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भारत से लौट रहे ईरानी युद्धपोत पर अमेरिका का हमला:श्रीलंका के पास डूबा, 32 घायलों का रेस्क्यू किया गया, करीब 150 लापता

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तेल अवीव/तेहरान,एजेंसी। अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का आज पांचवां दिन है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका ने श्रीलंका के तट के पास एक ईरानी युद्धपोत IRIS देना पर पनडुब्बी से हमला किया। इसमें कई लोगों के मारे जाने की खबर है। श्रीलंका नेवी के मुताबिक जहाज से कई शव बरामद हुए हैं।

हमले में 32 लोग घायल हैं, जिन्हें रेस्क्यू किया गया है। जहाज पर लगभग 180 लोग सवार थे। लापता लोगों की तलाश के लिए सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। यह ईरानी युद्धपोत पिछले महीने भारत के विशाखापट्टनम में आयोजित 2026 इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में हिस्सा लेकर लौट रहा था।

श्रीलंकाई अधिकारियों ने अल जजीरा को बताया कि बुधवार सुबह करीब 6 से 7 बजे के बीच (भारतीय समय के मुताबिक) मदद के लिए मैसेज भेजा। यह जहाज दक्षिणी श्रीलंका के गाले शहर से करीब 40 समुद्री मील (करीब 75 किलोमीटर) दूर था। अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि बाकी करीब 150 क्रू मेंबर्स के साथ क्या हुआ।

तस्वीर ईरानी वॉरशिप IRIS देना पर हमले की बाद की है।

तस्वीर ईरानी वॉरशिप IRIS देना पर हमले की बाद की है।

इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच जंग से जुड़ी तस्वीरें…

150 लड़कियों के अंतिम संस्कार के लिए सोमवार को एक साथ मिनाब शहर में कब्र खोदी गई थीं।

150 लड़कियों के अंतिम संस्कार के लिए सोमवार को एक साथ मिनाब शहर में कब्र खोदी गई थीं।

ईरान की राजधानी तेहरान में इजराइली हमले का फुटेज।

ईरान की राजधानी तेहरान में इजराइली हमले का फुटेज।

अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड ने ईरान के ड्रोन पर हमले का फुटेज जारी किया है।

अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड ने ईरान के ड्रोन पर हमले का फुटेज जारी किया है।

इजराइली एयर डिफेंस सिस्टम का सोमवार रात ईरानी मिसाइल को गिराने का फुटेज।

इजराइली एयर डिफेंस सिस्टम का सोमवार रात ईरानी मिसाइल को गिराने का फुटेज।

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विदेश

दावा- ट्रम्प ईरान के खार्ग आइलैंड पर कब्जा चाहते हैं:90% ईरानी तेल का एक्सपोर्ट यहां से, एक्सपर्ट बोले- इस पर हमले से विश्वयुद्ध का खतरा

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तेहरान,एजेंसी। अमेरिका, इजराइल और ईरान में जारी जंग के बीच होर्मुज स्ट्रेट के पास मौजूद खार्ग आइलैंड की अहमियत अचानक बढ़ गई है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ट्रम्प सरकार इस आइलैंड पर कब्जे को लेकर सैन्य विकल्पों पर विचार कर रही है, क्योंकि यह ईरान की तेल कमाई का सबसे बड़ा सेंटर माना जाता है।

दरअसल ईरान के करीब 80 से 90% कच्चे तेल का निर्यात इसी आइलैंड से होता है। यहां बड़े तेल टर्मिनल, पाइपलाइन, स्टोरेज टैंक और जहाजों में तेल भरने की फैसिलिटी मौजूद हैं। इसे हर दिन करीब 70 लाख बैरल तक तेल जहाजों में भरा जा सकता है।

1960 के दशक में विदेशी निवेश के बाद इस जगह को बड़े ऑयल एक्सपोर्ट सेंटर के तौर पर डेवलप किया गया था और तब से यह ईरान की ऑयल सप्लाई की रीढ़ बन गया। हडसन इंस्टीट्यूट के सीनियर फेलो माइकल डोरान ने कहा,

ट्रम्प सरकार युद्ध के बाद भी ईरान की पूरी अर्थव्यवस्था को तबाह नहीं करना चाहती है। अमेरिका की पुरानी ‘रेड लाइन’ यानी तय सीमा यह रही है कि कुछ खास और अहम ठिकानों पर हमला नहीं किया जाए।

डोरान के मुताबिक अगर इन जगहों पर हमला हुआ, तो ईरान बड़े पैमाने पर जवाबी हमला कर सकता है, जिससे तीसरे विश्व युद्ध जैसे हालात बन सकते हैं।

जंग के बीच भी जारी है तेल निर्यात

अमेरिका और इजराइल ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों और न्यूक्लियर फैसिलिटी को निशाना बनाया है, लेकिन खार्ग आइलैंड पर अब तक हमला नहीं हुआ है। सैटेलाइट डेटा और जहाजों की निगरानी करने वाली कंपनियों के मुताबिक जंग जारी होने के बावजूद ईरान यहां से लगातार तेल निर्यात कर रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक 28 फरवरी से अब तक करीब 1.2 करोड़ बैरल से ज्यादा तेल टैंकरों के जरिए बाहर भेजा गया है। असली आंकड़ा इससे ज्यादा भी हो सकता है क्योंकि ईरान के कई जहाज अपनी ट्रैकिंग सिस्टम बंद करके चलते हैं।

डार्क फ्लीट से भेजा जा रहा तेल

ईरान कई बार ऐसे टैंकरों का इस्तेमाल करता है जिन्हें डार्क फ्लीट कहा जाता है। ये जहाज अपनी लोकेशन दिखाने वाली ट्रैकिंग मशीन बंद कर देते हैं, जिससे उन्हें ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है। खार्ग आइलैंड फारस की खाड़ी में ईरान के तट से करीब 25 से 30 किलोमीटर दूर स्थित है।

हाल ही में एक बड़ा तेल टैंकर होर्मुज स्ट्रेट पार करते समय कुछ समय के लिए ट्रैकिंग से गायब हो गया था और बाद में फिर दिखाई दिया। रिपोर्ट्स में कहा गया कि वह जहाज एशिया की ओर जा रहा था ।

ईरान के खार्ग आइलैंड स्थित तेल टर्मिनल की 25 फरवरी 2026 को ली गई सैटेलाइट तस्वीर।

ईरान के खार्ग आइलैंड स्थित तेल टर्मिनल की 25 फरवरी 2026 को ली गई सैटेलाइट तस्वीर।

खार्ग आइलैंड के पास दुनिया के अहम तेल रास्ते

खार्ग आइलैंड स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बेहद करीब है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में से एक है। दुनिया का करीब 20% तेल इसी रास्ते से गुजरता है। अगर इस इलाके में हमला होता है या जहाजों की आवाजाही रुकती है तो पूरी दुनिया में तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है और कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी प्रशासन इस बात पर विचार कर रहा है कि अगर खार्ग आइलैंड के तेल टर्मिनल को तबाह कर दिया जाए या उस पर कब्जा कर लिया जाए, तो ईरान की सबसे बड़ी आय बंद हो सकती है।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि तेल की बिक्री से मिलने वाला पैसा ईरान की सरकार और उसकी सैन्य ताकत के लिए सबसे बड़ा आर्थिक सहारा है। अगर यह कमाई रुक जाती है तो ईरान के लिए लंबे समय तक युद्ध जारी रखना मुश्किल हो सकता है।

हमला हुआ तो क्या असर होगा

एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर खार्ग आइलैंड पर हमला हुआ तो इसके दो बड़े असर हो सकते हैं:

  • ईरान की तेल से होने वाली कमाई अचानक गिर सकती है
  • दुनिया भर में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं

कुछ अनुमानों के मुताबिक अगर यहां से सप्लाई रुकती है तो तेल की कीमत प्रति बैरल करीब 10 डॉलर तक बढ़ सकती है।

ईरान की तेल उत्पादन क्षमता

इस समय ईरान करीब 33 लाख बैरल कच्चा तेल का प्रोडक्शन करता है। इसके अलावा लगभग 13 लाख बैरल कंडेन्सेट और अन्य लिक्विड ईंधन का भी प्रोडक्शन करता है है। इस तरह कुल ग्लोबल एनर्जी सप्लाई का 4.5% हिस्सा ईरान से आता है।

ईरान के बड़े तेल क्षेत्र जैसे अहवाज, मरून और गचसरान से पाइपलाइन सीधे खार्ग आइलैंड तक आती हैं। यहां तेल को बड़े स्टोरेज टैंकों में रखा जाता है और फिर टैंकर जहाजों में भरकर दुनिया के अलग-अलग देशों में भेजा जाता है।

आइलैंड पर करीब 3 करोड़ बैरल तेल स्टोर करने की क्षमता है। फिलहाल अनुमान है कि यहां लगभग 1.8 करोड़ बैरल तेल स्टोरेज में मौजूद है, जो सामान्य हालात में 10 से 12 दिन के निर्यात के बराबर है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जंग शुरू होने से ठीक पहले ईरान ने खार्ग आइलैंड से ऑयल एक्सपोर्ट तेजी से बढ़ा दिया था।

15 से 20 फरवरी के बीच तेल निर्यात 30 लाख बैरल प्रतिदिन से ज्यादा हो गया था, जो सामान्य से लगभग तीन गुना था। माना जा रहा है कि ईरान ने युद्ध शुरू होने से पहले ज्यादा से ज्यादा तेल बाहर भेजने की कोशिश की।

ईरान-इराक वॉर में खार्ग आइलैंड पर हमला हुआ था

खार्ग आइलैंड पहले भी कई बार रणनीतिक चर्चा का हिस्सा रहा है। 1979 के ईरान बंधक संकट के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर को सलाह दी गई थी कि इस आइलैंड पर कब्जा कर लिया जाए, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।

1980 के दशक में राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन के समय अमेरिका ने ईरान की कुछ अन्य तेल सुविधाओं पर हमला किया था, लेकिन खार्ग आइलैंड को निशाना नहीं बनाया गया। हालांकि ईरान-इराक वॉर के दौरान इराकी हमलों में इस आइलैंड के तेल टर्मिनल को भारी नुकसान पहुंचा था, लेकिन बाद में ईरान ने इसे दोबारा बना लिया।

अभी तक हमला क्यों नहीं किया गया

एक्सपर्ट्स का कहना है कि खार्ग आइलैंड पर हमला करने से दुनिया भर के तेल बाजार में बड़ा संकट पैदा हो सकता है। तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं, जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है और खाड़ी क्षेत्र में युद्ध और फैल सकता है।

यही वजह है कि अभी तक अमेरिका और उसके सहयोगी देश पहले ईरान की सैन्य और न्यूक्लियर कैपिसिटी को कमजोर करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। इसलिए फिलहाल यह छोटा सा आइलैंड सीधे युद्ध का मैदान नहीं बना है, लेकिन आने वाले समय में जंग की दिशा तय करने में इसकी बड़ी भूमिका हो सकती है।

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ईरान बोला- एक लीटर तेल भी बाहर नहीं जाने देंगे:जो देश इजराइल-अमेरिका के राजदूतों को निकालेंगे, उनके जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने देंगे

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तेल अवीव/तेहरान,एजेंसी। अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का 11वां दिन हैं। इस बीच ईरान ने कहा है कि वह एक लीटर तेल भी बाहर नहीं जाने देगा। ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों के गुजरने को लेकर एक नई शर्त रखी है।

इजराइली मीडिया वाइनेट की रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान की सेना इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा है कि कुछ देशों के जहाजों को इस रास्ते से गुजरने दिया जा सकता है, लेकिन इसके लिए उन देशों को पहले इजराइल और अमेरिका के राजदूतों को अपने देश से निकालना होगा।

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का बहुत अहम समुद्री रास्ता है। हर साल दुनिया के करीब 20% तेल की सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है।

हालांकि अमेरिकी चैनल CNN ने कहा है कि ईरान इस रास्ते से गुजरने वाले तेल टैंकरों और व्यापारिक जहाजों पर सिक्योरिटी टैक्स यानी सुरक्षा शुल्क लगाने की योजना बना रहा है, खासकर उन जहाजों पर जो अमेरिका के सहयोगी देशों के हैं।

इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच जंग से जुड़ी तस्वीरें…

ईरान ने सोमवार को कुवैत में अमेरिकी एयरबेस को निशाना बनाकर मिसाइल लॉन्च की।

ईरान ने सोमवार को कुवैत में अमेरिकी एयरबेस को निशाना बनाकर मिसाइल लॉन्च की।

अमेरिकन नेवी ने सोमवार को फारस की खाड़ी में तीन ईरानी जहाजों पर हमला किया।

अमेरिकन नेवी ने सोमवार को फारस की खाड़ी में तीन ईरानी जहाजों पर हमला किया।

ईरान ने सोमवार रात को इजराइल पर 1 टन की वारहेड मिसाइलें दागीं।

ईरान ने सोमवार रात को इजराइल पर 1 टन की वारहेड मिसाइलें दागीं।

ईरान ने सोमवार को बहरीन की सरकारी तेल रिफाइनरी पर ड्रोन अटैक किया।

ईरान ने सोमवार को बहरीन की सरकारी तेल रिफाइनरी पर ड्रोन अटैक किया।

अमेरिकी आर्मी के सेंट्रल कमांड ने मंगलवार को ईरानी मिसाइल लॉन्चर्स पर हमले का फुटेज जारी किया।

अमेरिकी आर्मी के सेंट्रल कमांड ने मंगलवार को ईरानी मिसाइल लॉन्चर्स पर हमले का फुटेज जारी किया।

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इजराइल ने ईरान पर फिर हमले शुरू किए:तेहरान, इस्फहान समेत कई शहरों को निशाना बनाया, ईरान बोला- हमले जारी रहे तो बातचीत की गुंजाइश नहीं

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तेल अवीव/तेहरान,एजेंसी। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी जंग का आज दसवां दिन है। इजराइल ने एक बार फिर ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू किए हैं। इजराइली सेना के मुताबिक राजधानी तेहरान, इस्फहान और दक्षिणी इलाकों में ईरानी शासन से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाकर एयरस्ट्राइक किए जा रहे हैं।

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि जब तक हमले जारी हैं, तब तक बातचीत की कोई गुंजाइश नहीं है और ईरान निर्णायक जवाब देने पर ध्यान दे रहा है। लेबनान की राजधानी बेरूत के दक्षिणी उपनगरों में भी कई एयरस्ट्राइक की खबरें सामने आई हैं।

इस बीच टाइम्स ऑफ इजराइल ने बताया कि ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे मुजतबा खामेनेई घायल हो गए हैं। उन्हें बीती रात ईरान का नया सुप्रीम लीडर घोषित किया गया था।

35 साल से ईरान की सर्वोच्च सत्ता पर काबिज थे अली खामेनेई

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की 28 फरवरी को US-इजराइल के हमले में मौत हो गई थी।

अयातुल्ला 1989 में रुहोल्लाह खुमैनी के निधन के बाद से ईरान के सर्वोच्च नेता के पद पर काबिज थे। ईरान में 1979 की इस्लामिक क्रांति के दौरान, जब शाह मोहम्मद रजा पहलवी को हटाया गया तो खामेनेई ने क्रांति में बड़ी भूमिका निभाई थी।

इस्लामिक क्रांति के बाद खामेनेई को 1981 में राष्ट्रपति बनाया गया था। वह 8 साल तक इस पद पर रहे। 1989 में ईरान के सुप्रीम लीडर खुमैनी की मौत के बाद उन्हें उत्तराधिकारी बनाया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक अयातुल्ला धर्मगुरु की एक पदवी है।

ईरान के इस्लामिक कानून के मुताबिक, सुप्रीम लीडर बनने के लिए अयातुल्ला होना जरूरी है। यानी कि सुप्रीम लीडर का पद सिर्फ एक धार्मिक नेता को ही मिल सकता है।

इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच जंग से जुड़ी तस्वीरें…

कुवैत की राजधाकी कुवैत सिटी में शनिवार रात ईरानी ड्रोन अटैक के बाद एक बिल्डिंग में आग लग गई।

कुवैत की राजधाकी कुवैत सिटी में शनिवार रात ईरानी ड्रोन अटैक के बाद एक बिल्डिंग में आग लग गई।

ईरान की राजधानी तेहरान में शनिवार रात इजराइली हमले का फुटेज।

ईरान की राजधानी तेहरान में शनिवार रात इजराइली हमले का फुटेज।

ईरान ने शनिवार रात इजराइल पर क्लस्टर बम से हमला किया।

ईरान ने शनिवार रात इजराइल पर क्लस्टर बम से हमला किया।

ईरान की राजधानी तेहरान में शनिवार को तेल भंडार ठिकानों पर इजराइली हमलों के बाद फैला तेल शहर की नालियों में पहुंच गया है। इससे सड़कों के किनारे आग की नदी जैसे हालात बन गए।

ईरान की राजधानी तेहरान में शनिवार को तेल भंडार ठिकानों पर इजराइली हमलों के बाद फैला तेल शहर की नालियों में पहुंच गया है। इससे सड़कों के किनारे आग की नदी जैसे हालात बन गए।

लेबनान की बॉर्डर पर तैनात इजराइली टैंक। इजराइल लेबनान में ईरान समर्थक हिजबुल्लाह के खिलाफ हमला कर रहा है।

लेबनान की बॉर्डर पर तैनात इजराइली टैंक। इजराइल लेबनान में ईरान समर्थक हिजबुल्लाह के खिलाफ हमला कर रहा है।

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