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यूपीआई और वॉलेट में क्या अंतर है?

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मुंबई, एजेंसी। फोनपे ने हाल ही में कुछ इनएक्टिव वॉलेट यूजर्स के लिए अपनी वॉलेट-संबंधी नीतियों को अपडेट किया है। इस घोषणा से ग्राहकों के मन में अनेक सवाल उठने लगे हैं और उनका ध्यान इस ओर गया कि डिजिटल वॉलेट क्या है और यह कैसे काम करता है। 

ग्राहकों के बीच हो रही इस बातचीत में एक दिलचस्प बात यह देखने को मिली कि कई ग्राहक वॉलेट और यूपीआई शब्दों का इस्तेमाल एक ही अर्थ में करते हैं, जबकि ये दोनों बुनियादी रूप से अलग-अलग पेमेंट प्रोडक्ट हैं। इस बातचीत से कई सवाल उठते हैं, जैसे ‘‘क्या यूपीआई और वॉलेट एक हैं?”, ‘‘पैसा वास्तव में कहाँ रखा रहता है?”और ‘‘प्रत्येक मामले में पेमेंट की प्रोसेसिंग कैसे होती है?” ये सवाल इस बारे में जागरुकता बढ़ाए जाने की जरूरत पर जोर देते हैं कि ये पेमेंट प्रोडक्ट कैसे काम करते हैं।

डिजिटल पेमेंट दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए हैं। चाहे ग्रोसरी का पेमेंट देना हो, फूड ऑर्डर करना हो, कैब बुक करना हो या फिर बिल को दोस्तों में बाँटना हो, यूपीआई और डिजिटल वॉलेट का उपयोग हर कोई कभी न कभी करता है। इन दोनों के बीच का अंतर जानकर ग्राहक ज्यादा विश्वास से पेमेंट विकल्प चुन सकते हैं। वो बेहतर तरीके से समझ सकते हैं कि उनके द्वारा किस प्रोडक्ट का इस्तेमाल किया जा रहा है। आईये जानें कि यूपीआई और वॉलेट कैसे काम करते हैं, पैसा कहाँ जमा रहता है और इन दोनों को किन-किन जरूरतों के लिए बनाया गया है।

यूपीआई क्या है?
यूपीआई (यूनिफाईड पेमेंट इंटरफेस) एक पेमेंट सिस्टम है, जो सीधे आपके बैंक खाते से जुड़ा होता है। आप जब भी यूपीआई से कोई पेमेंट करते हैं, तो पैसा सीधे आपके बैंक खाते से दूसरे व्यक्ति के बैंक खाते में हाथों-हाथ पहुँच जाता है। आपको पेमेंट करने के लिए अलग से पैसे को वॉलेट में डालने की जरूरत नहीं पड़ती है।
इस तरह के पेमेंट यूपीआई आईडी, क्यूआर कोड या यूपीआई से लिंक्ड मोबाईल नंबर से होते हैं। 

सरल भाषा में इसे ऐसे भी समझा जा सकता है कि यूपीआई एक ऐसा डिजिटल पुल है, जो आपके बैंक खाते को दूसरे व्यक्ति के बैंक खाते से जोड़ता है। जब तक आप पेमेंट नहीं कर देते हैं, तब तक पैसा आपके बैंक खाते में ही बना रहता है। 

वॉलेट क्या है?
डिजिटल वॉलेट पैसे रखने के लिए एक खाता है, जिसमें आप पहले पैसे डालते हैं और फिर उस पैसे से धीरे-धीरे पेमेंट करते रहते हैं। पेमेंट करने से पहले आपको वॉलेट को टॉप-अप करना होता है, यानी आपको पहले उसमें पैसे डालने पड़ते हैं। वॉलेट में बैंक खाते, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या किसी अन्य पेमेंट विधि से पैसा डाला जा सकता है। जब वॉलेट से पेमेंट किया जाता है, तो पैसा बैंक खाते की बजाय वॉलेट बैलेंस से कटता है। वॉलेट एक पर्स की तरह होता है, जिसमें आपका पैसा डिजिटल रूप में रखा होता है। पैसा तब तक वॉलेट में रखा रहता है, जब तक आप इसे खर्च नहीं करते हैं।


इन दोनों मामलों में पैसा कहाँ रखा रहता है?

विशेषतायूपीआईवॉलेट
पैसा कहाँ रखा रहता है?आपके बैंक खाते मेंवॉलेट बैलेंस में
क्या पहले पैसा डालना पड़ता है?नहींहाँ
पैसा कहाँ से कटता हैआपके बैंक खाते सेवॉलेट बैलेंस से
लेनदेन के लिए बैंक खाता जरूरी है?हाँपैसा डालने के बाद हर पेमेंट के लिए नहीं
क्या बैलेंस दिखाई देता है?बैंक खाते का बैलेंस दिखता हैवॉलेट बैलेंस दिखता है

 यूपीआई
बैंक खाता → यूपीआई → मर्चेंट/दोस्त

पैसा तब तक आपके बैंक खाते में रहता है, जब तक पेमेंट नहीं कर दिया जाता।

वॉलेट
बैंक खाता/कार्ड → वॉलेट  → मर्चेंट/दोस्त
पैसा पहले वॉलेट में जाता है और उसके बाद उससे पेमेंट किया जाता है।

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Gold Silver Crash: सोने-चांदी में गिरावट, ETF भी टूटा, जानें कारण?

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मुंबई, एजेंसी। मंगलवार को वैश्विक और घरेलू मार्केट में सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। कीमती धातुओं में आई इस कमजोरी का असर गोल्ड और सिल्वर ETF पर भी देखने को मिला, जो लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। इसकी वजह फेडरल रिजर्व का रुख और भू-राजनीतिक घटनाक्रम हैं।

ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIJGF) के राष्ट्रीय महासचिव नितिन केडिया का कहना है कि सितंबर में अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने की आशंका है। वहीं, बैंक ऑफ अमेरिका ने 2026 में तीन बार ब्याज दर बढ़ने का अनुमान दिया है। इस फैक्टर ने भी निवेशकों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है।

कितनी गिरी कीमतें?

दोपहर के कारोबार में सोना करीब 2100 रुपए टूटकर 1,46,010 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था। हालांकि, एक वक्त यह गिरकर 1,45,510 रुपए पर पहुंच गया था। वहीं, चांदी में बड़ी गिरावट आई, ये 7300 रुपए लुढ़क कर 2,27,010 प्रति किलो पर थी। कारोबार के दौरान चांदी गिरकर 2,25,666 रुपए तक आ गई थी।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना करीब 2% और चांदी में 5% से ज्यादा की गिरावट आई। गोल्ड और सिल्वर ETF भी लगभग इतना ही टूटे हैं।

क्यों टूटा सोना-चांदी?

फेडरल रिजर्व के कड़े संकेत

अमेरिकी सेंट्रल बैंक ने संकेत दिए हैं कि महंगाई को काबू में रखने के लिए इस साल ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जा सकती है। ब्याज दरें बढ़ने से निवेशक बॉन्ड्स में निवेश करना पसंद करते हैं। क्योंकि सोने-चांदी में ब्याज नहीं मिलता।

ब्याज दरों बढ़ोतरी की आशंका

विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में ब्याज दरें और बढ़ सकती हैं। इससे कीमती धातुओं में निवेश का आकर्षण कम हो रहा है।

निवेशकों की मुनाफावसूली

ब्याज दर में बढ़ोतरी की आशंका से निवेशक गोल्ड और सिल्वर में मुनाफावसूली भी कर रहे हैं। गोल्ड-सिल्वर ETF में भी प्रॉफिट बुकिंग दिख रही है।

अमेरिकी डॉलर

डॉलर इंडेक्स में मजबूती आने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना और चांदी अपेक्षाकृत महंगे हो जाते हैं। इससे मांग प्रभावित होती है और कीमतों में गिरावट आती है।

भू-राजनीतिक तनाव में कमी

वैश्विक स्तर पर तनाव कम होने के संकेतों के चलते निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों से पैसा निकालकर जोखिम वाले एसेट्स की ओर रुख कर रहे हैं। इसका असर भी सोना-चांदी की कीमतों पर पड़ा है।

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दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार में हड़कंप, कोस्पी 9% से ज्यादा टूटा, रोकनी पड़ी ट्रेडिंग

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मुंबई, एजेंसी। अमेरिकी टेक्नोलॉजी शेयरों में आई भारी बिकवाली का असर एशियाई बाजारों पर भी दिखाई दिया। भारतीय शेयर बाजार आज लाल निशान में बंद हुए। एशियाई बाजारों में सबसे बड़ा झटका दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार को लगा।

दक्षिण कोरिया का प्रमुख शेयर सूचकांक कोस्पी 9% से ज्यादा टूट गया। तेज बिकवाली के चलते बाजार में सर्किट ब्रेकर लगाना पड़ा, जिसके बाद कुछ समय के लिए ट्रेडिंग रोक दी गई। बाजार में आई इस गिरावट से तीन घंटे में ही निवेशकों के रू.23 लाख करोड़ डूब गए।

एशियाई बाजारों में भी दबाव

दक्षिण कोरिया के अलावा जापान, चीन, हांगकांग और ऑस्ट्रेलिया के बाजारों में भी गिरावट देखने को मिली। जापान का निक्केई 225, चीन का सीएसआई 300, हांगकांग का हैंग सेंग और ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी/एएसएक्स 200 इंडेक्स भी फिसल गया।

अमेरिका में एआई शेयरों में गिरावट

बाजार में गिरावट की शुरुआत अमेरिका से हुई, जहां टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में तेज बिकवाली देखने को मिली। इसका असर अमेरिकी इंडेक्स फ्यूचर्स पर भी पड़ा और निवेशकों का जोखिम लेने का रुझान कमजोर हुआ। विशेष रूप से उन कंपनियों के शेयर दबाव में रहे, जिन्हें AI सेक्टर की तेजी का सबसे बड़ा लाभार्थी माना जा रहा था। इससे वैश्विक निवेशकों के बीच मुनाफावसूली का दौर शुरू हो गया।

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Why market is down today: शेयर बाजार में भूचाल, सेंसेक्स 893 अंक टूटा, निवेशकों को नुकसान

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मुंबई, एजेंसी। वैश्विक बाजारों में कमजोरी और आईटी कंपनियों एवं एचडीएफसी बैंक के शेयरों में नुकसान के बीच घरेलू शेयर बाजारों में मंगलवार को खासी गिरावट आई। सेंसेक्स 893 अंक लुढ़क गया जबकि निफ्टी में 279 अंक की गिरावट दर्ज की गई। विश्लेषकों ने कहा कि विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने भी घरेलू बाजार पर दबाव बनाने का काम किया। बीएसई का 30 शेयरों पर आधारित मानक सूचकांक सेंसेक्स 893.39 अंक यानी 1.16 प्रतिशत टूटकर 76,200.68 अंक पर बंद हुआ। 

कारोबार के दौरान एक समय यह 1,011.56 अंक तक गिरकर 76,082.51 अंक के निचले स्तर पर आ गया था। इसी तरह, एनएसई का 50 शेयरों वाला मानक सूचकांक निफ्टी 278.80 अंक यानी 1.16 प्रतिशत गिरकर 23,824.10 अंक पर बंद हुआ। सेंसेक्स की कंपनियों में इन्फोसिस और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के शेयर में तीन प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, टाटा स्टील, अदाणी पोर्ट्स, एचसीएल टेक और भारतीय स्टेट बैंक भी नुकसान में रहे। 

दूसरी तरफ पावर ग्रिड कॉरपोरेशन, एक्सिस बैंक, सन फार्मा और मारुति सुजुकी के शेयर बढ़त में रहे। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने सोमवार को 635.91 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की। एशिया के अन्य बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी, जापान का निक्की, चीन का शंघाई कम्पोजिट और हांगकांग का हैंगसेंग भारी गिरावट के साथ बंद हुए। यूरोपीय बाजार भी नुकसान में कारोबार कर रहे थे। 

ऑनलाइन ट्रेडिंग मंच एनरिच मनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी पोनमुडी आर. ने कहा, ”आईटी शेयरों में दो प्रतिशत से अधिक की गिरावट और रुपए की कमजोरी के साथ अमेरिका में ब्याज दरों में आगे बढ़ोतरी की आशंका से घरेलू बाजार में निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई।” इस बीच, वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.67 प्रतिशत गिरकर 77.46 डॉलर प्रति बैरल रह गया। इससे पहले सोमवार को सेंसेक्स 291.17 अंक बढ़कर 77,094.07 अंक और निफ्टी 89.80 अंक चढ़कर 24,102.90 अंक पर बंद हुआ था।

बाज़ार में गिरावट के मुख्य कारण

  • कोरियाई बाजार में भारी गिरावट का असर
  • US अमेरिकी फेड की दरों को लेकर चिंता
  • IT सेक्टर पर फिर दबाव
  • रुपए में भी कमजोरी  
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