छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ के राजशेखर अंतरिक्ष में जाएंगे:कहा- पढ़ाई के दौरान NASA को भेजा था ई-मेल, अब अमेरिकी कंपनी ने स्पेस-मिशन के लिए चुना
रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ के पेंड्रा के रहने वाले राजशेखर पैरी जल्द अंतरिक्ष में जाने वाले हैं। एक निजी अमेरिकी एयरोस्पेस कंपनी टाइटंस स्पेस इंडस्ट्रीज ने अपने पहले मिशन के लिए भारतीय छात्र के तौर राजशेखर को चुना है।
अपने सिलेक्शन और उन्हें कैसे मौका मिला, इस बारे में राजशेखर बताते हैं कि उन्होंने 19 साल की उम्र में NASA को एक मेल किया था। केवल ये जानने के लिए कि एस्ट्रोनॉट बनने की प्रोसेस क्या होता है। उम्मीद तो थी नहीं, लेकिन 4 दिन बाद जो जवाब आया, उससे न सिर्फ उनके सवालों के जवाब मिले, बल्कि उनके सपनों को एक नई दिशा भी दी।
NASA ने उन्हें एस्ट्रोनॉट बनने की प्रक्रिया, योग्यता और रिस्क फैक्टर्स की पूरी जानकारी दी और साथ ही बधाई दी कि आप नासा के एस्ट्रोनॉट बनने की इच्छा रखते हैं। राजशेखर कहते हैं, उस मेल ने मेरा आत्मविश्वास और भी बढ़ा दिया। तभी से तय कर लिया था-अब तो स्पेस में जाना ही है।

निजी अमेरिकी एयरोस्पेस कंपनी टाइटंस स्पेस इंडस्ट्रीज ने अपने पहले मिशन के लिए भारतीय छात्र के तौर राजशेखर को चुना है।


छत्तीसगढ़
रायपुर : फिल्में समाज को संदेश देने का सशक्त माध्यम- राज्यपाल डेका



रायपुर। फिल्में और डॉक्युमेंट्री केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि समाज को जागरूक करने और सकारात्मक संदेश देने का एक प्रभावी साधन हैं। राज्यपाल रमेन डेका ने आज राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता डॉक्यूमेंट्री फिल्मों के सम्मान समारोह में उक्त बातें कही। यह कार्यक्रम रायपुर के एक निजी होटल में छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम और संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया था।

राज्यपाल ने कहा कि आदिम युग से ही मनुष्य विभिन्न माध्यमों से अपने विचार और संदेश व्यक्त करता रहा है। समय के साथ नाटक, रेडियो, टेलीविजन और अब डिजिटल माध्यमों ने इस भूमिका को और व्यापक बनाया है। उन्होंने कहा कि पहले सिनेमा का मूल उद्देश्य केवल धन अर्जित करना नहीं था, बल्कि समाज को संदेश देना और जागरूक करना था। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भी भारतीय सिनेमा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
राज्यपाल ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से बस्तर में नक्सलवाद के विरुद्ध उल्लेखनीय सफलता मिली है। फिल्म निर्माताओं को चाहिए कि अब वे बस्तर की समृद्ध संस्कृति से देश और दुनिया को परिचित कराएं। इससे क्षेत्र की सकारात्मक छवि को मजबूती मिलेगी।
राज्यपाल ने सद्गति, चरणदास चोर और देवदास जैसी फिल्मों और नाटकों का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन और जागरूकता लाने वाली फिल्मों की आज भी उतनी ही आवश्यकता है। राज्यपाल ने कहा की लोककलाओं, लोकगीतों, जनजातीय परंपराओं और पर्व-त्योहारों जैसे हमारे धरोहर को स्थायी रूप से संरक्षित करने का महत्वपूर्ण माध्यम डॉक्यूमेंट्री फिल्में हैं। उन्होंने कलाकारों से लोककला, लोकगीत, जनजातीय परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
राज्यपाल ने कहा कि मोबाइल की बढ़ती लत आज गंभीर सामाजिक समस्या बनती जा रही है। बच्चे खेल के मैदानों से दूर हो रहे हैं और उनकी रचनात्मकता प्रभावित हो रही है। उन्होंने कलाकारों से आग्रह किया कि वे नई पीढ़ी को कला, संगीत, नाटक और नृत्य जैसी रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने के लिए आगे आएं। इस अवसर पर राज्यपाल ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार प्राप्त डॉक्युमेंट्री फिल्मों छत्तीसगढ़ के भीम दाऊ चिंताराम, हैप्पी बर्थडे और स्क्रीन के निर्माता-निर्देशकों को सम्मानित किया।
कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन संस्कृति विभाग के संचालक संजय कन्नौजे ने दिया। छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन ने कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। आभार प्रदर्शन प्रसिद्ध फिल्म निर्माता-निर्देशक मनोज वर्मा ने किया। कार्यक्रम में विधायक पुरंदर मिश्रा, विभिन्न डॉक्युमेंट्री फिल्मों के निर्माता-निर्देशक कलाकार एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।
छत्तीसगढ़
रायपुर : स्ट्रीट वेंडर्स के सपनों को मिली नई उड़ान
छत्तीसगढ़ में 1.12 लाख से अधिक वेंडर्स को मिला आर्थिक संबल
रायपुर। कभी सड़क किनारे ठेला लगाकर सब्जियां बेचने वाले, चाय-नाश्ते की छोटी दुकान चलाने वाले या फिर फुटपाथ पर रोजी-रोटी कमाने वाले लाखों स्ट्रीट वेंडर (रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों) के लिए पूंजी की कमी सबसे बड़ी चुनौती थी। बैंक ऋण तक पहुंच नहीं होने के कारण उनका व्यवसाय सीमित था। लेकिन प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) योजना ने इन छोटे उद्यमियों के जीवन में बदलाव की नई कहानी लिखी है।

छत्तीसगढ़ में इस योजना के माध्यम से अब तक 1 लाख 12 हजार 36 से अधिक स्ट्रीट वेंडर (पथ विक्रेताओं) को 256 करोड़ 94 लाख रुपये से अधिक की ऋण सहायता उपलब्ध कराई जा चुकी है। योजना ने न केवल उनके कारोबार को मजबूती दी है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक आजीविका का नया अवसर भी प्रदान किया है।
कोविड-19 महामारी के दौरान आजीविका पर पड़े गंभीर प्रभाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने 1 जून 2020 को प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि योजना शुरू की थी। इसका उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में काम करने वाले स्ट्रीट वेंडर को बिना गारंटी कार्यशील पूंजी ऋण उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपने व्यवसाय को फिर से शुरू कर सकें और उसका विस्तार कर सकें। योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें किसी प्रकार की गारंटी की आवश्यकता नहीं होती। समय पर ऋण चुकाने वाले हितग्राहियों को अगले चरण में अधिक राशि का ऋण प्राप्त करने का अवसर मिलता है।
योजना के तहत लाभार्थियों को चरणबद्ध तरीके से ऋण उपलब्ध कराया जाता है। प्रथम चरण में 10,000 रूपए तक का ऋण, द्वितीय चरण में 20,000 रूपए तक का ऋण तथा तृतीय चरण में 50,000 रूपए तक का ऋण दिया जाता है। अर्थात इस योजना के अंतर्गत न्यूनतम 10 हजार रुपये से लेकर अधिकतम 50 हजार रुपये तक की कार्यशील पूंजी ऋण सहायता प्राप्त की जा सकती है। समय पर पुनर्भुगतान करने वाले हितग्राही ही अगले चरण के लिए पात्र बनते हैं।
पीएम स्वनिधि योजना का लाभ उन छोटे कारोबारियों को मिलता है जो सड़क किनारे या सार्वजनिक स्थानों पर वस्तुएं एवं सेवाएं उपलब्ध कराते हैं। इनमें सब्जी एवं फल विक्रेता, चाय, नाश्ता एवं फास्ट फूड विक्रेता, पान दुकान संचालक, कपड़ा एवं रेडीमेड वस्त्र विक्रेता, जूता-चप्पल विक्रेता, किताब एवं स्टेशनरी विक्रेता, फूल एवं पूजा सामग्री विक्रेता, मोबाइल एक्सेसरीज विक्रेता, नाई, मोची, लॉन्ड्री जैसी सेवाएं देने वाले स्वरोजगारी, जैसे अनेक छोटे व्यवसाय शामिल हैं।
छत्तीसगढ़ में योजना का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। दुर्ग, रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, रायगढ़ और धमतरी जैसे जिलों में हजारों पथ विक्रेताओं को ऋण सहायता प्रदान की गई है। राज्य स्तर पर 267.22 करोड़ रुपये की स्वीकृत राशि के विरुद्ध 256.94 करोड़ रुपये से अधिक का वितरण किया जा चुका है, जिससे 1.12 लाख से अधिक हितग्राही लाभान्वित हुए हैं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का कहना है कि पीएम स्वनिधि योजना केवल ऋण वितरण कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह छोटे उद्यमियों को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने का एक व्यापक अभियान है। इससे स्ट्रीट वेंडर्स की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है, उनकी आय में वृद्धि हो रही है और वे अपने परिवार के लिए बेहतर भविष्य का निर्माण कर पा रहे हैं। आज छत्तीसगढ़ के शहरों और कस्बों में हजारों पथ विक्रेता इस योजना के सहारे अपने कारोबार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रहे हैं। प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना वास्तव में उन मेहनतकश हाथों को आर्थिक संबल देने का माध्यम बनी है, जो अपने परिश्रम से शहरों की अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करते हैं।
छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ के 250 MBBS सीटों पर लगा ब्रेक:5 नए सरकारी मेडिकल-कॉलेजों को NMC की मंजूरी नहीं, इंफ्रास्ट्रक्चर और फैकल्टी की कमी बनी बड़ी वजह
रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित 5 नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों को नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) से मान्यता नहीं मिली है। आयोग ने सभी कॉलेजों के आवेदन रिजेक्ट कर दिए हैं। इससे इस साल एमबीबीएस की 250 नई सीटें शुरू नहीं हो पाएंगी।
ये मेडिकल कॉलेज कवर्धा, जांजगीर-चांपा, मनेंद्रगढ़, दंतेवाड़ा और कुनकुरी में प्रस्तावित हैं। हर कॉलेज में 50-50 एमबीबीएस सीटों का प्रस्ताव था।

छात्रों को मिलता बड़ा फायदा
अगर इन कॉलेजों को मंजूरी मिल जाती तो प्रदेश में एमबीबीएस की 250 सीटें बढ़ जातीं। इससे नीट यूजी में प्रवेश के लिए प्रतिस्पर्धा कुछ कम होती और कटऑफ पर भी असर पड़ सकता था।
फिलहाल छत्तीसगढ़ के 10 सरकारी और 5 निजी मेडिकल कॉलेजों में कुल 2330 एमबीबीएस सीटें हैं।
शिक्षा विभाग की तैयारी पर उठे सवाल
जानकारी के मुताबिक, नए मेडिकल कॉलेजों में जरूरी तैयारियां पूरी नहीं हो सकीं। कई जगह न पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर है, न फैकल्टी और न ही जरूरी मेडिकल सुविधाएं। इससे NMC के तय मानकों पर कॉलेज खरे नहीं उतर पाए।
बताया जा रहा है कि राज्य सरकार ने फिलहाल सिर्फ डीन और अस्पताल अधीक्षक की प्रभार नियुक्तियां की हैं। नियमित फैकल्टी की भर्ती नहीं हुई।
जिला अस्पतालों के कुछ डॉक्टरों को असिस्टेंट प्रोफेसर और जूनियर रेजिडेंट के तौर पर पदस्थ करने के आदेश जरूर दिए गए, लेकिन यह व्यवस्था पर्याप्त नहीं मानी गई।

प्रमोशन नहीं होने से भी बढ़ी परेशानी
प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में काम कर रहे कई डॉक्टर लंबे समय से प्रमोशन का इंतजार कर रहे हैं। करीब 296 डॉक्टर प्रमोशन के पात्र बताए जा रहे हैं, जबकि 73 असिस्टेंट प्रोफेसरों का प्रोबेशन पीरियड भी पूरा नहीं किया गया है।
अगर समय पर प्रमोशन होते तो नए कॉलेजों के लिए प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर उपलब्ध हो सकते थे, जिससे मान्यता मिलने की संभावना बढ़ जाती।
अधिकारियों का ओवर कॉन्फिडेंस पड़ा भारी
चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों को भरोसा था कि सरकारी मेडिकल कॉलेज होने के कारण मान्यता मिल जाएगी। लेकिन NMC साल 2023 से तय पैरामीटर के आधार पर ही मंजूरी दे रहा है। इसी वजह से इस बार सभी कॉलेजों के आवेदन खारिज हो गए।
एफिलिएशन सर्टिफिकेट तक नहीं भेजा गया
जानकारी यह भी सामने आई है कि जिन पांच कॉलेजों के आवेदन रिजेक्ट हुए, उनमें से दो-तीन कॉलेजों ने हेल्थ साइंस यूनिवर्सिटी का एफिलिएशन सर्टिफिकेट तक आवेदन के साथ संलग्न नहीं किया। जबकि इस दस्तावेज के बिना मेडिकल कॉलेज शुरू नहीं किया जा सकता।
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निजी अमेरिकी एयरोस्पेस कंपनी टाइटंस स्पेस इंडस्ट्रीज ने अपने पहले मिशन के लिए भारतीय छात्र के तौर राजशेखर को चुना है।


नगर पालिका परिषद बांकीमोंगरा
16 वर्षीय किशोरी ने घर में लगाई फांसी, घटना से पहले युवक से विवाद और मारपीट का आरोप, पुलिस हर पहलू की कर रही जांच…देखे पूरी खबर
संवाददाता साबीर अंसारी
बांकीमोंगरा :– कोरबा जिले के थाना बांकीमोंगरा क्षेत्र अंतर्गत रोहिना बस्ती से एक बेहद दुखद मामला सामने आया है। जहां 16 वर्षीय नाबालिग किशोरी ने अपने घर के अंदर पंखे से फांसी लगाकर अपनी इहलिला समाप्त कर ली। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, घटना से कुछ समय पहले गांव के ही एक युवक से उसका विवाद हुआ था। पुलिस ने मर्ग क्रमांक 33/26 कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
• देर शाम मिली सूचना, सुबह उतारा गया शव।
• माँ के आने के बाद होगा पोस्टमार्टम।
• पिता का हो चुका है निधन।
मिली जानकारी के अनुसार, गुरुवार देर रात बांकीमोंगरा थाना पुलिस को सूचना मिली कि रोहिना बस्ती में एक किशोरी ने फांसी लगा ली है। सूचना पर पुलिस तत्काल मौके पर पहुंच कर तफ्तीश की और रात अधिक होने के कारण घटनास्थल को सुरक्षित कर सील कर दिया गया। आज सुबह थाना बाँकी से सहायक उप निरीक्षक (ASI) नंदलाल टंडन अपनी टीम के साथ घटनास्थल पहुंचे और शव को फंदे से उतारकर पंचनामा की कार्रवाई पूरी की।
मृतिका की पहचान शारदा महंत (16 वर्ष), पिता स्वर्गीय कुमार दास के रूप में हुई है। मृतिका की मां छत्तीसगढ़ से बाहर मजदूरी करने गई हैं, जिसके आने के बाद ही पोस्टमार्टम कराया जाएगा। पुलिस ने शव को एसईसीएल अस्पताल की मर्चुरी में सुरक्षित रखवा दिया है। कल मृतिका के मां के वापस पहुंचने के बाद पोस्टमार्टम कराया जाएगा।

परिजनों के अनुसार, वर्ष 2021 में पिता के निधन के बाद परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहा था। मां रोजी-रोटी के लिए बाहर मजदूरी करने चली गई थीं। शारदा अपने भाई के साथ रोहिना बस्ती में बुआ और नानी के पास रहती थी, जबकि उसकी बड़ी बहन अपने नाना-नानी के घर रहकर पढ़ाई कर रही है।
बुआ का आरोप: युवक ने की थी मारपीट – मृतिका की बुआ सरिता महंत ने बताया कि घटना से कुछ समय पहले गांव का एक युवक घर पहुंचा और शारदा को बाहर बुलाकर विवाद करने लगा। दोनों के बीच कहासुनी हुई, जिसके दौरान युवक ने शारदा को थप्पड़ भी मारे। बीच-बचाव कर युवक को वहां से भगा दिया गया।
मोबाइल जब्त, हर पहलू से जांच में जुटी पुलिसपुलिस ने घटनास्थल से मृतिका का मोबाइल फोन जब्त कर लिया है। कॉल डिटेल, मोबाइल डेटा और घटना से पहले हुए विवाद सहित सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और तकनीकी जांच के बाद ही मौत के कारणों और परिस्थितियों को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी।
फिलहाल पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है। जांच पूरी होने तक घटना के कारणों को लेकर किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
नगर पालिका परिषद बांकीमोंगरा
पेट्रोल पंपों में तेल वितरण को लेकर पार्षद अश्वनी मिश्रा ने उठाए सवाल, जांच की मांग,,,देखे पूरी खबर
संवाददाता साबीर अंसारी
बाँकीमोंगरा :– नगर पालिका परिषद बाँकीमोंगरा के वार्ड क्रमांक 13 के पार्षद अश्वनी कुमार मिश्रा ने जिले के पेट्रोल पंपों में तेल वितरण व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए इसकी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। इस संबंध में उन्होंने जिला प्रशासन को पत्र प्रेषित कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
पार्षद अश्वनी मिश्रा ने अपने पत्र में कहा है कि वर्तमान समय में जिले के कई रिटेल पेट्रोल पंपों पर आम उपभोक्ताओं को ईंधन प्राप्त करने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आशंका जताई है कि कुछ स्थानों पर आम जनता को निर्धारित मात्रा में तेल उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है, जबकि बड़े ट्रांसपोर्टरों एवं अन्य उपभोक्ताओं को अधिक मात्रा में ईंधन वितरण किए जाने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।

उन्होंने कहा कि यदि इस प्रकार की अनियमितताएं हो रही हैं तो यह आम उपभोक्ताओं के हितों के साथ अन्याय है और इसकी गंभीरता से जांच होनी चाहिए। पार्षद मिश्रा ने प्रशासन से मांग की है कि जिले के सभी पेट्रोल पंपों में विशेष जांच अभियान चलाकर ईंधन वितरण की प्रक्रिया की जांच की जाए तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि उपभोक्ताओं को उनके भुगतान के अनुरूप सही मात्रा में पेट्रोल और डीजल प्राप्त हो रहा है।
उन्होंने यह भी मांग की कि जांच के दौरान यदि किसी पेट्रोल पंप में गड़बड़ी या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित संचालकों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए।
पार्षद अश्वनी मिश्रा ने कहा कि उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा और पारदर्शी व्यवस्था बनाए रखने के लिए पेट्रोल पंपों का नियमित निरीक्षण आवश्यक है। उन्होंने इस संबंध में जिला प्रशासन, खाद्य विभाग एवं संबंधित तेल कंपनियों के अधिकारियों को भी पत्र की प्रतिलिपि भेजी है।
अब देखना होगा कि प्रशासन पार्षद की इस मांग पर क्या कदम उठाता है और आम उपभोक्ताओं की शिकायतों के समाधान के लिए किस प्रकार की कार्रवाई करता है।
नगर पालिका परिषद बांकीमोंगरा
बाँकीमोंगरा में गहराया पेयजल संकट, विपक्षी पार्षदों ने सौंपा ज्ञापन,,,देखे पूरी खबर
संवाददाता साबीर अंसारी
बाँकीमोंगरा :– नगर पालिका परिषद बाँकीमोंगरा क्षेत्र में पिछले कई दिनों से टेपनल के माध्यम से पानी नहीं मिलने की समस्या को लेकर विपक्षी पार्षदों ने मोर्चा खोल दिया है। लगातार विगत 5 दिनों से पेयजल आपूर्ति बाधित होने से आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
नेता प्रतिपक्ष मधुसूदन दास के नेतृत्व में विपक्षी पार्षदों ने नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) के नाम ज्ञापन सौंपकर जल्द से जल्द जल संकट का समाधान करने की मांग की। सीएमओ की अनुपस्थिति में यह ज्ञापन नगर पालिका के इंजीनियर शिव बर्मन को सौंपा गया।

पार्षदों ने बताया कि गर्मी शुरू होने के साथ ही क्षेत्र में पेयजल संकट की आशंका जताते हुए पूर्व में भी नगर पालिका प्रशासन को पत्र के माध्यम से अवगत कराया गया था, लेकिन प्रशासन द्वारा समय रहते उचित व्यवस्था नहीं किए जाने के कारण आज पूरा बाँकीमोंगरा जल संकट से जूझ रहा है।
ज्ञापन में मांग की गई है कि टेपनल व्यवस्था को तत्काल दुरुस्त किया जाए, नियमित रूप से दिन में दो बार पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए तथा जब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो जाता, तब तक प्रभावित क्षेत्रों में टैंकरों के माध्यम से पेयजल उपलब्ध कराया जाए।
इंजीनियर शिव बर्मन ने पार्षदों को आश्वस्त किया कि टेपनल से जुड़ी तकनीकी समस्या का जल्द निराकरण किया जाएगा और जरूरतमंद क्षेत्रों में टैंकर के माध्यम से पानी उपलब्ध कराया जाएगा।

विपक्षी पार्षदों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो जनता के हित में उग्र आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी नगर पालिका प्रशासन की होगी।
इस दौरान पार्षद राकेश अग्रवाल, नवीन कुकरेजा, संदीप डहरिया, हेमंत शाहनी, राजकुमार मिश्रा, राजकुमारी बंसी दास, संतोष मिश्रा, नंदलाल सहित बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।
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