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छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में फोर्स पर ड्रोन से नजर रख रहे नक्सली:2018 से ऐसा कर रहे, पुलिस को अब पता चला, बरामद ड्रोन की रेंज 3 किमी

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रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ में जवानों के मूवमेंट पर नक्सली ड्रोन से नजर रख रहे हैं। 2018 से नक्सलियों के पास करीब 10 ड्रोन हैं, जिनकी रेंज 3 किलोमीटर है।

इन ड्रोन्स को उड़ाकर वह जवानों की मौजूदगी देखते हैं। कम जवान हों तो हमला करते हैं, ज्यादा हों तो भाग जाते हैं। पुलिस को नक्सलियों के ड्रोन की जानकारी 7 साल बाद लग सकी है।

सुकमा एसपी किरण चव्हाण ने बताया कि पुलिस ने नक्सलियों के ठिकानों से 23 फरवरी 2025 को एक ड्रोन भी जब्त किया है। NIA इसकी जांच में शामिल है।

नक्सलियों के खिलाफ NIA से छत्तीसगढ़ पुलिस को क्या जानकारी मिली है? ड्रोन सप्लाई के तार कहां-कहां से जुड़े है? इस रिपोर्ट में पढ़िए…

गुंडराजगुडेम जंगल में सर्च करने निकले पुलिसकर्मियों की तस्वीर।

गुंडराजगुडेम जंगल में सर्च करने निकले पुलिसकर्मियों की तस्वीर।

सुकमा में सर्चिंग के दौरान जंगल में मिला था ड्रोन

दरअसल, 23 फरवरी 2025 को बस्तर के सुकमा जिले के गुंडराजगुडेम जंगल से पुलिस अफसरों ने सर्चिंग के दौरान नक्सलियों के ठिकाने से दैनिक सामग्री के साथ ड्रोन बरामद किया था। अफसरों ने इस बात की पुष्टि की है।

सुकमा एसपी किरण चव्हाण ने बताया कि लंबे समय से गुंडराजगुडेम जंगल में पुलिस कैंप और उसके आस-पास के इलाकों में संदिग्ध ड्रोन देखे जाते थे। इसके बाद टीम ने मुखबिर के बताए ठिकानों पर जाकर जांच की, तो दैनिक सामग्री के साथ ड्रोन और उसके कुछ पार्ट्स मिले थे। यह पहली बार हुआ कि अफसरों ने ड्रोन को बरामद किया।

जो ड्रोन अफसरों ने बरामद किया उसकी रेंज 3 किलोमीटर

सुकमा एसपी के मुताबिक गुंडराजगुडेम जंगल से जिस ड्रोन को जब्त किया है, उस ड्रोन में कोई सामान ले जाने (दवा, बारूद, बम) की क्षमता नहीं है। इस ड्रोन की रेंज 3 किलोमीटर दायरे की है। जैसा ड्रोन पुलिस अफसरों ने बरामद किया, वैसा ड्रोन कार्यक्रमों में फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

तस्वीर कर्रेगुट्टा ऑपरेशन के दौरान की जब हेलीकॉप्टर के जरिए जवानों को राशन पहुंचाया गया था।

तस्वीर कर्रेगुट्टा ऑपरेशन के दौरान की जब हेलीकॉप्टर के जरिए जवानों को राशन पहुंचाया गया था।

केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों से मिला था इनपुट

नेशनल इन्वेस्टिंगेशन एजेंसी (NIA) से छत्तीसगढ़ पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को जून 2024 में नक्सलियों द्वारा ड्रोन इस्तेमाल किए जाने का इनपुट मिला था। NIA ने छत्तीसगढ़ पुलिस के अधिकारियों को यह इनपुट तेलंगाना पुलिस की गिरफ्त में आए नक्सलियों के तीन सहयोगियों की गिरफ्तारी के बाद दिया था।

सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों के अनुसार, ड्रोन सप्लाई करने और नक्सलियों को ट्रेनिंग देने के आरोप में गिरफ्तार तीन आरोपियों में से एक छत्तीसगढ़ के बीजापुर का रहने वाला है। इन आरोपियों ने तेलंगाना, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में नक्सलियों को ड्रोन सप्लाई किए थे।

इससे पहले भी ड्रोन दिखा था जंगलों में

नक्सलियों ड्रोन इस्तेमाल कर रहे हैं, इसकी खबरें पहले भी आती रही हैं। 2019, 2020 और 2023 में ड्रोन देखे जाने की खबरें वायरल हुईं, लेकिन अधिकारियों ने इसकी पुष्टि नहीं की। 2019 में केंद्र सरकार ने नक्सल प्रभावित इलाकों में किसी भी संदिग्ध ड्रोन को मार गिराने के निर्देश भी जारी किए थे।

एनआईए की (फाइल फोटो)

एनआईए की (फाइल फोटो)

NIA ने जून में अरेस्ट किया सप्लायर को

NIA ने 29 जून को दिल्ली से नक्सलियों को ड्रोन सप्लाई करने वाले आरोपी को पकड़ा था। मथुरा निवासी आरोपी विशाल सिंह ने पूछताछ के दौरान खुलासा किया कि वह पिछले सात साल से घने जंगलों में ड्रोन की सप्लाई और ट्रेनिंग दे रहा था।

अधिकारियों ने पुष्टि की कि सीपीआई (माओवादी) उत्तरी क्षेत्र ब्यूरो (एनआरबी) को एक्सपर्ट बनाने का मुख्य आरोपी विशाल सिंह ने बिहार के छकरबंदा-पचरुखिया वन क्षेत्र में प्रतिबंधित संगठन के नेताओं को ड्रोन दिए थे।

जांच कर रही NIA, जल्द होंगे खुलासे

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) मामले की छानबीन कर रही है और विशाल सिंह की सीपीआई (माओवादी) से कथित रूप से जुड़े संपर्कों की जांच कर रही है। एजेंसी की ओर से तलाशी के दौरान जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों और डाटा की बारीकी से जांच की जा रही है, जिससे संगठन की रणनीतियों और गतिविधियों का खुलासा हो सके।

इससे पहले अगस्त 2024 में NIA ने एक अन्य आरोपी अजय सिंघल उर्फ अमन को गिरफ्तार किया था, जो माओवादी संगठन के हरियाणा और पंजाब इकाई का प्रमुख माना जाता है। इसके अलावा 2013 में बेंगलुरु स्थित एक निजी कंपनी से जुड़े कुछ व्यक्तियों को नक्सलियों को नाइट विजन डिवाइस उपलब्ध कराने के आरोप में हिरासत में लिया गया था।

अधिकारियों के अनुसार यह पूरी साजिश नक्सल संगठन की उस योजना का हिस्सा है, जिसके तहत वे उत्तरी भारत के क्षेत्रों में अपनी कमजोर होती पकड़ को फिर से मजबूत करना चाहते हैं।

नक्सलियों के पास 10 ड्रोन होने का शक

NIA के अफसरों ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया, कि नक्सलियों के पास एक या दाे नहीं, बल्कि 10 ड्रोन होने की जानकारी है। इन ड्रोन को चलाने के लिए उन्होंने प्रशिक्षण भी लिया है। यह ड्रोन नक्सलियों के किस इलाके की कमेटी के पास है? इस सवाल का जवाब अफसर तलाश रहे हैं।

सिर्फ बस्तर में ही मारे गए 426 से ज्यादा नक्सली

बस्तर में 1 जनवरी 2024 से जून 2025 तक हुई अलग-अलग मुठभेड़ों में 426 से ज्यादा नक्सलियों का एनकाउंटर किया गया है। पुलिस के मुताबिक इनमें 2024 में 217 नक्सली और पिछले 6 महीने में 200 से ज्यादा नक्सली मारे गए हैं।

वहीं नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी के नाम से जारी इस बुकलेट में लिखा है कि सालभर में नक्सलियों के पोलित ब्यूरो मेंबर और नक्सल संगठन के महासचिव बसवा राजू समेत सेंट्रल कमेटी के 4 सदस्य, स्टेट कमेटी के 16 सदस्य मारे गए हैं। इन 357 में 136 महिला नक्सली भी मारी गई हैं। सबसे ज्यादा दंडकारण्य में 281 नक्सली ढेर हुए हैं।

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कोरबा

अवॉर्ड सेरेमनी में लायंस क्लब कोरबा गुरुकुल को मिला अनेकों सम्मान

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बिलासपुर के होटल इंटरसिटी में आयोजित हुआ भव्य समारोह
कोरबा। द इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ लायंस क्लब्स डिस्ट्रिक्ट 3233सी अवॉर्ड सेरेमनी सत्र 2025-26 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर लायन पीएमजेएफ विजय अग्रवाल ने बिलासपुर के होटल इंटरसिटी में भव्य सम्मान समारोह आयोजित किया, जिसमें डिस्ट्रिक्ट 3233सी के सभी क्लबों ने भाग लिया, जिसमें लायंस क्लब कोरबा गुरुकुल को समाज सेवा, जनकल्याण, एवं उत्कृष्ट सामाजिक योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

यह सम्मान क्लब द्वारा शिक्षा, स्वास्थ एवं पर्यावरण संरक्षण तथा जनहितकारी गतिविधियों में किए गए उल्लेखनीय कार्यों के लिए प्रदान किया गया।
संस्थापक पीएमजेएफ लायन डॉ. राजकुमार अग्रवाल के कुशल नेतृत्व में मिला सम्मान

लायंस क्लब कोरबा गुरुकुल के संस्थापक क्लब एडवाजर पीएमजीएफ डॉ राजकुमार अग्रवाल के कुशल नेतृत्व में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर लायन विजय अग्रवाल द्वारा आउटस्टैंडिंग क्लब डिस्ट्रिक्ट अवॉर्ड लायंस क्लब कोरबा गुरुकुल को प्रदान किया गया।

बेस्ट जोन चेयरपर्सन एमजेएफ लायन पवन अग्रवाल आटो सेन्टर को, आउटस्टैंडिंग क्लब अध्यक्ष अवॉर्ड लायंस सुरेंद्र कुमार डनसेना, कैबिनेट मेम्बर सर्विस एक्सीलेंस अवॉर्ड लायंस मनोज कुमार गुप्ता एवं वुमेंस लायंस मेंबरशिप ग्रोथ के लिए लायंस श्रीमती विनीता गुप्ता को सम्मानित किया गया।
पीएमजेएफ लायन डॉ. राजकुमार अग्रवाल ने दी बधाई

लायंस क्लब कोरबा गुरूकुल के एडवाइजर पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर एवं संस्थापक पीएमजेएफ लायन डॉ. राजकुमार अग्रवाल ने क्लब को अवार्ड मिलने पर अपनी टीम को बधाई दी और कहा कि यह सम्मान टीम की संयुक्त गतिविधियों के कारण मिला। हम आने वाले सत्र में और बेहतर करने का प्रयास करेंगे और मुझे आशा है कि नए अध्यक्ष लायन दर्शन अग्रवाल और उनकी टीम लायनवाद को नई ऊंचाई तक ले जाने के लिए प्रयास करेगी।

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कोरबा

झेरिया यादव समाज की कमान अब सैलाना यादव के हाथों में, रायपुर में हुई घोषणा, बधाई देने वालों का उमड़ा जनसैलाब

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कोरबा। झेरिया यादव समाज के संगठनात्मक इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है। रायपुर में आयोजित समाज के गरिमामय कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष जगनिक यादव ने सैलाना-बाबूलाल यादव को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति मे झेरिया यादव समाज का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किए जाने की औपचारिक घोषणा की। घोषणा होते ही सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा और उपस्थित समाजजनों ने पुष्पमालाओं से उनका भव्य स्वागत किया।

दीपका (जिला कोरबा) निवासी सैलाना-बाबूलाल यादव की प्रदेश अध्यक्ष पद पर नियुक्ति की सूचना मिलते ही पूरे कोरबा जिले सहित प्रदेशभर के समाजजनों में उत्साह का माहौल बन गया। उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएँ देने वालों का ताँता लग गया। समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों, युवाओं एवं महिलाओं ने उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएँ देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि उनके नेतृत्व में झेरिया यादव समाज नई ऊर्जा, नई सोच और मजबूत संगठन के साथ आगे बढ़ेगा।इनके पिता श्री रोहित कुमार यादव लवसरा शक्ति मे शिक्षक तथा पति एस ई सी एल मे कर्मचारी रहें है।

समाजजनों ने कहा कि सैलाना-बाबूलाल यादव लंबे समय से सामाजिक सरोकारों से जुड़े रहे हैं तथा समाज की एकता, शिक्षा, युवा नेतृत्व और सामाजिक उत्थान के लिए निरंतर कार्य करते रहे हैं। उनकी सक्रियता, संगठन क्षमता एवं समाज के प्रति समर्पण को देखते हुए उन्हें यह महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा गया है।

समाज के वक्ताओं ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश अध्यक्ष के रूप में सैलाना-बाबूलाल यादव समाज को नई दिशा देंगे, समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलेंगे तथा संगठन को प्रदेश के प्रत्येक जिले तक और अधिक सशक्त बनाने का कार्य करेंगे।

इस ऐतिहासिक नियुक्ति पर कोरबा सहित प्रदेशभर के समाजजनों ने हर्ष व्यक्त करते हुए नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष सैलाना-बाबूलाल यादव को उज्ज्वल एवं सफल कार्यकाल के लिए शुभकामनाएँ प्रेषित की हैं।

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कोरबा

सीएसईबी कोरबा पूर्व के 324 जर्जर मकानों को तोड़ने की फिर कवायद

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पिछले साल ठेकेदार ने कुछ मकानों को तोड़ा और उसके बाद अधूरा छोड़ दिया था
इस बार महाराष्ट्र की कम्पनी मे. के के घरत एण्ड कम्पनी को दिया गया है वर्क आर्डर
कोरबा। छत्तीसगढ़ राज्य उत्पादन कम्पनी सीएसईबी कोरबा पूर्व स्थित कालोनी के 324 जर्जर मकानों को डिस्मेंटल करने की कवायद तेज कर दी गई है। सीएसईबी कालोनी सिविल की कार्यपालन अभियंता श्रीमती तिग्गा ने बताया कि कालोनी के 324 जर्जर मकानों को डिस्मेंटल करने के लिए मे. के के घरत एण्ड कम्पनी महाराष्ट्र को वर्क आर्डर दिया गया है और 05 माह के अंदर कार्य पूर्ण करने की शर्त रखी गई है। पुष्पलता गार्डन सड़क किनारे से लेकर कलेक्ट्रेट के सामने सड़क किनारे के सभी जर्जर मकानों को तोड़ने के लिए एक सप्ताह पूर्व नोटिस भी चस्पा किया गया है।
इन मकानों को किया जाएगा डिस्मेंटल

विभाग ने कई जगह नोटिस बोर्ड लगाया है और उन मकानों को तोड़ने के लिए कब्जाधारियों को मकान खाली करने का निर्देश दिया है। जिन मकानों को डिस्मेंटल किया जाएगा, उसमें एनएफ-209 से एनएफ 304 (96 यूनिट), एसएफ-995 से एसएफ 1042 (48 यूनिट), एसएफ 939 से एसएफ 994 (56 यूनिट), एसएफ 907 से एसएफ 938 (32 यूनिट), एसएफ 891 से एसएफ 906 (16 यूनिट), एसएफ 419 से एसएफ 426 (08 यूनिट), एसएफ 859 से एसएफ 890 (32 यूनिट), एसएफ 459 से एसएफ 466 (08 यूनिट), एसएफ 635 से एसएफ 642 (08 यूनिट), एसएफ 515 से एसएफ 522 (16 यूनिट), एसएफ 851 से एसएफ 858 (09 यूनिट), एसएफ 787 से एसएफ 850 (64 यूनिट), एसएफ 747 से एसएफ 786 (40 यूनिट) एवं एसएफ 743 से एसएफ 746 (04 यूनिट) शामिल हैं।
06 दशक पूर्व बने थे ये मकान
जिन 324 जर्जर मकानों को तोड़ा जाएगा वे करीब 06 दशक पूर्व बनाए गए थे, रख-रखाव के अभाव में ये मकान जर्जर हो चुके हैं। ये सभी मकानों को सीएसईबी कर्मियों को अलाट किया गया था, लेकिन जर्जर होने के कारण कुछ वर्ष पूर्व सीएसईबी कर्मी अन्य जगहों पर बने नए भवनों में चले गए और खाली होने पर अन्य विभाग के कर्मचारियों को अलाट किया गया और कई मकानों में बाहरी लोग कब्जा जमा लिए। रख-रखाव के अभाव में अब ये मकान जर्जर हो चुके हैं।
पिछले ठेकेदार ने छोड़ दिया था अधूरा
पिछले वर्ष भी जर्जर मकानों को तोड़ने का काम एक कम्पनी को दिया गया था, लेकिन उसने बीच में ही कार्य अधूरा छोड़कर काम बंद कर दिया। अब फिर से जर्जर मकानों को तोड़ने का काम प्रारंभ किया जा रहा है।
कलेक्टर से मिले अधिकारी
कार्यपालन अभियंता (सिविल) श्रीमती तिग्गा ने बताया कि जर्जर मकानों को खाली कराने प्रशासन एवं पुलिस का सहयोग जरूरी है और पुलिस तथा प्रशासन के बगैर मकान खाली कराना टेढ़ी खीर है। अत: वे अपनी टीम के साथ कलेक्टर से मिलकर वस्तुस्थिति की जानकारी दी।

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