छत्तीसगढ़
बढ़ेगा बस्तों का बोझ:70 की जगह 80 GSM कागज पर छपेंगी किताबें बस्ते का वजन 14% और खर्चा 16 करोड़ रुपए बढ़ेगा
रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों की किताबें 70 की जगह अब 80 जीएसएम (ग्राम प्रति वर्ग मीटर) में छपेंगी। पाठ्य पुस्तक निगम इसके टेंडर की प्राइज बिड भी खोलने जा रहा है। ऐसा होने से बच्चों के बस्तों का वजन 14% तक बढ़ जाएगा।
पिछले साल करीब 2.5 करोड़ किताबों के लिए 9 हजार मीट्रिक टन कागज खरीदा गया था। इस बार निगम 11 हजार मीट्रिक टन कागज खरीदने जा रहा है। इससे सरकार पर करीब 16 करोड़ रुपए का अतिरिक्ति बोझ आने वाला है। पिछले साल 80 करोड़ रुपए का कागज खरीदा गया था।
निगम ने बिना किसी सर्वे-समीक्षा के ही यह टेंडर निकाल दिया। यही नहीं विभाग से इसकी प्रशासकीय स्वीकृति तक नहीं ली। निगम ने यह तर्क देते हुए टेंडर निकाला कि एनसीईआरटी की किताबें 80 जीएसएम पर प्रकाशित होती है।
इस बारे में शिक्षकों का कहना है कि एनसीआरटी की किताबें बाजार में बिकती हैं। उनका उपयोग कई साल तक होता है। सरकारी किताबें मुफ्त में बंटती है। एक साल में किताब के कागज फटते भी नहीं हैं।
मंत्री के आदेश को किया दरकिनार
निगम किताबों के प्रकाशन के लिए तीन तरीके के टेंडर निकालता है। पहला-कागज खरीदी, दूसरा- प्रिंटिंग, तीसरा- ट्रांसर्पोटेशन। गजेंद्र यादव के शिक्षा मंत्री बनते ही उन्होंने अक्टूबर में घोषणा की थी कि अब तीनों का सिंगल टेंडर होगा। उसके बावजूद निगम ने 11 नवंबर 2025 को कागज खरीदी का टेंडर निकाल दिया। इस पर शिक्षा मंत्री ने 20 नवंबर को लिखित आदेश देते हुए तीनों टेंडर को खत्म कर एकल निकालने का आदेश दिया। उनका तर्क था कि इससे तीन बार लगने वाले ट्रांसपोर्टेशन की राशि बचेगी।
सरकार को बड़ा फायदा होगा। फिर भी 3 दिसंबर को टेंडर खोल दिया गया। इसका प्राइज बिड जनवरी के पहले सप्ताह में ही खुलने वाली है। इस पर शिक्षा मंत्री ने 20 नवंबर को लिखित आदेश देते हुए तीनों टेंडर को खत्म कर एकल निकालने का आदेश दिया। उनका तर्क था कि इससे तीन बार लगने वाले ट्रांसपोर्टेशन की राशि बचेगी। सरकार को बड़ा फायदा होगा। फिर भी 3 दिसंबर को टेंडर खोल दिया गया। इसका प्राइज बिड जनवरी के पहले सप्ताह में ही खुलने वाला है।
टेंडर प्रक्रिया भी कठघरे में: निगम ने पेपर क्रय की निविदा जेम के माध्यम से निकाली है। इसमें प्रतिबंधात्मक शर्त दी गई है कि तीन साल में 42 हजार टन कागज बेचा हो। जबकि एनसीआरटी के टेंडर में ऐसी कोई शर्त नहीं होती है। टेंडर में सात कंपनियां आई हैं। जिसमें कुछ कंपनियों के कागज भी कम है। जैसे 2021-22 टर्नओवर का सर्टिफिकेट पेपर मिलों ने नहीं डाला है। अब क्लेरीफिकेशन मांगकर निविदा में लेने की तैयारी है।
एमओयू में लिखा है- ‘जैसा कि 80 जीएसएम’ : पाठ्य पुस्तक निगम के तत्कालीन एमडी संजीव झा का कहना है कि एनसीआरटी के साथ एससीआरटी का एमओयू हुआ था। उसमें यह शर्त थी कि एनसीआरटी की तरह 80 जीएसएम पर किताबें प्रकाशित हों।
जानिए अभी जितनी किताबें चलन में हैं, अगर वे 80 जीएसएम में हुईं तो बच्चों के बस्ते का वजन इतना बढ़ जाएगा
केंद्रीय शिक्षा विभाग की 2020 में बनी नीति में हर क्लास के लिए बस्ते का वजन तय है। नई शिक्षा नीति छत्तीसगढ़ में लागू होने के बाद तीसरी से 5वीं तक 6 किताबें और 6वीं से 8वीं तक 9 किताबें हो जाएंगी। अभी तक केवल तीसरी और 6वीं में किताबें बढ़ीं हैं। इस बार चौथी और 7वीं में किताबें बढ़ने वाली हैं।
जानिए 80 जीएसएम होने के बाद किस कक्षा की किताबों का कितना हो जाएगा वजन-



ऐसे समझें कागज खरीदी को
अब- 11 हजार मीट्रिक टन खरीदने के लिए टेंडर निकाला गया है। इसमें 8000 टन 80 जीएसएम और 3000 टन 70 जीएसएम खरीदने जा रहे हैं। 200 टन 70 जीएसएम का कागज पुराना बचा हुआ है। ऐसे में 1800 टन अधिक पेपर खरीदना पड़ेगा।
पहले- निगम ने पिछले साल 9 हजार मीट्रिक टन कागज खरीदा था। इसमें 8500 टन 70 जीएसएम और 11वीं-12वीं के लिए 500 टन 80 जीएसएम खरीदा। 10वीं तक किताबें मुफ्त में बंटती हैं, 11वीं-12वीं की किताबें बाजार में बिकती हैं।
किताबें सालभर चलती हैं
बच्चों के बस्ते का बोझ निरंतर कम होना चाहिए। मोटा कागज लगाने पर किताबों का वजन बढ़ जाएगा। अभी जो किताबों का कागज बेहतर है। वह सालभर चल जाता है। – संजय शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ
दोबारा उपयोग नहीं होता
अभी स्कूलों में जो किताबें चल रही वह बहुत बेहतर कागज की हैं। मुफ्त में मिलने की वजह से इसका दोबारा उपयोग नहीं होता है। एनसीईआरटी की किताबें बिकती हैं, इसलिए वह कई साल तक चलती हैं। -वीरेंद्र दुबे, प्रदेश अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ शालेय शिक्षक संघ
छत्तीसगढ़
प्रतापपुर : कृषि मंत्री श्री राम विचार नेताम ने धोन्धा प्रतापपुर में किया कृषि महाविद्यालय का भूमि पूजन

प्रतापपुर। छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने आज धोन्धा प्रतापपुर में बहुप्रतीक्षित कृषि महाविद्यालय का विधिवत भूमि पूजन संपन्न किया। उनके द्वारा आज 889.53 लाख राशि से निर्मित होने वाले कृषि महाविद्यालय भवन प्रतापपुर (धोन्धा) व 602.10 लाख से निर्मित होने वाले बालक एवं कन्या छात्रावास भवन प्रतापपुर (धोन्धा) का भूमि पूजन किया गया।
इस अवसर पर प्रतापपुर विधायक श्रीमती शकुंतला सिंह पोर्ते, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती चंद्रमणी देवपाल सिंह पैंकरा, जिला पंचायत सदस्य लवकेश पैंकरा, क्षेत्र के किसान, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
भूमि पूजन के पश्चात उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री श्री नेताम ने कहा कि यह दिन धोंधा प्रतापपुर और संपूर्ण क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक दिन है। उन्होंने कहा कि इस पावन भूमि पर कृषि महाविद्यालय की स्थापना से किसान बंधुओं की आने वाली पीढ़ियों के लिए उच्च कृषि शिक्षा के नए द्वार खुलेंगे।
मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि राज्य सरकार किसानों को सशक्त बनाने के लिए सदैव प्रतिबद्ध है। इस महाविद्यालय के माध्यम से क्षेत्र के युवाओं को आधुनिक कृषि तकनीक, उन्नत खेती के तरीके और कृषि विज्ञान की उच्चस्तरीय शिक्षा अब उनके अपने गृह जिले में ही उपलब्ध होगी। उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि महाविद्यालय का निर्माण कार्य शीघ्र एवं निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण कराया जाएगा।
इस अवसर पर प्रतापपुर विधायक श्रीमती शकुंतला सिंह पोर्ते ने अपने उद्बोधन में कहा कि कृषि महाविद्यालय की स्थापना उनके क्षेत्र के लिए एक स्वप्न के साकार होने जैसा है। उन्होंने कहा कि इस महाविद्यालय के लिए प्रयास आज सफल हुआ है जिसमें कृषि मंत्री राम विचार नेताम का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने ग्रामवासियों एवं किसान बंधुओं से कहा कि अब उनके बच्चों को उच्च कृषि शिक्षा के लिए दूर-दराज के बड़े शहरों में नहीं भटकना पड़ेगा। विधायक श्रीमती पोर्ते ने यह भी कहा कि यह महाविद्यालय न केवल शिक्षा का केंद्र बनेगा, बल्कि क्षेत्र के कृषि विकास और युवाओं के उज्जवल भविष्य की नींव भी रखेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं कृषि मंत्री राम विचार नेताम का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए क्षेत्रवासियों को इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए बधाई दी।
इस कृषि महाविद्यालय की स्थापना से क्षेत्र के युवाओं को कृषि विज्ञान, उद्यानिकी, पशुपालन और ग्रामीण प्रबंधन जैसे विषयों में उच्च शिक्षा का अवसर मिलेगा। अब दूरदराज के ग्रामीण विद्यार्थियों को बड़े शहरों की ओर नहीं जाना पड़ेगा और वे अपने क्षेत्र में ही गुणवत्तापूर्ण कृषि शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे।
छत्तीसगढ़
रायपुर : छत्तीसगढ़ अधिवक्ता कल्याण निधि न्यास समिति की बैठक सम्पन्न
रायपुर। छत्तीसगढ़ अधिवक्ता कल्याण निधि न्यास समिति की बैठक आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में विधि एवं विधायी तथा शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव की अध्यक्षता में तथा सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक धरमलाल कौशिक की विशेष उपस्थित में सम्पन्न हुई। बैठक में महाधिवक्ता विवेक शर्मा, प्रमुख सचिव विधि एवं विधायी विभाग सुषमा सावंत, अधिवक्ता शैलेन्द्र दुबे, वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील ओटवानी, छत्तीसगढ़ अधिवक्ता कल्याण निधि न्यास समिति के अन्य सदस्य सहित भारतीय स्टेट बैंक, भारतीय जीवन बीमा निगम, वित्त तथा अन्य विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

अधिवक्ताओं के हितों एवं कल्याण के लिए विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में अधिवक्ताओं के लिए सामूहिक बीमा, पेंशन, नए अधिवक्ताओं के मानदेय, चिकित्सा बीमा, अधिवक्ताओं के कल्याण हेतु मृत्युदावा राशि का प्रावधान सहित छत्तीसगढ़ अधिवक्ता संरक्षण विधेयक के संबंध में विस्तार से चर्चा की गई।
छत्तीसगढ़
रायपुर : सेवा और समर्पण भाव के कारण भारतीय डॉक्टरों को देश के बाहर भी मिलता है सम्मान – डेका
राज्यपाल ने छत्तीसगढ़ में सुपर स्पेशलिटी कार्डियक फैसिलिटी की स्थापना पर दिया बल
राज्यपाल रमेन डेका ने रेस्पिरेटरी इंटेंसिव केयर यूनिट का शुभारंभ किया

रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका ने आज भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स रायपुर में रेस्पिरेटरी इंटेंसिव केयर यूनिट का शुभारंभ किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि चिकित्सा के क्षेत्र में एम्स एक विश्वसनीय संस्थान रहा है। जब हम सुपर स्पेशलिटी चिकित्सा संस्थानों की बात करते हैं एम्स का नाम सबसे ऊपर होता है। यह गर्व का विषय है कि भारत के सभी राज्यों में एम्स की स्थापना हो चुकी है। एम्स रायपुर में इलाज हेतु आए मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस लिहाज से इस संस्थान को और बड़ी जगह की आवश्यकता पड़ेगी। उन्होंने कहा कि मैं राज्य शासन को यह सलाह दूंगा कि नवा रायपुर में एम्स की स्थापना के लिए भूमि आबंटित करें, ताकि बड़ी संख्या में जरूरतमंद मरीजों को चिकित्सा सुविधा मिल सकें।
राज्यपाल ने छत्तीसगढ़ में सुपर स्पेशलिटी कार्डियक फैसिलिटी की स्थापना पर बल दिया, ताकि हृदय रोगियों को अपने ही प्रदेश में बेहतर इलाज मिल सकें और उन्हें प्रदेश के बाहर न जाना पड़े। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज अथवा एम्स में सुपर स्पेशलिटी कार्डियक फैसीलिटी की स्थापना की जा सकती है।
श्री डेका ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि चिकित्सा सुविधाओं की बढ़ोतरी के कारण प्रदेश में मृत्यु दर में आशानुकूल कमी आई है। लेकिन अभी भी बहुत कुछ करना बाकी है ताकि हम वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बना सकें। इसके लिए प्रत्येक क्षेत्र में बेहतर परिणाम हासिल करने होंगे, चाहे वह चिकित्सा का क्षेत्र हो, इंजीनियरिंग का क्षेत्र हो या अंतरिक्ष विज्ञान। श्री डेका ने डॉक्टरों का उत्साह वर्धन करते हुए कहा कि आप सभी ऐसे नोबेल प्रोफेशन में हैं जो सीधे लोगों की भलाई से जुड़ा हुआ है। आज भी समाज का एक बड़ा तबका डॉक्टरों को भगवान मानता है। देश के बाहर भी भारतीय डॉक्टरों का नाम सम्मान से लिया जाता है। इसकी सबसे बड़ी वजह हमारे सुप्रशिक्षित और समर्पित डॉक्टर हैं। हमारे भारतीय डॉॅक्टर हमेशा मरीजों के बेहतर इलाज को प्राथमिकता देते है जो उनकी सेवा भावना का परिचायक है। उन्होंने अपनी माता जी का संस्मरण साझा करते हुए कहा कि जब मेरी माता जी बीमार रहा करती थीं जब का मेरा अनुभव है कि डॉक्टरों को देखते ही उनकी आधी परेशानी खत्म हो जाती थी। यह डॉक्टरों पर आम लोगों के अटूट विश्वास को दर्शाता है।
श्री डेका ने इस अवसर पर भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह संस्थान चिकित्सा सेवा के क्षेत्र में नये प्रतिमान स्थापित करता रहें और निरंतर मरीजों की सेवा में तत्परता से जुटा रहे ऐसी मेरी कामना है। इस अवसर पर एम्स के चिकित्सा अधिकारी बडी संख्या में उपस्थित थे।
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