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Train Ticket Rules: रेलवे का बड़ा फैसला: 20 जून से लागू हुए नए नियम, टिकट को लेकर बढ़ी सख्ती

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नई दिल्ली, एजेंसी। ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों के लिए रेलवे ने जरूरी नियमों को लेकर फिर से चेतावनी जारी की है। कई बार लोग परिवार या दोस्तों के नाम पर बुक टिकट का इस्तेमाल करके यात्रा करने की कोशिश करते हैं, लेकिन ऐसा करना रेलवे नियमों के खिलाफ माना जाता है। अगर जांच के दौरान यात्री का नाम टिकट से मेल नहीं खाता है, तो उसे भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है। 

दूसरे के टिकट पर यात्रा करना नियमों का उल्लंघन
रेलवे के नियमों के अनुसार, आरक्षित टिकट केवल उसी व्यक्ति के लिए मान्य होती है जिसके नाम पर टिकट जारी की गई है। यदि कोई अन्य व्यक्ति उस टिकट पर यात्रा करता हुआ पाया जाता है, तो टिकट अमान्य मानी जा सकती है। ऐसी स्थिति में टिकट चेकर (TTE) यात्री से अतिरिक्त शुल्क वसूल सकता है।

जुर्माने के साथ देना पड़ सकता है अतिरिक्त किराया
नियमों के मुताबिक, यदि कोई व्यक्ति किसी दूसरे यात्री की टिकट पर सफर करते हुए पकड़ा जाता है तो रेलवे टिकट को रद्द मानते हुए पूरा किराया दोबारा वसूल सकता है। इसके अलावा करीब 500 रुपये तक का अतिरिक्त दंड भी लगाया जा सकता है। यह राशि परिस्थितियों और रेलवे नियमों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

दोबारा इस्तेमाल की गई टिकट पर भी कार्रवाई, नए नियम 20 जून से लागू
रेल मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक, नए नियम 20 जून से लागू हो गए हैं। वहीं नए प्रावधानों के तहत पहले इस्तेमाल की जा चुकी टिकट का दोबारा उपयोग करना भी गंभीर उल्लंघन माना जाएगा। ऐसे मामलों में यात्रियों पर पहले की तुलना में अधिक जुर्माना लगाया जा सकता है। रेलवे ने टिकटों के दुरुपयोग को रोकने के लिए नियमों को और सख्त किया है।

जुर्माना नहीं भरने पर हो सकती है कानूनी कार्रवाई
यदि कोई यात्री निर्धारित जुर्माना देने से इनकार करता है, तो मामला कानूनी प्रक्रिया तक पहुंच सकता है। रेलवे प्रशासन ऐसे मामलों में रेलवे कोर्ट का सहारा ले सकता है। नियमों के लगातार उल्लंघन या गंभीर मामलों में कानूनी कार्रवाई के साथ सजा का प्रावधान भी मौजूद है।

यात्रियों के लिए रेलवे की सलाह
रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे हमेशा वैध टिकट और सही पहचान पत्र के साथ यात्रा करें। किसी दूसरे व्यक्ति की टिकट का उपयोग करने से बचें और यात्रा से पहले टिकट पर दर्ज सभी जानकारी की जांच कर लें। नियमों का पालन करने से न केवल जुर्माने से बचा जा सकता है, बल्कि यात्रा भी बिना किसी परेशानी के पूरी होती है।

 ध्यान रखने वाली जरूरी बातें
-हमेशा अपने नाम की वैध टिकट पर ही यात्रा करें।
-टिकट पर दर्ज जानकारी सही है या नहीं, पहले जांच लें।
-इस्तेमाल की जा चुकी टिकट का दोबारा उपयोग न करें।
-TTE द्वारा मांगे जाने पर पहचान पत्र अवश्य दिखाएं।
-रेलवे नियमों का पालन करके अनावश्यक जुर्माने और कानूनी कार्रवाई से बचें।

रेलवे का कहना है कि यात्रियों की सुविधा और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए नियमों का पालन करना सभी के लिए जरूरी है। इसलिए ट्रेन यात्रा से पहले टिकट संबंधी नियमों की जानकारी जरूर रखें।

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कोरबा

वेदांता ने एक दशक में सरकारी खजाने में करीब रु5 लाख करोड़ का योगदान दिया

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मुंबई। विविध प्राकृतिक संसाधनों में देश की अग्रणी कंपनी वेदांता लिमिटेड (बीएसईः 500295 और एनएसईः वीईडीएल) ने कंपनी की 11वीं टैक्स ट्रांसपेरेंसी रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 26 में सरकारी खजाने में रु 62,722 करोड़ का योगदान दिया है। यह रिपोर्ट देश के निर्माण और पारदर्शी प्रशासन गवर्नेंस के लिए वेदांता की प्रतिबद्धता को और मजबूत बनाती है। यह योगदान कंपनी के संचालन से होने वाले कुल राजस्व का 36 फीसदी है, जो भारत के आर्थिक विकास में अहम भूमिका निभाता है।

यह पिछले साल की तुलना में योगदान में 13.3 फीसदी की बढ़ोतरी है, जिसके साथ पिछले दस सालों में सरकारी खजाने में वेदांता का कुल योगदान रु4,83,034 करोड़ हो गया है। कंपनी ने वित्तीय अनुशासन, राष्ट्र-निर्माण और विकसित भारत मिशन को समर्थन देने पर विशेष रूप से ध्यान दिया है। यह ग्रुप सरकारी खजाने में योगदान देने वाले भारत के टॉप 3 प्राइवेट सेक्टरों के सदनों में शामिल है।

सरकारी खजाने में यह योगदान वित्तीय वर्ष 26 में वेदांता के सबसे अच्छे फाइनेंशियल परफॉर्मेंस की वजह से हुआ। इस अवधि में कंपनी का राजस्व 15 फीसदी बढ़कर रु 1,74,075 करोड़ हो गया – जो कंपनी के इतिहास में सबसे ज़्यादा है – जबकि म्ठप्ज्क्। 29 फीसदी बढ़कर रु55,976 करोड़ पर पहुंच गया। इसी तरह कर के बाद मुनाफ़ा (पीएटी) 22 फीसदी बढ़कर रु25,096 करोड़ हो गया। कंपनी की बैलेंस शीट भी काफी मज़बूत हुई, शुद्ध ऋण म्ठप्ज्क्। के मुकाबले 1.22 गुना से बेहतर होकर 0.95गुना हो गया – जो 14 तिमाहियों में इसका सबसे अच्छा स्तर है।

वेदांता के अलग-अलग तरह के बिज़नेस पोर्टफोलियो – जिसमें जिंक-लेड-सिल्वर, एल्युमीनियम, कॉपर, आयरन ओर, स्टील, पावर, निकेल, क्रोम और ऑयल एंड गैस शामिल हैं – में मज़बूत ऑपरेशनल परफॉर्मेंस की वजह से कंपनी का फाइनेंशियल परफॉर्मेंस भी बहुत अच्छा रहा।
ज़िंक ने रु 19,053 करोड़ के साथ सबसे अधिक योगदान दिया, इसके बाद एल्युमीनियम (जिसे अब वेदांता एल्युमीनियम के तौर पर लिस्ट किया गया है) का योगदान रु 15,788 करोड़ और ऑयल एंड गैस (जिसे अब वेदांता ऑयल एंड गैस के तौर पर लिस्ट किया गया है) का योगदान रु 11,697 करोड रहा – यह महत्वपूर्ण खनिजों और ऊर्जा के क्षेत्र में वेदांता के पोर्टफोलियो के विस्तार और विविधता को दर्शाता है।
वेदांता लिमिटेड की टैक्स ट्रांसपेरेंसी रिपोर्ट के मुख्य बिंदु।

इस रिपोर्ट का 11वां संस्करण वित्त वर्ष 2025-26 के लिए वेदांता के टैक्स योगदान का विस्तृत ब्यौरा देता हैः
सरकारी रॉयल्टी और प्रॉफ़िट पेट्रोलियम (रु14,840 करोड़): इसमें राजस्थान, ओडिशा, गुजरात, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, गोवा, कर्नाटक और असम की राज्य सरकारों को बॉक्साइट, लेड-ज़िंक, सिल्वर, आयरन ओर, क्रूड ऑयल और नैचुरल गैस के लिए दी गई रॉयल्टी, साथ ही प्रोडक्शन शेयरिंग कॉन्ट्रैक्ट के तहत भारत सरकार को दिया गया प्रॉफ़िट पेट्रोलियम शामिल है।
इनकम और कैपिटल पर टैक्स (रु8,290 करोड़): इसमें सभी अधिकार क्षेत्रों में कानूनी रिटर्न में फ़ाइल किए गए कॉर्पोरेट इनकम टैक्स शामिल हैं।
अन्य टैक्स (रु 11,897 करोड़): इसमें एक्सपोर्ट और इम्पोर्ट पर रु5,980 करोड़ की ड्यूटी, रु2,503 करोड़ का ऑयल सेस/एनसीसीडी, रु 1,252 करोड़ की इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी और रु 1,663 करोड़ का इनएलिजिबल जीएसटी शामिल है।
इनडायरेक्ट टैक्स (रु21,777 करोड़): इसमें सभी बिज़नेस युनिट्स में माल और सर्विस की बिक्री से सीजीएसटी, एसजीएसटी और आईजीएसटी शामिल हैं।
विदहोल्डिंग टैक्स (रु3,188 करोड़): इसमें पेरोल टैक्स और वेंडर और कॉन्ट्रैक्टर पेमेंट पर सोर्स पर काटे गए टैक्स शामिल हैं।
भारत सरकार को कॉर्पोरेट डिविडेंड (रु1,180 करोड़): हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड में भारत सरकार की 27.92फीसदी हिस्सेदारी के ज़रिए पेमेंट किया गया।

कर में पारदर्शिता वेदांता के बड़े एनवायरनमेंटल, सोशल और गवर्नेंस (ईएसजी) एजेंडा का मुख्य हिस्सा है। लगातार 11 सालों से बरकरार अपने स्वैच्छिक एवं सक्रिय डिस्क्लोजर के ज़रिए कंपनी का उद्देश्य हितधारकों का भरोसा बढ़ाना और कॉर्पोरेट प्रशासन के सर्वोच्च मानक सुनिश्चित करना है। वेदांता के कर सिद्धानत बी-टीम रिस्पॉन्सिबल टैक्स प्रिंसिपल और एक्सट्रैक्टिव इंडस्ट्रीज ट्रांसपेरेंसी इनिशिएटिव के साथ करीब से जुड़े हुए हैं, जो ज़िम्मेदार कॉर्पोरेट नागरिकता के लिए इसकी प्रतिबद्धता को और मजबूत बनाते हैं।
वित्तीय वर्ष 26 की टैक्स ट्रांसपेरेंसी रिपोर्ट देखने के लिए विज़िट करेंः tax-transparency-report.pdf

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सेबी ने मई में निवेशकों की 5,500 से अधिक शिकायतों का समाधान किया

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नई दिल्ली, एजेंसी। पूंजी बाजार नियामक सेबी ने मई में अपने ऑनलाइन शिकायत निवारण मंच (स्कोर्स) के जरिये निवेशकों की 5,500 से अधिक शिकायतों का निपटान किया है। सेबी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, मई के आखिर तक स्कोर्स पर 10 शिकायतें तीन महीने से अधिक समय से लंबित थीं। इन शिकायतों से जुड़ी कंपनियों में केफिन टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लि., सेक्योर क्रेडेंशियल्स लि. और ईस्टर्न इनवेस्टमेंट्स लि. शामिल हैं। नियामक के शिकायत मंच को मई में 4,918 नई शिकायतें मिलीं, जबकि इस दौरान 5,548 शिकायतों का समाधान किया गया। परिणामस्वरूप 31 मई, 2026 तक लंबित शिकायतों की संख्या 6,167 से घटकर 5,537 हो गई। 

नियामक ने यह भी बताया कि अप्रैल के दौरान निवेशकों की शिकायतों पर कार्रवाई रिपोर्ट जमा करने में कंपनियों को औसतन पांच दिन लगे, जबकि पहली बार की समीक्षा वाली शिकायतों के समाधान में औसतन आठ दिन लगे। सेबी ने स्पष्ट किया कि लंबित शिकायतों के आंकड़ों में वे शिकायतें भी शामिल हैं जिनमें कंपनियों या संबंधित संस्थाओं ने तय समय के भीतर निवेशकों को अपनी कार्रवाई रिपोर्ट जमा कर दी हैं लेकिन शिकायतें अभी लंबित हैं। इससे निवेशकों को जवाब से असंतुष्ट होने पर समीक्षा की मांग करने का मौका मिलता है। 

स्कोर्स 2.0 के तहत, शिकायतें अपने आप संबंधित कंपनी को भेज दी जाती हैं और उनके पास निवेशक को कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) जमा करने के लिए 21 दिन का समय होता है। अगर निवेशक जवाब से संतुष्ट नहीं हैं, तो वे 15 दिन के भीतर पहले स्तर की समीक्षा की मांग कर सकते हैं, जिसके बाद एक तय संस्था शिकायत की जांच करती है और एटीआर जमा करती है। अगर निवेशक अब भी असंतुष्ट रहते हैं, तो वे अगले 15 दिन के भीतर दूसरे स्तर की समीक्षा की मांग भी कर सकते हैं। ऐसे मामलों में, सेबी सीधे मामले की जांच करता है और अपनी एटीआर जमा करता है। 

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शुक्रवार को नहीं खुलेगा शेयर बाजार, कल से 3 दिन बंद रहेगी ट्रेडिंग

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मुंबई, एजेंसी। अगर आप शेयर बाजार में निवेश करते हैं तो आपके लिए बेहद जरूरी खबर है। इस बार शेयर मार्केट में लॉन्ग वीकेंड रहेगा। कल से लगातार तीन दिन तक भारतीय शेयर बाजार बंद रहेंगे। शुक्रवार (26 जून) को मुहर्रम के अवसर पर देश के दोनों प्रमुख स्टॉक बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में ट्रेडिंग नहीं होगी। इसके साथ ही शनिवार, रविवार होने के कारण कारोबार नहीं होगा। 

अब बाजार में नियमित ट्रेडिंग सोमवार 29 जून को दोबारा शुरू होगी। इससे पहले 28 मई को बकरीद के मौके पर बाजार बंद रहा था। 

कुल 16 ट्रेडिंग छुट्टियां

स्टॉक एक्सचेंज के कैलेंडर के अनुसार, साल 2026 के लिए कुल 16 ट्रेडिंग छुट्टियां तय की गई थीं, जिनमें से 9 छुट्टियां बीत चुकी हैं। मुहर्रम के बाद साल के बचे हुए महीनों में 6 और मौकों पर शेयर बाजार में ट्रेडिंग बंद रहेगी। मुहर्रम के बाद अगली छुट्टी सीधे सितंबर में होगी यानी जुलाई और अगस्त के महीने में बाजार में कोई अतिरिक्त छुट्टी नहीं है।

MCX का शाम का सत्र रहेगा खुला

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सुबह का ट्रेडिंग सत्र बंद रहेगा। हालांकि शाम का सत्र निर्धारित समय के अनुसार खुला रहेगा, जिससे कमोडिटी ट्रेडर्स शाम के दौरान सामान्य रूप से कारोबार कर सकेंगे।

निवेशकों और ट्रेडर्स को सलाह दी जाती है कि वे अपने सौदों और निवेश योजनाओं को इस लॉन्ग वीकेंड को ध्यान में रखकर व्यवस्थित करें।

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