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कोरबा

आचार्यश्री मृदुलकांत शास्त्री की पत्रकारवार्ता, कहा-भगवत कृपा के साथ पितरों का आशीर्वाद भी जरूरी

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कोरबा। इन दिनों टीपी नगर स्थित आशीर्वाद प्वाइंट, पं. दीनदयाल सांस्कृतिक भवन में कबुलपुरिया परिवार का श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह महोत्सव का आयोजन चल रहा है। आज चौथे दिन कथा प्रारंभ होने से पूर्व दोपहर 12.00 बजे आचार्यश्री मृदुलकांत शास्त्री ने पत्रकारवार्ता ली और कहा कि भगवत कृपा के साथ पितरों का आशीर्वाद भी जरूरी है और संतानों को माता-पिता के जीवित रहने और मरने तक अपने धर्म का निर्वहन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि माता-पिता से बढक़र दुनिया में कोई नहीं होता। एक अच्छी संतान बनकर अपने कर्तव्यों पर पालन करने वाला इंसान सुख समृद्धि को प्राप्त करता है और ऐसे व्यक्ति के जीवन में कभी क्लेश नहीं आता और परिवार आबाद रहता है।

पवित्र है छत्तीसगढ़ की मिट्टी

आचार्यश्री शास्त्री ने कहा कि मैंने देश के कई राज्यों में प्रवचन करने गया लेकिन छत्तीसगढ़ की मिट्टी जैसी पवित्रता कहीं नहीं देखी। यहां के लोग जजमानों का ऐसा स्वागत और ऐसा लगाव देखकर मैं काफी अभीभूत हूं। छत्तीसगढ़ की माटी ही ऐसी है, कि यहां जो भी आएगा, यहां से जाने का मन नहीं करता। उन्होंने उड़ीसावासियों की भी प्रशंसा की।

उपदेश देने से पहले उसे अपने आचरण में लाएं, तभी उपदेश फलीभूत होगा

आचार्यश्री शास्त्री ने कहा कि आज धार्मिक उपदेश देने वाले अधिकांश वक्ता व्यवसायी हो गए हैं, यह दुर्भाग्य की बात है। उन्होंने एक प्रश्र के जवाब में कहा कि उपदेशक पहले अपने आचरण को चरित्रवान बनाएं और उपदेश दें तो वह ज्यादा सार्थक होगा। उन्होंने कहा कि जो परंपरा से जुड़ा नहीं और धार्मिक उपदेश देने लगा, ऐसे लोग ही आज ज्यादा व्यवसायी बन गए हैं। जो संप्रदाय से जुडक़र सनातन काल से उपदेश देते आ रहे हैं और पीढ़ी दर पीढ़ी भगवत भक्ति को अपनाकर कथा कह रहे हैं, ऐसे लोग कभी व्यवसायी नहीं बन सकते।

अपने पितरों के मोक्ष के लिए 13 दिन समय अवश्य निकालें

आचार्यश्री शास्त्री ने कहा कि आज मनुष्य इतना व्यस्त हो गया है कि वह अपने परिवार के लिए भी समय नहीं निकालपाता, यह दुर्भाग्य है। मैंने महानगरों में देखा है कि यदि घर के बुजूर्ग का निधन हो जाता है तो चार दिन में ही क्रियाकर्म संपन्न कर लेते हैं। उन्होंने कहा कि पितरों के मोक्ष के लिए दशगात्र और तेरहवीं तक कार्यक्रम जरूरी है। उन्होंने संतानों से आग्रह किया कि पितरों के मोक्ष के लिए 13 दिन का समय अवश्य निकालें।

कृष्ण भूमि की मुक्ति के लिए आंदोलन जरूरी नहीं

आचार्यश्री शास्त्री ने एक प्रश्र के जवाब में कहा कि कृष्ण भूमि मे कोई विवाद नहीं है और ना ही इसके लिए आंदोलन की जरूरत है। ब्रज भूमि में आज तक कोई हिंसा नहीं हुई और सभी धर्म के लोग सद्भाव पूर्वक रहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जो ब्रज भूमि के मूल निवासी हैं, मुस्लिम भी यज्ञ, कथा, मंदिर में सहयोग करते हैं। जो यहां के मूल निवासी नहीं, वे ही भडक़ाने की कोशिश करते हैं। वहां पहले से ही कृष्ण जन्मभूमि सेवा संस्थान ट्रस्ट बना हुआ है और बातचीत से कृष्ण भूमि मुक्त हो जाएगी। काशी विश्वनाथ मंदिर विवाद भी जल्द सुलझ जाएगा।

बिना नीति की हो गई है राजनीति

आचार्यश्री शास्त्री ने एक प्रश्र के जवाब में कहा कि आज की राजनीति ऐसी हो गई है, धर्म के आड़ में ऐसे लोग किसी तरह सत्ता तक पहुंचने की कोशिश में लोगों को लड़ाते हैं। उन्होंने कहा कि आज की राजनीति बिना नीति की हो गई है और सत्ता के लिए धर्म का दुरूपयोग करते हैं। उन्होंने कहा कि राम राज्य तभी आएगा जब सभी सनातन मिलकर देश के लिए काम करेंगे। उन्होंने कहा कि सनातन हमें क्षमा करना सिखाता है और क्षमा करने वाले से बड़ा कोई नहीं होता। उन्होंने एक प्रश्र के जवाब में कहा कि यदि कोई जगत जननी का अपमान करता है, तो वह क्षम्य योग्य नहीं होता और ऐसे लोग राजनीतिक फायदे के लिए दंगा भडक़ाते हैं, जो दुर्भाग्यजनक है।

धर्म गुरूओं को व्यक्ति पूजा से दूर रहना होगा

आचार्यश्री मृदुलकांत शास्त्री ने कहा कि आज व्यक्ति पूजा हावी हो गई है और धर्म गुरू भगवान की पूजा की प्रेरणा देने के बजाए स्वयं की पूजा के लिए लोगों को प्रेरित करते हैं, जो ठीक नहीं। उन्होंने कहा कि जो सर्वत्र हैं, जो सर्व ज्ञानी है, जो दुनिया का संचालन कर रहा है, उसकी पूजा होनी चाहिए, ना कि उपदेशक की। उन्होंने कहा कि वे 26 साल से धर्म उपदेश दे रहे हैं, लेकिन वे कभी भी व्यक्ति पूजा के समर्थक नहीं रहे। शंकराचार्य विवाद को लेकर कहा कि यह ऐसा पद है, जिसकी सब पूजा करते हैं, लेकिन इस पद के लिए विवाद नहीं होना चाहिए। प्रेसवार्ता में गोपाल अग्रवाल, सुभाष अग्रवाल, विनोद अग्रवाल, अनिल अग्रवाल, राकेश अग्रवाल, मामनचंद अग्रवाल, अशोक अग्रवाल, सतीश अग्रवाल, मुकेश अग्रवाल, विष्णु अग्रवाल, अजय अग्रवाल, भीम कुमार गुप्ता, रजनीश अग्रवाल सहित कबुलपुरिया परिवार के अन्य सदस्य उपस्थित थे।

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श्रद्धा महिला मंडल, एसईसीएल बिलासपुर द्वारा वृद्धाश्रम में निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन

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बिलासपुर/कोरबा। श्रद्धा महिला मंडल, एसईसीएल बिलासपुर द्वारा दिनांक 08 जून 2026 को माता रानी की कुटिया वृद्धाश्रम में निवासरत वृद्ध महिलाओं के लिए एक निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया।

यह कार्यक्रम श्रद्धा महिला मंडल की अध्यक्षा एवं एसईसीएल परिवार की प्रथम महिला श्रीमती शशि दुहन के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ।

इस अवसर पर मंडल की आदरणीय उपाध्यक्षगण भी उपस्थित रहीं। सभी ने वृद्धाश्रम में रह रही वृद्धजनों से आत्मीय संवाद कर उनका कुशलक्षेम जाना तथा उनका उत्साहवर्धन किया।

शिविर में* डॉ पारुली साहू एवं उनकी टीम द्वारा 25 वृद्धजनों का स्वास्थ्य परीक्षण कर आवश्यक परामर्श एवं मार्गदर्शन प्रदान किया* गया। शिविर में रक्तचाप (BP), नाड़ी (Pulse), CBC, RBS, HbA1c, लिवर प्रोफाइल, किडनी प्रोफाइल एवं लिपिड प्रोफाइल सहित विभिन्न जांचें निःशुल्क की गईं। स्वास्थ्य परीक्षण के उपरांत जरूरतमंद महिलाओं को निःशुल्क दवाइयों का वितरण किया गया।

कार्यक्रम के दौरान श्रीमती शशि दुहन ने वृद्धाश्रम की महिलाओं को हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया तथा उनके स्वास्थ्य की नियमित देखभाल हेतु प्रतिमाह स्वास्थ्य परीक्षण शिविर आयोजित करने की घोषणा की।
शिविर के उपरांत वृद्धाश्रम में निवासरत 25 बुजुर्गों को पौष्टिक नाश्ता एवं फल की टोकरियाँ वितरित की गईं, जिससे उनके प्रति स्नेह, सम्मान एवं अपनत्व का भाव व्यक्त किया जा सके।
इस सेवा कार्य में समिति की सदस्याओं ने भी सक्रिय सहभागिता निभाई।
यह स्वास्थ्य शिविर श्रद्धा महिला मंडल की सामाजिक सेवा, करुणा एवं जनकल्याण के प्रति प्रतिबद्धता का एक सराहनीय प्रयास रहा, जिससे वृद्धाश्रम की महिलाओं को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ प्राप्त हुआ तथा उनमें सुरक्षा एवं अपनत्व की भावना का संचार हुआ।

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क्षतिग्रस्त और अधूरी पुलिया-एप्रोच रोड से बारिश में आवाजाही होगी बाधित, ग्रामीणों को घूमकर जाना पड़ेगा

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कोरबा। क्षतिग्रस्त व अधूरी पुलिया-एप्रोच रोड से बारिश में फिर से आवाजाही बाधित होगी। इससे उपनगर बांकीमोंगरा, हरदीबाजार, चैतमा के ग्रामीणों को वैकल्पिक सड़क से घूमकर जाना पड़ेगा। बारिश में संपर्क टूटने पर स्कूली छात्रों, कामकाजी लोगों को सबसे अधिक परेशानी होगी, जो सड़क मार्ग से रोज आवाजाही करनी पड़ती है। हरदीबाजार से नेवसा, उतरदा, सिल्ली, बोईदा, निरतु की ओर आवाजाही के लिए लीलागर नदी पर बनी पुरानी पुलिया की ऊंचाई कम है। 24 घंटे से भी कम बारिश में नदी का जलस्तर बढ़ने पर पुलिया के ऊपर से पानी बहता है। इससे गांवों को संपर्क टूटने पर सबसे अधिक परेशानी नेवसा समेत आसपास गांवों के स्कूली छात्रों को होती है, जो हरदीबाजार व दीपका के स्कूलों में पढ़ाई करते हैं। यह सड़क हरदीबाजार को बलौदा सीपत व मस्तूरी से भी जोड़ती है, इस कारण यात्री बसें भी मार्ग से गुजरती है।

हरदीबाजार से नेवसा की दूरी लीलागर नदी का पुलिया पारकर 2 किलोमीटर है। वहीं रतिजा की ओर से बायपास सड़क से आवाजाही पर 5 किलोमीटर दूरी पड़ेगी। पुलिया की कम ऊंचाई के मद्देनजर नया पुल का निर्माण कराया है, जो बनकर तैयार हो गया है, लेकिन पुल के दोनों ओर की एप्रोच रोड अब तक नहीं बनाया है। सड़क पर मिट्‌टी पड़ी है। नौतपा की विदाई से मानसून भी अब करीब है। आने वाले दिनों प्री-मानसून बारिश की संभावना है। एप्रोच रोड को पुल के लेवल के हिसाब से निर्माण नहीं कराने पर वाहनों से आवाजाही मुश्किल होगी। पिछले साल बारिश में पश्चिम क्षेत्र बांकीमोंगरा के + लीलागर नदी पर निर्मित पुल का अधूरा एप्रोच रोड।

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कोरबा

लो वोल्टेज और कटौती पर ग्रामीणों का हल्लाबोल

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कोरबा/पाली। 5 ग्राम पंचायतों में बिजली आपूर्ति की लचर व्यवस्था पर ग्रामीणों ने पाली सब स्टेशन कार्यालय में जमकर नारेबाजी की। लगभग 2 घंटे धरना देने के बाद पुलिस शासन की मौजूदगी में सब स्टेशन के बिजली अफसरों के साथ परिसर में ही वार्ता हुई। इसके बाद ग्रामीणों का आंदोलन समाप्त हुआ। सब स्टेशन कार्यालय के निकट से ग्रामीणों ने रैली की शक्ल में बिजली दफ्तर पहुंचे। इस दौरान गांवों में बिजली कटौती व लो वोल्टेज का आरोप लगाते हुए जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों ने कहा कि अनाफ-शनाफ बिजली बिल भेजा रहा है। खराब पड़े ट्रांसफार्मर को बदलने में ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

सिल्ली, परसदा, शिवपुर, निरधी, पोलमी पंचायत के गांवों के हजारों उपभोक्ता लो वोल्टेज व बिजली कटौती से परेशान हैं। कई बार मौखिक व लिखित शिकायत के बाद भी अफसरों ने ध्यान नहीं दिया। दफ्तर परिसर में ग्रामीणों के साथ बिजली अधिकारियों की वार्ता हुई। उनकी बिजली संबंधी समस्याओं के निराकरण का भरोसा दिलाया। इसके बाद ग्रामीणों ने आंदोलन स्थगित कर दिया। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर यदि 10 दिनों के भीतर समस्याओं का निराकरण नहीं किया गया तो चक्काजाम आंदोलन करने मजबूर होंगे।

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