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कोरबा

जिले में 800 युवा आपदा मित्रों को दिया जाएगा विशेष प्रशिक्षण

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कोरबा। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ’युवा आपदा मित्र योजना’ के अंतर्गत जिला प्रशासन कोरबा द्वारा इस वर्ष बड़े पैमाने पर युवाओं को प्रशिक्षित करने की कार्ययोजना तैयार की गई है। जिले की औद्योगिक संवेदनशीलता और स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं, जैसे सर्पदंश, डूबने की घटनाओं और सड़क दुर्घटनाओं को देखते हुए केंद्र शासन ने इस वर्ष प्रशिक्षित होने वाले आपदा मित्रों की संख्या बढ़ाकर 800 कर दी है। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ राज्य से इस योजना के क्रियान्वयन हेतु केवल चार जिलों कोरबा, रायपुर, सुकमा और राजनांदगांव का चयन किया गया है।
कलेक्टर एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के निर्देशानुसार, वर्ष 2026 के लिए विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों से कुल 800 स्वयंसेवकों को तैयार किया जाएगा। इसमें एन.सी.सी. से 350, एन.एस.एस. से 150, एन.वाई.के.एस. से 150 तथा भारत स्काउट्स एवं गाइड्स से 150 युवाओं का चयन कर उन्हें आपदा प्रबंधन के गुर सिखाए जाएंगे। प्रशिक्षण हेतु इच्छुक उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता सातवीं उत्तीर्ण और आयु 18 से 40 वर्ष के बीच निर्धारित की गई है। आवेदक का कोरबा जिले का निवासी होना और आपदा के समय प्रशासन के साथ मिलकर निःस्वार्थ भाव से कार्य करने हेतु तत्पर होना अनिवार्य है।
पूर्व में जिले के विभिन्न ग्रामों से प्रशिक्षित 300 आपदा मित्रों की भांति, इस वर्ष भी सफल प्रशिक्षण के उपरांत युवाओं को शासन द्वारा प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा। इसके साथ ही उन्हें 16 आवश्यक सामग्रियों वाली विशेष ’डिजास्टर किट’ दी जाएगी, जिसमें लाइफ जैकेट, टॉर्च, पॉकेट नाइफ, फर्स्ट एड बॉक्स, सेफ्टी हेलमेट, गमबुट और आपदा मित्र अंकित टी-शर्ट जैसी वस्तुएं शामिल होंगी। इस किट का उद्देश्य न केवल आपदा के समय जनता की सहायता करना है, बल्कि आम नागरिकों में प्रशिक्षित आपदा मित्रों के प्रति जागरूकता और पहचान सुनिश्चित करना भी है।
योजना की तैयारियों और इसकी प्रासंगिकता को लेकर  विगत दिवस  जिला कार्यालय के सभाकक्ष में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान, नई दिल्ली के अनुसंधान सहायक सत्यम राज की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में प्रशिक्षित युवाओं के कार्यों की समीक्षा की गई। बैठक में यह जानकारी साझा की गई कि ये आपदा मित्र स्थानीय स्तर पर त्वरित सहयोग प्रदान करते हैं और बड़ी घटनाओं की स्थिति में उच्च अधिकारियों से मार्गदर्शन प्राप्त कर खोज एवं बचाव कार्यों को प्रभावी ढंग से अंजाम देते हैं। जिले में प्रशिक्षण की संभावित तिथि 27 फरवरी 2026 निर्धारित की गई है, जिसके लिए प्रशासनिक तैयारियां पूर्ण की जा रही हैं।

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कोरबा

4 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए “बाल मैत्री कार्यक्रम” : आंगनबाड़ी से प्राथमिक शाला तक सहज प्रवेश की पहल

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कोरबा। महिला एवं बाल विकास विभाग, कोरबा द्वारा 4 से 6 वर्ष आयु वर्ग के आंगनबाड़ी बच्चों के लिए “बाल मैत्री कार्यक्रम” की शुरुआत की गई है। इस पहल का उद्देश्य आंगनबाड़ी के अनौपचारिक वातावरण से प्राथमिक शाला के औपचारिक माहौल में बच्चों का सहज, सरल और आनंददायक सुनिश्चित करना है, ताकि उनमें विद्यालय के प्रति रुचि एवं आत्मविश्वास विकसित हो सके।

कार्यक्रम का शुभारंभ 20 मार्च से किया गया है, जिसके अंतर्गत आंगनबाड़ी केन्द्रों के उन बच्चों को शामिल किया गया है, जो प्राथमिक शाला में प्रवेश के लिए तैयार हैं। इस पहल के तहत प्रत्येक माह एक निर्धारित दिवस पर “मासिक शाला भ्रमण” आयोजित किया जाएगा, जिसमें बच्चों को नजदीकी प्राथमिक विद्यालय ले जाकर वहां के वातावरण से परिचित कराया जाएगा। भ्रमण के दौरान बच्चों को विद्यालय परिसर, कक्षाओं, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों से परिचित कराया जाएगा। साथ ही कक्षा-01 के बच्चों के साथ सामूहिक खेल एवं सीखने की गतिविधियों के माध्यम से उन्हें विद्यालयीन माहौल के अनुरूप तैयार किया जाएगा।

कार्यक्रम के अंतर्गत परिसर परिचय, शिक्षक से भेंट, संयुक्त गतिविधियां, समूह खेल, बालगीत, कहानी एवं रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा, जिससे बच्चों का सीखना आनंददायक और सहभागितापूर्ण बन सके। ज्ञात हो कि आंगनबाड़ी के खेल आधारित वातावरण से सीधे विद्यालय के अनुशासित माहौल में आने पर बच्चों को अक्सर कठिनाई का सामना करना पड़ता है, जिससे पढ़ाई के प्रति अरुचि उत्पन्न होने की संभावना रहती है। बाल मैत्री कार्यक्रम इस अंतर को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

इस कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों की नियमित उपस्थिति, सीखने की क्षमता एवं सहभागिता में वृद्धि होने की उम्मीद है। यह पहल प्रारंभिक शिक्षा को अधिक प्रभावी, समावेशी एवं आनंददायक बनाने की दिशा में एक सराहनीय कदम है।

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कोरबा

माँ मड़वारानी मंदिर के समीप शीतल पेयजल का शुभारंभ किया लायंस क्लब कोरबा गुरूकुल एवं एनकेएम एलपीएस ने

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कोरबा/मड़वारानी। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 19 मार्च को नवरात्रि के प्रथम दिन हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी माँ मड़वारानी दर्शन करने पहुंचने वाले श्रद्धालुओं एवं राहगीरों को भीषण गर्मी में गला तर करने के लिए लायंस क्लब कोरबा गुरूकुल एवं नितेश कुमार मेमोरियल लायंस पब्लिक स्कूल खरहरकुड़ा (मड़वारानी) के संयुक्त तत्ववाधान में माँ मड़वारानी मंदिर के समीप प्याऊ का शुभारंभ किया गया।

शुभारंभ अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए शरबत एवं स्वल्पाहार का भी प्रबंध किया गया था। लायंस क्लब कोरबा गुरूकुल के संरक्षक एवं लायंस पब्लिक स्कूल खरहरकुड़ा के चेयरमेन पीएमजेएफ लायन डॉ. राजकुमार अग्रवाल के नेतृत्व में एवं लायंस क्लब कोरबा गुरूकुल के अध्यक्ष एवं पदाधिकारियों, एनकेएम लायंस पब्लिक स्कूल खरहरकुड़ा की प्राचार्य एवं अध्यापकगणों के साथ क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति में प्याऊ का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में क्षेत्र के लोग एवं श्रद्धालु उपस्थित थे।
सेवा परमोधर्म: के अनुरूप हर वर्ष विद्यालय एवं लायंस क्लब परिवार द्वारा शीतल पेयजल का प्रबंध किया जाता है, ताकि श्रद्धालुओं एवं राहगीरों को भीषण गर्मी में राहत मिल सके और लोगों की प्यास बुझ सके। लायन अग्रवाल ने कहा कि भीषण गर्मी में लोगों को पानी पिलाना पुण्य का काम है। हमारे छोटे से प्रयास से लोगों को राहत मिले, यही हमारा उद्देश्य।

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कोरबा

नवरात्रि का तीसरा दिन:माँ चंद्रघण्टा स्वरूपा माँ सर्वमंगला देवी का दर्शन करने उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

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कोरबा। चैत्र शुक्ल तृतीया को माँ चंद्रघण्टा देवी की पूजा अर्चना की जाती है। माँ सर्वमंगला देवी मंदिर दुरपा में नवरात्रि के तीसरे दिन श्रद्धा का सैलाब देखने को मिला। प्रात: 5.00 बजे माँ सर्वमंगला देवी का श्रृंगार करने के बाद श्रद्धालुओं ने माँ सर्वमंगला देवी मंदिर पहुंचकर माँ चंद्रघण्टा स्वरूप की पूजा-अर्चना कर ऐश्वर्य प्राप्ति के लिए आशीर्वाद मांगा।
मंदिर से लेकर सड़क तक श्रद्धालुओं की लम्बी लाईन सुबह और शाम देखने को मिली। रात्रि को देर तक लोगों ने पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
07 बजे महाआरती से गूंजायमान हुआ परिसर

रोज सुबह एवं संध्या 7.00 बजे रोजाना महाआरती में सैकड़ों लोग शामिल होकर माँ सर्वमंगला की आरती गा रहे हैं। करीब 15 से 20 मिनट तक माँ की आरती में घंटा एवं शंख के शंखनाद से परिसर गूंजायमान होता है। महाआरती से जहां मन के सारे विकार दूर होते हैं, वहीं आत्मा पुष्ट होती है। महाआरती के दीए से जहां चारों ओर सत्व का प्रकाश फैलता है, वहीं देवी-देवता माँ सर्वमंगला देवी के सानिध्य में रहते हैं। आदिशक्ति माँ सभी देवी-देवताओं का प्रकाशपुंज होती हैं।
महाआरती से आत्मा पुष्ट होती है-नमन पाण्डेय

माँ सर्वमंगला देवी मंदिर दुरपा कोरबा के प्रबंधक/पुजारी/राजपुरोहित नमन पाण्डेय (नन्हा महराज) ने बताया कि माँ सर्वमंगला देवी मंदिर में रोजाना प्रात: एवं संध्या 7.00 बजे महाआरती होती है और माँ की आरती में शामिल होने पर मन प्रसन्न होता है और आत्मा पुष्ट होती है। घर का कलह दूर होता है और परिवार समृद्ध और खुशहाल बनता है।
कल 22 मार्च को माँ कुष्माण्डा की पूजा

नवरात्रि के चतुर्थ दिन माँ कुष्माण्डा की पूजा की जाती है। 22 मार्च को माँ सर्वमंगला देवी का कुष्माण्डा स्वरूप की पूजा-अर्चना श्रद्धालु करेंगे और मनोवांछित फल प्राप्ति के लिए आशीर्वाद मांगेंगे। माँ कुष्माण्डा देवी की पूजा-अर्चना करने से शत्रु का शमन होता है। माँ कुष्माण्डा देवी को मालपुआ एवं फल अति प्रिय है।

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जिले में 800 युवा आपदा मित्रों को दिया जाएगा विशेष प्रशिक्षण

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कोरबा। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ’युवा आपदा मित्र योजना’ के अंतर्गत जिला प्रशासन कोरबा द्वारा इस वर्ष बड़े पैमाने पर युवाओं को प्रशिक्षित करने की कार्ययोजना तैयार की गई है। जिले की औद्योगिक संवेदनशीलता और स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं, जैसे सर्पदंश, डूबने की घटनाओं और सड़क दुर्घटनाओं को देखते हुए केंद्र शासन ने इस वर्ष प्रशिक्षित होने वाले आपदा मित्रों की संख्या बढ़ाकर 800 कर दी है। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ राज्य से इस योजना के क्रियान्वयन हेतु केवल चार जिलों कोरबा, रायपुर, सुकमा और राजनांदगांव का चयन किया गया है।
कलेक्टर एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के निर्देशानुसार, वर्ष 2026 के लिए विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों से कुल 800 स्वयंसेवकों को तैयार किया जाएगा। इसमें एन.सी.सी. से 350, एन.एस.एस. से 150, एन.वाई.के.एस. से 150 तथा भारत स्काउट्स एवं गाइड्स से 150 युवाओं का चयन कर उन्हें आपदा प्रबंधन के गुर सिखाए जाएंगे। प्रशिक्षण हेतु इच्छुक उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता सातवीं उत्तीर्ण और आयु 18 से 40 वर्ष के बीच निर्धारित की गई है। आवेदक का कोरबा जिले का निवासी होना और आपदा के समय प्रशासन के साथ मिलकर निःस्वार्थ भाव से कार्य करने हेतु तत्पर होना अनिवार्य है।
पूर्व में जिले के विभिन्न ग्रामों से प्रशिक्षित 300 आपदा मित्रों की भांति, इस वर्ष भी सफल प्रशिक्षण के उपरांत युवाओं को शासन द्वारा प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा। इसके साथ ही उन्हें 16 आवश्यक सामग्रियों वाली विशेष ’डिजास्टर किट’ दी जाएगी, जिसमें लाइफ जैकेट, टॉर्च, पॉकेट नाइफ, फर्स्ट एड बॉक्स, सेफ्टी हेलमेट, गमबुट और आपदा मित्र अंकित टी-शर्ट जैसी वस्तुएं शामिल होंगी। इस किट का उद्देश्य न केवल आपदा के समय जनता की सहायता करना है, बल्कि आम नागरिकों में प्रशिक्षित आपदा मित्रों के प्रति जागरूकता और पहचान सुनिश्चित करना भी है।
योजना की तैयारियों और इसकी प्रासंगिकता को लेकर  विगत दिवस  जिला कार्यालय के सभाकक्ष में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान, नई दिल्ली के अनुसंधान सहायक सत्यम राज की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में प्रशिक्षित युवाओं के कार्यों की समीक्षा की गई। बैठक में यह जानकारी साझा की गई कि ये आपदा मित्र स्थानीय स्तर पर त्वरित सहयोग प्रदान करते हैं और बड़ी घटनाओं की स्थिति में उच्च अधिकारियों से मार्गदर्शन प्राप्त कर खोज एवं बचाव कार्यों को प्रभावी ढंग से अंजाम देते हैं। जिले में प्रशिक्षण की संभावित तिथि 27 फरवरी 2026 निर्धारित की गई है, जिसके लिए प्रशासनिक तैयारियां पूर्ण की जा रही हैं।

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4 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए “बाल मैत्री कार्यक्रम” : आंगनबाड़ी से प्राथमिक शाला तक सहज प्रवेश की पहल

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कोरबा। महिला एवं बाल विकास विभाग, कोरबा द्वारा 4 से 6 वर्ष आयु वर्ग के आंगनबाड़ी बच्चों के लिए “बाल मैत्री कार्यक्रम” की शुरुआत की गई है। इस पहल का उद्देश्य आंगनबाड़ी के अनौपचारिक वातावरण से प्राथमिक शाला के औपचारिक माहौल में बच्चों का सहज, सरल और आनंददायक सुनिश्चित करना है, ताकि उनमें विद्यालय के प्रति रुचि एवं आत्मविश्वास विकसित हो सके।

कार्यक्रम का शुभारंभ 20 मार्च से किया गया है, जिसके अंतर्गत आंगनबाड़ी केन्द्रों के उन बच्चों को शामिल किया गया है, जो प्राथमिक शाला में प्रवेश के लिए तैयार हैं। इस पहल के तहत प्रत्येक माह एक निर्धारित दिवस पर “मासिक शाला भ्रमण” आयोजित किया जाएगा, जिसमें बच्चों को नजदीकी प्राथमिक विद्यालय ले जाकर वहां के वातावरण से परिचित कराया जाएगा। भ्रमण के दौरान बच्चों को विद्यालय परिसर, कक्षाओं, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों से परिचित कराया जाएगा। साथ ही कक्षा-01 के बच्चों के साथ सामूहिक खेल एवं सीखने की गतिविधियों के माध्यम से उन्हें विद्यालयीन माहौल के अनुरूप तैयार किया जाएगा।

कार्यक्रम के अंतर्गत परिसर परिचय, शिक्षक से भेंट, संयुक्त गतिविधियां, समूह खेल, बालगीत, कहानी एवं रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा, जिससे बच्चों का सीखना आनंददायक और सहभागितापूर्ण बन सके। ज्ञात हो कि आंगनबाड़ी के खेल आधारित वातावरण से सीधे विद्यालय के अनुशासित माहौल में आने पर बच्चों को अक्सर कठिनाई का सामना करना पड़ता है, जिससे पढ़ाई के प्रति अरुचि उत्पन्न होने की संभावना रहती है। बाल मैत्री कार्यक्रम इस अंतर को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

इस कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों की नियमित उपस्थिति, सीखने की क्षमता एवं सहभागिता में वृद्धि होने की उम्मीद है। यह पहल प्रारंभिक शिक्षा को अधिक प्रभावी, समावेशी एवं आनंददायक बनाने की दिशा में एक सराहनीय कदम है।

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माँ मड़वारानी मंदिर के समीप शीतल पेयजल का शुभारंभ किया लायंस क्लब कोरबा गुरूकुल एवं एनकेएम एलपीएस ने

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कोरबा/मड़वारानी। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 19 मार्च को नवरात्रि के प्रथम दिन हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी माँ मड़वारानी दर्शन करने पहुंचने वाले श्रद्धालुओं एवं राहगीरों को भीषण गर्मी में गला तर करने के लिए लायंस क्लब कोरबा गुरूकुल एवं नितेश कुमार मेमोरियल लायंस पब्लिक स्कूल खरहरकुड़ा (मड़वारानी) के संयुक्त तत्ववाधान में माँ मड़वारानी मंदिर के समीप प्याऊ का शुभारंभ किया गया।

शुभारंभ अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए शरबत एवं स्वल्पाहार का भी प्रबंध किया गया था। लायंस क्लब कोरबा गुरूकुल के संरक्षक एवं लायंस पब्लिक स्कूल खरहरकुड़ा के चेयरमेन पीएमजेएफ लायन डॉ. राजकुमार अग्रवाल के नेतृत्व में एवं लायंस क्लब कोरबा गुरूकुल के अध्यक्ष एवं पदाधिकारियों, एनकेएम लायंस पब्लिक स्कूल खरहरकुड़ा की प्राचार्य एवं अध्यापकगणों के साथ क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति में प्याऊ का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में क्षेत्र के लोग एवं श्रद्धालु उपस्थित थे।
सेवा परमोधर्म: के अनुरूप हर वर्ष विद्यालय एवं लायंस क्लब परिवार द्वारा शीतल पेयजल का प्रबंध किया जाता है, ताकि श्रद्धालुओं एवं राहगीरों को भीषण गर्मी में राहत मिल सके और लोगों की प्यास बुझ सके। लायन अग्रवाल ने कहा कि भीषण गर्मी में लोगों को पानी पिलाना पुण्य का काम है। हमारे छोटे से प्रयास से लोगों को राहत मिले, यही हमारा उद्देश्य।

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नवरात्रि का तीसरा दिन:माँ चंद्रघण्टा स्वरूपा माँ सर्वमंगला देवी का दर्शन करने उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

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कोरबा। चैत्र शुक्ल तृतीया को माँ चंद्रघण्टा देवी की पूजा अर्चना की जाती है। माँ सर्वमंगला देवी मंदिर दुरपा में नवरात्रि के तीसरे दिन श्रद्धा का सैलाब देखने को मिला। प्रात: 5.00 बजे माँ सर्वमंगला देवी का श्रृंगार करने के बाद श्रद्धालुओं ने माँ सर्वमंगला देवी मंदिर पहुंचकर माँ चंद्रघण्टा स्वरूप की पूजा-अर्चना कर ऐश्वर्य प्राप्ति के लिए आशीर्वाद मांगा।
मंदिर से लेकर सड़क तक श्रद्धालुओं की लम्बी लाईन सुबह और शाम देखने को मिली। रात्रि को देर तक लोगों ने पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
07 बजे महाआरती से गूंजायमान हुआ परिसर

रोज सुबह एवं संध्या 7.00 बजे रोजाना महाआरती में सैकड़ों लोग शामिल होकर माँ सर्वमंगला की आरती गा रहे हैं। करीब 15 से 20 मिनट तक माँ की आरती में घंटा एवं शंख के शंखनाद से परिसर गूंजायमान होता है। महाआरती से जहां मन के सारे विकार दूर होते हैं, वहीं आत्मा पुष्ट होती है। महाआरती के दीए से जहां चारों ओर सत्व का प्रकाश फैलता है, वहीं देवी-देवता माँ सर्वमंगला देवी के सानिध्य में रहते हैं। आदिशक्ति माँ सभी देवी-देवताओं का प्रकाशपुंज होती हैं।
महाआरती से आत्मा पुष्ट होती है-नमन पाण्डेय

माँ सर्वमंगला देवी मंदिर दुरपा कोरबा के प्रबंधक/पुजारी/राजपुरोहित नमन पाण्डेय (नन्हा महराज) ने बताया कि माँ सर्वमंगला देवी मंदिर में रोजाना प्रात: एवं संध्या 7.00 बजे महाआरती होती है और माँ की आरती में शामिल होने पर मन प्रसन्न होता है और आत्मा पुष्ट होती है। घर का कलह दूर होता है और परिवार समृद्ध और खुशहाल बनता है।
कल 22 मार्च को माँ कुष्माण्डा की पूजा

नवरात्रि के चतुर्थ दिन माँ कुष्माण्डा की पूजा की जाती है। 22 मार्च को माँ सर्वमंगला देवी का कुष्माण्डा स्वरूप की पूजा-अर्चना श्रद्धालु करेंगे और मनोवांछित फल प्राप्ति के लिए आशीर्वाद मांगेंगे। माँ कुष्माण्डा देवी की पूजा-अर्चना करने से शत्रु का शमन होता है। माँ कुष्माण्डा देवी को मालपुआ एवं फल अति प्रिय है।

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