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अजमेर दरगाह में मंदिर होने के 3 आधार पेश किए:हाईकोर्ट के जज की किताब का हवाला; वंशज बोले- ऐसी हरकतें देश के लिए खतरा

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अजमेर , एजेंसी। अजमेर की ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में संकट मोचन महादेव मंदिर होने का दावा किया गया है। अजमेर सिविल कोर्ट में लगाई गई याचिका को कोर्ट ने सुनने योग्य मानते हुए सुनवाई की अगली तारीख 20 दिसंबर तय की है। याचिका दायर करने वाले हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने मुख्य रूप से 3 आधार बताए हैं।

याचिकाकर्ता बोला- तथ्य साबित करते हैं कि दरगाह की जगह पहले मंदिर था उन्होंने कहा कि 2 साल की रिसर्च और रिटायर्ड जज हरबिलास शारदा की किताब में दिए गए तथ्यों के आधार पर याचिका दायर की है। किताब में इसका जिक्र है कि यहां ब्राह्मण दंपती रहते थे और दरगाह स्थल पर बने महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना करते थे। इसके अलावा कई अन्य तथ्य हैं, जो साबित करते हैं कि दरगाह से पहले यहां शिव मंदिर रहा था।

याचिकाकर्ता ने कहा- रिटायर्ड जज हरबिलास शारदा की किताब में दिए गए तथ्यों को आधार बनाकर याचिका लगाई है।

याचिकाकर्ता ने कहा- रिटायर्ड जज हरबिलास शारदा की किताब में दिए गए तथ्यों को आधार बनाकर याचिका लगाई है।

20 दिसंबर तक पक्ष रखने के लिए उपस्थित होना है कोर्ट ने अल्पसंख्यक मंत्रालय, दरगाह कमेटी और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) को नोटिस जारी किया है। 20 दिसंबर को उन्हें अपना पक्ष लेकर उपस्थित होना है।

दरगाह दीवान जैनुअल आबेदीन की ओर से उपलब्ध कराई गई तस्वीर। यह तस्वीर किसी पेंटर ने हाथ से बनाई थी।

दरगाह दीवान जैनुअल आबेदीन की ओर से उपलब्ध कराई गई तस्वीर। यह तस्वीर किसी पेंटर ने हाथ से बनाई थी।

इस मामले को लेकर अजमेर दरगाह प्रमुख उत्तराधिकारी और ख्वाजा साहब के वंशज नसरुद्दीन चिश्ती ने अपना पक्ष रखा है। उन्होंने कहा- ऐसी हरकतें देश की एकता के लिए खतरा हैं। यहां तो हिंदू राजाओं ने भी अकीदत की है। दरगाह में मौजूद कटहरा जयपुर के महाराजा ने भेंट किया है। 1950 के सर्वे में स्पष्ट हो चुका है कि दरगाह में कोई हिंदू मंदिर नहीं था।

दैनिक भास्कर में पढ़िए अजमेर की ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह को लेकर पहली बार पेश किए गए दावे की पूरी कहानी-

2 साल की रिसर्च के बाद किया दावा हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने बताया- मैंने अजमेर के लोगों को कहते सुना था और आसपास कई बार ये दावे किए गए थे कि दरगाह में पहले संकट मोचक महादेव का मंदिर था। इसकी बनावट को भी लोग संदेह की दृष्टि से देखते थे।

इसे लेकर मैंने 2 साल पहले रिसर्च शुरू की। गूगल पर देखा और कई किताबों को पढ़ने की कोशिश की। इसी दौरान मुझे अजमेर के प्रतिष्ठित जज हरबिलास शारदा की किताब अजमेर : हिस्टोरिकल एंड डिस्क्रिप्टिव के बारे में जानकारी मिली। इसमें दावा किया गया था कि यहां कभी संकट मोचन महादेव का मंदिर हुआ करता था।

दरगाह दीवान जैनुअल आबेदीन के पास इस तरह की कई तस्वीरें हैं।

दरगाह दीवान जैनुअल आबेदीन के पास इस तरह की कई तस्वीरें हैं।

अजमेर के लोग ही कहते थे यहां हिंदू मंदिर है गुप्ता ने बताया- अजमेर आता तो लोग दबी जुबान में कहते थे कि यहां हिंदू मंदिर रहा है। दरगाह के दरवाजों और इसकी बिल्डिंग पर बनी नक्काशी हिंदू मंदिरों की याद दिलाती है।

गुप्ता कहते हैं- जब मैंने हरबिलास शारदा की किताब को पढ़ा तो उसमें साफ-साफ लिखा था कि यहां पहले ब्राह्मण दंपती रहते थे। यह दंपती सुबह चंदन से महादेव का तिलक करते थे और जलाभिषेक करते थे।

हरबिलास शारदा कोई आम व्यक्ति नहीं थे। वे जोधपुर हाईकोर्ट में सीनियर जज के रूप में रहे। वह अजमेर मेरवाड़ा (1892) के न्यायिक विभाग में भी रहे। यहां अजमेर में तो उनके नाम से हरबिलास शारदा मार्ग भी है। उन्होंने 1911 में यह किताब लिखी थी। गुप्ता ने दावा किया कि यह किताब गलत साबित नहीं हो सकती है।

हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता के दावे के तीन आधार…

दरवाजों की बनावट व नक्काशी : दरगाह में मौजूद बुलंद दरवाजे की बनावट हिंदू मंदिरों के दरवाजे की तरह है। नक्काशी को देखकर भी अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां पहले हिंदू मंदिर रहा होगा।

ऊपरी स्ट्रक्चर : दरगाह के ऊपरी स्ट्रक्चर देखेंगे तो यहां भी हिंदू मंदिरों के अवशेष जैसी चीजें दिखती हैं। गुम्बदों को देखकर आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि किसी हिंदू मंदिर को तोड़कर यहां दरगाह का निर्माण करवाया गया है।

पानी और झरने : जहां-जहां शिव मंदिर हैं, वहां पानी और झरने जरूर होते हैं। यहां (अजमेर दरगाह) भी ऐसा ही है।

गुप्ता कहते हैं- मुस्लिम आक्रांता जब एक विद्यालय को तोड़कर ढाई दिन का झोपड़ा बना सकते हैं तो फिर शिव मंदिर तो जरूर तोड़ा होगा। उन्होंने कहा- यहां तहखाने में शिव मंदिर का दावा है, क्योंकि शिव मंदिर के ऊपर ही दरगाह का निर्माण किया गया है।

भगवान श्री संकट मोचन महादेव विराजमान बनाम दरगाह कमेटी हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता के वकील रामस्वरूप बिश्नोई ने बताया- सिविल जज मनमोहन चंदेल की बेंच ने मामले की सुनवाई को लेकर आगे की तारीख दी है। मामला भगवान श्री संकट मोचन महादेव विराजमान बनाम दरगाह कमेटी के बीच है। इसमें पहले 750 पेजों का वाद पेश किया गया था। बुधवार को संशोधित करके 38 पेजों का किया गया। इसके बाद इसे सिविल कोर्ट में लगाया गया था।

वंशज बोले- सस्ती मानसिकता के चलते ऐसी बातें कर रहे अजमेर दरगाह प्रमुख उत्तराधिकारी और ख्वाजा साहब के वंशज नसरुद्दीन चिश्ती ने कहा- कुछ लोग सस्ती मानसिकता के चलते ऐसी बातें कर रहे हैं। कब तक ऐसा चलता रहेगा। आए दिन हर मस्जिद-दरगाह में मंदिर होने का दावा किया जा रहा है। ऐसा कानून आना चाहिए कि इस तरह की बातें ना की जाएं। ये सारे दावे झूठे और निराधार हैं।

हरबिलास शारदा की किताब की बात छोड़ दें तो क्या 800 साल पुराने इतिहास को नहीं नकारा जा सकता है। यहां हिंदू राजाओं ने अकीदत की है। अंदर जो चांदी (42,961 तोला) का कटहरा है वो जयपुर महाराज का चढ़ाया हुआ है। ये सब झूठी बातें हैं। भारत सरकार में पहले ही 1950 में जस्टिस गुलाम हसन की कमेटी क्लीन चिट दे चुकी है। इसके तहत दरगाह की एक-एक इमारत की जांच की जा चुकी है।

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अजमेर दरगाह में मंदिर होने के 3 आधार पेश किए:हाईकोर्ट के जज की किताब का हवाला; वंशज बोले- ऐसी हरकतें देश के लिए खतरा

अजमेर5 घंटे पहलेलेखक: भरत मूलचंदानी

अजमेर की ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में संकट मोचन महादेव मंदिर होने का दावा किया गया है। अजमेर सिविल कोर्ट में लगाई गई याचिका को कोर्ट ने सुनने योग्य मानते हुए सुनवाई की अगली तारीख 20 दिसंबर तय की है। याचिका दायर करने वाले हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने मुख्य रूप से 3 आधार बताए हैं।

याचिकाकर्ता बोला- तथ्य साबित करते हैं कि दरगाह की जगह पहले मंदिर था उन्होंने कहा कि 2 साल की रिसर्च और रिटायर्ड जज हरबिलास शारदा की किताब में दिए गए तथ्यों के आधार पर याचिका दायर की है। किताब में इसका जिक्र है कि यहां ब्राह्मण दंपती रहते थे और दरगाह स्थल पर बने महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना करते थे। इसके अलावा कई अन्य तथ्य हैं, जो साबित करते हैं कि दरगाह से पहले यहां शिव मंदिर रहा था।

याचिकाकर्ता ने कहा- रिटायर्ड जज हरबिलास शारदा की किताब में दिए गए तथ्यों को आधार बनाकर याचिका लगाई है।

याचिकाकर्ता ने कहा- रिटायर्ड जज हरबिलास शारदा की किताब में दिए गए तथ्यों को आधार बनाकर याचिका लगाई है।

20 दिसंबर तक पक्ष रखने के लिए उपस्थित होना है कोर्ट ने अल्पसंख्यक मंत्रालय, दरगाह कमेटी और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) को नोटिस जारी किया है। 20 दिसंबर को उन्हें अपना पक्ष लेकर उपस्थित होना है।

दरगाह दीवान जैनुअल आबेदीन की ओर से उपलब्ध कराई गई तस्वीर। यह तस्वीर किसी पेंटर ने हाथ से बनाई थी।

दरगाह दीवान जैनुअल आबेदीन की ओर से उपलब्ध कराई गई तस्वीर। यह तस्वीर किसी पेंटर ने हाथ से बनाई थी।

इस मामले को लेकर अजमेर दरगाह प्रमुख उत्तराधिकारी और ख्वाजा साहब के वंशज नसरुद्दीन चिश्ती ने अपना पक्ष रखा है। उन्होंने कहा- ऐसी हरकतें देश की एकता के लिए खतरा हैं। यहां तो हिंदू राजाओं ने भी अकीदत की है। दरगाह में मौजूद कटहरा जयपुर के महाराजा ने भेंट किया है। 1950 के सर्वे में स्पष्ट हो चुका है कि दरगाह में कोई हिंदू मंदिर नहीं था।

दैनिक भास्कर में पढ़िए अजमेर की ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह को लेकर पहली बार पेश किए गए दावे की पूरी कहानी-

2 साल की रिसर्च के बाद किया दावा हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने बताया- मैंने अजमेर के लोगों को कहते सुना था और आसपास कई बार ये दावे किए गए थे कि दरगाह में पहले संकट मोचक महादेव का मंदिर था। इसकी बनावट को भी लोग संदेह की दृष्टि से देखते थे।

इसे लेकर मैंने 2 साल पहले रिसर्च शुरू की। गूगल पर देखा और कई किताबों को पढ़ने की कोशिश की। इसी दौरान मुझे अजमेर के प्रतिष्ठित जज हरबिलास शारदा की किताब अजमेर : हिस्टोरिकल एंड डिस्क्रिप्टिव के बारे में जानकारी मिली। इसमें दावा किया गया था कि यहां कभी संकट मोचन महादेव का मंदिर हुआ करता था।

दरगाह दीवान जैनुअल आबेदीन के पास इस तरह की कई तस्वीरें हैं।

दरगाह दीवान जैनुअल आबेदीन के पास इस तरह की कई तस्वीरें हैं।

अजमेर के लोग ही कहते थे यहां हिंदू मंदिर है गुप्ता ने बताया- अजमेर आता तो लोग दबी जुबान में कहते थे कि यहां हिंदू मंदिर रहा है। दरगाह के दरवाजों और इसकी बिल्डिंग पर बनी नक्काशी हिंदू मंदिरों की याद दिलाती है।

गुप्ता कहते हैं- जब मैंने हरबिलास शारदा की किताब को पढ़ा तो उसमें साफ-साफ लिखा था कि यहां पहले ब्राह्मण दंपती रहते थे। यह दंपती सुबह चंदन से महादेव का तिलक करते थे और जलाभिषेक करते थे।

हरबिलास शारदा कोई आम व्यक्ति नहीं थे। वे जोधपुर हाईकोर्ट में सीनियर जज के रूप में रहे। वह अजमेर मेरवाड़ा (1892) के न्यायिक विभाग में भी रहे। यहां अजमेर में तो उनके नाम से हरबिलास शारदा मार्ग भी है। उन्होंने 1911 में यह किताब लिखी थी। गुप्ता ने दावा किया कि यह किताब गलत साबित नहीं हो सकती है।

हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता के दावे के तीन आधार…

दरवाजों की बनावट व नक्काशी : दरगाह में मौजूद बुलंद दरवाजे की बनावट हिंदू मंदिरों के दरवाजे की तरह है। नक्काशी को देखकर भी अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां पहले हिंदू मंदिर रहा होगा।

ऊपरी स्ट्रक्चर : दरगाह के ऊपरी स्ट्रक्चर देखेंगे तो यहां भी हिंदू मंदिरों के अवशेष जैसी चीजें दिखती हैं। गुम्बदों को देखकर आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि किसी हिंदू मंदिर को तोड़कर यहां दरगाह का निर्माण करवाया गया है।

पानी और झरने : जहां-जहां शिव मंदिर हैं, वहां पानी और झरने जरूर होते हैं। यहां (अजमेर दरगाह) भी ऐसा ही है।

गुप्ता कहते हैं- मुस्लिम आक्रांता जब एक विद्यालय को तोड़कर ढाई दिन का झोपड़ा बना सकते हैं तो फिर शिव मंदिर तो जरूर तोड़ा होगा। उन्होंने कहा- यहां तहखाने में शिव मंदिर का दावा है, क्योंकि शिव मंदिर के ऊपर ही दरगाह का निर्माण किया गया है।

भगवान श्री संकट मोचन महादेव विराजमान बनाम दरगाह कमेटी हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता के वकील रामस्वरूप बिश्नोई ने बताया- सिविल जज मनमोहन चंदेल की बेंच ने मामले की सुनवाई को लेकर आगे की तारीख दी है। मामला भगवान श्री संकट मोचन महादेव विराजमान बनाम दरगाह कमेटी के बीच है। इसमें पहले 750 पेजों का वाद पेश किया गया था। बुधवार को संशोधित करके 38 पेजों का किया गया। इसके बाद इसे सिविल कोर्ट में लगाया गया था।

वंशज बोले- सस्ती मानसिकता के चलते ऐसी बातें कर रहे अजमेर दरगाह प्रमुख उत्तराधिकारी और ख्वाजा साहब के वंशज नसरुद्दीन चिश्ती ने कहा- कुछ लोग सस्ती मानसिकता के चलते ऐसी बातें कर रहे हैं। कब तक ऐसा चलता रहेगा। आए दिन हर मस्जिद-दरगाह में मंदिर होने का दावा किया जा रहा है। ऐसा कानून आना चाहिए कि इस तरह की बातें ना की जाएं। ये सारे दावे झूठे और निराधार हैं।

हरबिलास शारदा की किताब की बात छोड़ दें तो क्या 800 साल पुराने इतिहास को नहीं नकारा जा सकता है। यहां हिंदू राजाओं ने अकीदत की है। अंदर जो चांदी (42,961 तोला) का कटहरा है वो जयपुर महाराज का चढ़ाया हुआ है। ये सब झूठी बातें हैं। भारत सरकार में पहले ही 1950 में जस्टिस गुलाम हसन की कमेटी क्लीन चिट दे चुकी है। इसके तहत दरगाह की एक-एक इमारत की जांच की जा चुकी है।

चिश्ती बोले- ऐसा करना देश की एकता को खतरा 27 नवंबर की देर शाम अंजुमन कमेटी के सचिव सरवर चिश्ती ने कहा- पहले से इस तरह की बयानबाजी चलती आ रही है। अजमेर की दरगाह के देश में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में लाखों करोड़ों अनुयायी हैं।

उन्होंने कहा- इसी साल 22 जून को मोहन भागवत ने कहा था कि हर मस्जिद में शिवलिंग की तलाश न करें। चिश्ती ने द प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 का हवाला देते हुए कहा कि बाबरी मस्जिद के अलावा किसी भी धार्मिक स्थल में कोई बदलाव या छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि ऐसा करना देश की एकता और सहिष्णुता पर खतरा पैदा करेगा।

ओवैसी ने कहा- कानून की धज्जियां उड़ाई जा रहीं

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया X पर प्रतिक्रिया दी है।

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया X पर प्रतिक्रिया दी है।

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10 साल जेल, रू.10 करोड़ का जुर्माना, पेपर लीक संशोधन बिल कैबिनेट से मंजूर

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नई दिल्ली, एजेंसी। परीक्षाओं में पेपर लीक और धांधली की घटनाओं पर सख्त रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार मौजूदा कानूनी प्रावधानों को और मजबूत करने जा रही है। सरकार ने पब्लिक एग्जामिनेशंस एक्ट, 2024 में संशोधन के मसौदे को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी दे दी है। प्रस्तावित संशोधनों के तहत पेपर लीक के मामलों में 10 साल तक की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

संशोधित विधेयक को मिली मंजूरी

शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) और कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA) की बैठकों के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल की अहम बैठक हुई। इस बैठक में संशोधित पेपर लीक विधेयक के मसौदे पर चर्चा की गई और उसे मंजूरी दे दी गई। सरकार अब इस विधेयक को अगले सप्ताह शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र में पेश करने की तैयारी कर रही है।

पेपर लीक माफिया पर होगी कड़ी कार्रवाई

प्रस्तावित संशोधनों के तहत पेपर लीक से जुड़े संगठित गिरोहों और दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा मामलों के त्वरित निपटारे के लिए स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट को कानूनी आधार दिया जाएगा। इन अदालतों को तीन महीने के भीतर जांच पूरी कर फैसला सुनाने का अधिकार देने का प्रस्ताव है, ताकि छात्रों को जल्द न्याय मिल सके।

बता दें कि इस फैसले से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक की घटनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा था कि यह कोई सामान्य अपराध नहीं है, बल्कि लाखों छात्रों और उनके परिवारों के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने भरोसा दिलाया था कि दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए सरकार मजबूत कानूनी व्यवस्था लागू करेगी।

CJP और केंद्र सरकार के बीच हुई अहम बैठक

इधर, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों के बीच नई दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में बैठक हुई। इस वार्ता को आंदोलन के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बैठक से पहले CJP ने मंत्रियों के सरकारी आवास या कार्यालय में बातचीत से इनकार करते हुए किसी तटस्थ स्थान पर बैठक की मांग की थी, जिसके बाद कॉन्स्टिट्यूशन क्लब को वार्ता स्थल बनाया गया।

CJP ने रखीं ये प्रमुख मांगें

बैठक के दौरान CJP ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई। इसके अलावा प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जवाबदेही तय करने, पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच कराने और आंदोलन के दौरान छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग भी सरकार के सामने रखी गई।

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देश

कांग्रेस का बड़ा ऐलान- कल देशभर में पार्टी निकालेगी कैंडल मार्च

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नई दिल्ली, एजेंसी। कांग्रेस ने शुक्रवार को अपनी राज्य इकाइयों को निर्देश दिया कि वे 25 जुलाई (शनिवार) को ज़िला स्तर पर कैंडललाइट मार्च और सत्याग्रह आयोजित करें। यह आयोजन NEET और CBSE परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्रों के समर्थन में और विरोध कर रहे छात्रों पर कथित “बर्बर हमलों” की निंदा करने के लिए किया जाएगा। सभी प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) अध्यक्षों को लिखे एक पत्र में, AICC महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि ये कार्यक्रम कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के निर्देशन में आयोजित किए जाने चाहिए।

वेणुगोपाल ने पत्र में कहा, “माननीय कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के निर्देशानुसार, आपसे अनुरोध है कि आप अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली प्रत्येक ज़िला कांग्रेस कमेटी (DCC) को शनिवार शाम, 25 जुलाई, 2026 को एक विशाल कैंडललाइट मार्च और सत्याग्रह आयोजित करने का निर्देश दें।” पत्र में कहा गया है कि मार्च महात्मा गांधी या डॉ. बीआर अंबेडकर की प्रतिमा की ओर बढ़ना चाहिए और वहीं समाप्त होना चाहिए, साथ ही छात्रों और युवाओं के समर्थन में सत्याग्रह आयोजित किया जाना चाहिए।

कांग्रेस ने अपने कार्यकर्ताओं को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की मांग करने का भी निर्देश दिया। पार्टी ने परीक्षा की शुचिता के “पूरी तरह से ध्वस्त होने” और देश के युवाओं के भविष्य की रक्षा करने में विफलता का आरोप लगाया। पत्र में कहा गया, “हमें परीक्षा की शुचिता के पूरी तरह से ध्वस्त होने और देश के युवाओं के भविष्य की रक्षा करने में विफलता के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की भी स्पष्ट रूप से मांग करनी चाहिए।”

PunjabKesari

पार्टी ने PCC, DCC, ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों, फ्रंटल संगठनों, विभागों, सेल और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ-साथ छात्रों, युवाओं, अभिभावकों और नागरिक समाज के सदस्यों की भागीदारी का आह्वान किया। PCC अध्यक्षों से यह सुनिश्चित करने के लिए भी कहा गया कि मार्च और सत्याग्रह “शांतिपूर्ण, अनुशासित और प्रभावी ढंग से” आयोजित किए जाएं और उन्हें व्यापक मीडिया और सोशल मीडिया कवरेज मिले।

पत्र में कहा गया, “भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस भारत के छात्रों के साथ मजबूती से खड़ी है और डराने-धमकाने, दमन और सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग के माध्यम से लोकतांत्रिक आवाज़ों को दबाने के किसी भी प्रयास का पुरजोर विरोध करेगी। कांग्रेस की यह घोषणा NEET-UG 2026 परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच आई है। इस बीच, दिल्ली में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह तथा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास और राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका के बीच एक बैठक हुई।

CJP बातचीत के लिए तब सहमत हुई जब सरकार ने कथित तौर पर उसकी दो शर्तें मान लीं — कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी और हाल ही में परीक्षा में हुई गड़बड़ियों से प्रभावित छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाएगा। हालांकि, CJP प्रधान के इस्तीफे की अपनी मुख्य मांग पर अड़ी रही। CJP प्रतिनिधि अभिजीत दिपके ने कहा, “हमें (केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के) इस्तीफे से कम कुछ भी मंजूर नहीं है। विरोध प्रदर्शन वापस नहीं लिया जाएगा।” यह घटनाक्रम तब हुआ है जब सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने NEET परीक्षा के मुद्दे और प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रणालीगत सुधारों के संबंध में केंद्र सरकार से लिखित आश्वासन मिलने के बाद अपनी 26 दिन की भूख हड़ताल खत्म कर दी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह भी घोषणा की है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल एक ऐसे मसौदा विधेयक पर विचार करेगा जिसमें पेपर लीक में शामिल लोगों के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट और कड़ी सजा का प्रावधान होगा।

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देश

हिमाचल में चलती कार पर चट्टानें गिरीं, 13 की मौत:गुजरात के नवसारी में बाढ़, हेलिकॉप्टर से एयरलिफ्ट, 5 शहरों में पानी भरा, बाजार डूबे

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नई दिल्ली/भोपाल/जयपुर, एजेंसी। हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति में शुक्रवार को उदयपुर-किलाड़ सड़क पर कडू नाला के पास लैंडस्लाइड हो गई। इसकी चपेट में टाटा सूमो टैक्सी आ गई। गाड़ी में 15 लोग सवार थे, 13 की मौत हो गई।

उधर गुजरात में भारी बारिश से कई जिले बाढ़ की चपेट में हैं। वलसाड के उमरगाम तालुका में 16 घंटों में 43 इंच बारिश हुई, जिससे निचले इलाके डूब गए हैं।

नवसारी में बाढ़ में फंसे लोगों को हेलिकॉप्टर से एयरलिफ्ट किया गया। अहमदाबाद, सूरत में पानी भर गया। वाव-थराद जिले में बाजार डूब गए।

यूपी में पिछले 10 दिनों से हो रही बारिश के चलते गंगा, यमुना समेत 10 नदियां उफान पर हैं। सीतापुर में पानी सड़क पर भर गया। ग्रामीण नाव से आ-जा रहे हैं।

वहीं, राजस्थान के बांसवाड़ा और डूंगरपुर समेत 11 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी है।

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