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नोएल टाटा के आते ही Tata Group में हुआ बड़ा बदलाव, ट्रस्ट ने लिया ये अहम फैसला
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1 year agoon
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Divya Akashनई दिल्ली, एजेंसी। दिग्गज उद्योगपति रतन टाटा (Ratan Tata) के निधन के बाद उनके सौतेले भाई नोएल टाटा (Noel Tata) को टाटा ट्रस्ट्स (Tata Trusts) का चेयरमैन बनाया गया है। टाटा ट्रस्ट्स की टाटा संस में करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है। टाटा संस 165 अरब डॉलर के टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी है। नोएल टाटा के टाटा ट्रस्ट्स का चेयरमैन बनने के बाद इसमें एक अहम बदलाव हुआ है। एक रिपोर्ट के मुताबिक सर रतन टाटा ट्रस्ट और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी अब स्थायी सदस्य बन गए हैं। इससे पहले नियुक्ति एक निश्चित अवधि के लिए होती थी। इस कदम के बाद, बोर्ड के सदस्य तब तक रिटायर नहीं होंगे जब तक वे इस्तीफा देने का फैसला नहीं कर लेते और नए सदस्यों की नियुक्ति ट्रस्ट के सभी सदस्यों की सहमति के बाद ही की जाएगी। गुरुवार को दोनों ट्रस्टों की बोर्ड बैठक में यह फैसला लिया गया।
67 साल के नोएल टाटा को 11 अक्टूबर को चेयरमैन बनाए जाने के बाद ट्रस्ट्स की यह दूसरी बैठक थी। टाटा संस में सर रतन टाटा ट्रस्ट की 27.98 फीसदी और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट की 23.56 फीसदी हिस्सेदारी है यानी टाटा संस में इन दोनों ट्रस्टों की 50 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी है। रिपोर्ट के मुताबिक एक सूत्र ने बताया कि सर रतन टाटा ट्रस्ट और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के सभी सदस्य अब स्थायी मेंबर होंगे। अब तक उनका कार्यकाल केवल तीन साल का होता था। सर रतन टाटा ट्रस्ट की स्थापना 1919 में और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट की स्थापना 1932 में हुई थी।
रतन टाटा की वसीयत
सर रतन टाटा ट्रस्ट में सात सदस्य हैं जबकि सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट में छह सदस्य हैं। नोएल टाटा के साथ-साथ पूर्व डिफेंस सेक्रेटरी विजय सिंह, वेणु श्रीनिवासन, मेहली मिस्त्री और वकील डेरियस खंबाटा दोनों ट्रस्टों में शामिल हैं। मेहली मिस्त्री और डेरियस खंबाटा को दिवंगत रतन टाटा का करीबी माना जाता है। रतन टाटा ने अपनी वसीयत को एक्जीक्यूट करने की जिम्मेदारी मेहली मिस्त्री और डेरियस खंबाटा को दी है। रतन टाटा अपने पीछे करीब 7,900 करोड़ रुपए की संपत्ति छोड़ गए हैं।
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इस राज्य के युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी: अब बिना ब्याज के मिलेगा 10 लाख तक का लोन
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15 hours agoon
January 18, 2026By
Divya Akashजयपुर, एजेंसी। राजस्थान सरकार ने प्रदेश के बेरोजगार युवाओं को उद्यमी बनाने की दिशा में अपने सबसे महत्वाकांक्षी कदम की विस्तृत रूपरेखा पेश कर दी है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा 12 जनवरी को लॉन्च की गई मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना की गाइडलाइन अब उद्योग एवं वाणिज्य विभाग ने जारी कर दी है। इस योजना का लक्ष्य राज्य के 1 लाख युवाओं को खुद का बिजनेस शुरू करने के लिए आर्थिक मदद देना है।
बिना ब्याज मिलेगा लोन: सरकार भरेगी पूरा इंटरेस्ट
उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने बताया कि यह योजना युवाओं को आर्थिक बोझ से पूरी तरह मुक्त रखेगी। योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि युवाओं को जो ऋण (Loan) दिया जाएगा उस पर लगने वाले ब्याज का 100% भुगतान राज्य सरकार खुद करेगी।

योजना के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता
- ऋण राशि: विनिर्माण (Manufacturing), सेवा (Service) और व्यापार (Trade) क्षेत्र के लिए 10 लाख रुपये तक का ऋण।
- मार्जिन मनी: सरकार रू.50,000 तक की मार्जिन मनी (शुरुआती पूंजी सहायता) भी देगी।
- अतिरिक्त लाभ: CGTMSE शुल्क (गारंटी शुल्क) का पुनर्भरण भी सरकार द्वारा किया जाएगा जिससे युवाओं को बिना किसी गारंटी की चिंता के लोन मिल सकेगा।
योग्यता के आधार पर तय की गई ऋण राशि
योजना को इस तरह डिजाइन किया गया है कि शैक्षणिक योग्यता के अनुसार युवाओं को अधिक लाभ मिले। इसे दो श्रेणियों में बांटा गया है:
1. 8वीं से 12वीं पास युवाओं के लिए:
- सेवा एवं व्यापार: रू.3.5 लाख तक का लोन।
- मैन्युफैक्चरिंग (विनिर्माण): रू.7.5 लाख तक का लोन।
- मार्जिन मनी: रू.35,000 तक की सहायता।
2. स्नातक (Graduate), ITI या उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं के लिए:
- सेवा एवं व्यापार: रू.5 लाख तक का लोन।
- मैन्युफैक्चरिंग (विनिर्माण): रू.10 लाख तक का लोन।
- मार्जिन मनी: रू.50,000 तक की सहायता।
ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया जल्द होगी शुरू
विभाग ने स्पष्ट किया है कि योजना के लिए आवेदन पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी होंगे। जल्द ही एक समर्पित पोर्टल लॉन्च किया जाएगा जहां युवा घर बैठे ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। योजना का मुख्य उद्देश्य युवाओं को केवल नौकरी पाने वाला नहीं बल्कि जॉब गिवर (नौकरी देने वाला) बनाना है।

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लश्कर-ए-तैयबा के टॉप कमांडर की Pakistan में मौत
Published
15 hours agoon
January 18, 2026By
Divya Akashजम्मू-कश्मीर,एजेंसी। आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का शीर्ष कमांडर अब्दुल गफ्फार पाकिस्तान में रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार उसकी मौत को लेकर अभी तक पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि या स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है।
बताया जा रहा है कि अब्दुल गफ्फार लश्कर के वरिष्ठ आतंकियों में शामिल था और संगठन के कई अहम ऑपरेशनों से जुड़ा रहा है। सोशल मीडिया पर उसकी एक तस्वीर भी सामने आई है, जिसमें वह लश्कर सरगना हाफिज सईद के बेटे के साथ दिखाई दे रहा है। इस तस्वीर को लेकर सुरक्षा एजेंसियां भी सतर्क हो गई हैं।
गफ्फार की मौत के बाद आतंकी संगठनों के अंदरखाने हलचल मची हुई है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना का असर लश्कर के नेटवर्क और उसकी गतिविधियों पर पड़ सकता है। हालांकि, उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई, यह अभी जांच का विषय बना हुआ है।


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वांगचुक की पत्नी बोलीं-सोनम जेल में फर्श पर सो रहे:बैरक में टहलने तक की जगह नहीं, सरकार जानती हैं उनके केस में दम नहीं
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15 hours agoon
January 18, 2026By
Divya Akashनई दिल्ली,एजेंसी। लद्दाख के एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो ने कहा कि सोनम को जेल में फर्श पर कंबल में सोना पड़ा रहा है। उनके पास कोई फर्नीचर नहीं है।
उन्होंने कहा कि उनके बैरक में इतनी भी जगह नहीं है कि वे ठीक से टहल सकें। आंगमे ने कहा कि सॉलिसिटर जनरल तारीख पर तारीख मांग रहे हैं क्योंकि उन्हें एहसास हो गया है कि केस में कोई दम नहीं है।
गीतांजलि ने न्यूज एजेंसी PTI को दिए इंटरव्यू में ये बाते कहीं। सोनम वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया था।
यह कार्रवाई लेह में राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शनों के दो दिन बाद की गई थी। इन प्रदर्शनों में चार लोगों की मौत हुई थी और 90 लोग घायल हुए थे।
गीतांजलि ने और क्या कहा…

- गीतांजलि आंगमो ने कहा कि सोनम वांगचुक की हिरासत के खिलाफ विरोध न होने से वह थोड़ी निराश हैं। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर आवाज़ को और एकजुट और मज़बूत होना चाहिए।
- आंगमो के अनुसार, राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत में लिए गए व्यक्ति को 5 से 10 दिनों के भीतर सभी दस्तावेज दिए जाने चाहिए। लेकिन वांगचुक को जरूरी वीडियो 28वें दिन दिए गए।
- उन्होंने कहा कि यह NSA की धारा 8 का उल्लंघन है और इसी आधार पर हिरासत आदेश रद्द होना चाहिए। जरूरी दस्तावेज देर से मिलने के कारण वांगचुक सलाहकार बोर्ड के सामने प्रभावी तरीके से अपनी बात नहीं रख पाए।
- जिन पांच FIR का हवाला दिया गया है, उनमें से तीन में वांगचुक का नाम नहीं है। जिन दो FIR में नाम है, उनमें से एक अगस्त 2025 की है, जिसमें न तो नोटिस दिया गया और न पूछताछ हुई।
- उन्होंने आरोप लगाया कि जिला मजिस्ट्रेट का हिरासत आदेश पुलिस के प्रस्ताव की कॉपी-पेस्ट है। अधिकारी को अपना दिमाग लगाना चाहिए, सिर्फ कागज़ों की नकल नहीं करनी चाहिए।
- आंगमो ने कहा कि वे मामले को राजनीतिक नहीं बनाना चाहतीं। लेकिन उन्होंने कोर्ट में हो रही देरी पर चिंता जताई। उनका आरोप है कि केंद्र सरकार की ओर से तारीख पर तारीख ली जा रही है।
- गीतांजलि बोलीं- सोनम जेल के अनुभव पर किताब लिख रहे
- गीतांजलि आंगमो ने बताया कि सोनम जेल के अपने अनुभव पर जो किताब लिख रहे हैं, उसका टाइटल शायद फॉरएवर पॉजिटिव होगा। अगर वह कुछ चींटियों और उनके व्यवहार को देखते हैं, तो वह मुझसे चींटियों के व्यवहार पर किताबें लाने के लिए कहते हैं।
- उन्होंने कहा कि चींटियों के समुदाय में बहुत एकता, बहुत टीम भावना होती है। तो, शायद वह उसका अध्ययन करना चाहते हैं। उनके मुताबिक वांगचुक को धूपघड़ी पर किताबें चाहिए थीं, क्योंकि उनके पास लंबे समय तक घड़ी नहीं थी। वांगचुक को मैकेनिकल घड़ियों सहित कोई भी डिवाइस रखने की इजाजत नहीं है।


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