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भारत में पहली टेस्ला कार महाराष्ट्र के मंत्री ने खरीदी:बोले- लेने का मकसद EV के प्रति जागरूकता फैलाना, पोते को गिफ्ट करूंगा
नई दिल्ली,एजेंसी। इलॉन मस्क की EV कंपनी टेस्ला ने इलेक्ट्रिक SUV मॉडल Y की भारत में पहली डिलीवरी की है। शुक्रवार (5 सितंबर) को महाराष्ट्र के ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर प्रताप सरनाइक ने मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में टेस्ला के नए शोरूम से मॉडल Y की पहली डिलीवरी ली है।
प्रताप सरनाइक ने इस मौके पर कहा कि उनका मकसद लोगों, खासकर युवाओं में इलेक्ट्रिक गाड़ियों के प्रति जागरूकता फैलाना है। उन्होंने कहा, ‘मैं चाहता हूं कि बच्चे इन कारों को जल्दी देखें और सस्टेनेबल ट्रांसपोर्ट की अहमियत समझें। यह कार मैं अपने पोते को गिफ्ट करूंगा।’
इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना जरूरी
सरनाइक का कहना है कि सही उदाहरण पेश करना और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना ज्यादा जरूरी है। महाराष्ट्र सरकार ने इलेक्ट्रिक गाड़ियों को प्रोत्साहन देने के लिए कई कदम उठाए हैं, जैसे अटल सेतु और समृद्धि एक्सप्रेसवे पर टोल छूट। इसके अलावा राज्य परिवहन विभाग ने करीब 5,000 इलेक्ट्रिक बसें भी खरीदी हैं।

भारत में टेस्ला की शुरुआत धीमी, अब तक 600 ऑर्डर मिले
टेस्ला की भारत में एंट्री को लेकर काफी हाइप था, लेकिन शुरुआत कुछ धीमी रही है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई में बुकिंग शुरू होने के बाद से अब तक 600 ऑर्डर मिले हैं। यह आंकड़ा टेस्ला के ग्लोबल स्केल के सामने काफी छोटा है, जहां कंपनी हर कुछ घंटों में इतनी गाड़ियां डिलीवर करती है।
टेस्ला इस साल भारत में 350 से 500 गाड़ियां भेजने का प्लान बना रही है। ये गाड़ियां शंघाई से आएंगी और पहली खेप सितंबर की शुरुआत में पहुंच चुकी है। फिलहाल डिलीवरी सिर्फ मुंबई, दिल्ली, पुणे और गुरुग्राम तक सीमित रहेगी। हालांकि, टेस्ला ने पहले इस साल 2,500 कारों का टारगेट रखा था, जिसे हाई इंपोर्ट ड्यूटी के चलते कम कर दिया।
टेस्ला को भारत में क्यों आ रही दिक्कत?
टेस्ला की राह में सबसे बड़ी रुकावट है, इसकी कीमत। मॉडल Y की शुरुआती कीमत 60 लाख रुपए से ज्यादा है, जो भारत में बिकने वाली एवरेज इलेक्ट्रिक कार (लगभग 22 लाख रुपए) से कहीं ज्यादा है। हाई इम्पोर्ट ड्यूटी के चलते कीमतें बढ़ रही हैं।
2025 की पहली छमाही में 45 से 70 लाख रुपए की रेंज में सिर्फ 2,800 प्रीमियम गाड़ियां बिकीं। इस बीच, चीनी कंपनी BYD ने अपनी Sealion 7 SUV के 1,200 से ज्यादा यूनिट्स बेचे, जिसकी शुरुआती कीमत 49 लाख रुपए है।
15 जुलाई को भारत में लॉन्च हुआ था मॉडल Y
15 जुलाई को मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स में टेस्ला का पहला शोरूम ओपन हुआ था। इसी दिन मॉडल Y को भारत में लॉन्च किया गया था। कंपनी का दावा है कि ये कार एक बार फुल चार्ज में 622 किलोमीटर तक चल सकती है। कार में सेफ्टी के लिए 8 एयरबैग के साथ लेवल-2 एडास जैसे फीचर्स दिए गए हैं।
अभी केवल मॉडल Y कार भारत में बेची जाएगी। इसकी कीमत 60 लाख रुपए से शुरू है। ये अमेरिका की तुलना में 28 लाख रुपए ज्यादा है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने टेस्ला शोरूम क उद्घाटन किया था। इसके साथ ही कारों की बुकिंग शुरू हो गई थी।
इलेक्ट्रिक कार मॉडल Y को भारत में दो वैरिएंट- रियर व्हील ड्राइव (RWD) और लॉन्ग रेंज रियर व्हील ड्राइव (RWD) में पेश किया गया है। इसकी RWD वैरिएंट की एक्स-शोरूम कीमत 60 लाख रुपए है। वहीं लॉन्ग रेंज वैरिएंट की कीमत 68 लाख रुपए है। जबकि, ग्लोबल मार्केट में ये कार ऑल व्हील ड्राइव ऑप्शन के साथ भी आती है।
यहां हम टेस्ला मॉडल Y की पूरी डिटेल्स बता रहे हैं…
एक्सटीरियर में क्या नया:
- अपडेटेड व्हील्स, टायर्स और ब्रेक्स + स्मूथ राइड के लिए रिट्यून्ड सस्पेंशन
- सिंगल, क्रॉस-कार लैंप दुनिया की पहली इनडायरेक्ट रिफ्लेक्टिव टेललाइट
इंटीरियर में क्या नया:
- एम्बिएंट इंटीरियर लाइटिंग, रिफाइंड मटेरियल्स और वेंटिलेटेड फर्स्ट-रो सीट्स
- पावर फोल्डिंग सेकंड-रो सीट्स
- पीछे 8 इंच की ब्लूटूथ-कंपैटिबल टचस्क्रीन
- चारों तरफ एकॉस्टिक ग्लास की वजह से शांत केबिन
- इनविजिबल स्पीकर्स, जो मिनिमलिस्ट लुक के साथ मैक्सिमम ऑडियो परफॉर्मेंस देते हैं

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विनिर्माण क्षेत्र की गतिविधियों में वृद्धि फरवरी में चार महीने के उच्चतम स्तर पर
नई दिल्ली,एजेंसी। देश की विनिर्माण क्षेत्र की गतिविधियों में वृद्धि फरवरी में चार महीने के उच्चतम स्तर 56.9 पर पहुंच गई। सोमवार को जारी मासिक सर्वेक्षण में यह बात सामने आई। घरेलू मांग में मजबूत सुधार के कारण यह बढ़ोतरी हुई, हालांकि नए निर्यात ऑर्डर की वृद्धि में कमी देखी गई। मौसमी रूप से समायोजित एचएसबीसी इंडिया विनिर्माण खरीद प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) जनवरी के 55.4 से बढ़कर फरवरी में चार महीने के उच्चतम स्तर 56.9 पर पहुंच गया। पीएमआई की भाषा में 50 से ऊपर का अंक विस्तार जबकि 50 से नीचे का अंक संकुचन दर्शाता है। एचएसबीसी की मुख्य अर्थशास्त्री (भारत) प्रांजुल भंडारी ने कहा, ”फरवरी महीने में भारत के विनिर्माण क्षेत्र की गतिविधियों में पहले से ज्यादा तेजी देखने को मिली। मजबूत घरेलू ऑर्डर की वजह से उत्पादन लगातार दूसरे महीने भी तेज गति से बढ़ा।”
सर्वेक्षण में कहा गया, “समिति के सदस्यों के अनुसार, काम करने की दक्षता में सुधार, बाजार में मजबूत मांग, नए ऑर्डर में बढ़ोतरी और तकनीक में निवेश की वजह से उत्पादन में कुल मिलाकर अच्छी बढ़त दर्ज की गई।” एक क्षेत्र जहां वृद्धि में कुछ कमी आई, वह नए निर्यात ऑर्डर रहे। हालांकि, जिन कंपनियों की विदेशों में बिक्री बढ़ी, उन्होंने एशिया, यूरोप, पश्चिम एशिया और अमेरिका से ऑर्डर मिलने की बात कही। भंडारी ने कहा, “नए निर्यात ऑर्डर में वृद्धि ने 2025 के मध्य में शुरू हुई धीमी गति को जारी रखा, जिससे विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार सृजन कुछ हद तक सीमित हो गया।”
कुल नए ऑर्डर में लगातार तेज बढ़ोतरी होने के कारण भारत के विनिर्माताओं ने उत्पादन बढ़ाने और भंडारण करने के लिए अतिरिक्त कच्चे माल की खरीद की। काम का दबाव बढ़ने पर कंपनियों ने कच्चे माल की खरीद तेज की, अपना भंडार बढ़ाया और अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति भी की। आने वाले एक वर्ष के लिए उत्पादन को लेकर कंपनियों का रुख सकारात्मक बना हुआ है। लगभग 16 प्रतिशत कंपनियों ने उत्पादन बढ़ने का अनुमान जताया है, जबकि एक प्रतिशत से भी कम कंपनियों को गिरावट की आशंका है।
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Gold Bangle Cost: 18 कैरेट vs 14 कैरेट: 2 तोले के सोने के कड़े बनवाने में कितना आएगा खर्चा
मुंबई, एजेंसी। अगर आप अपनी कलाई की शोभा बढ़ाने के लिए सोने के कड़े (Bangles) बनवाने की सोच रहे हैं, तो केवल डिजाइन देखना काफी नहीं है, बल्कि सोने के ‘गणित’ को समझना भी बेहद जरूरी है। भारतीय बाजार में सोने की आसमान छूती कीमतों के बीच 14 कैरेट और 18 कैरेट के विकल्पों ने ग्राहकों को उलझन में डाल दिया है। एक तरफ जहाँ शुद्धता का मोह है, वहीं दूसरी तरफ मजबूती और बजट की बात है। अगर आप दो तोले यानी लगभग 20 ग्राम वजन के कड़े बनवाने का मन बना चुके हैं, तो खरीदारी से पहले यह जान लें कि आपकी जेब पर कितना असर पड़ने वाला है और कौन सा विकल्प आपके लिए सबसे सटीक साबित होगा।
18 कैरेट सोने का लग्जरी और प्रीमियम अनुभव
18 कैरेट सोना उन लोगों के लिए बेहतरीन विकल्प है जो शुद्धता और चमक से समझौता नहीं करना चाहते। इसमें 75% शुद्ध सोना होता है, जो इसे एक प्रीमियम लुक और बेहतरीन रीसेल वैल्यू देता है। वर्तमान मार्केट रेट के हिसाब से देखें तो 18 कैरेट सोने की कीमत ₹12,981 प्रति ग्राम के करीब है। इस आधार पर यदि आप दो तोले के कड़े बनवाते हैं, तो मेकिंग चार्ज और 3% जीएसटी को मिलाकर इसकी कुल लागत ₹3,50,000 से ₹3,70,000 के बीच बैठने वाली है। हालांकि यह 14 कैरेट के मुकाबले थोड़ा महंगा जरूर है, लेकिन इसकी प्राकृतिक पीली चमक और लंबे समय तक बनी रहने वाली वैल्यू इसे निवेश के लिहाज से भी खास बनाती है।
14 कैरेट सोना: मजबूती और बजट का बेजोड़ संगम
जो लोग रोजाना पहनने के लिए मजबूत गहने चाहते हैं, उनके लिए 14 कैरेट सोना एक स्मार्ट चॉइस है। इसमें शुद्ध सोने की मात्रा 58.3% होती है, जिसकी वजह से यह काफी कठोर और टिकाऊ होता है। रोजमर्रा के काम के दौरान इसमें खरोंच आने या इसके मुड़ने का डर बहुत कम रहता है। कीमत के मोर्चे पर भी यह काफी राहत भरा है क्योंकि फिलहाल इसका रेट ₹9,843 प्रति ग्राम चल रहा है। दो तोले के कड़ों के लिए आपको लगभग ₹2,60,000 से ₹2,80,000 तक खर्च करने होंगे। कम कीमत में शानदार ज्वेलरी का शौक पूरा करने वालों के लिए यह एक किफायती और व्यावहारिक रास्ता है।
मेकिंग चार्ज और अन्य खर्चों का बारीकी से हिसाब
सोने के गहनों की अंतिम कीमत केवल सोने के भाव पर तय नहीं होती, बल्कि इसमें मेकिंग चार्ज और टैक्स का बड़ा हाथ होता है। ज्वेलर्स आमतौर पर डिजाइन की जटिलता के आधार पर सोने की मूल कीमत का 8% से 25% तक मेकिंग चार्ज वसूलते हैं। अगर आंकड़ों में बात करें तो 18 कैरेट के लिए यह ₹600 से ₹900 प्रति ग्राम और 14 कैरेट के लिए ₹500 से ₹800 प्रति ग्राम तक जा सकता है। दो तोले के कड़ों पर केवल मेकिंग चार्ज ही ₹14,000 से ₹21,000 तक जुड़ सकता है। इसके अलावा, पूरे बिल पर सरकार को 3% जीएसटी देना अनिवार्य है। साथ ही कुछ ज्वेलर्स मैन्युफैक्चरिंग के दौरान होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए 1% से 3% तक वेस्टेज चार्ज भी जोड़ते हैं, इसलिए खरीदारी से पहले इन सभी छिपे हुए खर्चों पर ज्वेलर से खुलकर बात करना आपके लिए फायदेमंद रहेगा।
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Gold Market में अचानक सन्नाटा, रुक गई सोने-चांदी की सप्लाई? अटके शिपमेंट
मुंबई, एजेंसी। वैश्विक गोल्ड मार्केट में 2 मार्च 2026 की सुबह अचानक हलचल मच गई। पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव और ईरान-अमेरिका/इजराइल टकराव की खबरों ने सप्लाई चेन को झटका दिया। कुछ ही घंटों में दुबई से लेकर एशियाई रिटेल बाजारों तक सोने और चांदी की आवाजाही प्रभावित होने लगी, जिससे बुलियन बाजार में बेचैनी बढ़ गई। एयरस्पेस प्रतिबंध और अटकी फिजिकल शिपमेंट के कारण ट्रेडर्स और आयातक अनिश्चितता में हैं, जबकि कीमतों में तेजी ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है।
गोल्ड शिपमेंट अटकी
दुनिया के प्रमुख गोल्ड ट्रेडिंग हब्स में गिने जाने वाले Dubai में कई फ्लाइट्स रद्द कर दी गईं और एयरस्पेस प्रतिबंधों के कारण फिजिकल गोल्ड शिपमेंट अटक गई। रोजाना हजारों किलो सोने की आवाजाही देखने वाला यह शहर अचानक सुस्त पड़ गया। भारत के लिए यह स्थिति खास तौर पर अहम है, क्योंकि देश में आयात होने वाले सोने का लगभग 50-60% हिस्सा दुबई रूट से आता है। लंबा व्यवधान बाजार में सप्लाई टाइट कर सकता है।
इस बीच ध्यान Strait of Hormuz पर टिक गया, जो वैश्विक व्यापार का अहम समुद्री मार्ग है। बढ़ते तनाव के कारण शिपिंग मूवमेंट धीमा पड़ा और कुछ कार्गो जहाजों को रोकना पड़ा। तेल के साथ-साथ सोने जैसी कीमती धातुओं की लॉजिस्टिक्स भी दबाव में आ गईं। सप्लाई चेन के बाधित होने की आशंका से बाजार में बेचैनी बढ़ी।
खाड़ी क्षेत्र के देशों—United Arab Emirates, Saudi Arabia, Kuwait और Bahrain—में सुरक्षा अलर्ट के चलते एयरस्पेस बंद होने की खबरों ने हालात और जटिल कर दिए। गोल्ड और रफ डायमंड्स के कई कार्गो अटक गए, जिससे अंतरराष्ट्रीय ट्रेड चैनल अस्थायी रूप से ठहर गए।
कई गोल्ड शॉप्स में रोकी बिक्री
भारत में इसका असर तेजी से दिखा। पुणे समेत कई सर्राफा बाजारों में बुलियन डीलर्स ने सीमित बिक्री शुरू कर दी या अस्थायी रूप से सौदे रोक दिए। स्टॉक घटने लगा और नई खेप कब पहुंचेगी, इस पर स्पष्टता नहीं थी। खरीदार बढ़ती कीमतों से चौंक गए, जबकि व्यापारी सप्लाई की अनिश्चितता से चिंतित दिखे। इसी तरह Buriram (थाईलैंड) में भी कई गोल्ड शॉप्स ने एहतियातन बिक्री रोक दी और डिस्प्ले खाली कर दिए।
कुल मिलाकर, क्षेत्रीय तनाव का असर अब सीधे वैश्विक गोल्ड सप्लाई नेटवर्क पर दिखने लगा है, जिससे आने वाले दिनों में कीमतों और उपलब्धता—दोनों पर दबाव बना रह सकता है।
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