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कोरबा

बालको की महिला कर्मचारियों को खनन क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए मिला सम्मान

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बालको नगर। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर कोयला एवं खान मंत्रालय द्वारा खनन क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए महिलाओं को सम्मानित किया गया। हैदराबाद में आयोजित कार्यक्रम के दौरान बालको की रूचि शर्मा और हिमांशी गुप्ता सम्मानित की गई। कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी, केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे और तेलंगाना की महिला एवं बाल कल्याण मंत्री डी. अनसूया सीताक्का भी मौजूद थीं।

कार्यक्रम के दौरान खनन उद्योग में असाधारण योगदान के लिए देशभर की 46 उत्कृष्ट पेशेवरों को सम्मानित किया गया। बालको के लिए गौरवान्वित पल है कि रुचि शर्मा (डिवीजनल कमर्शियल ऑफिसर) और हिमांशी गुप्ता (बिजनेस एनालिस्ट, डिप्टी सीईओ, मेटल) को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। महिलाओं द्वारा खनन उद्योग में बाधाओं को तोड़कर आगे बढ़ने को सराहा गया। खनन क्षेत्र में महिलाओं को पहचान दिलाने और उन्हें सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

रुचि शर्मा ने बताया कि यह सम्मान खनन क्षेत्र में समर्पण और योगदान के साथ बालको के विश्वास का परिणाम है। पिछले 11 वर्षों में मुझे सहयोग तथा प्रोत्साहित करने के लिए कंपनी के वरिष्ठ प्रबंधन को दिल से धन्यवाद देना चाहूँगी। कंपनी हमेशा विविधता और समावेश का समर्थन करने के साथ विशेष रूप से महिलाओं के लिए समानता का अवसर और सशक्तिकरण की संस्कृति को बढ़ावा देते हैं, जिससे खनन उद्योग में बाधाओं को तोड़ने और रूढ़ियों को चुनौती देने में मदद मिलती है। इस क्षेत्र में योगदान देने और नवाचार को आगे बढ़ाने तथा अधिक ऊंचाइयों को छूने के लिए प्रेरित करता है।

बालको में लगभग तीन साल से कार्यरत हिमांशी गुप्ता ने बताया कि महिला दिवस के अवसर पर मिला यह सम्मान उन अवसरों और अनुभवों का प्रतिबिंब है।
ऐसे प्रेरक और सशक्त मंच का हिस्सा बनना मेरे लिए सम्मान की बात है। इस पुरस्कार को प्राप्त करने से मेरा आत्मविश्वास बढ़ा है और मुझे उत्कृष्टता के लिए प्रयास करने की प्रेरणा मिली है। यह मेहनत, समर्पण और मार्गदर्शन के महत्व को उजागर करता है। बालको के निरंतर समर्थन और विविधता के प्रति इसकी अटूट प्रतिबद्धता से इस क्षेत्र में महिलाओं को आगे बढ़ने का मौका मिला है।

बालको ने अपनी महिला कर्मचारियों को सशक्त बनाने तथा अधिक समावेशी कार्यस्थल बनाने के लिए आवश्यक कदम पर ध्यान केंद्रित किया है। महिला कर्मचारियों की उपलब्धियाँ खनन क्षेत्र में में नारी शक्ति की बढ़ती उपस्थिति का प्रमाण हैं, जो भावी पीढ़ियों को आगे बढ़ने और नेतृत्व करने के लिए प्रेरित करती हैं। कंपनी का लक्ष्य 2030 तक महिला कर्मचारियों की संख्या 30 प्रतिशत करना है। साथ ही महिला कर्मचारियों के अनुकूल कार्य वातावरण प्रदान करने के लिए विभिन्न परियोजना संचालित किया है।

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कोरबा

सरस्वती शिशु मंदिर सीएसईबी कोरबा पूर्व में मातृ संगोष्ठी एवं शिशु नगरी का भव्य आयोजन

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220 मातृशक्तियों की सहभागिता, नन्हे भैया-बहनों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से दिया पारिवारिक संस्कारों का संदेश
कोरबा। सरस्वती शिशु मंदिर सीएसईबी, कोरबा पूर्व में मातृ संगोष्ठी एवं शिशु नगरी का भव्य, सुव्यवस्थित एवं प्रेरणादायी आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्राचार्य राजकुमार देवांगन रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में दीपक सोनी (कोरबा विभाग समन्वयक) एवं संजय कुमार देवांगन (प्रधानाचार्य, पूर्व माध्यमिक) उपस्थित रहे। अतिथियों का स्वागत विद्यालय परिवार द्वारा पारंपरिक रीति से किया गया।


अपने संबोधन में अतिथियों ने मातृशक्ति की भूमिका को बाल संस्कार एवं राष्ट्र निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि प्रारंभिक शिक्षा में माता का योगदान सबसे निर्णायक होता है। इस अवसर पर विद्यालय के नन्हे भैया-बहनों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। बच्चों ने आकर्षक नृत्य, गीत एवं लघु प्रस्तुतियों के माध्यम से पारिवारिक वातावरण, नैतिक मूल्यों, अनुशासन एवं संस्कारों का संदेश दिया। बच्चों की सहज एवं भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने उपस्थित माताओं एवं अभिभावकों का मन मोह लिया।


कार्यक्रम में कुल 220 मातृशक्तियों की गरिमामयी सहभागिता रही, जिससे मातृसंगोष्ठी अत्यंत सफल रही। माताओं ने विद्यालय की शिक्षण पद्धति, संस्कार आधारित शिक्षा एवं गतिविधियों की सराहना की। शिशु नगरी कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यालय की 12 शैक्षिक व्यवस्थाओं एवं सहयोगी संस्थाओं की जीवंत प्रदर्शनी लगाई गई। इन प्रदर्शनियों के माध्यम से बच्चों के सर्वांगीण विकास, कौशल निर्माण, संस्कार शिक्षा एवं व्यवहारिक ज्ञान को प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया गया। अभिभावक बंधुओं के सहयोग से आनंद मेले का भी आयोजन किया गया, जिसमें प्राथमिक विभाग के भैया-बहनों ने विभिन्न खेलों, गतिविधियों एवं मनोरंजन कार्यक्रमों में भाग लेकर भरपूर आनंद उठाया। आनंद मेला बच्चों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।


कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रधानाचार्य पंकज तिवारी ने सभी अतिथियों, मातृशक्तियों एवं अभिभावकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से विद्यालय एवं परिवार के बीच सहयोग और विश्वास और अधिक मजबूत होता है। उप-प्रधानाचार्य श्रीमती सीमा त्रिपाठी सहित समस्त आचार्य परिवार ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग करने वाले सभी लोगों का धन्यवाद ज्ञापित किया।

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कोरबा

बॉयोफ्लॉक तकनीक से मछली पालन कर संजय सुमन ने कमाए साल में 3.20 लाख

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कोरबा। विकासखंड करतला के ग्राम बड़मार निवासी संजय सुमन ने मछली पालन को अपना मुख्य व्यवसाय बनाकर सफलता की नई मिसाल कायम की है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत नवीन बॉयोफ्लॉक तकनीक अपनाकर उन्होंने कम भूमि में अधिक उत्पादन कर उल्लेखनीय आय अर्जित की है।
संजय सुमन ने अपनी 25 डिसमिल भूमि पर बॉयोफ्लॉक तालाब का निर्माण कराया। इस तकनीक में तालाब में लाइनर बिछाकर पानी भरा जाता है और तेजी से बढ़ने वाली उन्नत प्रजाति की मछलियों का पालन किया जाता है। इसकी विशेषता है कि वर्ष में दो बार उत्पादन लेकर अधिक आय प्राप्त की जा सकती है।
सरकार द्वारा प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत उन्हें 8.40 लाख रुपये का अनुदान प्रदान किया गया। पिछले वर्ष संजय सुमन ने बॉयोफ्लॉक तालाब से 6 मैट्रिक टन मछली उत्पादन किया, जिसे बेचकर 07 लाख 20 हजार रुपये की आय प्राप्त हुई। उत्पादन लागत निकालने के बाद उन्हें 03 लाख 20 हजार रुपये का शुद्ध लाभ हुआ।
सफलता से उत्साहित संजय सुमन इस वर्ष अपने कार्य का विस्तार कर उत्पादन एवं आय को दुगुना करने की योजना बना रहे हैं। बॉयोफ्लॉक तकनीक की खासियत यह है कि कम भूमि में अधिक उत्पादन संभव होता है, जिससे किसानों की आय में अभूतपूर्व वृद्धि होती है।
संजय सुमन की यह कहानी क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है।

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कोरबा

सुशासन सरकार की नीतियों से किसान हुआ आत्मनिर्भर और निश्चिंत

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सुगम व्यवस्था और सर्वाधिक समर्थन मूल्य, किसानों की आर्थिक ढाल

कोरबा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार की सुशासन आधारित नीतियों का सकारात्मक प्रभाव अब प्रदेश के खेतों तक स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। शासन की पारदर्शी धान खरीदी व्यवस्था और सर्वाधिक समर्थन मूल्य से छोटे एवं बड़े सभी किसानों को समान रूप से उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल रहा है, जिससे किसानों का जीवन स्तर सुदृढ़ हो रहा है।
कोरबा जिले के ग्राम कल्दामार निवासी कृषक अरुण कुमार इसकी मिसाल हैं, उन्होंने उपार्जन केंद्र भैंसमा में इस वर्ष 190 क्विंटल धान का विक्रय बिना किसी असुविधा के किया। गत वर्ष भी उन्होंने लगभग 350 क्विंटल धान का सफलतापूर्वक विक्रय किया था। उन्होंने अपनी धर्मपत्नी श्रीमती टिकैतिन बाई के नाम से टोकन कटवा कर धान विक्रय की प्रक्रिया पूर्ण की।
कृषक कुमार का कहना है कि शासन की पहल से उपार्जन केंद्रों में सभी आवश्यक सुविधाएं सुचारू रूप से उपलब्ध हैं। उच्च समर्थन मूल्य मिलने से अब किसानों को अगली फसल के लिए आर्थिक चिंता नहीं रहती और उन्हें उधार लेने की मजबूरी से भी मुक्ति मिली है। खेत से लेकर धान विक्रय तक की पूरी प्रक्रिया आज किसानों के लिए सहज, सुरक्षित और तनावमुक्त हो गई है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान व्यवस्था ने किसानों को आत्मनिर्भर बनाया है और वे अब समृद्धि की राह पर आगे बढ़ रहे हैं। किसानों के हित में संचालित योजनाओं और प्रभावी नीतियों के लिए छत्तीसगढ़ सरकार एवं मुख्यमंत्री श्री साय के प्रति आभार व्यक्त किया।

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