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कोरबा

हर खेत तक सहायता, हर किसान तक विश्वास – शासन की योजनाओं से खरीफ की शुरुआत बनी आसान

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समय पर मिला खाद-बीज, अब हर फसल से जुड़ी है उम्मीद और उत्साह

कोरबा। कोरबा जिले में इस समय खरीफ सीजन की बुआई का कार्य अपने चरम पर है। झमाझम बारिश के बीच खेतों में रौनक लौट आई है और किसानों में उत्साह का माहौल है। इस पूरे कृषि चक्र को सुचारू बनाने के लिए राज्य सरकार एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार किसानों को समय पर और पर्याप्त मात्रा में खाद-बीज उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। शासन की प्राथमिकता है कि प्रदेश समेत जिले के किसी भी किसान को कृषि में समस्या महसूस न हो।

जिले की सभी सहकारी समितियों में खाद एवं बीज का भरपूर भंडारण किया गया है और वितरण की प्रक्रिया निरंतर पारदर्शी और सुगम ढंग से जारी है। समितियों के माध्यम से किसानों को यूरिया, डीएपी, पोटाश, सुपर फास्फेट, नैनो यूरिया सहित प्रमाणित एवं उन्नत किस्म के धान बीज जैसे – स्वर्णा, 1010, 1001 और 1156 का वितरण किया जा रहा है।

सहकारी समितियों में किसानों की सुविधा का विशेष ध्यान रखते हुए वितरण कार्य को इस तरह व्यवस्थित किया गया है कि किसानों को न तो लंबी कतार में लगना पड़ रहा है और न ही अनावश्यक इंतजार करना पड़ रहा है। किसान अपनी आवश्यकता अनुसार समितियों में पहुंचकर सुगमता से खाद-बीज प्राप्त कर रहे हैं।

आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित, सोनपुरी समिति के महाप्रबंधक बरत साहू ने बताया कि शासन के निर्देशों के अनुसार समुचित भंडारण और समयबद्ध वितरण सुनिश्चित किया गया है। उन्होंने जानकारी दी कि अब तक कुल 2,429.8 मीट्रिक टन खाद का वितरण किया जा चुका है। समिति में पंजीकृत लगभग 95 प्रतिशत किसान खाद-बीज का उठाव कर चुके हैं, और शेष किसानों को भी शीघ्र ही सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।

साहू ने यह भी बताया कि शासन द्वारा समय-समय पर आवश्यकतानुसार अतिरिक्त खाद-बीज भेजा जा रहा है, जिससे वितरण में कोई रुकावट न आए। यह सुनिश्चित किया गया है कि प्रत्येक किसान को उनकी जरूरत के अनुसार समुचित मात्रा में गुणवत्ता युक्त बीज और खाद प्राप्त हो। उन्होंने भरोसा जताया कि आगामी कुछ दिनों में शत-प्रतिशत किसानों को खाद-बीज का वितरण पूर्ण कर लिया जाएगा।

शासन की दूरदर्शी नीतियों और समय पर योजना क्रियान्वयन के परिणामस्वरूप इस वर्ष किसानों को खेती की शुरुआत में किसी भी प्रकार की कमी नहीं झेलनी पड़ी। परिणामस्वरूप जिले में खरीफ फसलों की बुआई का कार्य सुचारू रूप से आगे बढ़ रहा है और किसानों को इस वर्ष एक बेहतर फसल की उम्मीद है।

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कोरबा

श्रद्धा महिला मंडल, एसईसीएल बिलासपुर द्वारा वृद्धाश्रम में निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन

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बिलासपुर/कोरबा। श्रद्धा महिला मंडल, एसईसीएल बिलासपुर द्वारा दिनांक 08 जून 2026 को माता रानी की कुटिया वृद्धाश्रम में निवासरत वृद्ध महिलाओं के लिए एक निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया।

यह कार्यक्रम श्रद्धा महिला मंडल की अध्यक्षा एवं एसईसीएल परिवार की प्रथम महिला श्रीमती शशि दुहन के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ।

इस अवसर पर मंडल की आदरणीय उपाध्यक्षगण भी उपस्थित रहीं। सभी ने वृद्धाश्रम में रह रही वृद्धजनों से आत्मीय संवाद कर उनका कुशलक्षेम जाना तथा उनका उत्साहवर्धन किया।

शिविर में* डॉ पारुली साहू एवं उनकी टीम द्वारा 25 वृद्धजनों का स्वास्थ्य परीक्षण कर आवश्यक परामर्श एवं मार्गदर्शन प्रदान किया* गया। शिविर में रक्तचाप (BP), नाड़ी (Pulse), CBC, RBS, HbA1c, लिवर प्रोफाइल, किडनी प्रोफाइल एवं लिपिड प्रोफाइल सहित विभिन्न जांचें निःशुल्क की गईं। स्वास्थ्य परीक्षण के उपरांत जरूरतमंद महिलाओं को निःशुल्क दवाइयों का वितरण किया गया।

कार्यक्रम के दौरान श्रीमती शशि दुहन ने वृद्धाश्रम की महिलाओं को हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया तथा उनके स्वास्थ्य की नियमित देखभाल हेतु प्रतिमाह स्वास्थ्य परीक्षण शिविर आयोजित करने की घोषणा की।
शिविर के उपरांत वृद्धाश्रम में निवासरत 25 बुजुर्गों को पौष्टिक नाश्ता एवं फल की टोकरियाँ वितरित की गईं, जिससे उनके प्रति स्नेह, सम्मान एवं अपनत्व का भाव व्यक्त किया जा सके।
इस सेवा कार्य में समिति की सदस्याओं ने भी सक्रिय सहभागिता निभाई।
यह स्वास्थ्य शिविर श्रद्धा महिला मंडल की सामाजिक सेवा, करुणा एवं जनकल्याण के प्रति प्रतिबद्धता का एक सराहनीय प्रयास रहा, जिससे वृद्धाश्रम की महिलाओं को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ प्राप्त हुआ तथा उनमें सुरक्षा एवं अपनत्व की भावना का संचार हुआ।

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कोरबा

क्षतिग्रस्त और अधूरी पुलिया-एप्रोच रोड से बारिश में आवाजाही होगी बाधित, ग्रामीणों को घूमकर जाना पड़ेगा

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कोरबा। क्षतिग्रस्त व अधूरी पुलिया-एप्रोच रोड से बारिश में फिर से आवाजाही बाधित होगी। इससे उपनगर बांकीमोंगरा, हरदीबाजार, चैतमा के ग्रामीणों को वैकल्पिक सड़क से घूमकर जाना पड़ेगा। बारिश में संपर्क टूटने पर स्कूली छात्रों, कामकाजी लोगों को सबसे अधिक परेशानी होगी, जो सड़क मार्ग से रोज आवाजाही करनी पड़ती है। हरदीबाजार से नेवसा, उतरदा, सिल्ली, बोईदा, निरतु की ओर आवाजाही के लिए लीलागर नदी पर बनी पुरानी पुलिया की ऊंचाई कम है। 24 घंटे से भी कम बारिश में नदी का जलस्तर बढ़ने पर पुलिया के ऊपर से पानी बहता है। इससे गांवों को संपर्क टूटने पर सबसे अधिक परेशानी नेवसा समेत आसपास गांवों के स्कूली छात्रों को होती है, जो हरदीबाजार व दीपका के स्कूलों में पढ़ाई करते हैं। यह सड़क हरदीबाजार को बलौदा सीपत व मस्तूरी से भी जोड़ती है, इस कारण यात्री बसें भी मार्ग से गुजरती है।

हरदीबाजार से नेवसा की दूरी लीलागर नदी का पुलिया पारकर 2 किलोमीटर है। वहीं रतिजा की ओर से बायपास सड़क से आवाजाही पर 5 किलोमीटर दूरी पड़ेगी। पुलिया की कम ऊंचाई के मद्देनजर नया पुल का निर्माण कराया है, जो बनकर तैयार हो गया है, लेकिन पुल के दोनों ओर की एप्रोच रोड अब तक नहीं बनाया है। सड़क पर मिट्‌टी पड़ी है। नौतपा की विदाई से मानसून भी अब करीब है। आने वाले दिनों प्री-मानसून बारिश की संभावना है। एप्रोच रोड को पुल के लेवल के हिसाब से निर्माण नहीं कराने पर वाहनों से आवाजाही मुश्किल होगी। पिछले साल बारिश में पश्चिम क्षेत्र बांकीमोंगरा के + लीलागर नदी पर निर्मित पुल का अधूरा एप्रोच रोड।

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कोरबा

लो वोल्टेज और कटौती पर ग्रामीणों का हल्लाबोल

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कोरबा/पाली। 5 ग्राम पंचायतों में बिजली आपूर्ति की लचर व्यवस्था पर ग्रामीणों ने पाली सब स्टेशन कार्यालय में जमकर नारेबाजी की। लगभग 2 घंटे धरना देने के बाद पुलिस शासन की मौजूदगी में सब स्टेशन के बिजली अफसरों के साथ परिसर में ही वार्ता हुई। इसके बाद ग्रामीणों का आंदोलन समाप्त हुआ। सब स्टेशन कार्यालय के निकट से ग्रामीणों ने रैली की शक्ल में बिजली दफ्तर पहुंचे। इस दौरान गांवों में बिजली कटौती व लो वोल्टेज का आरोप लगाते हुए जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों ने कहा कि अनाफ-शनाफ बिजली बिल भेजा रहा है। खराब पड़े ट्रांसफार्मर को बदलने में ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

सिल्ली, परसदा, शिवपुर, निरधी, पोलमी पंचायत के गांवों के हजारों उपभोक्ता लो वोल्टेज व बिजली कटौती से परेशान हैं। कई बार मौखिक व लिखित शिकायत के बाद भी अफसरों ने ध्यान नहीं दिया। दफ्तर परिसर में ग्रामीणों के साथ बिजली अधिकारियों की वार्ता हुई। उनकी बिजली संबंधी समस्याओं के निराकरण का भरोसा दिलाया। इसके बाद ग्रामीणों ने आंदोलन स्थगित कर दिया। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर यदि 10 दिनों के भीतर समस्याओं का निराकरण नहीं किया गया तो चक्काजाम आंदोलन करने मजबूर होंगे।

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