कोरबा
पीएम जनमन आवास योजना पहाड़ी कोरवा सुमतरी बाई के लिए बना वरदान
जीवन की सबसे बड़ी जरूरत पक्के मकान की आस योजना से हुई पूरी : हितग्राही सुमतरी
आवास का लाभ दिलाने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व प्रदेश सरकार का किया आभार
कोरबा । टूटे-फूटे मकान में जैसे-तैसे करके अपनी जिंदगी गुजार रही राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले पहाड़ी कोरवा श्रीमती सुमतरी बाई के जीवन की सबसे बड़ी जरूरत पक्के मकान की आस, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लोककल्याणकारी योजना से साकार हुआ है। कोरबा जनपद के अजगरबहार पंचायत अंतर्गत ग्राम नरबदा की रहने वाली पहाड़ी कोरवा सुमतरी बाई ने बताया कि हर व्यक्ति का सपना होता है कि उसका स्वयं का पक्का मकान हो, जिसमें वह सुकून से अपने परिवार के साथ गुजर बसर कर सके। उनके सपने को हकीकत में बदलने की कोशिश प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के जरिए साकार हुई।
हितग्राही सुमतरी बाई ने बताया कि प्रधानमंत्री की इस योजना से कच्चे मकान की समस्या से जूझ रहे पीवीटीजी समुदाय के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को अपना पक्का मकान बनाने का मौका मिल रहा है। आवास मिलने पर सुमतरी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बताया कि पीएम जनमन आवास योजना उनके जीवन में वरदान बनकर आई है, जिसकी सहायता से उनका पक्का घर बनाने का सपना पूरा हो पाया एवं अब वे अपने स्वयं के आवास में कुशलता पूर्वक रह रहे हैं। श्रीमती सुमतरी ने बताया कि उनका परिवार रोजी मजदूरी कर जीवन यापन करता है। उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं होने के कारण कच्चे मकान में रहना पड़ता था, पुराने घर में उन्हें बहुत सारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। बारिश में गीले फर्श, नम दीवारें, टपकती छत रातों की नींद उड़ा देती थी। बिजली कड़कने की आवाज से उन्हें भय सा लगता था। आसमानी आफत के बाद जमीन पर रेंगने वाली मौत का भी खौफ बना रहता था। उनके पूरे परिवार का सपना था की उनका एक पक्का घर हो, जहां सपरिवार बिना किसी परेशानी के रह सके। उन्होंने बताया कि नए आवास में अब किसी प्रकार की समस्या नहीं होती है। घर में सीलन और जहरीले कीटों व सांप-बिच्छू से मुक्ति मिल गई है।
सुमतरी ने बताया कि ग्राम पंचायत से प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के बारे में जानकारी लेकर योजना का लाभ लेने हेतु उनके द्वारा आवेदन किया गया। आवास निर्माण की स्वीकृति मिलने के साथ ही उनके द्वारा आवास निर्माण प्रारम्भ किया गया। समय-समय पर राशि उनके खाते में आती रही एवं ३-४ माह के भीतर ही उनका आवास पूरा हो गया। साथ ही उन्हें महतारी वंदन योजना से हर माह १ हजार रूपए की सहायता राशि, बीपीएल राशन कार्ड से खाद्यान्न, आयुष्मान कार्ड से निःशुल्क स्वास्थ्य उपचार सहित अन्य योजनाओं का लाभ भी मिल रहा है। हितग्राही ने बताया कि पक्का आवास बन जाने से समाज में उनके मान सम्मान में वृद्धि हुई है और उनका परिवार सम्मान के साथ जीवन यापन कर रहा हैं। सुमतरी बाई ने आवास का लाभ दिलाने हेतु पूरे परिवार की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा छत्तीसगढ़ सरकार का आभार प्रकट किया है।
कोरबा
ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी से मिलती है बेहतर जीवन गुणवत्ता : डॉ. विपिन चंद्र त्यागी
कोरबा। न्यू कोरबा हॉस्पिटल (NKH) में मेदांता हॉस्पिटल के वरिष्ठ जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ. विपिन चंद्र त्यागी ने मरीजों को परामर्श एवं उपचार देकर लाभान्वित किया। वे 11 व 12 अप्रैल तक अपनी सेवाएं NKH में दी , जिससे क्षेत्र के मरीजों को विशेषज्ञ इलाज का अवसर मिल सका।
डॉ. त्यागी ने बताया कि ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी केवल दर्द से राहत ही नहीं देती, बल्कि मरीजों को बेहतर “क्वालिटी ऑफ लाइफ” भी प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि घुटनों और कूल्हों के गंभीर दर्द से पीड़ित, विशेषकर बुजुर्ग मरीज, अक्सर चलने-फिरने में असमर्थ हो जाते हैं और मानसिक तनाव का शिकार हो जाते हैं, लेकिन इस सर्जरी से उन्हें नया जीवन मिल सकता है।

उन्होंने जॉइंट रिप्लेसमेंट को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करते हुए कहा कि यह एक सुरक्षित और सफल प्रक्रिया है। देश में इस सर्जरी की संख्या लगातार बढ़ रही है, जो इसकी सफलता का प्रमाण है। डॉ. त्यागी 10,000 से अधिक सफल सर्जरी कर चुके हैं और इस क्षेत्र में उनका व्यापक अनुभव है।
फिजियोथेरेपी है बेहद जरूरी
डॉ. त्यागी ने सर्जरी के बाद नियमित फिजियोथेरेपी पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि कम से कम 5 से 6 सप्ताह तक नियमित व्यायाम और फिजिकल थेरेपी करने से मरीज तेजी से सामान्य जीवन में लौट सकता है।
लाइफस्टाइल में सुधार जरूरी
उन्होंने बताया कि 50-60 वर्ष की आयु में जॉइंट संबंधी समस्याएं आम हो जाती हैं, जिनका मुख्य कारण खराब जीवनशैली है। उकड़ू बैठना और पालथी मारकर बैठने जैसी आदतों से बचने की सलाह देते हुए उन्होंने संतुलित जीवनशैली अपनाने पर जोर दिया।
मोटापा बना सबसे बड़ा कारण
डॉ. त्यागी के अनुसार मोटापा जॉइंट की समस्याओं का प्रमुख कारण है। इससे जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और अर्थराइटिस तेजी से बढ़ता है। उन्होंने कहा कि वजन नियंत्रित रखना जॉइंट को स्वस्थ रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी मरीज में अर्थराइटिस विकसित हो चुका है, तब भी घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी एक प्रभावी और सुरक्षित विकल्प के रूप में उपलब्ध है।

कोरबा
नराईबोध के ग्रामीणों का हल्लाबोल, बुनियादी हक और बसाहट सहित रोजगार की मांग को लेकर भठोरा फेस ठप
कोरबा/गेवरा। एसईसीएल (SECL) गेवरा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम नराईबोध के ग्रामीणों का धैर्य आज जवाब दे गया। पुनर्वास, बसाहट और रोजगार जैसी मूलभूत मांगों को लेकर ग्राम पंचायत के नेतृत्व में आज सुबह 7:00 बजे से ग्रामीणों ने भठोरा फेस का खदान बंद कर दिया है। आंदोलन के कारण खदान में कामकाज पूरी तरह ठप हो गया है ।

प्रमुख मांगें और आक्रोश का कारण

ग्रामीणों का आरोप है कि पूर्व में जिला प्रशासन एसईसीएल प्रबंधन और ग्राम नराईबोध के बीच हुई त्रिपक्षीय बैठक में कई अहम समझौतों पर सहमति बनी थी, लेकिन आज तक उन्हें अमलीजामा नहीं पहनाया गया है ।
आंदोलनकारियों की मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:-

बसाहट और पुनर्वास:- प्रभावित ग्रामीणों को उचित बसाहट स्थल और वहां नागरिक सुविधाएं प्रदान करना ।
मकान नापी:- पूर्व में छूटे हुए मकानों की जीपीएस (GPS) के माध्यम से पारदर्शी नापी और उचित मुआवजा ।
वैकल्पिक रोजगार:- समझौते के अनुसार आउटसोर्सिंग कंपनी (PNC) में 70% स्थानीय प्रभावित ग्रामीणों को प्राथमिकता के साथ रोजगार देना ।
विकास कार्य:- बसाहट स्थल पर लंबित विकास कार्यों को तत्काल शुरू करना ।
अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी

ग्राम पंचायत नराईबोध के नेतृत्व में प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यह केवल सांकेतिक विरोध नहीं है यदि प्रबंधन और प्रशासन तत्काल ठोस निर्णय नहीं लेते हैं तो 15 अप्रैल 2026 से खदान के समीप ही विशाल पंडाल लगाकर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया जाएगा ।
पार्षद अमिला राकेश पटेल ने बताया कि प्रबंधन ने बार-बार केवल आश्वासन दिया है, धरातल पर कोई काम नहीं हुआ। जब तक हमारी मांगों पर सार्थक कार्रवाई नहीं होती यह आंदोलन जारी रहेगा, किसी भी अप्रिय स्थिति की पूरी जिम्मेदारी एसईसीएल प्रबंधन और जिला प्रशासन की होगी ।



कोरबा
प्रेम के वशीभूत हैं परमात्मा, प्रह्लाद की पुकार पर रलिया में अवतरित हुए भगवान नरसिंह, “कण-कण में हैं भगवान
पंडित दयानंद कृष्ण महाराज ने बताया—प्रेम से भजे जो हरि को, उसका बेड़ा पार है

कोरबा/हरदीबाजार । ग्राम रलिया में राठौर परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण के तीसरे दिन भक्ति का चरमोत्कर्ष देखने को मिला। कथाव्यास से पंडित दयानंद कृष्ण महाराज ने अपनी अमृतमयी वाणी से प्रभु प्रेम की महिमा का बखान करते हुए बताया कि भगवान केवल प्रेम के भूखे हैं। श्रद्धा और विश्वास के साथ पुकारने पर ईश्वर पाषाण से भी प्रकट हो जाते हैं।

अटूट विश्वास की विजय

कथा के तीसरे दिवस कथाव्यास से पंडित दयानंद कृष्ण महाराज ने भक्त प्रह्लाद और भगवान नरसिंह अवतार के प्रसंग का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने बताया कि जब हिरण्यकशिपु ने प्रह्लाद से पूछा कि “तुम्हारा भगवान कहाँ है?” तब प्रह्लाद ने पूर्ण विश्वास के साथ कहा कि “प्रभु कण-कण में हैं।” अपने भक्त के वचनों को सत्य सिद्ध करने के लिए भगवान विष्णु ने खंभे को फाड़कर नृसिंह रूप में अवतार लिया।
जैसे ही कथा में भगवान नरसिंह के प्रकट होने का प्रसंग आया, पूरा पंडाल ‘जय नरसिंह देव’ के नारों से गूंज उठा। महाराज जी ने समझाया कि नरसिंह अवतार हमें सिखाता है कि जो प्रेम से हरि को भजता है, प्रभु उसका बेड़ा अवश्य पार करते हैं।
तीन दिनों की कथा का सार: ज्ञान से प्रेम तक का सफर

अब तक के तीन दिनों की कथा यात्रा में श्रद्धालुओं ने कई दिव्य प्रसंगों का रसपान किया।प्रथम दिवस: पावन कलश यात्रा के साथ भागवत महात्म्य और शुकदेव-परीक्षित जन्म की कथा सुनाई गई।
द्वितीय दिवस: विदुर-मैत्रेय संवाद, कपिल उपाख्यान और ध्रुव चरित्र के माध्यम से मर्यादा और तपस्या का मार्ग बताया गया।

तृतीय दिवस: आज नरसिंह अवतार के माध्यम से “प्रेम ही सर्वस्व है” का संदेश दिया गया। कथा वाचक पंडित दयानंद कृष्ण महाराज ने कहा कि ईश्वर को पाने के लिए किसी कर्मकांड की नहीं, बल्कि केवल निर्मल प्रेम और भाव की आवश्यकता है।”प्रेम ही कर है, प्रेम ही धर्म है। प्रेम से जो हरि भजे, तो भाव से बेड़ा पार है। प्रह्लाद का प्रेम ही था जिसने स्वयं नारायण को नरसिंह बनने पर विवश कर दिया।”
भक्ति रस में डूबा राठौर परिवार और ग्राम रलिया

इस आयोजन में मुख्य यजमान राठौर परिवार सहित समस्त ग्रामवासी सेवा और भक्ति में लीन हैं। कथा के दौरान सुमधुर भजनों पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूमते रहे। आरती के बाद भारी संख्या में उपस्थित जनसमूह को महाप्रसाद का वितरण किया गया।

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