छत्तीसगढ़
अस्तित्व की हुंकार: आधुनिक चुनौतियों के बीच निखरती नारी शक्ति
बिलासपुर।आज का अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस केवल एक औपचारिक उत्सव नहीं, बल्कि सदियों की चुप्पी को तोड़कर उभरी उस बुलंद आवाज़ का प्रतीक है, जो अब रुकने वाली नहीं है। यह दिन उस संघर्ष, साहस और संकल्प का प्रतीक है, जिसने नारी को सीमाओं की परिधि से निकालकर संभावनाओं के असीम आकाश तक पहुँचा दिया है।
इक्कीसवीं सदी की महिलाओं ने अपनी प्रतिभा, परिश्रम और आत्मविश्वास के बल पर उन बेड़ियों को पिघला दिया है, जो कभी उसे कमतर आँकती थीं। आज महिलाएँ केवल घर की चारदीवारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कॉर्पोरेट, बोर्डरूम से लेकर अंतरिक्ष अभियानों तक नेतृत्व कर रही हैं। विज्ञान, प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे जटिल क्षेत्रों में भी वे अपनी मेधा और क्षमता का लोहा मनवा रही हैं।
प्रसिद्ध कवयित्री महादेवी वर्मा की पंक्तियाँ नारी की संवेदनशीलता और आंतरिक शक्ति को गहराई से व्यक्त करती है
मैं नीर भरी दुःख की बदली,
स्पंदन में चिर निस्पंद बसी।
हालाँकि आधुनिक डिजिटल युग ने नारी के सामने नई चुनौतियाँ भी प्रस्तुत की हैं। साइबर हिंसा, मानसिक दबाव और सामाजिक अपेक्षाओं का बोझ आज की वास्तविकताएँ हैं। किंतु इन परिस्थितियों के बीच भी आधुनिक नारी टूटती नहीं, बल्कि हर चुनौती को अपनी शक्ति में बदलकर और अधिक सशक्त होकर उभरती है।
अब समय आ गया है कि समाज नारी के सशक्तिकरण की चर्चा करने के स्थान पर उसे वह अधिकार और सम्मान प्रदान करे, जिसकी वह सदैव अधिकारी रही है। जब तक समाज का दृष्टिकोण पितृसत्तात्मक सोच से मुक्त होकर वास्तविक समानता की ओर नहीं मुड़ेगा, तब तक कोई भी राष्ट्र पूर्ण प्रगति का दावा नहीं कर सकता।
नारी आज केवल सृष्टि की जननी ही नहीं, बल्कि बदलते हुए विश्व की सबसे सशक्त वास्तुकार भी है—वह समाज की दिशा निर्धारित करती है, संस्कारों की नींव रखती है और भविष्य की पीढ़ियों को आकार देती है।
अंत में मैं यही संदेश देना चाहूँगी—
हौसलों के तरकश में कोशिश का वह तीर ज़िंदा रख,
हार जाए चाहे ज़िंदगी में सब कुछ,
मगर फिर से जीतने की उम्मीद ज़िंदा रख।
लेखिका- शोभा पवार (शिक्षिका)
कोरबा
महतारी वंदन योजनाः मातृशक्ति के हाथों से संवर रहा बेटियों का भविष्य
’आर्थिक सहायता से बढ़ रहा आत्मनिर्भरता का भरोसा’
कोरबा। छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी महतारी वंदन योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हो रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित इस योजना के माध्यम से महिलाओं को प्रतिमाह आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है, जिससे उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। यह योजना न केवल महिलाओं को आर्थिक संबल दे रही है, बल्कि उनमें आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की भावना भी मजबूत कर रही है।
कोरबा जिले के शहरी क्षेत्र पोड़ीबहार निवासी श्रीमती परमेश्वरी प्रजापति भी इस योजना से लाभान्वित होकर अपने जीवन में नया बदलाव महसूस कर रही हैं। एक साधारण गृहिणी के रूप में वे अपने परिवार की जिम्मेदारियों का निर्वहन करती रही हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य होने के कारण कई बार घरेलू खर्च और बच्चों के भविष्य को लेकर उन्हें चिंता होती थी। ऐसे में जब उन्हें महतारी वंदन योजना की जानकारी मिली और उन्होंने इसके लिए आवेदन किया, तो यह केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं रही बल्कि उनके जीवन में उम्मीद और आत्मविश्वास का नया अध्याय बन गई।
योजना के तहत उन्हें प्रतिमाह एक हजार रुपये की सहायता राशि सीधे उनके बैंक खाते में प्राप्त हो रही है। इस राशि का उपयोग वे घर के दैनिक खर्चों में सहयोग करने के साथ-साथ अपनी दो बेटियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए बचत करने में कर रही हैं। इसके अलावा घरेलू आवश्यक वस्तुओं की पूर्ति तथा बच्चों की पढ़ाई-लिखाई में भी यह राशि उनके लिए सहायक सिद्ध हो रही है।
उन्होंने बताया कि महतारी वंदन योजना ने उन्हें केवल आर्थिक सहायता ही नहीं दी, बल्कि उनके मन में आत्मविश्वास भी जगाया है। अब उन्हें पहले की तुलना में अधिक भरोसा और आत्मबल महसूस होता है। उनका कहना है कि इस तरह की योजनाओं से महिलाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है और वे अपने परिवार के साथ समाज के विकास में भी योगदान दे पा रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की इस पहल से महिलाओं को सम्मान और आत्मनिर्भरता का नया आधार मिला है। अब उन्हें छोटी-छोटी आवश्यकताओं के लिए किसी के सामने हाथ फैलाने की जरूरत नहीं पड़ती। उन्होंने कहा कि यदि इसी प्रकार महिलाओं के हित में योजनाएं संचालित होती रहीं, तो समाज में महिलाओं की स्थिति और अधिक सशक्त होगी।
उन्होंने जनकल्याणकारी योजना के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आज महिलाएं पहले से कहीं अधिक आशा और विश्वास के साथ आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा महिलाओं के उत्थान और सशक्तिकरण के प्रति सदैव प्रशंसनीय रही है और इससे समाज में परिवर्तन देखने को मिल रहा है।
कोरबा
खाते में पहुंच रही राशि, महिलाओं को मिल रहा आत्मविश्वास
महतारी वंदन योजना से सास-बहू को मिला आर्थिक संबल, घर में बढ़ी खुशहाली
कोरबा। शहर से लगभग 90 किलोमीटर दूर पहाड़ो से घिरा गाँव है कारीमाटी..। पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के अंतर्गत आने वाले इस गाँव में खपरैल वाले कच्चे मकान में एक साथ रहने वाली सास-बहू मंगली बाई और प्रमिला बाई को बहुत ही विपरीत परिस्थितियों में रहना पड़ता है। इनके छोटे से गाँव से अन्य गाँव की दूरी अधिक होने और रास्ते में घना जंगल तथा पहाड़ होने की वजह से रोजी-मजदूरी का काम भी मिल नहीं पाता था,ऐसे में कई जरूरी कार्यों के लिए पैसे और आर्थिक तंगी के बीच जीवन में भी उदासी थी। महतारी वंदन योजना प्रारंभ होने के बाद नगदी के लिए तरसते सास-बहू को अब खाते में ही हर महीने रुपये मिल जाते हैं, जिससे उन्हें उनकी जरुरतों का सामान खरीदने में कोई परेशानी नहीं आती। हर महीने मिलने वाली महतारी वंदन की राशि इनकी उदासी हटाने के साथ ही खुशियों की वजह भी बन जाती है।

पोड़ी उपरोड़ा ब्लॉक के दूरस्थ ग्राम कारीमाटी में रहने वाली प्रमिला बाई और उनकी सास मंगली बाई ने बताया कि अन्य गाँव से उनके गाँव की दूरी अधिक होने की वजह से वे कही जा नहीं पाते। गाँव में जो थोड़ा बहुत खेत है उसमें ही खेती किसानी में सहयोग कर लेती हैं। उन्होंने बताया कि गाँव में हाजिरी मजदूरी मिलना मुश्किल है। अन्य गाँव की दूरी इतनी अधिक हैं कि वे चाहकर भी जा नहीं सकते। उन्होंने बताया कि महतारी वंदन योजना प्रारंभ होने के दौरान उन्होंने भी आवेदन जमा किया था। योजना से जुड़ने के पश्चात हर महीने उनके बैंक खाते में एक हजार की राशि आती है। इस राशि से घर में किराना सहित अन्य जरूरतों की पूर्ति आसानी से हो पाती है। मंगली बाई ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा महतारी वंदन योजना लागू किए जाने पर हम जैसी पहाड़ और वनांचल क्षेत्र में रहने वाली जरूरतमंद महिलाओं को खुशहाल जीवन का एक आधार मिल गया। ग्रामीण महिलाओं के लिए एक हजार की राशि कोई छोटी रकम नहीं होती। उन्होंने कहा कि वह अपनी बहू के साथ हर महीने बैंक जाकर पैसा निकाल लाती है और इस राशि का उपयोग घर के बहुत जरूरी कार्यों में करती है।
छत्तीसगढ़
कोरिया : समूह की चार स्वच्छता सखियों ने बदल दी ग्राम पंचायत की तस्वीर
ग्राम पंचायत बुड़ार में स्वच्छता की अलख जगाकर बनीं प्रेरणा स्रोत

कोरिया। महिलाओं ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि मन में दृढ़ संकल्प हो, एकता हो और समाज के लिए कुछ करने की भावना हो, तो सकारात्मक परिवर्तन अवश्य लाया जा सकता है। आज कोरिया जिले के अंजनि, हीरा मनी, लीलावती और मित्तल अपने गाँव में स्वच्छता की एक मिसाल बन चुकी हैं और अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत हैं। इनका यह कार्य स्वच्छ भारत मिशन के उद्देश्यों को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उनकी मेहनत यह संदेश देती है कि संकल्प, सहयोग और निरंतर प्रयास से गाँव को स्वच्छ और सुंदर बनाया जा सकता है।

कोरिया जिले में जनपद बैकुंठपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत बुडार की चार महिलाएँ अपने अथक समर्पण, मेहनत और एकजुटता के कारण पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। ग्राम पंचायत में रहने वाली श्रीमती अंजनि, हीरा मनी, लीलावती और मित्तल ने ग्राम पंचायत में प्रेरणा का एक नया माहौल बनाया है। ये महिलाएँ पिछले लगभग तीन वर्षों से स्वच्छता दीदी के रूप में लगातार कार्य कर रही हैं और गाँव को स्वच्छ एवं स्वस्थ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

सप्ताह में दो बार करती हैं कचरा कलेक्शन
स्वच्छता दीदी बनकर ये महिलाएँ सप्ताह में दो दिन बुधवार और शनिवार को गाँव के घर-घर जाकर कचरा संग्रहण का कार्य करती हैं तथा ग्रामीणों को स्वच्छता के महत्व के बारे में जागरूक करती हैं। वे लोगों को समझाती हैं कि गीला और सूखा कचरा अलग-अलग रखने से गाँव स्वच्छ रहता है और कचरे का सही प्रबंधन संभव होता है।
चुनौती से मानक तक का सफर
कार्य के प्रारंभिक दिनों में इन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। गाँव के बहुत से लोग कचरा अलग-अलग देने के लिए तैयार नहीं थे और स्वच्छता के प्रति जागरूकता भी कम थी। लेकिन इन महिलाओं ने धैर्य, मेहनत और निरंतर प्रयास से घर-घर जाकर लोगों को समझाया। धीरे-धीरे ग्रामीणों की सोच में सकारात्मक बदलाव आया और अब गाँव के प्रत्येक रहवासी नियमित रूप से कचरा देने लगे हैं। जिससे गांव में स्वच्छता का माहौल बना है।
छोटे-छोटे प्रयास बड़े परिणाम
श्रीमती अंजनि, हीरा मनी, लीलावती और मित्तल ने बताया कि प्रशासन के सहयोग से उन्हें कबाड़ी का काम करने वाले व्यवसायी से भी जोड़ा गया, जिससे वे सूखे कचरे जैसे प्लास्टिक, कागज और अन्य पुनर्चक्रण योग्य सामग्री को बेचकर अतिरिक्त आय प्राप्त कर रही हैं। इस कार्य से प्रत्येक महिला को लगभग 2 से 3 हजार रुपए प्रति माह की आय प्राप्त होती है। अब तक ये चारों महिलाएँ मिलकर लगभग 2.5 लाख से अधिक की आय अर्जित कर चुकी हैं, जिससे उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है और उनमें आत्मनिर्भरता की भावना भी बढ़ी है। इन महिलाओं की सबसे बड़ी ताकत उनकी आपसी एकता और संगठन है, जिसके कारण वे मिल-जुलकर अपने कार्य को सफलतापूर्वक आगे बढ़ा रही हैं।
अब ई-रिक्शा से ले रही हैं काम
इनके लगातार प्रयासों और उत्कृष्ट कार्यों को देखते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा इन महिलाओं को एक ई-रिक्शा भी प्रदान किया गया है, जिससे उन्हें कचरा संग्रहण के कार्य में काफी सुविधा मिल रही है। इस ई-रिक्शा के माध्यम से अब वे आसानी से घर-घर से कचरा एकत्र कर पाती हैं और अपने कार्य को और अधिक प्रभावी तरीके से कर रही हैं। इन महिलाओं ने मुख्यमंत्री श्री साय के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के सुशासन से हम महिलाएं सशक्त हुई हैं।
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