देश
अजमेर दरगाह में मंदिर होने के 3 आधार पेश किए:हाईकोर्ट के जज की किताब का हवाला; वंशज बोले- ऐसी हरकतें देश के लिए खतरा
अजमेर , एजेंसी। अजमेर की ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में संकट मोचन महादेव मंदिर होने का दावा किया गया है। अजमेर सिविल कोर्ट में लगाई गई याचिका को कोर्ट ने सुनने योग्य मानते हुए सुनवाई की अगली तारीख 20 दिसंबर तय की है। याचिका दायर करने वाले हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने मुख्य रूप से 3 आधार बताए हैं।
याचिकाकर्ता बोला- तथ्य साबित करते हैं कि दरगाह की जगह पहले मंदिर था उन्होंने कहा कि 2 साल की रिसर्च और रिटायर्ड जज हरबिलास शारदा की किताब में दिए गए तथ्यों के आधार पर याचिका दायर की है। किताब में इसका जिक्र है कि यहां ब्राह्मण दंपती रहते थे और दरगाह स्थल पर बने महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना करते थे। इसके अलावा कई अन्य तथ्य हैं, जो साबित करते हैं कि दरगाह से पहले यहां शिव मंदिर रहा था।

याचिकाकर्ता ने कहा- रिटायर्ड जज हरबिलास शारदा की किताब में दिए गए तथ्यों को आधार बनाकर याचिका लगाई है।
20 दिसंबर तक पक्ष रखने के लिए उपस्थित होना है कोर्ट ने अल्पसंख्यक मंत्रालय, दरगाह कमेटी और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) को नोटिस जारी किया है। 20 दिसंबर को उन्हें अपना पक्ष लेकर उपस्थित होना है।

दरगाह दीवान जैनुअल आबेदीन की ओर से उपलब्ध कराई गई तस्वीर। यह तस्वीर किसी पेंटर ने हाथ से बनाई थी।
इस मामले को लेकर अजमेर दरगाह प्रमुख उत्तराधिकारी और ख्वाजा साहब के वंशज नसरुद्दीन चिश्ती ने अपना पक्ष रखा है। उन्होंने कहा- ऐसी हरकतें देश की एकता के लिए खतरा हैं। यहां तो हिंदू राजाओं ने भी अकीदत की है। दरगाह में मौजूद कटहरा जयपुर के महाराजा ने भेंट किया है। 1950 के सर्वे में स्पष्ट हो चुका है कि दरगाह में कोई हिंदू मंदिर नहीं था।
दैनिक भास्कर में पढ़िए अजमेर की ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह को लेकर पहली बार पेश किए गए दावे की पूरी कहानी-

2 साल की रिसर्च के बाद किया दावा हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने बताया- मैंने अजमेर के लोगों को कहते सुना था और आसपास कई बार ये दावे किए गए थे कि दरगाह में पहले संकट मोचक महादेव का मंदिर था। इसकी बनावट को भी लोग संदेह की दृष्टि से देखते थे।
इसे लेकर मैंने 2 साल पहले रिसर्च शुरू की। गूगल पर देखा और कई किताबों को पढ़ने की कोशिश की। इसी दौरान मुझे अजमेर के प्रतिष्ठित जज हरबिलास शारदा की किताब अजमेर : हिस्टोरिकल एंड डिस्क्रिप्टिव के बारे में जानकारी मिली। इसमें दावा किया गया था कि यहां कभी संकट मोचन महादेव का मंदिर हुआ करता था।

दरगाह दीवान जैनुअल आबेदीन के पास इस तरह की कई तस्वीरें हैं।
अजमेर के लोग ही कहते थे यहां हिंदू मंदिर है गुप्ता ने बताया- अजमेर आता तो लोग दबी जुबान में कहते थे कि यहां हिंदू मंदिर रहा है। दरगाह के दरवाजों और इसकी बिल्डिंग पर बनी नक्काशी हिंदू मंदिरों की याद दिलाती है।
गुप्ता कहते हैं- जब मैंने हरबिलास शारदा की किताब को पढ़ा तो उसमें साफ-साफ लिखा था कि यहां पहले ब्राह्मण दंपती रहते थे। यह दंपती सुबह चंदन से महादेव का तिलक करते थे और जलाभिषेक करते थे।
हरबिलास शारदा कोई आम व्यक्ति नहीं थे। वे जोधपुर हाईकोर्ट में सीनियर जज के रूप में रहे। वह अजमेर मेरवाड़ा (1892) के न्यायिक विभाग में भी रहे। यहां अजमेर में तो उनके नाम से हरबिलास शारदा मार्ग भी है। उन्होंने 1911 में यह किताब लिखी थी। गुप्ता ने दावा किया कि यह किताब गलत साबित नहीं हो सकती है।
हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता के दावे के तीन आधार…
दरवाजों की बनावट व नक्काशी : दरगाह में मौजूद बुलंद दरवाजे की बनावट हिंदू मंदिरों के दरवाजे की तरह है। नक्काशी को देखकर भी अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां पहले हिंदू मंदिर रहा होगा।
ऊपरी स्ट्रक्चर : दरगाह के ऊपरी स्ट्रक्चर देखेंगे तो यहां भी हिंदू मंदिरों के अवशेष जैसी चीजें दिखती हैं। गुम्बदों को देखकर आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि किसी हिंदू मंदिर को तोड़कर यहां दरगाह का निर्माण करवाया गया है।
पानी और झरने : जहां-जहां शिव मंदिर हैं, वहां पानी और झरने जरूर होते हैं। यहां (अजमेर दरगाह) भी ऐसा ही है।
गुप्ता कहते हैं- मुस्लिम आक्रांता जब एक विद्यालय को तोड़कर ढाई दिन का झोपड़ा बना सकते हैं तो फिर शिव मंदिर तो जरूर तोड़ा होगा। उन्होंने कहा- यहां तहखाने में शिव मंदिर का दावा है, क्योंकि शिव मंदिर के ऊपर ही दरगाह का निर्माण किया गया है।
भगवान श्री संकट मोचन महादेव विराजमान बनाम दरगाह कमेटी हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता के वकील रामस्वरूप बिश्नोई ने बताया- सिविल जज मनमोहन चंदेल की बेंच ने मामले की सुनवाई को लेकर आगे की तारीख दी है। मामला भगवान श्री संकट मोचन महादेव विराजमान बनाम दरगाह कमेटी के बीच है। इसमें पहले 750 पेजों का वाद पेश किया गया था। बुधवार को संशोधित करके 38 पेजों का किया गया। इसके बाद इसे सिविल कोर्ट में लगाया गया था।
वंशज बोले- सस्ती मानसिकता के चलते ऐसी बातें कर रहे अजमेर दरगाह प्रमुख उत्तराधिकारी और ख्वाजा साहब के वंशज नसरुद्दीन चिश्ती ने कहा- कुछ लोग सस्ती मानसिकता के चलते ऐसी बातें कर रहे हैं। कब तक ऐसा चलता रहेगा। आए दिन हर मस्जिद-दरगाह में मंदिर होने का दावा किया जा रहा है। ऐसा कानून आना चाहिए कि इस तरह की बातें ना की जाएं। ये सारे दावे झूठे और निराधार हैं।
हरबिलास शारदा की किताब की बात छोड़ दें तो क्या 800 साल पुराने इतिहास को नहीं नकारा जा सकता है। यहां हिंदू राजाओं ने अकीदत की है। अंदर जो चांदी (42,961 तोला) का कटहरा है वो जयपुर महाराज का चढ़ाया हुआ है। ये सब झूठी बातें हैं। भारत सरकार में पहले ही 1950 में जस्टिस गुलाम हसन की कमेटी क्लीन चिट दे चुकी है। इसके तहत दरगाह की एक-एक इमारत की जांच की जा चुकी है।
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अजमेर दरगाह में मंदिर होने के 3 आधार पेश किए:हाईकोर्ट के जज की किताब का हवाला; वंशज बोले- ऐसी हरकतें देश के लिए खतरा
अजमेर5 घंटे पहलेलेखक: भरत मूलचंदानी

अजमेर की ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में संकट मोचन महादेव मंदिर होने का दावा किया गया है। अजमेर सिविल कोर्ट में लगाई गई याचिका को कोर्ट ने सुनने योग्य मानते हुए सुनवाई की अगली तारीख 20 दिसंबर तय की है। याचिका दायर करने वाले हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने मुख्य रूप से 3 आधार बताए हैं।
याचिकाकर्ता बोला- तथ्य साबित करते हैं कि दरगाह की जगह पहले मंदिर था उन्होंने कहा कि 2 साल की रिसर्च और रिटायर्ड जज हरबिलास शारदा की किताब में दिए गए तथ्यों के आधार पर याचिका दायर की है। किताब में इसका जिक्र है कि यहां ब्राह्मण दंपती रहते थे और दरगाह स्थल पर बने महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना करते थे। इसके अलावा कई अन्य तथ्य हैं, जो साबित करते हैं कि दरगाह से पहले यहां शिव मंदिर रहा था।

याचिकाकर्ता ने कहा- रिटायर्ड जज हरबिलास शारदा की किताब में दिए गए तथ्यों को आधार बनाकर याचिका लगाई है।
20 दिसंबर तक पक्ष रखने के लिए उपस्थित होना है कोर्ट ने अल्पसंख्यक मंत्रालय, दरगाह कमेटी और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) को नोटिस जारी किया है। 20 दिसंबर को उन्हें अपना पक्ष लेकर उपस्थित होना है।

दरगाह दीवान जैनुअल आबेदीन की ओर से उपलब्ध कराई गई तस्वीर। यह तस्वीर किसी पेंटर ने हाथ से बनाई थी।
इस मामले को लेकर अजमेर दरगाह प्रमुख उत्तराधिकारी और ख्वाजा साहब के वंशज नसरुद्दीन चिश्ती ने अपना पक्ष रखा है। उन्होंने कहा- ऐसी हरकतें देश की एकता के लिए खतरा हैं। यहां तो हिंदू राजाओं ने भी अकीदत की है। दरगाह में मौजूद कटहरा जयपुर के महाराजा ने भेंट किया है। 1950 के सर्वे में स्पष्ट हो चुका है कि दरगाह में कोई हिंदू मंदिर नहीं था।
दैनिक भास्कर में पढ़िए अजमेर की ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह को लेकर पहली बार पेश किए गए दावे की पूरी कहानी-

2 साल की रिसर्च के बाद किया दावा हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने बताया- मैंने अजमेर के लोगों को कहते सुना था और आसपास कई बार ये दावे किए गए थे कि दरगाह में पहले संकट मोचक महादेव का मंदिर था। इसकी बनावट को भी लोग संदेह की दृष्टि से देखते थे।
इसे लेकर मैंने 2 साल पहले रिसर्च शुरू की। गूगल पर देखा और कई किताबों को पढ़ने की कोशिश की। इसी दौरान मुझे अजमेर के प्रतिष्ठित जज हरबिलास शारदा की किताब अजमेर : हिस्टोरिकल एंड डिस्क्रिप्टिव के बारे में जानकारी मिली। इसमें दावा किया गया था कि यहां कभी संकट मोचन महादेव का मंदिर हुआ करता था।

दरगाह दीवान जैनुअल आबेदीन के पास इस तरह की कई तस्वीरें हैं।
अजमेर के लोग ही कहते थे यहां हिंदू मंदिर है गुप्ता ने बताया- अजमेर आता तो लोग दबी जुबान में कहते थे कि यहां हिंदू मंदिर रहा है। दरगाह के दरवाजों और इसकी बिल्डिंग पर बनी नक्काशी हिंदू मंदिरों की याद दिलाती है।
गुप्ता कहते हैं- जब मैंने हरबिलास शारदा की किताब को पढ़ा तो उसमें साफ-साफ लिखा था कि यहां पहले ब्राह्मण दंपती रहते थे। यह दंपती सुबह चंदन से महादेव का तिलक करते थे और जलाभिषेक करते थे।
हरबिलास शारदा कोई आम व्यक्ति नहीं थे। वे जोधपुर हाईकोर्ट में सीनियर जज के रूप में रहे। वह अजमेर मेरवाड़ा (1892) के न्यायिक विभाग में भी रहे। यहां अजमेर में तो उनके नाम से हरबिलास शारदा मार्ग भी है। उन्होंने 1911 में यह किताब लिखी थी। गुप्ता ने दावा किया कि यह किताब गलत साबित नहीं हो सकती है।

हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता के दावे के तीन आधार…
दरवाजों की बनावट व नक्काशी : दरगाह में मौजूद बुलंद दरवाजे की बनावट हिंदू मंदिरों के दरवाजे की तरह है। नक्काशी को देखकर भी अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां पहले हिंदू मंदिर रहा होगा।
ऊपरी स्ट्रक्चर : दरगाह के ऊपरी स्ट्रक्चर देखेंगे तो यहां भी हिंदू मंदिरों के अवशेष जैसी चीजें दिखती हैं। गुम्बदों को देखकर आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि किसी हिंदू मंदिर को तोड़कर यहां दरगाह का निर्माण करवाया गया है।
पानी और झरने : जहां-जहां शिव मंदिर हैं, वहां पानी और झरने जरूर होते हैं। यहां (अजमेर दरगाह) भी ऐसा ही है।
गुप्ता कहते हैं- मुस्लिम आक्रांता जब एक विद्यालय को तोड़कर ढाई दिन का झोपड़ा बना सकते हैं तो फिर शिव मंदिर तो जरूर तोड़ा होगा। उन्होंने कहा- यहां तहखाने में शिव मंदिर का दावा है, क्योंकि शिव मंदिर के ऊपर ही दरगाह का निर्माण किया गया है।

भगवान श्री संकट मोचन महादेव विराजमान बनाम दरगाह कमेटी हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता के वकील रामस्वरूप बिश्नोई ने बताया- सिविल जज मनमोहन चंदेल की बेंच ने मामले की सुनवाई को लेकर आगे की तारीख दी है। मामला भगवान श्री संकट मोचन महादेव विराजमान बनाम दरगाह कमेटी के बीच है। इसमें पहले 750 पेजों का वाद पेश किया गया था। बुधवार को संशोधित करके 38 पेजों का किया गया। इसके बाद इसे सिविल कोर्ट में लगाया गया था।

वंशज बोले- सस्ती मानसिकता के चलते ऐसी बातें कर रहे अजमेर दरगाह प्रमुख उत्तराधिकारी और ख्वाजा साहब के वंशज नसरुद्दीन चिश्ती ने कहा- कुछ लोग सस्ती मानसिकता के चलते ऐसी बातें कर रहे हैं। कब तक ऐसा चलता रहेगा। आए दिन हर मस्जिद-दरगाह में मंदिर होने का दावा किया जा रहा है। ऐसा कानून आना चाहिए कि इस तरह की बातें ना की जाएं। ये सारे दावे झूठे और निराधार हैं।
हरबिलास शारदा की किताब की बात छोड़ दें तो क्या 800 साल पुराने इतिहास को नहीं नकारा जा सकता है। यहां हिंदू राजाओं ने अकीदत की है। अंदर जो चांदी (42,961 तोला) का कटहरा है वो जयपुर महाराज का चढ़ाया हुआ है। ये सब झूठी बातें हैं। भारत सरकार में पहले ही 1950 में जस्टिस गुलाम हसन की कमेटी क्लीन चिट दे चुकी है। इसके तहत दरगाह की एक-एक इमारत की जांच की जा चुकी है।

चिश्ती बोले- ऐसा करना देश की एकता को खतरा 27 नवंबर की देर शाम अंजुमन कमेटी के सचिव सरवर चिश्ती ने कहा- पहले से इस तरह की बयानबाजी चलती आ रही है। अजमेर की दरगाह के देश में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में लाखों करोड़ों अनुयायी हैं।
उन्होंने कहा- इसी साल 22 जून को मोहन भागवत ने कहा था कि हर मस्जिद में शिवलिंग की तलाश न करें। चिश्ती ने द प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 का हवाला देते हुए कहा कि बाबरी मस्जिद के अलावा किसी भी धार्मिक स्थल में कोई बदलाव या छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि ऐसा करना देश की एकता और सहिष्णुता पर खतरा पैदा करेगा।
ओवैसी ने कहा- कानून की धज्जियां उड़ाई जा रहीं

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया X पर प्रतिक्रिया दी है।
देश
‘महिला आरक्षण बिल का समर्थन न करना विपक्ष की बड़ी राजनीतिक गलती है’: कैबिनेट बैठक में पीएम मोदी बोले
नई दिल्ली,एजेंसी। संसद में महिला आरक्षण बिल पर सत्ता पक्ष और विपक्ष में टकराव जारी है। प्रियंका गांधी ने महिला आरक्षण बिल को परिसीमन का धोखा बताया है। पीएम मोदी ने कैबिनेट बैठक में विपक्ष पर कड़ा प्रहार किया है। सूत्रों के मुताबिक, पीएम ने कहा है कि महिला आरक्षण बिल का समर्थन का इनकार विपक्ष की एक बड़ी राजनीतिक गलती है और इसके लिए उन्हें भविष्य में गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे।


देश
महिला आरक्षण से जुड़ा बिल 54 वोट से गिरा:पास होने के लिए चाहिए थे 352, मिले 298; मोदी सरकार बिल पास कराने में पहली बार नाकाम
नई दिल्ली,एजेंसी। महिला आरक्षण बिल से जुड़ा संविधान (131वां) संशोधन बिल सरकार लोकसभा में पास नहीं करा पाई। इसमें संसद की 543 सीटें बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान था। 21 घंटे की चर्चा के बाद वोटिंग हुई। लोकसभा में मौजूद 528 सांसदों ने वोट डाले। पक्ष में 298, विपक्ष में 230 वोट पड़े। बिल पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत थी। 528 का दो तिहाई 352 होता है। इस तरह ये बिल 54 वोट से गिर गया। लोकसभा में कुल 543 सीटें हैं, लेकिन 3 सीटें खाली होने की वजह से मौजूदा सांसद 540 है।

सरकार ने दो बिल वोटिंग के लिए पेश ही नहीं किए
पहला- परिसीमन संशोधन संविधान बिल 2026
दूसरा- केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल 2026
सरकार ने इन पर वोटिंग से इनकार किया। कहा कि ये बिल एक-दूसरे से लिंक है इसलिए वोटिंग की जरूरत नहीं है।
12 साल के शासन में यह पहला मौका जब मोदी सरकार सदन में कोई बिल पास नहीं करा पाई। इससे पहले अमित शाह ने एक घंटा स्पीच दी थी। कहा कि अगर ये बिल पास नहीं होते हैं तो जिम्मेदारी विपक्ष की होगी। देश की महिलाएं देख रही हैं कि उनकी राह का रोड़ा कौन है।
बिल गिरने के बाद विपक्ष ने कहा- हमने हरा दिया
- राहुल गांधी ने कहा- हमने संविधान पर हुए हमले को हरा दिया है। हमने साफ कहा है कि यह महिला आरक्षण बिल नहीं है, बल्कि यह भारत की राजनीतिक संरचना को बदलने का एक तरीका है।
- प्रियंका ने कहा– यह हमारे लोकतंत्र और देश की एकता के लिए एक बड़ी जीत है। जैसा कि मैंने अंदर कहा, यह संविधान पर हमला था, और हमने इसे विफल कर दिया है, जो कि एक अच्छी बात है।
- शशि थरूर ने कहा– हमने हमेशा कहा है कि हम महिला आरक्षण का पूर्ण समर्थन करते हैं और आज भी इसके पक्ष में मतदान करने को तैयार हैं। हालांकि, इसे परिसीमन से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
- एमके स्टालिन ने कहा- 23 अप्रैल को हम दिल्ली का अहंकार और उस अहंकार का समर्थन करने वाले गुलामों को हराएंगे।
संसद के बाहर भाजपा महिला सांसदों के प्रदर्शन की तस्वीरें…

बिल गिरने के बाद एनडीए की महिला सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन किया।

महिला सांसदों ने ‘महिला का अपमान, नहीं सहेगा हिंदुस्तान’ के नारे लगाए।
सरकार को पता था बिल पास नहीं होगा, मोदी ने 3, शाह ने एक अपील की
सरकार जानती थी कि उसके पक्ष में लोकसभा में नंबर नहीं है, इसीलिए सरकार बार-बार सभी सांसदों से समर्थन की मांग कर रही थी। पीएम नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू समेत बीजेपी और NDA नेताओं ने विपक्ष से बिल को सपोर्ट करने की अपील की।
पीएम की 3 अपील
- 13 अप्रैल एक कार्यक्रम में: मैं आपसे आग्रह करता हूं कि अपने स्थानीय सांसदों को पत्र लिखें और इस ऐतिहासिक संसद सत्र में हिस्सा लेते समय उनका हौसला बढ़ाएं।
- 16 अप्रैल लोकसभा में: ‘हमें क्रेडिट नहीं चाहिए, जैसे ही पारित हो जाए तो मैं एड देकर सबको धन्यवाद देने को तैयार हूं। सामने से क्रेडिट का ब्लैंक चेक आपको दे रहा हूं।’
- 17 अप्रैल सोशल मीडिया में: सभी सांसद वोटिंग से पहले अपनी अंतर्रात्मा की आवाज सुनें।

शाह ने कहा- महिलाएं माफ नहीं करेंगी
17 अप्रैल लोकसभा में अमित शाह ने कहा कि देश की महिलाएं देख रही हैं कि उनके रास्ते का रोड़ा कौन है। यहां पर तो शोर-शराबा करके बच जाओगे लेकिन माताओं-बहनों का आक्रोश बाहर पता चलेगा। चुनाव में वोट मांगने जाएंगे तो मातृशक्ति हिसाब मांगेगी।

देश
‘परिसीमन एक ‘राजनीतिक नोटबंदी’ साबित होगा’- शशि थरुर का केंद्र सरकार पर तीखा हमला
नई दिल्ली,एजेंसी। लोकसभा में शुक्रवार को ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ और ‘परिसीमन’ (Delimitation) पर चल रही बहस के दौरान कांग्रेस नेता शशि थरूर ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया की तुलना ‘नोटबंदी’ से करते हुए इसे भारतीय लोकतंत्र की आत्मा के लिए खतरा बताया।

थरुर ने अपने भाषण में कहा
शशि थरूर ने कहा कि दशकों से महिला आरक्षण का वादा किया गया और इसे टाला गया। आज जब इस पर राजनीतिक सहमति बनी है, तब सरकार ने इसे परिसीमन जैसी जटिल प्रक्रिया से बांधकर महिलाओं की आकांक्षाओं को ‘बंधक’ बना लिया है। थरूर ने सरकार की जल्दबाजी पर सवाल उठाते हुए कहा, “आपने परिसीमन का प्रस्ताव वैसी ही जल्दबाजी में पेश किया है जैसी नोटबंदी के समय दिखाई थी। हम सब जानते हैं कि नोटबंदी ने देश का क्या हाल किया था। परिसीमन भी एक ‘राजनीतिक नोटबंदी’ साबित होगा, इसे मत कीजिए।”


थरूर ने उत्तर और दक्षिण भारत के राज्यों के बीच शक्ति संतुलन बिगड़ने की आशंका जताई। उन्होंने तर्क दिया कि केरल और तमिलनाडु जैसे दक्षिणी राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण और मानव विकास में बेहतरीन काम किया है। यदि परिसीमन जनसंख्या के आधार पर हुआ, तो जनसंख्या नियंत्रण में विफल रहने वाले राज्यों को अधिक राजनीतिक ताकत मिलेगी और अच्छा काम करने वाले राज्य हाशिए पर चले जाएंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आर्थिक रूप से समृद्ध और विकासशील राज्यों की आवाज को दबाया गया, तो इससे देश के संघीय ढांचे पर बुरा असर पड़ेगा। उनके अनुसार, यह “बहुसंख्यकवाद की तानाशाही” (Tyranny of the democratic majority) पैदा करने जैसा होगा।

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