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कोरबा

छात्रावास – आश्रमों में बिना रेनोवेशन, निर्माण कार्य के ठेकेदारों को किया गया था भुगतान

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कलेक्टर द्वारा कराए गए जांच में हुआ खुलासा-कार्य होना नहीं पाया गया

राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण एवं एंटी करप्शन ब्यूरो से प्राप्त पत्र के आधार पर कराई गई जांच

संबंधित ठेकेदारो को कार्य पूर्ण कराने व भुगतान राशि जमा करने के दिए निर्देश

राशि जमा नहीं कराने पर ठेकेदारों को ब्लैक लिस्टेड करने की दी गई चेतावनी

कोरबा। संविधान के अनुच्छेद 275 (1) मद अंतर्गत राशि लगभग 6 करोड़ 62 लाख 29 हजार रूपए आयुक्त, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास रायपुर से परियोजना प्रशासक, एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना कोरबा को प्रदाय किया गया है। जिसमें से 4 करोड़ 36 लाख रूपए जिले में संचालित छात्रावास/आश्रमों के आवश्यक मरम्मत कार्य/लघु निर्माण कार्य हेतु सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास कोरबा को कार्य एजेंसी नियुक्त करते हुए राशि प्रदाय किया गया। इसके लिए तत्कालीन परियोजना प्रशासक, एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना कोरबा के द्वारा सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास कोरबा, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत एवं अनुविभागीय अधिकारी विद्युत/यांत्रिकी जल संसाधन विभाग को कार्य एजेंसी नियुक्त किया गया। इस मामले में प्राप्त शिकायत के आधार पर कलेक्टर अजीत वसंत ने अपर कलेक्टर सहित अन्य अधिकारियों की टीम गठित कर जांच कराई। जांच में पाया गया कि जो कार्य ठेकेदारों को बताया गया उसके अनुरूप कार्य नहीं होना पाया गया। बिना कार्य कराए उक्त राशि संबंधित ठेकेदारों द्वारा प्राप्त कर ली गई है। इस मामले में संबंधित ठेकेदारों को एक अप्रैल 2025 तक कार्य कराने, कार्य नहीं कराये जाने पर भुगतान राशि जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। राशि जमा नहीं करने पर फर्म को ब्लैक लिस्टेड करने की कार्यवाही की जाएगी।
   प्राप्त जानकारी के अनुसार वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण एवं एन्टी करप्शन ब्यूरो छत्तीसगढ़ का पत्र क्रमांक-ब्यूरो/शिका./एम-11517/ एम-12457/2024 रायपुर दिनांक 03.10.2024 के द्वारा भी कलेक्टर कोरबा, जिला कोरबा को संविधान के अनुच्छेद 275 (1) में प्राप्त शिकायत की जांच कर जांच प्रतिवेदन प्रेषित करने हेतु पत्र प्रेषित किया गया है। पत्र प्राप्त होने के पश्चात कलेक्टर कोरबा के द्वारा अपर कलेक्टर कोरबा की अध्यक्षता में जांच समिति का गठन किया गया। इसके साथ ही तकनीकी अमले के द्वारा छात्रावास/आश्रमों में कराये गये रेनोवेशन / लघु निर्माण कार्यां का निरीक्षण कराया गया, जिसमें पाया गया कि जो भुगतान ठेकेदारो को किया गया उसके अनुरूप छात्रावास / आश्रमों में कार्य नहीं होना पाया गया है। जिसके कारण कार्यालयीन पत्र क्रमांक 5242, 5244, 5246 दिनांक 10.03.2025 के द्वारा संबंधित ठेकेदारो को संस्थाओं के अधीक्षक /अधीक्षिकाओ के द्वारा बताये गये कार्यों को पूर्ण कराकर संस्था के अधीक्षक का प्रमाण पत्र / छायाचित्र कार्यालय को दिनांक 01.04.2025 तक प्रस्तुत करने पत्र जारी किया गया है। उनके द्वारा कार्य नहीं किये जाने की स्थिति में किये गये भुगतान राशि को जमा कराने, फर्म को काली सूची में दर्ज करने एवं प्राथमिकी सूचना दर्ज करने की कार्यवाही की जाएगी।

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कोरबा

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से सुदृढ़ हो रही किसानों की आर्थिक स्थिति

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तीन किश्तों में वार्षिक सहायता से मिली खेती को नई मजबूती

कोरबा। केंद्र सरकार की किसान हितैषी योजनाएं जिले के कृषकों के लिए संबल सिद्ध हो रही हैं। कोरबा जिले के ग्राम रिसदा निवासी कृषक गोवर्धन सिंह इसका जीवंत उदाहरण हैं। श्री सिंह एक मेहनतकश किसान हैं और पिछले कई वर्षों से कृषि कार्य में संलग्न हैं। वे लगभग 18 वर्ष की आयु से खेती कर रहे हैं और वर्तमान में उनके पास लगभग चार एकड़ कृषि भूमि है, जिसमें वे मुख्य रूप से धान की फसल का उत्पादन करते हैं।
श्री सिंह प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के हितग्राही हैं। उन्होंने बताया कि इस योजना के अंतर्गत मिलने वाली राशि समय पर सीधे उनके बैंक खाते में जमा हो जाती है, जिससे उन्हें खेती-किसानी के कार्यों में आर्थिक सहारा मिलता है। योजना से उन्हें वर्ष में तीन बार रूपये दो-दो हजार की किश्त समय पर प्राप्त हो जाती है।  प्राप्त राशि का उपयोग वे बीज, खाद एवं अन्य कृषि आवश्यकताओं की पूर्ति में करते हैं। इससे खेती की लागत वहन करने में सुविधा होती है और आर्थिक दबाव कम होता है।
उन्होंने कहा कि समय पर आर्थिक सहायता मिलने से उन्हें किसी के सामने हाथ फैलाने की आवश्यकता नहीं पड़ती और वे आत्मसम्मान के साथ कृषि कार्य कर पा रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रही है।

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कोरबा

कोरबा में कोयला उद्योग की हड़ताल को कांग्रेस का समर्थन:श्रमिक नेताओं के साथ कार्यकर्ता भी खदान बंद कराने पहुंचे, कहा-भाजपा सरकार की नीतियों का विरोध

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कोरबा। कोरबा में कोयला उद्योग की राष्ट्रव्यापी एक दिवसीय हड़ताल को कांग्रेस का समर्थन मिला। केंद्रीय संयुक्त ट्रेड यूनियन के आह्वान पर आयोजित इस हड़ताल में श्रमिक नेताओं के साथ कांग्रेस कार्यकर्ता भी दीपका, कुसमुंडा और मानिकपुर खदानों को बंद कराने पहुंचे।

कोरबा जिला कांग्रेस के प्रमुख हरीश परसाई, वरिष्ठ कांग्रेसी तनवीर अहमद, विशाल शुक्ला और रामू कंवर सहित अन्य कांग्रेस नेता दीपका खदान पहुंचे। उन्होंने मजदूरों के साथ मिलकर अपनी आवाज बुलंद की और हड़ताल को समर्थन दिया।

कांग्रेस नेता हरीश परसाई ने बताया कि पार्टी के निर्देश पर वे इस हड़ताल का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी भाजपा सरकार की नीतियों और रीति का विरोध कर रही है और आगे भी करती रहेगी।

कर्मचारियों ने किया सहयोग

तनवीर अहमद ने बताया कि सुबह से ही सभी श्रमिक नेताओं और कर्मचारियों का इस हड़ताल को व्यापक समर्थन मिल रहा है। कुसमुंडा और मानिकपुर खदानों में भी श्रमिक नेताओं ने पहली पाली के कर्मचारियों से हड़ताल का समर्थन करने का आग्रह किया, जिस पर कर्मचारियों ने सहयोग किया।

कांग्रेस और श्रमिक नेताओं ने इस हड़ताल को सफल बताया है, जिसमें सभी का सहयोग मिला। इस एक दिवसीय हड़ताल से साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) को नुकसान होने की संभावना है।

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कोरबा

सूअर के फंदे में फंसा तेंदुआ:वन विभाग ने किया उपचार, इलाज के बाद जंगल में छोड़ गया, शिकारी भेजा गया जेल

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कोरबा। कोरबा जिले के लाफा जंगल में सूअर पकड़ने के लिए लगाए गए तार के फंदे में एक तेंदुआ फंस गया। ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग की टीम ने रात में ही रेस्क्यू अभियान शुरू किया।

तेंदुए को फंदे से सुरक्षित निकालना मुश्किल था, इसलिए वन विभाग ने उसे ट्रेंकुलाइजेशन की अनुमति मांगी। रायपुर से अनुमति मिलने के बाद कुमार निशांत, डॉ. चंदन और कानन पेंडारी, बिलासपुर की रेस्क्यू टीम मंगलवार रात करीब 10 बजे मौके पर पहुंची।

तीन घंटे बाद तेंदुए को फंदे से बाहर निकाला

फंदे में फंसे तेंदुए को छटपटाते देख उसे पहले ट्रेंकुलाइज कर बेहोश करने का निर्णय लिया गया। तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद तेंदुए को फंदे से सुरक्षित बाहर निकाला गया। उसके पेट और पिछले हिस्से में चोटें थीं, जिसका प्राथमिक उपचार किया गया।

वन विभाग ने किया रेस्क्यू

रेस्क्यू टीम तेंदुए को अपने वाहन में कानन पेंडारी, बिलासपुर ले गई। वहां स्वास्थ्य में सुधार और एंटी-स्नेयर वॉक और निगरानी की प्रक्रिया पूरी करने के बाद बुधवार शाम छह बजे उसे उसी क्षेत्र में वापस छोड़ दिया गया। रात भर निगरानी में उसकी स्थिति सामान्य बनी रही।

रेस्क्यू टीम तेंदुए को इलाज के लिए अपने वाहन से कानन पेंडारी, बिलासपुर ले गई। वहां इलाज और निगरानी के बाद जब उसकी हालत ठीक हो गई, तो बुधवार शाम करीब छह बजे उसे उसी जंगल में छोड़ दिया गया। रात भर उस पर नजर रखी गई और उसकी स्थिति सामान्य रही।

टीम ने शिकारी को तार, फंदे के साथ पकड़ा

इस बीच, अचानकमार टाइगर रिजर्व से आई डॉग स्क्वाड टीम ने जांच के दौरान नगोई भाठा निवासी विजय कुमार गोड़ (37) को पकड़ा। उसकी तलाशी में शिकार में इस्तेमाल किए गए तार, फंदे और अन्य सामग्री बरामद हुई।

आरोपी विजय कुमार गोड़ ने अपना अपराध स्वीकार करते हुए बताया कि उसने सूअर का मांस खाने की लालसा में फंदा लगाया था, लेकिन उसमें तेंदुआ फंस गया। वन विभाग ने उसके खिलाफ वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम की धारा 9, 51 और 52 के तहत मामला दर्ज किया है।

उसे न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, पाली के समक्ष पेश किया गया, जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक रिमांड पर उप जेल कटघोरा भेज दिया गया है।

गौरतलब है कि पाली वन परिक्षेत्र में तेंदुए के अलावा बाघों के विचरण की सूचनाएं भी वन विभाग को मिलती रही हैं।

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