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कठुआ में एनकाउंटर, 3 आतंकी ढेर, 4 जवान शहीद:जैश के संगठन पीपुल्स एंटी फासिस्ट फ्रंट ने जिम्मेदारी ली, सर्चिंग जारी
कठुआ ,एजेंसी। जम्मू-कश्मीर में कठुआ जिले के राजबाग में 27 मार्च से चल रहे एनकाउंटर में 3 आतंकी मारे गए हैं। गोलीबारी में सुरक्षाबलों के 3 जवान भी शहीद हुए हैं। ये जम्मू-कश्मीर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) के जवान हैं। कल ये जवान घायल हुए थे, कल देर रात इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
शहीद जवानों में तारिक हुसैन, जसवंत सिंह, बलविंदर सिंह शामिल हैं। चौथे की जानकारी सामने नहीं आई है। घायलों को जम्मू मेडिकल कॉलेज (JMC) रेफर किया गया था। जम्मू-कश्मीर के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) के इन जवानों को पेट में गोली लगी थी। DSP धीरज सिंह समेत 4 अन्य घायलों का इलाज उधमपुर में सेना के अस्पताल में चल रहा है।
सूत्रों के मुताबिक राजबाग के घाटी जुथाना इलाके के जखोले गांव में सुरक्षाबलों को करीब 9 आतंकवादियों के छिपे होने की खबर मिली थी। इसके बाद सुरक्षाबलों ने आतंकियों को घेरने के लिए जॉइंट ऑपरेशन शुरू किया। गोलीबारी में 7 जवान घायल हुए थे।
सूत्रों के मुताबिक ये आतंकी जैश-ए-मोहम्मद के प्रॉक्सी संगठन पीपुल्स एंटी फासिस्ट फ्रंट से जुड़े हैं। शुक्रवार सुबह सुरक्षा बलों ने दोबारा सर्चिंग ऑपरेशन शुरू किया है। सेना, BSF, CRPF और SOG की जॉइंट टीम थर्मल इमेजिंग, ड्रोन, हेलिकॉप्टर, बुलेटप्रूफ वाहन और खोजी कुत्तों की मदद से सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं।

DSP धीरज सिंह के साथ ये जवान आतंकियों की तलाश में गए थे। जहां एनकाउंटर में उन्हें गोली लग गई।
एनकाउंटर के दूसरे दिन की तस्वीरें…

कठुआ में एनकाउंटर के एक दिन बाद आज शुक्रवार को आतंकियों की तलाश में सर्च ऑपरेशन जारी है।

जंगल वाले इलाके में छुपे हुए आंतकियों की तलाश करते सेना के जवान।

3 जवानों के शहीद होने के बाद एनकाउंटर वाले इलाके में आज सुबह जवानों की तैनाती बढ़ा दी गई है।
एनकाउंटर के पहले दिन की तस्वीरें…

गुरुवार को सूचना मिलने के बाद जुथाना इलाके में सुरक्षाबलों का सर्च ऑपरेशन चलाया।

सुरक्षाबलों को इलाके में आतंकियों के छिपे होने की जानकारी मिली थी।

घायल जवान को इलाज के लिए ले गए, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया।
23 मार्च से चल रहा है एंटी टेरेरिस्ट ऑपरेशन
न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक 23 मार्च को हीरानगर सेक्टर में आतंकवादियों के एक ग्रुप को सुरक्षाबलों ने घेर लिया था, लेकिन वे भागने में कामयाब रहे। माना जा रहा है कि ये वही आतंकवादी हैं, जो सान्याल से निकलकर जखोले गांव के पास देखे गए।
यह गांव हीरानगर सेक्टर से लगभग 30 किमी दूर है। सुरक्षाबलों ने जानकारी मिलते ही उन्होंने इलाके को घेर लिया, जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हो गई। इस दौरान सेना के दो जवान भी घायल हुए हैं, जिन्हें सैन्य अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
आतंकियों ने एक परिवार को बंधक बनाया, लेकिन वे बच निकले
23 मार्च को कठुआ के हीरानगर सेक्टर में सुरक्षाबलों ने आतंकियों के एक ग्रुप को घेर लिया था। उस दिन आतंकियों ने एक बच्ची और उसके माता-पिता को पकड़ लिया था। मौका मिलने पर तीनों आतंकियों के चंगुल से भाग निकले थे। इस दौरान बच्ची की मामूली चोटें आई थीं। उन्होंने ही आतंकियों के छिपे होने की सूचना पुलिस को दी थी। महिला ने बताया था कि उसने पांच आतंकियों को देखा था। सभी ने दाढ़ी बढ़ा रखी थी और वे कमांडो की वर्दी पहने हुए थे।

मुठभेड़ में घायल जम्मू-कश्मीर पुलिस के SDPO बॉर्डर धीरज कटोच को GMC कठुआ में भर्ती कराया गया।
जम्मू कश्मीर में हाल ही में हुई आतंकी घटनाएं….
16 फरवरी: जम्मू-कश्मीर में LoC पर स्नाइपर फायरिंग, एक भारतीय जवान घायल जम्मू-कश्मीर में LoC पर 16 फरवरी को पुंछ सेक्टर में स्नाइपर फायरिंग हुई जहां एक भारतीय जवान घायल हो गया। इस घटना के बाद भारतीय और पाकिस्तानी सैनिकों के बीच कुछ देर तक गोलीबारी भी हुई।
13 फरवरी: पाकिस्तान की ओर से फायरिंग की खबर, सेना ने खंडन किया
13 फरवरी को पाकिस्तान की ओर से भारतीय सीमा में गोलीबारी की खबर आई थी। सोशल मीडिया पर भी पाकिस्तानी अधिकारियों का एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें वे अपने सैनिकों को श्रद्धांजलि देते हुए दिखाई दिए थे। कुछ रिपोर्ट्स में 6 लोगों के मारे जाने की बात कही गई। हालांकि, भारतीय सेना ने कहा था कि पाकिस्तान बॉर्डर पर युद्धविराम लागू है।
11 फरवरी: LoC के पास IED ब्लास्ट, 2 जवान शहीद, एक घायल
जम्मू जिले के अखनूर सेक्टर में LoC के पास लालोली इलाके में IED ब्लास्ट हुआ। इसमें सेना के दो सैनिक शहीद हो गए थे।यह धमाका 11 फरवरी को करीब 3:50 बजे भट्टल इलाके में हुआ, जब सेना के जवान गश्त पर थे। सेना से जुड़े सूत्रों ने दावा किया था कि शहीद हुए फौजियों के नाम कैप्टन केएस बख्शी और मुकेश थे।

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इजराइल-ईरान जंग,भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पेशल कंट्रोल रूम बनाया:जेद्दा से अहमदाबाद 200 यात्री आए, 4 दिन में भारतीय एयरलाइंस की 1117 इंटरनेशनल फ्लाइट्स रद्द
नई दिल्ली,एजेंसी। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी जंग के बीच भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पेशल कंट्रोल रूम बनाया है। इसमें भारतीय नागरिकों के लिए कई हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। MEA के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने X पोस्ट में इसकी जानकार दी।
इधर, जंग से बने विपरीत हालातों के चलते मिडिल ईस्ट के देशों से भारतीयों का लौटना जारी है। मंगलवार देर रात जेद्दा, दुबई से कई भारतीय दिल्ली, अहमदाबाद, हैदराबाद के इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लैंड हुए। भारत आने पर लोगों ने कहा कि अपने देश वापस आकर अच्छा लग रहा है।
ईरान ने जंग के कारण दुनिया का सबसे अहम होर्मुज रूट (समुद्र का रास्ता) बंद कर दिया है। इसके चलते भारतीय झंडे वाले 37 जहाज और उनमें सवार 1,109 भारतीय नाविक वर्तमान में फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में फंसे हुए हैं।
युद्ध के चलते पश्चिम एशिया के 8 देशों ने एयरस्पेस पूरी तरह बंद कर दिए हैं। 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक भारतीय एयरलाइंस ने 1,117 इंटरनेशनल फ्लाइट्स रद्द की हैं। इससे हजारों यात्री एयरपोर्ट पर फंस गए हैं।
खामेनेई की मौत के कुछ ही घंटों के अंदर, पाकिस्तान में हजारों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए। उन्होंने कराची में US कॉन्सुलेट पर धावा बोलने की कोशिश की और इस्लामाबाद में डिप्लोमैटिक इलाके के बाहर पुलिस से भिड़ गए। सिक्योरिटी फोर्स के साथ झड़प में कम से कम 34 लोग मारे गए। 120 से ज्यादा घायल हुए हैं।

इजराइल-ईरान जंग और खामेनेई की मौत का विरोध





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नीतीश CM पद छोड़कर राज्यसभा जा सकते हैं:बेटे निशांत के नाम की भी चर्चा, JDU की लिस्ट कुछ देर बाद जारी होगी
पटना,एजेंसी। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपना पद छोड़कर राज्यसभा जा सकते हैं। बुधवार शाम इसे लेकर सीएम आवास पर अहम बैठक हुई। इसमें संजय झा और विजय चौधरी मौजूद रहे। बताया जा रहा कि पार्टी के बड़े नेता नहीं चाहते हैं कि नीतीश दिल्ली जाएं।
इसी दौरान जदयू ने सोशल मीडिया X पर पोस्ट कर लिखा- नीतीश कुमार जी बिहार के सर्वस्वीकार्य नेता हैं। उनकी लोकप्रियता आज हर क्षेत्र में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। लोगों का यह स्नेह और अपार समर्थन ही उनकी वास्तविक पहचान है।
वहीं, उनके बेटे निशांत कुमार के नाम की भी चर्चा हो रही है। पार्टी ने अभी तक इन चर्चाओं का खंडन नहीं किया है। बताया जा रहा है कि जेडीयू आज शाम 6 बजे तक अपने दोनों राज्यसभा उम्मीदवारों के नाम घोषित कर सकती है।
भास्कर के सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर का राज्यसभा जाना लगभग तय माना जा रहा है। उन्होंने नामांकन से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं पूरी कर ली हैं।
निशांत कुमार और अपने नाम को लेकर नीतीश कुमार अभी विचार कर रहे हैं। इसी बीच दिल्ली से पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा भी आज पटना पहुंच गए हैं।
सियासी हालातों को देखते हुए ये 3 सिचुएशन बन रही है
- पहली-: नीतीश राज्यसभा जा सकते हैं। उनके बेटे को डिप्टी CM बनाया जा सकता है। CM की कुर्सी पर बीजेपी अपना दावा ठोक सकती है।
- दूसरी- निशांत को राज्यसभा भेजकर पॉलिटिकल एंट्री करवाई जा सकती है।
- तीसरी: रामनाथ ठाकुर के बाद दूसरे नाम पर सहमति नहीं बन पा रही है, इसलिए इस तरह के नाम सामने आ रहे हैं।

अपने पिता नीतीश कुमार को प्रसाद खिलाते हुए निशांत कुमार।
चिराग बोले- नीतीश कहीं नहीं जा रहे
बिहार में मुख्यमंत्री बदले जाने को लेकर चिराग पासवान ने कहा, ‘ऐसी कोई चर्चा नहीं है। ऐसी कोई स्थिति उत्पन्न नहीं होने वाली है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अनुभवी नेतृत्व में हमारी सरकार बिहार में चल रही है।
उन्होंने कहा- 200 से अधिक सीटों के साथ हम लोग बिहार में सरकार चला रहे हैं। हम लोग बिहार में मुख्यमंत्री बदलने जा रहे हैं ऐसी कोई चर्चा नहीं है। हमारे मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के डबल इंजन वाली सरकार ऐसी ही बिहार में चलती रहेगी।’
अगर निशांत राज्यसभा जाते हैं तो इसके 2 बड़े मायने
1. नीतीश रिटायर होने वाले हैं
नीतीश कुमार 76वें साल में प्रवेश कर गए हैं। उनके साथ स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें है। ऐसे में समय-समय पर पार्टी के अंदर और बाहर उनके उत्तराधिकारी की मांग होती रहती है। JDU कार्यालय के बाहर भी कई मौकों पर नीतीश के बाद निशांत का नारा लिखा पोस्टर लग चुका है।
- नीतीश कुमार परिवारवाद के खिलाफ रहे हैं। उनकी पूरी राजनीति इसी के इर्दगिर्द रही है। 2025 विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने परिवारवाद को लेकर लालू-राबड़ी परिवार हर तंज कसा था। ऐसे में अगर निशांत कुमार राज्यसभा में आते हैं तो ज्यादा संभावना है कि नीतीश कुमार रिटायर होने वाले हैं।
- सूत्र बताते हैं कि नीतीश कुमार बेटे के राजनीति में आने के खिलाफ हैं। लेकिन बदले हालात में अगर वह मान जाते हैं तो इसका मतलब है कि वह खुद कुछ समय बाद राजनीति से हट जाएंगे। वे अपनी पूरी राजनीतिक पूंजी अंतिम समय में खत्म करना नहीं चाहेंगे।
- एक्सपर्ट केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया सीमांचल दौरे को बिहार में सत्ता परिवर्तन की आहट के तौर पर देख रहे हैं। राजनीतिक जानकारों की मानें तो नीतीश कुमार बंगाल चुनाव के बाद पद छोड़ते हैं तो बिहार में भाजपा अपना CM बना सकती है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत का अध्यात्म में मन लगता है। वह राजनीति से अब तक दूरी बनाकर रखे हुए हैं। फोटो 20 नवंबर के शपथ ग्रहण समारोह के तुरंत बाद की है।
2. JDU का भविष्य तय
निशांत कुमार के राज्यसभा जाते ही JDU का भविष्य तय हो जाएगा। मतलब कि पार्टी नीतीश के बाद भी चलती रहेगी, खत्म नहीं होगी। फिलहाल पार्टी में कोई बड़ा नेता नहीं है।
- फिलहाल नीतीश के आसपास 4 बड़े नेता ललन सिंह, संजय झा, विजय चौधरी और अशोक चौधरी हैं। चारों नेता नीतीश कुमार के आधार वोट बैंक कुर्मी-कोईरी और EBC के समीकरण पर फिट नहीं हैं।
- RCP सिंह थे, लेकिन अभी वह पार्टी से बाहर हैं। फिलहाल नीतीश कुमार के कुर्मी समाज से मनीष वर्मा करीबी हैं, लेकिन उनके नाम पर सहमति नहीं है। यही कारण है कि पार्टी के अंदर से JDU के नए नेतृत्व को लेकर निशांत की डिमांड उठती रहती है।
- पार्टी के एक बड़े गुट की डिमांड है कि निशांत कुमार को राजनीति में आना चाहिए। उनको नीतीश कुमार की राजनीति को आगे बढ़ाना चाहिए।
- बताया जाता है कि निशांत के आते ही नीतीश के बाद कौन के सवाल का जवाब मिल जाएगा। और निशांत की पैरोकारी कर रहा गुट पावर सेंटर बना रहेगा।
- बताया जाता है कि अगर निशांत की जगह दूसरा नेता उत्तराधिकारी बना तो एक गुट की ताकत घट सकती है। निशांत मिलनसार हैं और वह खुद इतने परिपक्व नहीं हैं कि किसी को नाराज करके पार्टी चला सके।
2 पॉइंट में नीतीश ने निशांत को कैसे JDU की मजबूरी बनाया
1. सेकेंड लाइन नेताओं को किया किनारे
2003 में बनी JDU बीते 23 साल से नीतीश की छांव में ही चल रही है। नीतीश कुमार ही चेहरा हैं। दूसरे नंबर पर जरूर कुछ नेता पहुंचे, लेकिन वे लंबे समय तक टिक नहीं पाए या टिकने नहीं दिया गया।
- इनमें सबसे बड़ा नाम RCP सिंह यानी रामचंद्र प्रसाद सिंह का है। UP कैडर के IAS अफसर रहे RCP 2010 में नौकरी छोड़कर JDU में आए। उन्हें नीतीश कुमार का आंख-कान-नाक कहा जाता था। 2020 में JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। हालांकि, 2 साल बाद ही दोनों के रिश्ते में दरार पड़ गई और RCP ने JDU छोड़ दिया। वे भाजपा में शामिल हुए और फिर जनसुराज का हिस्सा बन गए।
- 2015 में नीतीश के साथ मिलकर महागठबंधन की सरकार बनवाने में अहम भूमिका निभाने वाले प्रशांत किशोर भी नीतीश के काफी करीब रहे। अक्सर वे नीतीश के साथ दिखते थे। तब चर्चा थी कि नीतीश के बाद प्रशांत किशोर ही JDU का चेहरा हैं। हालांकि, बाद में वह भी अलग हो गए।
- कोईरी समुदाय से आने वाले उपेंद्र कुशवाहा भी नीतीश के करीबी रह चुके हैं। हालांकि, बाद में उन्होंने अलग होकर खुद की पार्टी बना ली। कोईरी समुदाय नीतीश का कोर वोटर माना जाता है।
- पिछले साल पूर्व IAS अफसर मनीष वर्मा का नाम भी नीतीश के उत्तराधिकारी के तौर पर उभरा। नालंदा के रहने वाले मनीष वर्मा उसी कुर्मी समाज से आते हैं, जिससे नीतीश आते हैं।
- मनीष वर्मा ने जैसे अपना कार्यक्रम राज्यभर में शुरू किया। बीच में रोक दिया गया। फिलहाल वह नीतीश कुमार के साथ दिखते तो हैं, लेकिन पार्टी के अहम निर्णयों से दूर है।
2. प्रशांत के नाम से भाजपा निशांत पर मानी
पिछले 30 सालों की बिहार की राजनीति को देखें तो यहां हमेशा तीसरी धुरी रही है। तीसरी धुरी का नेतृत्व नीतीश कुमार करते हैं।
- 16% से ज्यादा वोट बैंक हमेशा नीतीश कुमार के साथ रहा है। उनके वोटरों पर उनके पाला बदलने का कोई फर्क नहीं पड़ता। फिलहाल बिहार में JDU के 85 विधायक और 12 सांसद हैं।
- भाजपा को पता है कि नीतीश कुमार के बाद JDU बिखरी तो सत्ता का समीकरण बिगड़ सकता है। उनका वोट बैंक भाजपा में ही शिफ्ट होगा, इसकी गारंटी नहीं है।
- चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर भी बिहार में फिर से एक्टिव होने वाले हैं। उन्होंने अपने पहले चुनाव में 3.3% वोट हासिल किया है।
- एक्सपर्ट मानते हैं कि अगर नीतीश कुमार के बाद JDU बिखरती है तो ज्यादा फायदा प्रशांत किशोर को हो सकता है। ऐसे में भाजपा की मजबूरी है कि JDU बची रहे। वह कतई नहीं चाहेगी कि बिहार में JDU के अलावा तीसरा प्लेयर कोई और बने।
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सोना आज ₹6149 सस्ता, ₹1.61 लाख पर आया:34 दिन में 14 हजार गिरा, चांदी एक दिन में 23 हजार रुपए सस्ती हुई
नई दिल्ली,एजेंसी। सोने और चांदी के दामों में आज 4 मार्च को गिरावट है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 6,149 रुपए घटकर ₹1.61 लाख पर आ गया है। इससे पहले सोमवार को इसकी कीमत 1.67 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम थी।
वहीं, एक किलो चांदी 23,417 रुपए गिरकर रू.2.66 लाख पर आ गई है। इससे पहले सोमवार को इसकी कीमत 2.89 लाख रुपए प्रति किलो थी। सोना चांदी के दाम में ये गिरावट प्रॉफिट बुकिंग की वजह से आई है। मंगलवार को होली पर्व के कारण बाजार बंद था।
- ट्रांसपोर्टेशन और सिक्योरिटी: सोना एक शहर से दूसरे शहर ले जाने में ईंधन और भारी सुरक्षा का खर्च आता है। आयात केंद्रों से दूरी बढ़ने पर ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ जाती है, जिससे स्थानीय दाम बढ़ जाते हैं।
- खरीदारी की मात्रा : दक्षिण भारत जैसे इलाकों में खपत ज्यादा (करीब 40%) होने के कारण ज्वेलर्स भारी मात्रा में सोना खरीदते हैं। बल्क खरीदारी पर मिलने वाली छूट का फायदा ग्राहकों को कम दाम के रूप में मिलता है।
- लोकल ज्वेलरी एसोसिएशन: हर राज्य और शहर के अपने ज्वेलरी एसोसिएशन (जैसे तमिलनाडु में मद्रास ज्वेलर्स एसोसिएशन) होते हैं। ये संगठन स्थानीय मांग और सप्लाई के आधार पर अपने इलाके के लिए सोने का रेट तय करते हैं।
- पुराना स्टॉक और खरीद मूल्य: ज्वेलर्स ने अपना स्टॉक किस रेट पर खरीदा है, यह भी मायने रखता है। जिन ज्वेलर्स के पास पुराने और सस्ते रेट पर खरीदा हुआ स्टॉक होता है, वे ग्राहकों से कम कीमत वसूल सकते हैं।
₹3.86 लाख के ऑल टाइम हाई पर पहुंच चुकी है चांदी
इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। 31 दिसंबर 2026 को सोने की दाम 1.33 लाख रुपए थे, जो 29 जनवरी को बढ़कर 1.76 लाख रुपए के सबसे ऊपरी स्तर पर पहुंच गए थे। तब से अब तक सोना 14,799 रुपए सस्ता हो चुका है।
वहीं, चांदी के कीमत 31 दिसंबर 2026 को 2.30 लाख रुपए थी, जो 29 जनवरी को 3.86 लाख रुपए के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गई थी। तब से अब तक 34 दिन में चांदी 1.19 लाख रुपए सस्ती हो गई है।
एक्सपर्ट्स: सोना 1.72 लाख और चांदी 3.30 लाख जा सकती है
LKP सिक्योरिटीज के वीपी रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी के अनुसार, “आने वाला हफ्ता अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों के लिहाज से काफी अहम है। वहां के मैन्युफैक्चरिंग और बेरोजगारी के आंकड़े आने वाले हैं, जिससे फेडरल रिजर्व की पॉलिसी का अंदाजा लगेगा। तकनीकी तौर पर जब तक सोना रू.1,64,000 के ऊपर है, तब तक इसमें मजबूती बनी रहेगी। ऊपर की तरफ रू.1,72,000 का स्तर पार होने पर यह और ऊपर जा सकता है।”
वहीं, एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर का कहना है कि “सोना अभी कंसोलिडेशन (स्थिरता) के दौर में है, लेकिन इसका ट्रेंड पॉजिटिव है। अगर चांदी रू.2.50 लाख से रू.2.70 लाख के बीच टिकी रहती है, तो यह दोबारा रू.3.20 लाख से रू.3.30 लाख तक जा सकती है।”
अमेरिका-ईरान तनाव पर निर्भर रहेगा बाजार
जानकारों का मानना है कि सोने-चांदी की अगली चाल इन दो बातों पर निर्भर करेगी:
- मिडल ईस्ट संकट: अगर ईरान और इजराइल, अमेरिका के बीच तनाव और बढ़ता है या कच्चे तेल की कीमतें फिर से उछलती हैं, तो सोने-चांदी में दोबारा तेजी आ सकती है।
- अमेरिकी डेटा: अगर अमेरिका के आर्थिक आंकड़े उम्मीद से बेहतर आते हैं, तो डॉलर मजबूत होगा और इससे सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान
1. सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। हॉलमार्किंग से पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है।
2. कीमत क्रॉस चेक करें: सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई सोर्सेज (जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट) से क्रॉस चेक करें। सोने का भाव 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होता है।
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