छत्तीसगढ़
मेयर और नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव डायरेक्ट होगा:नगर पंचायत में अध्यक्ष भी जनता चुनेगी; साय कैबिनेट ने लिया फैसला
रायपुर , एजेंसी। छत्तीसगढ़ में साय कैबिनेट की बैठक में बड़ा फैसला लिया है। नगरीय निकाय चुनावों में अब मेयर और अध्यक्ष का चुनाव प्रत्यक्ष रूप से होगा। यानी पार्षद के साथ ही मेयर और अध्यक्ष के लिए भी जनता ही वोट करेगी। 6 दिन में दूसरी बार सोमवार को साय कैबिनेट की बैठक हुई है।
2018 में प्रदेश में कांग्रेस की सरकार आने के बाद नियम बदला गया था। इसमें मेयर चुनने का हक पार्षदों को दिया गया था। हालांकि भूपेश कार्यकाल से पहले जनता ही पार्षदों के साथ मेयर को चुनती थी।

26 नवंबर को मंत्रालय में साय कैबिनेट की बैठक हुई थी।
दिग्विजय सिंह ने दिया था महापौर चुनने का अधिकार
मध्यप्रदेश शासन काल में 1999 में कांग्रेस की दिग्विजय सिंह सरकार ने राज्य में महापौर चुनने का अधिकार पार्षदों से छीनकर जनता के हाथ में दिया था। तब से लेकर 2018 तक ये अधिकार छत्तीसगढ़ की जनता के पास था। 2018 में प्रदेश में कांग्रेस की सरकार आने के बाद संशोधन हुआ और हक पार्षदों को मिल गया था।
कैबिनेट बैठक के कुछ और फैसले
- छत्तीसगढ़ शासन के पिछड़ा वर्ग एवं अल्संख्यक विभाग ने त्रिस्तरीय पंचायतों और नगरीय निकायों के चुनाव में OBC के आरक्षण के नियम को बदला है। पहले 25 प्रतिशत आरक्षण था अब ओबीसी को संख्या के अनुपात में 50 प्रतिशत तक आरक्षण मिलेगा।
- छत्तीसगढ़ के लोगों को चना बांटने के लिए हर माह 6046 टन और हर साल 72 हजार 52 टन चना की जरूरत होती है। चना का उपार्जन नागरिक आपूर्ति निगम करता है। ऐसे में कैबिनेट ने तय किया है कि नागरिक आपूर्ति निगम से ई-ऑक्शन प्लेटफॉर्म के माध्यम से चना लिया जाएगा।
- पर्यटन को उद्योग का दर्जा देने का फैसला लिया गया है। छत्तीसगढ़ पर्यटन नीति 2020 में पर्यटन परियोजनाओं के लिए निवेश किए जाने पर सामान्य उद्योगों की तरह अनुदान/छूट/रियायत का प्रावधान किया गया है।
- पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिए जाने से प्रदेश में एडवेंचर,वाटर पर्यटन, मेडिकल और वेलनेस टूरिज्म, एग्रो टूरिज्म, पर्यटन की इकाइयों, लैंड बैंक में निजी निवेश को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। इससे स्टेक होल्डर प्रोत्साहित होंगे। राज्य में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों के हिसाब से सुविधाओं का विकास होगा।
राज्यपाल और सीएम साय के बीच चर्चा
वहीं मंत्रालय जाने से पहले मुख्यमंत्री प्रदेश के राज्यपाल रामेन डेका से मिलने पहुंचे थे। सूत्रों ने बताया कि निकाय चुनाव को लेकर दोनों के बीच चर्चा हुई। 14 दिन बाद प्रदेश की विधानसभा का शीतकालीन सत्र भी शुरू होने को है। इसमें सरकार अहम प्रस्ताव पास कर सकती है।
माना जा रहा है कि ये मुलाकात इसी से जुड़ी है। हालांकि सरकार की ओर से CM और राज्यपाल के बीच अचानक हुई इस खास मीटिंग को लेकर कुछ पुख्ता कहा नहीं गया। इसे सामान्य भेंट ही बताया गया है।

CM और राज्यपाल के बीच अचानक हुई इस खास मीटिंग को लेकर कुछ पुख्ता कहा नहीं गया।
सरकार को अब एक साल पूरे होने को है। 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद 13 दिसंबर को भाजपा सत्ता में आई थी। चर्चा है कि कुछ नई योजनाओं की शुरुआत सरकार कर सकती है। चूंकि 6 दिन पहले ही कैबिनेट की बैठक हुई थी फिर ये बैठक हो रही है, इसलिए बड़े ऐलान की उम्मीद की जा रही है।
साय कैबिनेट की पिछली बैठक के फैसले
हाउसिंग बोर्ड के प्लॉट में डायवर्सन और पेनाल्टी शुल्क छूट
26 नवंबर को हुई बैठक में सरकार ने 5वीं-8वीं कक्षा के बोर्ड एग्जाम लेने का फैसला किया था। इसके अलावा हाउसिंग बोर्ड के प्लॉट पर डायवर्सन शुल्क को लेकर फैसला लिया गया था। पिछली बैठक में तय किया गया था जिससे हाउसिंग बोर्ड के मकान लेने वालों को फायदा होगा।
छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल में आवासीय उपयोग में आने वाली जमीन में डायवर्सन, फाइन और लैंड रेवेन्यू में छूट देने का फैसला लिया गया है। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल की ओर से फ्री-होल्ड किए गए आवासीय जमीनों पर डायवर्सन शुल्क में छूट दी जाएगी।
राजनीतिक आंदोलनों से जुड़े 54 केस होंगे वापस
बैठक में ये भी तय किया गया था कि प्रदेश में राजनीतिक आंदोलनों से जुड़े 54 केस कोर्ट से वापस लिए जाएंगे, इसके लिए आगे की कार्रवाई होगी। मंत्रिपरिषद की ओर से छत्तीसगढ़ राज्य में हाउसिंग एण्ड अर्बन डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (हुडको) से आवास, शहरी विकास एमओयू किया जाएगा। छत्तीसगढ़ राज्य को हुडको ने आगामी 5 सालों में एक लाख करोड़ रुपए तक की वित्तीय सहायता, कंसलटेंसी, क्षमता विकास सेवाएं देने का प्रपोजल दिया है।
कोरबा
रीवा हादसे पर कोरबा में भी आक्रोश : जैन संतों की सुरक्षा के लिए सकल जैन समाज ने निकाली मौन रैली, प्रधानमंत्री के नाम कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
कोरबा। देश में विहाररत जैन साधु-संतों की सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करने और हाल ही में मध्यप्रदेश के रीवा में आर्यिका माताजी संघ के साथ हुई दर्दनाक सड़क दुर्घटना की उच्चस्तरीय जांच की मांग को लेकर सकल जैन समाज ने सोमवार को जैन मंदिर बुधवारी से कलेक्ट्रेट तक मौन रैली निकाली और कलेक्ट्रेट पहुंचकर कलेक्टर को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

प्रशासन को सौंपे गए ज्ञापन में समाज के प्रतिनिधियों ने बताया कि रीवा, मप्र में विहार के दौरान हुई सड़क दुर्घटना में आर्यिका माताजी संघ की साध्वियों का असामयिक निधन हो गया था। समाज ने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की पारदर्शिता के साथ एसआईटी या न्यायिक जांच करवाई जाए। घटना स्थल के आस-पास के सभी सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए। दोषियों के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाए।
जैन समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि जैन समाज सदैव शांति, अहिंसा और संवैधानिक मर्यादाओं में विश्वास रखता है। लेकिन तपस्वी संतों की सुरक्षा के मामले में अब शासन-प्रशासन को जागना होगा। ज्ञापन सौंपने के दौरान सकल जैन समाज के अनेक पदाधिकारी, प्रबुद्ध नागरिक मौजूद थे।
कलेक्टर कुणाल दुदावत ने समाजजनों को आश्वस्त किया कि जैन संतों की सुरक्षा से जुड़े विषय पर गंभीरता से ध्यान दिया जाएगा तथा आवश्यक कानूनी कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।
सकल जैन समाज के प्रतिनिधि डॉ. प्रदीप जैन, मूलचंद जैन, योगेश जैन, प्रकाश जैन, महेन्द्र चोपड़ा, दिनेश जैन, दीपांशु जैन ने संयुक्त रूप से कहा कि संत समाज की सुरक्षा एवं सम्मान के लिए समाज हमेशा एकजुट होकर आवाज उठाता रहेगा।
छत्तीसगढ़
विवादित बयानों के बाद बैज-सिंहदेव और भूपेश एक साथ:जिला-उपाध्यक्ष पर आर्म्स एक्ट का केस, धरने पर कांग्रेस, कहा- परेशान करने FIR, वापस ली जाए
सूरजपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के विश्रामपुर थाना के सामने कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन चल रहा है। पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव भी धरने बैठे हैं। दरअसल, भाजपा जिलाध्यक्ष मुरली मनोहर सोनी की शिकायत पर विश्रामपुर पुलिस ने कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष नरेंद्र जैन के खिलाफ धमकी देने, गाली-गलौज करने और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी धरने में शामिल हुए। पीसीसी चीफ को लेकर चल रही बयानबाजी के बीच दीपक बैज, सिंहदेव और भूपेश बघेल तीनों साथ दिखे हैं। वीडियो में देखा जा सकता है कि पहले सिंहदेव और भूपेश ने नजरें नहीं मिलाई। हालांकि, इसके बाद दोनों बातचीत करते नजर आए।
सिंहदेव ने कहा कि अगर आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज हुआ है तो क्या हथियार चलाया। क्या हथियार पाया गया। क्या कोई हथियार बरामद किया गया। चुनाव की प्रक्रिया में कांग्रेस के साथियों को परेशान करने के लिए यह FIR दर्ज की गई है। केस वापस लिया जाए। शाम 6 बजे तक यदि हमारी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती है तो मैं भूख हड़ताल पर बैठूंगा।

पूर्व सीएम भूपेश बघेल भी धरने में शामिल होने विश्रामपुर पहुंचे।

पीसीसी चीफ को लेकर चल रही बयानबाजी के बीच तीनों साथ दिखे।

पीसीसी चीफ दीपक बैज समेत कई वरिष्ठ नेता सोमवार सुबह से विश्रामपुर थाने के सामने धरने पर बैठे हैं।
बैज बोले- सत्ता की दलाली बंद करे पुलिस
प्रदर्शन के दौरान पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे तो प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने पुलिस पर सत्ता के दबाव में काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि “हम भी सत्ता में रहे हैं, थानेदार का पावर जानते हैं। झीरम घाटी में गोलियां खाई हैं। बिना जांच के आर्म्स एक्ट की धारा कैसे लगा दी गई, इसका जवाब पुलिस को देना चाहिए।”
दीपक बैज ने कहा कि कांग्रेस नेता एनएसए जैसी धाराओं से भी डरने वाले नहीं हैं, लेकिन किसी पर कार्रवाई करने से पहले निष्पक्ष जांच होना जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आर्म्स एक्ट की धाराएं वापस नहीं ली गईं तो धरना जारी रहेगा।

रात को भी जारी रहा कांग्रेस का धरना प्रदर्शन।
देर रात तक धरने पर बैठे कांग्रेसी
सोमवार को कड़ाके की धूप के बीच पूरे दिन कांग्रेस का प्रदर्शन जारी रहा। धरने में कोरबा सांसद ज्योत्सना महंत, पूर्व मंत्री अमरजीत भगत, पूर्व विधायक भानू प्रताप सिंह, पारस नाथ राजवाड़े और अंबिका सिंहदेव समेत कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता शामिल हुए।
रात में भी कांग्रेस कार्यकर्ता थाने के सामने चटाई और दरी बिछाकर धरने पर डटे रहे। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के साथ एआईसीसी सदस्य आदितेश्वर सिंहदेव, अंबिकापुर नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद, सूरजपुर कांग्रेस जिलाध्यक्ष शशि सिंह सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता पूरी रात धरने पर बैठे रहे।
कांग्रेस का आरोप है कि शिवनंदनपुर नगर पंचायत चुनाव को प्रभावित करने के उद्देश्य से यह एफआईआर दर्ज की गई है। पार्टी ने मांग की है कि एफआईआर वापस ली जाए और मामले के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव देर रात पहुंचे धरनास्थल।
कांग्रेस ने बनाई जांच कमेटी
कांग्रेस प्रदेश महामंत्री मलकीत सिंह गैदू ने मामले की जांच के लिए 7 सदस्यीय जांच समिति गठित की है। जांच दल में सरगुजा जिलाध्यक्ष बालकृष्ण पाठक, बलरामपुर जिलाध्यक्ष हरिहर प्रसाद यादव, कोरिया जिलाध्यक्ष प्रदीप गुप्ता, एमसीबी जिलाध्यक्ष अशोक श्रीवास्तव समेत नरेश राजवाड़े, अखिलेश प्रताप सिंह और नवीन जायसवाल को शामिल किया गया है।
कांग्रेस पार्टी के मुताबिक शनिवार को भाजपा कार्यकर्ता मित्तल पांडेय कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष नरेंद्र जैन के मेन रोड स्थित प्रतिष्ठान पर पहुंचे थे। कांग्रेस का आरोप है कि वहां मित्तल पांडेय ने चुनाव में जीत-हार को लेकर नरेंद्र जैन को उकसाया और उनके साथ बदसलूकी की।
कांग्रेस का दावा है कि विवाद बढ़ने पर मित्तल पांडेय ने सत्ता का हवाला देते हुए नरेंद्र जैन को झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी। इसके बाद भाजपा जिलाध्यक्ष मुरली सोनी ने देर रात विश्रामपुर थाने में नरेंद्र जैन के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत शिकायत दर्ज कराई।
रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि नरेंद्र जैन ने गाली-गलौज करते हुए मित्तल पांडेय पर कटार तान दी थी।
छत्तीसगढ़
हार्डकोर नक्सली दंपती ने किया सरेंडर:हथियार, IED बनाने के थे एक्सपर्ट, नक्सली कैडरों को देते थे ट्रेनिंग, तेलंगाना पुलिस के सामने डाले हथियार
जगदलपुर, एजेंसी। नक्सल संगठन में लंबे समय से सक्रिय 2 सीनियर कैडर्स ने मंगलवार को छत्तीसगढ़ के पड़ोसी राज्य तेलंगाना में सरेंडर कर दिया है। दोनों लीडर्स ने 26 मई को तेलंगाना के डीजीपी सीवी आनंद के सामने सरेंडर किया।
इसमें सेंट्रल कमेटी मेंबर (CCM) और बिहार-झारखंड स्पेशल एरिया कमेटी (BJSAC) सचिव पसुनूरी नरहरी उर्फ विश्वनाथ उर्फ सलई दा और पत्नी स्टेट कमेटी मेंबर (SCM) मेदारा दनम्मा उर्फ लता उर्फ पूनम उर्फ जोबा शामिल है।

1982 से माओवादी संगठन में सक्रिय था नरहरी
तेलंगाना पुलिस के अनुसार, पसुनूरी नरहरी संगठन में बेहद अहम भूमिका निभा रहा था। वह सेंट्रल कमेटी का सदस्य होने के साथ-साथ बिहार-झारखंड स्पेशल एरिया कमेटी का सचिव भी था। नरहरी तेलंगाना के हनमकोंडा जिले के सोमिडी गांव का रहने वाला है और उसकी उम्र 64 वर्ष बताई गई है।
उसने साल 1982 में अंडरग्राउंड दलम सदस्य के रूप में संगठन जॉइन किया था। इसके बाद 1986 में कमांडर बनाया गया। साल 2000 में उसे रीजनल कमेटी मेंबर (RCM) बनाया गया और नागपुर क्षेत्र भेजा गया। 2006 में उसे BJSAC स्टेट कमेटी मेंबर और 2017 में सेंट्रल कमेटी मेंबर (CCM) बनाया गया।
तकनीकी और हथियार निर्माण में था एक्सपर्ट
नरहरी नक्सल संगठन के टेक्निकल विंग का बड़ा चेहरा माना जाता था। साल 2010 में बनी टेक्निकल डिपार्टमेंट टीम का वह इंचार्ज रहा। 2014 में उसे बिहार स्टेट कमेटी में भेजा गया, जहां उसने गया जिला संगठन की जिम्मेदारी संभाली।
2017 में उसे ईस्टर्न रीजनल ब्यूरो के तहत CCM पद पर प्रमोट किया गया। इसके बाद बिहार-झारखंड स्पेशल एरिया कमेटी में टेक्निकल डिपार्टमेंट का प्रभारी बनाया गया। 2018 से 2020 तक वह झारखंड के कोल्हान क्षेत्र में सक्रिय रहा और स्टेट मिलिट्री कमीशन का इंचार्ज भी रहा। साल 2026 में उसे BJSAC का सचिव बनाया गया था।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, नरहरी को हथियार, मोर्टार, रॉकेट, रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड, ग्रेनेड और बूबी ट्रैप बनाने, उनके रखरखाव में विशेषज्ञता हासिल थी। वह नक्सली कैडरों को हथियार निर्माण, रिपेयर और तकनीकी प्रशिक्षण भी देता था।
मेदारा दनम्मा भी संगठन की बड़ी सदस्य
सरेंडर करने वाली दूसरी महिला नक्सली मेदारा दनम्मा उर्फ लता उर्फ पूनम उर्फ जोबा (55) है, वह आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले के गमालापाडु गांव की रहने वाली है और बिहार-झारखंड स्पेशल एरिया कमेटी में स्टेट कमेटी मेंबर (SCM) के पद पर सक्रिय थी। ये CCM पसुनूरी नरहरी की पत्नी है। दोनों लंबे समय से संगठन में सक्रिय रहकर संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभाल रहे थे।
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