कोरबा
बालको ने राष्ट्रीय पोषण माह के अवसर पर सामुदायिक स्वास्थ्य को दिया बढ़ावा
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1 year agoon
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Divya Akash
बालकोनगर । वेदांता समूह की कंपनी भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) ने राष्ट्रीय पोषण माह 2024 के अवसर पर समुदाय में बच्चों, किशोरों और माताओं के लिए अनेक कार्यक्रम आयोजित किये। इस साल की थीम ‘सभी के लिए पौष्टिक आहार’ के अनुरूप संतुलित एवं पोषणयुक्त आहार के महत्व को सुनिश्चित करते हुए पौष्टिक विकल्प को बढ़ावा दिया गया। जिला स्वास्थ्य विभाग और विभिन्न सामुदायिक भागीदारों के सहयोग से पोषण जागरूकता अभियान को संचालित किया गया।
पोषण माह अभियान नंद घर, आधुनिक आंगनवाड़ी केंद्रों में पोषण और स्वास्थ्य को बढ़ावा देने पर केंद्रित था। विशेषज्ञों के नेतृत्व में पोषण जागरूकता सत्र और स्थानीय सामग्री का उपयोग करके स्वस्थ खान-पान को प्रोत्साहित करने के लिए सामुदायिक रेसिपी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। रेसिपी प्रशिक्षण में माताओं ने सरकार द्वारा प्रदान किए गए टेक होम राशन (टीएचआर) का उपयोग करके पौष्टिक भोजन तैयार करना सीखा। इसके साथ ही स्वास्थ्य शिविर में कुपोषण और एनीमिया को रोकने के लिए माताओं एवं बच्चों की जांच की गई। समय पर एनीमिया लक्षण की जानकारी से उचित उपचार संभव हुआ। सहभागिता को बढ़ावा देने के लिए ‘पोषण की बातें, पुरुषों के साथ’ नामक पहल की शुरूआत की गई। इसमें घर के पुरुषों को बच्चों और परिवार के स्वास्थ्य तथा पोषण महत्व पर जानकारी प्रदान की गई।
समापन समारोह में सामूहिक प्रयास का जश्न मनाया गया। समुदाय में रोल मॉडल के रूप में काम कर रही माताओं को “चैंपियन माता” के रूप में सम्मानित किया गया। गर्भवती दम्पति के विशेष प्रशिक्षण सत्र में माता-पिता दोनों को अपने बच्चे के समग्र विकास में समान रूप से योगदान देने तथा गर्भावस्था और बचपन के दौरान आपसी सहयोग पर मार्गदर्शन दी गई। कंपनी ने अपने प्रयासों की प्रतिबद्धता को दिखाते हुए ‘पोषण टाक्स’ वीडियो की एक सीरीज शुरू की, जिसमें पोषण संबंधी प्रमुख विषयों को दिखाया जाएगा। अनिल अग्रवाल फाउंडेशन के सहयोग से नंद घर में मिलेट शेक वितरण अभियान का शुभारंभ हुआ। इसके साथ ही एक मासिक ‘पोषण पत्रिका’ का शुभारंभ किया गया जिसमें चैंपियन माताओं की कहानियाँ और व्यावहारिक, पौष्टिक व्यंजन की जानकारी दी गई।
बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं निदेशक राजेश कुमार ने कहा कि बालको का दृष्टिकोण एल्यूमिनियम उत्पादन से आगे सामुदायिक भलाई तक फैला हुआ है, कंपनी सभी के लिए उज्जवल एवं स्वस्थ भविष्य को बढ़ावा देने के लिए कटिबद्ध है। हमारा प्रयास है कि हर बच्चा आगे बढ़े और हर मां को वह देखभाल मिले जिसकी वह हकदार है। पोषण माह के दौरान मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य का जश्न मनाना, स्वस्थ समुदायों के पोषण के प्रति हमारे प्रयासों को दर्शाता है। बालको प्रचालन के आसपास रहने वाले लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
महिला एवं बाल विकास विभाग, रायपुर के उप निदेशक दिलदार सिंह मरावी ने सामुदायिक स्वास्थ्य एवं सशक्तिकरण को आगे बढ़ाने में सरकार और उद्योग के बीच परस्पर सहयोग के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग में हम महिलाओं और बच्चों के पोषण स्वास्थ्य और सशक्तिकरण में सुधार के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। यह देखकर बहुत अच्छा लगता है कि बालको अपने परियोजना के माध्यम से ऐसे पहल को आगे बढ़ा रही हैं, जो पोषण जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर आधारित है।

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कोरबा
न्यू कोरबा अस्पताल में न्यूरो केयर की बड़ी पहल: 30 दिवसीय मेगा न्यूरो कैंप शुरू, 100 से अधिक लोग लाभान्वित
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12 hours agoon
January 17, 2026By
Divya Akashकोरबा। कोसाबाड़ी स्थित न्यू कोरबा अस्पताल में न्यूरो संबंधी मरीजों के लिए एक बड़ी और राहत भरी पहल शुरू की है। अस्पताल में 30 दिवसीय मेगा न्यूरो कैंप की शुरुआत की गई है, जो 31 जनवरी तक पूरे माह चलेगा। इस कैंप के तहत मरीजों को न्यूरो परामर्श निशुल्क एवं आवश्यक जांच में अधिकतम छूट उपलब्ध कराई जा रही है।
मेगा कैंप में प्रसिद्ध न्यूरोसर्जन डॉ. शिवानी प्रगदा एवं न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. मनीष गोयल द्वारा प्रतिदिन निशुल्क ओपीडी सुबह 11 से 2 बजे तक व शाम 6 से 8 बजे तक परामर्श दिया जा रहा है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, न्यूरो केयर डिपार्टमेंट में सुविधाओं के विस्तार की लंबे समय से आवश्यकता महसूस की जा रही थी। अब न्यूरोलॉजिस्ट, न्यूरो फिजियोथैरेपिस्ट, न्यूरोसर्जन के साथ न्यूरो साइकाइट्री की सुविधा भी जोड़ दी गई है, जिससे न्यूरो से संबंधित किसी भी आवश्यकता वाले मरीजों को इलाज के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि अब सभी न्यूरो जांच, परामर्श, फिजियोथेरेपी और सर्जरी की सुविधा एक ही छत के नीचे उपलब्ध है, जो कोरबा जिले के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि वर्तमान समय में न्यूरो बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण मरीज समय पर डॉक्टर तक नहीं पहुंच पाते। अधिकांश मरीज तब अस्पताल आते हैं जब बीमारी गंभीर रूप ले चुकी होती है। ऐसे में इस तरह के मेगा कैंप समय पर जांच और उपचार के माध्यम से बीमारी को बढ़ने से रोकने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि ठंड के मौसम में बुजुर्गों में ब्रेन हेमरेज और लकवा (पैरालिसिस) का खतरा अधिक रहता है, जिसके प्रमुख कारण हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ती उम्र और नशे की आदतें हैं। उन्होंने प्राथमिक देखभाल की जानकारी देते हुए कहा कि बेहोश मरीज को खाना या पानी नहीं देना चाहिए और अस्पताल ले जाते समय मरीज को करवट देकर रखना चाहिए। मिर्गी (एपिलेप्सी) को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों पर चिंता जताते हुए डॉक्टरों ने कहा कि यह कोई अभिशाप नहीं, बल्कि एक सामान्य न्यूरोलॉजिकल बीमारी है। झाड़-फूंक और अंधविश्वास के कारण मरीजों को प्रताड़ित करना गलत है और इससे बीमारी और गंभीर हो सकती है। न्यू कोरबा अस्पताल का यह 30 दिवसीय मेगा न्यूरो कैंप न सिर्फ इलाज बल्कि जनजागरूकता की दिशा में भी एक सराहनीय पहल माना जा रहा है, जिससे जिले के आम लोगों को समय पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल सके। पिछले 15 दिनों में 100 से भी अधिक मरीजों ने अपना रजिस्टेशन कराकर निशुल्क ओपीडी परामर्श लिया।
कोरबा
सरस्वती शिशु मंदिर सीएसईबी कोरबा पूर्व में मातृ संगोष्ठी एवं शिशु नगरी का भव्य आयोजन
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1 day agoon
January 16, 2026By
Divya Akash220 मातृशक्तियों की सहभागिता, नन्हे भैया-बहनों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से दिया पारिवारिक संस्कारों का संदेश
कोरबा। सरस्वती शिशु मंदिर सीएसईबी, कोरबा पूर्व में मातृ संगोष्ठी एवं शिशु नगरी का भव्य, सुव्यवस्थित एवं प्रेरणादायी आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्राचार्य राजकुमार देवांगन रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में दीपक सोनी (कोरबा विभाग समन्वयक) एवं संजय कुमार देवांगन (प्रधानाचार्य, पूर्व माध्यमिक) उपस्थित रहे। अतिथियों का स्वागत विद्यालय परिवार द्वारा पारंपरिक रीति से किया गया।

अपने संबोधन में अतिथियों ने मातृशक्ति की भूमिका को बाल संस्कार एवं राष्ट्र निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि प्रारंभिक शिक्षा में माता का योगदान सबसे निर्णायक होता है। इस अवसर पर विद्यालय के नन्हे भैया-बहनों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। बच्चों ने आकर्षक नृत्य, गीत एवं लघु प्रस्तुतियों के माध्यम से पारिवारिक वातावरण, नैतिक मूल्यों, अनुशासन एवं संस्कारों का संदेश दिया। बच्चों की सहज एवं भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने उपस्थित माताओं एवं अभिभावकों का मन मोह लिया।

कार्यक्रम में कुल 220 मातृशक्तियों की गरिमामयी सहभागिता रही, जिससे मातृसंगोष्ठी अत्यंत सफल रही। माताओं ने विद्यालय की शिक्षण पद्धति, संस्कार आधारित शिक्षा एवं गतिविधियों की सराहना की। शिशु नगरी कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यालय की 12 शैक्षिक व्यवस्थाओं एवं सहयोगी संस्थाओं की जीवंत प्रदर्शनी लगाई गई। इन प्रदर्शनियों के माध्यम से बच्चों के सर्वांगीण विकास, कौशल निर्माण, संस्कार शिक्षा एवं व्यवहारिक ज्ञान को प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया गया। अभिभावक बंधुओं के सहयोग से आनंद मेले का भी आयोजन किया गया, जिसमें प्राथमिक विभाग के भैया-बहनों ने विभिन्न खेलों, गतिविधियों एवं मनोरंजन कार्यक्रमों में भाग लेकर भरपूर आनंद उठाया। आनंद मेला बच्चों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रधानाचार्य पंकज तिवारी ने सभी अतिथियों, मातृशक्तियों एवं अभिभावकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से विद्यालय एवं परिवार के बीच सहयोग और विश्वास और अधिक मजबूत होता है। उप-प्रधानाचार्य श्रीमती सीमा त्रिपाठी सहित समस्त आचार्य परिवार ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग करने वाले सभी लोगों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
कोरबा
बॉयोफ्लॉक तकनीक से मछली पालन कर संजय सुमन ने कमाए साल में 3.20 लाख
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1 day agoon
January 16, 2026By
Divya Akashकोरबा। विकासखंड करतला के ग्राम बड़मार निवासी संजय सुमन ने मछली पालन को अपना मुख्य व्यवसाय बनाकर सफलता की नई मिसाल कायम की है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत नवीन बॉयोफ्लॉक तकनीक अपनाकर उन्होंने कम भूमि में अधिक उत्पादन कर उल्लेखनीय आय अर्जित की है।
संजय सुमन ने अपनी 25 डिसमिल भूमि पर बॉयोफ्लॉक तालाब का निर्माण कराया। इस तकनीक में तालाब में लाइनर बिछाकर पानी भरा जाता है और तेजी से बढ़ने वाली उन्नत प्रजाति की मछलियों का पालन किया जाता है। इसकी विशेषता है कि वर्ष में दो बार उत्पादन लेकर अधिक आय प्राप्त की जा सकती है।
सरकार द्वारा प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत उन्हें 8.40 लाख रुपये का अनुदान प्रदान किया गया। पिछले वर्ष संजय सुमन ने बॉयोफ्लॉक तालाब से 6 मैट्रिक टन मछली उत्पादन किया, जिसे बेचकर 07 लाख 20 हजार रुपये की आय प्राप्त हुई। उत्पादन लागत निकालने के बाद उन्हें 03 लाख 20 हजार रुपये का शुद्ध लाभ हुआ।
सफलता से उत्साहित संजय सुमन इस वर्ष अपने कार्य का विस्तार कर उत्पादन एवं आय को दुगुना करने की योजना बना रहे हैं। बॉयोफ्लॉक तकनीक की खासियत यह है कि कम भूमि में अधिक उत्पादन संभव होता है, जिससे किसानों की आय में अभूतपूर्व वृद्धि होती है।
संजय सुमन की यह कहानी क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है।

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