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5 August को मोदी सरकार के वो बड़े फैसले जो बन गए इतिहास

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नई दिल्ली ,एजेंसी। केंद्र सरकार वक्फ बोर्ड को नियंत्रित करने वाले 1995 के कानून में संशोधन करने के लिए संसद में एक बिल लेकर आने वाली है। इसके बाद एक बार फिर लोगों के जहन मे पांच अगस्त (5 August) की तारीख घूमने लगी है। दरअसल, केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बनने वाली बीजेपी सरकार ने पांच अगस्त के दिन कई बड़े फैसले लिए हैं। इसके बाद हर वर्ष 5 अगस्त की चर्चा जोरों-शोरों से चलती है। पांच अगस्त की तारीख में सरकार द्वारा किए गए ऐतिहासिक काम…

आपको बता दें कि वर्ष 2019 में लोकसभा के चुनाव हुए। इस चुनाव में जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाने का मुद्दा जम्मू-कश्मीर राज्य के गठन के बाद से ही चला आ रहा है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इसको शुरू से ही अपने घोषणापत्र का मुद्दा बनाकर रखा था। भारतीय जनता पार्टी का 1980 में गठन हुआ। 90 के दशक में जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडितों पर हुए हमलों के बाद बीजेपी ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने का ऐलान किया। बीजेपी ने नारा दिया एक ‘देश में दो विधान, दो निशान नहीं चलेंगे। बीजेपी की एक और लाइन थी। जहां हुए बलिदान मुखर्जी वो कश्मीर हमारा है। साल दर साल निकलते चले गए। लेकिन अनुच्छेद 370 का मुद्दा जस का तस बना हुआ था।

2014 में केंद्र में बीजेपी की सरकार बनने के बावजूद अनुच्छेद 370 को नहीं हटा पाई। इसके बाद लोगों के मन में सवाल उठने लगा कि यह सिर्फ राजनीतिक नारा है। लेकिन फरवरी 2019 में पाकिस्तान ने पुलवामा में आतंकी हमला कर दिया। इस हमले में भारतीय सेना के 44 जवान शहीद हो गए। भारत ने भी एयर स्ट्राइक कर इसका मुंहतोड़ जवाब दिया और बालाकोट में कई आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया। इसके बाद देश में नरेंद्र मोदी के लिए लोगों के मन में विश्वास और दृढ़ हो गया। 2019 में अप्रैल-मई में लोकसभा के चुनाव हुए। लोगों ने बीजेपी ने 303 सीटें और एनडीए के खाते में 351 सीटें आईं। नरेंद्र मोदी दूसरी बार प्रधानमंत्री बने। तत्कालीन बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को गृह मंत्री बनाया गया।

इसके बाद कुछ महीनों बाद अमरनाथ की यात्रा शुरू हुई। लेकिन बीच में ही अमरनाथ की यात्रा को यह कहकर रोक लगा दी कि यहां आतंकी हमला होने की संभावना है। अमरनाथ यात्रा पर गए सभी भारतीयों को तुरंत जम्मू-कश्मीर छोड़ने की एडवाइजरी जारी की गई। इतना ही नहीं जम्मू-कश्मीर में आए पर्यटकों को भी घाटी छोड़ने को कहा गया। बड़ी संख्या में अर्धसैनिक बलों और सेना की तैनाती की गई। लेकिन अभी तक कोई ये नहीं समझ पा रहा था कि यह सब हो क्यों रहा है।

5 अगस्त 2019 अनुच्छेद 370 खत्म
5 अगस्त 2019 की सुबह को जम्मू-कश्मीर में बड़ा बदलाव आने वाला था। गृह मंत्री अमित शाह राज्यसभा में एक बिल लेकर आए। उन्होंने राज्यसभा में बिल को टेबल किया। जिसमें जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35ए को हटाने का प्रावधान था। इसके अलावा एक और बिल लाया गया, जिसमें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाने का प्रावधान था। दोनों बिल राज्यसभा से पास हुए। इसके बाद दोनों बिलों लोकसभा में रखा गया। लोकसभा में बीजेपी के पास पूर्ण बहुमत होने के साथ ही बिल आसानी से पास हो गए और अनुच्छेद 370 और 35ए इतिहास बन गए।

5 अगस्त 2020 को राम मंदिर निर्माण की नींव रखी गई
इसके बाद वर्ष 2020 में अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण की नींव रखी गई। तारीख 5 अगस्त ही थी। 5 अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में राम जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर की नींव रखी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 जनवरी 2024 को भव्य राम मंदिर का उद्घाटन किया। आपको बता दें कि नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की पीठ ने 3:2 के बहुमत से अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। आज के चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ भी राम मंदिर पर फैसला सुनाने वाली संवैधानिक पीठ का हिस्सा थे। तत्कालीन CJI रंजन गोगोई की पीठ ने यह फैसला दिया था। करीब 500 वर्षों से चली आ रहे एक और विवाद का निपटारा हो गया।

अब एक बार फिर सरकार वक्फ बोर्ड को नियंत्रित करने वाले 1995 के कानून में संशोधन करने के लिए संसद में एक विधेयक लाने वाली है ताकि इनके कामकाज में अधिक जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके तथा इन निकायों में महिलाओं की अनिवार्य भागीदारी हो सके। सूत्रों ने यह जानकारी दी।

माना जा रहा कि सरकार पांच अगस्त यानी सोमवार को इसे संसद में पेश कर सकती है। गृह मंत्री अमित शाह बिल को संसद में रख सकते हैं। इससे पहले बिल को कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है। सूत्रों ने रविवार को बताया मौजूदा कानून में 40 से अधिक बदलावों वाला संशोधन विधेयक मौजूदा संसद सत्र में लाया जा सकता है। सूत्रों ने बताया कि सरकार की योजना विधेयक को संसद में पेश किए जाने के बाद लंबित छोड़ने की नहीं है। 

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Citroen Cars Discount : कार खरीदने का शानदार मौका! Citroen ने इन गाड़ियों पर किया डिस्काउंट का ऐलान

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मुंबई, एजेंसी। Citroen ने अपने ग्राहकों के लिए चुनिंगा गाड़ियों पर डिस्काउंट का ऐलान किया है। ये डिस्काउंट मॉडल के आधार पर दिए जाएंगे और ग्राहक इसका फायदा 30 जून तक उठा सकते हैं। डिटेल में जानते हैं इन डिस्काउंट के बारे में-

Citroen Basalt 

Basalt कूप-SUV पर इस महीने 1.4 लाख रुपये तक का डिस्काउंट मिल रहा है। इसमें 82hp, 115Nm वाला 1.2-लीटर नैचुरली एस्पिरेटेड (NA) पेट्रोल इंजन या 110hp, 190Nm वाला 1.2-लीटर टर्बोचार्ज्ड पेट्रोल इंजन मिलता है। NA इंजन के साथ 5-स्पीड मैनुअल ट्रांसमिशन मिलता है, जबकि टर्बो-पेट्रोल इंजन 6-स्पीड मैनुअल या 6-स्पीड ऑटोमैटिक गियरबॉक्स के साथ आता है। ऑटोमैटिक गियरबॉक्स के साथ, टर्बो-पेट्रोल इंजन 205Nm का ज़्यादा टॉर्क देता है। मार्केट में इसकी कीमत 8.55 लाख रुपये से 13.75 लाख रुपये की के बीच है।

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Citroen Aircross 

Citroen Aircross पर कंपनी इस महीने 1.4 लाख रुपये तक का डिस्काउंट दे रही है। अपने सेगमेंट में यह एकमात्र 7 सीटर एसयूवी है। इसकी कीमत 8.89 लाख रुपये से 13.99 लाख रुपये तक जाती है।

 Citroen C3 

Citroen C3 की खरीदी करने पर आप 1.1 लाख रुपए तक की बचत कर सकते हैं। इसकी कीमत 4.99 लाख रुपये से 9.60 लाख रुपये के बीच की है।

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Tata के iPhone प्लांट पर पर्यावरण नियमों के उल्लंघन का आरोप, बंद हो सकती है फैक्ट्री

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मुंबई, एजेंसी। भारत में iPhone निर्माण से जुड़े एक प्रमुख संयंत्र को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। तमिलनाडु के होसुर स्थित टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के प्लांट पर आसपास की कृषि भूमि और भूजल को प्रदूषित करने के आरोप लगे हैं। मामले की जांच के बाद राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कंपनी से जवाब मांगा है और संतोषजनक स्पष्टीकरण न मिलने पर फैक्ट्री बंद करने तक की चेतावनी दी है। 

यह प्लांट Apple के iPhone के लिए बैक पैनल और अन्य महत्वपूर्ण पुर्जों का निर्माण करता है। पिछले कई महीनों से प्लांट के आसपास के किसानों ने शिकायत की थी कि फैक्ट्री से निकलने वाला अपशिष्ट जल के कारण उनकी खेती और जल स्रोत को प्रभावित कर रहा है। किसानों की शिकायत के बाद राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जांच शुरू की और अब मामला गंभीर रूप ले चुका है।

जांच के दौरान बोर्ड ने नोटिस में कहा कि फैक्ट्री परिसर के एक तालाब से निकला पानी आसपास के कृषि क्षेत्रों तक पहुंचा, जिससे भूजल प्रदूषण की आशंका पैदा हुई। बोर्ड ने यह भी आरोप लगाया कि दिसंबर 2025 में जारी निर्देशों के बावजूद कंपनी ने जरूरी सुधारात्मक कदम नहीं उठाए। इसी वजह से मई में जारी नोटिस में पूछा गया कि आखिर क्यों न यूनिट की बिजली आपूर्ति काट दी जाए और संचालन बंद कर दिया जाए। यह चेतावनी टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है।

टाटा ने आरोपों को किया खारिज 

वहीं, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने इन सभी आरोपों को खारिज किया है। कंपनी का कहना है कि उसने एक मान्यता प्राप्त स्वतंत्र प्रयोगशाला द्वारा कराई गई जांच में संयंत्र को सभी पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप पाया गया है। कंपनी ने दावा किया है कि वह पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों के हितों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है तथा प्रदूषण नियंत्रण अधिकारियों को अपना जवाब सौंप चुकी है।

पर्यावरण और उद्योग के बीच संतुलन की चुनौती

विशेषज्ञों का मानना है कि औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। एक तरफ भारत वैश्विक कंपनियों के लिए उत्पादन केंद्र बनने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय समुदायों और किसानों की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अब सभी की नजर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के बीच होने वाली आगे की कार्रवाई पर टिकी है।

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स्मार्टफोन की बिक्री में 35% की बड़ी गिरावट, कीमत बढ़ने से मांग पर दबाव

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नई दिल्ली, एजेंसी। देश में स्मार्टफोन की बढ़ती कीमतों का असर अब बिक्री पर साफ दिखाई देने लगा है। रिटेलरों का कहना है कि मई में मोबाइल की बिक्री में सालाना आधार पर रिकॉर्ड 30-35 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसकी वजह यह है कि मेमरी चिप की बढ़ती लागत की भरपाई के लिए कंपनियां नवंबर 2025 से लगातार कीमतों में बढ़ोतरी कर रही हैं। अभी कुल बिक्री में से 60 प्रतिशत हिस्सा ऑफलाइन का है, जबकि 40 प्रतिशत बिक्री ऑफलाइन के जरिए होती है। कुल मिलाकर ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह की बिक्री में भारी गिरावट आएगी।

काउंटरपॉइंट रिसर्च के अनुसार मई में शिपमेंट में सालाना आधार पर 15-20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। जून में भी इसी तरह की कमजोरी बने रहने की संभावना जताई गई है। साल 2026 की पहली तिमाही में मोबाइल शिपमेंट में गिरावट 3 प्रतिशत रही थी लेकिन दूसरी तिमाही में यह गिरावट 15 प्रतिशत से ज्यादा रहने का अनुमान है। 

रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी और मई के बीच स्मार्टफोन की औसत कीमत में 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह बढ़ोतरी पिछले साल हुई कीमतों में वृद्धि के अलावा है। रिटेलरों का कहना है कि कीमतें बढ़ने के बाद से कुछ मामलों में कुल असर 40-45 प्रतिशत तक रहा है।

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