विदेश
US सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के अधिकांश देशों पर लगाए टैरिफ को किया रद्द : रिपोर्ट
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1 hour agoon
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Divya Akashवाशिंगठन, एजेंसी। अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump को बड़ा कानूनी झटका देते हुए Supreme Court of the United States ने फैसला सुनाया कि उन्होंने आपातकालीन कानून का गलत इस्तेमाल कर व्यापक टैरिफ (आयात शुल्क) लगाए थे।
इंटरनेशनल डेस्कः अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump को बड़ा कानूनी झटका देते हुए Supreme Court of the United States ने फैसला सुनाया कि उन्होंने आपातकालीन कानून का गलत इस्तेमाल कर व्यापक टैरिफ (आयात शुल्क) लगाए थे। कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से कहा कि ट्रंप ने जिस कानून के तहत टैरिफ लगाए, वह इस तरह के कदम की अनुमति नहीं देता।
किस कानून पर उठे सवाल?
ट्रंप ने 1977 के International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) का सहारा लेकर टैरिफ लगाए थे। यह कानून राष्ट्रपति को “असामान्य और असाधारण खतरे” की स्थिति में आयात-निर्यात को नियंत्रित करने की शक्ति देता है। लेकिन इसमें टैरिफ लगाने का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस कानून के जरिए इतनी बड़ी और व्यापक दरों पर टैरिफ लगाना राष्ट्रपति के अधिकार क्षेत्र से बाहर है।
कौन-कौन से टैरिफ रद्द हुए?
फैसले के बाद दो तरह के टैरिफ पर असर पड़ा है:
देश-विशेष या “रिसिप्रोकल” टैरिफ
- चीन पर 34% तक
- बाकी दुनिया पर 10% बेसलाइन
25% टैरिफ (फेंटेनिल मुद्दे पर)
ट्रंप प्रशासन ने कनाडा, चीन और मेक्सिको से आने वाले कुछ सामान पर 25% टैरिफ लगाया था। सरकार का तर्क था कि ये देश फेंटेनिल नामक खतरनाक ड्रग की तस्करी रोकने में नाकाम रहे हैं। इन दोनों श्रेणियों के टैरिफ को कोर्ट ने अवैध बताया।
कौन से टैरिफ बरकरार हैं?
यह फैसला ट्रंप द्वारा लगाए गए सभी टैरिफ पर लागू नहीं होता। स्टील और एल्युमिनियम पर लगाए गए टैरिफ, जो दूसरे कानूनों के तहत लगाए गए थे, फिलहाल जारी रहेंगे।
कोर्ट में 6-3 का फैसला
सुप्रीम कोर्ट में 6 जजों ने बहुमत से ट्रंप के कदम को असंवैधानिक माना, जबकि 3 जज असहमत रहे। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में 6-3 का कंजरवेटिव (रूढ़िवादी) बहुमत है। जनवरी में ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के बाद यह प्रशासन के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक दुर्लभ झटका माना जा रहा है।
संविधान क्या कहता है?
अमेरिकी संविधान के अनुसार, टैरिफ तय करने की शक्ति कांग्रेस के पास है। हालांकि राष्ट्रपति को कुछ आपातकालीन स्थितियों में सीमित अधिकार दिए गए हैं, लेकिन कोर्ट ने माना कि IEEPA के तहत इतने व्यापक टैरिफ लगाना कांग्रेस की शक्ति में दखल है।

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खेल
भारत-BCCI से रिश्ते सुधारना चाहता है बांग्लादेश:नए स्पोर्ट्स मिनिस्टर बोले- पड़ोसी देशों के साथ दोस्ताना रिश्ते बनाने की मंशा
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1 day agoon
February 19, 2026By
Divya Akashमुंबई/ढाका, एजेंसी। बांग्लादेश के नए स्पोर्ट्स मिनिस्टर अमीनुल हक BCCI और भारत के साथ रिश्ते सुधारना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वे इस मुद्दे को जल्दी सुलझाना चाहते हैं। उन्होंने बांग्लादेश के मौजूदा टी-20 वर्ल्ड कप में हिस्सा न लेने का जिक्र किया।
हक ने कहा- शपथ लेने के बाद मैं पार्लियामेंट बिल्डिंग में भारत के डिप्टी हाई कमिश्नर से मिला। मैंने उनसे टी-20 वर्ल्ड कप पर बात की। यह एक अच्छी बातचीत थी। मैंने उनसे कहा कि हम इस मुद्दे को बातचीत से जल्दी सुलझाना चाहते हैं क्योंकि हम अपने सभी पड़ोसी देशों के साथ दोस्ताना रिश्ते बनाए रखना चाहते हैं।
इस टी-20 वर्ल्ड कप में बांग्लादेश को अपने मुकाबले मुंबई और कोलकाता में खेलने थे। हालांकि, सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए टीम ने भारत दौरे पर आने से इनकार कर दिया। इसके बाद ICC ने बांग्लादेश की जगह स्कॉटलैंड को टूर्नामेंट में शामिल करने का फैसला किया था।
पीएम मोदी ने तारिक रहमान को जीत की बधाई दी थी
इससे पहले 13 फरवरी को पीएम नरेंद्र मोदी और रहमान के बीच पहली फोन बातचीत हुई थी। मोदी ने तारिक रहमान को जीत की बधाई दी थी। उन्होंने कहा कि वे दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत करने और साझा विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए साथ काम करने को उत्सुक हैं।
BNP ने एक्स पर एक पोस्ट में मोदी के बधाई संदेश के लिए धन्यवाद दिया। पार्टी ने कहा, ‘हम भारत के साथ रचनात्मक तरीके से जुड़ने को तैयार हैं। हमारा रिश्ता आपसी सम्मान, एक-दूसरे की चिंताओं के प्रति संवेदनशीलता और क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि की साझा प्रतिबद्धता से आगे बढ़ेगा।’
बांग्लादेश ने भारत में खेलने से इनकार क्यों किया, जानिए 2 वजह
1. बांग्लादेश में हिंदुओं की लगातार हो रही हत्याओं के विरोध में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने बांग्लादेशी पेसर मुस्तफिजुर रहमान को IPL से बाहर करवा दिया। BCB ने इसका विरोध किया।
2. मुस्तफिजुर को बाहर किए जाने को बांग्लादेश की राजनीतिक पार्टियों ने मुद्दा बना दिया। फिर यूनुस सरकार ने अपने देश में IPL प्रसारण पर बैन लगा दिया। इसके बाद क्रिकेट बोर्ड ने भारत में वर्ल्ड कप न खेलने की मांग की, जिसे ICC ने ठुकरा दिया।
भारत में खिलाड़ियों के सुरक्षा की चिंता- नजरुल बांग्लादेश सरकार के पूर्व खेल मंत्री आसिफ नजरुल ने नेशनल टीम को भारत भेजने से मना किया था। उन्होंने कहा था, ‘हम वर्ल्ड कप खेलना चाहते हैं, लेकिन भारत में हमारे खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ की सुरक्षा को लेकर चिंता है।
मुस्तफिजुर रहमान को IPL से बाहर करने पर विवाद
बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्या के कारण BCCI ने मुस्तफिजुर रहमान को IPL में खेलने की अनुमति नहीं दी। उन्हें KKR ने 3 जनवरी को BCCI के कहने पर टीम से बाहर कर दिया था।
इससे बौखलाई बांग्लादेश सरकार ने अपने यहां IPL मैचों के प्रसारण पर रोक लगा दी। इसके बाद खिलाड़ियों की सुरक्षा का हवाला देकर 7 फरवरी से होने वाले टी-20 वर्ल्ड कप में वेन्यू बदलने की मांग भी की।
KKR ने मुस्तफिजुर को ₹9.2 करोड़ में खरीदा था
16 दिसंबर को IPL मिनी ऑक्शन में कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) ने बांग्लादेशी गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को 9.20 करोड़ रुपए में खरीदा था। इसके बाद बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्या के कारण भारत में मुस्तफिजुर का विरोध होने लगा। अब तक वहां 7 हिंदुओं की हत्या कर दी गई है। बाद में BCCI ने मुस्तफिजुर को IPL खेलने की अनुमति नहीं दी और 3 जनवरी को KKR ने उन्हें रिलीज कर दिया।

विदेश
अमेरिकी सांसद बोले- कुत्तों-मुसलमानों में से एक को चुनना आसान:फिलिस्तीनी एक्टिविस्ट ने लिखा था- न्यूयॉर्क इस्लाम की ओर बढ़ रहा, कुत्ते घर में नहीं रखें
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2 days agoon
February 18, 2026By
Divya Akashवॉशिंगटन डीसी,एजेंसी। अमेरिकी सांसद रैंडी फाइन के एक सोशल मीडिया पोस्ट से बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। उन्होंने मंगलवार को X पर लिखा कि अगर कुत्तों और मुसलमानों में से एक को चुनना पड़े तो यह मुश्किल फैसला नहीं है।
दरअसल, रैंडी फाइन ने यह टिप्पणी न्यूयॉर्क में एक फिलिस्तीनी-अमेरिकी एक्टिविस्ट नरदीन किसवानी की पोस्ट के जवाब में की थी। किसवानी ने लिखा था कि कुत्ते अपवित्र हैं। ऐसे समय में जब न्यूयॉर्क इस्लाम की ओर बढ़ रहा है, कुत्तों को घर के अंदर नहीं रखना चाहिए। इन्हें बैन करना चाहिए।
इस पर फाइन ने कहा कि दुनिया में 57 ऐसे देश हैं, जहां शरिया कानून लागू है। अगर आप ऐसा चाहते हैं तो वहीं चले जाइए। अमेरिका 58वां मुस्लिम देश नहीं बनेगा।
बाद में किसवानी ने कहा कि वह बस मजाक कर रही थीं। यह न्यूयॉर्क में सार्वजनिक जगहों पर कुत्तों की गंदगी को लेकर चल रही बहस से जुड़ा था। ऐसा उन लोगों के लिए कहा गया था, जो राजनीति में मुस्लिमों के बढ़ते प्रभाव को खतरा मानते हैं।
फाइन पर मुसलमानों को अमानवीय दिखाने का आरोप
किसवानी ने होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी क्रिस्टी नोएम के पुराने बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने अपने फार्म पर एक कुत्ते को गोली मारने की बात कही थी।
किसवानी ने लिखा, ‘क्रिस्टी नोएम ने अपने ही कुत्ते को गोली मारने की बात कही और ज्यादातर लोगों ने ध्यान नहीं दिया। न्यूयॉर्क में एक मुस्लिम कह दे कि शहर पालतू जानवरों के लिए सही जगह नहीं है तो उसे मौत की धमकियां मिलने लगती हैं।’
किसवानी ने फाइन पर फिलिस्तीनियों और मुसलमानों को अमानवीय दिखाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधियों की ओर से आ रही मुस्लिम विरोधी भाषा पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं होती।
फाइन के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज
रैंडी फाइन के इस बयान पर वॉशिंगटन में भारी विरोध हुआ है। डेमोक्रेट्स, सिविल राइट्स ग्रुप्स और कई नेताओं ने इसे इस्लामोफोबिया और घृणा फैलाने वाला बताया।
अमेरिकन-इस्लामिक रिलेशंस काउंसिल (CAIR) ने फाइन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की और कहा कि उनके इस्तीफे की मांग पहले से चल रही है।
यास्मीन अंसारी ने हाउस स्पीकर से तुरंत निंदा करने को कहा। कैलिफोर्निया के गवर्नर गेविन न्यूसम ने फाइन को नस्लवादी कहकर इस्तीफा देने को कहा। ब्रिटिश पत्रकार पीयर्स मॉर्गन ने भी उन्हें कड़ी फटकार लगाई।

फाइन बोले- कुत्ते हमारे परिवार के सदस्य, इन्हें नहीं छोड़ेंगे
फाइन ने विरोध पर पलटवार किया और कहा कि असली समस्या किसवानी का बयान है, जो लिखित रूप में था। फाइन ने न्यूजमैक्स को दिए इंटरव्यू में कहा कि उनका पोस्ट किसवानी के बयान के जवाब में था, जो शरिया लॉ (इस्लामी कानून) थोपने की कोशिश है।
उन्होंने कहा, ‘अमेरिका में कुत्ते परिवार के सदस्य हैं, और हम यूरोप की तरह शर्मिंदा होकर हार नहीं मानेंगे।’ उन्होंने कुत्तों की तस्वीरें शेयर कीं, जिन पर ‘डोंट ट्रेड ऑन मी’ (ऐतिहासिक गैड्सडेन फ्लैग का स्लोगन) लिखा था।
इस पोस्ट को 42 मिलियन से ज्यादा व्यूज मिले, हजारों लाइक्स, रीपोस्ट्स और कमेंट्स। फाइन ने क्रिटिक्स को जवाब दिया कि किसवानी का बयान लिखित था और लाखों ने देखा। पोस्ट के तुरंत बाद वॉशिंगटन और पूरे अमेरिका में हंगामा मच गया। इसे इस्लामोफोबिया, कट्टरता और अमानवीयकरण कहा गया।
फाइन पहले भी गाजा से जुड़े बयानों पर आलोचना झेल चुके हैं। 2025 में उन्होंने गाजा पर कहा था कि गाजावासियों को भूखा मरने दो जब तक इजराइली बंधक रिहा न हों। उन्होंने गाजा का हाल हिरोशिमा और नागासाकी जैसा करने की बात भी की थी।

डोंट ट्रेड ऑन मी ड्सडेन फ्लैग का प्रसिद्ध स्लोगन है। रैंडी फाइन ने अपने पोस्ट में कुत्तों की तस्वीरों पर पीले बैकग्राउंड के साथ यह स्लोगन लिखवाकर शेयर किया था। इसका मतलब है मुझे दबाने की कोशिश मत करो। यह एक चेतावनी है। अगर तुम मुझे दबाओगे या हमला करोगे, तो मैं जवाब दूंगा।
फाइन बोले- यूरोप की तरह कमजोरी नहीं दिखाएंगे
फाइन का कहना है कि यूरोप के लोग मुसलमानों के सामने शर्मिंदा होकर या दबाव में आकर अपनी संस्कृति, परंपराओं और आजादी को खो चुके हैं। वे नहीं चाहते कि अमेरिका में भी ऐसा हो। उनका कहना है कि अमेरिका, यूरोप जैसी कमजोरी नहीं दिखाएंगे।
फाइन और उनके जैसे कई राइट-विंग ट्रम्प समर्थक अक्सर यह दावा करते हैं कि यूरोप में इस्लामिक टेकओवर हो रहा है। उनके अनुसार बड़े पैमाने पर मुस्लिम इमिग्रेशन से नो-गो जोन्स बन गए हैं, जहां स्थानीय कानून कमजोर पड़ गए हैं।
यूरोपीय सरकारें पॉलिटिकल करेक्टनेस या मल्टीकल्चरलिज्म के नाम पर मुसलमानों की मांगों के आगे झुक रही हैं, जैसे कुत्तों पर प्रतिबंध या महिलाओं के अधिकारों में बदलाव। इसका नतीजा यह हो रहा है की यूरोप अपनी मूल संस्कृति और वैल्यूज खो रहा है और लोग शर्मिंदा होकर विरोध नहीं कर पा रहे।
फाइन ने खुद कई बार कहा है कि शरिया अमेरिका में नहीं आएगी। अमेरिका इस्लामिक देश नहीं बनेगा। उन्होंने नो शरिया जैसा बिल भी पेश किया है।
इजराइल के कट्टर समर्थक माने जाते हैं फाइन

रैंडी फाइन एक अमेरिकी राजनेता हैं, जो रिपब्लिकन पार्टी से जुड़े हैं। उनका जन्म 20 अप्रैल 1974 को एरिजोना के ट्यूसन शहर में हुआ था। उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से 1996 में बीए डिग्री और 1998 में एमबीए पूरा किया।
पेशे से वे बिजनेस एक्जीक्यूटिव हैं और पहले जुआ इंडस्ट्री में काम कर चुके हैं। राजनीति में उन्होंने फ्लोरिडा स्टेट हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में 2016 से 2024 तक सेवा की, फिर फ्लोरिडा संसद में 2024-2025 तक रहे।
अप्रैल 2025 में एक स्पेशल इलेक्शन में वे फ्लोरिडा के 6वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से यूएस हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के लिए चुने गए। वे इजराइल के कट्टर समर्थक हैं और अक्सर फिलिस्तीन-इजरायल संघर्ष पर विवादास्पद बयान देते हैं।
न्यूयॉर्क मेयर पद पर जोहरान ममदानी मुस्लिम समुदाय से हैं

न्यूयॉर्क इस्लाम की ओर बढ़ रहा है, नरदीन किसवानी के इस बयान को न्यूयॉर्क शहर के मेयर जोहरान ममदानी से जोड़ कर देखा जा रहा है। दरअसल, ममदानी इस पद पर आने वाले पहले मुस्लिम हैं। हालांकि, किसवानी ने ममदानी का जिक्र नहीं किया।
इन्होंने 2025 में मेयर चुनाव जीतकर इतिहास रचा था। वे शहर के पहले मुस्लिम और 100 साल से अधिक समय में सबसे युवा गवर्नर बने। उनका कार्यकाल 1 जनवरी 2026 से शुरू हुआ, जिसमें वे किराए पर रोक, निःशुल्क बस सेवा, किफायती आवास और शहर को अधिक सस्ता बनाने पर जोर दे रहे हैं।
जोहरान ममदानी एक प्रमुख अमेरिकी राजनीतिज्ञ हैं। उनका जन्म 18 अक्टूबर 1991 को युगांडा की राजधानी कंपाला में हुआ था। वे प्रसिद्ध भारतीय-अमेरिकी फिल्म निर्देशक मीरा नायर के बेटे हैं।
सात साल की उम्र में वे न्यूयॉर्क शहर आए थे और यहीं बड़े हुए। वे डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट्स ऑफ अमेरिका के सदस्य हैं और प्रगतिशील विचारधारा के समर्थक हैं।

विदेश
तारिक रहमान बांग्लादेश के प्रधानमंत्री बने:संसद भवन में शपथ हुई, 1 हिंदू समेत 49 मंत्री बने, इनमें 25 कैबिनेट, 24 राज्य मंत्री
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3 days agoon
February 17, 2026By
Divya Akashढाका,एजेंसी। बांग्लादेश में BNP अध्यक्ष तारिक रहमान नए प्रधानमंत्री बन गए हैं। राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने संसद भवन में तारिक को पीएम पद की शपथ दिलाई। इसके साथ ही 18 महीने से चल रही अंतरिम सरकार का कार्यकाल खत्म हो गया।
तारिक रहमान पहली बार प्रधानमंत्री बने हैं। इससे पहले आज दोपहर में BNP के सांसदों ने उन्हें संसदीय दल का नेता चुना था। वह पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया और पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान के बेटे हैं। 17 साल तक लंदन में रहने के बाद वह दो महीने पहले ही बांग्लादेश लौटे थे।
रहमान के अलावा 25 कैबिनेट मंत्रियों और 24 राज्य मंत्रियों को भी पद की शपथ दिलाई है। इनमें एक हिंदू मंत्री निताई रॉय चौधरी भी शामिल है। वह कैबिनेट मंत्री बने। 25 कैबिनेट मंत्रियों में से 17 नए चेहरे हैं। सभी 24 राज्य मंत्री नए हैं।
पिछले गुरुवार को हुए आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने 299 में से 209 सीटें जीतकर बहुमत के लिए जरूरी 150 के आंकड़े को पार कर लिया था। इसके अलावा 3 सीटों पर उसकी सहयोगी पार्टियों ने जीत हासिल की।

राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने तारिक रहमान को प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ दिलाई। बाद में दोनों ने हाथ मिलाया।

तारिक रहमान ने प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद हस्ताक्षर किए।

निताई रॉय चौधरी 30,878 वोटों से चुनाव जीतें।

राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने मंत्रिमंडल के सदस्यों को शपथ दिलाई।

शपथ ग्रहण समारोह देखने के लिए हजारों लोग संसद भवन के पास पहुंचे।
संविधान बदलाव को लेकर सियासी टकराव तेज
इस बीच संविधान में बदलाव को लेकर सियासी टकराव तेज हो गया है। दरअसल, 12 फरवरी को संसद चुनाव के साथ ‘जुलाई चार्टर’ पर जनमत संग्रह भी हुआ था। इसमें 62% लोगों ने ‘हां’ में वोट दिया। जुलाई चार्टर के मुताबिक नई संसद 180 दिनों के लिए संविधान सभा की तरह काम करेगी। इस अवधि के दौरान संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं में बदलाव किए जाते।
जुलाई चार्टर का मकसद देश में ताकत का एकाधिकार खत्म करना और संतुलन बनाना है। इससे प्रधानमंत्री की ताकत घट जाती और राष्ट्रपति को अधिकार दिए जाते। BNP ने जुलाई चार्टर पर हस्ताक्षर तो किए थे, लेकिन उसके नेता कई प्रावधानों पर आपत्ति जता रहे हैं। पार्टी का कहना है कि चार्टर तैयार करते समय उनसे सलाह नहीं ली गई थी।
BNP बोली- संविधान में ऐसी किसी परिषद का प्रावधान नहीं
BNP के स्टैंडिंग कमिटी सदस्य और सांसद सलाहुद्दीन अहमद ने बताया कि पार्टी के कोई भी सांसद इस परिषद के सदस्य के रूप में शपथ नहीं लेंगे।
वर्तमान संविधान में ऐसी किसी परिषद का कोई प्रावधान नहीं है और न ही कोई अलग शपथ का फॉर्मेट मौजूद है। उनका कहना है कि संसद सदस्य केवल संसद के लिए चुने गए हैं, संवैधानिक सुधार परिषद के लिए नहीं।
इस परिषद को वैध बनाने के लिए पहले संविधान में संशोधन करके इसे शामिल करना होगा, फिर संसद में इसे अपनाना होगा और उसके बाद ही शपथ का कोई कानूनी आधार बनेगा। यह परिषद जुलाई चार्टर के तहत संवैधानिक सुधारों को लागू करने के लिए बनाई गई है।
योजना थी कि नए संसद सदस्य के साथ-साथ इस परिषद के सदस्य भी बनें और दोनों के लिए शपथ लें, लेकिन BNP ने इसे असंवैधानिक बताते हुए केवल संसद सदस्य की शपथ ली है।
जुलाई चार्टर से कोई नेता अधिकतम 10 साल ही पीएम रह सकेगा
जुलाई चार्टर के तहत PM के लिए जीवनभर कुल 10 साल (या अधिकतम दो टर्म) की सख्त टर्म लिमिट लगाई गई है, ताकि कोई लंबे समय तक सत्ता में न रह सके।
PM पार्टी चीफ के पद के साथ नहीं रह सकता, इमरजेंसी घोषणा के लिए कैबिनेट और विपक्षी लीडर की लिखित सहमति जरूरी होगी। प्रेसिडेंट की भूमिका मजबूत होगी, जैसे कई स्वतंत्र संस्थाओं के प्रमुखों की नियुक्ति में प्रेसिडेंट को ज्यादा स्वतंत्र अधिकार मिलेंगे, जो पहले PM के प्रभाव में थे।
बाइकैमरल संसद (ऊपरी सदन) बनने से PM-केंद्रित निचले सदन के फैसलों पर कंट्रोल लगेगा और कई संस्थाओं के लिए अलग सेलेक्शन कमिटी बनेंगी, जिससे PM का एकतरफा नियंत्रण कम होगा।
नेशनल पार्लियामेंट में नवनिर्वाचित सांसदों ने शपथ ली
बांग्लादेश की 13वीं नेशनल पार्लियामेंट के नवनिर्वाचित सदस्यों ने मंगलवार को नेशनल पार्लियामेंट के साउथ प्लाजा में शपथ ली। सुबह करीब 10:42 बजे (स्थानीय समयानुसार) मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिर उद्दीन ने सांसदों को शपथ दिलाई।
बांग्लादेशी मीडिया प्रथोम ओलो के मुताबिक, यह शपथ ग्रहण समारोह कड़ी सुरक्षा के बीच आयोजित हुआ, जिसमें 1,000 से ज्यादा स्थानीय और विदेशी मेहमान शामिल हुए। शपथ ग्रहण समारोह से पहले कुरान पढ़ी गई।
मुख्य समारोह शाम 4 बजे शुरू होगा। राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन निर्वाचित प्रधानमंत्री तारिक रहमान और उनके शुरुआती मंत्रिमंडल को पद की शपथ दिलाएंगे।
शपथ ग्रहण समारोह के लिए 13 देशों को आधिकारिक न्योता भेजा गया है, जिनमें भारत, चीन, पाकिस्तान जैसे बड़े नाम शामिल हैं। भारत की ओर से लोकसभा स्पीकर ओम बिरला बांग्लादेश पहुंचे हैं। उनके साथ विदेश सचिव विक्रम मिश्री भी शामिल होंगे।

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला आज तारिक रहमान के शपथ समारोह में शामिल होने के लिए बांग्लादेश पहुंचे हैं।
कई देशों और क्षेत्रीय संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए
| व्यक्ति | देश/संगठन |
| ओम बिरला | लोकसभा स्पीकर, भारत |
| शेरिंग तोबगे | भूटान के प्रधानमंत्री |
| अहसान इकबाल | प्लानिंग मिनिस्टर, पाकिस्तान |
| बाला नंदा शर्मा | विदेश मंत्री, नेपाल |
| अब्दुल्ला खलील | विदेश मंत्री, मालदीव |
| नलिंदा जयतिस्सा | स्वास्थ्य मंत्री, श्रीलंका |
| सीमा मल्होत्रा | यूके इंडो-पैसिफिक अंडर सेक्रेट्ररी |
मंत्रियों के चयन का प्रोसेस जानिए
पार्टी सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट की अंतिम संरचना का फैसला BNP की स्थायी समिति और अध्यक्ष तारिक रहमान करेंगे। प्रधानमंत्री के रूप में वे अंतिम सूची में कभी भी बदलाव कर सकते हैं।
आज सांसदों के शपथ लेने के बाद सत्तारूढ़ दल और विपक्ष अलग-अलग बैठक कर अपने संसदीय नेता का चुनाव करेंगे। बहुमत दल का नेता इसके बाद बंगभवन जाकर राष्ट्रपति मोहम्मद शाहाबुद्दीन से मुलाकात करेगा।
राष्ट्रपति औपचारिक रूप से उसे सरकार बनाने का निमंत्रण देंगे। इसके बाद प्रधानमंत्री पद के दावेदार मंत्रियों, राज्य मंत्रियों और उपमंत्रियों की सूची राष्ट्रपति को सौंपेंगे।
राष्ट्रपति सूची कैबिनेट डिवीजन को भेजेंगे, जो शपथ समारोह की तैयारी पूरी करेगा। कैबिनेट सचिव नामित मंत्रियों को व्यक्तिगत रूप से फोन कर शपथ समारोह में शामिल होने का निमंत्रण देंगे और उनके घरों पर आधिकारिक वाहन भेजे जाएंगे।
तारिक रहमान ने दो जीती सीटों में से एक छोड़ा
BNP के चेयरमैन तारिक रहमान ने ढाका-17 सीट को अपने पास रखने और बोगरा-6 सीट को खाली करने का फैसला किया है। 13वीं संसदीय चुनाव में तारिक रहमान ने दोनों सीटों से भारी बहुमत से जीत हासिल की थी।
ढाका-17 से उन्होंने लगभग 72,699 वोट प्राप्त किए, जबकि बोगरा-6 से उन्होंने 216,284 वोट हासिल कर जमात-ए-इस्लामी के उम्मीदवार को बड़े अंतर से हराया था।
अब तारिक रहमान ने बांग्लादेश निर्वाचन आयोग (ईसी) को एक लिखित पत्र भेजकर बोगरा-6 सीट छोड़ने की औपचारिक घोषणा की है। ईसी के वरिष्ठ सचिव अख्तर अहमद ने इसकी पुष्टि की है।
बांग्लादेश के नियमों (आरपीओ) के अनुसार, जब कोई सांसद दो सीटों से जीतता है और एक सीट छोड़ता है, तो उस खाली सीट पर उपचुनाव कराना होता है। इसलिए बोगरा-6 सीट पर अब उपचुनाव होगा, जिसे ईसी को 90 दिनों के अंदर आयोजित करना होगा।


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