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मॉरीशस की मोदी के 12 साल के रिकॉर्ड पर की बड़ी टिप्पणीः ‘सलाम…आप ग्लोबल साउथ की सबसे बुलंद आवाज’

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नई दिल्ली, एजेंसी। भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi के लगातार 12 वर्ष पूरे कर देश के सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने पर दुनिया भर से बधाइयों का सिलसिला जारी है। इसी कड़ी में मॉरीशस के विदेश मंत्री Dhananjay Ramful ने उनकी इस उपलब्धि को भारतीय जनता के अटूट विश्वास का प्रतीक बताया है।

‘भारत को बदलने वाले नेता हैं मोदी’
एएनआई को दिए एक विशेष साक्षात्कार में रामफुल ने कहा कि यह उपलब्धि प्रधानमंत्री मोदी के राजनीतिक जीवन का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। उन्होंने कहा कि मोदी को यह सम्मान इसलिए मिला है क्योंकि भारत की जनता ने लगातार उन पर भरोसा जताया है। रामफुल के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी केवल भारत के नेता नहीं बल्कि एक वैश्विक नेता हैं, जिन्होंने देश के विकास और परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मॉरीशस के विदेश मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढांचे और सामाजिक कल्याण के क्षेत्रों में ऐसे कार्यक्रम शुरू किए, जिनका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचा। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की नीतियों में समावेशी विकास की स्पष्ट झलक दिखाई देती है और यही उनकी लोकप्रियता का बड़ा कारण है।

‘ग्लोबल साउथ की आवाज बने मोदी’
रामफुल ने प्रधानमंत्री मोदी को वैश्विक दक्षिण (Global South) का मजबूत प्रतिनिधि बताते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा विकासशील देशों की चिंताओं और समस्याओं को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रमुखता से उठाया। उन्होंने विशेष रूप से भारत की G20 अध्यक्षता का उल्लेख करते हुए कहा कि यह विकासशील देशों के लिए एक ऐतिहासिक क्षण था।  रामफुल ने कहा कि मॉरीशस को G20 की बैठकों में आमंत्रित करना और African Union को G20 का स्थायी सदस्य बनाने में भारत की भूमिका इस बात का प्रमाण है कि मोदी केवल वादे नहीं करते, बल्कि उन्हें जमीन पर उतारते भी हैं।

भारत-मॉरीशस संबंधों को नई मजबूती
विदेश मंत्री ने भारत और Mauritius के बीच मजबूत होते संबंधों का श्रेय भी प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व को दिया। उन्होंने 2015 में मॉरीशस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी द्वारा शुरू किए गए SAGAR (Security and Growth for All in the Region) मिशन का उल्लेख करते हुए कहा कि इस पहल ने हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता और सहयोग को नई दिशा दी। रामफुल ने कहा कि भारत मॉरीशस का एक भरोसेमंद विकास साझेदार रहा है। हाल ही में मॉरीशस के प्रधानमंत्री Navin Ramgoolam की भारत यात्रा के दौरान नई वित्तीय सहायता की घोषणा की गई। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की मदद से मॉरीशस में कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं पूरी हुई हैं, जिनमें मेट्रो एक्सप्रेस और आधुनिक ईएनटी अस्पताल जैसी प्रमुख परियोजनाएं शामिल हैं।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर बढ़ती भारत की ताकत
प्रधानमंत्री मोदी के 12 वर्षीय कार्यकाल को भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका, आर्थिक विकास और कूटनीतिक प्रभाव के दौर के रूप में देखा जा रहा है। मॉरीशस के विदेश मंत्री की यह टिप्पणी भी इसी बात को रेखांकित करती है कि भारत अब केवल क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर प्रभावशाली भूमिका निभाने वाला देश बन चुका है।

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सस्ता होगा सोना, 20 हजार रुपए तक गिर सकते हैं दाम, एक्सपर्ट्स का अनुमान

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मुंबई, एजेंसी। साल 2026 की शुरुआत में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद अब सोने की कीमतों में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। जनवरी में अंतरराष्ट्रीय बाजार में 5,595 डॉलर प्रति औंस का ऑल-टाइम हाई का लेवल छूने के बाद सोना अब 27 फीसदी तक टूट चुका है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में सोने में 16 फीसदी तक और गिरावट आ सकती है, यदि यह अनुमान सही साबित होता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 3,400 से 3,500 डॉलर प्रति औंस के दायरे तक पहुंच सकता है। इसका असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिलेगा, जहां सोने की कीमतों में करीब 20,000 रुपए प्रति 10 ग्राम तक की गिरावट संभव बताई जा रही है।

कमोडिटी बाजार के जानकारों का कहना है कि पिछले दो वर्षों में सोने की कीमतों में असाधारण तेजी आई थी। ऐसे में मौजूदा गिरावट को तकनीकी करेक्शन के तौर पर देखा जा रहा है। उनका मानना है कि लंबी अवधि में सोने का रुख अब भी सकारात्मक बना हुआ है लेकिन निकट भविष्य में कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

क्यों सस्ता होगा सोना?

विशेषज्ञों के अनुसार, सोने पर दबाव बढ़ने की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ा भू-राजनीतिक तनाव है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे महंगाई और ब्याज दरों को लेकर चिंता बढ़ी है। इसके अलावा अमेरिकी डॉलर की मजबूती ने भी सोने की मांग को प्रभावित किया है। डॉलर मजबूत होने पर अन्य देशों के निवेशकों के लिए सोना महंगा हो जाता है, जिससे इसकी खरीदारी घटती है।

बाजार विश्लेषकों का मानना है कि 4,000 डॉलर प्रति औंस का स्तर सोने के लिए एक अहम सपोर्ट जोन है। हालांकि, यदि वैश्विक बाजारों में बिकवाली का दबाव और बढ़ता है तो कीमतें अस्थायी रूप से 3,500 डॉलर तक भी जा सकती हैं। इसके बावजूद लंबी अवधि के लिए सोने को लेकर विशेषज्ञ आशावादी बने हुए हैं। उनका अनुमान है कि अगले तीन वर्षों में सोना एक बार फिर नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ सकता है।

केंद्रीय बैंक लगातार गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे 

सोने को समर्थन देने वाले प्रमुख कारकों में दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की खरीदारी भी शामिल है। कई देशों के केंद्रीय बैंक लगातार अपने गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे हैं, जिससे बाजार में सोने की मांग बनी हुई है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के हालिया सर्वे के अनुसार, अधिकांश केंद्रीय बैंक अगले 12 महीनों में भी अपने स्वर्ण भंडार में वृद्धि करने की योजना बना रहे हैं। पिछले चार वर्षों में केंद्रीय बैंकों ने औसतन 1,000 टन सोना खरीदा है, जो पिछले दशक के औसत से कहीं अधिक है।

निवेशकों के लिए सलाह

का कहना है कि आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक जोखिम और महंगाई की आशंकाओं के बीच सोना अब भी सुरक्षित निवेश विकल्प बना हुआ है। ऐसे में अल्पकालिक गिरावट के बावजूद लंबी अवधि के निवेशकों के लिए कीमतों में आने वाली कमजोरी को चरणबद्ध खरीदारी के अवसर के रूप में देखा जा सकता है। हालांकि, निवेश से पहले बाजार की स्थिति और अपनी जोखिम क्षमता का आकलन करना जरूरी रहेगा।

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RBI के लक्ष्य से पार पहुंची महंगाई, जून में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 4.38%

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मुंबई, एजेंसी। जून 2026 में खुदरा महंगाई (Retail Inflation) बढ़कर 4.38 फीसदी पर पहुंच गई है। खाद्य पदार्थों और ईंधन की बढ़ती कीमतों, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और कमजोर मानसून की आशंकाओं के चलते महंगाई पर दबाव बना रहा। 6 महीनों में यह पहली बार है जब खुदरा महंगाई भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के टारगेट 4% के पार निकली है।

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 में खुदरा महंगाई दर 3.93 फीसदी थी, जो जून में बढ़कर 4.38 फीसदी हो गई।

RBI का क्या है महंगाई लक्ष्य?

भारतीय रिजर्व बैंक का लक्ष्य खुदरा महंगाई को 4 फीसदी पर बनाए रखना है। हालांकि, केंद्रीय बैंक को इसे 2 फीसदी से 6 फीसदी के दायरे में रखने की अनुमति है। यह लक्ष्य अवधि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक के लिए निर्धारित की गई है।

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देश का निर्यात जून में 15.5 प्रतिशत बढ़कर 40.41 अरब डॉलर पर, व्यापार घाटा 30.43 अरब डॉलर

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नई दिल्ली, एजेंसी। देश का निर्यात जून महीने में 15.5 प्रतिशत बढ़कर 40.41 अरब डॉलर रहा। इस दौरान व्यापार घाटा बढ़कर 30.43 अरब डॉलर हो गया। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, आयात जून माह में करीब 31 प्रतिशत बढ़कर 70.84 अरब डॉलर रहा। चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में निर्यात 15.92 प्रतिशत बढ़कर 129.32 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 19.89 प्रतिशत बढ़कर 216.18 अरब डॉलर हो गया। 

चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सोने का आयात बढ़कर 11.01 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले साल अप्रैल-जून में 7.49 अरब डॉलर था। 

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि जून में पश्चिम एशियाई देशों को भारत का निर्यात 7.29 प्रतिशत बढ़कर पांच अरब डॉलर हो गया। अग्रवाल ने कहा कि कच्चे तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और कीमती धातुओं के आयात बढ़ने के कारण कुल आयात बढ़ा है।

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