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कोरबा

प्रस्तावित कार्यों पर चर्चा, जेसीआई का शपथ ग्रहण 31 दिसंबर को

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कोरबा। दिसंबर महीने में प्रस्तावित कार्यों को लेकर जेसीआई कोरबा सेंट्रल की बैठक में चर्चा हुई। शहर के एक होटल में हुई इस बैठक में संगठन के नई कार्यकारिणी का शपथ ग्रहण 31 दिसंबर को आयोजित करने पर निर्णय लिया। पुराने कपड़ों को संग्रहित कर जरूरतमंदों को बांटने का निर्णय भी लिया। नई कार्यकारिणी के खाली पदों पर सर्वसम्मति से चेयरमैन (जेसी भवन) पद पर प्रतीक अग्रवाल, चेयरमैन (मुक्तिधाम) के लिए रोहित असरानी, कोषाध्यक्ष सीए टीएन बजाज, उपाध्यक्ष व्यवसाय कपिल विश्वकर्मा, उपाध्यक्ष स्पेशल प्रोजेक्ट विवेक अग्रवाल व नितेश मोदी नियुक्त किए गए।

इसी तरह सह-सचिव मोहित सिंघल, सह-कोषाध्यक्ष सीए मोरध्वज गर्ग व ग्रीटर पद पर दीपक केवट व हेमंत अग्रवाल का चयन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता नई कार्यकारिणी के अध्यक्ष सीए अभिषेक अग्रवाल ने की। बैठक में जेसीआई के पूर्व अध्यक्ष सीए आशीष खेतान, घनश्याम अग्रवाल, मोहित खटोर, आशीष टमकोरिया, अंकित केडिया, समन्वयक आनंद रायकवार, अंकित टमकोरिया समेत अन्य उपस्थित रहे। अंत में आभार सचिव सीए अंकित अग्रवाल ने जताया।

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कोरबा

नगर पालिका उप निर्वाचन-2026:सेक्टर अधिकारी की नियुक्ति

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कोरबा। कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी कुणाल दुदावत द्वारा नगरपालिका के उप निर्वाचन 2026 हेतु नगरपालिका परिषद दीपका के जोन मुख्यालय दीपका में शामिल वार्ड क्रमांक 15 के मतदान केन्द्र क्रमांक 21 प्राथमिक शाला भवन जूनाडीह क.नं. 02 तथा मतदान केन्द्र क्रमांक 22 प्राथमिक शाला भवन जूनाडीह क.नं. 03 के लिए उप अभियंता नगर पालिका परिषद दीपका श्री नारायण आदित्य मो.नं. 9131346031 को सेक्टर अधिकारी नियुक्त किया गया है।

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कोरबा

जंगल की आग जैसा लाल … पर जंगलवासियों की जिंदगी में उजियारा भरने वाला- पलाश का फूल

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कटघोरा वनमंडल ने पलाश फूलों की खरीदी कर बढ़ाया आजीविका का आधार
कोरबा। बसंत की हल्की आहट के साथ ही जब हवा में एक अलग-सी सुगंध घुलने लगती है, तब जंगलों का रंग अचानक बदल जाता है। हरियाली के बीच एक तेज, चमकदार नारंगी-लाल रंग उभरता है,यह है पलाश। जिसे लोग ढाक, टेसू या फ्लेम आफ दी फारेस्ट के नाम से जानते हैं। दूर से निहारें तो ऐसा प्रतीत होता है मानो जंगल सचमुच आग की लपटों में सिमटकर भी मुस्कुरा रहा हो। पर पलाश केवल एक सुंदर दृश्य नहीं है। यह छत्तीसगढ़ के आदिवासी जीवन की धड़कन है, रोजगार का साधन, परंपरा का हिस्सा, औषधि का स्रोत और आत्मसम्मान की पहचान।

कोरबा के जंगलों में पलाश की अपनी अलग ही छटा है। जब इसका मौसम आता है, तो ये फूल पेड़ों पर ही नहीं, जमीन पर भी बिखरकर प्रकृति की रंगोली रच देते हैं। जहां-जहां ये खिलते हैं, वहां सिर्फ सुंदरता नहीं, बल्कि संभावनाएं भी जन्म लेती हैं। अब पलाश केवल जंगल की शोभा नहीं रहा, बल्कि जंगल वासियों के जीवन में उजाला भरने वाला माध्यम बन चुका है। हर बसंत के साथ जब ये फूल खिलते हैं, तो उनके साथ ही खिलती है नई उम्मीद, नई कमाई और बेहतर भविष्य की एक नई कहानी।
कटघोरा वनमंडल के पसान, केन्दई, जटगा, एतमानगर, चैतमा और पाली क्षेत्र में पलाश के वृक्ष प्रकृति के अनमोल उपहार की तरह मौजूद हैं। मार्च-अप्रैल आते ही जब ये फूल झरने लगते हैं, तो आदिवासी परिवार सुबह-सुबह जंगल की राह पकड़ लेते हैं। हाथों में टोकरी और मन में उम्मीद लिए वे एक-एक फूल चुनते हैं-मानो अपने जीवन की छोटी-छोटी खुशियों को समेट रहे हों।

पलाश के फूल केवल रंग और सुंदरता तक सीमित नहीं हैं। इनके औषधीय गुण, प्राकृतिक होली रंग के रूप में उपयोग और बाजार में बढ़ती मांग ने इन्हें आज एक मजबूत आजीविका का साधन बना दिया है। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ, रायपुर द्वारा वर्ष 2025 में इसका संग्रहण दर 11.50 रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित किया गया, जिससे संग्राहकों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिलने लगा है। समय के साथ इसकी कीमत में भी निरंतर वृद्धि हुई है। वर्ष 2022-23 में जहां इसका क्रय मूल्य 900 रुपये प्रति क्विंटल था, वहीं वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर 1150 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। संघ मुख्यालय रायपुर द्वारा इसे टेंडर के माध्यम से 1600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से विक्रय किया गया, जो इसकी बढ़ती आर्थिक उपयोगिता को दर्शाता है।
कटघोरा वनमंडल अधिकारी कुमार निशांत के अनुसार, वन धन विकास केंद्र -पसान, मोरगा, डोंगानाला, गुरसिया और मानिकपुर के माध्यम से पलाश फूलों का संग्रहण व्यवस्थित रूप से किया जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में संग्राहकों की संख्या और संग्रहण की मात्रा में उतार-चढ़ाव जरूर देखने को मिला है, लेकिन प्रयास लगातार जारी हैं। वर्ष 2022-23 में 116 संग्राहकों द्वारा 402 क्विंटल, वर्ष 2023-24 में 40 संग्राहकों द्वारा 58 क्विंटल, वर्ष 2024-25 में 107 संग्राहकों द्वारा 147 क्विंटल तथा वर्ष 2025-26 में 20 संग्राहकों द्वारा 76 क्विंटल पलाश फूल संग्रहित किए गए। वर्ष 2025-26 में संग्राहकों को कुल 87,400 रुपये का भुगतान किया गया, जो उनके जीवनयापन में महत्वपूर्ण सहारा बना।
आगामी सीजन को लेकर वनमंडल की सभी समितियां सक्रिय हो गई हैं। अधिक से अधिक ग्रामीणों को इससे जोड़ने और संग्रहण बढ़ाने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार की योजना बनाई जा रही है, ताकि पलाश के इन फूलों से आदिवासी परिवारों की आय में और वृद्धि हो सके।
पलाश अब केवल जंगल में खिलने वाला फूल नहीं है-यह उम्मीद का रंग है, श्रम का सम्मान है और आत्मनिर्भरता की एक सशक्त कहानी है। जब अगली बार बसंत आएगा और पलाश खिलेगा, तब वह केवल जंगल को नहीं, बल्कि कई जिंदगियों को रोशन करता नजर आएगा।

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कोरबा

नीट परीक्षा के दौरान कड़ी निगरानी एवं सतर्कता रखें – कलेक्टर

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कोरबा। कलेक्टर कुणाल दुदावत ने 3 मई को आयोजित होने वाली नीट परीक्षा की तैयारियों की समीक्षा की। जिला समन्वय समिति की बैठक में कलेक्टर ने परीक्षा केंद्रों में की गई व्यवस्थाओं एवं अधिकारियों की ड्यूटी की जानकारी लेकर आवश्यक निर्देश दिए।
उन्होंने कार्यपालिक दंडाधिकारी एवं पुलिस बल की तैनाती के साथ ही फ्लाइंग स्क्वॉड की व्यवस्था की समीक्षा करते हुए निर्देशित किया कि परीक्षा के दौरान कड़ी निगरानी एवं सतर्कता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने परीक्षार्थियों के लिए जारी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए।

कलेक्टर ने परीक्षा केंद्रों के बाहर पर्याप्त पुलिस व्यवस्था सुनिश्चित करने, संदिग्ध गतिविधियों की रोकथाम हेतु नियमित पेट्रोलिंग कराने तथा प्रश्नपत्र को पुलिस अभिरक्षा में सुरक्षित लाने के निर्देश दिए। साथ ही परीक्षा उपरांत उत्तरपुस्तिकाओं को सुरक्षित जमा कराने के संबंध में भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
इस अवसर पर संयुक्त कलेक्टर कौशल तेंदुलकर, प्राचार्य केंद्रीय विद्यालय, पुलिस विभाग के अधिकारी एवं जिला शिक्षा अधिकारी उपस्थित रहे।

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