छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ से गुजरने वाली 18 ट्रेनें कैंसिल:बिहार-गुजरात, महाराष्ट्र, हैदराबाद जाने वाले यात्री होंगे परेशान, 16 अगस्त से 24 दिन तक नहीं चलेंगी गाड़ियां
बिलासपुर,एजेंसी। रेलवे ने छत्तीसगढ़ से होकर चलने वाली 18 ट्रेनों को कैंसिल कर दिया है। वहीं, कई गाड़ियां बदले हुए रूट से चलाई जाएंगी, जबकि कुछ ट्रेनों को शॉर्ट टर्मिनेट किया गया है। बिलासपुर रेलवे जोन के चक्रधरपुर मंडल के झारसुगड़ा यार्ड में नॉन इंटरलॉकिंग काम के चलते 16 अगस्त से 10 सितंबर तक ट्रैफिक ब्लॉक रहेगा, जिसके चलते यात्री ट्रेनें प्रभावित हो रही हैं।
इससे बंगाल, बिहार, गुजरात, महाराष्ट्र, हैदराबाद जाने वाले यात्रियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। रेल प्रशासन ने बताया यार्ड के आधुनिकीकरण के लिए 24 दिनों तक कार्य किया जाएगा, जिसके चलते यात्री ट्रेनों को कैंसिल किया गया है।
इसके साथ ही दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर मंडल अंतर्गत गामहारीया जंक्शन-आदित्यपुर सेक्शन में रेल ट्रैक के आधुनिकीकरण का कार्य किया जा रहा है। इस काम के तहत ट्रैक रीलेइंग ट्रेन मशीन (TRT मशीन) से ट्रैक अपग्रेडेशन किया जाएगा, जो 15 जुलाई से 4 अक्टूबर 2025 तक चलेगा।
नहीं की गई वैकल्पिक व्यवस्था
रेलवे के इस फैसले से महीनों पहले रिजर्वेशन करवा चुके यात्री भी परेशान होंगे। रेलवे ने यात्रियों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं की है। पैसेंजर यात्रा शुरू करने से पहले नई ट्रेन समय सारणी और किसी भी बदलाव के लिए रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट या पूछताछ सेवा से संपर्क कर सकते हैं।

बारिश के सीजन में ट्रेनें कैंसिल कर रेलवे ने यात्रियों की मुसीबतें बढ़ा दी है।
परिवर्तित मार्ग से चलने वाली गाड़ियां
- 23, 25, 27, 29, 31 अगस्त और 8 सितंबर को गाड़ी संख्या 18477 पुरी–योगनगरी ऋषिकेश उत्कल एक्सप्रेस व्हाया कटक, सम्बलपुर सिटी, झारसुगड़ा रोड, ईब होकर चलेगी।
- 26, 28, 30 अगस्त और 1, 8, 9 सितंबर को गाड़ी संख्या 18478 योग नगरी ऋषिकेश उत्कल एक्सप्रेस व्हाया ईब, झारसुगड़ा रोड, सम्बलपुर सिटी और कटक होकर चलेगी।
शार्ट टर्मिनेट/ बीच में रद्द होने वाली गाड़ियां
- 23, 25 अगस्त से 1, 8 और 9 सितंबर तक आरा से चलने वाली गाड़ी संख्या 13288 आरा- दुर्ग साउथ बिहार एक्सप्रेस राउरकेला और दुर्ग के बीच रद्द रहेगी।
- 24, 26 अगस्त से 2, 9 और 10 सितंबर को दुर्ग से आरा के मध्य चलने वाली गाड़ी संख्या 13287 दुर्ग–आरा एक्सप्रेस दुर्ग और राउरकेला के बीच रद्द रहेगी।
छत्तीसगढ़
सुकमा : मरीज को मिला समय पर उपचार, सुकमा के चिकित्सकों की टीम ने दिखाई तत्परता
जिला अस्पताल में मौत के मुंह से लौटाई महिला की सांसें
सुकमा। सुकमा जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवा की तत्परता और आधुनिक संसाधनों की उपलब्धता का एक सराहनीय उदाहरण सामने आया है। सिविल सर्जन डॉ. एमआर कश्यप से प्राप्त जानकारी के अनुसार छिंदगढ़ विकासखंड के कुन्ना निवासी 38 वर्षीय श्रीमती पाली कवासी को गंभीर अवस्था में जिला अस्पताल सुकमा में भर्ती कराया गया।

देरी से अस्पताल पहुंचने के कारण स्थिति अत्यंत जोखिमपूर्ण थी और तत्काल सर्जरी आवश्यक हो गई। अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुजा ने बिना समय गंवाए तुरंत एलएससीएस (सीजर) ऑपरेशन कर मरीज का उपचार प्रारंभ किया। हालांकि ऑपरेशन के दौरान मृत बच्चा पैदा होने से महिला की स्थिति और अधिक जटिल हो गई।
महिला की हालत लगातार बिगड़ती चली गई और रेफर करने की तैयारी की जा रही थी। इसी दौरान महिला का श्वास बंद सा हो गया, साथ ही नाड़ी और हृदय की धड़कन भी थम सी गई। ऐसे संकट की घड़ी में जिला अस्पताल की मेडिकल टीम ने त्वरित निर्णय लेते हुए महिला को दो बार सीपीआर दिया और तत्काल वार्ड में शिफ्ट कर आधुनिक वेंटीलेटर की सहायता से उपचार शुरू किया गया। इसके बाद महिला को दो यूनिट रक्त चढ़ाया गया।
डॉक्टरों की सतर्कता और उपलब्ध संसाधनों के कारण महिला की जान बचा ली गई। आज श्रीमती पाली कवासी पूरी तरह स्वस्थ हैं और जिला अस्पताल के डॉक्टरों व स्टाफ के प्रयासों की सराहना कर रही हैं।

छत्तीसगढ़
जशपुर : राज्यपाल रमेन डेका ने जशपुर के मातृत्व वन में किया सीता अशोक के पौधे का रोपण
जशपुर। राज्यपाल रमेन डेका ने सर्किट हाउस जशपुर के मातृत्व वन में एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत सीता अशोक के पौधे का रोपण कर पर्यावरण के संरक्षण और संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया।
इस अवसर पर कलेक्टर रोहित व्यास वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक लाल उमेद सिंह, जिला पंचायत सीईओ अभिषेक कुमार और वनमंडला अधिकारी शशि कुमार और अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

लगभग 2 एकड़ क्षेत्र में विकसित इस मातृत्व वन में 400 से अधिक विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण किया गया है, जो पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक संवेदनाओं के अद्वितीय समन्वय का उदाहरण प्रस्तुत करता है। मातृत्व वन में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत जिले के जनप्रतिनिधियों द्वारा अपनी माताओं के नाम पर पौधरोपण किया गया है। इस पहल ने अभियान को भावनात्मक और सामाजिक रूप से विशेष महत्व प्रदान किया है।
राज्यपाल रमेन डेका ने इस अवसर पर कहा कि माँ हमारे जीवन की प्रथम गुरु होती हैं और उनका स्थान सर्वोच्च होता है। ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के माध्यम से हम माँ के प्रति सम्मान को प्रकृति से जोड़ रहे हैं। यह पहल आने वाली पीढ़ियों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ सामाजिक मूल्यों को भी सुदृढ़ करेगी। उन्होंने कहा कि मातृत्व वन जैसी पहल न केवल हरित क्षेत्र बढ़ाने में सहायक होगी, बल्कि समाज में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का भाव भी विकसित करेंगी।
मातृत्व वन के अंतर्गत पर्यावरणीय एवं औषधीय दृष्टि से महत्वपूर्ण पौधों का चयन कर उनका रोपण किया गया है। इनमें टिकोमा, झारुल, सीता अशोक, गुलमोहर, लक्ष्मीतरु, आंवला, बीजा, सिन्दूर, नागकेसरी, अर्जुन एवं जामुन जैसी प्रजातियाँ प्रमुख हैं। ये पौधे न केवल पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में सहायक होंगे, बल्कि आने वाले समय में औषधीय एवं जैव विविधता के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। मातृत्व वन की स्थापना का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना, माताओं के प्रति सम्मान को प्रकृति के माध्यम से अभिव्यक्त करना तथा नई पीढ़ी में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है। यह पहल ‘हर घर एक पेड़, हर पेड़ में माँ की ममता’ के संदेश को साकार करने की दिशा में एक सार्थक कदम है।

छत्तीसगढ़
जशपुर : राज्यपाल रमेन डेका ने जशपुर के केरेगांव होम-स्टे का किया अवलोकन

जशपुर। राज्यपाल रमेन डेका ने जशपुर प्रवास के दौरान शनिवार को जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल देशदेखा के समीप स्थित केरेगांव में विकसित होम-स्टे का अवलोकन किया। इस दौरान वे स्थानीय आदिवासी संस्कृति, जनजीवन और पारंपरिक आतिथ्य परंपरा से रूबरू हुए। होम-स्टे प्रवास के दौरान उन्होंने देशदेखा समूह की महिलाओं द्वारा पारंपरिक विधि से तैयार किए गए व्यंजनों का स्वाद चखा। राज्यपाल श्री डेका ने ग्रामीण परिवेश में विकसित होम-स्टे को प्रेरणादायक कदम बताया और कहा कि यह प्रयास न केवल ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देते हैं, बल्कि स्थानीय महिलाओं और ग्रामीण परिवारों की आजीविका को सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाते हैं।
इस दौरान स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने ‘जसक्राफ्ट’ ब्रांड के तहत छिंद एवं कांसा से निर्मित पारंपरिक आभूषण माला एवं झुमके राज्यपाल को भेंट किए। राज्यपाल श्री डेका ने स्थानीय महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पादों की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल कौशल विकास, रोजगार सृजन तथा आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान करेगी।

इस दौरान ‘देशदेखा क्लाइंबिंग कम्पनी’ के सदस्यों ने भी राज्यपाल से भेंट की। उन्होंने क्षेत्र में एडवेंचर स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने के प्रयासों की जानकारी देते हुए बताया कि यहां नियमित रूप से रॉक क्लाइंबिंग जैसे खेलों का आयोजन किया जाता है। राज्यपाल ने अधिकारियों को ऐसे खेलों को निरंतर सहयोग और प्रोत्साहन देने को कहा, ताकि पर्यटन को बढ़ावा मिले और अधिक से अधिक युवा इन गतिविधियों की ओर आकर्षित हों। इस दौरान कलेक्टर रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह, जिला पंचायत सीईओ अभिषेक कुमार,वनमंडलाधिकारी शशि कुमार सहित अन्य अधिकारीगण एवं ग्रामीणजन उपस्थित थे।

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