छत्तीसगढ़
बिलासपुर में हेड-कॉन्स्टेबल ने ड्राइवर-कंडक्टर को बेसबाल से पीटा:रास्ते में हाईवा रोककर नीचे उतारा, फिर बेरहमी से पिटाई की, पुलिस बोली- रेस ड्राइविंग मामला
बिलासपुर,एजेंसी। बिलासपुर में एक हेड-कॉन्स्टेबल ने हाईवा ड्राइवर और कंडक्टर को नीचे उतार कर बेरहमी से पिटाई कर दी। जिससे कंडक्टर को गंभीर चोटें आई है। इधर, पुलिस का कहना है कि हाईवा ड्राइवर रेस ड्राइविंग कर रहा था। जिसके चलते यह मारपीट हुई है। पुलिस ने मामले में अज्ञात वर्दीधारी के खिलाफ केस दर्ज कर उसकी पहचान कर ली है।
दरअसल, बेमेतरा जिले के नवागढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम चाकापेंड्रा निवासी दिनेश कुमार डहरिया (36) हाईवा ड्राइवर है। पिछले 5 जुलाई वो अपने कंडक्टर विष्णु बंजारे के साथ हाईवा लेकर रायगढ़ जाने के लिए निकला था।
रात करीब 10.30 बजे तखतपुर से निकल रहा था। उसी समय बिलासपुर की ओर से एक वर्दीधारी कार चालक उसकी गाड़ी को क्रॉस करने के बाद अपनी कार मोड़कर आया। उसने हाईवा के सामने कार अड़ा कर उसे रोक दिया।

पिटाई करने से कंडक्टर को गंभीर चोटें आई है।
बिना पूछे बेसबाल मारकर तोड़ा शीशा
इस दौरान वर्दीधारी पुलिसकर्मी ने गाली-गलौज करते हुए बेसबाल निकाला और हाईवा के सामने शीशे को तोड़ दिया। गाड़ी से बाहर उतारा और नाम पता पूछने के बाद बेसबाल से पिटाई करने लगा। ड्राइवर ने उसे अपना नाम बताया और गाड़ी आगे बढ़ाने लगा।
पीछा कर आया फिर दिखाई दबंगई
जब ड्राइवर ने गाड़ी आगे बढ़ाई तो वो कार से पीछा कर ममता ढाबा के पास आया। जिसके बाद ड्राइवर और कंडक्टर को हाईवा से उतार कर बेसबाल और हाथ-मुक्का-लात से बेरहमी से पिटाई कर दी। जिससे कंडक्टर के कूल्हे, पीठ, जांघ, बांए आंख के पास, पीठ में चोट लगी है।
इस घटना के बाद ड्राइवर थाने पहुंचा और पुलिस से शिकायत की। जिस पर पुलिस ने अज्ञात पुलिस वाले के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

कंडक्टर विष्णु बंजारे।
रेस ड्राइविंग कर रहा था हाईवा चालक, केस दर्ज
इधर, तखतपुर टीआई अनिल अग्रवाल का कहना है कि, ड्राइवर और हेल्पर शराब के नशे में थे। चालक तेज रफ्तार गाड़ी चलाकर राहगीरों को ठोकर मारने की कोशिश कर रहे थे। उन्हें रोकने पर वो रॉड निकालकर धमकी देते हुए मारपीट कर रहे थे। जिससे नाराज लोगों ने उन्हें रोककर पिटाई कर दी। मामले में चालक और ड्राइवर पर केस दर्ज किया गया है।
हेड कॉन्स्टेबल की हुई पहचान
वहीं, एडिशनल एसपी ग्रामीण अर्चना झा ने बताया कि, हाईवा चालक को तेज रफ्तार गाड़ी चलाने से मना किया गया। इसी दौरान सिविल लाइन थाने में पदस्थ हेड कॉन्स्टेबल विकास सेंगर के साथ उनका झगड़ा हुआ। जिसके बाद मारपीट हुई है। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है।
शिकायत लेकर पहुंचा एसपी ऑफिस-समझौता करने बनाया दबाव
इस मामले में दोषी पुलिस वाले के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने पर परेशान हाईवा चालक बुधवार को अपनी शिकायत लेकर एसपी ऑफिस पहुंचा। इसकी जानकारी मिलते ही हेड कॉन्स्टेबल विकास सेंगर एक्टिव हो गया। उसने अपने परिचितों के जरिए चालक को वापस बुलाया और समझौता करने के लिए दबाव बनाने लगा। जिसके कारण हाईवा चालक दोपहर तक इधर-उधर भटकता रहा।
छत्तीसगढ़
सुकमा : मरीज को मिला समय पर उपचार, सुकमा के चिकित्सकों की टीम ने दिखाई तत्परता
जिला अस्पताल में मौत के मुंह से लौटाई महिला की सांसें
सुकमा। सुकमा जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवा की तत्परता और आधुनिक संसाधनों की उपलब्धता का एक सराहनीय उदाहरण सामने आया है। सिविल सर्जन डॉ. एमआर कश्यप से प्राप्त जानकारी के अनुसार छिंदगढ़ विकासखंड के कुन्ना निवासी 38 वर्षीय श्रीमती पाली कवासी को गंभीर अवस्था में जिला अस्पताल सुकमा में भर्ती कराया गया।

देरी से अस्पताल पहुंचने के कारण स्थिति अत्यंत जोखिमपूर्ण थी और तत्काल सर्जरी आवश्यक हो गई। अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुजा ने बिना समय गंवाए तुरंत एलएससीएस (सीजर) ऑपरेशन कर मरीज का उपचार प्रारंभ किया। हालांकि ऑपरेशन के दौरान मृत बच्चा पैदा होने से महिला की स्थिति और अधिक जटिल हो गई।
महिला की हालत लगातार बिगड़ती चली गई और रेफर करने की तैयारी की जा रही थी। इसी दौरान महिला का श्वास बंद सा हो गया, साथ ही नाड़ी और हृदय की धड़कन भी थम सी गई। ऐसे संकट की घड़ी में जिला अस्पताल की मेडिकल टीम ने त्वरित निर्णय लेते हुए महिला को दो बार सीपीआर दिया और तत्काल वार्ड में शिफ्ट कर आधुनिक वेंटीलेटर की सहायता से उपचार शुरू किया गया। इसके बाद महिला को दो यूनिट रक्त चढ़ाया गया।
डॉक्टरों की सतर्कता और उपलब्ध संसाधनों के कारण महिला की जान बचा ली गई। आज श्रीमती पाली कवासी पूरी तरह स्वस्थ हैं और जिला अस्पताल के डॉक्टरों व स्टाफ के प्रयासों की सराहना कर रही हैं।

छत्तीसगढ़
जशपुर : राज्यपाल रमेन डेका ने जशपुर के मातृत्व वन में किया सीता अशोक के पौधे का रोपण
जशपुर। राज्यपाल रमेन डेका ने सर्किट हाउस जशपुर के मातृत्व वन में एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत सीता अशोक के पौधे का रोपण कर पर्यावरण के संरक्षण और संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया।
इस अवसर पर कलेक्टर रोहित व्यास वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक लाल उमेद सिंह, जिला पंचायत सीईओ अभिषेक कुमार और वनमंडला अधिकारी शशि कुमार और अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

लगभग 2 एकड़ क्षेत्र में विकसित इस मातृत्व वन में 400 से अधिक विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण किया गया है, जो पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक संवेदनाओं के अद्वितीय समन्वय का उदाहरण प्रस्तुत करता है। मातृत्व वन में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत जिले के जनप्रतिनिधियों द्वारा अपनी माताओं के नाम पर पौधरोपण किया गया है। इस पहल ने अभियान को भावनात्मक और सामाजिक रूप से विशेष महत्व प्रदान किया है।
राज्यपाल रमेन डेका ने इस अवसर पर कहा कि माँ हमारे जीवन की प्रथम गुरु होती हैं और उनका स्थान सर्वोच्च होता है। ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के माध्यम से हम माँ के प्रति सम्मान को प्रकृति से जोड़ रहे हैं। यह पहल आने वाली पीढ़ियों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ सामाजिक मूल्यों को भी सुदृढ़ करेगी। उन्होंने कहा कि मातृत्व वन जैसी पहल न केवल हरित क्षेत्र बढ़ाने में सहायक होगी, बल्कि समाज में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का भाव भी विकसित करेंगी।
मातृत्व वन के अंतर्गत पर्यावरणीय एवं औषधीय दृष्टि से महत्वपूर्ण पौधों का चयन कर उनका रोपण किया गया है। इनमें टिकोमा, झारुल, सीता अशोक, गुलमोहर, लक्ष्मीतरु, आंवला, बीजा, सिन्दूर, नागकेसरी, अर्जुन एवं जामुन जैसी प्रजातियाँ प्रमुख हैं। ये पौधे न केवल पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में सहायक होंगे, बल्कि आने वाले समय में औषधीय एवं जैव विविधता के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। मातृत्व वन की स्थापना का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना, माताओं के प्रति सम्मान को प्रकृति के माध्यम से अभिव्यक्त करना तथा नई पीढ़ी में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है। यह पहल ‘हर घर एक पेड़, हर पेड़ में माँ की ममता’ के संदेश को साकार करने की दिशा में एक सार्थक कदम है।

छत्तीसगढ़
जशपुर : राज्यपाल रमेन डेका ने जशपुर के केरेगांव होम-स्टे का किया अवलोकन

जशपुर। राज्यपाल रमेन डेका ने जशपुर प्रवास के दौरान शनिवार को जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल देशदेखा के समीप स्थित केरेगांव में विकसित होम-स्टे का अवलोकन किया। इस दौरान वे स्थानीय आदिवासी संस्कृति, जनजीवन और पारंपरिक आतिथ्य परंपरा से रूबरू हुए। होम-स्टे प्रवास के दौरान उन्होंने देशदेखा समूह की महिलाओं द्वारा पारंपरिक विधि से तैयार किए गए व्यंजनों का स्वाद चखा। राज्यपाल श्री डेका ने ग्रामीण परिवेश में विकसित होम-स्टे को प्रेरणादायक कदम बताया और कहा कि यह प्रयास न केवल ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देते हैं, बल्कि स्थानीय महिलाओं और ग्रामीण परिवारों की आजीविका को सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाते हैं।
इस दौरान स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने ‘जसक्राफ्ट’ ब्रांड के तहत छिंद एवं कांसा से निर्मित पारंपरिक आभूषण माला एवं झुमके राज्यपाल को भेंट किए। राज्यपाल श्री डेका ने स्थानीय महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पादों की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल कौशल विकास, रोजगार सृजन तथा आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान करेगी।

इस दौरान ‘देशदेखा क्लाइंबिंग कम्पनी’ के सदस्यों ने भी राज्यपाल से भेंट की। उन्होंने क्षेत्र में एडवेंचर स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने के प्रयासों की जानकारी देते हुए बताया कि यहां नियमित रूप से रॉक क्लाइंबिंग जैसे खेलों का आयोजन किया जाता है। राज्यपाल ने अधिकारियों को ऐसे खेलों को निरंतर सहयोग और प्रोत्साहन देने को कहा, ताकि पर्यटन को बढ़ावा मिले और अधिक से अधिक युवा इन गतिविधियों की ओर आकर्षित हों। इस दौरान कलेक्टर रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह, जिला पंचायत सीईओ अभिषेक कुमार,वनमंडलाधिकारी शशि कुमार सहित अन्य अधिकारीगण एवं ग्रामीणजन उपस्थित थे।

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