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कोरबा

जंगलों का मौन प्रहरी: मॉटल्ड वुड आउल पारिस्थितिकी तंत्र का अनदेखा रक्षक, उपचार के बाद मिली नई ज़िंदगी

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कोरबा। *छत्तीसगढ़– कोरबा जिला अपने जैव विविधता के लिए जाना जाता हैं यहां विभिन्न प्रकार के पक्षियों का बसेरा हैं, कई बार ऐसा भी होता हैं, कुछ पक्षी चोटिल अवस्था में मिलने पर उसके संरक्षण के लिए वन विभाग एवं एनजीओ लगातार प्रयास करता हैं।

ऐसा ही मामला कुछ दिन पूर्व रजगामार में देखने को मिला जहां रजगामार निवाशी होमेश ने घर के पास ही कौवों के द्वारा एक उल्लू को जख्मी कर दिया जो चोटिल होने के कारण उड़ पाने में सक्षम नहीं था, जिसके बाद कुछ लोगों ने उसको बचाने के उद्देश्य से वन विभाग को सूचना दिया जिस पर वन विभाग की रेस्क्यु टीम एवं नोवा नेचर से जितेंद्र सारथी मौके पर पहुंचे और उसको सुरक्षित रेस्क्यु कर लाया गया, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख (छ ग) अरुण पांडे के वन्य जीव संरक्षण की नई दिशा एवं मुख्य वन संरक्षक बिलासपुर मनोज पाण्डेय, कोरबा वनमण्डलाधिकारी श्रीमती प्रेमलता यादव के निर्देशानुसार एवं उप वनमण्डलाधिकारी दक्षिण सूर्यकांत सोनी एवं उप वनमण्डलाधिकारी उत्तर श्रीराम सिंह राठिया के मार्गदर्शन वन परिक्षेत्र अधिकारी मृत्युंजय शर्मा के नेतृत्व में घायल उल्लू का वेटनरी डॉक्टर अनिकेत ने उपचार चालू किया, घाव को सफाई किया तथा उसका कुछ दिनों तक उसका ड्रेसिंग चलता रहा और प्रति दिन मास का टुकड़ा खिलाया गया जिसके परिणाम स्वरूप उल्लू पूरी तरह स्वस्थ होने पर वन विभाग के कर्मचारी फॉरेस्ट बिट ऑफिसर कमलेश कुम्हार एवं जितेंद्र सारथी के द्वारा उसको प्राकृतिक रहवास जंगल में पुनः छोड़ दिया गया, यह घटना वन विभाग एवं सामाजिक संस्था के मेहनत को दर्शाता हैं।

घने जंगलों में रात का सन्नाटा अक्सर एक गहरी हूटिंग से टूटता है, यह आवाज़ होती है मॉटल्ड वुड आउल (Strix ocellata) की, जो भारतीय वनों का एक महत्वपूर्ण रात्रिचर शिकारी पक्षी है, अपनी उत्कृष्ट दृष्टि, तीव्र श्रवण क्षमता और लगभग निःशब्द उड़ान के कारण यह प्रकृति के सबसे कुशल शिकारी पक्षियों में गिना जाता है।

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार मॉटल्ड वुड आउल केवल एक पक्षी नहीं, बल्कि प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने वाला महत्वपूर्ण जीव है,यह बड़ी संख्या में चूहों, छिपकलियों, छोटे पक्षियों, मेंढकों तथा अन्य छोटे जीवों का शिकार करता है, जिससे कृषि फसलों को नुकसान पहुँचाने वाले कृंतकों की आबादी नियंत्रित रहती है, इसी कारण इसे किसानों का प्राकृतिक मित्र भी कहा जाता है।

भारत में यह प्रजाति शुष्क पर्णपाती वनों, पुराने वृक्षों, कृषि क्षेत्रों के आसपास तथा गाँवों के निकट बड़े पेड़ों पर भी देखी जाती है,दिन में यह पेड़ों की घनी शाखाओं में विश्राम करता है और रात होते ही भोजन की तलाश में निकल पड़ता है, विशेषज्ञ बताते हैं कि मॉटल्ड वुड आउल की एक विशेषता इसकी लगभग निःशब्द उड़ान है, जिससे यह अपने शिकार के बेहद करीब पहुँच जाता है, इसके द्वारा निकाले जाने वाले “पेललेट” (Pellets) का अध्ययन वैज्ञानिकों को इसके भोजन एवं स्थानीय जैव विविधता को समझने में भी मदद करता है,हालाँकि यह प्रजाति वैश्विक स्तर पर Least Concern (LC) श्रेणी में है, लेकिन भारत में इसे वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I (Schedule I) के अंतर्गत सर्वोच्च कानूनी संरक्षण प्राप्त है, इसका शिकार, पकड़ना या व्यापार करना कानूनन दंडनीय अपराध है,पुराने वृक्षों की कटाई, प्राकृतिक आवासों का विनाश, अंधविश्वास के कारण अवैध शिकार तथा कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग इस प्रजाति के लिए प्रमुख खतरे हैं,यदि इनके प्राकृतिक आवास सुरक्षित रखे जाएँ और लोगों में जागरूकता बढ़ाई जाए, तो इस महत्वपूर्ण पक्षी का संरक्षण अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है, वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि मॉटल्ड वुड आउल जैसे रात्रिचर पक्षियों का संरक्षण केवल एक प्रजाति की सुरक्षा नहीं, बल्कि पूरे वन पारिस्थितिकी तंत्र और कृषि जैव विविधता के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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कोरबा

अवॉर्ड सेरेमनी में लायंस क्लब कोरबा गुरुकुल को मिला अनेकों सम्मान

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बिलासपुर के होटल इंटरसिटी में आयोजित हुआ भव्य समारोह
कोरबा। द इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ लायंस क्लब्स डिस्ट्रिक्ट 3233सी अवॉर्ड सेरेमनी सत्र 2025-26 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर लायन पीएमजेएफ विजय अग्रवाल ने बिलासपुर के होटल इंटरसिटी में भव्य सम्मान समारोह आयोजित किया, जिसमें डिस्ट्रिक्ट 3233सी के सभी क्लबों ने भाग लिया, जिसमें लायंस क्लब कोरबा गुरुकुल को समाज सेवा, जनकल्याण, एवं उत्कृष्ट सामाजिक योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

यह सम्मान क्लब द्वारा शिक्षा, स्वास्थ एवं पर्यावरण संरक्षण तथा जनहितकारी गतिविधियों में किए गए उल्लेखनीय कार्यों के लिए प्रदान किया गया।
संस्थापक पीएमजेएफ लायन डॉ. राजकुमार अग्रवाल के कुशल नेतृत्व में मिला सम्मान

लायंस क्लब कोरबा गुरुकुल के संस्थापक क्लब एडवाजर पीएमजीएफ डॉ राजकुमार अग्रवाल के कुशल नेतृत्व में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर लायन विजय अग्रवाल द्वारा आउटस्टैंडिंग क्लब डिस्ट्रिक्ट अवॉर्ड लायंस क्लब कोरबा गुरुकुल को प्रदान किया गया।

बेस्ट जोन चेयरपर्सन एमजेएफ लायन पवन अग्रवाल आटो सेन्टर को, आउटस्टैंडिंग क्लब अध्यक्ष अवॉर्ड लायंस सुरेंद्र कुमार डनसेना, कैबिनेट मेम्बर सर्विस एक्सीलेंस अवॉर्ड लायंस मनोज कुमार गुप्ता एवं वुमेंस लायंस मेंबरशिप ग्रोथ के लिए लायंस श्रीमती विनीता गुप्ता को सम्मानित किया गया।
पीएमजेएफ लायन डॉ. राजकुमार अग्रवाल ने दी बधाई

लायंस क्लब कोरबा गुरूकुल के एडवाइजर पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर एवं संस्थापक पीएमजेएफ लायन डॉ. राजकुमार अग्रवाल ने क्लब को अवार्ड मिलने पर अपनी टीम को बधाई दी और कहा कि यह सम्मान टीम की संयुक्त गतिविधियों के कारण मिला। हम आने वाले सत्र में और बेहतर करने का प्रयास करेंगे और मुझे आशा है कि नए अध्यक्ष लायन दर्शन अग्रवाल और उनकी टीम लायनवाद को नई ऊंचाई तक ले जाने के लिए प्रयास करेगी।

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झेरिया यादव समाज की कमान अब सैलाना यादव के हाथों में, रायपुर में हुई घोषणा, बधाई देने वालों का उमड़ा जनसैलाब

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कोरबा। झेरिया यादव समाज के संगठनात्मक इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है। रायपुर में आयोजित समाज के गरिमामय कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष जगनिक यादव ने सैलाना-बाबूलाल यादव को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति मे झेरिया यादव समाज का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किए जाने की औपचारिक घोषणा की। घोषणा होते ही सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा और उपस्थित समाजजनों ने पुष्पमालाओं से उनका भव्य स्वागत किया।

दीपका (जिला कोरबा) निवासी सैलाना-बाबूलाल यादव की प्रदेश अध्यक्ष पद पर नियुक्ति की सूचना मिलते ही पूरे कोरबा जिले सहित प्रदेशभर के समाजजनों में उत्साह का माहौल बन गया। उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएँ देने वालों का ताँता लग गया। समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों, युवाओं एवं महिलाओं ने उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएँ देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि उनके नेतृत्व में झेरिया यादव समाज नई ऊर्जा, नई सोच और मजबूत संगठन के साथ आगे बढ़ेगा।इनके पिता श्री रोहित कुमार यादव लवसरा शक्ति मे शिक्षक तथा पति एस ई सी एल मे कर्मचारी रहें है।

समाजजनों ने कहा कि सैलाना-बाबूलाल यादव लंबे समय से सामाजिक सरोकारों से जुड़े रहे हैं तथा समाज की एकता, शिक्षा, युवा नेतृत्व और सामाजिक उत्थान के लिए निरंतर कार्य करते रहे हैं। उनकी सक्रियता, संगठन क्षमता एवं समाज के प्रति समर्पण को देखते हुए उन्हें यह महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा गया है।

समाज के वक्ताओं ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश अध्यक्ष के रूप में सैलाना-बाबूलाल यादव समाज को नई दिशा देंगे, समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलेंगे तथा संगठन को प्रदेश के प्रत्येक जिले तक और अधिक सशक्त बनाने का कार्य करेंगे।

इस ऐतिहासिक नियुक्ति पर कोरबा सहित प्रदेशभर के समाजजनों ने हर्ष व्यक्त करते हुए नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष सैलाना-बाबूलाल यादव को उज्ज्वल एवं सफल कार्यकाल के लिए शुभकामनाएँ प्रेषित की हैं।

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सीएसईबी कोरबा पूर्व के 324 जर्जर मकानों को तोड़ने की फिर कवायद

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पिछले साल ठेकेदार ने कुछ मकानों को तोड़ा और उसके बाद अधूरा छोड़ दिया था
इस बार महाराष्ट्र की कम्पनी मे. के के घरत एण्ड कम्पनी को दिया गया है वर्क आर्डर
कोरबा। छत्तीसगढ़ राज्य उत्पादन कम्पनी सीएसईबी कोरबा पूर्व स्थित कालोनी के 324 जर्जर मकानों को डिस्मेंटल करने की कवायद तेज कर दी गई है। सीएसईबी कालोनी सिविल की कार्यपालन अभियंता श्रीमती तिग्गा ने बताया कि कालोनी के 324 जर्जर मकानों को डिस्मेंटल करने के लिए मे. के के घरत एण्ड कम्पनी महाराष्ट्र को वर्क आर्डर दिया गया है और 05 माह के अंदर कार्य पूर्ण करने की शर्त रखी गई है। पुष्पलता गार्डन सड़क किनारे से लेकर कलेक्ट्रेट के सामने सड़क किनारे के सभी जर्जर मकानों को तोड़ने के लिए एक सप्ताह पूर्व नोटिस भी चस्पा किया गया है।
इन मकानों को किया जाएगा डिस्मेंटल

विभाग ने कई जगह नोटिस बोर्ड लगाया है और उन मकानों को तोड़ने के लिए कब्जाधारियों को मकान खाली करने का निर्देश दिया है। जिन मकानों को डिस्मेंटल किया जाएगा, उसमें एनएफ-209 से एनएफ 304 (96 यूनिट), एसएफ-995 से एसएफ 1042 (48 यूनिट), एसएफ 939 से एसएफ 994 (56 यूनिट), एसएफ 907 से एसएफ 938 (32 यूनिट), एसएफ 891 से एसएफ 906 (16 यूनिट), एसएफ 419 से एसएफ 426 (08 यूनिट), एसएफ 859 से एसएफ 890 (32 यूनिट), एसएफ 459 से एसएफ 466 (08 यूनिट), एसएफ 635 से एसएफ 642 (08 यूनिट), एसएफ 515 से एसएफ 522 (16 यूनिट), एसएफ 851 से एसएफ 858 (09 यूनिट), एसएफ 787 से एसएफ 850 (64 यूनिट), एसएफ 747 से एसएफ 786 (40 यूनिट) एवं एसएफ 743 से एसएफ 746 (04 यूनिट) शामिल हैं।
06 दशक पूर्व बने थे ये मकान
जिन 324 जर्जर मकानों को तोड़ा जाएगा वे करीब 06 दशक पूर्व बनाए गए थे, रख-रखाव के अभाव में ये मकान जर्जर हो चुके हैं। ये सभी मकानों को सीएसईबी कर्मियों को अलाट किया गया था, लेकिन जर्जर होने के कारण कुछ वर्ष पूर्व सीएसईबी कर्मी अन्य जगहों पर बने नए भवनों में चले गए और खाली होने पर अन्य विभाग के कर्मचारियों को अलाट किया गया और कई मकानों में बाहरी लोग कब्जा जमा लिए। रख-रखाव के अभाव में अब ये मकान जर्जर हो चुके हैं।
पिछले ठेकेदार ने छोड़ दिया था अधूरा
पिछले वर्ष भी जर्जर मकानों को तोड़ने का काम एक कम्पनी को दिया गया था, लेकिन उसने बीच में ही कार्य अधूरा छोड़कर काम बंद कर दिया। अब फिर से जर्जर मकानों को तोड़ने का काम प्रारंभ किया जा रहा है।
कलेक्टर से मिले अधिकारी
कार्यपालन अभियंता (सिविल) श्रीमती तिग्गा ने बताया कि जर्जर मकानों को खाली कराने प्रशासन एवं पुलिस का सहयोग जरूरी है और पुलिस तथा प्रशासन के बगैर मकान खाली कराना टेढ़ी खीर है। अत: वे अपनी टीम के साथ कलेक्टर से मिलकर वस्तुस्थिति की जानकारी दी।

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