कोरबा
नगरीय निकाय एवं त्रिस्तरीय पंचायत उप निर्वाचन-2026:सम्पत्ति विरूपण निवारण के संबंध में आदेश जारी
कोरबा। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी ने छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार नगरीय निकाय एवं त्रिस्तरीय पंचायत उप निर्वाचन 2026 के दौरान राजनीतिक दलों एवं उनके अभ्यर्थियों द्वारा चुनाव प्रचार करने के लिए शासकीय व अशासकीय भवनों पर नारे लिखे जाने तथा विद्युत एवं टेलीफोन के खम्भों पर चुनाव प्रचार से सम्बन्धित झंडिया लगाये जाने के कारण शासकीय व अशासकीय सम्पत्ति का स्वरूप विकृत हो जाता है। संपत्ति विरूपण निवारण के संबंध में आदेश जारी किया है।
जारी आदेश अनुसार छत्तीसगढ़ सम्पत्ति विरूपण निवारण अधिनियम 1994 की धारा 03 में निहित प्रावधानानुसार कोई भी व्यक्ति जो सम्पत्ति के स्वामी की लिखित अनुज्ञा के बिना सार्वजनिक दृष्टि में आने वाली किसी सम्पत्ति को स्याही, खडिय़ा, रंग या किसी अन्य पदार्थ से लिख कर या चिन्हित कर के उसे विरूपित करेगा, वह जुर्माने से जो एक हजार रूपया तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा। इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय कोई भी अपराध संज्ञेय होगा। निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार सम्पत्ति विरूपण के संदर्भ में राज्य में प्रचलित विधि के प्रावधानों के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। छत्तीसगढ़ सम्पत्ति विरूपण निवारण अधिनियम 1994 के प्रावधानों का कठोरतापूर्वक अनुपालन सुनिश्चित करते हुए प्रभावी कार्रवाई की जाएगी। सम्पूर्ण चुनाव प्रक्रिया के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों अथवा चुनाव लडऩे वाले अभ्यर्थियों द्वारा शासकीय एवं अशासकीय भवनों की दीवालों पर किसी भी प्रकार के नारे लिख कर विकृत किया जाता है, तो उनके विरूद्ध छत्तीसगढ़ सम्पत्ति विरूपण निवारण अधिनियम 1994 के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। कोरबा जिला अंतर्गत जहां निर्वाचन संपन्न होना है, में पर्याप्त संख्या में टीम का गठन किया गया है। टीम सघन भ्रमण कर विरूपित संपत्ति को, सम्पत्ति विरूपण करने वाले के व्यय पर पूर्व स्वरूप में लाएगी तथा टीम द्वारा सम्पत्ति विरूपण करने वाले तत्वों के विरुद्ध अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। यदि किसी राजनीतिक दल या निर्वाचन लड़ने वाले अभ्यर्थी द्वारा किसी निजी सम्पत्ति को बिना उसके स्वामी की लिखित सहमति के विरूपित किया जाता है, तो निजी सम्पत्ति के स्वामी द्वारा सम्बन्धित थाने में सूचना दर्ज कराने के बाद गठित टीम निजी सम्पत्ति को विरूपित होने से बचाने की कार्रवाई की जाएगी एवं संबंधित थाना प्रभारी, प्रदत्त सूचना रिपोर्ट पर विधिवत जांच कर सक्षम न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया जायेगा। इसी प्रकार किसी धार्मिक स्थल का उपयोग किसी भी रूप में चुनाव प्रचार-प्रसार के लिए नहीं किया जायेगा। थाना प्रभारी द्वारा सम्पत्ति विरूपण से सम्बन्धित प्राप्त शिकायतों पर तत्काल एफआईआर दर्ज कर विवेचना प्रारंभ की जायेगी। सम्बन्धित टीम शिकायत या उन्हें प्राप्त सम्पत्ति विरूपण के प्रकरणों को पृथक पंजी में दर्ज करेगी एवं विरूपित संपत्ति की फोटोग्राफी/वीडियोग्राफी करायेगी।
कोरबा
मितानिनों का जनसैलाब उमड़ा, घंटाघर चौक से कलेक्ट्रेट तक गूंजा अधिकारों का स्वर
कोरबा। भारतीय जनता पार्टी छत्तीसगढ़ ने मोदी की गारंटी का नाम देकर वर्ष 2023 के चुनावी घोषणा-पत्र में मितानिनों से किए गए वादों को पूरा कराने की मांग को लेकर गुरुवार को कोरबा में मितानिनों का अभूतपूर्व जनसमूह सड़कों पर उतर आया। प्रातः 11 बजे प्रदेश स्वास्थ्य मितानिन संघ के आह्वान पर जिले भर से आईं हजारों मितानिनें घंटाघर चौक में एकत्रित हुईं और अपनी न्यायोचित मांगों के समर्थन में एक दिवसीय सांकेतिक धरना दिया।

धरना उपरांत मितानिनों ने अनुशासन और एकजुटता का अद्भुत परिचय देते हुए घंटाघर चौक से कलेक्ट्रेट तक विशाल रैली निकाली। कतारबद्ध होकर आगे बढ़ रही हजारों महिलाओं का यह शांतिपूर्ण कारवां कोरबा शहर के लिए एक ऐतिहासिक दृश्य बन गया। जहां तक नजर जाती, वहां केवल मितानिनों का जनसैलाब दिखाई दे रहा था। इस अभूतपूर्व उपस्थिति को देखकर नगरवासी भी आश्चर्यचकित रह गए और पूरे शहर में इस विशाल रैली की चर्चा होती रही।

रैली के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। इसके बावजूद मितानिनों ने पूर्ण संयम, अनुशासन और शांति का परिचय देते हुए लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन किया, जिससे पूरे कार्यक्रम का संचालन अत्यंत शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।
कलेक्ट्रेट पहुंचकर मितानिन प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन प्राप्त करते हुए कलेक्टर ने आश्वस्त किया कि मितानिनों की मांगों एवं ज्ञापन को शीघ्र ही मुख्यमंत्री तक पहुंचाया जाएगा, ताकि उनकी समस्याओं पर सकारात्मक विचार किया जा सके।

मितानिनों ने अपने ज्ञापन में वर्ष 2023 के चुनावी घोषणा-पत्र में किए गए वादों के अनुरूप राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत संविलियन, मानदेय में 50 प्रतिशत वृद्धि, ठेका प्रथा समाप्त करने तथा 24 वर्षों की सेवा के आधार पर वन-टाइम रिलैक्सेशन प्रदान करने की प्रमुख मांगें रखीं।

मितानिनों ने स्पष्ट किया कि उनका संघर्ष किसी टकराव का नहीं, बल्कि अपने अधिकारों, सम्मान और वर्षों की निस्वार्थ सेवा के उचित मूल्यांकन का संघर्ष है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि राज्य सरकार अपने वादों का सम्मान करते हुए शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेकर हजारों मितानिनों के साथ न्याय करेगी।


कोरबा
वेदांता ने एक दशक में सरकारी खजाने में करीब रु5 लाख करोड़ का योगदान दिया
मुंबई। विविध प्राकृतिक संसाधनों में देश की अग्रणी कंपनी वेदांता लिमिटेड (बीएसईः 500295 और एनएसईः वीईडीएल) ने कंपनी की 11वीं टैक्स ट्रांसपेरेंसी रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 26 में सरकारी खजाने में रु 62,722 करोड़ का योगदान दिया है। यह रिपोर्ट देश के निर्माण और पारदर्शी प्रशासन गवर्नेंस के लिए वेदांता की प्रतिबद्धता को और मजबूत बनाती है। यह योगदान कंपनी के संचालन से होने वाले कुल राजस्व का 36 फीसदी है, जो भारत के आर्थिक विकास में अहम भूमिका निभाता है।
यह पिछले साल की तुलना में योगदान में 13.3 फीसदी की बढ़ोतरी है, जिसके साथ पिछले दस सालों में सरकारी खजाने में वेदांता का कुल योगदान रु4,83,034 करोड़ हो गया है। कंपनी ने वित्तीय अनुशासन, राष्ट्र-निर्माण और विकसित भारत मिशन को समर्थन देने पर विशेष रूप से ध्यान दिया है। यह ग्रुप सरकारी खजाने में योगदान देने वाले भारत के टॉप 3 प्राइवेट सेक्टरों के सदनों में शामिल है।
सरकारी खजाने में यह योगदान वित्तीय वर्ष 26 में वेदांता के सबसे अच्छे फाइनेंशियल परफॉर्मेंस की वजह से हुआ। इस अवधि में कंपनी का राजस्व 15 फीसदी बढ़कर रु 1,74,075 करोड़ हो गया – जो कंपनी के इतिहास में सबसे ज़्यादा है – जबकि म्ठप्ज्क्। 29 फीसदी बढ़कर रु55,976 करोड़ पर पहुंच गया। इसी तरह कर के बाद मुनाफ़ा (पीएटी) 22 फीसदी बढ़कर रु25,096 करोड़ हो गया। कंपनी की बैलेंस शीट भी काफी मज़बूत हुई, शुद्ध ऋण म्ठप्ज्क्। के मुकाबले 1.22 गुना से बेहतर होकर 0.95गुना हो गया – जो 14 तिमाहियों में इसका सबसे अच्छा स्तर है।
वेदांता के अलग-अलग तरह के बिज़नेस पोर्टफोलियो – जिसमें जिंक-लेड-सिल्वर, एल्युमीनियम, कॉपर, आयरन ओर, स्टील, पावर, निकेल, क्रोम और ऑयल एंड गैस शामिल हैं – में मज़बूत ऑपरेशनल परफॉर्मेंस की वजह से कंपनी का फाइनेंशियल परफॉर्मेंस भी बहुत अच्छा रहा।
ज़िंक ने रु 19,053 करोड़ के साथ सबसे अधिक योगदान दिया, इसके बाद एल्युमीनियम (जिसे अब वेदांता एल्युमीनियम के तौर पर लिस्ट किया गया है) का योगदान रु 15,788 करोड़ और ऑयल एंड गैस (जिसे अब वेदांता ऑयल एंड गैस के तौर पर लिस्ट किया गया है) का योगदान रु 11,697 करोड रहा – यह महत्वपूर्ण खनिजों और ऊर्जा के क्षेत्र में वेदांता के पोर्टफोलियो के विस्तार और विविधता को दर्शाता है।
वेदांता लिमिटेड की टैक्स ट्रांसपेरेंसी रिपोर्ट के मुख्य बिंदु।
इस रिपोर्ट का 11वां संस्करण वित्त वर्ष 2025-26 के लिए वेदांता के टैक्स योगदान का विस्तृत ब्यौरा देता हैः
सरकारी रॉयल्टी और प्रॉफ़िट पेट्रोलियम (रु14,840 करोड़): इसमें राजस्थान, ओडिशा, गुजरात, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, गोवा, कर्नाटक और असम की राज्य सरकारों को बॉक्साइट, लेड-ज़िंक, सिल्वर, आयरन ओर, क्रूड ऑयल और नैचुरल गैस के लिए दी गई रॉयल्टी, साथ ही प्रोडक्शन शेयरिंग कॉन्ट्रैक्ट के तहत भारत सरकार को दिया गया प्रॉफ़िट पेट्रोलियम शामिल है।
इनकम और कैपिटल पर टैक्स (रु8,290 करोड़): इसमें सभी अधिकार क्षेत्रों में कानूनी रिटर्न में फ़ाइल किए गए कॉर्पोरेट इनकम टैक्स शामिल हैं।
अन्य टैक्स (रु 11,897 करोड़): इसमें एक्सपोर्ट और इम्पोर्ट पर रु5,980 करोड़ की ड्यूटी, रु2,503 करोड़ का ऑयल सेस/एनसीसीडी, रु 1,252 करोड़ की इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी और रु 1,663 करोड़ का इनएलिजिबल जीएसटी शामिल है।
इनडायरेक्ट टैक्स (रु21,777 करोड़): इसमें सभी बिज़नेस युनिट्स में माल और सर्विस की बिक्री से सीजीएसटी, एसजीएसटी और आईजीएसटी शामिल हैं।
विदहोल्डिंग टैक्स (रु3,188 करोड़): इसमें पेरोल टैक्स और वेंडर और कॉन्ट्रैक्टर पेमेंट पर सोर्स पर काटे गए टैक्स शामिल हैं।
भारत सरकार को कॉर्पोरेट डिविडेंड (रु1,180 करोड़): हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड में भारत सरकार की 27.92फीसदी हिस्सेदारी के ज़रिए पेमेंट किया गया।
कर में पारदर्शिता वेदांता के बड़े एनवायरनमेंटल, सोशल और गवर्नेंस (ईएसजी) एजेंडा का मुख्य हिस्सा है। लगातार 11 सालों से बरकरार अपने स्वैच्छिक एवं सक्रिय डिस्क्लोजर के ज़रिए कंपनी का उद्देश्य हितधारकों का भरोसा बढ़ाना और कॉर्पोरेट प्रशासन के सर्वोच्च मानक सुनिश्चित करना है। वेदांता के कर सिद्धानत बी-टीम रिस्पॉन्सिबल टैक्स प्रिंसिपल और एक्सट्रैक्टिव इंडस्ट्रीज ट्रांसपेरेंसी इनिशिएटिव के साथ करीब से जुड़े हुए हैं, जो ज़िम्मेदार कॉर्पोरेट नागरिकता के लिए इसकी प्रतिबद्धता को और मजबूत बनाते हैं।
वित्तीय वर्ष 26 की टैक्स ट्रांसपेरेंसी रिपोर्ट देखने के लिए विज़िट करेंः tax-transparency-report.pdf

कोरबा
संविधान हत्या दिवस पर भाजपा की संगोष्ठी, आपातकाल को बताया लोकतंत्र का सबसे काला अध्याय
आपातकाल ने कुचली थीं लोकतांत्रिक आवाजें : संविधान हत्या दिवस पर भाजपा की संगोष्ठी
कोरबा। भारतीय जनता पार्टी जिला कोरबा द्वारा देश के लोकतांत्रिक इतिहास के सबसे काले अध्याय माने जाने वाले आपातकाल के 51 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर “संविधान हत्या दिवस” के स्मरण में एक विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया। सीएसईबी स्थित सीनियर क्लब में आयोजित इस कार्यक्रम में वक्ताओं ने आपातकाल को संविधान, लोकतंत्र की आवाज़ और नागरिक स्वतंत्रता पर किया गया सबसे बड़ा प्रहार बताते हुए उस दौर के संघर्षों को याद किया। संगोष्ठी में मुख्य रूप से विद्या भारती के प्रांतीय अध्यक्ष जुड़ावन ठाकुर एवं भाजपा जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी उपस्थित रहे।

आपातकाल लोकतंत्र का काला अध्याय, नई पीढ़ी को बतानी होगी सच्चाई – जुड़ावन ठाकुर
जुड़ावन ठाकुर ने कहा कि 25 जून 1975 को लगाया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का ऐसा काला अध्याय है, जिसने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, मौलिक अधिकारों और लोकतांत्रिक संस्थाओं को गंभीर रूप से प्रभावित किया। उस समय लाखों लोगों की आवाज दबाने का प्रयास किया गया, और प्रेस पर सेंसरशिप लागू कर दी गई। जुड़ावन ठाकुर ने आगे कहां कि लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष और बलिदान के कारण ही देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था पुनः स्थापित हो सकी। आज आवश्यकता है कि नई पीढ़ी को आपातकाल के उस दौर की वास्तविकता से अवगत कराया जाए ताकि संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के प्रति समाज में जागरूकता बनी रहे।कार्यक्रम में लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले सेनानियों को श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए संविधान की मर्यादा और लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत बनाने का संकल्प भी लिया गया।

आपातकाल के दौरान लगभग 1 लाख लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया – गोपाल मोदी
भाजपा जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी ने कहा कि 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक लागू आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे विवादास्पद और काला अध्याय था। इस दौरान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया गया, और राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाया गया। उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान लगभग 1 लाख लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, जबकि हजारों राजनीतिक कार्यकर्ताओं, सामाजिक नेताओं और पत्रकारों को मीसा जैसे कानूनों के तहत हिरासत में रखा गया। गोपाल मोदी ने कहा कि यह दौर लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन का प्रतीक रहा, जिससे देशवासियों को लोकतंत्र की रक्षा के प्रति सदैव सजग रहने की सीख मिलती है।
इस अवसर पर सह संभाग प्रभारी डॉ. राजीव सिंह, जिला महामंत्री संजय शर्मा, एमआईसी सदस्य हितानंद अग्रवाल, वरिष्ठ नेता विकास अग्रवाल, योगेश जैन, रेणुका राठिया, नवीन अरोड़ा, कमला बरेठ, सतीश झा, नवीन मारकंडे, अर्जुन गुप्ता, योगेश मिश्रा, मनोज लहरे, मनीष मिश्रा, प्रीति स्वर्णकार, अजय चंद्रा, कुलसिंह कंवर, प्रकाश अग्रवाल, राजेश लहरे द्वारिका शर्मा, मोंटी पटेल, अविनाश दुबे सहित बड़ी संख्या में आमजन, प्रबुद्धजन, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, भाजपा पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
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