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सुप्रीम कोर्ट बोला-सरकार कोविड वैक्सीन से नुकसान का मुआवजा दे:एरर-फ्री पॉलिसी बनाए, साइड इफेक्ट्स की जांच के लिए एक्सपर्ट पैनल की जरूरत नहीं

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नई दिल्ली,एजेंसी। सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को कोविड वैक्सीनेशन से जुड़ी याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए कहा कि सरकार वैक्सीनेशन के साइड इफेक्ट्स का मुआवजा दे। इसके लिए वह नो-फॉल्ट कंपनसेशन पॉलिसी बनाए।

नो-फॉल्ट कम्पनसेशन पॉलिसी का मतलब है कि अगर किसी व्यक्ति को दवा या वैक्सीन से नुकसान हो जाए, तो उसे मुआवजा मिल सकता है, भले ही इसमें किसी की गलती साबित न हुई हो।

जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने यह भी कहा कि वैक्सीनेशन के साइड इफेक्ट्स की मॉनिटरिंग के लिए मौजूदा सिस्टम जारी रहेगा। इसके लिए अलग से एक्सपर्ट पैनल बनाने की जरूरत नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने रचना गंगू और वेणुगोपालन गोविंदन की 2021 में दायर याचिका पर यह फैसला सुनाया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उनकी बेटियों की मौत कोविड वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स के कारण हुई थी।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश की 3 बड़ी बातें…

मुआवजा नीति का यह मतलब नहीं होगा कि सरकार या किसी दूसरी अथॉरिटी ने अपनी गलती मान ली है।

वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स से जुड़े आंकड़े समय-समय पर पब्लिक डोमेन में रखा जाएगा।

इस फैसले का मतलब यह नहीं होगा कि व्यक्ति दूसरे कानूनी उपायों का सहारा नहीं ले सकता।

नंवबर 2025 में फैसला सुरक्षित रखा था

पिछले साल 13 नवंबर को इन याचिकाओं पर लंबी बहस हुई थी। इसके बाद जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा था कि कोर्ट के साथ-साथ दूसरे मुद्दों पर भी फैसला करेगा। जस्टिस नाथ ने आदेश सुरक्षित रखते हुए कहा था-“हम तय करेंगे कि समिति का गठन किया जाना है या नहीं, क्या निर्देश जारी किए जाने हैं। हम हर चीज की बारीकी से जांच करेंगे।”

इससे पहले सरकार ने केरल हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के खिलाफ याचिका लगाई थी, जिसमें सईदा के.ए.की याचिका पर मुआवजे की नीति तैयार करने का आदेश दिया गया था।

2022 में सरकार ने जवाबी हलफनामे में तर्क दिया था कि वह मुआवजे के लिए उत्तरदायी नहीं है क्योंकि वैक्सीन अपनी मर्जी से लगवाई जाती है। यह लोगों का जोखिम जानने के बावजूद लिया गया फैसला होता है।

मई 2024 में वैक्सीन से मौत के दो दावे सामने आए

परिवार का दावा- कोवीशील्ड लगवाने के 7 दिन बाद बेटी की मौत

करुण्या की जुलाई 2021 में मौत हो गई थी।

करुण्या की जुलाई 2021 में मौत हो गई थी।

वेणुगोपाल गोविंदन का कहना था कि उनकी बेटी करुण्या की जुलाई 2021 में कोवीशील्ड वैक्सीन लेने के महीने भर बाद मौत हो गई थी। सीरम इंस्टीट्यूट ने ब्रिटेन की फार्मा कंपनी एस्ट्राजेनेका के बनाए फॉर्मूले पर कोवीशील्ड बनाई है और एस्ट्राजेनेका ने ब्रिटिश हाईकोर्ट में स्वीकार किया कि उनकी कोविड-19 वैक्सीन से खतरनाक साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। करुण्या की मौत मामले में परिवार की शिकायत पर सरकार ने राष्ट्रीय समिति का गठन किया था। बाद में समिति ने निष्कर्ष निकाला था कि करुण्या की मौत का कारण वैक्सीन है इसके पर्याप्त सबूत नहीं मिले थे।

दूसरा परिवार बोला- बेटी को कोविड डोज के बाद TTS हुआ, फिर मौत

8 साल की श्री ओमत्री की मई 2021 में मौत हो गई थी। परिवार के मुताबिक, रितिका ने मई में कोवीशील्ड की पहली डोज लगवाई थी। इसके 7 दिनों के अंदर रितिका को तेज बुखार और वॉमिट की शिकायत हुई। MRI में सामने आया कि रितिका को ब्रेन में ब्लड क्लोटिंग हुई और उसे ब्रेन हेमरेज हो गया था। दो हफ्ते बाद ही बेटी की मौत हो गई थी।

परिवार ने आगे बताया था कि हमें बेटी की मौत का सही कारण जानने के लिए दिसंबर 2021 में RTI के जरिए पता चला कि बेटी को थ्रोम्बोसिस विथ थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम हुआ था। जो भी वैक्सीन के सामना करना पड़ा था और ‘वैक्सीन उत्पाद संबंधी प्रतिक्रिया’ के कारण उनकी मृत्यु हो गई थी।

PM ने कोवैक्सिन के 2 डोज लगवाए थे

पीएम ने 8 अप्रैल 2021 को कोवैक्सिन का दूसरा डोज लिया था।

पीएम ने 8 अप्रैल 2021 को कोवैक्सिन का दूसरा डोज लिया था।

पीएम नरेंद्र मोदी ने 1 मार्च 2021 को कोवैक्सिन का पहला डोज लिया था।

पीएम नरेंद्र मोदी ने 1 मार्च 2021 को कोवैक्सिन का पहला डोज लिया था।

जुलाई 2025: कोविड के बाद अचानक मौतों पर स्टडी: ICMR का दावा- वैक्सीन से इसका संबंध नहीं

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) और नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) ने अपनी स्टडी में बताया कि देश में हार्ट अटैक से होने वाली अचानक मौतों का कोविड वैक्सीन से कोई सीधा संबंध नहीं है।

यह स्टडी 18 से 45 साल के लोगों की अचानक मौत पर आधारित है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्टडी में कहा गया है कि भारत की कोविड वैक्सीन सेफ और इफेक्टिव है। इससे होने वाले गंभीर साइडइफेक्ट के मामले रेयर हैं।

स्टडी में बताया गया है कि अचानक हुई मौतों की अन्य वजहें हो सकती हैं। इनमें जेनेटिक्स, लाइफस्टाइल, पहले से मौजूद बीमारी और कोविड के बाद के कॉम्प्लिकेशन शामिल हैं।

भारत में दो कोविड वैक्सीन विकसित हुई थीं। भारत बायोटेक ने ICMR के सहयोग से कोवैक्सिन का निर्माण किया था। वहीं, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने ब्रिटिश कंपनी एस्ट्राजेनेका के फॉर्मूले से कोवीशील्ड बनाई थी।

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चुनाव आयुक्तों ने शिकायत की, लेकिन अफसर पर एक्शन नहीं:RTI दस्तावेज में खुलासा, आरोप- डिप्टी कमिश्नर ने आयोग को बिना बताए अधिकारियों का कामकाज बदला

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नई दिल्ली, एजेंसी। चुनाव आयोग के अफसर मनीष गर्ग के कामकाज के विवाद पर अब नई जानकारी सामने आई है। RTI से खुलासा हुआ है कि दो चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन को अलग-अलग लेटर लिखकर उनके कामकाज की शिकायत की थी। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।

RTI जवाब में बताया गया, कैबिनेट सचिवालय ने ये शिकायतें चुनाव आयोग की ओर से आधिकारिक नहीं मानीं। सचिवालय का मानना था कि इस स्तर पर कार्रवाई करना उचित नहीं होगा। इसे संवैधानिक संस्था के काम में दखल माना जा सकता है।

यह जानकारी RTI एक्टिविस्ट लोकेश के. बत्रा को दी गई। गर्ग पर आरोप है कि उन्होंने चुनाव आयोग या संबंधित अधिकारियों से चर्चा किए बिना वरिष्ठ अधिकारियों के कामकाज को बदलने वाला आदेश जारी किया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों आयुक्तों ने उनके आदेश को पलट दिया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 30 जुलाई को दोनों चुनाव आयुक्तों ने मनीष गर्ग के काम के बंटवारे से जुड़ा आदेश रद्द कर दिया। साथ ही, निर्देश दिया कि आयोग में किसी बदलाव पर सहमति बनने तक पुरानी व्यवस्था जारी रहेगी।

गर्ग 2024 में चुनाव आयुक्त में नियुक्त हुए

मनीष गर्ग 1996 बैच के हिमाचल प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। अगस्त 2024 में केंद्र सरकार की कैबिनेट नियुक्ति समिति (एसीसी) ने उन्हें चुनाव आयोग में उप चुनाव आयुक्त बनाने की मंजूरी दी थी। उन्होंने 2 सितंबर 2024 को पद संभाला। इससे पहले वे हिमाचल प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी थे।

पहले भी विवादों में आया मनीष गर्ग का नाम

मनीष गर्ग का नाम मतदाता सूची के आईटी सिस्टम के संचालन और अधिकारियों को उसकी पहुंच मिलने से जुड़े विवाद में भी सामने आया था। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने ERONet सॉफ्टवेयर पर निर्वाचन अधिकारियों की पहुंच को लेकर सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि कई निर्वाचन अधिकारियों को सिस्टम का पूरा एक्सेस नहीं मिल रहा था, जिससे मतदाता सूची से जुड़े उनके वैधानिक काम प्रभावित हो सकते थे।

दो चुनाव आयुक्तों ने 14 बार आपत्ति जताई थी

25 सितंबर: इंडियन एक्सप्रेस ने रिपोर्ट किया था कि दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीनों में कम-से-कम 14 बार आयोग के फैसलों और प्रक्रियाओं पर आपत्ति जताई थी। इसमें मतदाता सूची के डेटा पर नियंत्रण और अधिकारियों को जानकारी नहीं दिए जाने के मुद्दे भी शामिल थे।

26 सितंबर: चुनाव आयोग ने अपने बयान में कहा कि मनीष गर्ग के काम के बंटवारे संबंधी आदेश लागू नहीं किए गए थे और IT विभाग की निगरानी वास्तव में नहीं हटाई गई थी।

3 अक्टूबर: कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मनीष गर्ग की भूमिका और आयोग के IT सिस्टम से जुड़े कामकाज पर सवाल उठाए थे।

21 अक्टूबर: RTI से मिली जानकारी के मुताबिक दोनों आयुक्तों के पत्र कैबिनेट सचिवालय पहुंचे थे और आगे संबंधित अधिकारियों को भेजे गए। पत्रों में क्या था, यह सामने नहीं आया था।

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अमिताभ बच्चन का बंगला उड़ाने की धमकी:दिलजीत दोसांझ को जान से मारने का मेल; 5 दिन पहले टाइगर श्रॉफ पर हुई थी फायरिंग

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मुंबई, एजेंसी। अमिताभ बच्चन और पंजाबी सिंगर दिलजीत दोसांझ को शुक्रवार को जान से मारने की धमकी दी गई है। मुंबई की मेयर रितु तावड़े को यह धमकी भरा ई-मेल भेजा गया।

इसमें अमिताभ बच्चन के बंगले ‘जलसा’ को बम से उड़ाने की बात लिखी गई। कहा गया कि 31 अक्टूबर से 27 नवंबर के बीच कभी भी बंगले को निशाना बनाया जा सकता है। हमला 1984 के ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ का बदला होगा।

इसी मेल में गायक दिलजीत दोसांझ को भी आत्मघाती हमले में मारने की धमकी दी गई है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। यह मेल तब आया है, जब 5 दिन पहले रविवार को एक्टर टाइगर श्रॉफ पर मुंबई में फायरिंग की गई। इस हमले की जिम्मेदारी लॉरेंस गैंग ने ली थी।

ई-मेल में खालिस्तान समर्थक नारे लिखे

मुंबई मेयर को भेजे गए मेल में खालिस्तान समर्थक नारे लिखे गए हैं। इसमें 1984 के सिख-विरोधी दंगों का भी जिक्र है। मेल में कहा गया कि दिलजीत ने अमिताभ बच्चन के पैर छूए थे इसलिए उस पर हमला किया जाएगा। मेल में लिखा है कि 27 नवंबर को दिलजीत को महालक्ष्मी रेस कोर्स में आत्मघाती हमले में मारना है। धमकी भरा ईमेल मिलने के बाद मुंबई पुलिस, पुलिस की डॉग स्क्वॉड और बम स्क्वॉड की टीमें बीएमसी मुख्यालय पहुंचीं। मेयर और डिप्टी मेयर कार्यालय सहित विभिन्न चैंबर्स की भी तलाशी ली। मुंबई पुलिस और साइबर सेल ईमेल की जांच में जुटे हैं।

बीएमसी में मेयर के ऑफिस की जांच करती हुईं जांच टीमें ।

बीएमसी में मेयर के ऑफिस की जांच करती हुईं जांच टीमें ।

रविवार को टाइगर श्रॉफ पर हुई थी फायरिंग

शूटर्स ने टाइगर श्रॉफ की कार को निशाना बनाकर 5 राउंड फायरिंग की थी।

शूटर्स ने टाइगर श्रॉफ की कार को निशाना बनाकर 5 राउंड फायरिंग की थी।

मुंबई में 18 अक्टूबर को टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग की घटना हुई। टाइगर फुटबॉल खेलने के बाद जुहू इलाके से निकल रहे थे, तभी उनकी कार पर गोलियां चलाई गईं। इस घटना में टाइगर को गोली नहीं लगी, लेकिन उनके ड्राइवर और एक अन्य व्यक्ति घायल हो गए थे।

इस मामले में अब तक 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें हरियाणा के 7 आरोपी, उत्तर प्रदेश की दो महिलाएं और बिहार का एक युवक शामिल है।

मुंबई के कई स्कूलों को भी मिले धमकी भरे मेल

इसके साथ ही मुंबई के दादर स्थित कई प्रमुख स्कूलों को भी धमकी भरे ईमेल मिले हैं। जानकारी के मुताबिक शुक्रवार सुबह दादर के करीब 4 स्कूलों को ये ईमेल मिले। सूचना मिलते ही मुंबई पुलिस ने तुरंत स्कूलों की तलाशी ली।

तलाशी अभियान के दौरान पुलिस को कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला। हालांकि, इन धमकी भरे ईमेल के कारण कुछ समय के लिए स्कूल परिसर में तनाव का माहौल रहा। पुलिस फिलहाल ईमेल भेजने वालों की तलाश कर रही है और मामले की जांच जारी है।

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बिहार की पटाखा फैक्ट्री में ब्लास्ट,पति-पत्नी समेत 7 की मौत:मकान के बाहर बिखरे शव, डेढ़ घंटे तक होते रहे धमाके

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सीवान, एजेंसी। बिहार के सीवान में पटाखा बनाने के दौरान हुए ब्लास्ट में पति-पत्नी और उनकी बेटी समेत 7 की मौत हो गई।

जामो थाना क्षेत्र के अलमापुर गांव के एक मकान में पटाखे बनाए जा रहे थे। इसी दौरान अचानक धमाके होने लगे। इस धमाके में पूरा मकान उड़ गया। लोगों के शव सड़क पर बिखर गए।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, करीब डेढ़ घंटे तक रुक-रुककर धमाके होते रहे।

धमाके के बाद क्षतिग्रस्त मकान।

धमाके के बाद क्षतिग्रस्त मकान।

दमकल की गाड़ियां की मदद से आग बुझाने की कोशिश

घटना की सूचना मिलने के बाद सदर एसडीओ आशुतोष गुप्ता, महाराजगंज एसडीपीओ अमन और बड़हरिया, जामो, गोरेयाकोठी समेत कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंची है। अधिकारी घटनास्थल की जायजा ले रहे हैं।

एसडीपीओ ने बताया कि दमकल की गाड़ियां की मदद से आग बुझाने की कोशिश की जा रही है। आग पर काबू पाने के बाद मामले की जांच की जाएगी।

एसपी भारत सोनी ने बताया कि अब तक शवों की पहचान नहीं हो सकी है। जिस मकान में पटाखे बनाए जा रहे थे, वह घनी आबादी वाले इलाके में है।

हादसे की तस्वीरें

धमाके के बाद मकान के बाहर बिखरे शव।

धमाके के बाद मकान के बाहर बिखरे शव।

धमाके के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

धमाके के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

घटना की सूचना मिलने के बाद DM और SP मौके पर पहुंचे।

घटना की सूचना मिलने के बाद DM और SP मौके पर पहुंचे।

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