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75वां गणतंत्र दिवस, कर्तव्य पथ पर महिला शक्ति दिखी

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पहली बार शंखनाद से परेड की शुरुआत, ट्राई-सर्विस कंटिंजेंट की अगुआई महिला अफसरों ने की

नई दिल्ली, एजेंसी। 75वें गणतंत्र दिवस की परेड में कर्तव्य पथ पर महिला शक्ति, भारतीय फौजों की ताकत और संस्कृति-परंपरा की झलक देखने को मिली। – देश आज 75वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। सबसे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वॉर मेमोरियल गए और शहीदों को श्रद्धांजलि दी। मोदी ने यहां दो मिनट का मौन भी रखा। फिर मोदी कर्तव्य पथ पहुंचे। इस बार गणतंत्र दिवस समारोह में फ्रांस के प्रेसिडेंट इमैनुएल मैक्रों चीफ गेस्ट थे। वे इस समारोह में भाग लेने वाले फ्रांस के छठे राष्ट्रपति हैं। इसके बाद राष्ट्रपति भवन से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और फ्रांस के प्रेसिडेंट इमैनुएल मैक्रों रवाना हुए। दोनों नेता बग्घी से निकले। 1984 के बाद (40 साल बाद) ये पहली बार है, जब गणतंत्र दिवस के मौके पर राष्ट्रपति बग्घी से कर्तव्य पथ गए। राष्ट्रपति मुर्मू ने कर्तव्य पथ पर दूसरी बार तिरंगा फहराया। ध्वजारोहण के बाद कर्तव्य पथ पर परेड हुई। इस बार परेड में नारी शक्ति की झलक देखने को मिली। सबसे पहले 100 महिला आर्टिस्ट्स ने म्यूजिशियन शंख, नगाड़े और दूसरे पारंपरिक वाद्य-यंत्रों के साथ परेड की शुरुआत की। पहली बार ट्राई-सर्विस कंटिंजेंट, पैरा-मिलिट्री ग्रुप्स और पुलिस की टुकडिय़ां को महिलाओं ने लीड किया। बीएसफ,सीआरपीएफ,और एसएसबी की महिलाकर्मियों ने 350सीसी रॉयल एनफील्ड (बुलेट) पर सवार होकर करतब दिखाए। फ्लाईपास्ट में एयरफोर्स के 51 एयरक्राफ्ट हिस्सा लिया। इनमें 29 फाइटर प्लेन, 7 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, 9 हेलिकॉप्टर और एक हेरिटेज एयरक्राफ्ट थे। फ्लाईपास्ट में पहली बार फ्रांसीसी सेना के राफेल भी शामिल हुए। राष्ट्रपति मुर्मू और फ्रांस के प्रेसिडेंट राष्ट्रपति भवन से बग्घी में कर्तव्य पथ पहुंचे। 1984 में बाद ये पहला मौका था, जब भारत की राष्ट्रपति पारंपरिक बग्घी में गणतंत्र दिवस समारोह के लिए निकलीं। ध्वजारोहण के बाद 100 महिला आर्टिस्ट्स ने पारंपरिक वाद्य यंत्र बजाकर परेड का आगाज किया गया। आर्मी ऑफिसर कैप्टन संध्या ने तीनों टुकडिय़ों का नेतृत्व किया। कैप्टन शरण्या राव, सब लेफ्टिनेंट अंशु यादव और फ्लाइट लेफ्टिनेंट सृष्टि राव ने अपने-अपने दल की अगुआई की। कर्तव्य पथ पर पहली बार बीएसएफ का महिला ब्रास बैंड और महिला टुकड़ी ने नारी शक्ति के बढ़ते कदमों को दिखाया। भारतीय वायुसेना के मार्चिंग दल का नेतृत्व स्क्वाड्रन लीडर रश्मि ठाकुर ने किया। इसमें स्क्वाड्रन लीडर सुमिता यादव, स्क्वाड्रन लीडर प्रतीति अहलूवालिया और फ्लाइट लेफ्टिनेंट किरीट रोहिल शामिल थे। दिल्ली पुलिस के महिला बैंड ने पहली बार परेड में भाग लिया। इसका नेतृत्व बैंडमास्टर सब इंस्पेक्टर रुयांगुनुओ केन्से ने किया। सेना की 11 इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर बटालियन की लेफ्टिनेंट कर्नल अंकिता चौहान मोबाइल ड्रोन जैमर सिस्टम की टुकड़ी का नेतृत्व किया।

झांकियों की थीम थी- भारत लोकतंत्र की मातृका, साडिय़ों की भी प्रदर्शनी

इस बार गणतंत्र दिवस की थीम विकसित भारत और भारत-लोकतंत्र की मातृका (जननी) थी। इस साल झांकियों की थीम- ‘भारत-लोकतंत्र की मातृका’ रखी गई थी। कर्तव्य पथ पर 16 राज्यों के साथ 9 मंत्रालयों/विभागों की झांकियां प्रदर्शित की गई। देश की टेक्सटाइल संस्कृति को सबके सामने लाने और बढ़ावा देने के मकसद से साडिय़ों की प्रदर्शनी लगाई गई। इस विशेष प्रदर्शनी का नाम अनंत सूत्र रखा गया। प्रदर्शन में 18 राज्यों से लाई गईं 1900 साडिय़ां रखी गईं। इन साडिय़ों में विभिन्न राज्यों की परंपरा को दर्शाया गया। कर्तव्य पथ के दोनों किनारों पर लकड़ी के फ्रेम में इन साडिय़ों को प्रदर्शित किया गया। इस प्रदर्शनी के लिए इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र नोडल एजेंसी है। इन साडिय़ों पर एक क्यूआर कोड लगाया गया था, जिसे स्कैन करने पर सीधे इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र की वेबसाइट पर पहुंचा जा सकता है और साड़ी के बारे में जानकारी हासिल की जा सकेगी। कश्मीर और पंजाब की कोटा पंथी कला को प्रदर्शित करने वाली 150 साल पुरानी साड़ी भी इस प्रदर्शनी का हिस्सा है।

फ्लाईपास्ट में तंगैल फॉर्मेशन दिखाया गया

फ्लाईपास्ट में एयरफोर्स के तीन विमानों ने तंगैल फॉर्मेशन बनाया। इसमें हेरिटेज विमान डाकोटा आगे चला। उसके पीछे एक लाइन में दो डॉर्नियर डीओ-228 विमान थे। तंगैल फॉर्मेशन 1971 की लड़ाई में भारतीय वायुसेना के पराक्रम का प्रतीक था। 11 दिसंबर 1971 को बांग्लादेश के तंगैल से करीब 8 किमी दूरी पर भारतीय सेना ने 700 जवानों को पैराशूट से नीचे उतारा था। पाकिस्तान में इसकी खबर लगते ही हलचल मच गई थी।

सबसे ज्यादा ऊंचाई पर टेकऑफ करने वाला प्रचंड हेलिकॉप्टर

16,400 फीट की ऊंचाई तक हथियार लेकर उड़ान भरने वाला लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर है। इसे भारतीय सेना ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी एचएएल के साथ मिलकर तैयार किया है।

44 सेकेंड में 12 रॉकेट्स दागने वाला पिनाक रॉकेट लॉन्चर

भारत में बना पिनाक मल्टी बैरल मिसाइल लॉन्चर अपनी स्पीड की वजह से बेहद खतरनाक माना जाता है। इसका नाम भगवान शिव के धनुष पिनाक के नाम पर रखा गया है।

4 किलोमीटर दूर तक अचूक निशाना लगा सकती है नाग

नाग एक मेड इंन इंडिया एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल है। जिसे हेलिना भी कहते हैं। इसे डीआरडीआ ने बनाया है। रूस से टेक्नोलॉजी लेकर भारत में तैयार टी -90 भीष्म टैंक

भारत ने रूस से 310 टी -90 टैंक खरीदने का सौदा किया था। 124 टैंक भारत ने रूस से सीधे तैयार करके मंगवाए थे, जबकि बाकी को यहां तैयार किया गया।

ध्रुव हेलिकॉप्टर में बैठ सकते हैं 2 पायलट और 12 जवान

एडवांस्ड लाइट हेलिकॉप्टर ध्रुव को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेडने तैयार किया है। अब इस हेलिकॉप्टर में भी हथियार लगाया जा रहा है, जिससे इसका इस्तेमाल जंग के दौरान भी हो सके।

पहाड़ी क्षेत्रों में गेमचेंजर हो जाते हैं बीएमपी-2 टैंक

भारत ने ये इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल रूस से मंगवाए हैं, लेकिन अब भारत इसे खुद से तेलंगाना के मेडक स्थित हथियार फैक्ट्री में बनाता है।

इजराइल की मदद से डीआरडीओ ने तैयार की एमआर-एसएएम मिसाइल

यह सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल है जो आर्मी वेपन सिस्टम में कमांड पोस्ट, मल्टी फंक्शन राडार, मोबाइल लॉन्चर सिस्टम से लैस है।

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विनिर्माण क्षेत्र की गतिविधियों में वृद्धि फरवरी में चार महीने के उच्चतम स्तर पर

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नई दिल्ली,एजेंसी। देश की विनिर्माण क्षेत्र की गतिविधियों में वृद्धि फरवरी में चार महीने के उच्चतम स्तर 56.9 पर पहुंच गई। सोमवार को जारी मासिक सर्वेक्षण में यह बात सामने आई। घरेलू मांग में मजबूत सुधार के कारण यह बढ़ोतरी हुई, हालांकि नए निर्यात ऑर्डर की वृद्धि में कमी देखी गई। मौसमी रूप से समायोजित एचएसबीसी इंडिया विनिर्माण खरीद प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) जनवरी के 55.4 से बढ़कर फरवरी में चार महीने के उच्चतम स्तर 56.9 पर पहुंच गया। पीएमआई की भाषा में 50 से ऊपर का अंक विस्तार जबकि 50 से नीचे का अंक संकुचन दर्शाता है। एचएसबीसी की मुख्य अर्थशास्त्री (भारत) प्रांजुल भंडारी ने कहा, ”फरवरी महीने में भारत के विनिर्माण क्षेत्र की गतिविधियों में पहले से ज्यादा तेजी देखने को मिली। मजबूत घरेलू ऑर्डर की वजह से उत्पादन लगातार दूसरे महीने भी तेज गति से बढ़ा।” 

सर्वेक्षण में कहा गया, “समिति के सदस्यों के अनुसार, काम करने की दक्षता में सुधार, बाजार में मजबूत मांग, नए ऑर्डर में बढ़ोतरी और तकनीक में निवेश की वजह से उत्पादन में कुल मिलाकर अच्छी बढ़त दर्ज की गई।” एक क्षेत्र जहां वृद्धि में कुछ कमी आई, वह नए निर्यात ऑर्डर रहे। हालांकि, जिन कंपनियों की विदेशों में बिक्री बढ़ी, उन्होंने एशिया, यूरोप, पश्चिम एशिया और अमेरिका से ऑर्डर मिलने की बात कही। भंडारी ने कहा, “नए निर्यात ऑर्डर में वृद्धि ने 2025 के मध्य में शुरू हुई धीमी गति को जारी रखा, जिससे विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार सृजन कुछ हद तक सीमित हो गया।” 

कुल नए ऑर्डर में लगातार तेज बढ़ोतरी होने के कारण भारत के विनिर्माताओं ने उत्पादन बढ़ाने और भंडारण करने के लिए अतिरिक्त कच्चे माल की खरीद की। काम का दबाव बढ़ने पर कंपनियों ने कच्चे माल की खरीद तेज की, अपना भंडार बढ़ाया और अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति भी की। आने वाले एक वर्ष के लिए उत्पादन को लेकर कंपनियों का रुख सकारात्मक बना हुआ है। लगभग 16 प्रतिशत कंपनियों ने उत्पादन बढ़ने का अनुमान जताया है, जबकि एक प्रतिशत से भी कम कंपनियों को गिरावट की आशंका है।  

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Gold Bangle Cost: 18 कैरेट vs 14 कैरेट: 2 तोले के सोने के कड़े बनवाने में कितना आएगा खर्चा

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मुंबई, एजेंसी। अगर आप अपनी कलाई की शोभा बढ़ाने के लिए सोने के कड़े (Bangles) बनवाने की सोच रहे हैं, तो केवल डिजाइन देखना काफी नहीं है, बल्कि सोने के ‘गणित’ को समझना भी बेहद जरूरी है। भारतीय बाजार में सोने की आसमान छूती कीमतों के बीच 14 कैरेट और 18 कैरेट के विकल्पों ने ग्राहकों को उलझन में डाल दिया है। एक तरफ जहाँ शुद्धता का मोह है, वहीं दूसरी तरफ मजबूती और बजट की बात है। अगर आप दो तोले यानी लगभग 20 ग्राम वजन के कड़े बनवाने का मन बना चुके हैं, तो खरीदारी से पहले यह जान लें कि आपकी जेब पर कितना असर पड़ने वाला है और कौन सा विकल्प आपके लिए सबसे सटीक साबित होगा।

18 कैरेट सोने का लग्जरी और प्रीमियम अनुभव
18 कैरेट सोना उन लोगों के लिए बेहतरीन विकल्प है जो शुद्धता और चमक से समझौता नहीं करना चाहते। इसमें 75% शुद्ध सोना होता है, जो इसे एक प्रीमियम लुक और बेहतरीन रीसेल वैल्यू देता है। वर्तमान मार्केट रेट के हिसाब से देखें तो 18 कैरेट सोने की कीमत ₹12,981 प्रति ग्राम के करीब है। इस आधार पर यदि आप दो तोले के कड़े बनवाते हैं, तो मेकिंग चार्ज और 3% जीएसटी को मिलाकर इसकी कुल लागत ₹3,50,000 से ₹3,70,000 के बीच बैठने वाली है। हालांकि यह 14 कैरेट के मुकाबले थोड़ा महंगा जरूर है, लेकिन इसकी प्राकृतिक पीली चमक और लंबे समय तक बनी रहने वाली वैल्यू इसे निवेश के लिहाज से भी खास बनाती है।

14 कैरेट सोना: मजबूती और बजट का बेजोड़ संगम
जो लोग रोजाना पहनने के लिए मजबूत गहने चाहते हैं, उनके लिए 14 कैरेट सोना एक स्मार्ट चॉइस है। इसमें शुद्ध सोने की मात्रा 58.3% होती है, जिसकी वजह से यह काफी कठोर और टिकाऊ होता है। रोजमर्रा के काम के दौरान इसमें खरोंच आने या इसके मुड़ने का डर बहुत कम रहता है। कीमत के मोर्चे पर भी यह काफी राहत भरा है क्योंकि फिलहाल इसका रेट ₹9,843 प्रति ग्राम चल रहा है। दो तोले के कड़ों के लिए आपको लगभग ₹2,60,000 से ₹2,80,000 तक खर्च करने होंगे। कम कीमत में शानदार ज्वेलरी का शौक पूरा करने वालों के लिए यह एक किफायती और व्यावहारिक रास्ता है।

मेकिंग चार्ज और अन्य खर्चों का बारीकी से हिसाब
सोने के गहनों की अंतिम कीमत केवल सोने के भाव पर तय नहीं होती, बल्कि इसमें मेकिंग चार्ज और टैक्स का बड़ा हाथ होता है। ज्वेलर्स आमतौर पर डिजाइन की जटिलता के आधार पर सोने की मूल कीमत का 8% से 25% तक मेकिंग चार्ज वसूलते हैं। अगर आंकड़ों में बात करें तो 18 कैरेट के लिए यह ₹600 से ₹900 प्रति ग्राम और 14 कैरेट के लिए ₹500 से ₹800 प्रति ग्राम तक जा सकता है। दो तोले के कड़ों पर केवल मेकिंग चार्ज ही ₹14,000 से ₹21,000 तक जुड़ सकता है। इसके अलावा, पूरे बिल पर सरकार को 3% जीएसटी देना अनिवार्य है। साथ ही कुछ ज्वेलर्स मैन्युफैक्चरिंग के दौरान होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए 1% से 3% तक वेस्टेज चार्ज भी जोड़ते हैं, इसलिए खरीदारी से पहले इन सभी छिपे हुए खर्चों पर ज्वेलर से खुलकर बात करना आपके लिए फायदेमंद रहेगा।

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Gold Market में अचानक सन्नाटा, रुक गई सोने-चांदी की सप्लाई? अटके शिपमेंट

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मुंबई, एजेंसी। वैश्विक गोल्ड मार्केट में 2 मार्च 2026 की सुबह अचानक हलचल मच गई। पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव और ईरान-अमेरिका/इजराइल टकराव की खबरों ने सप्लाई चेन को झटका दिया। कुछ ही घंटों में दुबई से लेकर एशियाई रिटेल बाजारों तक सोने और चांदी की आवाजाही प्रभावित होने लगी, जिससे बुलियन बाजार में बेचैनी बढ़ गई। एयरस्पेस प्रतिबंध और अटकी फिजिकल शिपमेंट के कारण ट्रेडर्स और आयातक अनिश्चितता में हैं, जबकि कीमतों में तेजी ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है।

गोल्ड शिपमेंट अटकी

दुनिया के प्रमुख गोल्ड ट्रेडिंग हब्स में गिने जाने वाले Dubai में कई फ्लाइट्स रद्द कर दी गईं और एयरस्पेस प्रतिबंधों के कारण फिजिकल गोल्ड शिपमेंट अटक गई। रोजाना हजारों किलो सोने की आवाजाही देखने वाला यह शहर अचानक सुस्त पड़ गया। भारत के लिए यह स्थिति खास तौर पर अहम है, क्योंकि देश में आयात होने वाले सोने का लगभग 50-60% हिस्सा दुबई रूट से आता है। लंबा व्यवधान बाजार में सप्लाई टाइट कर सकता है।

इस बीच ध्यान Strait of Hormuz पर टिक गया, जो वैश्विक व्यापार का अहम समुद्री मार्ग है। बढ़ते तनाव के कारण शिपिंग मूवमेंट धीमा पड़ा और कुछ कार्गो जहाजों को रोकना पड़ा। तेल के साथ-साथ सोने जैसी कीमती धातुओं की लॉजिस्टिक्स भी दबाव में आ गईं। सप्लाई चेन के बाधित होने की आशंका से बाजार में बेचैनी बढ़ी।

खाड़ी क्षेत्र के देशों—United Arab Emirates, Saudi Arabia, Kuwait और Bahrain—में सुरक्षा अलर्ट के चलते एयरस्पेस बंद होने की खबरों ने हालात और जटिल कर दिए। गोल्ड और रफ डायमंड्स के कई कार्गो अटक गए, जिससे अंतरराष्ट्रीय ट्रेड चैनल अस्थायी रूप से ठहर गए।

कई गोल्ड शॉप्स में रोकी बिक्री

भारत में इसका असर तेजी से दिखा। पुणे समेत कई सर्राफा बाजारों में बुलियन डीलर्स ने सीमित बिक्री शुरू कर दी या अस्थायी रूप से सौदे रोक दिए। स्टॉक घटने लगा और नई खेप कब पहुंचेगी, इस पर स्पष्टता नहीं थी। खरीदार बढ़ती कीमतों से चौंक गए, जबकि व्यापारी सप्लाई की अनिश्चितता से चिंतित दिखे। इसी तरह Buriram (थाईलैंड) में भी कई गोल्ड शॉप्स ने एहतियातन बिक्री रोक दी और डिस्प्ले खाली कर दिए।

कुल मिलाकर, क्षेत्रीय तनाव का असर अब सीधे वैश्विक गोल्ड सप्लाई नेटवर्क पर दिखने लगा है, जिससे आने वाले दिनों में कीमतों और उपलब्धता—दोनों पर दबाव बना रह सकता है।

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