मुंबई, एजेंसी। कई सप्ताह की कमजोरी के बाद इस हफ्ते वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों में फिर तेजी देखने को मिली है। मई के बाद पहली बार सोने ने साप्ताहिक आधार पर मजबूत बढ़त दर्ज की है। अंततरराष्ट्रीय बाजार में इस हफ्ते गोल्ड 2.2 फीसदी की तेजी के साथ 4200 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गया। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को भी सोना और चांदी दोनों में तेजी बनी रही।
इन वजहों से आई गोल्ड में तेजी
गोल्ड़ की कीमतों में तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीदें घटी है। जून के रोजगार आंकड़ों के बाद यह संभावना कमजोर हुई है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व निकट भविष्य में ब्याज दरों में बढ़ोतरी करेगा। इसके अलावा डॉलर इंडेक्स में आई कमजोरी और केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की बढ़ती खरीदारी ने भी कीमतों को सहारा दिया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में 3 जुलाई को स्पॉट गोल्ड लगभग 4,176.94 डॉलर प्रति औंस और चांदी 62.42 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर पहुंच गई। वहीं, भारत के मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर गोल्ड फ्यूचर्स 1.10 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1,47,365 रुपए प्रति 10 ग्राम और सिल्वर फ्यूचर्स 2.11 प्रतिशत चढ़कर 2,34,081 रुपए प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ।
जेपी मॉर्गन ने दिया 4500 डॉलर का टारगेट
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां मौजूदा रुख पर बनी रहती हैं तो सोने की कीमतों में आगे भी मजबूती देखने को मिल सकती है। अमेरिकी निवेश बैंक जेपी मॉर्गन ने चौथी तिमाही में सोने के 4,500 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचने का अनुमान जताया है। बैंक का मानना है कि केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी और निवेशकों की सुरक्षित निवेश की मांग लंबी अवधि में सोने को समर्थन देती रहेगी।
विश्लेषकों का यह भी कहना है कि आने वाले समय में वैश्विक ब्याज दरों, डॉलर की चाल और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी सोने की कीमतों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।
बलौदाबाजार, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार के रहने वाले योगेश साहू (23) ने कौन बनेगा करोड़पति (KBC) में 50 लाख रुपए जीते हैं। उन्होंने 1 करोड़ रुपए के सवाल का जवाब देने के बजाय गेम क्विट कर दिया। योगेश IIT बॉम्बे में टॉपर भी रह चुके हैं। उन्होंने IIT में पहले ही प्रयास में एडमिशन लिया था।
ग्राम टेहका के रहने वाले योगेश ने कैंपस प्लेसमेंट में मिली 1.5 लाख रुपए महीने की नौकरी छोड़ दी, क्योंकि वह IAS अधिकारी बनने का अपना सपना पूरा करना चाहते हैं। पिता गयाराम साहू महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल रमेश बैस के ड्राइवर हैं।
योगेश ने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। पिता ने बताया कि योगेश ने UPSC सिविल सेवा की प्रारंभिक परीक्षा भी पहले ही प्रयास में पास की है। वह फिलहाल मुख्य परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में योगेश मोबाइल का इस्तेमाल नहीं करते और सोशल मीडिया से भी दूर रहते हैं।
KBC के सेट पर योगेश ने अमिताभ बच्चन से गले लगकर मुलाकात की और सेल्फी ली। (फोटो क्रेडिट- सोनी टीवी)
योगेश के माता-पिता की तस्वीर। पिता गयाराम साहू महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल रमेश बैस के ड्राइवर हैं।
योगेश ने शुरुआती पढ़ाई बलौदाबाजार के जेसीज कॉन्वेंट और मयूर शिशु मंदिर से की। इसके बाद वे हाई एजुकेशन के लिए बिलासपुर गए। यहां रोहन चावला ने अपने कोचिंग सेंटर में उन्हें 11वीं और 12वीं की मुफ्त पढ़ाई कराई।
तत्कालीन कलेक्टर कार्तिकेय गोयल ने भी उनकी पढ़ाई में मदद की। आईआईटी बॉम्बे में एडमिशन के लिए मुख्यमंत्री और कलेक्टर की ओर से उन्हें आर्थिक सहायता भी मिली थी। इसके बाद उन्होंने कैंपस प्लेसमेंट में मिली 1.5 लाख रुपए महीने की नौकरी छोड़ दी।
50 लाख के सवाल ने बढ़ाई मुश्किल
अमिताभ बच्चन के शो ‘कौन बनेगा करोड़पति 18’ के लेटेस्ट एपिसोड में योगेश साहू हॉट सीट पर पहुंचे। 50 लाख रुपए के सवाल में उनसे तस्वीर में दिए गए सवालिया निशान की जगह सही शहर का नाम बताने को कहा गया।
टेबल में शहरों के नाम और उनके सामने साल दिए गए थे। इसमें लिखा था- कोलकाता-1913, ?-1930, स्कोप्जे-1979, शांतिनिकेतन-1998 और विदिशा-2014। इसके चार विकल्प थे-त्रिशूर, मैसूर, अल्मोड़ा और तिरुचिरापल्ली।
आखिरी लाइफलाइन का लिया सहारा
इस सवाल पर योगेश ने अपनी आखिरी लाइफलाइन ‘संकेत सूचक’ का इस्तेमाल किया। उन्हें हिंट मिला कि सही जवाब तमिलनाडु में स्थित एक शहर है। हिंट मिलने के बाद योगेश समझ गए कि दिए गए साल नोबेल पुरस्कार जीतने के साल हैं और शहर संबंधित नोबेल विजेताओं के जन्मस्थान हैं।
तिरुचिरापल्ली चुना सही जवाब
इसके बाद योगेश ने सही जवाब तिरुचिरापल्ली चुना। यह सीवी रमन का जन्मस्थान है। उनके जवाब को सही बताया गया और उन्होंने 50 लाख रुपए जीत लिए। इसके बाद योगेश के सामने 1 करोड़ रुपए का सवाल आया। हालांकि, इस पड़ाव पर उन्होंने कोई रिस्क नहीं लिया और 50 लाख रुपये लेकर गेम क्विट कर दिया।
मुंबई से लौटने के बाद भाटापारा रेलवे स्टेशन पर योगेश का स्वागत किया गया।
रेलवे स्टेशन पर हुआ स्वागत
वहीं, मुंबई से लौटने के बाद भाटापारा रेलवे स्टेशन पर सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने योगेश का जोरदार स्वागत किया। उनकी सफलता पर परिवार, गांव और क्षेत्र के लोगों ने खुशी जताई।
अयोध्या, एजेंसी। अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट से इस्तीफे के बाद चंपत राय ने गुरुवार को 9 पन्नों का दूसरा लेटर जारी किया। इसमें उन्होंने मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष और पूर्व IAS अधिकारी नृपेंद्र मिश्र की भूमिका को लेकर कई दावे किए हैं।
चंपत राय ने कहा, ‘राम मंदिर निर्माण के लिए बने ट्रस्ट में 15 ट्रस्टी थे और नृपेंद्र मिश्र को निर्माण समिति का अध्यक्ष बनाया गया था। मिश्र के सुझाव पर लार्सन एंड टूब्रो (L&T) को मंदिर निर्माण की जिम्मेदारी दी गई। भवनों के डिजाइन और निर्माण से जुड़े काम के लिए नोएडा की डिजाइन एसोसिएट फर्म का चयन भी किया।
चंपत राय ने कहा कि नृपेंद्र मिश्र ने निर्माण समिति में अपनी पसंद के लोगों को शामिल किया। इनमें से कुछ लोग छह साल के दौरान केवल एक-दो बार ही अयोध्या आए। पूर्व NBCC चेयरमैन अनूप मित्तल लगातार नृपेंद्र मिश्र के साथ निर्माण समिति की बैठकों में शामिल होते थे।
चंपत राय ने चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद 26 जून को महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया था। 6 जुलाई को ट्रस्ट की बैठक में इस्तीफा मंजूर किया गया था। उसी दिन चंपत राय ने एक लेटर जारी कर ट्रस्टी अनिल मिश्र पर गंभीर आरोप लगाए थे।
नृपेंद्र ने निर्माण समिति के फैसले बदले- चंपत राय
तस्वीर 4 अगस्त की है। चंपत राय ने तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य से मुलाकात की थी।
71 एकड़ में फैले राम मंदिर का निर्माण नृपेंद्र मिश्र की देखरेख में हुआ है।
चंपत राय ने कहा कि मंदिर निर्माण से जुड़े फैसले समिति की बैठकों में लिए जाते थे, लेकिन कई मामलों में बाद में बदलाव किए गए और नृपेंद्र मिश्र के फैसलों को प्राथमिकता दी गई। कई मामलों में समिति के अन्य सदस्यों के सुझावों या फैसलों को महत्व नहीं दिया गया।
चंपत राय की चिट्ठी
चंपत राय ने 9 पन्नों का लेटर जारी किया है।
चंपत राय ने लिखा- लेटर में लिखा कि 1528 में बाबर की सेनाओं द्वारा राम जन्मभूमि मंदिर तोड़े जाने के बाद अयोध्या के संतों, स्थानीय राजाओं-रियासतों और गृहस्थ समाज की ओर से मंदिर की भूमि हासिल करने के लिए संघर्ष जारी रहा। 1949 में स्थानीय समाज द्वारा उस स्थान पर कब्जा किए जाने के बाद यह संघर्ष समाप्त हुआ।
1950 से 1989 के बीच स्थानीय अदालतों में चार वाद दायर किए गए। इन मुकदमों को वाद दायर करने वालों ने अपने स्तर पर लड़ा। बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच की तीन सदस्यीय पीठ ने मामले की सुनवाई की। करीब 15 साल चली सुनवाई के दौरान तीनों न्यायाधीशों ने स्वतंत्र रूप से अपने फैसले लिखे और कुल निर्णय करीब 8,500 पन्नों का रहा।
सुप्रीम कोर्ट ने बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश की। तीन सदस्यीय मध्यस्थता समिति बनाई गई थी। मार्च से जुलाई 2019 तक कई दौर की बैठकें हुईं, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका।
इसके बाद 6 अगस्त 2019 से सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने नियमित सुनवाई शुरू की। 9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने सर्वसम्मति से फैसला सुनाया, जिसके बाद राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हुआ।
राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र हर महीने निर्माण कामों का निरीक्षण करते हैं।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद केंद्र सरकार ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र नाम से स्वतंत्र ट्रस्ट का गठन किया। इसमें कुल 15 ट्रस्टियों की व्यवस्था की गई। एक स्थान निर्मोही अखाड़ा और एक स्थान अनुसूचित जाति/जनजाति प्रतिनिधित्व के लिए सुरक्षित रखा। अयोध्या के जिलाधिकारी, उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर आईएएस अधिकारियों को पदेन न्यासी बनाए गया।
विश्व हिंदू परिषद के दिवंगत नेता अशोक सिंहल के मंदिर निर्माण से जुड़े सुझाव नृपेंद्र मिश्र को बताए गए। मंदिर निर्माण के लिए लार्सन एंड टुब्रो (L&T) का चयन किया गया। निर्माण की निगरानी के लिए टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स (TCE) को चुना गया। मंदिर परिसर के दूसरे भवनों की डिजाइन के लिए नोएडा की डिजाइन एसोसिएट फर्म और उसके प्रमुख जय काकतीकर को जिम्मेदारी दी गई।
अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय का निर्माण काम चल रहा है। इसे पब्लिक के लिए दिसंबर 2027 तक खोला जा सकता है।
राम मंदिर में दर्शन से जुड़ी व्यवस्थाओं का उल्लेख
ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन का आंतरिक और वैधानिक ऑडिट कराया जाता है। वैधानिक ऑडिट दिल्ली की फर्म वी. शंकर अय्यर द्वारा किया जाता है।
रामपथ पर बिरला धर्मशाला के सामने यात्री सेवा केंद्र बनाया गया है। यहां पहले परिवहन निगम का बस अड्डा था। ट्रस्ट ने जमीन खरीदकर दो मंजिला प्री-फैब्रिकेटेड भवन बनवाया है।
22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद रोजाना 75 हजार से अधिक श्रद्धालु आ रहे हैं। महाकुंभ के दौरान रोजाना 3 लाख से अधिक श्रद्धालु रोज पहुंचे।
रामलला दर्शन के लिए 8 लाइन बनाई गई हैं। इनमें 1 विशिष्ट दर्शन, 1 सुगम या व्हीलचेयर दर्शन और 6 सामान्य लाइन हैं। सभी के रास्ते अलग हैं, जिससे क्रॉसिंग की स्थिति नहीं बनती।
VIP दर्शन के दौरान भी सामान्य श्रद्धालुओं का दर्शन जारी रहता है। राज्यपाल, मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री और न्यायाधीशों के लिए अलग व्यवस्था है।
असमर्थ श्रद्धालुओं के लिए मुफ्त व्हीलचेयर उपलब्ध है। भजन, कीर्तन, सुंदरकांड के लिए भी परिसर में फ्री व्यवस्था की जाती है।
ट्रस्ट के बैंक खातों में चेकबुक का इस्तेमाल नहीं होता। सभी भुगतान बैंक ट्रांसफर के जरिए होते हैं और नकद भुगतान नहीं किया जाता। ट्रस्ट के खाते SBI, PNB और बैंक ऑफ बड़ौदा में हैं।
लखनऊ, एजेंसी। लखनऊ में SBI के फील्ड ऑफिसर ने बैंक रिलेशनशिप मैनेजर पत्नी और अपनी बहन की गोली मारकर हत्या कर दी। फिर खुद भी गोली मारकर जान दे दी। पूरी वारदात को उसने प्लानिंग करके अंजाम दिया।
गुरुवार दोपहर करीब 12:05 बजे मानस कार से ICICI बैंक पहुंचा। फोन करके पत्नी दिव्या मिश्रा को ऑफिस से बाहर बुलाया। थोड़ी देर उनसे बातचीत की, फिर गोली मारकर भाग गया। इसके बाद 12:30 बजे वह सीधे 2 किमी दूर अपने घर पहुंचा।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, मानस पसीने से भीगा हुआ था। अंदर जाने के बाद उसने सबसे पहले कमरे का दरवाजा बंद कर लिया। फिर टीवी पर तेज आवाज में हनुमान चालीसा चला दी। इसके बाद मानस ने बहन शीबा की गोली मारकर हत्या कर दी। शीबा मानसिक बीमार थी। उसका इलाज चल रहा था। मानस को डर था कि उसके मरने के बाद बहन की देखभाल कौन करेगा?
इसके बाद मानस ने खुद को भी गोली मार ली। दो गोली चलने की आवाज सुनकर पड़ोसी भागकर पहुंचे और दरवाजा तोड़ दिया। अंदर भाई-बहन की खून से लथपथ लाश पड़ी थी। वारदात गोमतीनगर थाना क्षेत्र में हुई है। घटना की जानकारी मिलते ही अफसर मौके पर पहुंचे। फोरेंसिक टीम ने जांच की। पुलिस कमिश्नर तरुण गाबा भी मौके पर पहुंचे।
वारदात की वजह अभी क्लियर नहीं है। लेकिन, मानस ने वॉट्सएप स्टेटस लगाया था। इसमें लिखा-
मैंने अपनी पत्नी की हत्या कर दी, क्योंकि उसने मुझे धोखा दिया। अब मुझे खुद को और अपनी बहन को भी मारना है। उसकी (दिव्या की) बहन प्रज्ञा और उनके (प्रज्ञा के) पति भरत यादव को सब कुछ पता है।
दिव्या मिश्रा (33) ICICI बैंक में असिस्टेंट मैनेजर थीं, जो रिलेशनशिप मैनेजर के तौर पर काम कर रही थीं। दिव्या, यूट्यूबर प्रज्ञा मिश्रा की बहन थीं। दिव्या की शादी 12 साल पहले मानस से हुई थी। दोनों के अभी कोई बच्चा नहीं था। दिव्या ने एक साल पहले पति मानस बाजपेयी (35) से तलाक के लिए कोर्ट में अपील दायर की थी। इसके बाद से वह आलमबाग में रहती थीं।
मानस बाजपेई हुसड़िया चौराहे के पास अपनी बहन शीबा (28) के साथ किराए के मकान में रहता था। वह SBI की इंजीनियरिंग कॉलेज ब्रांच में फील्ड ऑफिसर था। मानस के माता-पिता की मौत हो चुकी है।