पंचायत सरपंच दुर्गा अजय राठौर, उपसरपंच राजेश राठौर, वार्ड पंच मनोज राठौर, श्याम धनधिवर, राम बनवास, संकुल केंद्र क्रमांक 2 जांजगीर जीपी चौरसिया, संकुल प्राचार्य सीएससी दीपक थवाईत सहित व साला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष मनहरण लाल थवाईत, पुरुषोत्तम धीवर, खेमलाल धीवर, सरोजनी बाई धीवर, रमा बाई धीवर िवशेष रूप से उपस्थित थे।

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कोरबा

खनिज विभाग कोरबा की बड़ी कार्यवाई- अवैध उत्खनन व परिवहन के 54 प्रकरण किए दर्ज

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सीतामढ़ी से 11 व राताखार से 3 वाहन जब्त, 8 लाख से अधिक की राशि की गई वसूल
कोरबा 29 सितंबर 2026। कलेक्टर कुणाल दुदावत के निर्देश तथा उप संचालक, खनि प्रशासन के मार्गदर्शन में जिले में अवैध उत्खनन परिवहन व भण्डारण पर प्रतिबंध लगाने के लिए लगातार विशेष अभियान चलाया जा रहा है।

अभियान के तहत गठित खनिज उड़़नदस्ता दलों द्वारा जिले के कई स्थानों पर छापा मारकर  सघन जांच की गई। जिस दौरान सितम्बर माह में रेत, मिट्टी व चूना पत्थर का अवैध परिवहन कर रहे 50 वाहनों पर कार्रवाई करते हुए, जब्त कर प्रकरण दर्ज किया गया है। जिसमें से 27 प्रकरणों को निराकृत कर 7,28,390 रुपये की राशि वसूल कर खनिज मद में जमा कराई गई है। शेष प्रकरणों पर भी कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। जिसमें सीतामढ़ी में रेत का अवैध उत्खनन व परिवहन कर रहे 11 वाहनों एवं राताखार में रेत का अवैध परिवहन कर रहे 3 वाहन शामिल हैं। वहीं मिट्टी व रेत के अवैध उत्खनन पर कार्रवाई करते हुए 4 प्रकरण दर्ज कर 1,34,756 रुपये की राशि वसूल कर खनिज मद में जमा कराई गई है। इस प्रकार सितम्बर माह में खनिज के अवैध उत्खनन व परिवहन के कुल 54 प्रकरण दर्ज कर कुल 8, 63,146 रुपये की राशि वसूल कर खनिज मद में जमा कराई गई है।
      खनिज विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य जिले में अवैध उत्खनन, परिवहन तथा भण्डारण पर प्रतिबंध सुनिश्चित करना, अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना, प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा शासकीय राजस्व की हानि को रोकना है। नियमों का उल्लघंन करने, अवैध उत्खनन एवं परिवहन तथा भण्डारण में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध खान और खनिज  अधिनियम, छत्तीसगढ़़ गौण खनिज नियम और अन्य वैधानिक प्रावधानों के तहत कार्यवाही की जा रही है। विभाग ने चेतावनी दी है कि अवैध खनन, परिवहन और भण्डारण के विरुद्ध सघन अभियान लगातार जारी रहेगा तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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कोरबा

घर-घर से जुटा प्लास्टिक कचरा बनेगा कोरबा की ग्रामीण सड़कों का हिस्सा

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प्लास्टिक कचरे का उचित उपयोग ग्रामीण विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण का भी अवसर: कलेक्टर कुणाल दुदावत
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के चौथे चरण में लगभग 162 किलोमीटर की 55 सड़कें स्वीकृत, निर्माण के लिए 61 टन अपशिष्ट प्लास्टिक की आवश्यकता
कचरा संग्रहण से जुड़ी स्व-सहायता समूहों की 646 महिलाओं को मिलेगा आय बढ़ाने का अवसर
कोरबा, 29 सितंबर 2026। घरों से एकत्र होने वाला प्लास्टिक कचरा अब कोरबा के दूरस्थ गांवों की सड़कों के निर्माण में काम आ सकेगा। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के चौथे चरण में जिले के लिए लगभग 162 किलोमीटर लंबी 55 सड़कें स्वीकृत हुई हैं। इनके निर्माण में डामर के साथ उपयुक्त अपशिष्ट प्लास्टिक का उपयोग प्रस्तावित है। इसके लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना विभाग ने 61 टन प्लास्टिक सामग्री की मांग की है।
कलेक्टर कुणाल दुदावत ने बताया कि स्वीकृत सड़कें कोरबा, करतला, पोड़ी-उपरोड़ा और पाली विकासखंड के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में बनेंगी। निर्माण प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है और वर्तमान में मिट्टी संबंधी कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पक्की सड़कें बनने से ग्रामीणों का आवागमन सुगम होगा तथा शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक सेवाओं तक उनकी पहुंच बेहतर होगी।
कलेक्टर श्री दुदावत ने कहा कि प्लास्टिक कचरे का उचित उपयोग ग्रामीण विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण का भी अवसर है। नगर निगम क्षेत्र में घर-घर कचरा संग्रहण से जुड़ी महिलाओं का परिश्रम इस पहल की महत्वपूर्ण कड़ी बन सकता है। उन्होंने संबंधित विभागों को सड़क निर्माण के लिए निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप प्लास्टिक की छंटाई, तैयारी और आपूर्ति में समन्वय रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रयास ऐसा हो कि सड़कों के निर्माण के साथ कचरा प्रबंधन बेहतर हो और स्व-सहायता समूह की महिलाओं को भी इसका आर्थिक लाभ मिले। उन्होंने सड़क सहित अन्य निर्माण कार्यों में उपयोगिता के आधार पर प्लास्टिक सहित फ्लाईएश के उपयोग को प्राथमिकता देने की बात कही।

’62 हजार घरों से कचरा जुटाती हैं स्व-सहायता समूह की महिलाएं’

नगर पालिक निगम कोरबा क्षेत्र में लगभग 62 हजार घरों से प्रतिदिन कचरे का संग्रहण किया जाता है। इस कार्य से स्व-सहायता समूहों की 644 महिला सदस्य जुड़ी हैं। एकत्र कचरा 16 एमआरएफ केंद्रों में पहुंचता है, जहां प्लास्टिक सहित विभिन्न प्रकार के कचरे को अलग किया जाता है। उपयोगिता के अनुसार छांटी गई सामग्री का विक्रय भी किया जाता है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रतिदिन लगभग 155 टन कचरा एकत्र होता है। इसमें करीब 40 प्रतिशत सूखा और 60 प्रतिशत गीला कचरा होता है। एकत्र कचरे में प्रतिदिन लगभग चार से पांच टन प्लास्टिक भी शामिल रहता है। सड़क निर्माण के लिए उपयुक्त प्लास्टिक की छंटाई और आपूर्ति से कचरा संग्रहण एवं पृथक्करण से जुड़ी महिलाओं के लिए आय का अवसर बढ़ सकता है।

’कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण को मिलेगी मदद’

प्लास्टिक कचरे को अन्य कचरे से अलग कर उपयोगी सामग्री के रूप में तैयार करने से खुले में बिखरने वाले कचरे को कम करने में मदद मिलेगी। गुणवत्ता और उपयोगिता के आधार पर प्लास्टिक को सड़क निर्माण के अलावा विभिन्न वस्तुओं के निर्माण में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के कार्यपालन अभियंता सी. एस. तंवर ने बताया कि स्वीकृत सड़कों के निर्माण के लिए लगभग 61 टन अपशिष्ट प्लास्टिक की आवश्यकता होगी। उपयुक्त प्लास्टिक को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार तैयार कर डामर के साथ उपयोग किया जाएगा। इससे डामर की आवश्यकता कुछ कम हो सकती है। सामग्री उपलब्ध कराने के लिए कलेक्टर को मांग भेजी गई है।
ग्रामीण संपर्क को मजबूत करने वाली यह पहल घर-घर कचरा जुटाने वाली महिलाओं के श्रम को आर्थिक अवसर से जोड़ सकती है। साथ ही, प्लास्टिक कचरे का उपयोग पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक कदम होगा।

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कोरबा

पोषण पुनर्वास केन्द्र से नन्हें आकाश ने पाई सेहत की नई राह, कुपोषण से बाहर निकलकर लौटी चेहरे की मुस्कान

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एनआरसी ने संवारी आकाश की सेहत, कुपोषण से मिली मुक्ति

कोरबा 29 सितम्बर 2026।  बच्चों में कुपोषण की स्थिति को दूर कर उन्हें स्वस्थ जीवन की ओर बढ़ाने के लिए पोषण पुनर्वास केन्द्र (एनआरसी) महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इन केन्द्रों में बच्चों को विशेषज्ञ चिकित्सकीय निगरानी, आवश्यक दवाइयां, पौष्टिक आहार और माताओं को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाता है। कोरबा के जिला चिकित्सालय स्थित एनआरसी जीएमसी में मिली ऐसी ही समुचित देखभाल से नवधापारा (मुड़ापार) निवासी श्रीमती राधिका महंत के 18 माह के बेटे आकाश ने कुपोषण की स्थिति से बाहर निकलकर स्वस्थ जीवन की ओर कदम बढ़ाया है।
श्रीमती राधिका बताती हैं कि कुछ समय पहले उनका बेटा आकाश लगातार कमजोर होता जा रहा था। उसका वजन कम हो रहा था, उसे बार-बार तेज बुखार आता था और कमजोरी के कारण वह काफी चिड़चिड़ा रहने लगा था। बेटे की तबीयत को लेकर परिवार लगातार चिंतित था। आर्थिक स्थिति सीमित होने के कारण निजी अस्पतालों में लंबे समय तक उपचार कराना परिवार के लिए कठिन था।
आकाश के बीमार होने पर मितानिन एवं स्थानीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता की सहायता से उसे जिला चिकित्सालय लाया गया। शिशु रोग विशेषज्ञ की देखरेख में करीब चार से पांच दिन उपचार मिलने के बाद चिकित्सक ने आकाश को पोषण पुनर्वास केन्द्र में भर्ती कराने की सलाह दी। चिकित्सक के मार्गदर्शन पर राधिका अपने बेटे को एनआरसी जीएमसी कोरबा लेकर पहुंचीं।
एनआरसी में आकाश को नियमित चिकित्सकीय जांच, आवश्यक दवाइयां और उसकी पोषण संबंधी जरूरतों के अनुरूप पौष्टिक आहार दिया गया। उपचार के साथ उसकी मां राधिका के रहने और भोजन की निःशुल्क व्यवस्था भी केन्द्र में की गई। निरंतर देखभाल और संतुलित पोषण से आकाश के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार आया। उसका बुखार ठीक हुआ, वजन में अपेक्षित वृद्धि हुई और वह कुपोषण की स्थिति से बाहर निकलकर स्वस्थ हो गया। अब आकाश पहले की तरह खेलने लगा है और उसके चेहरे पर फिर से मुस्कान लौट आई है।
राधिका महंत अपने अनुभव साझा करते हुए कहती हैं कि “एनआरसी में मेरे बेटे को समय पर उपचार, दवाइयां और पौष्टिक भोजन मिला। मेरे रहने और भोजन की भी निःशुल्क व्यवस्था हुई। बेटे की सेहत में सुधार देखकर मुझे बहुत खुशी हुई। एनआरसी कमजोर और बार-बार बीमार होने वाले बच्चों के लिए बहुत उपयोगी है। माता-पिता को अपने बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए तथा जरूरत होने पर समय पर एनआरसी लेकर आना चाहिए।”

एनआरसी में निःशुल्क उपचार और पौष्टिक आहार के साथ राधिका को 2,200 रुपये की सहायता राशि भी प्राप्त हुई। इससे परिवार को आर्थिक सहयोग मिला और उपचार से जुड़े खर्च की चिंता कम हुई। राधिका महंत ने कहा कि “मेरे परिवार को इस योजना से बहुत सहयोग मिला है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी,  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय  और जिला प्रशासन को मैं हृदय से धन्यवाद देती हूं, जिनके प्रयासों से हमारे जैसे परिवारों को बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए समय पर उपचार और आवश्यक सहायता मिल रही है।”

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