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Why Stock Market Crash: मोदी की अपील-ट्रंप के बयान के बाद बाजार में हाहाकार, निवेशकों के 11 लाख करोड़ स्‍वाहा, जानें गिरावट के कारण

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मुंबई, एजेंसी। भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन भारी गिरावट देखने को मिली, जिससे निवेशकों को बड़ा झटका लगा और लगभग 11 लाख करोड़ रुपये की वैल्यू वॉशआउट हो गई। इस गिरावट के पीछे कई ग्लोबल और घरेलू कारण बताए जा रहे हैं। इंटरनेशनल लेवल पर ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।

इसके अलावा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से हाल ही में ईंधन बचत और सोना न खरीदने की सलाह का भी बाजार पर असर देखा गया। वहीं, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा यह बयान कि युद्धविराम कमजोर स्थिति में है और हालात कभी भी बिगड़ सकते हैं, ने भी वैश्विक अनिश्चितता को और बढ़ा दिया। इन सभी कारणों के चलते बाजार में लगातार दबाव बना हुआ है और निवेशकों में घबराहट का माहौल देखा जा रहा है।

आज 12 मई का शेयर बाजार का हाल
-सेंसेक्स करीब 1456 अंक (1.92%) गिरकर 74,559 पर बंद हुआ
-निफ्टी में 436 अंक (1.83%) की गिरावट, स्तर 23,380 रहा
-निफ्टी बैंक में भी करीब 884 अंकों की गिरावट दर्ज हुई
-मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी कमजोरी देखने को मिली

इन सेक्टर्स का बुरा हाल
-निफ्टी IT सबसे ज्यादा प्रभावित रहा, करीब 3.5%–3.7% तक गिरा।
-मेटल, ऑयल एंड गैस और PSU बैंक को छोड़कर लगभग सभी सेक्टर लाल निशान में रहे।
-IT सेक्टर में Adani Ports, TCS, Tech Mahindra और HCL Technologies जैसे बड़े शेयरों में तेज गिरावट देखी गई।
 
निवेशकों को भारी नुकसान
एक न्यूज चैनल की खबर के अनुसार, इस गिरावट के चलते निवेशकों की संपत्ति में लगभग 11 लाख करोड़ रुपये की कमी आई। BSE का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन 467 लाख करोड़ रुपये से घटकर 456 लाख करोड़ रुपये पर आ गया।

गिरावट के बड़े कारण
-IT सेक्टर पर दबाव:
 IT सेक्टर में करीब 3.7% की गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट की एक वजह यह भी रही कि वैश्विक स्तर पर AI Sectors में तेजी से बदलाव हो रहा है। Open AI से जुड़ी एक बड़ी घोषणा में कंपनियों के लिए AI Technology विकसित और लागू करने हेतु भारी निवेश की बात सामने आई, जिससे निवेशकों में चिंता बढ़ी।

-कच्चे तेल की कीमतों में उछाल: ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत में करीब 2.45% की बढ़ोतरी होकर यह 106.75 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। तेल की कीमत बढ़ने से भारत जैसे आयात-निर्भर देश में महंगाई बढ़ने की आशंका रहती है। इससे कंपनियों की लागत भी बढ़ती है, जिसका सीधा असर उनके मुनाफे पर पड़ता है।

-वैश्विक तनाव का असर: ईरान और अमेरिका के तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद हालात और अनिश्चित हो गए, जिसमें उन्होंने कहा कि युद्धविराम कमजोर स्थिति में है और स्थिति कभी भी बिगड़ सकती है। एक्सपर्ट का मानना है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य बाधित होता है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है। 

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पावर ग्रिड के निदेशक मंडल ने कर्ज सीमा बढ़ाकर 2.2 लाख करोड़ रुपए करने को मंजूरी दी

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नई दिल्ली, एजेंसी। सार्वजनिक क्षेत्र की पावर ग्रिड कॉरपोरेशन के निदेशक मंडल ने कंपनी की कर्ज लेने की सीमा 1.80 लाख करोड़ रुपए से बढ़ाकर 2.20 लाख करोड़ रुपए करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। कंपनी ने शेयर बाजार को दी सूचना में कहा कि निदेशक मंडल की शुक्रवार को हुई बैठक में यह मंजूरी दी गई। हालांकि, इस प्रस्ताव पर अंतिम मुहर आगामी वार्षिक आम बैठक (एजीएम) में शेयरधारकों की मंजूरी के बाद लगेगी। 

निदेशक मंडल ने इसके अलावा बैंक ऑफ बड़ौदा से बाह्य वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) के जरिये 50 करोड़ अमेरिकी डॉलर तक की विदेशी मुद्रा जुटाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी। कंपनी ने कहा कि निदेशक मंडल ने उडुमलपेट-मदुरै 400 केवी एकल सर्किट (एस/सी) लाइन को 400 केवी क्वाड डबल सर्किट (डी/सी) लाइन में उन्नत/परिवर्तित करने की परियोजना को भी मंजूरी दी है। करीब 772.65 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना को आवंटन की तारीख से 30 महीने के भीतर, यानी 11 अगस्त, 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।  

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दुनियाभर की सुस्त अर्थव्यवस्था के बीच दौड़ेगी इंडियन इकोनॉमी, Goldman Sachs का अनुमान

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मुंबई, एजेंसी। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंदी और भू-राजनीतिक तनाव के बादल छाए हुए हैं लेकिन भारत की विकास रफ्तार को लेकर अच्छी खबर सामने आई है। करीब 150 साल पुराने वैश्विक निवेश बैंक Goldman Sachs ने अनुमान जताया है कि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और महंगाई में कमी के चलते भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रहेगी। बैंक ने भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाते हुए कहा है कि आने वाले समय में दुनिया की सुस्त अर्थव्यवस्था के बीच भी भारत सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रह सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, पहले जहां युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित व्यवधान को देखते हुए चालू वित्त वर्ष में भारत की GDP वृद्धि 6.1% रहने का अनुमान लगाया गया था, वहीं अब इसे बढ़ाकर 6.5% कर दिया गया है। बैंक का कहना है कि वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में आर्थिक गतिविधियां अपेक्षा से बेहतर रही हैं, जिससे विकास दर के अनुमान में सुधार हुआ है।

कच्चे तेल की कीमतों का अनुमान घटाया

Goldman Sachs ने कच्चे तेल के पूर्वानुमान में भी कटौती की है। बैंक के मुताबिक, वर्ष 2026 की तीसरी और चौथी तिमाही में कच्चे तेल की औसत कीमत 82 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान है, जबकि पहले यह अनुमान 92 डॉलर प्रति बैरल था। वहीं 2027 के लिए अनुमान 80 डॉलर से घटाकर 75 डॉलर प्रति बैरल कर दिया गया है।

भारतीय बास्केट के कच्चे तेल की कीमत भी हाल के दिनों में तेजी से घटी है। जून में यह घटकर करीब 86.31 डॉलर प्रति बैरल रही, जबकि 24 जून को इसका स्तर 70.71 डॉलर प्रति बैरल दर्ज किया गया।

महंगाई का अनुमान भी हुआ कम

Goldman Sachs ने भारत के महंगाई अनुमान को भी घटा दिया है। बैंक ने वित्त वर्ष के लिए महंगाई का अनुमान 5.1% से घटाकर 4.9% कर दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक यूरिया कीमतों में कमी आने से खाद सब्सिडी पर सरकार का बोझ कम हो सकता है। साथ ही तेल की कीमतों में गिरावट से सरकार पर राजकोषीय दबाव भी कम होने की संभावना है। हालांकि मौसम से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण मांग पर असर पड़ने की आशंका बनी हुई है।

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Volkswagen की 4 फैक्ट्रियां बंद करने का प्लान, 1,00,000 लोग होंगे बेरोगजार

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बर्लिन, एजेंसी। यूरोप की दिग्गज ऑटोमोबाइल कंपनी फॉक्सवैगन AG कुछ फैक्ट्रियां बंद कर सकती है और कर्मचारियों की संख्या में भारी कटौती पर विचार कर रही हैं। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में हुई बोर्ड बैठक में कंपनी के CEO ओलिवर ब्लूम ने एक नई रणनीति पेश की। प्रस्तावित योजना के तहत कर्मचारियों की छंटनी का आंकड़ा बढ़ाकर करीब 1 लाख तक किया जा सकता है। फिलहाल Volkswagen Group में लगभग 6.57 लाख कर्मचारी कार्यरत हैं। समूह के तहत Volkswagen के अलावा Porsche और Audi जैसे प्रीमियम ब्रांड भी शामिल हैं।

जर्मनी में 4 प्लांट बंद हो सकते हैं

रिपोर्ट के अनुसार, रणनीति में इस दशक के अंत तक जनरल ओवरहेड कॉस्ट में 11 अरब यूरो (12.5 अरब डॉलर) तक की कटौती करना और मीडियम टर्म में जर्मनी में 4 फैक्ट्रियां बंद करना भी शामिल है। इनमें नेकरसल्म में Audi के प्लांट के साथ-साथ हनोवर, ज्विकौ और एमडेन में फॉक्सवैगन के प्लांट शामिल हैं।

इसके अलावा कंपनी Volkswagen ब्रांड और उसके कंपोनेंट बिजनेस को अलग करने के विकल्प पर भी विचार कर रही है। लंबे समय से कम मुनाफे से जूझ रहे Volkswagen ब्रांड को अधिक लाभदायक और कुशल बनाने की दिशा में यह कदम अहम माना जा रहा है।

क्यों उठाने पड़ रहे हैं ये कदम?

फॉक्सवैगन इस समय कई चुनौतियों का सामना कर रही है। अमेरिका के आयात शुल्क (टैरिफ), चीन में कमजोर मांग और यूरोप में BYD तथा Stellantis जैसी कंपनियों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने कंपनी पर दबाव बढ़ा दिया है। इसी वजह से लागत घटाने और कारोबार को अधिक प्रभावी बनाने की रणनीति तैयार की जा रही है।

पहले से जारी है कर्मचारियों की संख्या घटाने का अभियान

रिपोर्ट के अनुसार, करीब 28,000 कर्मचारी पहले ही स्वैच्छिक रूप से कंपनी छोड़ने पर सहमत हो चुके हैं। यह 2030 तक पूरे Volkswagen Group में 50,000 कर्मचारियों की संख्या कम करने की पहले घोषित योजना का हिस्सा है।

हालांकि, नई प्रस्तावित छंटनी योजना को कर्मचारी संगठनों का विरोध झेलना पड़ सकता है। Volkswagen के सुपरवाइजरी बोर्ड में आधी सीटें कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के पास हैं, जबकि जर्मनी का लोअर सैक्सनी राज्य भी बोर्ड में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और आमतौर पर कर्मचारी यूनियनों का समर्थन करता है। ऐसे में कंपनी के लिए इस योजना को लागू करना आसान नहीं होगा।

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