रायपुर,एजेंसी। होली में आम से लेकर खास सभी मस्ती के रंग में सराबोर होते हैं। छत्तीसगढ़ के नेता और मंत्रियों के भी ऐसे ही किस्से हैं। भले ही अब वे गरिमा में बंधे गुलाल का तिलक लगाकर होली खेलते दिखते हैं, मगर एक वक्त था जब छत्तीसगढ़ के ये सियासी चेहरे होली के हुड़दंग में खूब शामिल होते थे।
छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव, राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत के साथ कई मंत्रियों और नेताओं ने होली से जुड़े दिलचस्प किस्से दैनिक भास्कर से साझा किए।
रोचक किस्से जानने से पहले देखिए कुछ होली से जुड़ी कुछ रोचक तस्वीरें
केदार कश्यप ने पहनाई अजय चंद्राकर को टोपी…राजस्व मंत्री के गानों पर थिरके डिप्टी सीएम
अनुज शर्मा ने जब अपने एक्टर वाले अंदाज में आकर छत्तीसगढ़ी गाने पर किए डांस स्टेप
करेला और मिर्ची की माला पहने नगाड़ा बजाते हुए मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री
अरुण साव बोले- तालाब में घंटों नहाता था
अरुण साव ने किस्से साझा करते हुए कहा कि, गांव की होली अभी बहुत याद आती है। मैं बड़े बुजुर्गों के साथ बैठकर फाग गीत गया करता था। हम नगाड़े बजाया करते थे और उसके बाद घंटों तक हम तालाब में डुबकी लगाकर नहाया करते थे। विधानसभा की होली में भी अरुण साव जबरदस्त डांस करते हुए दिखे।
चुराकर लाते होलिका की लकड़ी
राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने दैनिक भास्कर को बताया कि, मेरा बचपन गांव में बीता है। गोबर के कंडे और किसी दूसरे के खेत से लकड़ी चुराकर लाया करते थे इसी की होलिका बनाकर हम जला दिया करते थे। इसके बाद गांव में लोगों को दौड़ा-दौड़ाकर मस्ती करते हुए रंग लगाया करते थे। विधानसभा की होली में भी राजस्व मंत्री ने जब गाना शुरू किया तो मंच पर वन मंत्री केदार कश्यप और विधायक अजय चंद्राकर डांस करने लगे।
हम तो शुरू से बदमाश थे-महंत
नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने भी पुराने दिनों की होली की याद ताजा की। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि, हम तो शुरू से ही बदमाश थे। बड़ी सी टंकी में पानी भरते थे और उसमें दोस्तों को डुबकी लगाकर होली खेलते थे।
जब मुख्यमंत्री साय ने पूर्व मुख्यमंत्री बघेल को गुलाल लगाया
लोगों पर पानी नहीं, लोगों को पानी में डाल दिया करते थे
विधायक अनुज शर्मा और छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल लोगों पर पानी नहीं डालते थे बल्कि पानी में लोगों को डाल दिया करते थे।
विधायक अनुज शर्मा ने बताया कि कॉलेज के दिनों में हम लोगों को पकड़ कर लाते थे और उन्हें रंगों से भरे ड्रम में डूबा दिया करते थे।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने भी बताया कि, गांव में बनने वाले पारंपरिक व्यंजनों का लुत्फ होली के दिन लेना कभी नहीं छोड़ते।
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने गांव में होली खेली।
मालपुआ खिलाएंगी मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े
लक्ष्मी राजवाड़े ने दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया कि उन्हें होली खेलना बहुत पसंद है। गांव में पारंपरिक तरीके से होली मनाते हैं हर साल किचन में खुद मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े मालपुआ और गुजिया बनाती हैं। ये उनकी फेवरेट डिश है, जिसे वह मेहमानों को परोसती हैं।
विधानसभा में होली उत्सव के दौरान विधायक अजय चंद्राकर की मस्ती
विधानसभा में जमकर मस्ती करते दिखे विधायक चंद्राकर
हाल ही में छत्तीसगढ़ की विधानसभा में खेली गई विधायकों की होली में भी विधायक और मंत्रियों का मस्ती भरा अंदाज देखने को मिला। एक दूसरे के प्रतिद्वंदी माने जाने वाले नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत और मुख्यमंत्री विष्णु देव हाथ उठाकर साथ में डांस कर रहे थे और इन्हें डांस करवा रहे थे डॉक्टर रमन सिंह।
मैं तो अब भी मस्ती करता हूं- चंद्राकर
अजय चंद्राकर ने कहा कि होली में मैं पहले भी मस्ती किया करता था और अब भी करता हूं। विधानसभा में खेली गई होली के दौरान अजय चंद्राकर का जुदा अंदाज भी देखने को मिला। कभी वह मुख्यमंत्री साय के पास जाकर ठुमका लगाते थे तो कभी रामविचार नेताम को ठुमकते हुए गुजिया खिलाने लगते। फिर, फाग गीतों को सुनकर स्टेज पर चढ़ जाया करते और दिल खोलकर डांस करते दिखाई दिए।
कवि सम्मेलन में सुरेंद्र दुबे ने विधायकों से कहा-
आरंग के विधायक गुरु खुशवंत को लेकर सुरेंद्र दुबे ने कहा कि, उनके बाल कंधे तक बढ़े और नीचे जा रहे थे। उन्होंने बीच में ही इसे काट दिया लड़कियां इनसे पूछती हैं आपकी घनी लंबी जुल्फों का राज क्या है? यह साउथ की फिल्मों में हीरो के रूप में जल्द ही नजर आएंगे।
मुख्यमंत्री को लेकर सुरेंद्र दुबे ने कहा कि, सीधे दिखाई देते हैं लेकिन डॉन है। सांय सांय कुंदरु सांय सांय खीरा, बिरज में होली खेले रघुवीरा।
विधायक पुरंदर मिश्रा को लेकर कहा, वाह रे पुरंदर जितना बाहर उतना अंदर…यही बात पुरंदर की खास है इसीलिए एकदम झकास है।
सुरेंद्र दुबे ने कहा कि, विधानसभा में धरमलाल और धर्मजीत नाम के दो धार्मिक लोग हैं लेकिन यह दोनों बड़े अधर्मी लोग भी हैं। आप सह लेते हैं इसलिए हम कह लेते हैं।
चरण दास महंत को लेकर उन्होंने कहा कि, चरण दास महंती हमारे बीच बैठे हैं और मेरी बातें सुन रहे हैं जिन्होंने किसी की नहीं सुनी वह मुझे सुन रहे हैं मेरे लिए बहुत बड़ी बात है इसीलिए चरणदास महंत झकास है।
कोरबा निवासी 02 लोगों के विरुद्ध म्यूल अकाउंट के मामले में पुलिस की कार्रवाई
कोरबा पुलिस की अपील—अपना बैंक खाता, एटीएम, सिम एवं मोबाइल नंबर किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग हेतु न दें
कोरबा। पुलिस अधीक्षक जिला कोरबा सिद्धार्थ तिवारी के निर्देशन में, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लखन पटेल एवं साइबर नोडल अधिकारी नितेश ठाकुर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कटघोरा के मार्गदर्शन में साइबर थाना प्रभारी ललित कुमार चंद्रा के नेतृत्व में म्यूल अकाउंट के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है।
भारत सरकार के गृह मंत्रालय से म्यूल अकाउंट (Mule Account) के संबंध में प्राप्त निर्देशों के पालन में साइबर पुलिस थाना कोरबा द्वारा ऐसे बैंक खातों के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है, जिनका उपयोग साइबर अपराधों में किए जाने की आशंका है।
इसी क्रम में साइबर पुलिस थाना कोरबा द्वारा अलग अलग बैंक खातों के संबंध में अपराध पंजीबद्ध कर धारा 317(2), 318(4) बीएनएस के तहत विवेचना में लिया गया। विवेचना के दौरान दो अलग अलग अपराधों में दो खाताधारकों को अभिरक्षा में लेकर पूछताछ की गई।
पूछताछ में खाता धारक महेंद्र कुमार धीवर निवासी मानस नगर, कोरबा एवं के प्रभाकर राव निवासी कृष्ण नगर कोरबा द्वारा अपने बैंक खातों को लाभ कमाने के उद्देश्य से अन्य व्यक्तियों को कमीशन के बदले उपयोग हेतु दिए जाने की बात सामने आई। बाद में उन्हें जानकारी हुई कि संबंधित बैंक खाते होल्ड हो गए हैं।
प्रकरण में उपलब्ध तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर दोनों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की गई है। प्रकरण की विवेचना वर्तमान में जारी है।
म्यूल अकाउंट के विरुद्ध कोरबा पुलिस की कार्रवाई
साइबर अपराधियों द्वारा आम नागरिकों को कमीशन अथवा आसान कमाई का लालच देकर उनके नाम से बैंक खाते खुलवाकर अथवा पहले से संचालित बैंक खातों का उपयोग साइबर अपराध से प्राप्त राशि के लेन-देन के लिए किया जाता है। ऐसे बैंक खातों को म्यूल अकाउंट (Mule Account) कहा जाता है।
साइबर अपराध में प्रयुक्त ऐसे खातों की पहचान कर उनके विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है। बैंक खाता किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग के लिए उपलब्ध कराने वाले खाताधारक भी साइबर अपराध की विवेचना एवं कानूनी कार्रवाई की चपेट में आ सकते हैं।
कोरबा पुलिस की आम नागरिकों से अपील
साइबर अपराधी लोगों को कमीशन अथवा अन्य प्रकार के लाभ का लालच देकर उनके बैंक खाते, एटीएम कार्ड, मोबाइल नंबर अथवा सिम का उपयोग साइबर अपराधों में कर सकते हैं। अतः नागरिक निम्न सावधानियां बरतें—
अपना बैंक खाता किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग हेतु न दें।
अपना एटीएम/डेबिट कार्ड, पासबुक, चेकबुक या इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी किसी को न दें।
अपना मोबाइल नंबर अथवा सिम कार्ड किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग करने के लिए न दें।
किसी व्यक्ति द्वारा कमीशन या आसान कमाई का लालच देकर बैंक खाता उपलब्ध कराने की बात कही जाए तो सतर्क रहें।
अपने बैंक खाते में होने वाले लेन-देन की नियमित रूप से जानकारी रखें।
किसी संदिग्ध लेन-देन की जानकारी मिलने पर तत्काल अपने बैंक एवं पुलिस को सूचित करें।
किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने खाते में राशि प्राप्त कर उसे दूसरे खाते में ट्रांसफर अथवा नकद निकालकर न दें।
कोरबा पुलिस नागरिकों से अपील करती है कि थोड़े से आर्थिक लाभ के लालच में अपना बैंक खाता, एटीएम, सिम अथवा मोबाइल नंबर किसी अन्य व्यक्ति को देकर स्वयं को साइबर अपराध की विवेचना एवं कानूनी कार्रवाई का हिस्सा न बनाएं।
SECL मानिकपुर जनसुनवाई रद्द करने की मांग:ग्रामीणों ने प्रक्रिया को फर्जी बताया,भू-विस्थापित बोले- पहले पुराने वादे पूरे करो,नहीं तो 3 हजार ग्रामीण करेंगे विरोध
कोरबा। SECL मानिकपुर ओपन कास्ट खदान विस्तार परियोजना को लेकर प्रभावित ग्रामीणों और प्रबंधन के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। भू-विस्थापित संगठन मानिकपुर ने 21 अगस्त को प्रस्तावित पर्यावरण जनसुनवाई को रद्द करने की मांग की है।
संगठन ने जनसुनवाई की प्रक्रिया को फर्जी बताते हुए चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गईं तो 8 प्रभावित गांवों के करीब 2 से 3 हजार महिला-पुरुष ग्रामीण मौके पर पहुंचकर इसका उग्र विरोध करेंगे।
200-250 किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिलने का आरोप
250 किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिलने का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि दशकों पहले खदान के लिए अपनी उपजाऊ जमीन देने के बावजूद करीब 200 से 250 किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है। वहीं, SECL द्वारा गोद लिए गए 7-8 गांवों में सड़क, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति भी खराब है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन और SECL प्रबंधन खदान विस्तार और कॉर्पोरेट मुनाफे को प्राथमिकता दे रहा है, जबकि विस्थापित परिवारों की पुरानी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया है।
युवाओं के लिए 400-500 स्थायी नौकरी की मांग
भू-विस्थापितों ने प्रभावित गांवों के युवाओं के लिए मौके पर ही 400 से 500 पदों पर नियमित और स्थायी भर्ती शुरू करने की मांग रखी है। इसके अलावा भिलाई खुर्द-1, 2 और 3 में बचे मकानों और जमीनों का दोबारा पारदर्शी तरीके से भौतिक सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन कराने की मांग की गई है।
रापाखरा और दादर खुर्द को लेकर भी मांग
ग्रामीणों ने रापाखरा के विस्थापितों को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार देने और आने-जाने के लिए वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराने की मांग की है। वहीं, दादर खुर्द के तालाब को गांव की निस्तारी का प्रमुख स्रोत बताते हुए वहां ओबी डंपिंग पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है।
ग्रामीणों को सूचना दिए बिना जनसुनवाई कराने का आरोप
ग्रामीण अमन पटेल ने आरोप लगाया कि SECL प्रबंधन 21 अगस्त को जनसुनवाई कराने जा रहा है, लेकिन प्रभावित गांवों को इसकी जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने बताया कि करीब 15-20 दिन पहले अधिकारियों से चर्चा के दौरान कहा गया था कि जनसुनवाई की जानकारी मिलने पर ग्रामीणों को बताया जाएगा। इसके बावजूद अब पंचायत सचिव, सरपंच और अन्य क्षेत्रों को नोटिस भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।
ग्रामीणों का कहना है कि जब तक पुराने मुआवजे, रोजगार, पुनर्वास और मूलभूत सुविधाओं से जुड़े वादे पूरे नहीं होते, तब तक खदान विस्तार के लिए जनसुनवाई नहीं होने दी जाएगी।
पारदर्शी, निष्पक्ष एवं समयबद्ध शिकायत निवारण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
बिलासपुर/कोरबा। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) ने भूमि के बदले रोजगार से संबंधित शिकायतों की निष्पक्ष, पारदर्शी एवं समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक उच्चस्तरीय स्थायी समीक्षा समिति का गठन किया है। समिति उपलब्ध अभिलेखों, दस्तावेजों एवं साक्ष्यों के आधार पर प्रत्येक प्रकरण का परीक्षण कर अपनी अनुशंसाएं सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करेगी।
भूमि के बदले रोजगार की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी एवं निष्पक्ष बनाने के उद्देश्य से लागू की गई यह उच्चस्तरीय स्थायी समीक्षा व्यवस्था प्रत्येक पात्र हितग्राही के अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
समिति के अध्यक्ष महाप्रबंधक (भू-राजस्व), एसईसीएल मुख्यालय, बिलासपुर होंगे। समिति में महाप्रबंधक (योजना एवं परियोजना), महाप्रबंधक (मानव संसाधन/श्रमशक्ति), महाप्रबंधक (मानव संसाधन/औद्योगिक संबंध) तथा उप-महाप्रबंधक (विधि), एसईसीएल मुख्यालय, बिलासपुर सदस्य होंगे।
गठित समिति आवश्यकता के अनुसार संबंधित अभिलेखों एवं दस्तावेजों की जांच करेगी, अधिकारियों से आवश्यक जानकारी प्राप्त करेगी तथा उपलब्ध तथ्यों एवं साक्ष्यों का सत्यापन करते हुए प्रचलित नियमों एवं निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप शिकायतों का परीक्षण करेगी। इससे प्रकरणों के त्वरित, निष्पक्ष एवं तार्किक निस्तारण में सहायता मिलेगी।
भूमि के बदले रोजगार से संबंधित अनियमितता, जाली अथवा कूटरचित दस्तावेजों के उपयोग, तथ्य छिपाकर रोजगार प्राप्त करने अथवा अन्य संबंधित मामलों के संबंध में कोई भी व्यक्ति आवश्यक दस्तावेजों एवं साक्ष्यों सहित समिति के समक्ष शिकायत प्रस्तुत कर सकता है।
एसईसीएल ने स्पष्ट किया है कि विधिवत दर्ज की गई शिकायत को वापस लेने का कोई प्रावधान नहीं है। अतः शिकायतकर्ताओं से अपेक्षा की जाती है कि वे केवल प्रामाणिक तथ्यों एवं उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही शिकायत दर्ज कराएं। कंपनी ने सभी संबंधित पक्षों एवं आम नागरिकों से अपील की है कि शिकायत केवल अधिकृत माध्यमों से ही प्रस्तुत करें तथा किसी भी प्रकार के बिचौलियों, अपुष्ट सूचनाओं अथवा भ्रामक दावों से सावधान रहें।
एसईसीएल ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि जांच के दौरान कोई शिकायत जानबूझकर असत्य, दुर्भावनापूर्ण अथवा भ्रामक तथ्यों पर आधारित पाई जाती है, अथवा किसी व्यक्ति की छवि धूमिल करने या अनावश्यक उत्पीड़न के उद्देश्य से की गई प्रतीत होती है, तो संबंधित शिकायतकर्ता के विरुद्ध प्रचलित नियमों एवं लागू विधिक प्रावधानों के अनुसार आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
एसईसीएल सुशासन, पारदर्शिता, जवाबदेही एवं संस्थागत निष्पक्षता के उच्च मानकों के प्रति प्रतिबद्ध है। कंपनी का विश्वास है कि उच्चस्तरीय स्थायी समीक्षा व्यवस्था के माध्यम से भूमि के बदले रोजगार संबंधी शिकायतों के परीक्षण की प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष एवं विश्वसनीय बनेगी। साथ ही, वास्तविक एवं पात्र हितग्राहियों के हितों का प्रभावी संरक्षण सुनिश्चित होने के साथ शिकायत निवारण तंत्र में जनविश्वास एवं संस्थागत जवाबदेही भी और सुदृढ़ होगी।